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30 नवंबर 2014

फ‌र्स्ट एड की एक जानकारी

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* घर में पत्नी खाना बना रही हैं और अचानक उनका हाथ जल जाता है। समझ में नहीं आता कि क्या किया जाए। जल जाना, कहीं चोट लग जाना, नाक से खून बहना या करंट लग जाना। ऐसे छोटे मोटे हादसे किसी के साथ कभी भी हो सकते हैं। कई बार इन मामलों में देर भारी पड़ जाती है। इसलिए फ‌र्स्ट एड की थोड़ी जानकारी होना सभी के लिए जरूरी है।

* क्या है फ‌र्स्ट एड....?

* फ‌र्स्ट एड, वह चिकित्सकीय मदद है जो छोटे-मोटे हादसे के बाद डाक्टरी मदद मिलने तक पीड़ित को उपलब्ध कराया जा सकता है। इसके लिए घर पर ही कुछ जरूरी दवाओं से भरी फ‌र्स्ट एड किट बनाएं। इसमें रबर के दस्ताने, कैंची, रुई, डेटाल, बैंड एड, एक क्रेप बैंड एड, थर्मामीटर और कुछ दवाएं जैसे कफ सिरप, बुखार ठीक करने की दवा, इनहेलर, सर्दी-खांसी, आंख, सिरदर्द की दवा, विटामिन की गोली, ग्लूकोस और इलेक्ट्राल वगैरह हो।

फर्स्ट एड किट के सामान....

  • * हर आकार की कम से कम दो-तीन बैंडेज और मेडिकल टेप- कटने छिलने या बच्चों के फोडे-फुंसी होने पर इस्तेमाल के लिए।



  • गॉज स्क्वायर्स और रूई का छोटा रोल- बडे घावों को ढककर इंफेक्शन से बचाने के लिए। 



  • लैटेक्स या प्लास्टिक के ग्लव्स- घाव की साफ-सफाई और बैंडेज करने में सहायक।



  • सेवलॉन, डिटॉल की शीशी या दूसरे एंटीबैक्टीरियल सोप- घाव को साफ करके तुरंत लगाने के लिए।









  • छोटी कैंची और छोटी चिमटी- बैंडेज, गॉज, टेप आदि को काटने और शरीर में चुभे कांटे या कांच को निकालने के लिए।









    • सोफरामाइसीन जैसे एंटी बैक्टीरियल या एंटीबॉयोटिक ऑइंटमेंट- जलने, कटने, छिलने आदि में उपचार के लिए।



    • पेरासिटामोल, एवोमिन, कोरेक्स जैसी सामान्य दवाइयां- बुखार, सिरदर्द, उल्टी, सर्दी-खांसी और पेट दर्द आदि में राहत के लिए।



    • डिजिटल थर्मामीटर।



    • घर में डायबिटीज, ब्लड प्रेशर और हार्ट पेशेंट हैं तो उसकी दवाई भी किट में रखें। 


    • *किट को ऎसे रखें....

      • किट मजबूत प्लास्टिक के मध्यम आकार के डिब्बे में बनाएं, ताकि उसमें सारा सामान आसानी से आ सके।

      • किट के ऊपर लाल टेप या लाल स्कैच पेन से क्रॉस का निशान बनाएं, जिससे डिब्बे को देखकर ही उसके फर्स्ट एड किट होने का पता चल सके।

      • किट के ऊपर अपने डॉक्टर, मेडिकल स्टोर, एंबुलेंस का पता और फोन नंबर लिखकर चिपका दें, ताकि जरूरत पडने पर कोई भी डॉक्टर को बुला सके।

      • घर में किट को ऎसी जगह पर रखें, जिससे वह छोटे बच्चों की पहुंच से दूर रहे, साथ ही इसकी जानकारी सभी को हो ताकि वक्त पडने पर उसका उपयोग किया जा सके।

      • यदि आप लंबे सफर पर जा रहे हैं, तो किट को अपने हैंडबैग में साथ जरूर ले जाएं, जिससे जरूरत के समय यह आपके काम आ सके।

      • सामान्य हादसे और उनके उपचार -
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      • जल जाना:--

      • *जले हुए अंग पर 10 मिनट तक ठंडा पानी डालें। घाव को रुई से अच्छी तरह साफ करें जिससे संक्रमण न हो। घर में बरनाल न हो तो टूथ पेस्ट लगाना भी फायदेमंद होगा।

      • कट जाने या चोट लगने पर :--
      • * घाव को पानी से धोएं जिससे गंदगी साफ हो जाए। साफ रुई को घाव पर रखें जिससे खून निकलना बंद हो जाए। बैंड एड या दवा लगाकर पट्टी करें। ध्यान रखें कि घाव पर पानी न गिरे। इससे घाव पक सकता है। चोट पर हल्दी रखी जा सकती है। इससे न सिर्फ खून बहना बंद होगा, संक्रमण से भी बचाव होगा।

      • नाक से खून बहने पर:--

      • चोट, हाई ब्लड प्रेशर या संक्रमण की वजह से ऐसा हो सकता है। पीड़ित को इस तरह बैठाएं की वह थोड़ा आगे की तरफ झुका रहे। उसे मुंह से सांस लेने को बोलें। नाक का नाजुक हिस्सा दस मिनट तक दबाएं रखें।
      • 4.चक्कर आने पर: कमजोरी या ब्लड प्रेशर कम होने पर ऐसा हो सकता है। पीड़ित को नमक शक्कर का घोल पिलाएं। ग्लूकोज दिया जा सकता है।

      • बेहोश होने पर : --

      • बेहोश व्यक्ति को पीठ के बल इस तरह लिटाएं कि उसके पैर सिर की अपेक्षा ऊंचाई पर रहें। ऐसा करने से खून दिमाग और हृदय की ओर बहेगा। मुंह पर पानी का छींटा मारें।
      • 6.मोच आने पर: प्रभावित हिस्से को ज्यादा हिलाएं नहीं। सूजन के लिए बर्फ को कपड़े में बांध कर सूजन वाले हिस्से पर रखें।

      • करंट लगने पर :--

      • तुरंत बिजली का मेन स्विच बंद करें। पीड़ित व्यक्ति को कंबल में लपेटें। ध्यान दें, ऐसा करते हुए आपने चप्पल पहन रखी हो और पानी से भींगे न हों।

      • कीड़े, सांप, मकड़ी, कुत्तो के काटने पर:--

      • सांप के काटने पर व्यक्ति को लिटाएं, हिलने डुलने न दें। घाव को फौरन साफ पानी से धोएं। जहां सांप ने काटा हो उससे थोड़ा ऊपर कस कर कपड़ा बांधे ताकि जहर शरीर में न फैल सके। मकड़ी या किसी कीड़े के काटने पर बर्फ लगाएं। इससे सूजन नहीं होगी। पंट्टी भूल कर भी न बांधे। कुत्तो को काटने पर घाव को धोएं। फौरन डाक्टर के पास जाएं। यह जरूर जांच कराए कि कुत्तो को रेबीज तो नहीं था।

      • फ‌र्स्ट एड देने के बाद भी यदि पीड़ित की स्थिति बिगड़ रही हो तो फौरन डाक्टर से संपर्क करें।

      • यह हर्गिज न करें--

      • 1.जल जाने पर घी वगैरह कभी मत लगाएं।
      • 2.खून बहने पर ज्यादा देर तक पानी के नीचे घाव को न रखें। इससे खून तो ज्यादा बहता ही है घाव के पकने का खतरा भी हो जाता है।
      • 3.किसी के जहर खा लेने पर उसके मुंह में अंगुली डालकर उलटी कराने की कोशिश न करें। इससे उसकी सांसें रुक सकती हैं।
       

    29 नवंबर 2014

    शक्ति बढ़ाने के अचूक घरेलू उपाय.......!

