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22 अप्रैल 2015

घरेलू उपचार जलने या काटने पर - Home Remedies Burning or cutting

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घर में काम करते वक्त जलना या कटना आम बात है लेकिन कभी-कभी जलने-कटने के निशान रह जाते है जो देखने में भद्दे और बेतुके लगते है कुछ निशान आपकी की खूबसूरती को भी प्रभावित करते है -


आपको परेशान होने की आवश्यकता नहीं है आपके रसोईघर में ही बहुत सी चीजे उपलब्ध है जिनका प्रयोग करके आप इनसे छुटकारा पा सकते है -

आपको पता है कि टमाटर और नीबू में बहुत सारा विटामिन सी होता है जो दाग-धब्बे को कम करता है टमाटर और नीबू के रस को आपस में मिला कर प्रतिदिन आधे घंटे के लिए लगा कर छोड़ दे ये आपके स्किन को साफ़ करती है स्किन में चमक लाती है -नीबू का खट्टा पन आपकी स्किन को निखारने में आपकी बहुत मदद करेगा ये एक प्राकतिक ब्लीच है आप इसे चेहरे पर भी इस्तेमाल कर सकते है -

अन्य उपाय :-



त्वचा के जलने पर आपके किचन में रक्खा हुआ बेकिंग सोडा उस जगह पर मले इससे दाग और फोड़ा नहीं पड़ता है और जलन पड़ने से भी राहत होगी -



जलने पर सबसे पहले ठंडे पानी से धो लें। उसके बाद जले हुए स्थान पर नींबू और टमाटर का जूस लगाकर कुछ देर के लिए रखें। इस जूस को रोज जलने या कटने के निशान पर हफ्ते में दो या तीन बार लगाएं। इससे निशान कम हो जाएंगे। नींबू को स्किन प्रॉब्लम जैसे मुंहासे, ब्लैकहेंड के लिए यूज कर सकते हैं। महीने भर में फर्क नजर आ जाएगा।


एलोवेरा का असर प्रभावी है  इसके एंटी-आॅक्सीडेंट गुण त्वचा की मृत कोशिकाओं को हटाने में मदद करते है तथा इसमें एस्ट्रीजेंट गुण होते हैं। एलोवेरा त्वचा को साफ करता है, चमकाता है। जले का निशान हो या फिर अन्य दाग- धब्बे एलोवेरा जैल लगाने से काफी हद तक कम हो जाते हैं। एलोवेरा औषधीय गुणों का भण्डार है। यह त्वचा को कोमल और चमकदार बनाने में मदद करता है। एक चुटकी हल्दी, एक चम्मच शहद, एक चम्मच दूध और गुलाब जल की कुछ बूंदों का मिश्रण बना लें। इसमें थोड़ा सा एलोवेरा का जैल मिला लें और इसे अच्छी तरह से मिक्स करें। 20 मिनट के लिए लगाएं। फिर ठंडे पानी से धो दें। इसी तरह टैन हटाने के लिए नींबू का रस एलोवेरा में मिलाकर चेहरे पर लगाएं।


जले के निशान पर मिटं (पुदीना ) कि पत्‍तियों का रस लगाएं। कुछ मिंट की पत्‍तियों को क्रश करें और उन्‍हें मलमल के कपड़े में बांध कर उसका रस अपने जले के निशान पर लगाएं। इससे न तो जलन होगी और न ही फोड़ा होगा।


तुरंत के जलने पर एक पैक बनाएं जिसमें गुलाब जल, मुल्‍तानी मिट्टी और नींबू का रस मिलाएं। यह पैक ज्‍यादा गाढा न हो। इस पैक को अपने निशान पर 6-7 मिनट तक लगाएं और ठंडे पानी से धो लें। त्‍वचा को बिल्‍कुल रगड़े ना।


मेथी दाना है भी  है प्रभावी इसे आप रातभर के लिये पानी में भिगो दें। सुबह पेस्ट बना कर जले हुए निशान पर लगाएं। एक घंटे बाद चेहरा धो लें। ये  भी  एक  माह करे .


