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31 मार्च 2015

शाबर मंत्रो द्वारा रोग निवारण करे ....!

By With 1 टिप्पणी:
* शाबर मंत्र आम ग्रामीण बोलचाल की भाषा में ऐसे स्वयं सिद्ध मंत्र हैं जिनका प्रभाव अचूक होता है। थोड़े से जाप से भी ये मंत्र सिद्ध हो जाते हैं तथा अत्यधिक प्रभाव दिखाते हैं। इन मंत्रों का प्रभाव स्थायी होता है तथा किसी भी मंत्र से इनकी काट संभव नहीं है। शाबर मंत्रो का भी एक अलग विज्ञान है कुछ शब्दों का चयन इस प्रकार है जिसका कोई अर्थ नहीं होता मगर देवताओं को उस कार्य को करने को प्रेरित किया जाता है और एक दुहाई या कसम दी जाती है कुछ छिट-पुट रोगों के लिए हमने इसे आजमाया है और बिलकुल सटीक पाया है कई बीमारियों से इससे निजात पाई जा सकती है |

तो आपके लिए यह एक सरल साधना पोस्ट कर रहा हूँ .

उदर रोग का एक महत्वपूर्ण प्रयोग
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*  इस साधना को करने से पेट की तमाम बीमारियों से निज़ात पाई जा सकती है | बदहज्मी, पेट गैस, दर्द और आंव का पूर्ण इलाज हो जाता है | इसे ग्रहण काल, दीपावली और होली आदि शुभ मुहुरतों में कभी भी सिद्ध किया जा सकता है | आप दिन या रात में कभी भी कर सकते हैं | इस मंत्र को १०८ बार जप कर सिद्ध कर लें | प्रयोग के वक़्त ७ बार पानी पर मन्त्र पढ़ फूँक मारें और रोगी को पिला दें , जल्द ही फ़ायदा होगा |

साबर मन्त्र
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 || ॐ नमो अदेस गुरु को शियाम बरत शियाम  गुरु पर्वत में बड़ बड़ में कुआ कुआ में तीन सुआ कोन कोन सुआ वाई सुआ छर सुआ पीड़ सुआ भाज भाज रे झरावे यती हनुमत मार करेगा  भसमंत फुरो मन्त्र इश्वरो वाचा ||

नेत्र रोग की महत्वपूर्ण साधना
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* आंखे मनुष्य के लिए अनमोल रत्न हैं | कई बार व्यक्ति अकारण वश नेत्र रोग से पीड़ित हो जाते हैं | जिससे बहुत परेशानी का सामना करना पड़ता है | यह बहुत ही तीक्ष्ण मन्त्र है, इससे तमाम नेत्र रोग से निज़ात पाई जा सकती है | इसे भी ग्रहण काल, होली, दीपावली आदि शुभ मुहुरतों में १०८ बार जाप कर सिद्ध कर लें और प्रयोग के वक़्त इसको ७ बार पढ़कर कुषा से झाडा कर दें , तमाम नेत्र दोष दूर हो जाते हैं |

साबर मन्त्र
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||ॐ अन्गाली बंगाली अताल पताल गर्द मर्द आदर ददार फट फट उत्कट ॐ हुं हुं ठा ठा ||

आधा सिर दर्द
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* आधा सिर दर्द और माईग्रेन एक बहुत बड़ी समस्या है | उसके लिए एक महत्वपूर्ण मन्त्र दे रहा हूँ | इसे भी ग्रहण काल, दीपावली आदि पर उपर वाले तरीके से सिद्ध कर लें | प्रयोग के वक़्त एक छोटी नमक की डली ले कर उस पर ७ बार मन्त्र पढ़ें और पानी में घोल कर माथे पर लगा दें , आधे सिर की दर्द फ़ौरन बंद हो जाएगी |

साबर मन्त्र
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|| को करता कुडू करता बाट का घाट का हांक देता पवन बंदना योगीराज अचल सचल ||

दाड दर्द का एक महत्व पूर्ण  मंत्र
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 * दाड दर्द जिसे हो वही जानता है | कई बार तो दाड निकालने की नौबत आ जाती है | इस दर्द से निज़ात पाने का एक बहुत ही महत्वपूर्ण मन्त्र दे रहा हूँ | इसे सूर्य ग्रहण,  दीपावली आदि में १०८ बार जप कर सिद्ध कर लें | प्रयोग के वक़्त नीम की डाली से झाडा कर दें |

साबर मंत्र
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|| ॐ नमो आदेश गुरु को वन में विहाई अंजनी जिस जाया हनुमंत कीड़ा मकोड़ा माकडा यह तीनो भसमंत गुरु की शक्ति मेरी भगती फुरो मंत्र इश्वरो वाचा ||

यह सभी साधनाएं प्रयोग अजमाए हुए हैं | एक बार सिद्ध कर लेने से जब चाहे काम ले सकते हैं |जप से पहले अगर आप एक माला अपने गुरु मन्त्र का जाप करके सिद्ध करे तो इसका प्रभाव दुगना हो जाता है .

समय आने पे कुछ और शाबर मंत्रो की व्याख्या अवश्य करूँगा ...!
उपचार स्वास्थ्य और #प्रयोग -http://upchaaraurpryog120.blogspot.in/

19 मार्च 2015

चुंबन दो आत्माओं का मिलन भी होता है....!

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किस करना हमेशा से एक चर्चा का विषय रहा है प्रेमियों के लिए इसका खास महत्व होता है और अन्य के लिए यह सिर्फ एक खबर हो सकती है। यूं तो चुंबन प्रेम की अभिव्यक्ति का माध्यम है। इसके द्वारा आप अपने साथी पर अपना समस्त प्रेम न्यौछावर कर देते हैं-



पुरुषों के लिए चुंबन अपने साथी के मीठे स्पर्श का अहसास कराता है जबकि महिलाओं को लंबे चुंबन पसंद होते हैं पुरुष और महिलाओं के बीच चुंबन दो आत्माओं का मिलन भी होता है-

महिलाएं अक्सर चुंबन को अपने पार्टनर के साथ एक बॉन्ड की तरह उपयोग करती हैं और उन्हें यह एहसास दिलाती है कि उन्होंने उन्हें अपने संभावित पार्टनर के तौर पर चुना है-

दूसरी तरफ पुरुष के लिए चुंबन का मतलब किसी बात को खत्म करना समझते हैं इसका अंत सेक्स ही होता है और पुरुष अपनी महिला पार्टनर में सेक्स उत्तेजना जगाने के लिए ही चुंबन का सहारा लेते हैं-

18 मार्च 2015

आर्थिक तंगी और कर्ज -मुक्ति के लिए प्रयोग ....!

