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30 जनवरी 2015

शुक्राणु कम -चूने को प्रयोग और गुण देखे -

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बिद्यार्थीओ के लिए चूना बहुत अच्छा है जो लम्बाई बढाता है  गेहूँ के दाने के बराबर चूना रोज दही में मिला के खाना चाहिए,दही नही है तो दाल में मिला के खाओ,दाल नही है तो पानी में मिला के पियो - इससे लम्बाई बढने के साथ स्मरण शक्ति भी बहुत अच्छा होता है ।




जिन बच्चों की बुद्धि कम काम करती है यानी कि मतिमंद बच्चे है उनकी सबसे अच्छी दवा है चूना जिन बच्चो में बुद्धि से कम है, दिमाग देर में काम करते है, देर में सोचते है हर चीज उनकी स्लो है उन सभी बच्चे को चूना खिलाने से अच्छे हो जायेंगे ।


अगर किसी भाई के शुक्राणु नही बनता उसको अगर गन्ने के रस के साथ चूना पिलाया जाये तो साल डेढ़ साल में भरपूर शुक्राणु बनने लगेंगे; और जिन माताओं के शरीर में अन्डे नही बनते उनकी बहुत अच्छी दवा है ये चूना ।चूना नपुंसकता की सबसे अच्छी दवा है

जैसे किसी को पीलिया हो जाये ये जॉन्डिस कहलाता है  तो उसकी सबसे अच्छी दवा है चूना  गेहूँ के दाने के बराबर चूना गन्ने के रस में मिलाकर पिलाने से बहुत जल्दी पीलिया ठीक कर देता है ।

बहनों को अपने मासिक धर्म के समय अगर कुछ भी तकलीफ होती हो तो भी उनकी सबसे अच्छी दवा है चूना । हमारे घर में जो माताएं है जिनकी उम्र पचास वर्ष हो गयी और उनका मासिक धर्म बंद  हुआ है उनकी सबसे अच्छी दवा है  गेहूँ के दाने के बराबर चूना हर दिन खाना दाल में, लस्सी में, नही तो पानी में घोल के पीना ।

ये चूना घुटने का दर्द  को भी ठीक करता है ,कमर का दर्द ठीक करता है ,कंधे का दर्द ठीक करता है.

एक खतरनाक बीमारी है Spondylitis वो भी चूने से ठीक होता है । कई बार हमारे रीढ़की हड्डी में जो मनके होते है उसमे दूरी बढ़ जाती है और उनमे गेप आ जाता है उसे भी ये चूना ही ठीक करता है रीड़ की हड्डी की सब बीमारिया चूने से ठीक होता है ।अगर आपकी हड्डी टूट जाये तो टूटी हुई हड्डी को जोड़ने की ताकत सबसे ज्यादा चूने में है ।चूना खाइए सुबह को खाली पेट ।

जब कोई माँ गर्भावस्था में है तो चूना रोज खाना चाहिए क्योंकि गर्भवती माँ को सबसे ज्यादा केल्शियम की जरुरत होती है और चूना केल्शियम का सबसे बड़ा भंडार है । गर्भवती माँ को चूना खिलाना चाहिए इसे अनार के रस में खिलाए आप अनार का रस एक कप और चूना गेहूँ के दाने के बराबर ये मिलाके रोज पिलाइए नौ महीने तक लगातार दीजिये तो चार फायदे होंगे एक तो माँ को बच्चे के जनम के समय कोई तकलीफ नही होगी और नॉर्मल डीलिवरी होगा,और दूसरा फायदा बच्चा जो पैदा होगा वो बहुत हृष्ट पुष्ट और तंदुरुस्त होगा तीसरा फ़ायदा ये है कि  बच्चा जिन्दगी में जल्दी बीमार नही पड़ता जिसकी माँ ने चूना खाया और अंतिम सबसे बड़ा फायदा ये है कि बच्चा बहुत होशियार होता है बहुत  ही इंटेलिजेंट और ब्रिलियेंट होता है उसका IQ बहुत अच्छा होता है ।

जिसके भी मुंह में ठंडा -गरम पानी लगता है तो चूना खाओ बिलकुल ठीक हो जाता है .

मुंह में अगर छाले हो गए है तो चूने का पानी पियो तुरन्त ठीक हो जाता है ।

जब शरीर में जब खून कम हो जाये तो चूना जरुर लेना चाहिए .एनीमिया का सुगम और सस्ता इलाज है . चूना पीते रहो गन्ने के रस में या संतरे के रस में नही तो सबसे अच्छा है अनार के रस में - अनार के रस में चूना पिए खून बहुत बढता है और बहुत जल्दी खून बनता है बस एक कप अनार के  रस गेहूँ के दाने के बराबर चूना सुबह खाली पेट ले ।

जो लोग चूने से पान खाते है, वो बहुत होशियार लोग है पर तम्बाकू नही खाना, तम्बाकू ज़हर है और चूना अमृत है .. तो चूना खाइए तम्बाकू मत खाइए और पान खाइए चूने का उसमे कत्था मत लगाइए, कत्था केन्सर करता है,पान में सुपारी मत डालिए सोंठ  डालिए उसमे ,इलाइची डालिए ,लौंग डालिए.केशर डालिए ;ये सब डालिए पान में चूना लगा के पर तम्बाकू नही , सुपारी नही और कत्था नही ।

