छोटे-छोटे कुछ प्रयोग इन्हें भी आजमाए ....!

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युवावस्था मे होने वाले सफ़ेद बालो को काला करने का उपाय:-
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जिसे थेलिसिमिया, परनीसियास एनीमिया, सिक़ल सेल एनीमिया, एडिसन डीजीज, क्रोनह डीजीज हो वह यह दवा न ले। जिसे इन बीमारियों के नाम न पता हो वह चिंता न करे क्योंकि ये रोग बहुत कम होते है और जिसे होते हैं उसे पता चल जाता है।


भृंगराज चूर्ण- 100 ग्राम
आमलकी रसायन- 100 ग्राम
मिश्री- 100 ग्राम


भृंगराज चूर्ण पीसा हुआ मिले तो वह ले नहीं तो साबुत को खरीद कर पीस ले।तथा आमलकी रसायन कृष्ण गोपाल आयुर्वेद भवन, गुरुकुल काँगड़ी या दिव्य फार्मेसी का ले।अब आप तीनों को मिला कर रख ले। इस दवा को  1-1 छोटा चम्मच सुबह शाम पानी से या दूध से ले। 6 महीने मे बाल काले हो जाएगे और इससे स्थायी कब्ज भी इससे दूर हो जाती है ये दवा लीवर (यकृत/ जिगर ) की क्रिया को सुधारती है। अम्लपित्त को नष्ट करती है दवा के साथ प्रतिदिन सुबह 1से 3 मिंनट तक शीर्षासन करे। सुबह या दोपहर मे नाक मे 2 बूंद गाय का घी या बादाम रोगन डाले। नाक मे दवाई नहाने से 1 घंटा पहले डाले या नहाने के बाद जब बाल सुख जाए तब डाले। गीले सिर नाक मे दवा न डाले। नाक मे दवा डाल कर 1 घंटे तक ठंडा पानी न पिए।तथा आप सिर पर सरसो या तिल का तेल लगाए।

बच्चों को सर्दी या बुखार हो:-
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दो-तीन तुलसी के पत्ते और छोटा सा टुकड़ा अदरक को सिलबट्टे पर पीस कर मलमल के कपड़े की सहायता से रस निकाल कर 1 चम्मच शहद मिला कर दिन में 2-3 बार देने से सर्दी में आराम मिलता है।


लौंग को पानी की बूंदों की सहायता से रगड़ कर उसका पेस्ट माथे पर और नाभि पर लगाना चाहिए।


एक कप पानी में चार-पाँच तुलसी के पत्ते और एक टुकड़ा अदरक ड़ाल कर उबाल लें पानी की आधी मात्रा रह जाने पर उसमें एक चम्मच गुड़ ड़ाल कर उबाल लें। दिन में दो बार दें। आराम आ जायेगा।


उल्टी:-
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तुलसी के रस में बराबर की मात्रा में शहद मिला कर चाटने से उल्टी बन्द हो जाती है।


2 चम्मच शहद में बराबर मात्रा में प्याज़ का रस मिला कर चाटने से उल्टी बन्द हो जाती है।


दिन में 5-6 बार एक-एक चम्मच पोदीने का रस पीने से उल्टी बन्द हो जाती है।


जब बार-बार मूत्र आये:-
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सुबह-शाम एक-एक गुड़ और तिल से बना लड्ड़ु खाना चाहिए।


शाम के समय काले भुने हुए चने छिल्का सहित खाएं और एक छोटा सा टुकड़ा गुड़ का खाकर पानी पी लें।


दस्त की समस्या:-
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खाना खाने के बाद एक कप लस्सी में एक चुटकी भुना ज़ीरा और काला नमक ड़ाल कर पीएं। दस्त में आराम आयेगा।


अदरक का रस नाभि के आस-पास लगाने से दस्त में आराम मिलता है।


मिश्री और अमरूद खाने से भी आराम मिलता है।


कच्चा पपीता उबाल कर खाने से दस्त में आराम मिलता है।


नाभि के अपने स्थान से खिसक जाने पर:-
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मरीज़ को सीधा लिटाकर उसकी नाभि के चारों ओर सूखे आंवले का आटा बना कर उसमें अदरक का रस मिलाकर बांध दें और दो घंटों के लिए सीधा ही लेटे रहने दें। दो बार ऐसा करने से नाभि अपने स्थान पर आ जायेगी। दर्द और दस्त जैसे कष्ट भी दूर होंगे। ऐसे समय में मरीज़ को मुंग की दाल वाली खिचड़ी खाने में देनी चाहिए।अदरक और हींग का सेवन भी फायदा करता है।


पेट में वायु की अधिकता:-
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ऐसी समस्या से छुटकारा पाने के लिए भोजन के बाद 3-4 मोटी इलायची के दाने चबा कर ऊपर से नींबू पानी पीने से पेट हल्का होता है।


सुबह-शाम 1/4 चम्मच त्रिफला का चूर्ण गर्म पानी के साथ लेने से पेट नर्म होता है।


अजवायन और काला नमक को समान मात्रा में मिला कर गर्म पानी से पीने से पेट का अफारा ठीक होता है।


पैर में मोच:-
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आक या पान का पत्ता या आम का पत्ते को चिकना कर नमक लगा कर उस स्थान पर बांधने से काफी लाभ होता है।


चोट लगने पर नमक में काले तिल, सूखा नारियल और हल्दी मिला कर पीस कर गरम कर चोट वाले स्थान पर बांधने से आराम मिलता है।


घुटनों के दर्द के कुछ उपाय:-
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सुबह खाली पेट तीन-चार अखरोट की गिरियां निकाल कर कुछ दिनों तक खाना चाहिए। इसके नियंत्रित सेवन से घुटनों के दर्द में आराम मिलता है।तथा नारियल की गिरी भी खाई जा सकती है। इससे घुटनों के दर्द में राहत मिलती है।


अस्थमा की समस्या:-
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तुलसी के पत्तों को अच्छी तरह से साफ कर उनमें पिसी काली मिर्च डालकर खाने के साथ देने से दमा नियंत्रण में रहता है।


गर्म पानी में अजवाइन डालकर स्टीम लेने से भी दमे को नियंत्रित करने में राहत मिलती है।


किड़नी में पथरी की समस्या:-
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तीन हल्की कच्ची भिंड़ी को पतली-पतली लम्बी-लम्बी काट लें। कांच के बर्तन में दो लीटर पानी में कटी हुई भिंड़ी ड़ाल कर रात भर के लिए रख दें। सुबह भिंड़ी को उसी पानी में निचोड़ कर भिंड़ी को निकाल लें। ये सारा पानी दो घंटों के अन्दर-अन्दर पी लें। इससे किड़नी की पथरी से छुटकारा मिलता है।

उपचार स्वास्थ्य और प्रयोग -

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