By With 3 टिप्‍पणियां:
*कभी-कभी मज़बूरी वश या अपनी आवश्यकताओं के कारण लोगो को कर्जा लेना ही पड़ता है। कर्ज लेने वाले व्यक्ति को सामने वाले की बहुत सी सही / गलत मनमानी शर्तों को भी मानना पड़ता है।आजकल तो हर छोटा बड़ा आदमी कहीं न कहीं से मकान, गाड़ी,गृह उपोयोगी वस्तुओं,शिक्षा, व्यापार आदि के लिए कर्ज लेता है ।कई बार गलत समय पर कर्ज लेने के कारण या किसी भी अन्य कारण से कर्ज लेने के बाद उसे लौटाना व्यक्ति को भारी हो जाता है वह लाख चाहकर भी कर्ज समय पर नहीं चुका पाता है उस पर कर्ज लगातार बहुत अधिक बड़ता ही जाता है और कई बार तो उसकी पूरी जिंदगी कर्ज चुकाते-चुकाते समाप्त हो जाती है।वेसे व्यक्ति को यथा संभव कर्जा लेने से बचना चाहिए। प्राचीन मान्यताओं के अनुसार कर्ज लेने व देने संबंधी कुछ आसान से उपाय बता रहे है इन पर अमल करने पर निश्चित ही आपका कर्ज, बिलकुल समय से सुविधानुसार आपके सिर से उतर जाएगा।

कर्जा मुक्ति मन्त्र:-
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 “ॐ ऋण-मुक्तेश्वर महादेवाय नमः”

 “ॐ मंगलमूर्तये नमः”

 “ॐ गं ऋणहर्तायै नमः”

* इनमे से किसी भी एक मन्त्र के नित्य कम से कम एक माला के जप से व्यक्ति को अति शीघ्र कर्जे से मुक्ति मिलती है ।

* किसी के सिर पर कर्जा है तो एक सफेद कपड़ा ले लिया और पाँच फूल गुलाब के ले लिए पहले एक फुल हाथ में लिया और गायत्री मंत्र बोलना है  :-

ॐ भू र्भुव: स्व: तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो न: प्रचोदयात् |

अब इस फूल को  कपड़े पर रख दिया इसी प्रकार  ऐसे ही पाँचो फुल गायत्री मंत्र जपते हुये कपडे पर रख दिये और कपड़े को गठान लगाईं और प्रार्थना करना है कि मेरे सिर पर जो भार है.. हे भगवान, हे भागीरथी गंगा !! वो भार भी बह जाये, दूर हो जाये, नष्ट हो जाये ऐसा करके जो कपड़ा बाँधा है फूल रखकर बहते जल में उसे प्रवाहित कर  दे |

एक और कर्ज से मुक्ति हेतु उपाय :-
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* जब भी शुक्ल पक्ष हो किसी भी मास का, शुक्ल पक्ष के प्रथम मंगलवार को शिवलिंग पर दूध व जल के बाद मसूर की दाल अर्पण करते हुये ये मंत्र बोले :-

"ॐ ऋणमुक्तेश्वर महादेवाय नम: " तो इसे ऋण, कर्जे से मुक्ति मिलती है |

गुरूवार के पूजन से स्थायी लक्ष्मी :-
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* हर गुरुवार को तुलसी के पौधे में शुद्ध कच्चा दूध गाय का थोडा-सा ही डाले तो, उस घर में लक्ष्मी स्थायी होती है और गुरूवार को व्रत उपवास करके गुरु की पूजा करने वाले के दिल में गुरु की भक्ति स्थायी हो जाती है | तथा तुलसी की पूजा करने वाले के घर में लक्ष्मी स्थायी हो जायेगी |

आर्थिक परेशानी से बचने हेतु :-
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* हर महीने में शिवरात्रि (मासिक शिवरात्रि - कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी) को आती है | तो उस दिन जिसको घर में आर्थिक कष्ट रहते है वो शाम  के समय या संध्या के समय जप-तप करें, दीप-दान शिवमंदिर में कर दें और रात को जब १२ बज जायें तो थोड़ी देर जाग कर जप और एक पाठ हनुमान चालीसा का करें | तो आर्थिक परेशानी दूर हो जायेगी |

* वर्ष में एक महाशिवरात्रि आती है और हर महीने में एक मासिक शिवरात्रि आती है। उस दिन शाम  को बराबर सूर्यास्त हो रहा हो उस समय एक दिया पर पाँच लंबी बत्तियाँ अलग-अलग उस एक में हो शिवलिंग के आगे जला के रखना | प्रार्थना कर देना, बैठ के जप करना | इससे व्यक्ति के सिर पे कर्जा हो तो जलदी उतरता है, आर्थिक परेशानियाँ दूर होती है |

वार्षिक महाशिवरात्रि :-
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* इस दिन तो सुबह से सूर्योदय से लेकर अगले दिन के सूर्योदय तक पानी भी न पिये | हर महाशिवरात्रि को अगर कोई करे भाग्य की रेखा ही बदल सकती है | ये करना ही चाहिये १५ से लेकर ४५ साल के उम्र के लोगों को |

* त्रयोदशी को मंगलवार उसे भोम प्रदोष योग कहते है ....उस दिन नमक, मिर्च नहीं खाना चाहिये, उससे जल्दी  फायदा होता है | मंगलदेव ऋणहर्ता देव हैं। उस दिन संध्या के समय यदि भगवान भोलेनाथ का पूजन करें तो भोलेनाथ की, गुरु की कृपा से हम जल्दी ही कर्ज से मुक्त हो सकते हैं। इस दैवी सहायता के साथ थोड़ा स्वयं भी पुरुषार्थ करें। पूजा करते समय यह मंत्र बोलें –

" मृत्युंजयमहादेव त्राहिमां शरणागतम्। जन्ममृत्युजराव्याधिपीड़ितः कर्मबन्धनः।।"

कुछ बातो  का ध्यान भी रक्खे :-
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* पूर्णिमा व मंगलवार के दिन उधार दें और बुधवार को कर्ज लें।

* कभी भूलकर भी मंगलवार को कर्ज न लें एवं लिए हुए कर्ज की प्रथम किश्त मंगलवार से देना शुरू करें। इससे कर्ज शीघ्र उतर जाता है।

* कर्ज मुक्ति के लिए ऋणमोचन मंगल स्तोत्र का पाठ करें |

* कर्जे से मुक्ति पाने के लिए लाल मसूर की दाल का दान दें।

* अपने घर के ईशान कोण को सदैव स्वच्छ व साफ रखें।

* ऋणहर्ता गणेश स्तोत्र का शुक्लपक्ष के बुधवार से नित्य पाठ करें।

* बुधवार को सवा पाव मूंग उबालकर घी-शक्कर मिलाकर गाय को खिलाने से शीघ्र कर्ज से मुक्ति मिलती है|

* सरसों का तेल मिट्टी के दीये में भरकर, फिर मिट्टी के दीये का ढक्कन लगाकर किसी नदी या तालाब के किनारे शनिवार के दिन सूर्यास्त के समय जमीन में गाड़ देने से कर्ज मुक्त हो सकते हैं।

* घर की चौखट पर अभिमंत्रित काले घोड़े की नाल शनिवार के दिन लगाएं।

*  ५ गुलाब के फूल, १ चाँदी का पत्ता, थोडे से चावल, गुड़ लें। किसी सफेद कपड़े में २१ बार गायत्री मन्त्र का जप करते हुए बांध कर जल में प्रवाहित कर दें। ऐसा ७ सोमवार को करें।