घुटने में घिसाव आ गया और डॉक्टर कहे के घुटना बदल दो तो भी जरुरत नही चूना खाते रहिये और हरसिंगार के पत्ते का काढ़ा खाइए घुटने बहुत अच्छे काम करेंगे ।

अलसी के तेल और चूने के पानी का इमल्सन आग से जलने के घाव पर लगाने से घाव बिगड़ता नहीं और जल्दी भरता है।

चूना घी और शहद को बराबर मात्रा में ले कर बिच्छू के काटे गए स्थान पे लगाने से जहर तुरंत ही उतर जाता है .

हमारे राजीव भाई कहते है चूना खाइए पर चूना लगाइए मत किसको भी ये चूना लगाने के लिए नही है खाने के लिए है क्युकि  आजकल हमारे देश में चूना लगाने वाले बहुत है पर ये भगवान ने खाने के लिए दिया है ।

उपरोक्त लेख स्व.भाई राजीव दीक्षित द्वारा -

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25 जनवरी 2015

माहवारी चक्र की अवधि में बदलाव -

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अनियमित माहवारी और देर से माहवारी आने का अर्थ है माहवारी चक्र की अवधि में बदलाव होना। सामान्यतया महिला में मासिक चक्र की अवधि 28 से 30 दिनों तक की होती है। हर महिला के मासिक चक्रों में 8 दिनों का अंतर होता है। लेकिन 8 से 20 दिनों तक के अंतर को अनियमित माहवारी कहा जाता है।



ज्यादातर अनियमित माहवारी के लक्षण होते हैं, जल्दी-जल्दी माहवारी आना, दाग लगना, रक्त के थक्कों का आना। यह समस्या हार्मोन में असंतुलन के कारण हो सकती है और आसानी से ठीक हो जाती है। कुछ महिलाओं के जीवन में बिना कारण ही उन्हें किसी किसी महीने माहवारी नहीं होती। साल में किसी एक महीने में माहवारी का ना आना सामान्य है, लेकिन दो से तीन बार माहवारी में अनियमितता होना सही नहीं, उसका उपचार करने की जरूरत है।

आयुर्वेद के अनुसार महिला की माहवारी में अनियमितता के पीछे सबसे अधिक जिम्मेदार कारक अस्वस्थ खानपान और खाने का ठीक से न पचना है। अगर खाना सही तरीके से नहीं पच पाया तो यह शरीर में मौजूद टॉक्सिंस के उत्पादन को प्रभावित करता है। और यही टॉक्सिंस रक्त कोशिकाओं में मिल जाता है जिसके कारण खून में रुकावट और ठहराव हो जाता है। आयुर्वेद के जरिये पाचन संबंधी इन्हीं विकारों को दूर करके
अनियमित माहवारी को नियमित किया जा सकता है।

करे कुछ ये प्रयोग :-
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पुरानी किशमिश को 3 ग्राम की मात्रा में लेकर इसे लगभग 200 मिली पानी में रातभर भिगोयें, सुबह इसे उबालकर रख लें। जब यह एक चौथाई
की मात्रा में रह जाए तो छानकर इसका सेवन कीजिए।

तिल है फायदेमंद काला तिल 5 ग्राम लेकर गुड़ में मिलाकर माहवारी शुरू होने से 4 दिन पहले सेवन करें, जब मासिक धर्म शुरू हो जाए तो इसे बंद कर दें, इससे माहवारी न तो देर से आयेगी और न ही अनियमित होगी।

 चौलाई की जड़ को छाया में सुखाकर बारीक पीस लीजिये, इसे लगभग 5 ग्राम मात्रा में सुबह के समय खाली पेट माहवारी शुरू होने से लगभग 7 दिनों पहले सेवन कीजिए। जब मासिक-धर्म शुरू हो जाए तो इसका सेवन बंद कर दीजिए, इससे मासिक धर्म समय पर होगा।

असगंध और खाण्ड को बराबर मात्रा में लेकर इसे बारीक पीस लें, फिर इसे 10 ग्राम लेकर पानी से खाली पेट मासिक धर्म शुरू होने से लगभग 7 दिन पहले लें, जब मासिक-धर्म शुरू हो जाए तब इसका सेवन न करें।

रेवन्दचीनी 3 ग्राम की मात्रा में सुबह के समय खाली पेट माहवारी शुरू होने से लगभग 7 दिन पहले सेवन करें। जब मासिक- धर्म शुरू हो जाए तो इसका सेवन बंद कर देना चाहिए। इससे मासिक-धर्म के सभी विकार दूर हो जाते हैं।

आधा ग्राम कपूरचूरा में मैदा मिलाकर 4 गोलियां बनाकर रख लें। प्रतिदिन सुबह खाली पेट एक गोली का सेवन मासिक धर्म शुरू होने से लगभग 4 दिन पहले करें, मासिक-धर्म शुरू होने के बाद इसका सेवन बंद कर दीजिए, इससे मासिक-धर्म के सभी विकार नष्ट हो जाते हैं।