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    तुलसी ---
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    * 15 ग्राम तुलसी के बीज और 30 ग्राम सफेद मुसली लेकर चूर्ण बनाएं, फिर उसमें 60 ग्राम मिश्री पीसकर मिला दें और शीशी में भरकर रख दें। 5 ग्राम की मात्रा में यह चूर्ण सुबह-शाम गाय के दूध के साथ सेवन करें इससे यौन दुर्बलता दूर होती है।
    उपचार स्वास्थ्य और प्रयोग -











    लहसुन ---
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    * 200 ग्राम लहसुन पीसकर उसमें 60 मिली शहद मिलाकर एक साफ-सुथरी शीशी में भरकर ढक्कन लगाएं और किसी भी अनाज में 31 दिन के लिए रख दें। 31 दिनों के बाद 10 ग्राम की मात्रा में 40 दिनों तक इसको लें। इससे यौन शक्ति बढ़ती है।
    जायफल ---
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    * एक ग्राम जायफल का चूर्ण प्रातः ताजे जल के साथ सेवन करने से कुछ दिनों में ही यौन दुर्बलता दूर होती है।

    * दालचीनी दो ग्राम दालचीनी का चूर्ण सुबह-शाम दूध के साथ सेवन करने से वीर्य बढ़ता है और यौन दुर्बलता दूर होती है।
    खजूर ---
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    * शीतकाल में सुबह दो-तीन खजूर को घी में भूनकर नियमित खाएं, ऊपर से इलायची- शक्कर डालकर उबला हुआ दूध पीजिए। यह उत्तम यौन शक्तिवर्धक है।
    उपचार स्वास्थ्य और प्रयोग -


    अंग में ताकत ही नहीं.......!

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    आपके  लिए कुछ लाये है उत्तम योग ....









    पहला प्रयोग:-
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    मुलैठी का चूर्ण- २० ग्राम

    अश्वगंधा का चूर्ण -२० ग्राम

    विधारा चूर्ण- १० ग्राम

    * इन सबको कस कर घोंट लीजिये और फिर इस मिश्रित चूर्ण में से तीन ग्राम मात्रा लेकर सिद्ध मकरध्वज एक रत्ती(१२५ मिलीग्राम) मिला कर मिश्री मिले दूध के साथ दिन में दो बार भोजन के बाद लीजिये।

    दूसरा प्रयोग :-
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    मन्मथ रस एक गोली

    पानी में भिगो कर छिलका निकाला इमली के बीज जिसे चियां या चिंचोका भी कहते हैं १ ग्राम पीसा हुआ .

    गुड दो ग्राम  .

    * तीनो को आपस मिला कर सुबह शाम दूध से लीजिये।

    * औषधि सेवन काल में सम्भोग से परहेज करिये फिर चालीस दिन बाद जब आपकी समस्या हल हो जाए तो आप सामान्य जीवन जियें। कब्जियत न होने दें आवश्यकता होने पर त्रिफ़ला चूर्ण ले लीजियेगा

    जब हम बीमारियों का इलाज करवाते हुए हम थक जाते हैं

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    लेकिन अच्छे से अच्छे और महंगा से महंगा इलाज करवाने पर भी बीमारी ठीक नहीं हो पाती। ऐसे में हमारे ऋषि-मुनियों द्वारा आजमाएं हुए सौ-प्रतिशत कारगर नुस्खे ही एक मात्र उम्मीद होते हैं वाकई में ये नुस्खे काम भी करते हैं इन्हें आयुर्वेद की भाषा में रासायन कहा जाता है ऐसा ही एक योग है अमृत संजीवनी रासायन योग जिसे आप घर पर ही बनाकर कई जानलेवा बीमारियों का इलाज कर सकते हैं-





    बनाने की विधि और सामग्री -

    मात्रा -

    गुण-


    अमृता, खस, नीम की छाल, मछेछी (एक प्रकार का ओषिधि जो तालाब के किनारे उग आती है ), अडूसा, गोबर मुदपर्णी, सेमल, मूसली, शतावर, सभी को अलग-अलग कर एक किलो लेकर जौकुट करके आठ गुने पानी में पकाएं। जब पानी 4 भाग शेष रह जाएं। तब एक किलो गुड़ (बिना मसाले का) अडूसा, शतावरी, आंवला, मछेछी का कल्क प्रत्येक 160-160 ग्राम-काली गाय के घी में धीमी आंच पर पकाएं।सभी सामान उपलब्ध हो जाएगा आयुर्वेद जड़ी बूटी विक्रेता से मगर मछेछी जो ताजा ही चाहिए इसे गाँव का रहने वाला और पहचान रखने वाला ही व्यक्ति आप को उपलब्ध करा सकता है इसके फूल सफ़ेद होते है और इसमें मछली जैसी ही गंध आती  है इसलिए इसको मत्स्यगंधा भी  कहते है -

    घी मात्र जब शेष रह जाए तो छानकर खस, चंदन, त्रिजातक, त्रिकुटा, त्रिफला, त्रिकेशर ( नागकेशर, कमल केशर) वंश लोचन, चोरक, सफेद मुसली, असगंध, पाषाण भेद, धनिया, अडूसा, अनारदाना, खजूर, मुलैठी, दाख, निलोफर, कपूर, शीलाजीत, गंधक सभी दस-दस ग्राम लेकर कपड़छन करके उपरोक्त घी में मिला दें।

    सुबह खाली पेट 10 ग्राम घृत गौ- दूध में डालकर सेवन करें और एक घंटे तक कुछ भी ना खाएं।

    सभी प्रकार के कैंसर में प्रथम व द्वितीय अवस्था तक के अलग-अलग अनुपान से, पुराना गठिया, घुटनो में सुजन व दर्द, साइटिका, अमाशय में पितरोग, नामर्दी, शुक्राणु का अभाव, शीघ्र पतन, पागलपन, अवसाद, बिगड़ी हुई खांसी, गलगंड, पीलिया, वात रोग, रक्तरोग, रसायन, वाजीकरण, श्वास रोग, गले के रोग, हृदय रोग, पिताशय की पथरी में लाभकारी।

    जो स्त्री रजोदोष से पीडि़त हो, जिस स्त्री के रजनोप्रवृति प्रारंभ ही न हुई हो, जो कष्ट पीडि़त हो तथा जिन स्त्रियों को बार-बार संतान होकर मर जाती हो, उन सभी को राहत मिलेगी। मासिक धर्म शुरू होकर बीच में ही बंद हो गया हो और अनेकों औषधी व मंत्रों के प्रयोग से संतान उत्पन्न न हुई हो उन्हें निश्चित ही संतान होगी-
    उपचार और प्रयोग -

    एक प्रयोग जो 40 दिन में आंखों की सारी कमजोरी दूर कर देगा

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    * आंखें हर इंसान को भगवान का दिया एक अनमोल तोहफा है।अगर इनका ख्याल न रखा जाए तो छोटी-सी परेशानी जिंदगी भर की तकलीफ बन सकती है।

    * अधिकांश लोग #आंखों की कमजोरी जैसे आंखों में से पानी आना, आंखों में जलन, लाल होना , आंखों में जाले आना, आंख का चिपकना, आंख की पलकों पर सूजन आना आदि परेशानियों को अनदेखा करते हैं।

