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30 सितंबर 2014

खजूर नर्वस सिस्टम को भी नियंत्रित करता है-

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आसानी से उपलब्ध खजूर आपके शरीर के नर्वस-सिस्टम को नियंत्रित 

करता है -इसमें पोटेशियम प्रचुर-मात्रा में होता है और सोडियम की मात्रा 

काफी कम होती है -



शोध में यह भी बात सामने आई है कि पोटाशियम स्ट्रोक के खतरे को कम करता है। शरीर में एलडीएल कोलेस्ट्राल स्तर कम करने में भी खजूर मददगार है। हालांकि डायबिटीज के रोगियों को खजूर से दूर रहना चाहिए।

खजूर कोलेस्ट्राल फ्री होता है। इसमें वसा बहुत ही कम मात्रा में होता है। खजूर में विटामिन्स और मिनरल्स की प्रचुर मात्रा पाई जाती है। खजूर प्रोटीन, फाइबर, विटामिन बी-वन, बी-टू, बी-थ्री और बी-फाइव का बेहतर स्रोत है। इसमें विटामिन ए-1 और सी भी मौजूद होता है। इसमें मौजूद फाइबर और विभिन्न तरह का एमिनो एसिड पाचन क्रिया दुरूस्त रखता है।

भागदौड़ भरी जिंदगी अक्सर हमें थका देती है। ऐसे में खजूर बढि़या एनर्जी बूस्टर है। इसमें मौजूद प्राकृतिक शुगर जैसे ग्लूकोज सुक्रोज और फ्रूकटोज तुरंत एनर्जी देने का काम करते हैं। खजूर के और भी बेहतर फायदे के लिए इसे दूध में मिलाकर ले सकते हैं। यह स्वादिष्ट स्नैक्स है। जो लोग स्वास्थ्य को लेकर ज्यादा जागरूक होते हैं, उनके लिए खजूर बढि़या विकल्प हैं। इसमें कैलरी की मात्रा बहुत कम होती है।

इसमें उच्च मात्रा में आयरन होता है, जो एनिमिया से लड़ने में मदद करता है। एनिमिया के मरीजों को प्रचुर मात्रा में खजूर खाना चाहिए।

बच्चों से लेकर बड़े तक दांत की समस्या से परेशान रहते हैं। #खजूर में मौजूद फ्लोराइड दांतों की रक्षा करता है। कब्ज से परेशान लोग इसका सेवन कर कब्ज से छुटकारा पा सकते हैं। ज्यादा फायदे के लिए खजूर को रात में पानी में भिगो दें और सुबह गुनगुने पानी के साथ खा लें।

मोटापे से परेशान लोग खजूर का सेवन सीमित मात्रा में करें। खजूर वजन बढ़ाने में मदद करता है। जो लोग बहुत ज्यादा पतले हैं उनके लिए खजूर फायदेमंद है।

खजूर शरीर में जहरीला प्रभाव कम करने में भी मदद करता है। साथ ही एबडामिनल #कैंसर से भी बचाता है और इसे ठीक करने में भी कारगर है।

नजर कमजोर है तो खजूर का इस्तेमाल कीजिए। यह आई साइट मजबूत करता है। #नाइट ब्लाइंडनेस (रतौंधी) जैसी परेशानी से भी निजात दिलाने में खजूर मददगार है।

29 सितंबर 2014

आर्थराइटिस और सभी तरह के ज्वाइंट पेन का इलाज है आप घुटने मत बदलिए -

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दोनों तरह के आर्थराइटिस (Osteoarthritis और Rheumatoid arthritis) मे आप एक दावा का प्रयोग करे जिसका नाम है चूना ...! जी हाँ वो ही चुना जो आप पान मे खाते हो | ये आसानी से आपको पान की सभी दुकानों में मिल जाता है आप इसे गेहूं के दाने के बराबर चूना  रोज सुबह खाली पेट एक कप दही मे मिलाके खाना चाहिए अगर बराबर दही न मिल सके  तो दाल मे मिलाके ले ले अगर वो भी नही तो पानी मे मिलाके पीना लगातार तिन महीने तक, तो आर्थराइटिस ठीक हो जाती है | ध्यान रहे पानी पिने के समय हमेशा बैठ के पीना चाहिए नही तो ठीक होने मे समय लगेगा | अगर आपके हाथ या पैर के हड्डी मे खट खट आवाज आती हो तो वो भी चुने से ठीक हो जायेगा |