विदारीकन्द का चूर्ण 1 चम्मच और मिश्री 1 चम्मच दोनों को पीसकर 1 चम्मच घी के साथ मिला लीजिए, इसे रोजाना सुबह-शाम सेवन करने से मासिक- धर्म में अधिक खून आना बंद होता है और माहवारी नियमित हो जायेगी।

 आप अनियमित माहवारी की समस्या से अगर जूझ रही हैं तो एक बार चिकित्सक से सलाह अवश्य लीजिए।

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20 जनवरी 2015

डायबिटीज़ को कंट्रोल करता है कढ़ी पत्ता

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हम भोजन में से कढ़ी पत्ता अक्सर निकाल कर अलग कर देते है. इससे हमें उसकी खुशबू तो मिलती है पर उसके गुणों का लाभ नहीं मिल पाता. कढ़ी पत्ते को धो कर छाया में सुखा कर उसका पावडर इस्तेमाल करने से बच्चे और बड़े भी भी इसे आसानी से खा लेते है, इस पावडर को हम छाछ और निम्बू पानी में भी मिला सकते है. इसे हम मसालों में, भेल में भी डाल सकते है. प्रतिदिन भोजन में कढ़ी पत्ते को दाल, सब्ज़ी में डालकर या चटनी बनाकर प्रयोग किया जा सकता है, जिस प्रकार दक्षिण भारत में किया जाता है.


* इसकी छाल भी औषधि है. हमें अपने घरों में इसका पौधा लगाना चाहिए.
* कढ़ी पत्ते में एंटी-डायबिटिक एंजेट होते हैं। यह शरीर में इंसुलिन की गतिविधि को प्रभावित करके ब्लड शुगर लेवल को कम करता है। साथ ही, इसमें मौजूद फाइबर भी डायबिटीज़ के रोगियों के लिए फायदेमंद होता है।
* अपने भोजन में कढ़ी पत्ते की मात्रा बढ़ाएं या फिर रोज सुबह तीन महीने तक खाली पेट कढ़ी पत्ता खाएं तो फायदा होगा। कढ़ी पत्ता मोटापे को कम कर के डायबिटीज को भी दूर कर सकता है।
* कढ़ी पत्ते में ब्लड कोलेस्ट्रॉल को कम करने वाले गुण होते हैं, जिससे आप दिल की बीमारियों से बचे रहते हैं। यह एंटी-ऑक्सीडेंट्स से भरपूर होते हैं, जो कोलेस्ट्रॉल का ऑक्सीकरण होने से रोकते हैं। दरअसल, ऑक्सीकृत कोलेस्ट्रॉल बैड कोलेस्ट्रॉल बनाते हैं जो हार्ट डिसीज़ को न्योता देते हैं।
* कढ़ी पत्ते में कार्बाज़ोल एल्कालॉयड्स होते हैं, जिससे इसमें एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-इन्फ्लेमेटरी गुण होते हैं। ये गुण पेट के लिए बेहद फायदेमंद होते हैं। यह पेट से पित्त भी दूर करता है, जो डायरिया होने का मुख्य कारण है। अगर आप डायरिया से पीड़ित हैं तो कढ़ी के कुछ पत्तों को कस कर छाछ के साथ पिएं। ऐसा दिन में दो से तीन बार दोहराने से आराम मिलता है।
* अगर आपको सूखा कफ, साइनसाइटिस और चेस्ट में जमाव है तो कढ़ी पत्ता आपके लिए बेहद असरदार उपाय हो सकता है। इसमें विटामिन सी और ए के साथ एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-फंगल एजेंट होते हैं, जो जमे हुए बलगम को बाहर निकालने में मदद करते हैं। कफ से राहत पाने के लिए एक चम्मच कढ़ी पाउडर को एक चम्मच शहद के साथ मिलाकर पेस्ट बना लें। अब इस मिक्सचर को दिन में दो बार पिएं।
* अगर आप ज्यादा एल्कोहल का सेवन करते हैं या फिश ज्यादा खाते हैं तो कढ़ी पत्ता आपके लिवर को इससे प्रभावित होने से बचा सकता है। कढ़ी पत्ता लिवर को ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस से बचाता है, जो हानिकारक तत्व जैसे मरकरी (मछली में पाया जाता है) और एल्कोहल की वजह से लिवर पर पड़ता है। घर के बने हुए घी को गर्म करके उसमें एक कप कढ़ी पत्ते का जूस मिलाएं। इसके बाद थोड़ी-सी चीनी और पिसी हुई काली मिर्च मिलाएं। अब इस मिक्सचर को कम तापमान में गर्म करके उबाल लें और उसे हल्का ठंडा करके पिएं।
* कढ़ी पत्ते में आयरन और फोलिक एसिड उच्च मात्रा में होते हैं। एनीमिया शरीर में सिर्फ आयरन की कमी से नहीं होता, बल्कि जब आयरन को अब्जॉर्ब करने और उसे इस्तेमाल करने की शक्ति कम हो जाती है, तो इससे भी एनीमिया हो जाता है। इसके लिए शरीर में फोलिक एसिड की भी कमी नहीं होनी चाहिए, क्योंकि फोलिक एसिड ही आयरन को अब्जॉर्ब करने में मदद करता है। अगर आप एनीमिया से पीड़ित हैं तो एक खजूर को दो कढ़ी पत्तों के साथ खाली पेट रोज सुबह खाएं। इससे शरीर में आयरन लेवल ऊंचा रहेगा और एनीमिया होने की संभावना भी कम होगी।
यह बालों के लिए बहुत उत्तम टॉनिक है, कढ़ी पत्ता बालों को सफ़ेद होने से और झड़ने से रोकता है. पत्ते में विटामिन बी1 बी3 बी9 और सी होता है। इसके अलावा, इसमें आयरन, कैल्शियम और फॉस्फोरस की भी भरपूर मात्रा होती है। इसके इस्तेमाल से बाल सफेद होने से बच सकते हैं। रातभर भीगे हुए बादाम को छीलकर पानी और 10-15 कढ़ी पत्ता के साथ पीस लें। इस पेस्ट को सिर की स्किन पर लगाकर मसाज करें। इसके बाद किसी अच्छे माइल्ड शैम्पू से बाल धो लें। ऐसा हफ्ते में एक बार करने से कुछ ही हफ्तों में रिज़ल्ट सामने होगा।
जहरीले कीड़े काटने पर इसके फलों के रस को निम्बू के रस के साथ मिलाकर लगाने से लाभ होता है.
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18 जनवरी 2015