    * आगे चलकर ये लापरवाही ज्यादा परेशानी देने वाली साबित हो सकती है। इसीलिए रोजाना सुबह-शाम मुंह में पानी भरकर आंखों पर खूब पानी छिड़के। पर्याप्त नींद लें व साथ ही नीचे लिखे आयुर्वेदिक नुस्खें को भी अपनाएं।

    नुस्खा:-
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    * बादाम गिरी तथा साफ की हुई बढिय़ा सौंफ 100-100 ग्राम लें। सौंफ का महीन चूर्ण करें, इसमें बादाम गिरी को खूब महीन कतरकर तथा सौंफ के उक्त चूर्ण के साथ खूब अच्छी तरह पीसकर रखें। रोज रात इस मिश्रण को 10-10 ग्राम मात्रा में मुख में रखकर धीरे-धीरे खाकर सो जाएं, इसके ऊपर पानी या दूध नहीं पीना है।
                                                                             उपचार स्वास्थ्य और प्रयोग -http://upchaaraurpryog120.blogspot.in

    25 नवंबर 2014

    सौंदर्य के लिये फायदेमंद दही......!

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    * अगर आपको अपनी उम्र छुपानी हो तो अपने चेहरे को एकदम दमकता हुआ सा बना लें। कॉस्मेटिक्स से आपके चेहरे की रंगत कुछ समय के लिए बरकरार रह सकती है लेकिन घर में मौजूद प्राकृतिक दही को चेहरे पर लगाने से उसकी रंगत हमेशा बरकरार बनी रहेगी। त्वचा की रंगत निखारने में दही महत्वपूर्ण भूमिका अदा करती है। दही खाना ना केवल हमारे स्वास्थ्य के लिए लाभदायक है बल्कि इसे शरीर पर उबटन या किसी फेस पैक में मिला कर भी लगाया जा सकता है। तो ऐसे में चलिये जानते हैं दही का त्‍वचा पर निखार किस प्रकार से होता है।
    दही के गुण-
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    रूखी त्‍वचा के लिये दही....
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    * यदि आपकी त्वचा रूखी है तो आप आधा कप दही में एक छोटा चम्मच जैतून का तेल तथा एक छोटा चम्मच नींबू का रस मिलाकर चेहरे पर लगाकर गुनगुने पानी से चेहरा धोने से त्वचा का रूखापन समाप्त हो जाता है।
    रंग साफ करे....
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    * दही को आप किसी फेस पैक या फल के साथ मिला कर लगा सकती हैं या फिर ऐसे ही दही को त्वचा पर लगाकर त्वचा को गुनगुने पानी से धोने से आपकी त्वचा नर्म व मुलायम होती है। फलों व सब्जियों का पैक- एक कटोरी दही में आधी कटोरी गाजर, ककड़ी, पपीता आदि मौसमी फलों का रस मिलाकर चेहरे पर लगाने से आपकी त्वचा में निखार आएगा। आप चाहे तो मौसमी सब्जियों के रस को भी दही में मिलाकर पैक तैयार कर सकते हैं।
    मुंहासे से मुक्‍ती दिलाए....
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    * दही में एंटी बैक्‍टीरियल और एंटी फंगल गुण होते हैं। पिंपल से छुटकारा पाने के लिये दही को सीधे चेहरे पर लगाएं और इसे 30 मिनट के बाद धो लें।
    झुर्रियां मिटाए....
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    * अगर उम्र से पहले ही झुर्रियों ने अपना प्रकोप फैलाना शुरु कर दिया है तो इनकी रफतार को धीमा कर दें। झुर्रियों को प्राकृतिक तरीके से कम करें जिसके लिये दही का फेस मास्‍क लगाएं। इसमें मौजूद लैक्‍टिक एसिड मृत्‍य कोशिकाओं को दूर कर के पोर्स को टाइट करती हैं।
    * इस प्रकार गुणकारी दही से आपकी त्वचा में नई रंगत व चमक आती है। दही के साथ आप बेसन या चोकर मिलाकर भी चेहरे पर लगा सकती हैं। इस प्रकार दही का एक गुणकारी सौंदर्य प्रसाधन के रूप में प्रयोग कर आप अपनी त्वचा में निखार ला सकती हैं।

    दुर्बलता मिटाने के इन असरदार टिप्स को अपनाएं.....!

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    * किसी भी इंसान की डाइट (भोजन) का हमारे शरीर और मन पर पूरा-पूरा असर पड़ता है। #उचित आहार के अभाव में न सिर्फ शरीर कमजोर हो सकता है बल्कि दूसरी शारीरिक समस्याएं भी उत्पन्न हो सकती हैं। कहते हैं, जब तन और मन स्वस्थ नहीं होगा, प्रफुल्लित नहीं होगा तो फिर सेक्स के दौरान आप आनंद नहीं उठा पाएंगे।

    * भागदौड़ और तनावपूर्ण जिंदगी में लोग अपने भोजन पर पूरी तरहध्यान नहीं दे पाते, जिसके कारण कई बार बीमारियों का भी शिकार हो जाते हैं। ऐसे में लोगों की सेक्स क्षमता पर भी नकारात्मक असर पड़ता है। आखिर ऐसा क्या खाएं जिससे हमारा #आहार संतुलित हो और सेक्स जीवन भी। तो क्या हो आहार जो बढ़ाए सेक्स पॉवर के लिए ......







    संतुलित खाएं, सेक्स पॉवर बढ़ाएं:-

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    * एक जानकारी के मुताबिक विटामिन ई की कमी से पुरुष नपुंसकता और नामर्दी का शिकार हो जाते हैं। विटामिन ई की कमी से स्त्रियों के स्तन भी सिकुड़ जाते हैं, जिससे उनका आकर्षण कम हो जाता है। सी फूड, सब्जियां, अंकुरित अनाज, राजमा, सोयाबीन, अलसी आदि को अपने आहार में शामिल कर इस कमी को पूरा किया जा सकता है।

    नपुंसकता मिटाता है यह आहार:-

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    सूखे मेवे:-

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    बदाम, काजू, किशमिश, दूध, शहर को अपने भोजन में शामिल करिए, इससे आपकी यौन क्षमता पर सकारात्मक असर होगा। शरीर भी शक्तिशाली बनेगा।

    सलाद और सब्जी :- 

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    भोजन में सलाद का भरपूर उपयोग करें साथ ही लहसुन, प्याज और अदरक का भी उचित मात्रा में उपयोग करें। नियमित रूप से हरी एवं पत्तेदार सब्जियों का उपयुक्त मात्रा में सेवन करें।

    पौष्टिक पदार्थ :- 

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    दूध, मक्खन और घी आदि का भी उचित मात्रा में उपयोग करें। ‍

    और भी है असरदार तरीके:-

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    * वैसे तो मांसाहार से भी बहुत फायदे हैं लेकिन जरूरी नहीं कि आप मांसाहार का सेवन करें, शाकाहार के माध्यम से भी आप अपने शरीर को स्वस्थ और फिट रख सकते हैं। यदि शरीर स्वस्थ है तो यौन संबंधों के दौरान भी आप कमजोर साबित नहीं होंगे। अच्छी सेहत के लिए उचित आहार ही जरूरी नहीं है, इसके साथ ही हमें अपनी दिनचर्या में योग और व्यायाम को भी शामिल करना चाहिए।

    इन चीजों को खाने से आती है यौन दुर्बलता:-

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    * फास्ट फूड, पिज्जा, बर्गर आदि का नियमित सेवन शरीर में फैट्‍स और मोटापा बढ़ाता है। तले-गले और मसालेदार भोजन से भी परहेज करें। इससे सेक्स पॉवर में कमी आती है।

    * यदि अत्यधिक भोजन हानिकारक है तो अत्यधिक मात्रा में डाइटिंग और उपवास भी उतना ही नुकसानदायक है। इससे शरीर में कमजोरी आती है। दिनभर के भोजन में आपको पर्याप्त मात्रा में प्रोटीन और कैलोरी मिलनी चाहिए।

    उपचार स्वास्थ्य और प्रयोग -http://upchaaraurpryog120.blogspot.in

    23 नवंबर 2014

    शिलाजीत एक टॉनिक भी है.?

