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31 दिसंबर 2015

नाम से जाने अपना चरित्र भाग 2 - Naam se jaane apna chritr Part 2

By With 1 टिप्पणी:



यदि आपके नाम का पहला अक्षर "H" है -

इस नाम के लोग प्राय:संकोची और संवेदनशील होते हैं ये अपनी ख़ुशी और अपना दर्द किसी से शेयर नहीं करते ये रहस्यमयी व्यक्ति होते हैं तथा इनको समझ पाना थोड़ा मुश्किल होता है लेकिन दिल के अच्छे और सच्चे व्यक्ति होते हैं ये तेज़ दिमाग वाले होते हैं ये व्यक्ति ना काहू से दोस्ती और ना ही काहू से बैर वाले होते हैं  इस अक्षर के व्यक्ति अक्सर राजनीति और प्रशासनिक क्षेत्र में दिखायी देते हैं इस नाम वाले लोगों के लिए पैसे काफी मायने रखते हैं ये काफी हंसमुख स्वभाव के होते हैं और अपने आसपास का माहौल भी एकदम हल्का-फुल्का बनाए रखते हैं ये लोग दिल के सच्चे होते हैं काफी रॉयल नेचर के होते हैं और मस्त मौला होकर जीवन गुजारना पसंद करते हैं झटपट निर्णय लेना इनकी काबिलियत है और दूसरों की मदद के लिए आधी रात को भी ये तैयार होते हैंप्यार का इजहार करना इन्हें नहीं आता लेकिन जब ये प्यार में पड़ते हैं तो जी जीन से प्यार करते हैं उनके लिए कुछ भी कर गुजरते हैं ये इन्हें अपने मान-सम्मान की भी बहुत चिंता होती है इनका वैवाहिक जीवन काफी अच्छा होता है ये इंसान पैसा खूब कमाते है लेकिन ये अपने पैसों को सिर्फ अपने ऊपर खर्च करते हैं फिलहाल ये काफी तरक्की करने वाले होते है ऐसे लोग सिर्फ अपनी मर्जी के मालिक होते है ये दूसरों पर हुकूमत करते हैं लेकिन कोई इन पर हुकूम चलाये ये इन्हें बर्दाश्त नहीं ज्ञान का अथाह सागर कहलाने वाले ये व्यक्ति समाज के लिए अलग मिसाल बनते हैं-

यदि आपके नाम का पहला अक्षर "I" है -


यदि किसी लड़की या लड़के का नाम अंग्रेजी के I अक्षर से शुरू होता है तो ऐसे व्यक्ति काफी सुंदर होते हैं और सुंदरता को पसंद भी करते हैं न चाहते हुए भी ये लोगों के आकर्षण का केन्द्र बने रहते हैं इन्हें बच्चों की कंपनी भी काफी अच्छी लगती है धर्म-कर्म में रूचि रखते हैं कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि ऐसे लोग बहुत ही प्यारे और मोहक होते है जिनका साथ हर कोई पसंद करता है इस अक्षर वाले व्यक्ति सिर्फ और सिर्फ प्यार का भूखा है उसे अपनेपन और प्यार की तलाश होती है  ये इंसान बहुत ही भावुक होते हैं ये हर काम दिल से करते हैं इसलिए इन्हें आसानी से इन्हें बेवकूफ भी बनाया जा सकता है ये अक्सर अपने इस स्वभाव के कारण अपनी बहुत सारी उपयोगी चीजों को खो देते हैं इस अक्षर वाले व्यक्तियों को जिंदगी बहुत कुछ देती है लेकिन उसका सुख कम ही मिल पाता है शिक्षा और लेखनी के क्षेत्र में ये विशेष जानकारी रखते है खैर इन्हें कभी पैसे की कमी नहीं होती है प्रेम और पारिवारिक सौगात भी इन्हें थोक मात्रा में मिलती है समाज में ये अच्छी पकड़ रखते है सेक्स लाईफ काफी अच्छी होती है इन्हें अपनी बात पलटने में पल भर भी नहीं लगता और इसके लिए वे यह नहीं देखते कि सही का साथ दे रहे हैं या फिर गलत का ये समझ पाना इनके लिए मुश्किल होता है-

यदि आपके नाम का पहला अक्षर "J" है -

इस नाम के लोग जिंदगी को बहुत ही खुशनुमा अंदाज से जीते है इस नाम का व्यक्ति अपने रिश्तों के प्रति काफी ईमानदार और वफादार होता है इस नाम के व्यक्ति जितने तन से सुन्दर होते हैं उतना ही मन से सुन्दर होते हैं ऐसे लोग जीवन में काफी तरक्की करते है स्वभाव से बेहद ही नखरीले होते हैं ये स्वभाव से काफी चंचल होते हैं लोग इनसे काफी चिढ़ते हैं, क्योंकि इनमें अच्छे गुणों के साथ-साथ खूबसूरती का भी सामंजस्य होता है पैसा,रूतबा, मुहब्बत हर चीज इनके पास थोक मात्रा में होती है इस अक्षर के लोगों के साथ बस एक समस्या होती है और वो है इनका स्वास्थ्य जो कि काफी कमजोर होता है इनको हमेशा कोई न कोई बीमारी घेरे रहती है इनकी सेक्स लाईफ काफी रोमांचित होती है ये प्रेम विवाह पर ज्यादा भरोसा रखते हैं ये पढ़ने-लिखने में थोड़ा पीछे ही रहते हैं, लेकिन जिम्मेदारी की बात करें तो सबसे आगे खड़े रहेंगे हमसफर के रूप में ये जिन्हें मिल जाएं समझिए खुशनसीब हैं वह क्युकि जीवन के हर मोड़ पर ये साथ निभानेवाले होते हैं ये व्यक्ति काफी निडर होते है बिना कुछ सोचे समझे ये किसी को भी कुछ सुना देते है जिसकी वजह से इन्हें लोग मुंहफट कहते हैं ये पैसा तो बहुत कमाते हैं, लेकिन इन्हें इज्जत से कुछ लेना-देना नहीं होता है जहां तक वैवाहिक संबधों का सवाल है तो ये ससुराल पक्ष पर भी अपना रुतबा कायम रखते हैं और लोग इनसे डरते हैं इनके सामने अपनी बात कहने में भी हिचकते हैं-

यदि आपके नाम का पहला अक्षर "K" है -

इस अक्षर वाला व्यक्ति बेहद ही दिखावे वाला होता है किसी को कुछ भी कह देना इनके स्वभाव में शामिल होता है सेक्स लाईफ को भी ये ज्यादा तवज्जों नहीं देते है और ज्यादातर ये लोग अरेंज मैरिज ही करते हैं इनका वैवाहिक जीवन समझौतों पर ही निर्भर होता है इस नाम वाले लोगों को हर चीज में परफेक्शन चाहिए चाहे बेडशीट के बिछाने का तरीका हो या फिर ऑफिस की फाइलें, सारी चीजें इन्हें सेट चाहिए दूसरों से हटकर चलना बेहद भाता है इन्हें- इस अक्षर वाले व्यक्ति बेहद खुबसूरत होते हैं यही वजह है कि लोग इनकी तरफ काफी आकर्षित भी होते है इस नाम के व्यक्ति अपने फायदे के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं पैसे कमाने के मामले में भी ये काफी आगे चलते हैंस्वभाव से ये रोमांटिक होते हैंऔर अपने प्यार का इजहार खुलकर करना इन्हें खूब आता है इन्हें स्मार्ट और समझदार साथी चाहिए और जबतक ऐसा कोई न मिले तब तक किसी एक पर टिकते नहीं ये-

यदि आपके नाम का पहला अक्षर "L" है -

जिस लड़की या लड़के के नाम की शुरुआत अंग्रेजी के 'L' अक्षर से होता है तो उस व्यक्ति के लिए प्यार, रोमांस ही सब कुछ होता है रंग-रूप में भी ये काफी सुंदर होते हैं इस अक्षर वाले लोगों की एक खासियत होती है वो है इस अक्षर का व्यक्ति कभी किसी बड़ी चीज की तमन्ना नहीं रखता हैं इन्हें छोटी-छोटी ही चीजों में खुशी मिलती है इन्हें गुस्सा भी बहुत जल्दी आता है लेकिन इनके गुस्से पर भोलेनाथ की कृपा रहती है इसलिए इनका गुस्सा जल्द ही काफूर हो जाता है इसलिए ये लोग अक्सर साहित्य के क्षेत्र में अपना करियर बनाते हैं पैसों को लेकर समस्या बनती है लेकिन किसी न किसी रास्ते इन्हें हल भी मिल जाता है इन्हें बहुत ज्य़ादा पाने की तमन्ना नहीं होती बल्कि छोटी-मोटी खुशियों से ये खुश रहते हैं ये बहुत कल्पनाशील होते हैं कल्पनाओं में जीते हैं और फैमिली को अहम हिस्सा मानकर चलते हैं प्यार की बात करें तो इनके लिए इस शब्द के मायने ही सब कुछ हैं क्युकी ये बेहद ही रोमांटिक होते हैं-