अनचाहे है बाल तो अपनाये ये घरेलू कुछ प्रयोग ....!

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अनचाहे बालअगर आप अपने अनचाहे बालों को हटाने के लिए थ्रेडिंग और वैक्सिंग का सहारा लेती है। और इससे हर महीने होने वाले खर्चे और लंबे समय बाद होने वाले साइड इफेक्‍ट के रूप में ढीली त्‍वचा और झुर्रियों की समस्‍या से परेशान है।



* तो आपकी इस समस्‍या को दूर करने के कुछ प्राकृतिक उपाय है जो बिना किसी साइड इफेक्‍ट के इस समस्‍या को दूर कर देगें।




*  अंडे के मास्‍क को आप वैक्‍स की तरह इस्‍तेमाल कर सकते हैं। इसे बनाने के लिए एक अंडे के सफेद भाग को फेंटकर अपने चेहरे पर लगाये और सूखने पर गुनगुने पानी से धो लें। इससे अनचाहे बाल निकलने के साथ झुर्रियों की समस्‍या से भी निजात मिल जाता है।





* हल्‍दी एक बेहतरीन एंटीसेप्टिक होने के साथ ही अनचाहे बालों को भी दूर करती है। इसे लगाने से चेहरे पर बाल नही उगते और त्‍वचा की रंगत भी निखरती है। रोज पांच से दस मिनट हल्दी का लेप लगाएं।








* कार्न फ्लोर का स्‍क्रब बनाकर लगाने से अनचाहे बालों से छुटकारा मिल जाता है। इसे बनाने के लिए एक कटोरे में 1 अंडे का सफेद भाग, थोड़ी सी चीनी और कार्न फ्लोर को मिलाकर स्‍क्रब बना लें। फिर इसे अपने चेहरे और गर्दन पर लगाकर 15 मिनट मसाज करें। फिर सूखने के लिए छोड़ दें, और सूखने के बाद पानी से धो लीजिये। ऐसा हफ्ते में तीन बार करें।

* बेसन को इस्‍तेमाल करने से त्‍वचा मुलायम होने के साथ ही बाल रहित भी होती है। इसके लिए थोड़े से बेसन में एक चुटकी हल्दी और पानी मिलाकर पैक बनाकर लगाएं और सूखने पर पानी से धो लें। इस पैक को आप रोज अपने चेहरे पर लगा सकते हैं। इसके अलावा थोड़ा सा बेसन, एक चुटकी हल्‍दी और थोड़ा सा सरसों का तेल डाल कर गाढा पेस्‍ट बनाकर चेहरे पर लगा कर रगडिये और इसे हफ्ते में दो दिन लगाइये। अनचाहे बालों से छुटकारा मिल जाएगा।



* अगर आप चेहरे के अनचाहे बालों से परेशान हैं तो आप घर में बनी प्राकृतिक वैक्‍स से वैक्सिंग कर सकते हैं। इसे बनाने के लिए शक्कर को पिघलाकर इसमें शहद और नींबू का रस मिलाएं और पेस्ट तैयार कर लें। पेस्ट को चेहरे पर लगाएं और वैक्स की तरह साफ करें।








* चीनी मृत त्‍वचा को हटाकर अनचाहे बालों को जड़ से निकाल देती है। इसके लिए अपने चेहरे को पानी से गीला करके, उस पर चीनी लगा कर रगडिये। ऐसा हफ्ते में कम से कम दो बार जरुर करें।









* कच्‍चे पपीते में पैपेन नामक सक्रिय एंजाइम होता है जो बालों के कूप को निष्‍पक्ष करने और बालों के विकास को सीमित करने में सक्षम होता है। पपीता संवेदनशील त्वचा के लिए अपेक्षाकृत अधिक उपयुक्त होता है। इसके पैक को बनाने के लिए दो बड़े चम्‍मच पपीते का पेस्ट और आधा चम्मच हल्दी पाउडर लेकर पेस्‍ट बना लें। 15 मिनट के लिए इस पेस्ट से अपने चेहरे पर मसाज करें और पानी से धो लें। बेहतर परिणाम के लिए इसे एक सप्ताह में दो बार करने की कोशिश करें.