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    * यह पत्थर की शिलाओं में ही पैदा होता है इसलिए इसे शिलाजीत कहा जाता है।

    * ज्येष्ठ और आषाढ़ के महीने में सूर्य  की प्रखर किरणों से पवर्त की शिलाओं से लाख की तरह पिघल कर यह बाहर निकल आता है जिसे बाद में इकट्ठा कर लिया जाता है।









     * महर्षि चरक ने कहा कि पृथ्वी पर कोई भी ऐसा रोग नहीं है, जो उचित समय पर, उचित योगों के साथ, विधिपूर्वक शिलाजीत के उपयोग से नष्ट न हो सके। स्वस्थ मनुष्य यदि शिलाजीत का विधिपूर्वक उपयोग करता है, तो उत्तम बल मिलता है। वस्तुतः यह रसायन भी है।

    * आयुर्वेद के अनुसार शिलाजीत की उत्पति शिला, अर्थात पत्थर से मानी गयी है। ग्रीष्म ऋतु में सूर्य की प्रखर किरणों के ताप से पर्वत की चट्टानों के धातु अंश पिघलने से जो एक प्रकार का स्राव होता है, उसे शिलाजतु कहा जाता है। इसी को ही शिलाजीत कहा गया है। शिलाजीत के गुण-धर्मः शिलाजीत कड़वा, कसैला, उष्ण, वीर्य शोषण तथा छेदन करने वाला होता है। शिलाजीत देखने में तारकोल के समान काला और गाढ़ा पदार्थ होता है जो सूखने पर चमकीला हो जाता है। यह जल में घुलनशील है, किंतु एल्कोहोल क्लोरोफॉर्म तथा ईथर में नहीं घुलता।

    * यह चार प्रकार का होता है। रजत, स्वर्ण ,लौह  तथा ताम्र शिलाजीत। प्रत्येक प्रकार की शिलाजीत के गुण अथवा लाभ अलग.अलग हैं। रजत शिलाजीत का स्वाद चरपरा होता है।

    * यह पित्त तथा कफ के विकारों को दूर करता है। स्वर्ण  शिलाजीत मधुर एवं  कसैला और कड़वा होता है जो बात और पित्त जनित व्याधियों का शमन करता है। लौह शिलाजीत कड़वा तथा सौम्य होता है। ताम्र शिलाजीत का स्वाद तीखा होता है। कफ जन्य रोगों के इलाज के लिए यह आदर्श है क्योंकि इसकी तासीर गर्म होती है। समग्र रूप में शिलाजीत कफए चर्बीए मधुमेह एवं  श्वास  मिर्गी एवं  बवासीर उन्माद एवं  सूजन एवं  कोढ़ एवं पथरी एवं  पेट के कीड़े तथा कई  अन्य प्रकार  रोगों को नष्ट करने में सहायक होता है।

    * यह जरूरी नहीं है कि शिलाजीत का सेवन तभी किया जाए जब कि कोई  बीमारी हो स्वस्थ मनुष्य भी इसका सेवन कर सकता है। इससे शरीर पुष्ट होता है और बल मिलता है। विशेषज्ञों के अनुसार सेवन के लिए मात्रा बारह रत्ती से दो रत्ती के बीच निर्धारित की जानी चाहिए। मात्रा का निर्धारण रोगी की शारीरिक स्थिति उसकी आयु और उसकी पाचन शक्ति को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए।

    *शिलाजीत का सेवन दूध और शहद के साथ सुबह सूयोर्दय से पहले कर लेना चाहिए। इसके ठीक प्रकार पाचन के बाद अर्थात तीन.चार घंटे के बाद ही भोजन करना चाहिए।

    * दिमागी ताकत के लिए प्रतिदिन एक चम्मच मक्खन के साथ शिलाजीत का सेवन लाभदायक होता है । इससे दिमागी थकावट नहीं होती।

    * मधुमेह एवं  प्रमेह और मूत्र संबंधी विकारों के निराकरण में शिलाजीत बेहद उपयोगी सिद्ध हुआ है। एक चम्मच शहद एवं  एक चम्मच त्रिफला चूर्ण  के साथ लगभग दो रत्ती शिलाजीत का सेवन प्रमेह रोग को नष्ट कर देता है। इस मिश्रण का सेवन सूर्योदय  से पहले ही करना चाहिए। मधुमेह के इलाज के लिए थोड़ी-.थोड़ी मात्रा में प्रतिदिन लगातार शिलाजीत का सेवन तब तक किया जाना चाहिए जब तक कि लगभग पांच सेर मात्रा रोगी के शरीर में न पहुंच जाए। यह रोगी की स्थिति बहुत हद तक ठीक कर देता है।

    * मूत्रावरोध एवं  पीड़ा जलन और प्रमेह के उपचार के लिए पीपल और छोटी इलायची को बराबर मात्रा में मिलाकर चूर्ण  बनालें एवं  इस एक चम्मच चूर्ण  के साथ शिलाजीत का सेवन लाभदायक होता है। यदि किसी को बार.बार पेशाब आएए रात को भी पेशाब के लिए बार.बार उठना पड़े तथा एक साथ भारी मात्रा में पेशाब आए तो समझ लें कि ये लक्षण बहुमूत्रता के हैं। इस बीमारी को दूर करने के लिए शिलाजीत एवं  बंग भस्म एवं  छोटी इलायची के दाने और वंश लोचन को समान मात्रा में लेकर शहद के साथ मिलाकर दो-.दो रत्ती की गोलियां बनाकर गर्म दूध के साथ इनका सेवन करें। सुबह.शाम इसकी दो-.दो गोलियां लेना ही पयरप्त होता है। साथ ही इससे शरीर सुडौल और शक्तिशाली भी बनता है।

    * जो लोग शीघ्र पतन की समस्या से ग्रसित है उन्हें भी शिलाजीत से लाभ पहुंचता है इसके लिए बीस-.बीस ग्राम शिलाजीत और बंग भस्म में दस ग्राम लौह भस्म और छरू ग्राम अभ्रक  भस्म मिलाकर घोटकर दो-दो रत्ती की गोलियां बना लें। सुबह के समय एक गोली को मिश्री मिले दूध के साथ सेवन आश्चयर्जनक लाभ देता है। शाम को भी इस योग का प्रयोग किया जा सकता है परन्तु शाम को भोजन के दो-तीन घंटे के बाद ही इसका प्रयोग करें। विशेषज्ञों के अनुसार शिलाजीत का प्रयोग करने के पहले वमन एवं विरेचन आदि क्रियाओं को करके शरीर को शुद्ध किया जाना जरूरी है इससे लाभ अधिक होता है। साथ ही इसका सेवन सूयोर्दय से पहले शहद या दूध के साथ करना चाहिए इसका सेवन करने के बाद चावल एवं  दूध या जौ से बनी किसी चीज का सेवन करना चाहिए। शिलाजीत का प्रयोग उन लोगों को नहीं करना चाहिए जिनके शरीर में पित्त का प्रकोप हो।

