ब्लडप्रेशर असामान्य हो तो बचे

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* सेक्स करना हेल्थ के लिए तो अच्छा ही है इसके अलावा सेक्स पति-पत्नी के रिश्तों को गहरा करने में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि सेक्स के समय स्ट्रेसफुल रहने से आपको फायदे के बजाय नुकसान हो सकता है। सिर्फ तनाव ही नहीं बल्कि ब्ल्डप्रेशर असामान्‍य हो तो ना करें सेक्स अन्यथा आपको कई समस्याएं हो सकती हैं। 

* हाई बीपी में सेक्स करने के बजाय हाई बीपी में नमक का उपयोग कर उसे कम करना चाहिए। ताकि आपका ब्ल्डप्रेशर सामान्य हो सकें। आइए जानें क्यों ना करें असामान्य ब्लडप्रेशर के दौरान सेक्स।

* आमतौर पर सेक्स के दौरान हृदयगति और रक्तचाप बढ़ जाता है, ऐसे में यदि आपका ब्ल्डप्रेशर पहले से ही बढ़ा होगा तो आपके लिए ये खतरा बन सकता हैं।


* उच्च‍ रक्तचाप के दौरान सेक्स करने से एंजाइना,हार्ट अटैक व पैरालिसिस जैसी गंभीर बीमारियां होने की आशंका बढ़ जाती है।



* ये तो सभी जानते हैं कि रक्तचाप कभी भी सामान्य नहीं रहता। तनाव के समय में आपका रक्तचाप ऊपर-नीचे होता रहता हैं। जब आप आराम की स्थिति में होते हैं तो आपका रक्तचाप सामान्य रहता है। ऐसे में आपको समय-समय पर अपना ब्लडप्रेशर चेक कराते रहना चाहिए।


* उच्च रक्तचाप के दौरान आपकी हर काम में ऊर्जा ज्यादा लगती है। जिसका सीधा असर आपके हृदय पर पड़ता है और हृदय का आकार धीरे-धीरे बढ़ने लगता है।


* हार्ट फेल्योर होना, एंजाइना की समस्या, हार्टअटैक इत्यादि की आशंका भी इसी कारण से बढ़ जाती है, ऐसे में आप संभोग करेंगे तो आपको जान का जोखिम भी बढ़ सकता है।


* कई लोगों को उच्च रक्तचाप होने से कई यौन समस्याएं भी हो सकती हैं, ऐसे में आपको सेक्स करने से बचना चाहिए और रक्तचाप को सामान्य करना चाहिए।


* उच्च रक्तचाप से पीडि़त लोगों को पति-पत्नी के अतिरिक्त अन्य से सेक्स रिलेशन नहीं बनाने चाहिए। ऐसा करने पर उत्तेजना और तनाव से रक्त चाप बहुत बढ़ सकता है और आप कई भयंकर बीमारियों की चपेट में आ सकते हों।


* यह तो आप जानते ही हैं कि सेक्स के दौरान बहुत कैलोरी बर्न होती है जिससे शरीर में कैलोरी की जरूरत बढ़ जाती है। कैलोरी की जरूरत को पूरा करने के दौरान आपकी अधिक एनर्जी लगती है ओर आपकी हृदयगति 150 से 180 तक भी आराम से पहुंच जाती है। हालांकि सेक्स के बाद आपकी हृदयगति वापिस सामान्य हो जाती है।


* उच्च रक्तचाप से न सिर्फ आप मानसिक तनाव से ग्रस्त होते हैं बल्कि आप सेक्स में अरूचि और घबराहट जैसी समस्याओं से भी घिर जाते हैं जिस कारण क्रोध में आपके आपसी रिश्ते खराब होने का डर रहता है।


* उच्च रक्तचाप की दवाईयां लेने वाले मरीजों की भी सेक्स क्षमता कम होने लगती है और ऐसे में उच्च रक्तचाप के दौरान वे सेक्स करते हैं तो उन्हें निराशा हाथ लगने का डर भी रहता है।



ब्लडप्रेशर-शुगर मापने वाला सस्ता टैबलेट:-
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भारत में ब्लड प्रेशर का टेस्ट हो या शुगर का टेस्ट हो कोई काम आसान नहीं है। वक़्त गंवाइए, अस्पताल के चक्कर लगाइए, कम्पाउंडर को मक्खन लगाइए या फिर ढेर सारा पैसा खर्च कीजिए। 

* लेकिन अब इन सबको अलविदा कहने का वक्त आ गया है। अब देश में एक ऐसा टैबलेट यानी मोबाइल यंत्र आ गया है जो कुछ ही मिनटों में ये सारे टेस्ट कर देगा और वो भी वाजिब कीमत पर आपके घर आकर। 

* शायद आपको यक़ीन न हो लेकिन हर टेस्ट में खर्च आता है सिर्फ़ 50 रुपए। इस यंत्र को 'स्वास्थ्य स्लेट' का नाम दिया गया है और ये किसी भी आईपैड या टैबलेट जैसा ही होता है। बस अंतर इतना है कि इसमें मेडिकल परीक्षणों से जुड़े कुछ यंत्र लगाए गए हैं।

* टैबलेट के ज़रिए न केवल दूर गांवों तक मेडिकल टेस्ट की सुविधा पहुंचाई जा सकती है बल्कि इसके आकड़ों को लंबे समय तक एक डाटा बैंक में सुरक्षित रखा जा सकता है। जब चाहें जहां चाहें एक नंबर के ज़रिए आप ये डाटा अपने लिए मुफ्त में इस्तेमाल कर सकते हैं।

क्या-क्या जांच हो सकती है......