* सर्व-सिद्धि-बीसा-यंत्र धारण करने से सफलता मिलती है।

* मंगलवार को शिव मंदिर में जाकर शिवलिंग पर मसूर की दाल “ॐ ऋण-मुक्तेश्वर महादेवाय नमः”मंत्र बोलते हुए चढ़ाएं।

* हनुमानजी के चरणों में मंगलवार व शनिवार के दिन तेल-सिंदूर चढ़ाएं और माथे पर सिंदूर का तिलक लगाएं।हनुमान चालीसा या बजरंगबाण का पाठ करें|

* घर अथवा कार्यालय मे गाय के आगे खड़े होकर वंशी बजाते हुए भगवान श्री कृष्ण का चित्र लगाने से कर्जा नहीं चडता और दिए गए धन की डूबने की सम्भावना भी कम रहती है |

* यदि व्यक्ति अपने घर के मंदिर में माँ लक्ष्मी की पूजा के साथ 21 हक़ीक पत्थरों की भी पूजा करें फिर उन्हें अपने घर में कहीं पर भी जमीन में गाड़ दे और ईश्वर से कर्जे से मुक्ति दिलाने के लिए प्रार्थना करें तो उसे शीघ्र ही कर्जे से छुटकारा मिल जायेगा ।

* कर्जे से मुक्ति प्राप्त करने के लिए व्यक्ति लाल वस्त्र पहनें या लाल रूमाल साथ रखें। भोजन में गुड़ का उपयोग करें।

* बुधवार को स्नान पूजा के बाद व्यक्ति सर्वप्रथम गाय को हरा चारा खिलाये उसके बाद ही खुद कुछ ग्रहण करें तो उसे शीघ्र ही कर्जे से छुटकारा मिल जाता है।

* कर्जा लेने वाला व्यक्ति यदि अपनी तिजोरी में स्फुटिक श्रीयंत्र के साथ साथ मंगल पिरामिड की स्थापना करें और नित्य धूप दीप दिखाएँ तो उसे शीघ्र ही ऋण से मुक्ति मिलती है ।
उपचार स्वास्थ्य और प्रयोग-

15 मार्च 2015

असाध्य बीमारियों का इलाज है यहाँ -

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रैसलपुर महाकाली दरबार में लग रही हजारों भक्तों की भीड़ -




पृथ्वी पर जड़ और चेतन हर पदार्थ में ज्ञान शक्ति के रूप में दैवीय शक्ति कार्य कर रही है इसका प्रत्यक्ष प्रमाण माता महाकाली दरबार रैसलपुर में देखा जा सकता है।

यह दरबार वर्ष 1990 से निरन्तर है। आज जहां एक ओर विज्ञान द्वारा आधुनिक यंत्रों से मनुष्य के अन्दर उत्पन्न व्याधियों का बड़े शहरों में लाखों रुपया खर्च करके सी.टी. स्केन/ एमआरआई/ कार्डियोग्राफी जैसे अनेकों प्रकार की जांच करके पता लगाया जाता है वहीं यहां पर जांच का सटीक विवरण माताजी के दरबार में व्याधिग्रस्त मनुष्य के उपस्थित होने पर पलभर में कर दिया जाता है, इससे भी आगे उस व्यक्ति के साथ भूतकाल से घटित घटना/ तथा बीमारी उत्पन्न करने वाली प्रेत आत्मा का उल्लेख जो उस व्यक्ति को स्वप्न में दिखाई देकर प्रभावित करके काल का योग बना रही है उसके संकेत एवं प्रमाण दरबार में दिए जाते हैं।

विगत 21-22 वर्षों से माता जी के दरबार में देश-विदेश के अनेकों शहरों, गांवों के असंख्य निराश व्यक्ति जो कैंसर, एड्स, ट्यूमर, लकवा, किडनी, मिर्गी, हृदय रोग निसंतान और ऐसी जघन्न व्याधि जो मेडिकल साइंस से परे थी का इलाज सफलता पूर्वक कराकर व्याधिमुक्त हुए हैं और निरन्तर लोग उपस्थित होकर आशीर्वाद प्राप्त कर रहे हैं। ईश्वरीय शक्ति के विद्यमान होने के प्रमाण हेतु दरबार में माताजी घोर ज्वाला, महाकाली के रूप में उदय होती है काली, दुर्गा आदि समस्त शक्तियां उनके अंश हैं- काल/अकाल उनकी भुजा में धारण हैं वे मनुष्यों के भाग्य उदय करती हैं, बनाती हैं। धनहीन को धनवान तथा भाग्यहीन को भाग्यवान भी वे बनाती हैं वे काल की भी काल हैं ऐसी माता महाकाली त्रिलोक जननी हैं और वे कण-कण में व्याप्त हैं। मनुष्य देह में निराकार एवं सत्व रूप में विद्यमान है। इस प्रकार वेदों/ पुराणों में वर्णित महाकाली की महिमा को साक्षात दरबार में देखा और अनुभव किया जा सकता है और उनके दर्शन पाकर मनुष्य जीवन की सार्थकता प्राप्त कर सकते हैं इसमें कोई संदेह नहीं है।आप भी एक बार महाकाली दरबार में आकर स्वयं प्रत्यक्ष अनुभव कर लाभ प्राप्त कर सकते हैं।

कलयुग में शीघ्र प्रसन्न:-
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आज के युग में माँ महाकाली की साधना कल्पवृक्ष के समान है क्योंकि ये कलयुग में शीघ्र-अतिशीघ्र फल प्रदान करने वाली महाविद्याओं में से एक महा विद्या है। जो साधक महाविद्या के इस स्वरूप की साधना करता है उसका मानव योनि में जन्म लेना सार्थक हो जाता है, क्योंकि एक तरफ जहाँ माँ काली अपने साधक की भौतिक आवश्कताओं को पूरा करती हैं वहीं दूसरी तरफ उसे सुखोपभोग कराते हुए एक-छत्र राज प्रदान करती है। वैसे तो जबसे इस ब्रह्मांड की रचना हुई है तब से लाखों करोड़ों साधनाओं को हमारे ऋषियों द्वारा आत्मसात किया गया है पर इन सबमें से दस महाविद्याओं, जिन्हें मात्रिक शक्ति की तुलना दी जाती है, की साधना को श्रेष्ठतम माना गया है। जबसे इस पृथ्वी का काल आयोजन हुआ है तब से माँ महाकाली की साधना को योगियों और तांत्रिको में सर्वोच्च की संज्ञा दी जाती है।