यदि आपके नाम का पहला अक्षर "M" है -

इस नाम से शुरू होने वाले लोग संकोची और चिंतन में डूबे रहने वाले होते हैं  हर छोटी-बड़ी बात को दिल से लगा लेने वाले होते हैं इसलिए इनका जब दिल टूटता है तो कभी-कभी दूसरों के लिए काफी खतरनाक साबित होते है वैसे ये दिल के काफी साफ इंसान होते है कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि जब तक आप इन्हें छेड़े नहीं तब तक ये आपको नुकसान नहीं पहुंचायेगे इस नाम के व्यक्तियों के लिए प्रेम काफी मायने रखता है और ये अपना प्यार पाने के लिए हर संभव कोशिश भी करते है लेकिन ये धोखा करने वालों को बिल्कुल भी बक्शते नहीं है  इनके ऊपर किस्मत काफी मेहरबान होती है इसलिए धन और इज्जत इन्हें मिल ही जाती है इस अक्षर वाले व्यक्तियों के लिए सेक्स लाईफ काफी मायने रखती है जिद्दी स्वभाव के होते हैं ये जिस चीज को एक बार पकड़ लेते हैं उसे छोड़ते भी नहीं है इसलिए इन्हें संवेदनशील भी कहा जा सकता है ऐसे लोग राजनीति में ज्यादा दिखायी पड़ते है आमतौर पर इन्हें लोग पसंद ही करते है इनका जिद्दी स्वभाव कभी-कभार इन्हें खुद परेशानी में डाल देता है वैसे अपनी फैमिली को ये बेहद प्यार करते हैं खर्च करने से पहले ज्यादा सोच-विचार नहीं करते है -

देखे--नाम से जाने अपना चरित्र भाग 3 - Naam se jaane apna chritr Part 3

उपचार और प्रयोग-

नाम से जाने अपना चरित्र भाग 1 - Naam se jaane apna chritr Part 1

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आपकी पहचान क्या है आपका नाम और आपका नाम आपके चरित्र की व्याख्या करता है राशि जन्म से आपकी कुंडली का विवेचन किया जाता है लेकिन व्यवहारिक रूप से या हर समय प्रयुक्त होने वाला नाम भी आपके जीवन में बहुत महत्व रखता है आइये आज जानते है कि आपके नाम का पहले अक्षर आपके चरित्र की क्या व्याख्या करता है -



यदि आपके नाम का पहला अक्षर A है -

इस नाम वाले लोग काफी मेहनती और धैर्य वाले होते हैं ये काफी अट्रैक्टिव होते है और अट्रैक्टिव दिखने वाले लोग इन्हें ज्यादा पसंद होते हैं ये खुद को किसी भी परिस्थिति में ढाल लेने की गजब की क्षमता रखते हैं तथा इन्हें वैसी चीज ही भाती है जो भीड़ से अलग दिखती हो यदि इनके अध्ययन या करियर की बात करें तो किसी भी काम को अंजाम देने के लिए चाहे जो करना पड़े ये करते हैं लेकिन लक्ष्य तक पहुंचने से पहले ये कभी हारकर बैठते नहीं इस नाम वाले लोग रोमांस के मामले में जरा पीछे रहना ही पसंद करते हैं लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि वे प्यार और अपने करीबी रिश्तों को अहमियत नहीं देते बस- इन्हें इन चीजों का इजहार करना अच्छा नहीं लगता फिर चाहे बात रिश्तों की हो या फिर काम की इनका विचार बिल्कुल खुला होता है सच और कड़वी बात भी इन्हें खुलकर कह दी जाए तो ये मान लेते हैं, लेकिन इशारों में या घुमाकर कुछ कहना-सुनना इन्हें पसंद नहीं इस नाम वाले लोग हिम्मती भी काफी होते हैं, लेकिन यदि इनमें मौजूद कमियों की बात करें तो इन्हें बात-बात पर गुस्सा भी आ जाता है-

यदि आपके नाम का पहला अक्षर B है -

जिनका नाम बी अक्षर से शुरू होता है वे अपनी जिंदगी में नए-नए रास्ते तलासने में यकीन रखते हैं अपने लिए कोई एक रास्ता चुनकर उसपर आगे बढ़ना इन्हें अच्छा नहीं लगता इस अक्षर वाले लोग ज़रा संकोची स्वभाव के होते हैं और काफी सेंसिटिव नेचर के होते हैं ये जल्दी अपने मित्रों से भी नहीं घुलते-मिलते  तथा इनकी लाइफ में कई राज होते हैं, जो इनके करीबी को भी नहीं पता होता ये ज्यादा दोस्त नहीं बनाते, लेकिन जिन्हें बनाते हैं उनके साथ सच्चे होते हैं ये लोग रोमांस के मामले में ये थोड़े खुले होते हैं प्यार का इजहार ये कर लेते हैं पर ये  प्यार को लेकर ये धोखा भी खूब खाते हैं इन्हें खुद पर कंट्रोल रखना आता है तथा ये खूबसूरत चीजों के दीवाने भी होते हैं-

यदि आपके नाम का पहला अक्षर C है -


इस नाम से शुरू होने वाले लोग काफी मिलनसार और दिल जीतने वाले होते है ऐसे व्यक्ति सामाजिक कार्यों में बाद चढ़ कर हिस्सा लेने वाले होते हैं इनके लिए लोगों की भावनाएं काफी मायने रखती है क्योंकि ये खुद भी काफी भावुक होते हैं लेकिन ये स्पष्ट बोलने वाले होते है लेकिन फिर भी ये जान-बूझकर किसी का दिल नहीं दुखाते हैं इनकी सेक्स लाईफ काफी अच्छी होती है, ये आसानी से किसी को भी अपने वश में कर लेते है लेकिन ये ईमानदार होते हैं देखने में भी सी नाम के लोग काफी अच्छे होते है और जो भी करियर चुनते हैं उसमें खासा कामयाब होते हैं क्योंकि इनके काम से ज्यादा इनके व्यवहार से लोग खुश होते हैं जिसका फायदा इनके अपने प्रोफेशनल लाईफ में भी आजीवन मिलता रहता है तथा लक्ष्मी जी की भी इन पर खासी मेहरबानी होती है कुल मिलाकर ऐसे लोग काफी संपन्न होते हैं ये समझे कि इनका सी से शुरू होने वाला नाम इनको भगवान् की देंन है ये दुसरो के साथ दुःख-दर्द के साथ चलते है भले ये ख़ुशी में शरीक न हो पर दुःख में आगे बढ़ कर मदद करना इनकी आदत है प्यार के महत्व की बात करे तो ये जिसको भी पसंद करते है उनके बेहद करीब हो जाते है लेकिन यदि इन्हें अपने हिसाब के कोई न मिले तो मस्त होकर अकेले भी रह लेते हैं वैसे स्वभाव से ये काफी इमोशनल होते हैं-

यदि आपके नाम का पहला अक्षर D है -


इस नाम वाले लोगों को हर मामले में अपार सफलता हाथ लगती है कभी भाग्य साथ न भी दे तो उन्हें विचलित नहीं होना चाहिए, क्योंकि उनकी जिंदगी में आगे चलकर सारी खुशियां लिखी होती हैं लोगों की बात पर ध्यान न देकर अपने मन की करना ही इन्हें भाता है ये जो ठान लेते हैं उसे करके ही मानते हैं काफी जिद्दी स्वाभाव के होते हैं ये बातों के जादूगर होते हैं तथा लड़कियां उन पर तितलियों की तरह मंडराती रहती है मगर वे एक समय में एक ही रिश्ता निभाते हैं इन्हें सुंदर या आकर्षक दिखने के लिए बनने-संवरने की जरूरत नहीं होती है ये लोग ये भी नहीं देखते कि जिनकी मदद के लिए उन्होंने अपना हाथ आगे बढ़ाया है वह उनके दुश्मन की लिस्ट में हैं या दोस्त की लिस्ट में है क्युकी ये किसी की मदद करने में ये कभी पीछे नहीं रहते है -

यदि आपके नाम का पहला अक्षर E है -

इस नाम वाले मुंहफट किस्म के होते हैं हंसी-मजाक की जिंदगी जीना इन्हें पसंद है इन्हें अपने इच्छा अनुरूप सारी चीजें मिल जाती हैं जो इन्हें टोका टाकी करे, उनसे किनारा भी तुरंत हो लेते हैं इस नाम वाले लोग जिंदगी को बेतरतीव जीना पसंद नहीं करते इन्हें सारी चीजें सलीके और सुव्यवस्थित रखना ही पसंद है इस नाम वाले लोग प्यार को लेकर उतने संजीदा नहीं रहते इसलिए इनसे रिश्ते पीछे छूटने का किस्सा लगा ही रहता है शुरुआत में ये दिल फेंक आशिक की तरह व्यवहार करते हैं, क्योंकि इनका दिल कब किसपर आ जाए कह नहीं सकते लेकिन एक सच यह भी है कि जिन्हें ये फाइनली दिल में बिठा लेते हैं उनके प्रति पूरी तरह से सच्चे हो जाते हैं इनकी लिस्ट में लड़के-लड़कियों की पूरी जमात होती है ये जो रिश्ता निभाते है उसके प्रति ईमानदार होते है मतलब ये कि भले ही ये चार लोगों से मोहब्बत करे लेकिन अगर ये किसी से शादी करते है तो अपने हमसफर के प्रति ईमानदार होते है-

