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थायरायड ग्रंथियों का असंतुलन होना

आधुनिक जीवन में व्यक्ति अनेक चिंताओं से ग्रसित है जैसे परिवार की चिंताएँ तथा आपसी स्त्री-पुरुषों के संबंध या आत्मसम्मान को बनाए रखना कि लोग क्या कहेंगे आदि अनेक चिंताओं के विषय हैं और इन्ही तनावग्रस्त जीवन शैली से थायराइड(Thyroid)का रोग बढ़ रहा है आज हम इसी गहन विषय को लेकर थायरायड ग्रंथियों का असंतुलन(Imbalance of thyroid glands)पोस्ट आपके समक्ष प्रस्तुत कर रहे है-

थायरायड ग्रंथियों का असंतुलन होना

व्यक्तिगत जीवन की चिंताएँ जैसे बच्चों का भविष्य-महँगाई में जीवन जीना- आतंक वाद तथा आपसी परिवार में संबंध आदि अनेक बातें व्यक्ति को चिंताओं से घेरे हुए हैं किशोरों की भी चिंताएँ हैं जैसे उनको माताओं से डर है कि कभी डायरियाँ, कॉपियाँ, एस एम एस न पढ़ लें तथा किशोरियों को वजन बढ़ने की चिंताएँ- किशोर मित्र(Boyfriend)बनाए रखने की चिंताएँ, सौंदर्य(Beauty)निखारने के लिए साधनों की प्राप्ति की चिंताएँ आदि चिंताएँ आत्मिक शक्ति को कम करती हैं ब़ड़ी आयु के लोग आने वाले बुढ़ापे से चिंतित हैं कई लोग स्वास्थ्य और भविष्य के प्रति चिंतित हैं ये सब लोग किसी न किसी रूप से मानसिक स्तर पर चिंतित हैं तो कुछ इनके विपरीत मिला जुला वर्ग है- जो कि आलस्य प्रेमी है-

अधिकतर ऊँचे तकिए लगाकर सोने या टी वी देखने- किताब पढ़ने से भी पीनियल(Pineal)और पिट्यूटरी ग्रंथियों(Pituitary glands) के कार्य पर विपरीत प्रभाव पड़ता है जो Thyroid Glands-थायराइड ग्रन्थि पर परोक्ष रूप से दिखाई देता है इन स्थितियों में हाइपो थायराइड रोग होने की आशंका है-

यदि आपके वजन में अचानक घटने या बढ़ने जैसा परिवर्तन सामने आ रहा हो तो यह थायराइड ग्रंथि(Thyroid Gland)से समबन्धित समस्या की ओर आपका ध्यान दिला सकता है तथा वजन का अचानक बढ़ जाना थायरोक्सिन हार्मोन(Thyroxine hormone) की कमी(हायपो-थायराईडिज्म)के कारण उत्पन्न हो सकता है इसके विपरीत यदि "थायरोक्सिन" की आवश्यक मात्रा से अधिक  उत्पत्ति होने से(हायपर-थायराईडिज्म )की स्थिति उत्पन्न हो जाती है जिसमें अचानक वजन कम होने लग जाता है  इन दोनों ही स्थितियों में  से हायपो-थायराईडिज्म एक आम समस्या के रूप में  सामने आता है-

थायरॉयड ग्रंथि(Thyroid Glands)से असंतुलन से होने वाले रोग-

अल्प स्राव (Hypothyrodism)-


Low secretion से शारीरिक व् मानसिक वृद्धि मंद हो जाती है -बच्चों में इसकी कमी से CRETINISM नामक रोग हो जाता है-12 से 14 वर्ष के बच्चे की शारीरिक वृद्धि 4 से 6 वर्ष के बच्चे जितनी ही रह जाती है-

ह्रदय स्पंदन एवं श्वास की गति मंद हो जाती है हड्डियों की वृद्धि रुक जाती है और वे झुकने लगती हैं तथा मेटाबालिज्म की क्रिया मंद हो जाती हैं  शरीर का वजन बढ़ने लगता है एवं शरीर में सुजन भी आ जाती है-

सोचने व बोलने की क्रिया मंद पड़ जाती है त्वचा रुखी हो जाती है तथा त्वचा के नीचे अधिक मात्रा में वसा एकत्र हो जाने के कारण आँख की पलकों में सूजन आ जाती है-शरीर का ताप कम हो जाता है और बाल झड़ने लगते हैं तथा ” गंजापन ” की स्थिति आ जाती है-

थायरायड ग्रंथि(Thyroid gland)का अतिस्राव-


शरीर का ताप सामान्य से अधिक हो जाता है  ह्रदय की धड़कन व् श्वास की गति बढ़ जाती है तथा अनिद्रा, उत्तेजना तथा घबराहट जैसे लक्षण उत्पन्न हो जाते हैं शरीर का वजन कम होने लगता है-

कई लोगों की हाँथ-पैर की उँगलियों में कम्पन उत्पन्न हो जाता है  गर्मी सहन करने की क्षमता कम हो जाती है मधुमेह रोग(Diabetes)होने की प्रबल सम्भावना बन जाती है-घेंघा रोग(Goitre)उत्पन्न हो जाता है तथा शरीर में आयोडीन की कमी हो जाती है-

पैराथायरायड ग्रंथियों(Parathyroid glands)का असंतुलन-


पैराथायरायड ग्रंथियां पैराथार्मोन हार्मोन(Paratharmon hormones)स्रवित करती हैं यह हार्मोन रक्त और हड्डियों में कैल्शियम व् फास्फोरस की मात्रा को संतुलित रखता है इस हार्मोन की कमी से हड्डियाँ कमजोर हो जाती हैं तथा जोड़ों के रोग भी उत्पन्न हो जाते हैं-

थायराइड होने पर क्या लक्षण होते हैं

पैराथार्मोन(Paratharmon)की अधिकता से रक्त से हड्डियों का कैल्शियम तेजी से मिलने लगता है फलस्वरूप हड्डियाँ अपना आकार खोने लगती हैं तथा रक्त में अधिक कैल्शियम(calcium)पहुँचने से गुर्दे की पथरी भी होनी प्रारंभ हो जाती है-

नोट-

थायरायड के कई टेस्ट हैं जैसे - T -3 , T -4 , FTI , तथा TSH -इनके द्वारा थायरायड ग्रंथि की स्थिति का पता चल जाता है लेकिन कई बार थायरायड ग्रंथि में कोई विकार नहीं होता परन्तु पियुष ग्रंथि के ठीक प्रकार से कार्य न करने के कारण थायरायड ग्रंथि को उत्तेजित करने वाले हार्मोन -TSH (Thyroid Stimulating hormone) ठीक प्रकार नहीं बनते और थायरायड से होने वाले रोग लक्षण उत्पन्न हो जाते हैं-

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