* दोनों तरह के आर्थराइटिस के लिए और एक अच्छी दावा है मेथी का दाना | एक छोटा चम्मच मेथी का दाना एक काच की गिलास मे गरम पानी ले के उसमे डालना, फिर उसको रात भर भिगो के रखना | सबेरे उठके पानी सिप- सिप करके पीना और मेथी का दाना चबाके खाना | तीन  महीने तक लेने से आर्थराइटिस ठीक हो जाती है | यहाँ भी ध्यान रहे पानी पिने के समय हमेशा बैठ के पीना चाहिए नही तो ठीक होने मे समय लगेगा |

* ऐसे आर्थराइटिस के मरीज जो पूरी तरह बिस्तर पकड़ जुके है, चालीस  साल से तकलीफ है या तीस  साल से तकलीफ है, कोई कहेगा बीस साल से तकलीफ है, और ऐसी हालत हो सकती है के वे दो कदम भी न चल सके, हाथ  भी नही हिला सकते है, लेटे रहते है बेड पे, करवट भी नही बदल सकते ऐसी अवस्था हो गयी है ....?


* ऐसे रोगियों के लिए एक बहुत अच्छी  औषधि है जो इसीके लिए काम आती है | एक पेड़ होता है उसे हिंदी में हरसिंगार कहते है, संस्कृत पे पारिजात कहते है, बंगला में शिउली कहते है , उस पेड़ पर छोटे छोटे सफ़ेद फूल आते है, और फुल की डंडी नारंगी रंग की होती है, और उसमे खुसबू बहुत आती है, रात को फूल खिलते है और सुबह जमीन में गिर जाते है ।

* आप इस पेड़ के छह सात पत्ते तोड़ के पत्थर में पीस  के चटनी बनाइये और एक ग्लास पानी में इतना गरम करो के पानी आधा हो जाये फिर इसको ठंडा करके रोज सुबह खाली पेट पिलाना है जिसको भी बीस तीस या चालीस  साल पुराना आर्थराइटिस हो या जोड़ो का दर्द हो | यह उन सबके लिए अमृत की तरह काम करेगा | इसको तीन  महिना लगातार देना है अगर पूरी तरह ठीक नही हुआ ...तो फिर 10-15 दिन का गैप देके फिर से तीन  महीने देना है | 


* अधिकतम केस  मे जादा से जादा एक से ढेड महीने मे रोगी ठीक हो जाते है | आपको इसको हर रोज नया बना के पीना है | ये औषधि एक्सुसिव  है और बहुत स्ट्रोंग  औषधि है इसलिए अकेली ही  देना चाहिये, इसके साथ कोई भी दूसरी दावा न दे नही तो तकलीफ होगी | इसमें भी  ध्यान रहे पानी पिने के समय हमेशा बैठ के पीना चाहिए ....नही तो ठीक होने मे समय लगेगा | अगर पारिजात के पत्ते मिलने में परेशानी हो तो आप इसे नर्सरी से लाये और घर पे लगा ले आप का भला हो तो ये दूसरों के भी काम आएगा क्युकि ये परिजात के पेड को स्वर्ग की एक अनुपम धरोहर थी जो अब लुप्त हो रही है .

बुखार का दर्द का उपचार :-
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* डेंगू जैसे बुखार मे शरीर मे बहुत दर्द होता है .. बुखार चला जाता है पर कई बार दर्द नही जाता | ऐसे केस  मे आप हरसिंगार की पत्ते की काढ़ा  इस्तेमाल करे, दस -पन्द्रह दिन मे ठीक हो जायेगा |

घुटने मत बदलिए :-
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* RA Factor जिनका प्रोब्लेमाटिक है और डॉक्टर कहता है के इसके ठीक होने का कोई चांस नही है | कई बार कार्टिलेज पूरी तरह से ख़तम हो जाती है और डॉक्टर कहते है के अब कोई चांस नही है Knee Joints आपको replace करने हि पड़ेंगे, Hip joints आपको replace करने ही  पड़ेंगे | तो जिनके घुटने निकाल के नया लगाने की नौबत आ गयी हो, Hip joints निकालके नया लगाना पड़ रहा हो उन सबके लिए यह औषधि है जिसका नाम है हरसिंगार का काड़ा |