यदि आपके नाम का पहला अक्षर F है -

इस नाम वाले लोग काफी जिम्मेदार किस्म के होते हैं हां, इन्हें अकेले रहना काफी भाता है ये स्वभाव से काफी भावुक होते हैं हर चीज को लेकर ये बेहद कॉन्फिडेंट होते हैं सोच-समझकर ही खर्च करना चाहते हैं ये जीवन में हर चीज इनका काफी बैलेंस्ड होता है इस अक्षर वाले बहुत ही प्यारे और ज़रूरत से ज्यादा भावुक और लोगों की मदद करने वाले होते हैं इस अक्षर के लोगों की जिंदगी प्यार से शुरू होती है और प्यार पर ही खत्म होती है ये व्यक्ति सभी कार्य दिल लगाकर करते हैं  इन लोगों की खासियत होती है कि जहाँ भी जाते हैं वहां लोगों को अपना बना लेते हैं इनके अन्दर आत्म विश्वास कूट-कूट कर भरा होता है इस अक्षर के व्यक्ति झगडालू नहीं होते हैं-

यदि आपके नाम का पहला अक्षर G है -


इस नाम के लोग वैसे तो शांत प्रिय होते है जी अक्षर वाले लेकिन जब इन्हें गुस्सा आता है तो सामने वाले की खैर नहीं होती है क्युकी इस अक्षर वाले व्यक्ति गलतियों को दोहराते नहीं हैं बल्कि उससे सबक लेकर आगे बढ़ने की कोशिश करते हैं और खासा सफल भी होते है ये तब तक किसी को परेशान नहीं करते हैं जब तक कोई इन्हें तंग नहीं करता है जी नाम से शुरू होनेवाले नाम वाले लोग दूसरों की मदद के लिए हमेशा ही खड़े होते हैं ये खुद को हर परिस्थितियों में ढाल लेते हैं ये चीजों को गोलमोल करके पेश करना पसंद नहीं करते क्योंकि इनका दिल बिल्कुल साफ होता है अपने किए से जल्द सबक लेते हैं फिलहाल इनमें आत्मविश्वास कूट-कूट कर भरा होता है इस अक्षर वाले व्यक्ति कम बोलने वाले और प्यार पर ज्यादा भरोसा न करने वाले होते हैं अपनी मेहनत पर भरोसा करने वाले ये व्यक्ति जीवन को एक संघर्ष मानकर चलते हैं इसलिए इन्हें अपनी परेशानियों से ज्यादा दिक्कत नहीं होती है इस अक्षर वाले व्यक्तियों को ईश्वर पर काफी भरोसा होता है इसलिए ये हमेशा धर्म-कर्म के काम करते रहते हैं इनका वैवाहिक जीवन हमेश सुखी रहता है इन्हें हर वो चीज मिलती है जिसकी इन्हें चाहत होती है लेकिन हर चीज में इन्हें वक्त लगता है-

क्रमश:- क्लिक करे--नाम से जाने अपना चरित्र भाग 2 - Naam se jaane apna chritr Part 2

उपचार और प्रयोग-

29 दिसंबर 2015

ढेरों क्रीम बिकती है रंग गोरा बनाने की - Fairness to Numerous cream is sold

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सांवला सलोना रंग वास्तव में  बेहद खूबसूरत लगता है लेकिन हमारा भारतीय समाज गोरे रंग को जादा ही प्राथमिकता देता है और इसीलिए हमारे यहां रंग गोरा बनाने वाली ढेरों क्रीम बिकती है जबकि  सच तो यह है कि हमारी त्वचा का रंग नहीं बदला जा सकता बस हम उसे साफ- सुथरी और निखरी हुई बना सकते हैं जरा सा दिमाक लगा के सोचे कि जो क्रीम का प्रचार होता है अगर वो गोरा बना देती तो अफ्रीकन देश के लोग काले नहीं होते ये व्यापार है जो सिर्फ भारत में ही फलता-फूलता है-



आप एक बार आप मान लें कि दुनिया की कोई भी क्रीम आपको गोरा नहीं बना सकती। आपको जो त्वचा प्राकृतिक रूप से मिली है उसी को स्वस्थ और आकर्षक बनाने के जतन करने चाहिए-

घरेलू उपचार करने के लिये आपको कोई भी मंहगी चीज नहीं खरीदनी पडे़गी। बस इसके लिये आपको अपने चेहरे का ख्‍याल रखना पडे़गा-


चेहरे की रंगत गोरी करने के लिये आपको दिन में कई बार चेहरा धोना, चेहरे पर फेस पैक लगाना या फिर नींबू, दही और पपीते से चेहरे की हर दिन मालिश करना आदि करना पडे़गा। ऐसा 7 दिनों तक करने से आपका चेहरा गोरा हो जाएगा। पानी पीना भी बहुत जरुरी है, जिससे शरीर की गंदगी बाहर निकले और आप प्राकृतिक रूप से ग्‍लो करने लगें। तो अगर आपको गोरा बनना है-



अपनाइये हमारे दिये गए आसान से सुझाव-

बाजार की क्रीमों में ब्लीच होता है जो उतने ही समय के लिए उजला दिखाता है जितने समय आप उसे लगाते हैं। इन क्रीमों से त्वचा जल जाती है। धीरे-धीरे आप उसके एडिक्ट हो जाते हैं-

त्वचा की रंगत निखारने के प्राकृतिक तरीके-

सबसे पहले चेहरे को धोएं चेहरे पर पड़ी धूल मिट्टी और गंदगी को हर वक्‍त साफ करें क्‍योंकि ऐसा न करने से चेहरा काला दिखने लगता है ऐसे कई फेस पैक्‍स हैं जो आपको 7 दिनों में गोरा लुक दे सकते हैं। लेकिन इसके साथ आपको स्‍क्रब का भी प्रयोग करना चाहिये जिससे स्‍किन का रंग प्राकृतिक तरीके से निखरे-


नींबू यह एक प्राकृतिक ब्‍लीच है जो आपको गोरा बना सकता है या तो आप इसे डायरेक्‍ट चेहरे पर लगा सकती हैं या फिर इसे फेस पैक में डाल कर प्रयोग कर सकती हैं-

नींबू व संतरे के छिलकों को सुखाकर चूर्ण बना लें। इस पाउडर को हफ्ते में एक बार बिना मलाई के दूध में मिलाकर लगाएं, त्वचा में आकर्षक चमक आएगी-


दही में प्रोबायोटिक तत्‍व होते हैं जो त्‍वचा को साफ कर के उसे अंदर से गोरा करते हैं। हर रोज दही से अपने चेहरे की मसाज करें-

सांवली त्वचा को सलोनी रंगत देने के लिए अपनी मजीठ, हल्दी, चिरौंजी 50-50 ग्रा. लेकर पाउडर बना लें। एक-एक चम्मच सब चीजों को मिलाकर इसमें 6 चम्मच शहद मिलाएं और नींबू का रस तथा गुलाब जल डालकर पेस्ट बना लें। इस पेस्ट को चेहरे, गरदन, बांहों पर लगाएं और एक घंटे के बाद गुनगुने पानी से चेहरा धो दें। ऐसा सप्ताह में दो बार करने से चेहरे का सांवलापन दूर होकर रंग निखर आएगा-

दूध में केसर या एक चम्मच हल्दी का सेवन करने से भी रक्त साफ होता है-

गर्मियों में संतरे का ज्यूस दो बार लेने से रंग साफ होता है-

दो छोटे चम्मच अनार के रस में चुटकी भर हल्दी व थोड़ी-सी मलाई मिलाकर फेंटें। इस लेप को चेहरे पर मले, 15-20 मिनट उपरांत गुलाब जल युक्त पानी से चेहरा धो लें। चेहरा गुलाबी-गुलाबी आभा से दमकने लगेगा-

नीबू व आलूबुखारे का रस उबले आलू में मिलाकर चेहरे पर मलें, त्वचा साफ व कोमल रहेगी-

पके परवल के गूदे को बारीक पीसकर उसमें कच्चा दूध मिलाकर चेहरे पर रगड़ें, सांवलापन दूर हो जाएगा-

सेब के रस में थोड़ा-सा बेसन मिलाकर चेहरे पर मलने से झुर्रियां व झाइयां दूर हो जाती हैं-

आंखों के नीचे का कालापन दूर करने के लिए कच्चे आलू की फांकें रगडऩे से काले धब्बे दूर हो जाएंगे-

गुलाब के फूल की पंखुडिय़ों को पीसकर लेप को ग्लिसरीन में मिलाकर चेहरे पर मलें, चेहरा गुलाब की भीनी-भीनी खुशबू के साथ गुलाबी-गुलाबी आभा में दमकने लगेगा-

माल्टा के रस में शहद व मलाई मिलाकर चेहरे पर लगाने से त्वचा चमकदार बनी रहेगी-

लाल टमाटर व नीबू के रस में मुल्तानी मिट्टी मिलाकर चेहरे पर लगाने से त्वचा की खुश्की दूर होती है-

कागजी नीबू के छिलके जांघों पर मलने से जांघें चिकनी-मुलायक तो होती ही हैं रंगरूप भी निखरता है-


नाशपाती के गूदे को दूध में घोलकर, इसके लेप को चेहरे पर लगाकर रूई से रगड़ें, फिर गुनगुने पानी से धो लें, चेहरा खिल उठेगा-


रात्रि में सोने से पूर्व एक छोटे चम्मच दही में चुटकी भर हल्दी फेंटें इसे हाथों पर मलें तो हाथों का रंग रूप निखरने लगेगा-