साधक को महाकाली की साधना के हर चरण को पूरा करना चाहिए क्योंकि इस साधना से निश्यच ही साधक को वाक-सिद्धि की प्राप्ति होती है। वैसे तो इस साधना के बहुतेरे गोपनीय पक्ष साधक समाज के सामने आ चुके हैं परन्तु आज भी हम इस महाविद्या के कई रहस्यों से परिचित नहीं है। कामकला काली, गुह्य काली, अष्ट काली, दक्षिण काली, सिद्ध काली आदि के कई गोपनीय विधान आज भी अछूते ही रह गए। साधकों के समक्ष आने से, जितना लिखा गया है ये कुछ भी नहीं उन रहस्यों की तुलना में जो कि अभी तक प्रकाश में नहीं आया है और इसका महत्वपूर्ण कारण है इन विद्याओं के रहस्यों का श्रुति रूप में रहना, अर्थात ये ज्ञान सदैव सदैव से गुरु गम्य ही रहा है, मात्र गुरु ही शिष्य को प्रदान करता रहा है और इसका अंकन या तो ग्रंथों में किया ही नहीं गया या फिर उन ग्रंथों को ही लुप्त कर दिया काल के प्रवाह और हमारी असावधानी और आलस्य ने।

किसी भी शक्ति का बाह्य स्वरूप प्रतीक होता है उनकी अन्त: शक्तियों का जो कि सम्बंधित साधक को उन शक्तियों का अभय प्रदान करती हैं, अष्ट मुंडों की माला पहने माँ यही तो प्रदर्शित करती हैं कि मैं अपने हाथ में पकड़ी हुई ज्ञान खडग से सतत साधकों के अष्ट पाशों को छिन्न-भिन्न करती रहती हूं। उनके हाथ का खप्पर प्रदर्शित करता है ब्रह्मांडीय सम्पदा को स्वयं में समेट लेने की क्रिया का, क्योंकि खप्पर मानव मुंड से ही तो बनता है और मानव मष्तिष्क या मुंड को तंत्र शास्त्र ब्रह्माण्ड की संज्ञा देता है,अर्थात माँ की साधना करने वाला भला माँ के आशीर्वाद से ब्रह्मांडीय रहस्यों से भला कैसे अपरिचित रह सकता है। इन्ही रूपों में माँ का एक रूप ऐसा भी है जो अभी तक प्रकाश में नहीं आया है और वह रूप है माँ काली के अदभुत रूप महा घोर रावा का, जिनकी साधना से वीरभाव, ऐश्वर्य, सम्मान, वाक् सिद्धि और उच्च तंत्रों का ज्ञान स्वत: ही प्राप्त होने लगता है,अदभुत है माँ का यह रूप जिसने सम्पूर्ण ब्रह्मांडीय रहस्यों को ही अपने आप में समेटा हुआ है और जब साधक इनकी कृपा प्राप्त कर लेता है तो एक तरफ उसे समस्त आंतरिक और बाह्य शत्रुओं से अभय प्राप्त हो जाता है वही उसे माँ काली की मूल आधार भूत शक्ति और गोपनीय तंत्रों में सफलता की कुंजी भी तो प्राप्त हो जाती है। वस्तुत: ये क्रियाएँ अत्यंत ही गुप्त रखी गयी हैं और सामन्य साधकों को तो इन स्वरूपों की जानकारी भी नही है परन्तु हमारी सदगुरु परम्परा में हमें सहजता से सभी रहस्यों का परिचय प्राप्त होता है। इनकी मूल साधना अत्यधिक ही दुष्कर मानी गयी है और श्मशान, पूर्ण तैयारी और कुशल गुरु मार्गदर्शन के बिना इसका अभ्यास भी नहीं करना चाहिए अन्यथा स्वयं के प्राण तीव्रता के साथ बाह्य्गामी होकर ब्रह्माण्डीय प्राणों के साथ योग कर लेते हैं और पुन: लौट कर साधक के मूल शरीर मैं नहीं आते हैं। परन्तु सदगुरुदेव की कृपा से हम सभी को इसे जानने देखने व उनके सामीप्य होने का सौभाग्य मिला है। आइये जानते हैं रैसलपुर महाकाली दरबार की महिमा के बारे में।

दरबार में लगती है भक्तों की अर्जी:-
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महाकाली के दरबार में सबसे पहले हर भक्त की एक अर्जी लगती है। जिसमें एक नारियल, 250 ग्राम गेहूं, अगरबत्ती, कपूर, पुष्प, प्रसाद एवं दक्षिणा होती है। दरबार में एक तरफ महिलाएं व दूसरे तरफ पुरुष लाइन से बैठते हैं। जिसका नंबर आता है वह अर्जी लेकर गद्दी के समक्ष बैठ जाता है। अपने दोनों हाथों को सिर से पैर के नीचे तक तीन बार फेरता है। इसके बाद मातारानी जी भक्तों की अक्षरस: समस्या स्वत: ही बताती हैं। इसके बाद वह उनका उपाय बताती हैं जिससे भक्त को तत्क्षण लाभ हो जाता है।

रक्षा कवच:-
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मातारानी जी ने भक्त को बताया कि रक्षा कवच धारण करें तो रक्षा कवच एक साल के लिए दरबार वहीं बनाकर द्वारा दिया जाता है। जिससे आने वाली बाधा या नहीं आकर सालभर तक रक्षा करती है। एक साल से पहले भक्त को दरबार में आकर पुन: रक्षाकवच को बदलवाकर धारण करना पड़ता है।

हवन योग से समस्या का हल:-
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जो जातक जटिल बीमारियों से ग्रस्त हैं, ऐसी बीमारियां जो डॉक्टर ठीक नहीं कर पाते तथा व्यक्ति निराश होकर घर बैठकर भगवान से प्रार्थना करता है, उस स्थिति में दरबार में आते ही रोगी को तत्काल फायदा मिल जाता है। इसी तरह किसी लड़का-लड़की की शादी नहीं हो रही और अनेक बाधाएं आ रही हैं, ऐसे मांगलिक कार्य दरबार में हवन योग से सही हो जाते हैं। इसमें हर जातक को एक विशिष्ट हवन कराना पड़ता है जिससे वह जटिल बीमारी से मुक्ति पा लेता है। इसी तरह हवन योग कराकर मांगलिक कार्य होने लगते हैं। भयंकर ऊपरी बाधाओं (जादू-टोना) से ग्रस्त जातक प्रसन्नत चित्त होकर अपना नियमित कर्म बड़े ही आराम से करने लगता है एवं दिनोंदिन तरक्की के मार्ग पर चलता रहता है।

भक्तों की होती है वीडियो रिकार्डिंग:-
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हर शनिवार को रात 10 बजे से लगने वाले महाकाली दरबार में आने वाले प्रत्येक भक्त की वीडियो रिकार्डिंग कई बर्षों से अनवरत जारी है। जिससे जातकों का विश्वास लगातार बढ़ता जा रहा है।

डायरी लेखन:-
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रैसलपुर महाकाली दरबार में एक सेवक- भक्त का नाम पता मोबाइल नंबर, बीमारी तथा मातारानी द्वारा बताए गए उपाय लिखता है। जब वह ठीक हो जाता है उसका भी विवरण लिखा जाता है। जिससे प्रत्येक भक्त का रिकार्ड बना रहे।