* राजीव भाई का कहना है के आप कभी भी Knee Joints को और Hip joints को replace मत कराइए | चाहे कितना भी अच्छा डॉक्टर आये और कितना भी बड़ा गारंटी दे पर कभी भी मत करिये | भगवान की जो बनाई हुई है आपको कोई भी दोबारा बनाके नही दे सकता | आपके पास जो है उसी रिपेयर करके काम चलाइए |

* हमारे देश के प्रधानमंत्री श्री अटलजी ने यह प्रयास किया था, Knee Joints का replace हुआ अमेरिका के एक बहुत बड़े डॉक्टर ने किया पर आज उनकी तकलीफ पहले से जादा है | पहले तो थोडा बहुत चल लेते थे अब चलना बिलकुल बंध हो गया है कुर्सी पे ले जाना पड़ता है | आप सोचिये जब प्रधानमंत्री के साथ यह हो सकता है आप तो आम आदमी है |

उपचार स्वास्थ्य और प्रयोग -http://upchaaraurpryog120.blogspot.in

28 सितंबर 2014

कुत्ता काटने पर चिकित्सा -

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अगर घरेलु कुत्ता काटे तो कोई दिक्कत नही है पर पागल कुत्ता कटे तोसमस्या है। सड़क वाला कुत्ता काटले तो आप जानते है नही उसकोइंजेक्शन दिए हुए है या नही, उसने काट लिया तो आप डॉक्टर के पासजायेंगे फिर वो 14 इंजेक्शन लगाएगा वो भी पेट में लगाता है, उससे बहुतदर्द होता है और खर्च भी हो जाता है कम से कम 50000 तक कई बार,गरीब आदमी के पास वो भी नही है ।





कुत्ता कभी भी काटे, पागल से पागल कुत्ता काटे, घबराइए मत, चिंतामत करिए बिलकुल ठीक होगा वो आदमी बस उसको एक दावा दे दीजिये। दावा का नाम है Hydrophobinum 200 और इसको 10-10 मिनट परजिव में तिन ड्रोप डालना है । कितना भी पागल कुत्ता काटे आप ये दावादे दीजिये और भूल जाइये के कोई इंजेक्शन देना है। इस दावा को सूरजकी धुप और रेफ्रीजिरेटर से बचाना है। 



रेबिस सिर्फ पागल कुत्ता काटने से ही होता है पर साधारण कुत्ता काटनेसे रेबिस नही होता। आवारा कुत्तों अगर काट दिया है तो राजीव भाई केअनुसार आप अपना मन का बहम दूर करने के लिए ये दावा दे सकते हैलेकिन उससे कुछ नही होता वो हमारा मन का बहम है जिससे हमपरिसान रहते है, और कुछ डर डॉक्टरों ने बिठा रखा है के इंजेक्शन तोलेना ही पड़ेगा। अपने शारीर में थोड़े बहुत resistance सबके पास हैअगर कुत्ते के काटने से उनके लार ग्रंथी के कुछ वायरस चले भी गये है तो उनको ख़तम करने के लिए हमारे रक्त में काफी कुछ है और वो ख़तम करहि लेता है । लेकिन क्योंकि मन में भय बिठा दिया है शंका हो जाती है हमको confirm नही होता जबतक 20000-50000 खर्च नही कर लेते येउस समय लिए राजीव भाई ने ये दावा लेने की बात कही है। और इसकाएक एक ड्रोप 10-10 मिनट में जीभ  पे तिन बार डाल के छोड़ दीजिये । 30मिनट में ये दावा सब काम कर देगा ।

कई बार कुत्ता घर के बच्चों से साथ खेल रहा होता है और गलती से उसका कोई दाँत लग गया तो आप उस जखम में थोडा हल्दी लगा दीजियेपर साबुन से उस जखम को बिलकुल मत धोये नही तो वो पक जायेगा;हल्दी Antibiotic, Antipyretic, Antititetanatic, Antiinflammatory है।

