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                                                    ” युक्ताहार विहारस्य युक्त चेष्टस्य कर्मणा
                                                      युक्त स्व्प्ना व्बोधस्य योगो भवति दु:खहा !!”


प्रकृति ने फ़ल फ़ूल , अन्न , मसाले , शाक सब्जी , दूध दही घी , मठा , जड़ी बूटी सभी कुछ तो स्वस्थ रहने के लिए दिया है . अनके सेवन से शरीर पौष्टिक बनता है वरन इन में ओषिधिगुण भी हैं , जैसे हल्दी , सरसों के तेल व सैंधा नमक के सेवन से दांतों के रोग होने की संभावना घट जाती है , उसी तरह इमली के प्रयोग से विशेष कर गर्मियों में लू , आदि का प्रकोप नहीं रहता .


जिसका आहार अर्थात खानपान नियमित है और जो प्रतिदिन विहार नियमपूर्वक करता है यानि जागना ,उठना ,बैठना ,टहलना और निद्रा नियम्पूर्वक हैं तब वह व्यक्ति स्वस्थ अर्थात निरोग रहेगा


कारपोरेट कर्मियों एवं कई सरकारी अधिकारियों पर काम का बोझ इतना ज्यादा है कि काम की पारी ( समय ) अथवा माहोल नके रुचि के अनुकूल नहीं हैं रात रात भर जागकर काम करना पड़ता है . अन्यथा हालत में खाने का कोई समय नहीं हैं इन सब से स्वास्थ्य संबंधी विकार और गड़बड़ैया उत्पन्न हो रही हैं .


हम आज के सम जब कि मिलावट का काफ़ी जोर है फ़ास्ट फ़ूड एसे बिक रहे है हैं जिनकी गुणवत्त संदेह की दायरे में हैं, ढाबों पर आटे की मनमाफ़िक सिकी रोटी नहीं मिलती ..


आज हम आपके साथ इन्हीं सब बातों का विश्लेषण इस लेख में करेंगे-


कुछ बातें तो एसी हैं जिनका जानना पूरे परिवार के लिए जरूरी है-


जैसे गर्म पेय लेने के बाद आधे घंटे तक ठंडा न लें . अदल बदल कर गरम और ठंडा तरा ऊपर न लें तरबूज खरबूज एवं आइस्क्रीम के तुरन्त बाद पानी न पिएं .खरबूजे का संग शरबत से है इसलिए मेहमानों को कभी भी इसके साथ चाय सर्व न करें .


बहुत से व्यक्तियों को सुपारी से खासी एलर्जी होती है इसलिए उनको पूछ लेना चाहिए .


शादी ब्याह्के अवसर पर आइस्क्रीम , गरम पेय और पथ्य कुपथ्य का लोग ध्यान नहीं रखते फ़लत: पेट के कई प्रकार के रोग उनके गले पड़ जाते हैं . जैसे तंबाकू या गुटका खाने से गले या मुंह का केन्सर हो सकता है लेकिन लोग अनसुना करते रहते हैं कई बार तो अति- भोज overeatng कर लेते हैं और सदा के लिए पेट के विकार लेते हैं .


सेकरीन ठंडे पेय आदि में तो मीठी लगती है लेकिन गरम पेय जैसे खीर में इसे डाला जाए तो यह नुकसान-देह है


उड़द की दाल ज्यादा खा लेने पर यदि आपने उसके उपर से देशी घी दे दिया तो यह भी बहुत नुकसान- देह है.


कटहल की सब्जी खा लेने के बाद पान चबाना भी कई या प्राय: नुकसान-देह होता है


शहद और घी को मिलाना ही पड़ जाए तो याद रखें कि यह सदैव विषम मात्रा में होना चाहिए . सम मात्रा में यह जहर बन जाता है

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तांबे के पात्र में खट्टी चीज ज्यादा देर न रखें यदि सब्जी बनाई है तो सब्जी के बन जाने पर उसे दूसरे पात्र में बदल दें , चूकि ये अपनी तासीर कुछ देर में ही बदलना शुरू कर देते हैं.