ताजा लाल गुलाब का रस होंठों पर लगाने से होठों की आभा दमकने लगती है, नित्य गुलाब का रस मलने से होंठ फटते भी नहीं-

खट्टे फलों के गूदे हाथ-पैरों पर मलें, सूखने पर हाथ पैर धोलें, हाथ पैरों का सौन्दर्य खिल उठेगा-

सभी उपाय नियमित  कुछ  दिन  करने से परिणाम  आएगा  जादू  की अपेक्षा  न करे-

इसे भी देखे- झाइयाँ व झुर्रियाँ का उपचार - Fine Lines and Wrinkles Treatment

उपचार और प्रयोग -http://www.upcharaurprayog.com

28 दिसंबर 2015

शुद्ध शहद की पहचान और ये 75 प्रयोग

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बाजार में और आपके दरवाजे पे आपने शहद बेचते देखा होगा क्या आपको पता है कि शुद्ध शहद की क्या पहचान है मिलावट से बचने के लिए आप को पता होना चाहिए कि जो शहद आप खरीद रहे है वो नकली है या असली और आपको ये भी बतायेगे कि शुद्ध शहद के क्या उपयोग है -


शुद्ध शहद की पहचान-


1- शुद्ध शहद में खुशबू रहती है और वह सर्दी में जम जाता है तथा गरमी में पिघल जाता है-

2- शुद्ध शहद को कुत्ता कभी नहीं खाता-

3- कागज पर शहद डालने से नीचे निशान नहीं आता है-

4- शहद की कुछ बूंदे पानी में डालें यदि यह बूंदे पानी में बनी रहती है तो शहद असली है और शहद की बूंदे पानी में मिल जाती है तो शहद में मिलावट है- 



5- रूई की बत्ती बनाकर शहद में भिगोकर जलाएं यदि बत्ती जलती रहे तो शहद शुद्ध है-

6- एक ज़िंदा मक्खी पकड़कर शहद में डालें उसके ऊपर शहद डालकर मक्खी को दबा दें शहद असली होने पर मक्खी शहद में से अपने आप ही निकल आयेगी और उड़ जायेगी चूँकि मक्खी के पंखों पर शहद नहीं चिपकता-

7- कपड़े पर शहद डालें और फिर पौंछे असली शहद कपडे़ पर नहीं लगता है- 

अब आइये और जाने घर में शुद्ध शहद रखना क्यों जरुरी है-

अनेक रोगों में शहद का प्रयोग -

 1- कुछ बच्चे रात में सोते समय बिस्तर में ही मूत्र (पेशाब) कर देते हैं। यह एक बीमारी होती है। सोने से पहले रात में शहद का सेवन कराते रहने से बच्चों का निद्रावस्था में मूत्र (पेशाब) निकल जाने का रोग दूर हो जाता है-

2- एक चम्मच शुद्ध शहद शीतल पानी में मिलाकर पीने से पेट के दर्द को आराम मिलता है-एक चुटकी सौंठ को थोड़े से शहद में मिलाकर चाटने से काफी लाभ होता है। दो तुलसी की पत्तियां पीस लें। फिर इस चटनी को आधे चम्मच शहद के साथ सेवन करें-

3- रात्री को सोते समय एक गिलास गुनगुने पानी में एक चम्मच शहद मिलाकर पी लें। इसके इस्तेमाल से सुबह पेट साफ हो जाता है।

4- एक गिलास पानी में एक चम्मच नींबू का रस तथा आधा चम्मच शहद मिलाकर लेना चाहिए। इससे अजीर्ण का रोग नष्ट हो जाता है।या शहद में दो काली मिर्च का चूर्ण मिलाकर चाटना चाहिए या फिर अजवायन थोड़ा सा तथा सौंठ दोनों को पीसकर चूर्ण बना लें। इस चूर्ण को शहद के साथ चाटें।शहद को जरा सा गुनगुने पानी के साथ लेना चाहिए-

5- शहद में सौंफ, धनिया तथा जीरा का चूर्ण बनाकर मिला लें और दिन में कई बार चाटें। इससे दस्त में लाभ मिलता है।अनार दाना चूर्ण शहद के साथ चाटने से दस्त बंद हो जाते हैं-

6- अजवायन का चूर्ण एक चुटकी को एक चम्मच शहद के साथ लेना चाहिए। दिन में तीन बार यह चूर्ण लेने से पेट के कीड़े मर जाते हैं-

7- धनिया तथा जीरा लेकर चूर्ण बना लें और शहद मिलाकर धीरे-धीरे चाटना चाहिए। इससे अम्लपित्त नष्ट होता है-

8- सौंफ, धनियां तथा अजवायन इन तीनों को बराबर मात्रा में लेकर पीस लें। फिर इस चूर्ण में से आधा चम्मच चूर्ण को शहद के साथ सुबह, दोपहर और शाम को इसका सेवन करना चाहिए। इससे कब्ज दूर होती है-

9- त्रिफला का चूर्ण शहद के साथ सेवन करें। इससे पीलिया का रोग नष्ट हो जाता है। गिलोय का रस 12 ग्राम शहद के साथ दिन में दो बार लें। नीम के पत्तों का रस आधा चम्मच शहद के साथ सुबह-शाम सेवन करना चाहिए-

10- सिर पर शुद्ध शहद का लेप करना चाहिए। कुछ ही समय में सिर का दर्द खत्म हो जायेगा। आधा चम्मच शहद और एक चम्मच देशी घी मिलाकर सिर पर लगाना चाहिए। घी तथा शहद के सूखने के बाद दोबारा लेप करना चाहिए। यदि पित्त के कारण सिर में दर्द हो तो दोनों कनपटियों पर शहद लगायें। साथ ही थोड़ा शहद भी चाटना चाहिए-

11- सर्दी, गर्मी या पाचन क्रिया की खराबी के कारण सिर में दर्द हो तो नींबू के रस में शहद को मिलाकर माथे पर लेप करना चाहिए-

12- कागज के टुकड़ों पर शहद और चूना को मिलाकर माथे के जिस भाग में दर्द हो उस भाग पर रख देने से सिर का दर्द दूर हो जाता है तथा भोजन के साथ शहद लेने से सिर का दर्द दूर हो जाता है-

13- शहद को सलाई या अंगुली की सहायता से काजल की तरह आंखों में सुबह के समय तथा रात को सोते समय लगाना चाहिए। काजल में शहद मिलाकर बराबर लगाते रहने से भी रतौंधी की बीमारी समाप्त हो जाती है। शहद को आंखों में काजल की तरह लगाने से रतौंधी रोग दूर होता है। आंखों की रोशनी भी बढ़ती है-

14- एक नींबू पानी में उबालें फिर निकालकर कांच के गिलास में निचोड़ लें। इसमें 28 मिलीलीटर ग्लिसरीन और 84 मिलीलीटर शहद मिलाकर हिलाएं। एक-एक चम्मच चार बार पीने से खांसी बंद हो जाती है। शहद खांसी में आराम देता है। 12 ग्राम शहद को दिन में तीन बार चाटने से कफ निकल जाता है और खांसी ठीक हो जाती है। थोड़ी सी फिटकरी को तवे पर भून लेते हैं। इस 1 चुटकी फिटकरी को शहद के साथ दिन में 3 बार चाटने से खांसी में लाभ मिलता है-

15- काली खांसी के लिए सबसे पहले रोगी की कब्ज को दूर करना चाहिए। इसके लिए एरण्ड का तेल पिलाया जा सकता है। इसके बाद चिकित्सा आरम्भ शुरू करनी चाहिए। चिकित्सा के लिए शहद में लौंग के तेल की एक बूंद तथा अदरक के रस की दस बूंदे मिलाकर सुबह, दोपहर और शाम को देनी चाहिए-

16- दमा के लिए शहद में कुठार रस 4 बूंद मिलाकर दिन में 3-4 बार देना चाहिए। इससे दमा का रोग नष्ट हो जाता है-

17- सोमलता, कूट, बहेड़ा, मुलेठी, अडूसा के पत्ते, अर्जुन की छाल तथा काकड़ासिंगी सबका एक समान मात्रा में लेकर पीस लें। इसमें से एक चम्मच चूर्ण शहद के साथ सेवन करें। प्यास लगने पर गर्म पानी पीयें-

18- पसलियों में दर्द के लिए सांभर सींग को पानी में घिसकर शहद के साथ मिलाकर पसलियों पर लेप करना चाहिए-

19- एक कप दूध में एक चम्मच शहद मिलाकर सुबह के समय पीने से ताकत बढ़ती है-

20- जुकाम के लिए शहद और अदरक का रस एक-एक चम्मच मिलाकर सुबह-शाम दिन में दो बार पीने से जुकाम खत्म हो जाता है और भूख बढ़ जाती है-

21- दो चम्मच शहद, 200 मिलीलीटर गुनगुना दूध और आधे चम्मच मीठे सोडे को एक साथ मिलाकर सुबह और शाम पीने से जुकाम, फ्लू ठीक हो जाता है। इसको पीने से बहुत पसीना आता है पर पसीना आने पर रोगी को हवा नहीं लगने देना चाहिए-

22- 20 ग्राम शहद, आधा ग्राम सेंधा-नमक और आधा ग्राम हल्दी को 80 मिलीलीटर पानी में डालकर उबाल कर रख लें। कुछ देर बाद जब पानी हल्का सा गर्म रह जाये तो इस पानी को सोते समय पीने से जुकाम दूर हो जाता है-