भाई राजीव दीक्षित द्वारा -

23 सितंबर 2014

Attention While Cooking -खाना बनाते समय ध्यान रक्खें

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Attention While Cooking

Attention While Cooking -खाना बनाते समय ध्यान रक्खें-

हम खाना पकाने में आयुर्वेदिक सिद्धांतों की पूरी तरह से अवहेलना कर देते हैं  जिसकी वजह से आज स्वास्थ्य सम्बन्धी कई समस्याएँ आ रही है अगर कोई ऐसी बिमारी है जो वर्षों से ठीक नहीं हो रही तो खाने में ये अवस्य ही आजमा कर देखे-

सूप बनाते समय उसमे दूध नहीं डाले(While putting milk soup)-

दही खट्टा(Sour Yogurt) हो तो उसमे दूध नहीं डाले-

ओट्स पकाते समय उसमे दूध दही साथ साथ न डाले -

चाय कॉफ़ी में शहद ना डाले-

पूरी , भटूरे , मिठाइयां डालडा घी में ना बना कर शुद्ध घी में बनाए-

नमकीन चावलों में , सब्जी की करी में दूध न डाले-

खट्टे फलों के साथ , फ्रूट सलाद में क्रीम या दूध न डाले-

दही बड़ा विरुद्ध आहार है-

4 बजे शाम के बाद केले , दही , शरबत , आइसक्रीम आदि का सेवन ना करे-

आटा लगाने के लिए दूध का इस्तेमाल ना करे-

गर्मियों में हरी मिर्च और सर्दियों में लाल मिर्च ला सेवन करे -

सुबह ठंडी तासीर की और शाम के बाद गर्म तासीर के खाने का सेवन करे-

पकौड़ों के साथ चाय या मिल्क शेक नहीं गरम कढ़ी ले -

फलों को सुबह नाश्ते के पहले खाए - किसी अन्य खाने के साथ मिलाकर ना ले .कच्चा सलाद भी खाने के पहले खा ले-

दही वाले रायते को हींग जीरे का तडका अवश्य लगाएं-

दाल में एक चम्मच घी अवश्य डाले-

खाली पेट पान का सेवन ना करे-

खाने के साथ सादा पानी नहीं ले-ज़्यादा पानी डाला छाछ या ज्यूस या सूप पियें-

अत्याधिक नमक और खट्टे पदार्थ सेहत के लिए ठीक नहीं है-

बघार लगाने में खूब हींग , जीरा , सौंफ , मेथीदाना , धनिया पावडर , अजवाइन आदि का प्रयोग करें-
Upcharऔर प्रयोग-

22 सितंबर 2014

वायु गैस या अफारा - Vaayu Gas Ya Afaara

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कभी-कभी भूख न लगना, गलत-खान पान और लापरवाही आदि के कारण पेट में दूषित वायु इकट्ठी हो जाती है, जो आध्यमान या अफारा को पैदा करती है, इसके परिणामस्वरूप पेट की नसों में खिंचाव महसूस होने लगता है। ऐसी अवस्था में मरीज बेचैन हो उठता है। पेट फूलने लगता है। जब यह गैस (अफारा) ऊपर की ओर बढ़ने लगती है तो हृदय पर दबाब बढ़ता है जिससे घबराहट सी महसूस होती है। यह गैस जब पेट में काफी समय तक रुक जाती है तो पेट में काफी दर्द करती है, जिसे अफारा या पेट में गैस का बनना कहते है-



उदर-वायु एक आम तथा कभी न कभी हर किसी को होने वाली समस्‍या है। पेट गैस को अधोवायु बोलते हैं। यह तब होती है जब शरीर में भारी मात्रा में गैस भर जाती है। इसे पेट में रोकने से कई बीमारियां हो सकती हैं, जैसे एसिडिटी, कब्ज, पेटदर्द, सिरदर्द, जी मिचलाना, बेचैनी आदि- 

अपनी ही भूल के कारण, खान-पान में अनियमितता करने के कारण हमारे पेट में बहुत गैस पैदा होने लगती है। यह बनकर निष्कासित होती रहे, तब तक तो तकलीफ नहीं होती मगर जब यह निकलने का नाम न ले और अफारा बना रहे, तब बड़ी ही कठिनाई होती है। असहनीय स्थिति से गुजरना पड़ता है। पेट में गैस बनने के कई कारण हो सकते हैं-