जटिल बीमारियां और उनका इलाज :-
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हर प्रकार का कैंसर, एडस, टीबी, लकवा, मानसिक रोग, मिर्गी, सफेद दाग, थाइराइड (घुटनों, कमर में पुराना दर्द), किडनी, हार्ट, पथरी, वबासीर, डायबिटीज (शुगर), महिलाओं की बीमारियां आदि अनेक प्रकार की जटिल बीमारियों का इलाज बड़ी ही सरलता से हो जाता है। जहां डॉक्टर हार मान जाते हैं वहां दरबार में मरीज रो-रोकर आता है और हंसकर जाता है।

सभी प्रकार की समस्याओं का निदान:-
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जातक की समस्या किसी भी प्रकार की हो, दरबार में आते ही वह छूमंतर हो जाती हैं। उद्योग-व्यापार में बरकत, नौकरी प्रमोशन, पारिवारिक कलह, पति-पत्नी में अनबन, शादी-विवाह की समस्या, कोर्ट-कचहरी के निकारण, दुश्मनी खत्म करना, पढ़ाई में मन नहीं लगना, किसी काम में मन नहीं लगना, ऊपरी बाधाओं से छुटकारा आदि हर समस्या जल्द ठीक हो जाती है।

मातारानी का सच्चा है ये दरबार:-
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जो भक्त रैसलपुर महाकाली दरबार में पहली बार आता है वह यहीं का होकर रह जाता है। उसे जब एहसास होता है कि हमारी समस्या को क्षणभर में ही समाप्त हो गई है। फिर वह घर पहुंचकर और दस लोगों को महाकाली दरबार के बारे में बताता है जिससे भक्तों का जुड़ाव अपने आप होता जाता है। यहां हजारों लोग अपनी मनोकामना पूरी कराने के लिए हर शनिवार को रात 8 बजे तक पहुंच जाते हैं।

कैसे पहुंचे दरबार:-
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माता महाकाली का दरबार रैसलपुर में स्थित है। यह स्थान होशंगाबाद-इटारसी राजमार्ग पर बना है। यहां रेलवे, बस व चार पहिया वाहन से पहुंचा जा सकता है। भक्त को इटारसी या इटारसी जंक्शन पर उतरना पड़ता है। यहां से मिनी बस, मैजिक, चार पहिया वाहन से लगभग 20 मिनट की रास्ता है। दरबार इटारसी-होशंगाबाद रोड पर राजश्री ढाबा के सामने बना है। भक्त इस तरह से आएं कि शनिवार रात 8 बजे तक दरबार में पहुंच जाएं। जिससे दरबार में आसानी से शामिल हो सकें।

जिन भक्तों का कहना समस्या ठीक हुई :-
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22 वर्षों से समस्या से ग्रस्त था। पानी में दूर तक बह गया था इसे स्वप्र में 2 नाग ने घेरा, पुन: 3 नागों ने घेरा तीसरा नाग फन फटकार-फंककार कर मार रहा था। 46 वर्ष की आयु के काल योग है फिर भी बचाने का वर्णन दिया गया (ऊपर से गिरने की घटना होगी) घर का वर्णन किया खुले भाग में देवी स्थान जो खजाना ढूंढने के कारण रुष्ठ थी उसे शांत करने का आदेश दिया तथा देवी को स्वप्र में आकर प्रसन्नता दिखाने का आदेश प्रमाण हेतु दिया। ढाई माह पश्चात् परेशानी दूर कर कर्मगति बढ़ाने का उल्लेख किया हमने 22 अक्टूबर 2011 को दरबार में आकर बताया  कि जो  वर्णन किया गया था सत्य पाया।
राजेश चौबे- जीवन कला बकतरा, मो. 9993190051

लकवा सही हो गया:-
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लकवा पेशेंट मस्तिष्क में 3 मि.मी. का धब्बा बताया आसन पर हाथ उठवाया चल नहीं पाता था चलवाया तथा अदृश्य ऑपरेशन कर धब्बा ढाई सेमी मीटर कम कर दिया- गोलियां बन्द करने के आदेश दिये। अब लकवा सही हो गया।
गणेशराम माली, भोपाल - मो. 89825020456

पुत्र की मुराद पूरी:-
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4 वर्षों से परेशान पुत्र मांगने आई 2 योग असफल हो गये डॉक्टरों से परीक्षण कराया जांच आशा छोड़ दी। माताजी ने बताया इन्हें स्वप्र के शिशु भागता दिखता है बन्धन होकर हवन योग के माध्यम से उपचार बताया। काम सफल हुआ।
प्रीति विश्वकर्मा- होशंगाबाद

उपचार सही हुआ:-
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आयुषि लगभग 3-4 वर्ष की अवस्था में बरामदे में 10 फिट ऊंचाई से गिर गई थी उसके पश्चात् तेज बुखार- होना वजन नहीं बढऩा तथा बोलना नहीं हो पा रहा था डॉक्टर्स ने ब्लड टेस्ट स्केंनिग व आई.क्यू टेस्ट करने के पश्चात् सिर की चोट और मन्दता बताया गया 6 वर्षों की अवस्था से एलोपेथिक/आयुर्वेदिक/ व अन्य चिकित्सा निरन्तर चल रही थी इस प्रकार 16 वर्ष की अवस्था तक कोई विशेष लाभ नहीं हुआ।  शारीरिक विकास अवरूद्ध होने के साथ उसके सोचने/बोलने में कोई फायदा नहीं हुआ। दिनांक 26-11-2011 को उसे माताजी के दरबार लाया गया माताजी द्वारा वर्णन किया गया कि 4 वर्ष की अवस्था में रात्रि में भयभीत आकृति की आत्मा के प्रहार से नीचे गिरी है तब से वह आत्मा सवार है पीछा कर रही है इस वजह से पिछले 13 वर्षों से इसका शारीरिक/मानसिक/ विकास नहीं पा रहा है श्री उपाध्याय का परिवार उन्हें 3-12-11 को दरबार में उपचार कराया तथा माताजी की कृपा से आयुषी के  बोलने में, खड़े होने चलने में, असाधारण परिवर्तन आया 13 वर्षों के लम्बे समय के कारण शरीर विकास में आई बिकलांगता में भी परिवर्तन हुआ और व्याधि से पूर्णत: मुक्त हुई।
- आयुषी उपाध्याय, बैरागढ़ भोपाल 9826162124

गले का कैंसर सही हो गया:-
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श्रीमति हेमा बाई पति श्री चम्पालाल 2-6-2012 को दरबार में उपस्थित हुई उन्हें 3 माह से गले में सूजन थी बहुत बड़ी गांठ हो गई थी उसे दबाने पर दर्द होता था कंठ के योग पर कील का मुख बन गया था पानी पीने में तक तकलीफ होती थी डॉक्टरों ने कैंसर की आशंका बताई माताजी ने सारा विवरण उल्लेख कर बताया कि इन्हें स्वप्र में मशान बीर नाग द्वारा 2-3 बार फूंक मारकर कैंसर रोग मनुष्य मृत्यु लोक अनुसार उत्पन्न किया है घर के समीप जलता दीपक, काला कोयला राख आदि मिली थी जो क्रिया की गई थी उस योग से रोग उत्पन्न हुआ माताजी द्वारा उन्हे पूर्ण स्वथ्य कर लाभ प्रदान किया 7-7-2012 तक पूर्ण रूप  रोग मुक्त हो चुकी और उनकी आवाज भी बन्द हो गई थी अब तो आसानी से बोलती है खाना,पीना अच्छा होने से शारीरिक स्वास्थ्य में भी परिवर्तन हुआ हैं।
हेमाबाई पति श्री चम्पालाल होशंगाबाद मो.न. 9691223305