वर्षा के मौसम में जल मिलाकर सत्तू खाना, ओस गिर रही हो उस जगह सोना नदी के पानी में नहाना और धूप का सेवन त्याज्य बताए गए हैं .


गरमियों में यदि आलू बना ही रहे हैं तो उसमें सौंफ़ डाल लें जिससे उसकी गर तासीर थोड़ी ठंडी पड़ जाए.


जाड़े के दिनों में सब्जियों में सौंठ का प्रयोग करें .


हर घर में गेहूं के साथ निश्चित मात्रा में चना , मटर या जौ का आटा अवश्य मिलाएं ताकि यह कोई हानि न करे. साथ ही ध्यान रहे शरीर में यदि प्रोटीन की मात्रा ज्यादा लें गे और उसके सम अनुपात में केल्शियम नहीं लेंगे तो ये असंतुलन हड्डियों को कमज़ोर करेगा .


जाड़ों में बाजरा खुर्ती की फ़ली का सेवन फ़ायदेमंद बताया गया है .गरमियों में आप आम का पना , आम की चटनी बना सकते हैं जो कि सब के लिए गुणकारी होती है शायद ही कोई करे


कभी कभार रेस्टोरेन्ट में अनायस सब्जी आदि में कीड़ा छिपकली गिर जाते है तो जब भी खाना खाएं पूरी तन्मयता से आंख खोलकर मन से खाएं .इसमें कोई जल्दबाजी न करें


अतिभोज बदहजमी,मोटापा , शिठिलता को जन्म देता है . जिनके जोड़ों में दर्द रहता है उन्हें बादी और ठंडी चीजों से परहेज करना चाहिए .


ज्यादामात्रा में चूर्ण लेने से भी अजीर्ण होता है .

कुछ टिप्स इस प्रकार हैं:-

1- बाहर से आएं तो साबुन से हाथ स्वच्छ करें

2- कभी भी बासी , एवं ज्यादा देर से रखा भोजन न करें

3- जिन खाने की चीजों पर फ़फ़ूंद लगी हो उनको न खाएं

4- किचन में कोकरोच से मुक्ति पाने के लिए बोरिक पाउडर छिड़कें

5- नीलाथोथा व तूतिया का छिड़काव भी कर सकते हैं

6- इधर उधर लगे जाले भी हटाएं

7- किचन की नाली में खाद्य पदार्थों के अवशिष्ट न डालें , यदि वे उस स्थान पर सड़े तो अस्वच्छ कारी वातावरण होगा

8 -बरतन अच्छी तरह से साफ़ किए हुए हों

9- बाज़ार से रोटी व सब्जी अगर खरीद भी लाए हैं तो घर आकर तेज आंच पर उन्हें दोबारा जरूर पका लें .

10-तांबे /स्टील /एल्यूमियम की कड़ाही में तैयार सब्जी पक जाने पर उसे दूसरे बरतन में तुरन्त बदल लें .

11-दिन में आमतौर पर सोना ठीक नहीं माना गया है .

12-नशे की लत से दूर रहें

13-जाड़ों में तेल मालिश जरूर करें , साप्ताहिक आदि रूप से .

14-भोजन पेट में पच जाए तभी खाना खाएं नहीं तो यह पाचन न हुआ तो पेट में सड़कर वायु विकार पैदा करेगा .

15-अजीर्ण की अवस्था में ( सौंफ़ +जीरा+काला नमक आधा चुटकी लें ).शरीर में वात, पित्त और कफ़ सम होने चाहिए . तीनों एक सथ अनियंत्रित होंगे तो सन्निपात जैसी स्थिती हो सकती है , अगर एक दो कम ज्यादा या बिगड़े तो अन्य रोग होंगे .

16-आयु अधिक होने पर तेल का प्रयोग फ़ेफ़ड़े में जमकर ( संदूषित पदार्थ ) रुकावट पैदा करेंगे फ़लत: सिस्टोलिक रक्तचाप कम होगाइस तरह हर्ट फ़ेल्योर (दिल के रुकने , दौरा पड़ने ) की संभावना बढ जाएगी .चयापचय ( मेटाबोलिज्म )अस्त व्यस्त होकर जरूरी मात्रा मेंप्रोटीन ( अमीनो असिड्स)नहीं बने तो चिड़चिड़ापन और कमजोरी बढ जाती हैं इस्में कुलेखरा या जवारे का रस फ़ायदा पहुंचाता है .