आध्यमान (अफारा) यानी (पेट में गैस का बनना) वायु के इकट्ठा होने से पेट के फूलने के कारण पेट में कब्ज़ पैदा हो जाती है। कब्ज के कारण जब आंतों में मल एकत्रित (इकट्ठा) होता है तो मल के सड़ने से दूषित वायु (गैस) की उत्पति होती है। दूषित वायु को जब कहीं से निकलने का रास्ता नहीं मिलता है तो उस दूषित वायु से पेट फूलने लगता है। इससे अग्निमांद्य (भूख का न लगना, अपच) और अतिसार (दस्त) आदि रोग उत्पन्न हो जाते हैं। चिकित्सकों के अनुसार अधिक मात्रा में भोजन करने, बाजारों में अधिक तेल-मिर्च, गर्म मसालों का सेवन करने से पाचन क्रिया की विकृति के साथ आध्यमान की बढ़ोत्तरी होती है।

कषैली, कड़वी, तीखी और रूक्ष (सूखा) वस्तुओं को खाने, खेद (दु:ख), अत्यन्त ठण्डे पदाथों का सेवन, अधिक संभोग के कारण वीर्य की कमी, मल-मूत्र के प्रेशर के रोकने से, चिंता, भय (डर), अधिक रक्तचाप (हाई ब्लड प्रेशर) से मांस क्षीण, अधिक उल्टी और दस्त के कारण अफारा हो जाता है। आमदोष और वृद्धावस्था से व्यक्तियों की नसों में वायु (गैस) भरकर दोषों को बढ़ाकर शरीर के अंगों को जकड़ कर दर्द पैदा हो जाने से यह विकार उत्पन्न हो जाता है।

बैक्टीरिया का पेट में ओवरप्रोडक्‍शन होना । 
जिस आहार में बहुत ज्‍यादा फाइबर होता है। 
मिर्च-मसाला, तली-भुनी चीजें ज्यादा खाने से। 

पाचन संबधी विकार-

बींस, राजमा, छोले, लोबिया, मोठ, उड़द की दाल, फास्ट फूड, ब्रेड और किसी-किसी को दूध या भूख से ज्यादा खाने से। खाने के साथ कोल्ड ड्रिंक लेने से क्‍योंकि इसमें गैसीय तत्व होते हैं। इसके साथ बासी खाना खाने से और खराब पानी पीने से भी गैस हो जाती है-

भोजन और परहेज-

छोटा अनाज, पुराना शालि चावल, रसोन, लहसुन, करेला फल, शिग्रु, पटोल के पत्ते, फल और बथुआ आदि आध्यमान (अफारा) से पीड़ित रोगी इन सभी का प्रयोग खाने में कर सकते हैं। बंदगोभी, कचालू, अरबी, भिण्डी और ठण्डी चीजें वायुकारक खाद्य पदार्थ हैं, जिसके सेवन करने से पेट में वायु बनती है और अफारा हो जाता है। चावल, राजमा, उड़द की दाल, दही, छाछ, लस्सी और मूली का प्रयोग न करें क्योंकि यह अफारा को अधिक कर देता है। अफारा होने पर कड़वे, तीखे, कषैले, सूखे और भारी अनाज (अन्न), तिल, शिम्बी मांसाहारी भोजन, अप्राकृतिक और विषम आसन, मैथुन, रात में जागना, व्यायाम और क्रोध (गुस्सा) आदि को छोड़ देना चाहिए। ऐसा करने से अफारा रोग होता है।

पेट में गैस बनने के घरेलू उपचार-

1/2 चम्‍मच सूखा अदरक पाउडर लें और उसमें एक चुटी हींग और सेंधा नमक मिला कर एक कप गरम पानी में डाल कर पीएं।

सोंठ का चूर्ण 3 ग्राम और एरण्ड का तेल 8 ग्राम सेवन करने से कब्ज के कारण होने वाला आध्यमान (अफारा) ठीक हो जाता है।

सोंठ का चूर्ण लगभग 1 ग्राम का चौथा भाग से लगभग 1 ग्राम भाग में कालानमक मिलाकर सुबह और शाम लेने से लाभ होता है।