23- बिच्छू के डंक मारे हुए स्थान पर शहद लगाने से दर्द कम हो जाता है-


24- जलन के लिए नियमित सुबह 20 ग्राम शहद ठंडे पानी में मिलाकर सेवन करने से जलन, खुजली और फुन्सियों जैसी चर्म रोग जड़मूल से समाप्त हो जाती है।


25- शरीर के जले हुए अंगो पर शहद लगाने से जलन दूर होती है। जख्म होने पर शहद को तब तक लगाते रहे जब तक कि जख्म ठीक ना हो जायें। जख्म ठीक होने के बाद सफेद निशान बन जाते हैं। उन पर शहद लगाकर पट्टी बांधते रहने से निशान मिट जाते हैं-

26- शीघ्रपतन के लिए स्त्री-संग सम्भोग से एक घण्टा पहले पुरुष की नाभि में शहद में भिगोया हुआ रूई का फोहा रखने से पुरुष का जल्दी स्खलन नही होता अर्थात पुरुष का लिंग शिथिल नहीं होता है-


27- बलगम युक्त खांसी के लिए 5 ग्राम शहद दिन में चार बार चाटने से बलगम निकल कर खांसी दूर होती है। शहद और अडूसा के पत्तों का रस एक-एक चम्मच तथा अदरक का रस आधा चम्मच मिलाकर पीने से खांसी नष्ट हो जाती है-

28- उल्टी के लिए गुड़ को शहद में मिलाकर सेवन करने से उल्टी बंद हो जाती है। उल्टी होने पर शहद को चाटने से उल्टी होना बंद हो जाती है। शहद में लौंग का चूर्ण मिलाकर चाटने से गर्भावस्था में उल्टी आने से छुटकारा मिलता है-

29- रक्तविकार के लिए बकरी के दूध में आठवां हिस्सा शहद मिलाकर पीने से खून साफ हो जाता है। इसका प्रयोग करते समय नमक और मिर्च का त्याग कर देना आवश्यक है-

30- यक्ष्मा या टी.बी. के लिए ताजा मक्खन के साथ शहद का सेवन करने से क्षय रोग में लाभ होता है। शहद में करेले का चूर्ण डालकर चाटना चाहिए-

31- हाईब्लडप्रेशर के लिए दो चम्मच शहद और नींबू का रस एक चम्मच मिलाकर सुबह-शाम दिन में दो से तीन बार सेवन करने से हाई बल्डप्रेशर में लाभ होता है-

32- कान दर्द के लिए कान में शहद डालने से कान की पीव और कान का दर्द नष्ट हो जाता है। कान में कनखजूरा सदृश जीव-जंतु घुस गया हो तो शहद और तेल मिलाकर उसकी कुछ बूंदे कान में डालने से लाभ होता है-


33- यदि आंख आई है तो 1 ग्राम पिसे हुए नमक को शहद में मिलाकर आंखों में सुबह और शाम लगाऐं। सोनामक्खी को पीसकर और शहद में मिलाकर आंखों में सुबह और सांय लगाए। चन्द्रोदय वर्ति (बत्ती) को पीसकर शहद के साथ आंखों में लगाने से आंखों के रोग दूर होते हैं-

34- मलेरिया का बुखार के लिए शुद्ध शहद 20 ग्राम, सैंधानमक आधा ग्राम, हल्दी आधा ग्राम को पीसकर 80 ग्राम की मात्रा में गर्म पानी में डालकर रात को पीने से मलेरिया का बुखार और जुकाम ठीक हो जाता है-


35- फेफड़ों के रोगों में शहद लाभदायक रहता है। श्वास में और फेफड़ों के रोगों में शहद अधिक प्रयोग करते हैं-


36-दांतों का दर्द के लिए 1 चम्मच शहद में, लहसुन का रस 20 बूंद मिलाकर प्रतिदिन सुबह-शाम चाटें। इससे पायरिया, मसूढ़ों की सूजन, दर्द, मुंह की दुर्गन्ध आदि खत्म होती है। मसूढ़ों में सूजन व खून निकलने के कारण दांत हिलने लगते हैं। शहद अथवा सरसों के तेल से कुल्ला करने से मसूढ़ों का रोग नष्ट हो जाता है-

37- इन्फ्लुएन्जा के लिए शहद में पीपल का 1 चुटकी चूर्ण मिलाकर चाटने से आराम मिलता है।2 चम्मच शहद, 200 मिलीलीटर गर्म दूध, आधा चम्मच मीठा सोड़ा मिलाकर सुबह और शाम को पिलाने से इन्फ्लुएन्जा पसीना आकर ठीक हो जाता है-


38- बच्चों के दांत निकलते समय मसूढ़ों पर शहद मलने से दांत निकलते समय दर्द में आराम रहता है-

39- निमोनिया रोग में रोगी के शरीर की पाचन-क्रिया प्रभावित होती है इसलिए सीने तथा पसलियों पर शुद्ध शहद की मालिश करें और थोड़ा सा शहद गुनगुने पानी में डालकर रोगी को पिलाने से इस रोग में लाभ होता है-

40- जीभ की प्रदाह और सूजन के लिए जीभ के रोग में शहद को घोलकर मुंह में भरकर रखने से जीभ के रोग में लाभ होता है-



41- गर्भनिरोध के लिए चूहे की मींगनी शहद में मिलाकर योनि में रखने से गर्भ नहीं ठहरता है। शहद 250 ग्राम को हाथी की लीद (गोबर) का रस 250 मिलीलीटर की मात्रा में शहद के साथ ऋतु (माहवारी) होने के बाद स्त्रियों को सेवन कराने से गर्भधारण नहीं होता है-

42- लाख के पानी में शहद मिलाकर पीने से खून की उल्टी होना रुक जाती है-


43- मुंह के छाले के लिए नीलाथोथा लगभग 1 ग्राम का चौथा भाग को भुन पीसकर 10 ग्राम शहद में मिलालें। इस मिश्रण को रूई से छालों पर लगायें तथा लार बाहर निकलने दें। मुंह की गंदगी लार के रूप में मुंह से बाहर निकाल कर छालों को ठीक करती है-

44- गर्भावस्था में महिलाओं के शरीर में रक्त की कमी आ जाती है। गर्भावस्था के समय रक्त बढ़ाने वाली चीजों का अधिक सेवन करना चाहिए। महिलाओं को दो चम्मच शहद प्रतिदिन सेवन करने से रक्त की कमी नहीं होती है। इससे शारीरिक शक्ति बढ़ती है और बच्चा मोटा और ताजा होता है। गर्भवती महिला को गर्भधारण के शुरू से ही या अंतिम तीन महीनों में दूध और शहद पिलाने से बच्चा स्वस्थ और मोटा ताजा होता है-


45- शहद में उंगली डूबोकर दिन में 3 बार चाटने से हिचकी से आराम मिलता है। शहद और काला नमक में नींबू का रस मिलाकर सेवन करने से हिचकी से आराम मिलता है। प्याज के रस में शहद मिलाकर चाटने से हिचकी बंद हो जाती है-

46- कान का दर्द के लिए लगभग 3 ग्राम शहद, 6 मिलीलीटर अदरक का रस, 3 मिलीलीटर तिल का तेल और लगभग 1 ग्राम का चौथा भाग सेंधानमक को एक साथ मिलाकर इसकी थोड़ी सी बूंदे कान में डालकर उसके ऊपर से रूई लगा देने से कान से कम सुनाई देना, कान का दर्द, कान में अजीब-अजीब सी आवाजे सुनाई देना आदि रोग दूर हो जाते हैं-

47- शहद में समुद्रफेन को घिसकर कान में डालने से बहरेपन का रोग ठीक हो जाता है-

48- शहद और दूध मिलाकर पीने से धातु (वीर्य) की कमी दूर होती है। और शरीर बलवान होता है-


49- शहद और नीम की गोंद को बराबर मात्रा में एक साथ मिलाकर कान में 2-2 बूंद डालने से कान मे से मवाद का बहना बंद हो जाता है-शहद की 3-4 बूंदे कान में डालने से कान का दर्द पूरी तरह से ठीक हो जाता है। कान को अच्छी तरह से साफ करके उसमे रसौत, शहद और और औरत के दूध को एक साथ मिलाकर 2-3 बूंदे रोजाना 3 बार कान में डालने से कान में से मवाद का बहना बंद हो जाता है-


50- यदि कान में कुछ पड़ जाये तो रूई की एक बत्ती बनाकर शहद में भिगो लें और कान में धीरे-धीरे से घुमायें। ऐसा करने से कान में जितने भी छोटे-मोटे कीड़े-मकोड़े होगें वो बत्ती के साथ चिपककर बाहर आ जायेंगे-


51- पुराने से पुराने घाव में हरीतकी को पानी में पीसकर शहद के साथ मिलाकर लेप करने से घाव शीघ्र ही ठीक हो जाता है। शहद लगाने से घाव जल्द भरते है-