17-प्रात:काल ब्राह्म मुहुर्त में जगकर शुद्ध वायु का सेवन करें .

18-शरीर से बलिष्ठ होने के साथ आप मन से मजबूत हों .यह तभी संभव है जब सोच विचार , prudence , temperence fortitude and justice से नेक होंगे इस तरह सत्य और सत्मार्ग पर प्रवृत्त होने पर मन हल्का रहेगा और मन क्सी बोझ के तले नहीं होगा , फ़लत: प्रफ़ुल्लित रहेगा .


वातावरण में मौजूद तमाम बैक्टीरिया और वायरस को हम साँस के जरिये रोजाना अन्दर लेते रहते हैं, लेकिन ये बैक्टीरिया हमें निकसान नहीं पहुंचाते. क्यों? क्योंकि हमारा प्रतिरोधक तंत्र इनसे हरदम लड़ता रहता है। और इन्हें पस्त करता रहता है। लेकिन कईं बार जब हम इन बहरी कीटाणुओं की ताकत बढ़ जाती है तो ये शरीर के प्रतिरोधक तंत्र को बेध देते हैं। जिससे गला ख़राब होना, जुकाम और ज्यादा तेज हमला हो गया है तो कभी-कभी फ्लू, बुखार आदि। जुकाम व सर्दी इस बात का संकेत है कि आपका प्रतिरोधक तंत्र कीटाणुओं को रोक पाने में कामयाब हो गया है।


कुछ दिन में आप ठीक हो जाते है। इसका अर्थ है की तंत्र ने फिर से जोर लगाया और घर कर रहे कीटाणुओं को हरा दीया। अगर प्रतिरोधक तंत्र ने दोबारा जोर न लगाया होता तो मरीज को जुकाम व सर्दी से कभी रहत न मिलती। इसी तरह कुछ लोगों को खास वस्तु या वातावरण से एलर्जी होती है और अन्य को उसी वास्तु से नहीं होती। इसका कारन है की जिसको एलर्जी है, उसका प्रतिरोधक तंत्र उस वास्तु पर रिऎक्शन कर रहा है, जबकि अन्य व्यक्तियों का तंत्र उस वास्तु के लिए सामान्य व्यव्हार करता है। इसी तरह डायबिटीज में भी प्रतिरोधक तंत्र पैनक्रियज में मौजूद सेल्स को गलत तरीके से मारने लगता है।


ज्यादातर लोगों में बिमारियों की मुख्या वजह वायरल और बैक्टीरियल इन्फेक्शन होता है। इनकी वजह से खांसी-जुकाम से लेकर खसरा, मलेरिया और एड्स जैसे रोग हो सकते हैं। ऐसी इन्फेक्शन से शारीर की रक्षा करने का काम ही करता है इम्यून सिस्टम।


इम्युनिटी बढाने के तरीके:-
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रोग प्रतिरोधक क्षमता के बारे में सबसे ख़ास बात यह है कि इसका निर्माण शरीर खुद कर लेता है। ऐसा नहीं है की आपने बहार से कोई चीज खायी और उसने जाकर सीधे आपकी प्रतिरोधक क्षमता में इजाफा कर दिया।इसीलिए ऐसी सभी चीजें जो सेहतमंद खाने में आती है, उन्हें इस्तेमाल में लेना चाहिए। इनकी मदद से शरीर इस काबिल बना रहता है कि वह खुद अपनी प्रतिरोधक क्षमता विकसित कर सके।


अगर खानपान सही है तो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ने के लिए किसी दवा या अतिरिक्त कोशिश की आवश्यकता नहीं है। आयुर्वेद के मुताबिक कोई भी खाना जो आपके ओज में वृद्धी करता है, रोग प्रतिरोधक क्षमता बढाने में मददगार है। जो खाना अम्ल बढ़ता है, वह नुकसानदायक है। ओज से खाने के पूरी तरह से पच जाने के बाद सेहत और रोग प्रतिरोधक क्षमता का विकास होता है. पचने में मुश्किल खाना खाने के बाद शरीर में अम्ल का निर्माण होता है जो शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को कम करता है.


