Linseed-अलसी पावर भी बढाती है

आधुनिक युग में कामोत्तेजना, यौन-इच्छा,बांझपन ,गर्भपात,चरम-आनंद विकार से लोग पीड़ित है और इन सभी परेशानियों से आपको निजात दिलाने के लिए Linseed-अलसी महान औषधि है अलसी(Linseed)आसानी से बाजार में उपलब्ध है ये आपको किसी भी आयुर्वेद दवा बेचने वाले पंसारी से या फिर आपको तिलहन अनाज बेचने वाले व्यापारी से मिल जायेगी आइये आज विस्तृत रूप से आपको अलसी के बारे में जानकारी देने का एक प्रयास करते है-

Linseed-अलसी


क्या लाभ है-

  1. सबसे पहले आप ये जान लें कि अलसी(Linseed) आपके जीवन साथी की त्वचा को कोमल,आकर्षक,बेदाग़,और गोरा भी बनाती है तथा आपके जीवन साथी के बाल को घने,काले,मजबूत,और रेशमी भी बनाती है -
  2. अलसी(Linseed)आज की आधुनिक युग की स्त्रियों की यौन-इच्छा, कामोत्तेजना, चरम-आनंद विकार, बांझपन, गर्भपात, दुग्धअल्पता की एक महान औषधि है-
  3. ये आपके शरीर का उर्जावान तथा मांसल बना देगी हमेशा शरीर में चुस्ती-फुर्ती बनी रहेगी और सबसे ख़ास बात अलसी आपके क्रोध को भी कम करती है आपका मन इसके कुछ दिन के प्रयोग से शांत होने लगेगा आपको थकावट नहीं महसूस होगी आपका शरीर दिव्यता को प्राप्त होने लगेगा आपकी नेचर सकारात्मक सोच की तरफ प्रेरित होने लगेगा-
  4. चूँकि अलसी(Linseed) में ओमेगा-3 फैट, आर्जिनीन, लिगनेन, सेलेनियम, जिंक और मेगनीशियम होते हैं जो स्त्री हार्मोन्स, टेस्टोस्टिरोन और फेरोमोन्स(आकर्षण के हार्मोन) के निर्माण के मूलभूत घटक हैं टेस्टोस्टिरोन आपकी कामेच्छा को चरम स्तर पर रखता है-
  5. अलसी को प्रेम, काम-पिपासा और लैंगिक संसर्ग के लिए आवश्यक सभी रसायनों जैसे-डोपामीन, नाइट्रिक ऑक्साइड, नोरइपिनेफ्रीन, ऑक्सिटोसिन, सीरोटोनिन, टेस्टोस्टिरोन और फेरोमोन्स का प्रमुख घटक है स्त्रियों की सभी लैंगिक समस्याओं(Sexual Problems)के सारे उपचारों से सर्वश्रेष्ठ और सुरक्षित है-
  6. आपको बता दे कि अलसी(Linseed) में विद्यमान ओमेगा-3 फैट(Omega-3 Fat)और लिगनेन(Lignen)आपकी जननेन्द्रियों में रक्त के प्रवाह को बढ़ाती हैं जिससेकिसी भी मनुष्य की कामोत्तेजना बढ़ती है-
  7. अलसी(Linseed)आपकी शिथिल पड़ी क्षतिग्रस्त नाड़ियों का कायाकल्प करती हैं जिससे मस्तिष्क और जननेन्द्रियों के बीच सूचनाओं एवं संवेदनाओं का प्रवाह दुरुस्त हो जाता है नाड़ियों को स्वस्थ रखने में अलसी में विद्यमान लेसीथिन, विटामिन बी ग्रुप, बीटा केरोटीन, फोलेट, कॉपर आदि की महत्वपूर्ण भूमिका होती है-
  8. यदि आपको कब्ज(constipation)की शिकायत रहती है तो कब्ज को बाय-बाय कहने के लिए अलसी के बीज का मिक्सर में पावडर बना लें तथा एक गिलास पानी मे 20 ग्राम के करीब यह पावडर डालें और 3-4 घन्टे तक फूलने के बाद अलसी(Linseed)कपडे में छानकर इसका पानी पी जाएं ये बेहद ही कब्ज का उपकारी ईलाज है-
  9. अलसी के दानों के साथ दो अखरोट(Walnut)की मींगी को मिलकर सेवन करने से आपको जोड़ों के दर्द(joint pain) में भी आराम मिलता है-
  10. अलसी बीज(Linseed seeds)में चूँकि ओमेगा -3 फैटी एसिड होता है जो आपके शरीर की इंसुलिन के स्तर को भी नियंत्रण करता है तथा साथ में वसा को जलाने का काम भी करता है तथा फीटोएस्ट्रोजन्स भी उपस्थित होता है जो शरीर में हार्मोनल असंतुलन(Hormonal imbalance)से बचाने का काम बखूबी तो करता ही है साथ में बेमतलब का वजन को बढ़ावा देने वाले कारणों को भी रोकता है चूँकि अलसी के बीज में फाइबर,आयरन और प्रोटीन भरपूर मात्रा में होते है जिसकी वजह से आपको अधिक खाने की जरूरत नही होती और कम मात्रा में खाने पर भी आप की भूख को बहुत जल्दी शांत करती है इसलिए मोटापे से परेशान लोगों को इसका उपयोग अवश्य करना चाहिए बस जादू नहीं धैर्य की आवश्यकता होगी-
  11. अलसी(Linseed)के दानों में बहुत सारा प्रोटीन और फाइबर पाया जाता है यदि आप बॉडी बिल्‍डिंग का शौक रखते है तो शारीरिक गतिविधी बढाने के लिये यह जरुर खाएं-
  12. जिन महिलाओं या लडकियों के स्तन छोटे(small breasts) और अविकिसित है उनके लिए अलसी के बीज का सेवन स्तनों की वृद्धि में बहुत मददगार होता है आप इसे स्तनों की शीघ्र वृद्धि के लिए आहार के रूप में अवश्य शामिल करें-
  13. अलसी श्वास नलियों और फेफड़ों में जमे कफ को निकाल कर दमा और खांसी में राहत देती है तथा अलसी की पुल्टिस का प्रयोग गले एवं छाती के दर्द, सूजन तथा निमोनिया और पसलियों के दर्द में लगाकर किया जाता है यह चोट, मोच, जोड़ों की सूजन, शरीर में कहीं गांठ या फोड़ा उठने पर लगाने से शीघ्र लाभ पहुंचाती है-
  14. अलसी के बीजों का मिक्सी में बनाया गया दरदरा चूर्ण पंद्रह ग्राम, मुलेठी पांच ग्राम, मिश्री बीस ग्राम, आधे नींबू के रस को उबलते हुए तीन सौ ग्राम पानी में डालकर बर्तन को ढक दें-तीन घंटे बाद छानकर पीएं- इससे गले व श्वास नली का कफ पिघल कर जल्दी बाहर निकल जाएगा और मूत्र भी खुलकर आने लगेगा-
  15. अलसी के तेल(Linseed oil) का धुआं सूंघने से नाक में जमा कफ निकल आता है और पुराने जुकाम में लाभ होता है यह धुआं हिस्टीरिया रोग में भी गुण दर्शाता है-
  16. अलसी के तेल(Linseed oil)और चूने के पानी(Lime water) का इमल्सन आग से जलने के घाव पर लगाने से घाव बिगड़ता नहीं और जल्दी भरता है-
  17. अलसी को कोल्हू से दबाकर निकाले गए(Cold Processed) तेल को फ्रिज में एयर टाइट बोतल में रखें इसका तेल स्नायु रोगों, कमर एवं घुटनों के दर्द में लाभकारी है आप इस तेल की 15मि.ली. मात्रा सुबह-शाम लें  इसे पीने से काफी लाभ मिलेगा-
  18. अलसी की बड़ी मात्रा विरेचक तथा छोटी मात्रा गुर्दो को उत्तेजना प्रदान कर मूत्र निष्कासक है यह पथरी, मूत्र शर्करा और कष्ट से मूत्र आने पर गुणकारी है-
  19. अलसी कई असाध्य रोग जैसे अस्थमा, एल्ज़ीमर्स, मल्टीपल स्कीरोसिस, डिप्रेशन, पार्किनसन्स, ल्यूपस नेफ्राइटिस, एड्स, स्वाइन फ्लू आदि का भी उपचार करती है अलसी कभी-कभी चश्में से भी मुक्ति दिला देती है आपकी दृष्टि को स्पष्ट बना देती है-
  20. अलसी के सेवन से जबरजस्त अश्वतुल्य स्तंभन होता है जब तक मन न भरे सम्भोग का दौर चलता है देह के सारे चक्र खुल जाते हैं पूरे शरीर में दैविक ऊर्जा का प्रवाह होता है और सम्भोग एक यांत्रिक क्रीड़ा न रह कर बल्कि एक आध्यात्मिक उत्सव बन जाता है समाधि का रूप बन जाता है ये बात सिर्फ वो लोग समझ सकते है जो योगी है जहाँ रतिक्रीड़ा तो अवश्य होती है लेकिन वीर्यपतन नहीं होता है जो चक्र भेदन द्वारा समाधि प्राप्त करते है-
  21. आगे क्या लिखे इसके कितने गुण है अगर हम लिखते रहे तो मुझे बहुत समय लग जाएगा मगर इसकी विशेषता खत्म नहीं होगी ये ईश्वर ने हमें वरदान स्वरूप दिया है इसलिए हर किसी को किसी न किसी रूप में अलसी का सेवन अवश्य करना चाहिए-