* काबुली चने के आटा का शरीर के अनचाहे बालों को दूर करने और रोकने के लिए पारंपरिक रूप से इस्तेमाल किया जाता है। इसे बनाने के लिए आधा कटोरी चने का आटा, आधा कटोरी दूध, एक चम्‍मच हल्‍दी और एक चम्‍मच क्रीम लेकर इसे मिक्‍स करके चेहरे पर लगाएं। आधा घंटा लगे रहने के बाद इसे गुनगुने पानी से धो लें।









* त्‍वचा से अनचाहे बालों को हटाने के लिए गुनगुने नारियल तेल में हल्‍दी पाउडर को मिलाकर पेस्‍ट बना लें। अब इस पेस्ट को हाथ-पैरों पर लगाएं। इससे त्वचा मुलायम होने के साथ ही शरीर के अनचाहे बाल भी धीरे-धीरे हट जाते हैं।













इस फल को खाएं उग आएंगे सिर के उड़े हुए बाल -

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सीताफल(शरीफा ) एक बड़ा ही स्‍वादिष्‍ट फल है लेकिन लोग इसके बारे में थोड़ा कम जानकारी रखते हैं। सीताफल अगस्त से नवम्बर के आस-पास अर्थात् आश्विन से माघ मास के बीच आने वाला फल है। अगर आयुर्वेद की बात माने तो सीताफल शरीर को शीतलता पहुंचाता है। यह पित्तशामक, तृषाशामक, उलटी बंद करने वाला, पौष्टिक, तृप्तिकर्ता, कफ एवं वीर्यवर्धक, मांस एवं रक्तवर्धक, बलवर्धक, वातदोषशामक एवं हृदय के लिए बहुत ही लाभदायी होता है।





* सीताफल को भगवन राम एवं माता सीता से जोड़ते हैं। ऐसी मान्यता है कि सीता ने वनवास के समय जो वन फल राम को भेंट किया, उसी का नाम सीताफल पड़ा। अगर आप दिन में एक #सीताफल का सेवन करते हैं, तो आपको अनेको बीमारियों से निजात मिलेगा। आइये जानते हैं सीताफल खाने से हम किन-किन बीमारियों से निजात पा सकते हैं।

* सीताफल सिर्फ फल नहीं, दवा भी है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि जो लोग शरीर से दुबले पतले होते हैं उन्हें सीताफल खाना चाहिए। सीताफल खाने से शरीर की दुर्बलता तो दूर होती ही है साथ ही मैनपावर भी बढता है।


* सीताफल एक मीठा फल है। इसमें काफी मात्रा में कैलोरी होती है। यह आसानी से पचने वाला और अल्सर व एसिडिटी में लाभकारी होता है। इसमें आयरन और विटामिन-सी की मात्रा अच्छी होती है। इसके अलावा सीताफल कई रोगों में रामबाण की तरह काम करता है।







* सीताफल के बीजों को बकरी के दूध के साथ पीस कर बालों में लगाने से सिर के उड़े हुए बाल फिर से उग आते हैं।


* सीताफल के बीजों को बारीक पीस कर रात को सिर में लगा लें और किसी मोटे कपड़े से सिर को अच्छी तरह बांध कर सो जाएं। इससे जुएं मर जाती हैं। इस बात का ध्यान रखें कि यह आंखों तक न पहुंचे, क्योंकि इससे आंखों में जलन व अन्य नुकसान हो सकता है। शरीफा के पत्तों का रस बालों की जड़ो में अच्छी तरह मालिश करने से जुएं मर जाती हैं। सीताफल के बीजों को महीन चूर्ण बनाकर पानी से लेप तैयार कर रात को सिर में लगाएं एवं सबेरे धो लें। दो तीन रात ऐसा करने से जुएं समाप्त हो जाती हैं। चूंकि बीज से निकलने वाला तेल विषला होता है, इसलिए बालों में इसका लेप लगाते समय आंख को बचाकर रखना चाहिये।


* सीताफल घबराहट को दूर करता है। हार्ट बीट को सही करता है। इसकी एक बड़ी किस्म और होती है, जिसे रामफल कहते हैं। जिनका हृदय कमजोर हो, हृदय का स्पंदन खूब ज्यादा हो, घबराहट होती हो, उच्च रक्तचाप हो ऐसे रोगियों के लिए भी सीताफल का सेवन लाभप्रद है।