खानपान में सबसे अधिक ध्यान इस बात का रखे कि भूलकर भी वातावरण की प्रकृति के खिलाफ न जाएँ। उदहारण के तौर पर सर्दी में अधिक आइसक्रीम नुक्सान पहुंचा सकती है।


बाज़ार में मिलने वाले फ़ूड सप्लीमेंट उन्ही के लिए है जिनकी जुबान उनके काबू में नहीं है और जुबान के बस होकर वे कुछ भी खा लेते हैं। खाने में सलाद न लेना, वक्त पर खाना न खाना, उचित भोजन की अपेक्षा जंक फ़ूड व भारी खाना करना पसंद करना। वे अपनी शारीर की आवश्कता को समझ नहीं पाते। ऐसे ही लोगों के लिए फ़ूड सप्लीमेंट बनाये गए हैं।


अगर कोई शख्स खाने में विभिन्नता जैसे की सलाद, दालें, हरी सब्जियां आदि इस्तेमाल करता है तो उसे दवाओं की भी आवश्यकता कम पड़ेगी और सप्लीमेंट्स की भी। समुचित दुनिया में ऐसा कोई सप्लीमेंट नहीं है जो ऐसा दावा कर सके कि वह हर जरुरत पूरी करता है। मल्टी विटामिन्स के लिए हमें अपने खाने में विभिन्नता लानी आवश्यक है। तभी शरीर की प्रतिरोधक क्षमता सयमित होगी। इसके लिए प्राकृतिक खानपान ही सबसे बेहतर और कारगर तरीका है।


प्रोसेस्ड और पैक खाने की वस्तुओं से जितना हो सके, बचना चाहिए। ऐसी वस्तुएं जिनमें प्रिजर्वेटिव्स मिले हों, उनसे भी बचना चाहिए।


इम्यूनिटी बढ़ने के लिए विटामिन सी और बिता कैरोटिस बढ़िया है जो कि मौसमी और निम्बू संतरे आदि से प्राप्त होता है।


जिंक के लिए सीफ़ूड और ड्राई फ्रूट्स का इस्तेमाल करें।

विटामिन के लिए फल और हरी सब्जियां है।

दही व आचार एक साथ न खाए।

आचार जैसी तली पुरानी चीजों का परहेज करें ये शरीर में पानी रोकती है।

सिरका संतुलित ही इस्तेमाल करें। जहाँ सिरका पेट ठीक रखने में सहयोगी है वही त्वचा के लिए नुकसानदायक भी हो सकता है।

ठण्ड में शरीर को एक्सपोज़ न करें, इससे शरीर से आवश्यकता की गर्मी भी निकल जाती है। जिससे प्रतिरोधक क्षमता कम होती है.

स्ट्रेस लेने से भी जल्दी वायरल इन्फेक्शन होता है।

बंद कमरों में रहने से, अधिक लोगों के बीच सांस लेने से भी इन्फेक्शन फैलता है। यदि वातावरण स्वच्छ हो तो खुली जगह पर लम्बे सांस लेने से भी प्रतिरोधक क्षमता बढती है।

क्या है फायदेमंद:-
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ग्रीन टी - इसमें एंटी ओक्सिडेंट होते हैं जो कईं तरह के कैंसर से बचाव करते हैं। यह छोटी आंत में पैदा होने वाले गंदे बैक्टीरिया को पनपने से रोकती है।

हरी मिर्च उपापचय बेहतर बनाती है इसमें बीटा कैरोटिन होता है।

दालचीनी से ब्लड क्लौटिंग रूकती है। ब्लड शुगर में सहायक है।

शकरकंद, अंजीर व मशरूम आदि खाने में इस्तेमाल से भी अनेकों फायदे हैं।


उपचार स्वास्थ्य और प्रयोग-
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