52- पक्षाघात-लकवा-फालिस फेसियल, परालिसिस लगभग 20 से 25 दिन तक रोजाना लगभग 150 ग्राम शहद शुद्ध पानी में मिलाकर रोगी को देने से शरीर का लकवा ठीक हो जाता है। लगभग 28 मिलीलीटर पानी को उबालें और इस पानी के ठंडा होने पर उसमें दो चम्मच शहद डालकर पीड़ित व्यक्ति को पिलाने से कैल्शियम की मात्रा शरीर में उचित रूप में आ जाती है जोकि लकवे से पीड़ित भाग को ठीक करने में मददगार होती है-


53- शहद में एक चुटकी अफीम मिलाकर और उसमें घिसकर चाटने से पेचिश के रोगी का रोग दूर हो जाता है-


54- शहद और सेंधानमक को मिलाकर बत्ती बनायें। बत्ती को नासूर में रखने से भगन्दर रोग में आराम मिलता है-


55- मोच के स्थान पर शहद और चूना मिलाकर हल्की मालिश करने से आराम होता है-


56- स्त्री को गुनगुने गर्म पानी के टब में बैठायें तथा शहद में भिगोये हुए कपडे़ को योनि में रखे। इससे सर्दी का असर दूर हो जाता है और प्रसव हो जाता है-


57- शहद को मुंह में भरकर कुछ देर तक रखकर कुल्ला करें। इससे तेज प्यास शांत हो जाती है। पानी में शहद या चीनी मिलाकर पीने से गले की जलन व प्यास मिट जाती है। 20 ग्राम शहद को मुंह में 10 मिनट तक रखें फिर कुल्ला कर दें। इससे अधिक तेज प्यास भी शांत हो जाती है-


58- 20 ग्राम शहद में 40 मिलीलीटर पानी डालकर उबालकर रख लें, फिर इस पानी को पिलाने से जलोदर की बीमारी में लाभ होता है। शहद और पीपल का चूर्ण छाछ में मिलाकर पीने से लाभ होगा-


59- मासिक स्राव के लिए शहद के साथ कबूतर की बीट मिलाकर खाने से रजोदर्शन (माहवारी) होता है और बांझपन दूर हो जाता है-


60- शीतपित्त के लिए केसर 6 ग्राम, शहद 25 ग्राम रोगी को सुबह-शाम खिलाने से शीतपित्त में लाभ मिलता है। एक चम्मच शहद और एक चम्मच त्रिफला मिलाकर सुबह-शाम खाने से भी लाभ होता है-


61- मोटापा (स्थूलता) दूर करने के लिए 120 ग्राम से लेकर 240 ग्राम शहद को 100 से 200 मिलीलीटर गुनगुने पानी में मिलाकर दिन में 3 बार खुराक के रूप में सेवन करें-


62- गिल्टी (ट्यूमर) के लिए चूना और शहद को अच्छी तरह से मिलाकर गिल्टी पर लगाने से रोग में आराम मिलता है-


63- शहद का रोज दूध में मिलाकर सेवन करने से मोटापा बढ़ता हैं-


64- शहद के साथ लगभग 1-2 ग्राम पोस्ता पीसकर इसको शहद में घोलकर रोजाना सोने से पहले रोगी को देने से अच्छी नींद आती है। इससे रोगी को आराम से नींद आ जाती है। शहद के साथ लगभग 3-9 ग्राम बहेड़ा के चूर्ण को रोगी को सुबह और शाम को सेवन करने से लाभ प्राप्त होता है-

65- नींद ना आना (अनिद्रा) के लिए एक-एक चम्मच नींबू का रस और शहद को मिलाकर रात को सोने से पहले दो चम्मच पीने से नींद आ जाती है। जब नींद खुले तब दो चम्मच पुन: लेने पर नींद आ जाती है और यदि केवल पानी के गिलास में शहद की दो चम्मच डालकर पीने से नींद आ जाती है। शहद या शर्करा के शर्बत में पोस्तादाना को पीसकर इसको घोलकर सेवन करने से नींद अच्छी आती है-


66- आधासीसी (माइग्रेन) के लिए इस रोग में सूर्य उगने के साथ दर्द का बढ़ना और ढलने के साथ सिर दर्द का कम होना होता है, तो जिस ओर सिर में दर्द हो रहा हो उसके दूसरी ओर के नाक के नथुने में एक बूंद शहद डालने से सिर के दर्द में आराम मिलता है। रोजाना भोजन के समय दो चम्मच शहद लेते रहने से आधे सिर में दर्द व उससे होने वाली उल्टी आदि बंद हो जाती हैं-


67- नाक के रोग के लिए शहद या गुड़ के साथ गूलर के पके हुए फल को खाने से नाक से खून आना बंद हो जाता है।


68- शहद के साथ लगभग 1 ग्राम का चौथा भाग से लगभग 1 ग्राम सुहागे की खील (लावा) को चटाने से आक्षेप और मिर्गी में बहुत आराम आता है। शहद के साथ लगभग 1 ग्राम का चौथा भाग जटामांसी का चूर्ण सुबह और शाम रोगी को देने से आक्षेप के दौरे ठीक हो जाते हैं-



69- तंग योनि को शिथिल करने के लिए 10 ग्राम शहद को 5 ग्राम देशी घी में मिलाकर योनि पर लगाने से तंग योनि शिथिल होती है-

70- शहद के साथ लगभग तीन ग्राम कलौंजी का सुबह के समय सेवन करने से भूलने की बीमारी दूर हो जाती है-


71- शहद के साथ लगभग 1 ग्राम का चौथा भाग चांदी की भस्म सुबह और शाम को लेने से बुद्धि के विकास में वृद्धि होती है-


72- शहद और पीपल का पीसा हुआ चूर्ण छाछ के साथ पीने से छाती के दर्द में लाभ मिलता है-


73- चिड़चिडापन और मन की उदासी के लिए शहद के साथ गुल्म कुठार की लगभग 1 या 2 गोलियां सुबह और शाम को देने से चिड़चिड़ा स्वभाव और मन की उदासी दूर हो जाती है-


74- शहद में लगभग 3 ग्राम कलौंजी का चूर्ण मिलाकर चाटने से याददास्त तेज हो जाती है। लगभग 30 ग्राम शहद के साथ 20 ग्राम घी मिलाकर भोजन के बाद रोजाना लेने से दिमाग की याददास्त तेज होती है-


75- आंख में जलन के लिए शहद के साथ निबौंली (नीम का फल) का गूदा मिलाकर आंखों में काजल की तरह लगना चाहिए। शुद्ध शहद को सलाई या अंगुली की सहायता से काजल की तरह आंख में लगायें-तथा आंखों के रोग के लिए एक ग्राम गुरुच का रस तथा आधा चम्मच शहद को मिला लें। फिर इसे आंखों में नियम से रोज सलाई से लगायें। आंखों की खुजली, दर्द, मोतियाबिंद तथा अन्य सभी रोगों के लिए यह उपयोगी अंजन (काजल) है-


सावधानियां -

शहद को अग्नि (आग) पर कभी गरम नही करना चाहिए और न ही अधिक गर्म चीजें शहद में मिलानी चाहिए इससे शहद के गुण समाप्त हो जाते हैं- 

इसको हल्के गरम दूध या पानी में ही मिला कर सेवन करना चाहिए- 

तेल, घी, चिकने पदार्थ के साथ सममात्रा (समान मात्रा) में शहद मिलाने से जहर बन जाता है-

यदि शहद से कोई हानि हो तो नींबू का सेवन करें। ऐसी स्थिति में नीबू का सेवन करना रोगों को दूर कर लाभ पहुंचाता है-


उपचार और प्रयोग -

27 दिसंबर 2015

रूसी-डेंड्रफ का उपचार- Treatment of Russian-Dendrf

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महिलाओं के बालों में बार-बार रूसी होना एक कॉमन प्रॉब्लम है बार-बार रूसी होने का मुख्य कारण सिर में गंदगी का होना, रक्त संचार में गड़बड़ी या असंतुलित भोजन भी हो सकता है यह एक छूत का रोग है इसीलिए जिन लोगों के बालों में रूसी हो उनका हेयरब्रश, तौलिया, तकिया आदि अलग रखने चाहिए यदि आप भी रूसी से परेशान हैं  तो लगातार खुजलाने से स्थितियाँ और खराब हो जाती हैं और दाने पड़ जाते हैं रूसी वाला शैम्पू खरीदने की रस्म अदायगी को छोड़िये-



आज सर में रूसी की समस्‍या बहुत आम हो चुकी है इसकी वजह से बाल झड़ना तथा खुजली मचने जैसी समस्‍या और पैदा हो जाती है लेकिन इससे पहले की आप इस समस्‍या का इलाज ढूढें, उससे पहले रूसी के पीछे के कुछ आश्चर्यजनक तथ्‍य को जान लें- 

हम में से कई लोग यह मानते हैं कि सर में रूसी तभी होती है, जब हमारे सर की त्‍वचा रूखी होती है। लेकिन यह कारण बिल्‍कुल ही गलत है क्‍योंकि इसके पीछे छुपी हुई है एक यीस्‍ट, जो कि सर की मृत्‍य त्‍वचा को खा कर जीती है या फिर सर में जमें हुए तेल को। इस वजह से हमारे सर की त्‍वचा कोशिका बहुत जल्‍दी-जल्‍दी झडने लगती है और हम समझते हैं कि हमारे सर में रूसी हो गई है-