सोंठ और कायफल को मिलाकर काढ़ा बनाकर पीने से गैस मिट जाती है।

भोजन के साथ सलाद के रूप में टमाटर का प्रतिदिन सेवन करना लाभप्रद होता है। यदि उस पर काला नमक डालकर खाया जाए तो लाभ अधिक मिलता है। पथरी के रोगी को कच्चे टमाटर का सेवन नहीं करना चाहिए।

कुछ ताजा अदरक स्‍लाइस की हुई नींबू के रस में भिगो कर भोजन के बाद चूसने से राहत मिलेगी।

पेट में या आंतों में ऐंठन होने पर एक छोटा चम्मच अजवाइन में थोड़ा नमक मिलाकर गर्म पानी में लेने पर लाभ मिलता है। बच्चों को अजवायन थोड़ी दें।

भोजन के एक घंटे बाद 1 चम्‍मच काली मिर्च, 1 चम्‍मच सूखी अदरक और 1 चम्‍मच इलायची के दानो को 1/2 चम्‍मच पानी के साथ मिला कर पिएं। * वायु समस्या होने पर हरड़ के चूर्ण को शहद के साथ मिक्स कर खाना चाहिए।

अजवायन, जीरा, छोटी हरड़ और काला नमक बराबर मात्रा में पीस लें। बड़ों के लिए दो से छह ग्राम, खाने के तुरंत बाद पानी से लें। बच्चों के लिए मात्रा कम कर दें।

अदरक के छोटे टुकड़े कर उस पर नमक छिड़क कर दिन में कई बार उसका सेवन करें। गैस परेशानी से छुटकारा मिलेगा, शरीर हलका होगा और भूख खुलकर लगेगी। 

पेट में वायु-गैस बनने की अवस्था में भोजन के बाद 125 ग्राम दही के मट्ठे में दो ग्राम अजवायन और आधा ग्राम काला नमक मिलाकर खाने से वायु-गैस मिटती है। सप्ताह-दो सप्ताह आवश्यकतानुसार दिन के भोजन के पश्चात लें। इससे वायु-गोला, अफारा के अतिरिक्त कब्ज भी दूर होती है।

तारपीन के तेल की 60 से 120 बूंद को साबुन के घोल में मिलाकर बस्ति (एक क्रिया जिसमें गुदा मार्ग से पानी डालते हैं) देने से पेट की गैस दूर हो जाती है।

बैंगन को अंगारों पर सेंककर उसमें सज्जीखार मिलाकर पेट पर बांधने से, पेट में भार हो गया हो तो वह दूर होता है।

बैंगन की सब्जी में ताजे लहसुन और हींग का छौंक लगाकर खाने से आध्यमान (अफारा, गैस) को होने से रोकता है।

पेट में गैस या अफारा यदि ज्यादा परेशानी का कारण बन जाए तो सूखे धनिये, इलायची और हल्दी का सेवन करने से इस समस्या से छुटकारा पाया जा सकता है।

गैस की समस्या को दूर करने के लिए त्रिफला सबसे अधिक अचूक दवा होती है। इससे गैस और अपच पेट के विकारों से काफी हद तक छुटकारा पाया जा सकता है। त्रिफाल का एक चम्मच चूर्ण गर्म पानी के साथ लें इससे गैस की समस्या दूर हो सकती है।

3 ग्राम कालीमिर्च और 6 ग्राम मिश्री को पीसकर फंकी के द्वारा लें और ऊपर से पानी पी लें।

गुड़ और मेथी दाना को उबालकर पीने से अफारा मिट जाता है।

मेथी 250 ग्राम और सोया 250 ग्राम को लेकर, दोनों को तवे पर सेंक लें, मोटा-मोटा कूटकर (अधकुटा) करके 5-5 ग्राम की मात्रा में सेवन करने से वायु, लार की अधिकता, अफारा (पेट में गैस का बनना), खट्टी हिचकियां और डकारें आने का कष्ट मिट जाता है।