कोमा से बाहर आया:-
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विपिन चौरे ग्राम चिल्लई निवासी के भाई रैसलपुर बस स्टेन्ड पर दुर्घटना रात्रि में हुई उन्हें गम्भीर स्थिति में उपचार हेतु भोपाल ले जाया गया सीटी स्केल करने पर कोई गम्भीर चोट मस्तिष्क नहीं पाई गई उपचार चलता रहा इन्दौर भी दिखाया गया रिपोर्ट लेकर बाम्बे के डॉक्टरों को दिखाया सबसे अच्छी दवाई लेने के पश्चात् भी 3 माह से कोमा स्थिति में हैं श्री विपिन चौरे के दिनांक 4-8-12 को  दरबार में उपस्थित होने पर सारा वृतान्त डाक्टरों द्वारा किया गया वर्णन का उल्लेख किया। जो कोमा स्थिति में हैं के बारे में बताया गयाा है कि उन्हें कालरूपी आत्म द्वारा फेंका गया है और वहंा उन्हें प्रभावित कर रही है यह भी वर्णन किया कि उन्हें शरीर के 3 स्थान पर चौक हैं एक स्थान सुन्न हैं तथा एक स्थान पर घाव होने लगा है और माताजी ने उन्हें उसी क्षण से लाभ देना प्रारम्भ किया जिसमें उन्हेें रक्त की गति ज्ञान गति सोच की गति तथा देखने की क्रिया का लाभ प्रारम्भ कर दिया।
- विपिन चौरे/ ग्राम चिल्लई मो.न. 9754643106 (4 अगस्त 2012)

पैर सुन्न था, सही हो गया:-
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मैं 18-8-12 को दरबार में उपस्थित हुआ उनका एक पैर पिछले 6 वर्ष से सुन्न अवस्था में था पैर में जरा भी हरकत नहीं होती थी मुड़ता नहीं था तथा छाती में साढ़े छ: माह दर्द रहता था। एक गठान भी थी बार-बार बुखार आकर पीड़ा होती थी डाक्टर के पास जांच कराने पर कैंसर बताया गया। माताजी ने दरबार में बताया कि  जागृत एवं निंद्रा अवस्था में इनकी छाती पर विगत एक माह से कोई  छाती पर बैठकर खींचता हैं खांसने पर तीव्र दर्द होता हैं दरबार में ही माताजी सुन्न पैर पर गति उत्यन्त की तथा छाती का दर्द को बन्द किया यह लाभ तत्काल दिया गया।
खुमानसिंह कुशवाहा  भोपाल :- मो.न. 8357077575

मेरी मुराद पूरी हुई:-
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मैं काफी समय से परेशान था। मां के दरबार में गया। यहां मैं हर शनिवार पांच बार गया। हमारी मुराद पूरी हो गई। यह दरबार सच्चा है।
अशोक सिन्हा (रेल्वे सर्विस) भोपाल 9826372048

रीड की हड्डी सही हो गई:-
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श्री जोगेन्द्र यादव भोपाल निवासी फौज में सर्विस करते हैं दिनांक 18-8-12 को दरबार में उपस्थित हुए डाक्टरों ने उनके उपचार/जांच करने पर बताया गया कि उनके 3 गुरिये (कमर के) 2 खन्ड में गेप आ गया है जिसके कारण उन्हें बैठने में दर्द होता था खड़े होने के पैरों कम्पन जलन होता हैं यह बीमारी पूरा शरीर ग्रसित होने का उल्लेख किया दरबार के माताजी ने बताया कि रात्रि 12.30 बजे के बाद 2 नारी जोड़े से स्वप्र में आकर इनके शरीर को प्रभावित करती है ये काल रूपी आत्मा ही बीमारी का मुख्य कारण हैं ये जिन्हें आसन पर शरीर से अलग कर कमर की पीड़ा पैरों का कम्पन,जलन दूर कर प्रमाणित किया कि दर्द देने वाली कालरूपी आत्मा हैं इस प्रकार माताजी द्वारा श्री जोगेन्द्र यादव को उक्त व्याधि से पूर्ण रूप से मुक्त कर स्वस्थ लाभ दिया गया।
- जोगेन्द्र यादव (फोज में सर्विस) भोपाल, मोबाइल नं.  992621621

दुर्बलता समाप्त हो गई, मैं चंगी हो गई:-
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स्वीटी को शारीरिक दुर्बलता चक्कर आना, खाना नहीं खाती थी बहुत ही अधिक शरीर क्षीण  हो गया था डाक्टरों से सारे परीक्षण कराने के पश्चात् उन्हें एच.आई.वी ग्रसित एड्स रोग बताया था माताजी के दरबार में उपस्थित होने के पश्चात् उसके खाने में भूख लगना खून बनना बन्द हो गया था वह चालू हो गया सभी दवाइंया बन्द होने के पश्चात् जो शरीर सूख गया था 15 दिवस में आश्चर्य रूप से परिवर्तन आकर स्वस्थ होने लगी बजन बड़ गया तथा शरीर से स्थूल होने लगी दरबार में माताजी द्वारा आदेश दिया गया था कि उनके दी गई रक्षा 6 माह तक शरीर से जुदा नहीं करें किंतु 3 माह पश्चात् रक्षा हटा दी गई और पुन: गम्भीर स्थिति में कमजोर हो गई दिनांक 25-8-12 को उनके पिता श्री साहिबराव दरबार में आकर प्रार्थना की एवं रक्षा प्राप्त की माताजी ने एक सप्ताह तक समय देकर चुकी दरबार में उपस्थित कराने का आदेश दिया।
- स्वीटी/साहिबराव, नासिक,  मो.न. 08805628138

विकलांगता खत्म हो गई:-
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अजय दीक्षित विगत 16 वर्षों से दाहिने पैर से विकलांग थे। डाक्टरों ने उनके जोड़ों के गेप से एक नली का दवना बताया तथा ऑपरेशन अति दुर्लभ बताया तथा खतरा होने की आशंका बताई। छेड़छाड़ करने पर बड़ी हानि होना बताया । माताजी ने दरबार में लकवा ग्रस्त पैर को जो 16 वर्षों से उठ नहीं पा रहा था समक्ष में उठवाया पैरों की उंगलियों से पकडऩे पर सेन्स नही था स्पर्श होने का मान कराया भी अजय को स्वप्र में विचित्र आकृति का मनुष्य दिखता हैं इसके उल्लेख किया पहले उन्हेें बैठने में कम्पन्न होता था सहारा लेना पड़ता था किन्तु आसन पर समक्ष में उक्त पैर में रक्त संचार का लाभ देकर पैर उठने तथा उसमें स्पर्श मान होने का लाभ दिया बैठने में बिनाा सहारे का और कम्पन ना होने का लाभ दिया।
- अजय दीक्षित भोपाल,  मो.न. 9752416602