हल्दी, शहद और गुलाबजल का मिक्स पेस्ट बनाएं। इसे चेहरे पर 20 मिनट तक लगाएं। फिर धीरे- धीरे रगड़ कर हटाएं। कुछ दिनों में जला निशान हल्का हो जाएगा। इसके अलावा थोड़ा सा दही और चुटकीभर हल्दी, जौ पाउडर मिक्स कर नींबू रस डालकर चेहरे पर लगाएं।


पुराने निशान के लिए :-



मूंग की दाल कडाही में भून राख बना लें राख बनाने का मतलब है कि अच्‍छे से भून जाने पर पीस कर छान लें अब जले हुवे जगह तेल ( खोपरा तेल  ) चुपड मूंग का बनाया चूर्ण बुरक दें सुबह शाम दोनो समय यह करें आशा है 10 - 15 दिन में आपको लाभ नजर आने लगेगा

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काली मसूर की दाल को तवे पर जला कोयला कर लें इसे पीस छान खोपरा तेल(नारियल तेल )  में मिला जले के निशान पर लगायें आशा है जले का निशान नहीं रहेगा ....


आंवले व तिल समान माञा में ले दूध में पीस लें इसमें गुलाब जल की 3 - 4 बूंदे मिला जले के निशान पर लेप दें यह रात को सोते समय करोगे तो आंवले को रात भर असर करने का मौका मिलेगा .


मूली या प्‍याज के रस का लेप भी ( दोनों मिला कर नहीं कोई भी एक प्रयोग करें ) जले के निशान को मिटाने में असरदार है .

उपचार और प्रयोग-

20 अप्रैल 2015

गर्दन में दर्द है तो करे ये उपाय.....!

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* यह किसी भी उम्र वाले को और कभी भी हो सकता है। कई बार तो ऐसा होता है कि हम रात में सोते हैं और जैसे ही सुबह उठते हैं, हमें पता लगता है कि हमारे गर्दन में दर्द है।







* कभी-कभी तो गर्दन ऐसे अकड़ती है कि यह सीधा ही नहीं होता। जिस दिशा में अकड़ी होती है, अपने गर्दन और सिर को भी उसी दिशा में रखना हमारी मजबूरी बन जाता है। गर्दन में जरा-सा लोच आया कि दर्द शुरू। बहरहाल, गर्दन के दर्द में हमें कोई गंभीर नुकसान का खतरा नहीं रहता, लेकिन फिर भी सावधानी और दर्द हो जाने पर इसे दूर करने के लिए समुचित प्रबंध करना ही सबसे बेहतर और सुरक्षित है।

* बच्चों एवं युवाओं एवं प्रौढ़ों में सरवाईकल स्पांडिलाइसिस या सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटिस गर्दन के आसपास के मेरुदंड की हड्डियों की असामान्य बढ़ोतरी और गर्दन के कशेरुकाओं के बीच के इंटरवर्टिब्रल डिस्क में कैल्सियम का डी-जेनरेशन इन discs के अपने स्थान से सरक जाने की वजह से होता है। वृद्धों में सरवाइकल मेरुदंड में डी-जेनरेटिव बदलाव साधारण क्रिया है और सामान्यतया इसके कोई लक्षण भी नहीं उभरते। सामान्यतः C5-C6, C6-C7 और C4 और C5 के बीच के डिस्क ही ज्यादातर प्रभावित होते हैं।

* लगातार लंबे समय तक कंप्यूटर या लैपटॉप पर बैठे रहना, बेसिक या मोबाईल फोन पर गर्दन झुकाकर देर तक बात करना, लेटकर टीवी देखना, अधिक समय तक टीवी देखना, लम्बे समय तक गर्दन को झुकाकर पढ़ाई-लिखाई व अन्य कार्य करना, जोर से गर्दन को झटका देना अथवा किसी कारण से गर्दन पर जोर का झटका पड़ना, ज्यादा ऊँचे और कठोर तकिये का इस्तेमाल करना, तथा और फास्ट-फूड्स व जंक-फूड्स एवं अन्य अनियमित एवं गरिष्ठ भोजन का सेवन करना, इस मर्ज के होने के कुछ प्रमुख कारण हैं।

क्या पता, यह कब गंभीर  हो जाए......?