अलसी सेवन का तरीका-

  1. प्रतिदिन 30 से 60 ग्राम अलसी का सेवन करना चाहिये-30 ग्राम भी एक आदर्श मात्रा है अलसी को रोज मिक्सी के ड्राई ग्राइंडर में पीसकर आटे में मिलाकर रोटी, पराँठा आदि बनाकर खाना चाहिये डायबिटीज के रोगी सुबह शाम अलसी की रोटी खायें- कैंसर में बुडविग आहार-विहार की पालना पूरी श्रद्धा और पूर्णता से करना चाहिये- इससे ब्रेड, केक, कुकीज, आइसक्रीम, चटनियाँ, लड्डू आदि स्वादिष्ट व्यंजन भी बनाये जाते हैं-
  2. दूसरा एक तरीका है कि आप अलसी को सूखी कढ़ाई में डालिये और रोस्ट कीजिये (अलसी रोस्ट करते समय चट चट की आवाज करती है) और मिक्सी से पीस लीजिये आप इन्हें थोड़े दरदरे पीसिये एकदम बारीक मत कीजिये-भोजन के बाद सौंफ की तरह इसे खाया जा सकता है लेकिन आप इसे जादा मात्रा में बना के न रक्खे क्युकि ये खराब हो जाती है इसे एक हफ्ते के लिए बनाना ही चाहिए-
  3. अभी पोस्ट बहुत लम्बी हो जायेगी मगर इसके बारे में और भी लिखेगें ताकि आपको इसके और भी लाभ पता हो सकें आगामी पोस्ट अलसी की इंतज़ार करे-अलसी एक फीलगुड फूड भी है-
  4. और भी देखे-

Upcharऔर प्रयोग-
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