किडनी सही हो गई:-
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मोहम्मद उर्फ पप्पू की पत्नी को पूर्ण चेतना नहीं थी बेहोशी को हालत मेे लेकर 25-8-12 को दरबार में उपस्थित हुये थे माताजी डाक्टरों ने जो परीक्षण उपरान्त बताया गया उसका पूर्ण विवरण का उल्लेख किया और डाक्टर  जो बताया उसके अनुसार उनकी पत्नी की एक किडनी 25.777 कार्य कर रही थी तथा दूसरी किडनी 100 खराब होकर कार्य करना बन्द कर दिया था डायलेसेस पर रखा गया था। दरबार में वर्णन किया गया कि आत्मा सता रही है घर में परेशानी बनी हुई हैं धन से क्षीण हो गया सोचा कार्य भूल जाता हैं घर के 10 सदस्यों में से 5 पर उक्त क्रिया का असर है उनकी पुत्री को भयानक आकृति दिखती है तथा ऐसा आभास होता हैं कि किसी ने धक्का दिया। पत्नी रात्रि में सोते समय भयभीत हो जाती है तथा डरावनी मुद्रा बना लेती हैं कई बार उन्हें विस्तर से उठाकर आत्मा द्वारा फेेंका गया- अस्पताल में भी फैंका गया उनकी पत्नी बैठ नहीं पाती थी उन्हें दरबार के 15-20 मिनिट तक बैठाया गया तथा जो किडनी 25. कार्य कर रही थी उसे कुछ ही क्षण में 80परसेंट कार्य योग्य बनाया तथा दूसरी किडनी जो पूर्ण खराब बताई थी उसे 40 परसेंट तक कार्य योग्य बनाया और बताया गया किडनी फेल्यूवर नही हैं आत्माऐं सता रही हैं यह लाभ तत्काल दिया गया भविष्य में उसे बिस्तर से कोई फेंकेगा नही, डरेगी नही, भयानकर आकृति नहीं दिखेगी बेहोशी से चेतन अवस्था में रहने का लाभ दिया
- मोहम्मद / पप्पू भोपाल,  मो.न. 9827095102

घर में अब शांति है:-
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घर में आशांति उन्हें स्वप्र में जल की धार में पल्टा हुआ सर्प दिखाई देता हैं अशांति/ व्याधियों के निराकरण हेतु शिखा बन्धन मुक्ति कराने हेतु 2 योग का वर्णन किया गया।
- अरुण रणधीर भोपाल,  मो.न. 9893366264

महाकाली दरबार का पता :-
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पंडित श्याम सुंदर चौरे (माताजी) संचालक एवं व्यवस्थापक

रैसलपुर महाकाली दरबार इटारसी-

होशंगाबाद रोड राजश्री ढाबा के पास

रैसलपुर (म.प्र.)

संपर्क मोबाइल : 0940753555, 08251065398

अधिक जानकारी के लिए इन सेवकगणों से संपर्क करें :-
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1. संदीप चौरे - 09691949993
2. हरिनारायण सोलंकी - 09926347329
3. रामनरेश चिमानिया- 09977997595
4. राजकुमार सोनी - 08827294576
5. दीपसिंह राजपूत - 09713911511
6. महेश सिंह पटेल - 08109228303
7. लखन बुधानी, जलगांव - 0942282789
8. विजय बजाज, जलगांव - 09595107833
9. मनमोहन शर्मा, अहमद नगर - 09960161111
10. दर्शन भाई, भोपाल - 09303625432
11. नवीन, भोपाल - 9827564080

उपरोक्त लेख मेरा  नहीं है सिर्फ जन-सेवार्थ प्रकाशित है न कि अंधविश्वास के  लिए आप सभी पाठक गण समझदार है अपने बुद्धि और विवेक का प्रयोग करते हुए फोन नंबर दिए गए है जानकारी  करे और अगर आपका दिल कहे तो एक बार जा  कर देखने में कोई बुराई नहीं है - हम तो कभी जा नहीं सके या समझे आवश्यकता नहीं पड़ी है -मगर सुना जरुर है कि लोगो को लाभ  हुआ है -जो लोग सच्चे मन से जाते है - माता  रानी आप पर कृपा करे -मेरी शुभ-कामना है -

उपचार और प्रयोग -http://www.upcharaurprayog.com

10 मार्च 2015

सदाबहार जवानी रक्खे बरकार -

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अगर आप अपने बेडरूम में उदासी का सामना कर रहे है तो संभावना है की आप पति -पत्नी अपने यौन स्वास्थ के लिए पर्यात ध्यान नहीं दे पा रहे है तो झल्लाहट में मत आएये-




आप अपने यौन जीवन की बुझती हुई लापता चिंगारी को फिर से जगाकर पहले के जूनून की तरह हर रात का भरपूर आनंद ले कर अपने वैवाहीक जीवन को पुन: खुशहांल बना सकते है लेकिन उसके लिए आपको कुछ मेहनत करनी होगी सेक्स पावर बढाने के कुछ कारगर उपाय है इन्हें आजमाकर आप बिना रूकावट वैवाहिक लाइफ का भरपूर आनंद ले सकते है -


आज के खान-पान और नकली सामग्री के चलते सभी लोगो में सेक्स की छमता में काफी कमी हो गई है लेकिन कुछ थोड़ी सावधानी करे तो हम अपनी शक्ति को सलामत रख सकते है -


क्या करे :-
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सबसे पहली सावधानी कि आप अपना पेट हमेशा साफ़ रहे अगर पेट साफ़ नहीं है तो सेक्स छमता में कमी आ सकती है और कई रोग हो सकते है |


रात में सोने से पहिले दो- तीन खजूर और कुनकुना दूध पिए इससे पेट तो साफ़ होगा ही साथ ही सेक्स छमता भी असाधारण रूप से बड जाएगी |


शायद बहुत कम लोग जानते होगे की तरबूज का बीज- देसी वियाग्रा का काम करता है- क्या आप जानते है कि अरबी लोग इतने गरम क्यों होते है क्योकि वो लोग रोजाना तरबूज का बीज खाते है अरबी भाषा में इसे मगज कहते है तो आप तरबूज के बीज का उपयोग इस प्रकार करे आप इसे रोज बीस से पच्चीस ग्राम सेवन करे और साथ ही दूध का सेवन करे -


हम आपको एक आसान उपाय और बताते है लहसुन की 5-6 कलिया देसी घी में फ्राई कर के रोजाना खाए 15 से 20 दिन में इसका रिजल्ट आपको मिल जायेगा लेकिन इसका सेवन ठंडी के सीजन में ही करना चाहिये क्योकि लहसुन की तासीर गरम होती है अगर आप रोजाना लहसुन का सेवन करते है तो बहुत सारी बीमारियां  आपके पास आने से डरेगी साथ ही लहसुन ब्लड प्रेसर में भी फायेदेमंद है तो देरी किस बात की आज से ही लहसुन का सेवन सुरु कर दे-


उपचार और प्रयोग -http://www.upcharaurprayog.com

7 मार्च 2015

प्यार का मतलब यानी कि प्यार क्या होता है जाने मेडिकल साइंस से .......?