    * जिनके शरीर में गर्मी बढ़ी हुई  हो उन्हें भी शिलाजीत से परहेज ही रखना चाहिए।

    * शिलाजीत के सेवन के दौरान मिर्च-मसाले एवं  खटाई एवं  मांस,मछली एवं  अंड़े तथा शराब आदि का प्रयोग वर्जित है साथ ही कब्ज एवं मानसिक शोक तथा तनाव एवं रात में जागना एवं  दिन में सोना तथा लगातार ज्यादा मात्रा में शारीरिक श्रम आदि से भी बचना चाहिए। यदि शिलाजीत का सेवन केवल कुछ दिनों तक सेवन किया जाता है तो इससे कोई  नुकसान नहीं है।

    * स्वप्नदोष से ज्यादातर तो अविवाहित युवक ही पीड़ित पाए जाते हैं पर विवाहित पुरुष भी इससे अछूते नहीं हैं-

    शुद्ध शिलाजीत- 25 ग्राम,

    लौहभस्म- 10 ग्राम,

    केशर- 2 ग्राम,

    अम्बर- 2 ग्राम,

    * इन सबको मिलाकर खरल में खूब घुटाई करके महीन कर लें और दो -दो  रत्ती की गोलियां बना लें। एक-एक  गोली सुबह-शाम दूध के साथ सेवन करने से स्वप्न दोष होना तो बंद होता ही है, साथ ही पाचन -शक्ति, स्मरण शक्ति और शारीरिक शक्ति में भी वृद्धि होती है, इसलिए यह प्रयोग छात्र-छात्राओं के लिए भी उपयोगी है।यदि शीघ्रपतन के रोगी विवाहित पुरुष इसे सेवन करें तो उनकी यह व्याधि नष्ट होती है। शरीर में बल और पुष्टि आती है।खटाई और खट्टे पदार्थों का सेवन बंद करके इन दोनों में से कोई एक नुस्खा कम से कम 60 दिन तक सेवन करना चाहिए।


    * शिलाजीत एक पौष्टिक द्रव्य है। परन्तु राह चलते या पटरी पर बैठे खरीददार से शिलाजीत खरीदने में धोखा हो सकता है इसलिए उसकी जांच करके ही खरीदें जो शिलाजीत पानी में डालते ही तार.तार होकर तली में बैठ जाए वही असली शिलाजीत है। साथ ही सूखने पर उसमें गोमूत्र जैसा गंध आए एवं  रंग काला एवं  वजन हल्का तथा छूने में  चिकनी हो तो समझ लें कि यही असली शिलाजीत है।

    उपचार स्वास्थ्य और प्रयोग -


    नारियल के ये है फायदे ....!

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    * नारियल को श्रीफल भी कहा जाता है। ऐसा इसकी धार्मिक महत्ता के साथ-साथ औषधीय गुणों के कारण कहा जाता है। नारियल में विटामिन, पोटैशियम, फाइबर, कैल्शियम, मैग्नीशियम, विटामिन और खनिज तत्व प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। 

    * नारियल कई बीमारियों के इलाज में काम आता है। नारियल में वसा और कॉलेस्ट्रॉल नहीं होता है, इसलिए नारियल मोटापे से भी निजात दिलाने में मदद करता है। 


    आइए जानते हैं नारियल के चमत्कारी गुणों के बारे में:-



    * नकसीर की समस्या कई लोगों को हो सकती है। नाक से खून निकलने पर कच्चे नारियल का पानी का सेवन नियमित रूप से करना फायदेमंद होता है। अगर खाली पेट नारियल का सेवन किया जाए तो खून का बहाव बंद हो जाता है।

    * नारियल खाने से याद्दाश्त बढ़ती है। नारियल की गरी में बादाम, अखरोट एवं मिश्री मिलाकर हर रोज खाने से स्मृति में बढ़ती है। बच्चों को नारियल खिलाना चाहिए, इससे बच्चों का दिमागी विकास होता है।

    *नारियल के पानी में कार्बोहाइड्रेट, मिनरल और क्षार काफी मात्रा में पाया जाता है।

    * इसमें विटामिन और अनेक लाभदायक तत्व मिलते हैं। नारियल के पानी में मैग्नीशियम और कैल्शियम भी होता है। सूखे नारियल में इन तत्वों की मात्रा कम होती है।

    * मौसमी असर के कारण या गलत खान-पान के कारण होने वाले पेट दर्द में नारियल पानी पीने से आराम मिलता है।

    * गर्मी के मौसम में नारियल पानी पीने से गला काफी लंबे समय तक तर रहता है और आपको प्यास नही लगती।

    * डिहाइड्रेशन होने पर और उल्टी की परेशानी होने पर नारियल पानी में स्वादअनुसार नमक डाल कर पीने से आराम मिलता है।

    * नारियल पानी को चेहरे पर रोज लगाने से चेहरे के कील- मुंहासे और उनसे होने वाले दाग-धब्बे ठीक हो जाते हैं।

    * चेचक की बीमारी के बाद चेहरे पर होने वाले चेचक के निशान को नारियल पानी की मदद से दूर किए जा सकते हैं।

    * अगर किसी कारण से गीला नारियल उपलब्ध नहीं है तो आप सूखे नारियल को घिसकर बुरादा बना लें। फिर एक कप पानी में एक चौथाई कप बुरादा भिगो दें। दो घंटे बाद इसे छानकर नारियल का बुरादा निकालकर पीस लें। इसकी चटनी-सी बनाकर भिगोए हुए पानी में घोलकर पी जाए। इस प्रकार इसे प्रतिदिन तीन बार पीने से खांसी, फेफड़ों के रोग और टी.बी. में लाभ होता है।

    * इसके अलावा नारियल के तेल की सिर में मालिश करने से बालों का झड़ना बंद हो जाता है।

    * नारियल तेल से भी दाग दूर होते हैं। शरीर के किसी भाग के जलने पर प्रतिदिन उस स्थान पर नारियल का तेल लगाने से जलन भी शांत होती है तथा निशान भी नहीं पड़ता है।

    * #नारियल के तेल और कपूर को मिलाकर एग्जिमा वाले स्थान पर लगाने से लाभ मिलता है।

    *नारियल के पानी में दूध से ज्यादा पोषक तत्व होते हैं क्योंकि इसमें कोलेस्ट्रोल और वसा की मात्रा नहीं है। नारियल पानी में बेहद गुण पाए जाते हैं। इसमें बहुत ज्यादा मात्रा में इलेक्ट्रोलाइट और पोटेशियम पाया जाता है, जो ब्लड प्रेशर और दिल की गतिविधियों को दुरुस्त करने में सहयोगी होता है।

    * इसके इस्तेमाल से रक्त स्राव तेज गति से काम करता है और पाचन क्रिया भी दुरुस्त रहती है। नारियल का पानी न केवल शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करता है बल्कि शरीर में मौजूद बहुत से वायरसों से भी लड़ाई करता है। अगर आपको किडनी में पथरी की समस्या है तो यह आपके लिए बेहद उपयोगी साबित होगा।

    * नारियल का पानी लगातार सेवन करने से किडनी में मौजूद पथरी अपने आप खत्म हो जाती है। अगर आपको किडनी से संबंधित अन्य कोई समस्या हो तब भी फौरन एक गिलास नारियल पानी पी लीजिए, मिनटों में निजात मिल जाएगी। नशे को कम करने में भी नारियल पानी बहुत ही प्रभावी है।

    22 नवंबर 2014

    बुद्धि, शक्ति व नेत्रज्योति वर्धक प्रयोग....!