डायबिटीज़ टेस्ट :- मधुमेह की जानकारी सही समय पर मिल सकती है।

ब्लड प्रेशर :- भारत में एक आम बीमारी लेकिन अधिकांश रोगी इससे अनजान।

ईकोकार्डियोग्राम या ईसीजी:- हृदय की बीमारियों को आरंभिक चरण में पकड़ने के लिए मददगार

हार्ट रेट :- एक मिनट में दिल के धड़कने की रफ़्तार। अगर यह तो असामान्य है तो डॉक्टरी सलाह की ज़रूरत है।

पानी की गुणवत्ता की जांच :- इस मशीन से यह पता लगाया जा सकता है कि उपलब्ध पानी पीने योग्य है या नहीं।

लेकिन ये कमाल का आइडिया है किसका। ये मोबाइल मेडिकल यंत्र बनाया है कानव कहोल ने। कानव पेशे से बायो इन्फॉर्मेटिक्स इंजीनियर हैं औऱ अमरीका में लंबे समय तक काम कर चुके हैं

कानव ने अमरीका में एरिज़ोना यूनिवर्सिटी में लंबे समय तक पढ़ाने का काम किया और फिर उन्होंने सोचा कि क्यों न देश वापस लौटा जाए और कुछ नया किया जाए।

आते ही दिल्ली के पांच अस्पतालों में से किसी में भी डॉक्टरों से समय नहीं मिल पाना उनके लिए बहुत प्रेरणादायी रहा। वो कहते हैं, ''मैं एक आम मरीज़ की तरह दिल्ली के पांच अस्पतालों एम्स, गंगाराम, फोर्टिस, तिब्बिया कॉलेज और मौलाना आज़ाद में डॉक्टर को दिखाने गया। 

एम्स में मुझे चार दिन तो केवल पर्चा बनवाने में लगे और डॉक्टर के पास स्टूल पर मुझे केवल 45 सेकण्ड का वक़्त मिला। बाकि जगहों पर डॉक्टर के साथ बिताये समय का मेरा औसत था 59 सेकंड।

सहायक के लिए तकनीक : कानव कहते हैं कि पश्चिम में ज़्यादातर तकनीक बनाई जाती है डॉक्टरों के इस्तेमाल के लिए लेकिन यहाँ डॉक्टरों को कई गुना ज़्यादा काम करना होता इसलिए उन्होंने तय किया कि वो ऐसी तकनीक बनाएंगे जो कि एक आम ग्रामीण स्वास्थ्यकर्मी के लिए हो।


कानव का दावा है हमारा यह टैबलेट और इससे जुड़े अटैचमेंट कोई भी चला सकता है। इस टैबलेट में जीपीएस की मदद से इससे यह भी पता लग जाएगा कि जिस आदमी की जांच की गई हैं वो दरअसल कहां मौजूद था उसकी तस्वीर होगी और उसका सारा डाटा एक सर्वर में होगा जो वो दुनिया में कहीं भी कभी इस्तेमाल कर सकेगा।

इसका मतलब ये है कि अगर सरकारी एजेंसियां इसका इस्तेमाल करने लगें तो जन-स्वास्थ्य से जुड़े प्रामाणिक आंकड़े जुटाए जा सकते हैं। काहोल कहते हैं, " ज़्यादातर लोगों को यह पता ही नहीं होता कि उन्हें बीपी या डायबिटीज़ की बीमारी है। अगर वो आरंभ में ही दवा ले लें तो वो आगे के भारी भरकम इलाज से बच जाएंगें। 

हमारे यहां इतने कम डॉक्टर हैं कि उनका इस्तेमाल बहुत सोच-समझ कर होना चाहिए। यह टैबलेट और इसके साथ के सारे अटैचमेंट अभी क़रीब 20 हज़ार के हैं जो आगे चल कर 15 हज़ार के हो जाएंगें और समय के साथ इसमें और भी टेस्ट जोड़े जा सकते हैं।

भारत के जाने माने दिल के डॉक्टर (ह्रदय रोग शल्य चिकित्सक) और मेदंता मेडिसिटी के प्रमुख डॉ. नरेश त्रेहान कहते हैं "सस्ती तकनीक भारत में आम लोंगो तक स्वास्थ्य पहुँचाने में बहुत ही कारगर साबित हो सकते है। सर्वाधिक ज़रुरत प्रिवेंटिव केयर के क्षेत्र में है। अगर आदमी साफ़ पानी पीएगा तो वो कई बीमारियों से बचा रहेगा।"


त्रेहान के अनुसार अगर भारत में केवल आम बीमारियों का डाटाबेस हो तो भारत सरकार निजी क्षेत्र, एनजीओ और सरकारी सुविधाओं को मिला कर भारत के हर हिस्से को ज़रूरत के मुताबिक स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध करा सकती है। त्रेहान कहते हैं सबसे बड़ी चुनौती है क्रियान्वयन की। यह बात कानव भी मानते हैं लेकिन वो यह भी मानते हैं की भारत में भी चीज़ें बदली जा सकती हैं और वो अपनी कोशिश कर रहे हैं।

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