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27 मार्च 2017

नवरात्रि में आप कलश स्थापना कैसे करें

हम हर वर्ष नवरात्रि का आगमन होता है और हम सभी माता की पूजा अर्चना करते है आप सभी जानते है कि मां की पूजा आरम्भ करने से पहले नवरात्र पूजा की सफलता हेतु कलश-स्थापन(Pitcher-Sthapan)का किया जाता है और ये घटस्थापन हमेशा ही शुभ मुहूर्त में किया जाता है-

नवरात्रि में आप कलश स्थापना कैसे करें

कैसे करें घटस्थापना(Kalash Installation)-

जहां घट स्‍थापना करनी हो आप उस स्‍थान को शुद्ध जल से साफ करके गंगाजल का छिड़काव करें फिर अष्टदल बनाएं तथा उसके ऊपर एक लकड़ी का पाटा रखें और उस पर लाल रंग का वस्‍त्र बिछाएं इन पर आप पांच स्थान बना कर क्रमशः गणेशजी, मातृका, लोकपाल, नवग्रह तथा वरुण देव को स्‍थान दें फिर सर्वप्रथम थोड़े चावल रखकर श्रीगणेजी का स्मरण करते हुए स्‍थान ग्रहण करने का आग्रह करें-

इसके बाद मातृका, लोकपाल, नवग्रह और वरुण देव को स्‍थापित करें और स्‍थान लेने का आह्वान करें फिर गंगाजल से सभी को स्नान(छिडकाव)कराएं-स्नान के बाद तीन बार कलावा लपेटकर प्रत्येक देव को वस्‍त्र के रूप में अर्पित करें-अब हाथ जोड़कर देवों का आह्वान करें फिर आप सभी देवों को स्‍थान देने के बाद अब आप अपने कलश के अनुसार जौ मिली मिट्टी बिछाएं तथा कलश में जल भरें इसके उपरान्त कलश में थोड़ा और जल-गंगाजल डालते हुए 'ॐ वरुणाय नमः' मंत्र पढ़ें और कलश को पूर्ण रूप से भर दें-

इसके बाद आम की टहनी(पल्लव) डालें तथा जौ या कच्चा चावल कटोरे में भरकर कलश के ऊपर रखें-फिर लाल कपड़े से लिपटा हुआ कच्‍चा नारियल कलश पर रख कलश को माथे के समीप लाएं और वरुण देवता को प्रणाम करते हुए कलश पर स्थापित करें और आप कलश के ऊपर रोली से या स्वास्तिक लिखें फिर मां भगवती का ध्यान करते हुए अब आप मां भगवती की तस्वीर या मूर्ति को भी स्‍थान दें तथा थोड़े से चावल डालें फिर आप मां की षोडशोपचार विधि से पूजा करें-अब यदि सामान्य द्वीप अर्पित करना चाहते हैं तो आप दीपक को प्रज्‍ज्वलित करें-लेकिन यदि आप अखंड दीप अर्पित करना चाहते हैं तो फिर सूर्य देव का ध्यान करते हुए उन्हें अखंड ज्योति का गवाह रहने का निवेदन करते हुए जोत को प्रज्‍ज्वलित करें-यह ज्योति पूरे नौ दिनों तक जलती रहनी चाहिए-इसके बाद पुष्प लेकर मन में ही संकल्प लें कि मां मैं आज नवरात्र की प्रतिपदा से आपकी आराधना अमुक कार्य के लिए कर रहा/रही हूं आप मेरी पूजा स्वीकार करके इष्ट कार्य को सिद्ध करो-

पूजा के समय यदि आप को कोई भी मंत्र नहीं आता हो तो चिंता की कोई बात नहीं है आप केवल दुर्गा सप्तशती में दिए गए नवार्ण मंत्र 'ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुंडायै विच्चे' से सभी पूजन सामग्री चढ़ाएं चूँकि ये "मां शक्ति" का यह मंत्र अमोघ है तथा आपके पास जो भी यथा संभव सामग्री हो उसी से आराधना करें यदि किसी कारण आपको कोई सामग्री उपलब्ध न हो तो आप अक्षत का भी उपयोग कर सकते हैं तथा संभव हो तो श्रृंगार का सामान और नारियल-चुन्नी जरूर चढ़ाएं-

यदि आप दुर्गा सप्तशती पाठ करते हैं तो संकल्प लेकर पाठ आरंभ करें लेकिन सिर्फ कवच आदि का पाठ कर व्रत रखना चाहते हैं तो माता के नौ रूपों का ध्यान करके कवच और स्तोत्र का पाठ करें तथा इसके बाद आरती करें और दुर्गा सप्तशती का पूर्ण पाठ एक दिन में नहीं करना चाहते हैं तो दुर्गा सप्तशती में दिए श्रीदुर्गा सप्तश्लोकी का 11 बार पाठ करके अंतिम दिन 108 आहुति देकर नवरात्र में श्री नवचंडी जपकर माता का पूर्ण आशीर्वाद भी प्राप्त कर सकते हैं-

माता की पूजा में सिर्फ मन की श्रधा का विशेष प्रभाव भी है इस कलियुग में इसलिए जो लोग विधान पूर्वक न कर सके वो श्रधा से भी मन्त्र जप कर सकते है-ईश्वर का ही दिया सब कुछ है इसलिए आप को ईश्वर को जादा से जादा अपनी श्रद्धा अर्पित करना चाहिए-

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