इससे मुक्ति पाने के साधारण उपाय -


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आप बाजार से तीन या चार नीबू लाये नीबुओं के छिलके उतारकर उन्हें चार या पांच कप पानी में पन्द्रह से बीस मिनट के लिये उबालें। जब ठंडा हो जाये तो इस घोल से सप्ताह में कम से कम एक बार अपने बालों को धोयें। या फिर आप नींबू को काट कर अपने बालों में रगड़ेें और इसे 10-15 मिनट के लिए रहने दें। बाद में साफ पानी से बालों को धोएं।यह उपचार चिपचिपेपन को दूर करता है, रूसी को रोकता है और आपके बालों को चमकीला बनाता है-

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आप दो चम्मच मेंथी को रात भर पानी में भिगोयें और अगली सुबह उन्हें पीस कर लेप बना लें। इस लेप को अपने बालों और सिर पर कम से कम 30 मिनट के लिये लगायें। 30 मिनट के बाद बालों को अच्छी तरह से धुलें। बेहतर परिणाम के लिये इस प्रक्रिया को चार हफ्तों के लिये दोहरायें।या आप मेथी के दानों को रात भर पानी में भिगोएं। अगले दिन सुबह इन्हें पीसकर इसमें सेब साइडर सिरके को मिलाकर एक पेस्ट तैयार करें। इस पेस्ट को अपने बालों में लगाएं। 30 मिनट बाद अपने बालों को किसी सौम्य शैंपू से धोएं। यह तरीका खुजली व रूखेपन से राहत दिलाएगा-

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आप सिरके और पानी की समान मात्रा में मिलाकर एक मिश्रण बना लें। इस मिश्रण को अपने सिर पर लगाकर रात भर के लिये छोड़ दें। अगली सुबह अपने बालों को बच्चों वाले सौम्य शैम्पू से धुलें-

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आपके बालों के लिये अण्डे दो अण्डों को फेंटकर बने लेप को अपने सिर पर लगायें और एक घण्टे बाद अच्छी तरह से धो लें। इस उपचार से आपके बालों में रूसी तथा बालों का गिरना कम होगा-


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एलो वेरा का प्रयोग नहाने से 20 मिनट पूर्व एलो वेरा जेल अपने सिर पर लगायें। 20 मिनट के लिये छोड़ने के बाद अपने बालों को शैम्पू से धुलें।ध्यान रखें कि जेल लगाते वक्त आपके बालों में तेल नहीं लगा होना चाहिए। रूखे व घुंघराले बालों वाले लोग अपने बालों को मुलायम बनाने के लिए इस तरीके को आजमा सकते हैं-


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अपने सिर को सेब द्वारा बचायें सेब और सन्तरे की बराबर मात्रा लेकर उसका लेप बना लें और फिर इसे अपने सिर पर लगायें। इस लेप को लगाने के 20 से 30 मिनट बाद सिर को शैम्पू से धुलें-


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तुलसी का जादू तुलसी और आँवले के पाउडर को पानी के साथ मिश्रित कर लेप बना लें। इस लेप की मालिश सिर पर करें। लगभग आधे घण्टे के लिये लेप लगा रहने दें। इसके बाद पानी और शैंपू की मदद से बालों को अच्छी तरह से धुलें-

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नारियल तेल 1 चम्मच नींबू के रस के साथ 5 चम्मच नारियल तेल का मिश्रण बनायें और इसे अपने सिर पर लगायें। इस मिश्रण को लगाने के 20 से 30 मिनट बाद अच्छे शैम्पू से धुलें-


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प्याज का लेप अपने सिर पर प्याज का लेप लगायें और इसे एक घण्टे तक लगा रहने दें। इसे अच्छी तरह से धोने के बाद ताजे नींबू रस से मालिश करें जिससे कि बालों से प्याज की बदबू निकल जाये-


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अदरक और चुकन्दर का लेप कुछ अदरक और चुकन्दर को पीसकर लेप बना लें। इस लेप से सिर पर मालिश करें और रात भर के लिये छोड़ दें। अगली सुबह अच्छी तरह से धो लें और इस प्रक्रिया को 4 से 5 रातों के लिये दोहरायें-

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नीम की पत्तियों का लेप नीम की कुछ पत्तियों को पतला पीस कर लेप बना ले और सीधे अपने सूखे सिर पर लगायें। इस लेप एक घण्टे तक रखने के बाद गरम या ठण्डे पानी से इसे साफ करें-


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बेकिंग सोडा उपचार शैम्पू करते समय एक चुटकी बेकिंग सोडा अपने बालों में डालकर मालिश करें। 15 से 20 मिनट बाद इसे धो डालें-

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रूसी के लिये लहसुन 2 चम्मच लहसुन के पाउडर के साथ एक चम्मच नींबू रस मिलाकर लेप बना लें। इस लेप को सिर पर लगा के 30 से 40 मिनट के लिये छोड़ें। फिर इसको शैम्पू और ठण्डे पानी से अच्छी तरह से धो डालें।

आप रात भर रीठा को पानी में भिगोएं। अगले दिन इन्हें उबालकर छान लें। अब इस पानी में आंवले के रस को मिलाकर अपने बालों को धोएं या फिर आंवले के पाउडर में छने हुए रीठा के पानी को डालकर एक पेस्ट तैयार करें। इस पेस्ट को अपने बालों में लगाएं और 30 मिनटों के लिए रहने दें। कुछ देर बाद अपने बालों को शैंपू से धो लें।या आप रीठा वाले साबुन का उपयोग कर सकते हैं-

बेसन उपचार दही के साथ मिलाकर बेसन का लेप अपने सिर पर लगायें। 20 से 30 मिनट बाद ठण्डे पानी से धोयें-

रोज़मेरी तकनीक रोज़मेरी की पत्तियों को सिरके के साथ निचोड़े और फिर इसे अपने सिर पर 15 से 20 मिनट के लिये लगायें। फिर अच्छी तरह से बालों को धोयें। रूसी के उपचार के लिये आप सिर पर रोज़मेरी तेल और नारियल तेल का मिश्रण भी लगा सकते हैं-

दही का घोल अपने सिर और बालों पर थोड़ा सा दही लगाकर कम से से कम एक घण्टे इन्तजार करें। इसके बाद सौम्य शैंपू से इसे अच्छी तरह धो लें। यह प्रक्रिया सप्ताह में कम से कम दो बार करें-

गुनगुने तेल की मालिश बादाम, नारियल या जैतून के गुनगुने तेल से सिर की मालिश करने से रूसी कम होगी। मालिश के बाद तेल को सिर पर रात भर के लिये छोड़ें-

नियमित रूप से बालों को धुलें प्राकृतिक घरेलू नुस्खों से अपने बालों को रोज अथवा एकान्तर दिवसों पर धुलकर रूसी से बचा जा सकता है। बालों का ध्यान रखकर और सिर की भलीभाँति सफाई से भी रूसी से बचा जा सकता है-

उपचार और प्रयोग -

पेट की मालिश के क्या फायदे हैं

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हमारे भारत-वर्ष में प्राचीन बहुत सी प्रथाए है लेकिन अज्ञानता वश हम उनके द्वारा होने वाले लाभों से आज भी उतने ही अनजान है नई पीढ़ी हमारे पुराने ज्ञान को अगर सही रूप से उसकी वैज्ञानिकता को समझ ले तो हम काफी रोगों से दूर रह सकते है हमारा एक छोटा सा प्रयास है कि हम कुछ इस प्रकार की चीजो से आपको अवगत कराये -



पेट की मालिश का प्रयोग हमारे यहां प्राचीन काल से चली आ रही है लेकिन इसके गुणों से आज भी बहुत लोग अनजान है पेट की मालिश हमें कई प्रकार के रोगों से मुक्त रखता है ये हमें पेट दर्द ,तनाव ,और होनेवाली पेट की खराबी से कोसो दूर रखता है यदि आप रोज न कर सके तो हफ्ते में दो बार अवश्य ही पेट की मालिश करे -

पेट की मालिश या मसाज करने से पहले आप पीठ के बल जमीन पर लेट जाएं तथा उसके बाद हाथों में तेल लगाएं और गोलाई में घुमाते हुए मसाज करें तीन से चार मिनट में 30 से 40 बार गोलाई में हाथो को घुमाते हुए मजाज करें दिमाग को पूरी तरह से शांत कर के अपना ध्‍यान मालिश में लगाएं हफ्ते भर में सिर्फ दो बार की जाने वाली यह 3-4  मिनटों की मसाज आपको कई पेट संबन्‍धित रोगों से छुटकारा दिलाएगी-

ये इसके फायदे है -

1- पेट की मालिश करने से पेट चयापचय छमता बढ़ती है और पाचन शक्ति को बल मिलता है यह उन लोगों के लिये अच्‍छी हो सकती है जो लोग वेट कम करने की बहुत महनत करते हैं और उन्‍हें किसी भी चीज का कोई फायदा नहीं मिलता है -

2- जिन लोगो को खाना ठीक से हजम न होने की वजह से पेट फूलना और उसमें गैस बनने की समस्‍या मुख्य कारण होता है यकीन माने कि पेट की मालिश करने से पेट की गैस आराम से निकल जाती है और अपच भी नहीं होता है -

3- जिन लोगो को पेट कब्ज की शिकायत रहती है उनके लिए ये प्रयोग उनके जीवन में लाभदायक है धीरे-धीरे कुछ दिन बाद आप अनुभव करेगे कि आप कब्ज की बिमारी से मुक्त हो चुके है पेट का स्वस्थ रहना आपको अनेक रोगों से मुक्ति दिलाता है -