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    * हेमंत ऋतू में जठराग्नि प्रदीप्त रहती है | इस समय पौष्टिक पदार्थों का सेवन कर वर्षभर के लिए शारीरिक शक्ति का संचय किया जा सकता है | 

    * निम्नलिखित प्रयोग केवल १५ दिन तक करने से शारीरिक कमजोरी दूर होकर शरीर पुष्ट व बलवान बनता है, नेत्रज्योति बढती है तथा बुद्धि को बाल मिलता है | 








    सामग्री :-
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    बादाम ५ ग्राम
    खसखस १० ग्राम
    मगजकरी (ककड़ी, खरबूजा, तरबूज, पेठा व लौकी के बीजों का समभाग मिश्रण) ५ ग्राम
    कालीमिर्च ७.५ ग्राम
    मालकंगनी २.५ ग्राम
    गोरखमुंडी ५ ग्राम |

    विधि :- 

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    * रात्रि को उपरोक्त मिश्रण कुल्हड़ में एक गिलास पानी में भिगोकर रखें | सुबह छानकर पानीपी लें व बचा हुआ मिश्रण खूब महीन पीस लें | इस पिसे हुए मिश्रण को धीमी आँच पर देशी घी में लाल होने तक भुने | ४०० मि.ली. दूध में मिश्री व यह मिश्रण मिला के धीरे-धीरे चुसकी लेते हुए पियें |

    * १५ दिन तक यह प्रयोग करने से बौद्धिक व शारीरिक बल तथा #नेत्रज्योति में विशेष वृद्धि होती है | 


    * इसमें समाविष्ट बादाम, खसखस व मगजकरी मस्तिष्क को बलवान व तरोताजा बनाते हैं | मालकंगनी मेधाशक्तिवर्धक है | यह ग्रहण व स्मृति शक्ति को बढाती है एवं मस्तिष्क तथा तंत्रिकाओं को बाल प्रदान करती है | अत: पक्षाघात (अर्धांगवायु), संधिवात, कंपवात आदि वातजन्य विकारों में, शारीरिक दुर्बलता के कारण उत्पन्न होनेवाले श्वाससंबन्धी रोगों, जोड़ों का दर्द, अनिद्रा, जीर्णज्वर (हड्डी का बुखार) आदि रोगों में एवं मधुमेह के कृश व दुर्बल रुग्णों हेतु तथा सतत बौद्धिक काम करनेवाले व्यक्तियों व विद्यार्थियों के लिए यह प्रयोग बहुत लाभदायी है | 

    * इससे मांस व शुक्र धातुओं की पुष्टि होती है |
    उपचार स्वास्थ्य और प्रयोग -http://upchaaraurpryog120.blogspot.in

    ताजगी के लिए कर्पूर ...!

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    * घर से जब भी कुछ दिनों के लिए बाहर जाना हो, एक कटोरे में २०-३० ग्राम कर्पूर रखकर जाईये, बंद कमरों में कर्पूर की सुगंध बनी रहेगी, कपडों और खुले सामानों पर फफूंद भी नहीं लगेगी, कीडे मकोडे भी नहीं आएंगे और घर में वापस आने पर हवा में ताजगी महसूस होगी। वैसे भी सामान्य तौर से घर में कर्पूर को खुले पात्र में रखने से कमरे की हवा शुद्ध बनी रहती है 


    * यदि कालीन बिछी हुयी हो तो उसमें से भी दुर्गंध दूर हो जाती है।

    16 नवंबर 2014

    हाइड्रोसील हो गया है ये उपाय आजमाए....!

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    #हाइड्रोसील हो गया हो तो ५ ग्राम काली मिर्च और १० ग्राम जीरे का चूर्ण मिलाकर पेस्ट बनाए और इस पेस्ट को गरम कीजिए 

    * इस पेस्ट में इतना गरम पानी मिलाएं कि यह थोड़ा पतला घोल बन जाए.इस घोल को बढे हुए #अंडकोषों पर लेप करके सो जाएँ ,तीन चार दिनों तक ऐसा करने से फायदा दिखाई देने लगेगा.

    पथरी का करे इलाज ....!

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    * सबसे पहले कुछ परहेज !

    * जिसको भी शरीर मे पथरी है वो चुना कभी ना खाएं ! (काफी लोग पान मे डाल कर खा जाते हैं ) क्योंकि पथरी होने का मुख्य कारण आपके शरीर मे अधिक मात्रा मे कैलशियम का होना है| मतलब जिनके शरीर मे पथरी हुई है उनके शरीर मे जरुरत से अधिक मात्रा मे कैलशियम है लेकिन वो शरीर मे पच नहीं रहा है वो अलग बात हे| इसलिए आप चुना खाना बंद कर दीजिए|

    आयुर्वेदिक इलाज !

    * पखानबेद नाम का एक पौधा होता है। कुछ लोग उसे पथरचट भी कहते है। पखानबेद के 10 पत्तों को 1 से डेढ़ ग्लास पानी मे उबाल कर काढ़ा बना लें और नियमित रूप से उसका सेवन करें। ऐसा करने से 7 से 15 दिन में पथरी पूरी तरह खत्म हो जाएगी। कई बार तो इससे भी कम वक्त में ठीक हो जाती है। आप चाहें तो दिन मे 3 बार पत्ते 3 पत्ते भी खा सकते हैं।

    होमियोपेथी इलाज !

    अब होमियोपेथी मे एक दवा है ! वो आपको किसी भी होमियोपेथी के दुकान पर मिलेगी उसका नाम हे BERBERIS VULGARIS ये दवा के आगे लिखना है MOTHER TINCHER ! ये उसकी पोटेंसी हे| वो दुकान वाला समझ जायेगा| यह दवा होमियोपेथी की दुकान से ले आइये| (स्वदेशी कंपनी SBL की बढ़िया असर करती है )

    (ये BERBERIS VULGARIS दवा भी पथरचट नाम के पोधे से बनी है बस फर्क इतना है ये dilutions form मे हैं पथरचट पोधे का botanical name BERBERIS VULGARIS ही है )

    अब इस दवा की 10-15 बूंदों को एक चौथाई (1/ 4) कप गुण गुने पानी मे मिलाकर दिन मे चार बार (सुबह,दोपहर,शाम और रात) लेना है | चार बार अधिक से अधिक और कमसे कम तीन बार|इसको लगातार एक से डेढ़ महीने तक लेना है कभी कभी दो महीने भी लग जाते है |

    इससे जीतने भी stone है ,कही भी हो गोलब्लेडर gall bladder )मे हो या फिर किडनी मे हो,या युनिद्रा के आसपास हो,या फिर मुत्रपिंड मे हो| वो सभी स्टोन को पिगलाकर ये निकाल देता हे|

    99% केस मे डेढ़ से दो महीने मे ही सब टूट कर निकाल देता हे कभी कभी हो सकता हे तीन महीने भी हो सकता हे लेना पड़े|तो आप दो महीने बाद सोनोग्राफी करवा लीजिए आपको पता चल जायेगा कितना टूट गया है कितना रह गया है | अगर रह गया हहै तो थोड़े दिन और ले लीजिए|यह दवा का साइड इफेक्ट नहीं है |

    और यही दवा से पित की पथरी (gallbladder stones ) भी ठीक हो जाती है ! जिसे आधुनिक डाक्टर पित का कैंसर बोल देते हैं ! ये तो हुआ जब stone टूट के निकल गया अब दोबारा भविष्य मे यह ना बने उसके लिए क्या??? क्योंकि कई लोगो को बार बार पथरी होती है |एक बार stone टूट के निकल गया अब कभी दोबारा नहीं आना चाहिए इसके लिए क्या ??? इसके लिए एक और होमियोपेथी मे दवा है CHINA 1000| प्रवाही स्वरुप की इस दवा के एक ही दिन सुबह-दोपहर-शाम मे दो-दो बूंद सीधे जीभ पर डाल दीजिए|सिर्फ एक ही दिन मे तीन बार ले लीजिए फिर भविष्य मे कभी भी स्टोन नहीं बनेगा|

    और एक बात इस BERBERIS VULGARIS से पीलिया jaundice भी ठीक होता है !