* सीताफल खाने से इसके गूदे से बने शरबत को पीने से शरीर की जलन को ठीक करता है। वे लोग जिनका शरीर हर वक्‍त जलता रहता है और गर्म रहता है, उन्‍हें नियमित रूप से सीताफल का सेवन करना चाहिये।

* शरीफा में विटामिन ए प्रचुर मात्रा में होता है जो त्वचा को स्वस्थ रखने में मददगार होता है। यह त्वचा पर आने वाले एजिंग के निशानों से भी बचाता है।

* पेट के लिये... इसमें घुलनशील रेशे होते हैं, जो कि पाचक्रिया के लिये बेहतरीन होते हैं।

* इसमे खूब सारा विटामिन ए होता है, जो कि हमारे बालों, आंखों और त्‍वचा के लिये बहुत ही फायदेमंद होता है।

* सीताफल के पत्तों को पीस कर फोड़ों पर लगाने से फोड़े ठीक हो जाते हैं।

* सीताफल शरीर की दुर्बलता, थकान, मांस-पेशियां क्षीण होने की दशा में सीताफल का खाना लाभकारी होता है।

* सीताफल का कच्चा फल खाना अतिसार और पेचिश में उपयोगी है। यह शरीर के लिए अत्यंत श्रेष्ठ फल है। जब फल कच्‍चा हो तब उसे काट कर सुखा दें और पीस कर रोगी को खिलाएं। इससे डायरिया की समस्‍या सही हो जाएगी।
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17 जनवरी 2015

आखिर ये खर्राटे क्‍या है......!

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* सोते समय गले को पीछे का हिस्‍सा थोड़ा संकरा हो जाता है। ऐसे में ऑक्सीजन जब संकरी जगह से अंदर जाती है तो आस-पास के टिशु वायब्रेट होते हैं। और इस वायब्रेशन से होने वाली आवाज को ही खर्राटे कहते हैं। 


* रात को सोते समय रोगी इतनी तेज आवाज निकालता है कि उसके पास सोना बिल्कुल मुश्किल हो जाता है।


उपचार स्वास्थ्य और प्रयोग -


हल्‍के में न लें खर्राटे:-
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* खर्राटे, जिसमें व्‍यक्ति सोने के बाद नाक से तेज आवाज के साथ सांस लेता और छोड़ता है। क्या आपको खर्राटे की समस्या है क्‍या कभी आप खर्राटे की समस्‍या को लेकर डॉक्‍टर के पास गए हैं? नहीं! अधिकतर लोग खर्राटे को एक साधारण प्रक्रिया समझकर टालते हैं, पर खर्राटे स्लिपिंग डिसऑर्डर का हिस्सा भी हो सकता है। इसलिए खर्राटों से बचने के उपाय करने चाहिए।

खर्राटे से बचने के उपाय:-

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* खर्राटे लेने के कई कारण हो सकते हैं जैसे, एलर्जी, नाक की सूजन, जीभ मोटी होना, अधिक धूम्रपान करना, शराब या नशीले पदार्थों का सेवन करना और रात को अधिक भोजन करना आदि। आइए जाने खर्राटे से बचने के तरीको के बारें में।

मन रखें शांत:-

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* जिन्हें रात को सोते समय खर्राटे लेने की आदत हो उसे खर्राटे से बचने के लिए रात को सोते समय मन को शांत व मस्तिष्क को बाहरी विचारों से मुक्त रखकर सोना चाहिए।

भरपूर पानी पीएं:-

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* क्‍या आप जानते हैं कि शरीर में पानी की कमी से भी खर्राटे आते है। जब शरीर में पानी की कमी होती है तो नाक के रास्ते की नमी सूख जाती है। ऐसे में साइनस हवा की गति को श्वास तंत्र में पहुंचने के बीच में सहयोग नहीं कर पाता और सांस लेना कठिन हो जाता है। ऐसे में खर्राटे की प्रवृत्ति बढ़ जाती है। इसलिए सेहतमंद और खर्राटों से दूर रहने के लिए दिनभर भरपूर पानी पीएं

वजन कम करें:-

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* अधिकतर मोटे लोग ही खर्राटों की समस्‍या के शिकार होते हैं। गले के आप-पास अधिक वसा युक्त कोशिकाएं जमा होने से गले में सिकुड़न होती है और खर्राटे की ध्वनि निकलती है। तो अगर आप भी खर्राटों से छुटकारा पाना चाहते हैं तो अपना वजन कम करने के उपाय करें।

करवट से सोएं:-

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* पीठ के बल सोना वैसे तो आदर्श तरीका होता है लेकिन इस मुद्रा में सोने से खर्राटों की आशंका बढ़ जाती है। ऐसे में खर्राटों से बचने के लिए आप अगर करवट के बल सोएंगे तो खर्राटों की आशंका कम होगी।

धूम्रपान से बचें:-

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* धूम्रपान से खर्राटों की संभावना अधिक होती है। धूम्रपान वायुमार्ग की झिल्‍ली में परेशानी पैदा करता है और इससे नाक और गले में हवा पास होना रूक जाती है। इसलिए अगर आपको खर्राटों की समस्‍या हैं तो धूम्रपान छोड़ दें।