4- पेट की मालिश करने से उस जगह का ब्‍लड सर्कुलेशन बढ़ जाता हैऔर इससे पेट की मासपेशियों को गर्माहट मिलती है जिससे आपको आराम मिलेगा तथा गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल की सेहत में सुधार होगा  नियमित रूप से पेट की मालिश करने पर आपको कभी भी पेट का कोई रोग नहीं होगा पेट फूलना, पेट में दर्द, गैस आदि सब ठीक हो जाएगी और पेट की मासपेशियां पूरी तरह से शक्ति शाली  हो जाएंगी साथ ही अपच की समस्‍या भी दूर होगी-

5- पेट पर मसाज करने से वहां की मासपेशियां टोन्‍ड हो जाती हैं तथा आपकी लटकती हुई कमर कुछ ही दिनों में शेप में आ जाती है इसके साथ टम्‍मी टाइट बन जाती है-

6- ब्रोंकाइटिस में छाती और पीठ की, कब्ज में पेट की, सिरदर्द में सिर की और साइटिका में टांग की मालिश करने से रोगी को विशेष लाभ होता है-

7- यदि आप मालिश करते वक्‍त लौंग लेवेंडर या दालचीनी का तेल प्रयोग करती है तो आपको पेडु के दर्द में अवस्य अदभुत लाभ मिलेगा और आपका पीरियड भी नियमित रहेगा -

नोट-अगर आप प्रेगनेंट हैं या किडनी स्‍टोन है या गॉलस्‍टोन या पेट में अल्‍सर तथा  प्रजनन अंगों में सूजन या फिर आंतरिक रक्तस्राव हो रहा हो तो ध्यान रक्खे इस में मालिश न करें-
उपचार और प्रयोग-

26 दिसंबर 2015

क्या आप तिल के ये फायदे जानते हैं

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तिल एक ऐसा भोजन है जो मकर संक्रांति के पर्व से जुड़ा हुआ है इस दिन इसको पकाना खाना और दान करना शुभ माना जाता है आदिकाल से तिल धार्मिक रीति-रिवाजों में इस्तेमाल होता आया है शादी-ब्याह के मौकों पर हवन आदि में तिल के प्रयोग का पौराणिक महत्त्व सिद्ध है ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी तिल को बुरी आत्माओं से बचाने वाला माना जाता है इसके औषधि गुणों के कारण ही इसे स्वास्थ्य-वर्धक एवं मानसिक शांति प्रदान करने वाला कहा गया है-

तिल


आयुर्वेद में तिल को तीव्र असरकारक औषधि(efficacy of Ayurveda medicine) के रूप में जाना जाता है काले और सफेद तिल के अतिररिकत लाल तिल भी होता है। सभी के अलग-अलग गुणधर्म हैं। यदि पौष्टिकता की बात करें तो काले तिल शेष दोनों से अधिक लाभकारी हैं। सफेद तिल की पौष्टिकता काले तिल से कम होती है जबकि लाल तिल निम्न श्रेणी का तिल माना जाता है-

महत्त्वपूर्ण तथ्य यह है कि तिल में चार रस होते हैं इसमें गर्म, कसैला, मीठा और चरपरा स्वाद भी पाया जाता है तिल हजम करने के लिहाज से भारी होता है खाने में स्वादिष्ट और कफनाशक माना जाता है-

यह बालों के लिए लाभप्रद माना गया है। दाँतों की समस्या दूर करने के साथ ही यह श्वास संबंधी रोगों में भी लाभदायक है। स्तनपान कराने वाली माताओं में दूध की वृद्धि करता है। पेट की जलन कम करता है तथा बुद्धि को बढ़ाता है- 

बार-बार पेशाब करने की समस्या पर नियंत्रण पाने के लिए तिल का कोई सानी नहीं है। चूँकि यह स्वभाव से गर्म होता है इसलिए इसे सर्दियों में मिठाई के रूप में खाया जाता है। गजक, रेवड़ियाँ और लड्डू शीत ऋतु में ऊष्मा प्रदान करते हैं-

तिल में विटामिन ए और सी छोड़कर वे सभी आवश्यक पौष्टिक पदार्थ होते हैं जो अच्छे स्वास्थ्य के लिए अत्यंत आवश्यक होते हैं। तिल विटामिन बी और आवश्यक फैटी एसिड्स से भरपूर है। इसमें मीथोनाइन(मिठोनाइन) और ट्रायप्टोफन(ट्रॉयप्टॉन) नामक दो बहुत महत्त्वपूर्ण एमिनो एसिड्स होते हैं जो चना, मूँगफली, राजमा, चौला और सोयाबीन जैसे अधिकांश शाकाहारी खाद्य पदार्थों में नहीं होते- ट्रायोप्टोफन को शांति प्रदान करने वाला तत्व भी कहा जाता है जो गहरी नींद लाने में सक्षम है। यही त्वचा और बालों को भी स्वस्थ रखता है। मीथोनाइन लीवर को दुरुस्त रखता है और कॉलेस्ट्रोल को भी नियंत्रित रखता है। तिलबीज स्वास्थ्यवर्द्धक वसा का बड़ा स्त्रोत है जो चयापचय को बढ़ाता है-

मकर संक्रांति के पर्व पर तिल का विशेष महत्त्व माना जाता है। वैसे तो तिल केवल खाने की चीज है, लेकिन इस दिन इसे दान देने की परम्परा भी प्रचलित है। इस दिन तिल के उबटन से स्नान करके ब्राह्मणों एवं गरीबों को तिल एवं तिल के लड्डू दान किये जाते हैं। यह मौसम शीत ऋतु का होता है, जिसमें तिल और गुड़ से बने लड्डू शरीर को गर्मी प्रदान करते हैं। प्राचीन ग्रंथों में कहा गया है कि संक्रांति के दिन तिल का तेल लगाकर स्नान करना, तिल का उबटन लगाना, तिल की आहुति देना, पितरों को तिल युक्त जल का अर्पण करना, तिल का दान करना एवं तिल को स्वयं खाना, इन छह उपायों से मनुष्य वर्ष भर स्वस्थ, प्रसन्न एवं पाप रहित रहता है-

तिल-गुड़ के लड्डू बनाने के अलावा इन्हें ब्रेड, सलाद और मिठाइयों पर सजावट करने के लिए भी प्रयोग किया जाता है। अनेक प्रकार की गजक और तिलपट्टी में इनका उपयोग होता है। ब्रेड, नान तथा अन्य प्रकार की रोटियों में भी तिल का प्रयोग होता है। तिल का तेल पूरे विश्व में प्रयोग में लाया जाता है-

तिल के आयुर्वेदिक प्रयोग -

1- कब्ज दूर करने के लिये तिल को बारीक पीस लें एवं प्रतिदिन पचास ग्राम तिल के चूर्ण को गुड़, शक्कर या मिश्री के साथ मिलाकर फाँक लें-

2- पाचन शक्ति बढ़ाने के लिये समान मात्रा में बादाम, मुनक्का, पीपल, नारियल की गिरी और मावा अच्छी तरह से मिला लें, फिर इस मिश्रण के बराबर तिल कूट पीसकर इसमें में मिलाएँ, स्वादानुसार मिश्री मिलाएँ और सुबह-सुबह खाली पेट सेवन करें। इससे शरीर के बल, बुद्धि और स्फूर्ति में भी वृद्धि होती है-

3- प्रतिदिन रात्रि में तिल को खूब चबाकर खाने से दाँत मजबूत होते हैं-

4- यदि कोई जख्म हो गया हो तो तिल को पानी में पीसकर जख्म पर बांध दें, इससे जख्म शीघ्रता से भर जाता है-

5- तिल के लड्डू उन बच्चों को सुबह और शाम को जरूर खिलाना चाहिए जो रात में बिस्तर गीला कर देते हैं। तिल के नियमित सेवन करने से शरीर की कमजोरी दूर होती है और रोग प्रतिरोधकशक्ति में वृद्धि होती है-

6- पायरिया और दाँत हिलने के कष्ट में तिल के तेल को मुँह में 10-15 मिनट तक रखें, फिर इसी से गरारे करें। इससे दाँतों के दर्द में तत्काल राहत मिलती है। गर्म तिल के तेल में हींग मिलाकर भी यह प्रयोग किया जा सकता है-

7- पानी में भिगोए हुए तिल को कढ़ाई में हल्का सा भून लें। इसे पानी या दूध के साथ मिक्सी में पीसलें। सादा या गुड़ मिलाकर पीने से रक्त की कमी दूर होती है-

8- जोड़ों के दर्द के लिये एक चाय के चम्मच भर तिल के बीजों को रात भर पानी के गिलास में भिगो दें। सुबह इसे पी लें या हर सुबह एक चम्मच तिल बीजों को आधा चम्मच सूखे अदरक के चूर्ण के साथ मिलाकर गर्म दूध के साथ पी लें। इससे जोड़ों का दर्द जाता रहेगा-

9- तिल गुड़ के लड्डू खाने से मासिकधर्म से संबंधित कष्टों तथा दर्द में आराम मिलता है-

10- भाप से पकाए तिल बीजों का पेस्ट दूध के साथ मिलाकर पुल्टिस की तरह लगाने से गठिया में आराम मिलता है-