* आपके गर्दन में दर्द की शुरूआत कई सामान्य कारणों जैसे लेटकर और अधिक समय तक टीवी देखने, लम्बे समय तक पढ़ाई व लिखाई करने, जोर से गर्दन को झटका देने, ज्यादा ऊंचे और कठोर तकिये का इस्तेमाल करने से हो सकती है। वैसे तो इसका उपचार आप घर बैठे ही कर सकते हैं, लेकिन जब कभी लगे कि यह गंभीर होता जा रहा है, तो जरूर किसी डॉक्टर की सलाह लें, क्योंकि गर्दन आपके शरीर का बेहद नाजुक और अहम् हिस्सा है।

* इस तरह के दर्द को ठीक करने के कुछ घरेलू उपाय इस प्रकार हैं :-

* गर्दन को घड़ी की दिशा में हौले-हौले पांच से दस बार घुमाएं। अब इसे विपरीत दिशा में भी करें। इसके बाद अपने सिर को ऊपर-नीचे, दाएं-बाएं घुमाएं। अपने सिर के साथ इस क्रिया को तब तक करते रहें, जब तक आप इसे कर सकते हैं। जब दर्द होने लगे तो छोड़ दें।

* गर्दन में दर्द होने पर तेल से हलका मालिश करें। मालिश हमेशा गर्दन से कंधे की ओर करें।
* मालिश के बाद गर्म पानी की थैली से या कांच की बोतल में गर्म पानी भरकर सेंकाई करें। सेंकाई के तुरंत बाद खुली हवा में न जाएं और न ही कोई ठंडा पेय पीने की कोशिश करें।

* लेटकर टीवी न देखें। अधिक समय तक टीवी न देखें। अगर देखना ही हो, तो बीच-बीच में उठकर टहल लिया करें।

* कम ऊंचाई वाले तकिये का प्रयोग करें। बिस्तर का समतल होना भी जरूरी है।

* कठोर तकिये का प्रयोग न करें। यह गर्दन में दर्द का कारण बन सकता है।

17 अप्रैल 2015

आकडे (आक या मदार ) के ये है फायदे..... !

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* सर्व सुलभ है ये पौधा हर जगह देखने को मिल जाता है लेकिन इसके उपयोग की जानकारी कम लोगो को है हम आपको इसके प्रयोग की जानकारी दे रहे है .

* आक का पौधा दो प्रकार का होता है एक सफ़ेद और नीला .





* आक की जड को पानी में घीस कर लगाने से नाखूना रोग अच्छा हो जाता है.

* आक की जड छाया में सुखा कर पीस लेवे और उसमें गुड मिलाकर खाने से शीत ज्वर शाँत हो जाता है.

* आक की जड 2 सेर लेकर उसको चार सेर पानी में पकावे जब आधा पानी रह जाय तब जड निकाल ले और पानी में 2 सेर गेहूँ छोडे जब जल नहीं रहे तब सुखा कर उन गेहूँओं का आटा पिसकर पावभर आटा की बाटी या रोटी बनाकर उसमें गुड और घी मिलाकर प्रतिदिन खाने से गठिया बाद दूर होती है. बहुत दिन की गठिया 21 दिन में अच्छी हो जाती है.

* आक की जड के चूर्ण में काली मिर्च पिस कर मिलावे और रत्ती -रत्ती भर की गोलियाँ बनाये इन गोलियों को खाने से खाँसी दूर होती है.

* आक की जड पानी में घीस कर लगाने से नाखूना रोग जाता रहता है.

* आक की जड के छाल के चूर्ण में अदरक का अर्क और काली मिर्च पीसकर मिलावे और 2-2 रत्ती भर की गोलियाँ बनावे इन गोलियों से हैजा रोग दूर होता है.

* आक की जड की राख में कडुआ तेल मिलाकर लगाने से खुजली अच्छी हो जाती है.

* आक की सूखी डँडी लेकर उसे एक तरफ से जलावे और दूसरी ओर से नाक द्वारा उसका धूँआ जोर से खींचे शिर का दर्द तुरंत अच्छा हो जाता है.

* आक का पत्ता और ड्ण्ठल पानी में डाल रखे उसी पानी से आबद्स्त ले तो बवासीर अच्छी हो जाती है.