क्या करे और क्या न करे-

वायु कम से कम बने, इसलिये आलू, चावल, तेल, मांस, शराब आदि का सेवन बंद कर दें।

भूखे मत रहें। पेट खाली रहेगा तो भी गैस बनेगी।

व्रत रखना एक अच्छा उपचार है। सात दिनों में केवल धा पौना दिन व्रत रखें।

पुदीना, अनारदाना, प्याज, धनिया आदि की चटनी जरूर लिया करें।

लहसुन, अदरक का प्रयोग अवश्य करें।

अपनी आदत बना लें कि एक गिलास गुनगुने पानी में नींबू निचोड़ कर प्रतिदिन पिया करें। उसके बाद ही शौच आदि जाएं।

जिन्हें कब्ज, भी रहता हो और हवा भी काफी बनती हो वे खाना खाने के बाद काला नमक, जीरा, नींबू मिलाकर खारा सोडा पी लें। उससे काफी आराम मिलेगा। आंतड़ियां साफ हो जाएगी।

जिन्हें पेट में अधिक हवा बनने की तकलीफ रहती हो, वे गर्मी के मौसम में तरबूज, खरबूजा तथा आम आदि को अधिक मात्रा में न खाएं। इनसे भी हवा बनती है।

भोजन पचेगा, पेट साफ रहेगा तो गैस कम बनेगी। हरे साग जैसे बथुआ, पालक, सरसों का साग खाएं। खीरा, ककड़ी, गाजर, चुकंदर भी इस रोग को शांत रखते हैं। इन्हें कच्चा खाना चाहिये।

नारियल का पानी दिन में तीन बार पियें। इससे सारा कष्ट मिट जाएगा।

खानो खाने के बाद आइसक्रीम खाना या ठंडे पेय पीना भी हानि करता है। ऐसे में ठंडा जूस पीना भी ठीक नहीं रहता।

यदि किसी को चाय या काफी की आदत हो तो यह भी नुकसान करती है। इस आदत को छोड़ना ही अच्छा है।

मैदे से बने पदार्थ या सुपरफाइन आटे की रोटी आसानी से नहीं पचती। वायु पैदा करते हैं। अत: मोटे चोकर युक्त आटे से या चना अथवा सोयाबीन मिले आटे की रोटी खाएं। यह जल्दी पचेगी भी और अफारा जैसी तकलीफें नहीं होगी। इस प्रकार यदि हम अपने खानपान में सुधार कर लें तो गैस बनने या अफारा होने की तकलीफ नहीं रहेगी।

तत्काल लाभ के लिए-

एक दो लहसुन की फांकें छीलकर बीज निकाली हुई मुनक्का में लपेटकर, भोजन करने के बाद, चबाकर निगल जाने से थोड़े समय में ही पेट में रुकी हवा निकल जायेगी। 

सर्दी के कारण सारा शरीर जकड़ गया हो और कमर दर्द हो तो वह भी जाता रहेगा .

उपचार और प्रयोग -

पेचिश नई या पुरानी-

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स्वच्छ सौंफ ३०० ग्राम और मिश्री ३०० ग्राम लें। सौंफ के दो बराबर हिस्से कर लें। एक हिस्सा तवे पर भून लें। भुनी हुई और बची हुई सौंफ लेकर बारीक पीस लें और उतनी ही मिश्री (पिसी हुई) मिला लें। इस चूर्ण को छः ग्राम (दो चम्मच) की मात्रा से दिन में चार बार खायें। ऊपर से दो घूँट पानी पी सकते हैं-





आंवयुक्त पेचिश - नयी या पुरानी (मरोड़ देकर थोडा-थोडा मल तथा आंव आना के लिए रामबाण है। सौंफ खाने से बस्ती-शूल या पीड़ा सहित आंव आना मिटता है।


curd rice या दही, भात, मिश्री के साथ खाने से आंव-मरोड़ी के दस्तों में आराम आता है।


methi या मैथी (शुष्क दाना) का साग बनाकर रोजाना खावें अथवा मैथी दाना का चूर्ण तीन ग्राम दही में मिलाकर सेवन करें। आंव की बिमारी में लाभ के अतिरिक्त इससे पेशाब का अधिक आना भी बन्द होता है।



प्रतिदिन मैथी का साग खाने से आंव की बिमारी अच्छी होती है। और पेशाब का अधिक आना बन्द होता है।