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भावनात्मक और सामाजिक ताने-बाने में इस सवाल के कई जवाब हैं, मगर मेडिकल साइंस की दुनिया में प्यार एक न्यूरोलॉजिकल स्थिति है। शरीर में कुछ हार्मोन्स और केमिकल्स का कॉकटेल व्यक्ति को प्यार की राह पर ले जाता है। कई बार प्यार को एक रोग भी मान लिया जाता है, लेकिन यह एक केमिस्ट्री है, जिसे समझना बेहद दिलचस्प है।




प्यार की न्यूरोलॉजिकल स्थिति के तीन पड़ाव बताए हैं। प्यार के हर एक पड़ाव के लिए अलग-अलग तरह के हार्मोन्स और केमिकल्स उत्तरदायी होते हैं।


आमतौर पर जिसे प्यार कहा जाता है, वह शरीर में होने वाला एक प्रकार का हार्मोनल बदलाव है। इसे बीमारी जैसे नकारात्मक शब्द से नहीं जोड़ा जा सकता, क्योंकि प्यार एक सकारात्मक भावना है जो मस्तिष्क को ऊर्जा से भर देती है। लेकिन जब प्यार में अपने आपको या किसी दूसरे को नुकसान पहुंचाने की बात आती है तो इसका संबंध उन प्राकृतिक हार्मोनल बदलावों से नहीं होता।


मोह या लालसा :-
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शोध के अनुसार यह प्यार की राह में आने वाला पहला पड़ाव है। महिला और पुरुष दोनों में इसका कारण सेक्स हार्मोन टेस्टोस्टेरोन और एस्ट्रोजन होते हैं।


आकर्षण:-
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प्यार का यह दूसरा पड़ाव एक अद्भुत भावनात्मक स्थिति है। इस पड़ाव पर आकर व्यक्ति लालसा और मोह से आगे सोचने लगता है। वैज्ञानिक मानते हैं कि इस पड़ाव से तीन मुख्य न्यूरोट्रांसमीटर्स जुड़े होते हैं... एड्रेनेलिन, डोपमाइन और सेरोटोनिन।


एड्रेनेलिन:-
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प्यार की राह पर आगे बढ़ने के शुरुआती दौर में व्यक्ति के तनाव का स्तर बेहद सक्रिय हो जाता है। इसकी वजह से रक्त में एड्रेनेलिन और कोर्टीसोल हार्मोन का स्तर बढ़ जाता है। इस स्थिति में व्यक्ति एक अजीब सी बेचैनी से घिर जाता है। उसके मन में अकल्पनीय रूप से एक व्यक्ति के लिए प्यार पनपने लगता है। ऐसे में दिल की धड़कनें बढ़ना और अक्सर गला और मुंह सूखने की समस्या होने लगती है।


डोपमाइन:-
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एक शोध के दौरान जब प्यार करने वाले कुछ जोड़ों के मस्तिष्क का अध्ययन किया तो उन्होंने पाया कि उनमें डोपमाइन न्यूरोट्रांसमीटर का स्तर काफी ज्यादा था। यह केमिकल इच्छाओं की पूर्ति के लिए उकसाता है। इसका मस्तिष्क पर बिलकुल वैसा ही असर होता है जैसा कि कोकीन के सेवन का। 'प्यार करने वाले लोगों में अक्सर डोपमाइन की वजह से ही नींद न आना, भूख न लगना, किसी और काम में मन न लगना और अपनी रिलेशनशिप से जुड़ी हर छोटी से छोटी चीज के बारे में सोचकर खुश होना जैसे लक्षण दिखाई देते हैं।


सेरोटोनिन:-
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यह प्यार की स्थिति से जुड़ा सबसे अहम केमिकल है। व्यक्ति के विचारों में उसके प्यार का समाते जाना इसी केमिकल की वजह से होता है।


गहरा लगाव:-
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प्यार के तीसरे और अंतिम पड़ाव पर आकर महसूस होने वाला लगाव एक ऐसा बंधन होता है जो दो लोगों को एक लंबे सफर पर साथ ले जाने की ताकत रखता है। एक ऐसा सफर जहां वे जिंदगी का हर पल साथ गुजारना चाहते हैं और अपनी उम्र के आखिरी पड़ाव पर भी एक-दूसरे का साथ नहीं छोड़ना चाहते। और वैज्ञानिक मानते हैं कि एक-दूसरे से लगाव की इस भावना के लिए दो हार्मोन्स जिम्मेदार होते हैं:-ऑक्सीटोसिन और वेसोप्रेसिन।

ऑक्सीटोसिन:-
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प्यार और चाहत के रिश्ते में ऑक्सीटोसिन भी एक अहम् हार्मोन है। यह एक-दूसरे से लगाव और जुड़ाव की भावना को और भी गहरा बना देता है। इससे दो लोग एक-दूसरे को एक-दूसरे के सबसे ज्यादा करीब महसूस करते हैं। यही हार्मोन मां और बच्चे के बीच भी गहरे भावनात्मक जुड़ाव के लिए उत्तरदायी होता है।न्यूयॉर्क में असिस्टेंट प्रोफेसर ऑफ साइकोलॉजी डियान विट ने भेड़ और चूहों पर किए गए एक शोध के दौरान पाया कि यदि उनके शरीर में ऑक्सीटोसिन के स्राव को ब्लॉक (रोक) कर दिया जाए तो मादा भेड़ और चूहे अपने बच्चों को स्वीकार ही नहीं करते हैं।

वेसोप्रेसिन:-
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वेसोप्रेसिन लंबे समय के कमिटमेंट में अहम भूमिका निभाने वाला एक और महत्वपूर्ण हार्मोन है। लॉन्ग टर्म रिलेशनशिप में इसकी भूमिका पैरीवोल (एक प्रकार की जीव) पर किए गए एक शोध के दौरान सामने आई। पैरीवोल भी मनुष्यों की तरह संतुलित रूप से स्थिर रिश्ते बनाते हैं। जब नर पैरीवोल को वेसोप्रेसिन के प्रभाव को कम करने वाले ड्रग्स दिए गए तो उनके अपनी मादा साथी के साथ संबंध खत्म होने लगे, क्योंकि हार्मोन्स की अनुपस्थिति में उनके भीतर की लगाव की भावना खत्म हो गई।


यह भी ध्यान देने वाली बात है कि मेडिकल साइंस के अनुसार प्यार का संबंध दिमाग से होता है, इसमें दिल की भूमिका सिर्फ इतनी है कि प्यार में अक्सर व्यक्ति के दिल की धड़कनें बढ़ जाती है।

उपचार और प्रयोग -