    12 नवंबर 2014

    #संजीवनी बूटी की तरह कारगर है ये केसर ......!

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    * केसर विश्व का सबसे कीमती पौधा है....!

    * केसर की खेती भारत में जम्मू के किश्तवाड़ तथा जन्नत-ए-कश्मीर के पामपुर (पंपोर) के सीमित क्षेत्रों में अधिक की जाती है। केसर यहां के लोगों के लिए वरदान है। क्योंकि #केसर के फूलों से निकाला जाता सोने जैसा कीमती केसर जिसकी कीमत बाज़ार में तीन से साढ़े तीन लाख रुपये किलो है।

    * परंतु कुछ राजनीतिक कारणों से आज उसकी खेती बुरी तरह प्रभावित है। यहां की केसर हल्की, पतली, लाल रंग वाली, कमल की तरह सुन्दर गंधयुक्त होती है। #असली केसर बहुत महंगी होती है। कश्मीरी मोंगरा सर्वोतम मानी गई है। एक समय था जब कश्मीर का केसर विश्व बाज़ार में श्रेष्ठतम माना जाता था। उत्तर प्रदेश के चौबटिया ज़िले में भी केसर उगाने के प्रयास चल रहे हैं। विदेशों में भी इसकी पैदावार बहुत होती है और भारत में इसकी आयात होती है।

    * जम्मू-कश्मीर की राजधानी श्रीनगर से सिर्फ 20 किलोमीटर की दूरी पर एक छोटे शहर पंपोर के खेतों में शरद ऋतु के आते ही खुशबूदार और कीमती जड़ी-बूटी ‘केसर’ की बहार आ जाती है। वर्ष के अधिकतर समय ये खेत बंजर रहते हैं क्योंकि ‘केसर’ के कंद सूखी ज़मीन के भीतर पनप रहे होते हैं, लेकिन बर्फ़ से ढकी चोटियों से घिरे भूरी मिट्टी के मैदानों में शरद ऋतु के अलसाये सूर्य की रोशनी में शरद ऋतु के अंत तक ये खेत बैंगनी रंग के फूलों से सज जाते हैं। और इस रंग की खुशबू सारे वातावरण में बसी रहती है। इन केसर के बैंगनी रंग के फूलों को हौले-हौले चुनते हुए कश्मीरी लोग इन्हें सावधानी से तोड़ कर अपने थैलों में इक्ट्ठा करते हैं। केसर की सिर्फ 450 ग्राम मात्रा बनाने के लिए क़रीब 75 हज़ार फूल लगते हैं।

    * केसर का पौधा सुगंध देनेवाला बहुवर्षीय होता है और क्षुप 15 से 25 सेमी (आधा गज) ऊंचा, परंतु कांडहीन होता है। इसमें घास की तरह लंबे, पतले व नोकदार पत्ते निकलते हैं। जो मूलोभ्दव (radical), सँकरी, लंबी और नालीदार होती हैं। इनके बीच से पुष्पदंड (scapre) निकलता है, जिस पर नीललोहित वर्ण के एकाकी अथवा एकाधिक पुष्प होते हैं। अप्रजायी होने की वजह से इसमें बीज नहीं पाए जाते हैं। प्याज तुल्य केसर के कंद / गुटिकाएँ (bulb) प्रति वर्ष अगस्त-सितंबर माह में बोए जाते हैं, जो दो-तीन महीने बाद अर्थात नवंबर-दिसंबर तक इसके पत्र तथा पुष्प साथ निकलते हैं। इसके पुष्प की शुष्क कुक्षियों (stigma) को केसर, कुंकुम, जाफरान अथवा सैफ्रन (saffron) कहते हैं। इसमें अकेले या 2 से 3 की संख्या में फूल निकलते हैं। इसके फूलों का रंग बैंगनी, नीला एवं सफेद होता है। ये फूल कीपनुमा आकार के होते हैं। इनके भीतर लाल या नारंगी रंग के तीन मादा भाग पाए जाते हैं। इस मादा भाग को वर्तिका (तन्तु) एवं वर्तिकाग्र कहते हैं। यही केसर कहलाता है। प्रत्येक फूल में केवल तीन केसर ही पाए जाते हैं। लाल-नारंगी रंग के आग की तरह दमकते हुए केसर को संस्कृत में 'अग्निशाखा' नाम से भी जाना जाता है।

    * इन फूलों में पंखुडि़याँ तीन-तीन के दो चक्रों में और तीन पीले रंग के पुंकेशर होते हैं। कुक्षिवृंत (style) नारंग रक्तवर्ण के, अखंड अथवा खंडित और गदाकार होते हैं। इनके ऊपर तीन कुक्षियाँ, लगभग एक इंच लंबी, गहरे, लाल अथवा लालिमायुक्त हल्के भूरे रंग की होती हैं, जिनके किनारे दंतुर या लोमश होते हैं।

    * इन फूलों की इतनी तेज़ खुशबू होती है कि आसपास का क्षेत्र महक उठता है। केसर की गंध तीक्ष्ण, परंतु लाक्षणिक, और स्वाद किंचित् कटु, परंतु रुचिकर, होता है। इसके बीज आयताकार, तीन कोणों वाले होते हैं जिनमें से गोलकार मींगी निकलती है।

    * केसर को निकालने के लिए पहले फूलों को चुनकर किसी छायादार स्थान में बिछा देते हैं। सूख जाने पर फूलों से मादा अंग यानि केसर को अलग कर लेते हैं। रंग एवं आकार के अनुसार इन्हें - मागरा, लच्छी, गुच्छी आदि श्रेणियों में वर्गीकत करते हैं। 150000 फूलों से लगभग 1 किलो सूखा केसर प्राप्त होता है।

    *केसर' खाने में कड़वा होता है, लेकिन खुशबू के कारण विभिन्न व्यंजनों एवं पकवानों में डाला जाता है। इसका उपयोग मक्खन आदि खाद्य द्रव्यों में वर्ण एवं स्वाद लाने के लिये किया जाता हैं। गर्म पानी में डालने पर यह गहरा पीला रंग देता है।

    *असली केसर पानी में पूरी तरह घुल जाती है। केसर को पानी में भिगोकर कपड़े पर रगडने से यदि पीला केसरिया रंग निकले तो उसे असली केसर समझना चाहिए और यदि पहले लाल रंग निकले व बाद में पीला पड़े तो नकली केसर समझना चाहिए।

    उपयोग आयुर्वेदिक नुस्खों में......!
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    * केसर बहुत ही उपयोगी गुणों से युक्त होती है। यह कफ नाशक, मन को प्रसन्न करने वाली, मस्तिष्क को बल देने वाली, हृदय और रक्त के लिए हितकारी, तथा खाद्य पदार्थ और पेय (जैसे दूध) को रंगीन और सुगन्धित करने वाली होती है।