नींद की गोलियों से बचें:-

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* नींद की गोलियों मांसपेशियों पर विपरीत प्रभाव डालती है। सोने के लिए अगर आप शराब, नींद की गोलियों या अन्‍य दवाईयों का इस्‍तेमाल करते है तो बंद कर देना चाहिए। क्‍योंकि इससे भी खर्राटे आते है।

सोने का समय:-

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* नियमित रूप से एक ही समय पर सोएं। सोते समय अपने शरीर को पूर्ण आराम दें तथा सोते समय ध्यान रखें कि किसी भी अंग पर जोर न पड़ें।

एक्‍सरसाइज करें:-

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* जिस तरह से बॉडी की एक्‍सरसाइज करने से सारी मांसपेशियां मजबूत होती है। उसी तरह खर्राटों को कम करने के लिए गले की मांसपेशियों की एक्‍सरसाइज होती है।

नमक कम खाएं:-

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* नमक की अधिकता शरीर में ऐसे तरल पदार्थ का निर्माण करता है जिससे नाके के छिद्र में बाधा उत्‍पन्‍न होती है और खर्राटे आने लगते है। शोधकर्ता प्रोफेसर जिम हॉर्न के अनुसार, डाइट से नमक कम करके गले की भीतरी सूजन को कम करने में मदद मिलती है जिससे खर्राटे को रोकना आसान हो जाता है।

सिर ऊंचा करके सोएं:-

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* अगर आपको खर्राटे की समस्‍या है तो आपको सोते समय सिर को थोड़ा ऊंचा करके सोना चाहिए। ऐसा करने से खर्राटे की समस्‍या से बचा जा सकता है।

16 जनवरी 2015

ब्रेस्ट केंसर (Breast Cancer) का इलाज -

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महिलाओं को आजकल बहुत कैंसर हो रहा है ...

स्तनों में ( Breast मे ) और ये काफी तेजी से बड़ रहा है .. पहले Tumour होता है फिर कैंसर में convert हो जाता है । तो माताओं को बहनों को क्या करना चाहिए !




राजीव भाई ने बिहार की एक महिला जिसके दोनों स्तनो मे कैंसर था ये  ठीक निपल मे था उसका इलाज किया था 


बहुत बड़े hosptial tata institute वो महिला इलाज करवाती करवाती बहुत परेशान हो गई थी ! और वो घाव बढ़ता ही जा रहा था !  और अंत डाक्टर ने कहा अब मैं इनको breast भी कट करूंगा तो भी कोई फर्क नहीं पड़ने वाला ! और वो बहुत गरीब महिला थी उसके पति ने खेत बेचकर डाकटर की फीस भरी थी !

राजीव भाई ने आयुर्वेद मे बताई गई ओषधि द्वारा मात्र 15 दिन मे उनको 50 % ठीक कर दिया दर्द तो पूरा ही ठीक हो गया ! जख्म भी भरने लगा ! ओषधि क्या है ध्यान से पढ़िये ...

औषधि है देशी गाय का मूत्र लीजिये (सूती के आठ परत कपड़ो में छान लीजिये ) , हल्दी लीजिये और गेंदे के फूल लीजिये । गेंदे के फुल की पीला या नारंगी पंखरियाँ निकलना है, फिर उसमे हल्दी डालकर गाय मूत्र डालकर उसकी चटनी बनानी है।

अब चोट का आकार कितना बढ़ा है उसकी साइज़ के हिसाब से गेंदे के फुल की संख्या तय होगी, माने चोट छोटे एरिया में है तो एक फुल, काफी है चोट बड़ी है तो दो, तीन,चार अंदाज़े से लेना है। इसकी चटनी बनाके इस चटनी को लगाना है जहाँ पर भी बाहर से खुली हुई चोट है जिससे खून निकल जुका है और ठीक नही हो रहा। कितनी भी दावा खा रहे है पर ठीक नही हो रहा, ठीक न होने का एक कारण तो है डाईबेटिस दूसरा कोई जैनेटिक कारण भी हो सकते है।

इसको दिन में कम से कम दो बार लगाना है जैसे सुबह लगाके उसके ऊपर रुई पट्टी बांध दीजिये ताकि उसका असर बॉडी पे रहे; और शाम को जब दुबारा लगायेंगे तो पहले वाला धोना पड़ेगा ! इसको गोमूत्र से ही धोना है डेटोल जैसो का प्रयोग मत करिए, गाय के मूत्र को डेटोल की तरह प्रयोग करे। धोने के बाद फिर से चटनी लगा दे। फिर अगले दिन सुबह कर दीजिये।

यह इतना प्रभावशाली है इतना प्रभावशाली है के आप सोच नही सकते देखेंगे तो चमत्कार जैसा लगेगा। यहाँ आप मात्र post पढ़ रहे लेकिन अगर आपने सच मे किया तब आपको इसका चमत्कार पता चलेगा !इस औषधि को हमेशा ताजा बनाके लगाना है। किसीका भी जखम किसी भी औषधि से ठीक नही हो रहा है तो ये लगाइए। जो सोराइसिस गिला है जिसमे खून भी निकलता है, पस भी निकलता है उसके लीजिये भी यह औषधि पूर्णरूप से ठीक कर देती है।

अकसर यह एक्सीडेंट के केस में खूब प्रोयोग होता है क्योंकि ये लगाते ही खून बंद हो जाता है। ऑपरेशन का कोई भी घाव के लिए भी यह सबसे अच्छा औषधि है। गिला एक्जीमा में यह औषधि बहुत काम करता है, जले हुए जखम में भी काम करता है।

3 जनवरी 2015

स्वास्थ के लिए खाए पार्सले ......!

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यह खट्टा हर्ब कुछ अद्भुत स्वास्थ्यवर्धक गुणों को समेटे हुए है।

* आइये इसके बारे में ज्यादा जानने के लिए आलेख को पूरा पढ़ें....!


* ये  मुख्यतः रेसिपी को सजाने के लिए उपयोग में आने वाला यह हर्ब आपके स्वास्थ्य के लिए किस प्रकार लाभदायक है।

पार्सले के फायदे:-
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* इसमें #एंटी-कैंसर गुण होते हैं जी हाँ ये सच है कि पार्सले में एंटी-कैंसर गुण होते हैं। इसमें कुछ सक्रिय वाष्पशील तेल होते हैं, जिसमें माइरिस्टीसिन प्रमुख है जो फेफड़ों में ट्यूमर के विकास को रोकता है। यह सक्रिय अवयव ऑक्सीडाइज्ड अणुओं को हटाकर अवरुद्ध शारीरिक नलियों को खोलने का कार्य भी करता है।

* धूम्रपान करने वालों के लिए खुशखबरी ये है कि पार्सले का माइरिस्टीसिन सिगरेट के धुएँ में मौजूद कैंसर पैदा करने वाले बैंजोपायरीन को प्रभावहीन बना देता है, जिससे बड़ी आँत और प्रोस्ट्रेट ग्लैंड के कैंसर के खतरे में उल्लेखनीय रूप से कमी आती है।

* इसमें एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण है ..एंटी-इंफ्लेमेटरी गुणों के कारण पार्सले रयूमेटॉइड आर्थ्रिटिस तथा ऑस्टियोपोरोसिस के रोगियों के लिए वरदान है। यह #जोड़ों के सूजन व दर्द को कम करता है और इन रोगों के होने की संभावना भी घटाता है।

* ये हड्डियाँ मजबूत करता है #पार्सले में विटामिन के होता है जो ऑस्टियोकैल्शिन के संश्लेषण के लिए आवश्यक है। इसके अतिरिक्त, यह ऊतकों में कैल्शियम का जमाव रोकता है और स्ट्रोक, आर्थ्रोस्क्लेरोसिस तथा रक्तसंचरण प्रणाली की अन्य बीमारियों से बचाता है।

* ये है एंटी-ऑक्सीडेंट का स्रोत  ...पार्सले में बीटा कैरोटीन, विटामिन सी तथा फ्लैवनॉइड जैसे एंटी-ऑक्सीडेंट होते हैं। जहाँ विटामिन सी प्रतिरक्षा प्रणाली को बेहतर बनाता है और एंटी-इंफ्लेमेटरी कार्यप्रणाली को मजबूत करता है, वहीं बीटा कैरोटीन आर्थ्रोस्क्लेरोसिस और हृदय की अन्य समस्याओं का खतरा कम करता है।

* दिल को स्वस्थ रखने वाला हर्ब है .. पार्सले फॉलिक एसिड का अच्छा स्रोत है और दिल तथा रक्तसंचार प्रणाली के सुचारू रूप से कार्य करने के लिए सबसे अधिक अनुशंसित हर्ब्स में से एक है। दिल की बीमारियों और मधुमेह के कारण होने वाली दिल की समस्याओं के रोगियों को पार्सले का अधिक मात्रा में सेवन करना चाहिए। पार्सले का फॉलिक एसिड गर्भाशय ग्रीवा और बड़ी आँत में सही तरीके से कोशिका विभाजन को प्रोत्साहित कर इनमें होने वाले कैंसर की संभावना घटाता है। इन दोनों स्थानों पर कोशिका विभाजन बहुत तेजी से होता है।

* ये आपको संक्रमणों से बचाता है पार्सले विटामिन ए का भी समृद्ध स्रोत है। इसके कारण यह विटामिन ए की कमी से होने वाली अनेक समस्याओं से बचाता है। पार्सले उत्सर्जन, श्वसन और पाचन तंत्र की आंतरिक झिल्ली की कार्यप्रणाली सही रखता है। प्रतिरक्षा प्रणाली को बेहतर बनाने तथा बाहरी आक्रामक तत्वों से लड़ने वाली श्वेत रक्त कोशिकाओं को अपना कार्य ठीक तरह से करने के लिए विटामिन ए की बहुत जरूरत होती है।

* पार्सले में मौजूद विटामिन के जरूरी वसा का संश्लेषण कर तंत्रिका झिल्ली को स्वस्थ और मजबूत बनाता तथा तंत्रिका तंत्र की कार्य प्रणाली को बेहतर बनाता है।