    * चिकित्सा में यह उष्णवीर्य, आर्तवजनक, वात-कफ-नाशक और वेदनास्थापक माना गया है। अत: पीड़ितार्तव, सर्दी जुकाम तथा शिर:शूलादि में प्रयुक्त होता है। यह उत्तेजक, वाजीकारक, यौनशक्ति बनाए रखने वाली, कामोत्तेजक, त्रिदोष नाशक, आक्षेपहर, वातशूल शामक, दीपक, पाचक, रुचिकर, मासिक धर्म साफ़ लाने वाली, गर्भाशय व योनि संकोचन, त्वचा का रंग उज्ज्वल करने वाली, रक्तशोधक, धातु पौष्टिक, प्रदर और निम्न रक्तचाप को ठीक करने वाली, कफ नाशक, मन को प्रसन्न करने वाली, #वातनाड़ियों के लिए शामक, बल्य, वृष्य, मूत्रल, #स्तन (दूध) वर्द्धक, मस्तिष्क को बल देने वाली, हृदय और रक्त के लिए हितकारी, तथा खाद्य पदार्थ और पेय (जैसे दूध) को रंगीन और सुगन्धित करने वाली होती है।

    * आयुर्वेदों के अनुसार केसर उत्तेजक होती है और #कामशक्ति को बढ़ाती है। यह मूत्राशय, तिल्ली, यकृत (लीवर), मस्तिष्क व नेत्रों की तकलीफों में भी लाभकारी होती है। प्रदाह को दूर करने का गुण भी इसमें पाया जाता है।

    * केसर की पेसरी #गर्भाशय की तकलीफ दूर करने में भी प्रयुक्त की जाती है। ल्यूकोरिया एवं #हिस्टीरिया की स्थिति में ग्रहण करने से पीड़ित महिला को फ़ायदा पहुंचता है।

    * किसी भी नवजात शिशु के जन्म से पूर्व उसकी माता को अनिवार्य रूप से प्रतिदिन दूध में केसर घोलकर पीने को दिया जाता है। ऐसी मान्यता है कि केसर का दूध पीने से शिशु का रंग गोरा होता है परंतु इसके कई आयुर्वेदिक गुणों की वजह से यह परंपरा प्राचीन काल से ही चली आ रही है। गर्भवती स्त्री और उसके बच्चे को इन सभी बीमारियों के प्रभाव से बचाने के लिए उन्हें केसर का सेवन कराया जाता है। साथ ही केसर सामान्य महिलाओं के लिए भी बहुपयोगी है। इससे स्त्रियों में होने वाली अनियमित #मासिक स्राव एवं इस दौरान होने वाले दर्द में लाभ मिलता है। यदि किसी स्त्री के गर्भाशय की सूजन है तो उसके लिए केसर का सेवन फ़ायदेमंद रहता है।

    * पुरुषों में #वीर्य शक्ति बढ़ाने हेतु शहद, बादाम और केसर लेने से फ़ायदा होता है।

    * उदर संबंधित अनेक परेशानियों, जैसे अपच, पेट में दर्द, वायु विकार आदि में केसर उपयोगी है।

    * चोट लगने पर या #त्वचा के झुलस जाने पर केसर का लेप लगाने से आराम मिलता है। त्वचा रोग होने पर खरोंच और जख्मों पर केसर लगाने से जख्म जल्दी भरते हैं।

    * केसर बुखार की प्रारिम्भक अवस्था, दाने, चेचक, #चिकन पोक्स व #आन्त्रज्वर को बाहर निकालता है लेकिन दाने निकल आने पर विशेषत: बुखार आदि पित्त के लक्षणों में केसर का उपयोग सावधानी से करना चाहिए।

    * चन्दन को केसर के साथ घिसकर इसका लेप माथे पर लगाने से, सिर, नेत्र और मस्तिष्क को शीतलता, शान्ति और ऊर्जा मिलती है, नाक से #रक्त गिरना बन्द हो जाता है और सिर दर्द दूर होता है।

    * शिशु को सर्दी हो तो केसर की 1-2 पखड़ी 2-4 बूंद दूध के साथ अच्छी तरह घोंटें, ताकि केसर दूध में घुल-मिल जाए। इसे एक चम्मच दूध में मिलाकर सुबह-शाम पिलाएँ। माथे, नाक, छाती व पीठ पर लगाने के लिए केसर जायफल व लौंग का लेप (पानी में) बनाएँ और रात को सोते समय लेप करें।

    * सिरदर्द को दूर करने के लिए केसर का उपयोग किया जा सकता है। सिरदर्द होने पर चंदन और केसर को मिलाकर सिर पर इसका लेप लगाने से तुरंत राहत मिलती है। यह लेप केवल सिरदर्द में ही काम नहीं आता, बल्कि इसे माथे पर लगाने से सिर, आंखों और दिमाग को ठंडक मिलती है। बच्चों के मस्तक पर यदि यह लेप लगाया जाए तो उनका दिमाग तेज होता है।

    *केसर में शीतलता प्रदान करने वाले गुण होते हैं। इसलिए त्वचा के #झुलसने या चोट लगने पर केसर का लेप लगाना चाहिए। इससे तुरंत फायदा होता है और नई त्वचा का निर्माण भी जल्दी ही होता है।

    *केसर महिलाओं के लिए विशेष रूप से लाभप्रद होता है। महिलाओं की कई शिकायतें जैसे - मासिक चक्र में अनियमितता, गर्भाशय की सूजन, मासिक चक्र के समय दर्द होने जैसी समस्याओं में केसर का सेवन करने से आराम मिलता है। नकसीर होने पर चंदन के साथ केसर को मिलाकर लेप लगाइए, नाक से खून बहना बंद हो जाएगा।

    * कृमि नष्ट करने के लिए केसर व कपूर आधी-आधी रत्ती खरल में डालकर 2-4 बूंद दूध टपकाकर घोंटें और एक चम्मच दूध में मिलाकर बच्चे को 2-3 दिन तक पिलाएँ ।

    * बच्चों को बार-बार पतले दस्त लगने को अतिसार होना कहते हैं। बच्चों को पतले दस्त लगने पर केसर की 1-2 पँखुड़ी खरल में डालकर 2-3 बूंद पानी टपकाकर घोंटें। अलग पत्थर पर पानी के साथ जायफल, आम की गुठली, सौंठ और बच बराबर बार घिसें और इस लेप को केसर में मिला लें। इसे एक चम्मच पानी में मिलाकर शिशु को पिला दें। यह सुबह शाम दें



    * गंजे लोगों के लिए तो यह संजीवनी बूटी की तरह कारगर है। जिनके बाल बीच से उड़ जाते हैं, उन्हें थोड़ी सी मुलहठी को दूध में पीस लेना चाहिए। उसके बाद चुटकी भर केसर डाल कर उसका पेस्ट बनाकर सोते समय सिर में लगाने से #गंजेपन की समस्या दूर होती है।


    * यह शरीर को मजबूत बनाती है। लो #ब्लडप्रेशर में यह एक बेहतरीन दवा है। अगर ज्यादा सर्दी-खांसी हो रही हो तो केसर दी जाती है क्योंकि ये कफ का नाश करने वाली औषधि है। अगर सर्दी लग गई हो तो रात्रि में एक गिलास दूध में एक चुटकी केसर और एक चम्मच शहद डालकर मरीज को पिलाया जाए तो उसे अच्छी नींद आती है।