* आक की जड का चूर्ण गरम पानी के साथ सेवन करने से उपदंश (गर्मी) रोग अच्छा हो जाता है. उपदंश के घाव पर भी आक का चूर्ण छिडकना चाहिये. आक ही के काडे से घाव धोवे.

* आक की जड के लेप से बिगडा हुआ फोडा अच्छा हो जाता है.

* आक की जड की चूर्ण 1 माशा तक ठण्डे पानी के साथ खाने से प्लेग होने का भय नहीं रहता.

* आक की जड का चूर्ण दही के साथ खाने से स्त्री के प्रदर रोग दूर होता है.

* आक की जड का चूर्ण 1 तोला, पुराना गुड़ 4 तोला, दोनों की चने की बराबर गोली बनाकर खाने से कफ की खाँसी अच्छी हो जाती है.

* आक की जड पानी में घीस कर पिलाने से सर्प विष दूर होता है.

* आक की जड का धूँआ पीने से आतशक (सुजाक) रोग ठीक हो जाता है. इसमें बेसन की रोटी और घी खाना चाहिये. और नमक छोड देना चाहिये.

* आक की जड और पीपल की छाल का भष्म लगाने से नासूर अच्छा हो जाता है.

* आक की जड का चूर्ण का धूँआ पीकर उपर से बाद में दूध गुड पीने से श्वास बहुत जल्दी अच्छा हो जाता है.

* आक का दातून करने से दाँतों के रोग दूर होते हैं.

* आक की जड का चूर्ण 1 माशा तक खाने से शरीर का शोथ (सूजन) अच्छा हो जाता है.

* आक की जड 5 तोला, असगंध 5 तोला, बीजबंध 5 तोला, सबका चूर्ण कर गुलाब के जल में खरल कर सुखावे इस प्रकार 3 दिन गुलाब के अर्क में घोटे बाद में इसका 1 माशा चूर्ण शहद के साथ चाट कर उपर से दूध पीवे तो प्रमेह रोग जल्दी अच्छा हो जाता है.

* आक की जड की काडे में सुहागा भिगो कर आग पर फुला ले मात्रा 1 रत्ती 4 रत्ती तक यह 1 सेर दूध को पचा देता है. जिनको दूध नहीं पचता वे इसे सेवन कर दूध खूब हजम कर सकते हैं.

* आक की पत्ती और चौथाई सेंधा नमक एक में कूट कर हण्डी में रख कर कपरौटी आग में फूँक दे. बाद में निकाल कर चूर्ण कर शहद या पानी के साथ 1 माशा तक सेवन करने से खाँसी, दमा, प्लीहा रोग शाँत हो जाता है. आक का दूध लगाने से ऊँगलियों का सडना दूर होता है.

* अफेद आक (आंकड़ा)। यह बहुत चमत्कारी पौधा है। यह सामान्य रूप से पाएं जाने वाले आक के पौधे से अलग होता है। इसका उपयोग की तांत्रिक क्रियाओं में किया जाता है। तांत्रिक प्रयोगों से बचने के लिए इसका उपयोग किया जाता है। जिस घर में यह लगा होता है उस घर किसी भी प्रकार के तंत्र-मंत्र या जादू-टोने का असर नहीं होता है।

* इस आक के पौधे से भी अधिक चमत्कारी है इससे निर्मित गणेश प्रतिमा। तंत्र शास्त्र में यह बताया गया है कि यदि सफेद आक से निर्मित गणेश प्रतिमा की विधिवत पूजा की जाए तो सभी कष्ट दूर हो जाते हैं। यह गणेश प्रतिमा अद्भुत व चमत्कारी होता है। इसकी पूजा बहुत नियम और कायदों से करनी पड़ती है। नियम से पूजा ना होने पर इसका उचित लाभ नहीं मिल पाता है। इसलिए यदि आप चाहते हैं कि आपके घर में किसी तरह के तंत्र-मंत्र का असर ना हो तो ये पौधा घर में जरुर लगाएं। इसके अलावा सफेद आक की जड़ को भी तंत्र में बहुत उपयोगी माना जाता है।
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8 अप्रैल 2015

पथरी घरेलू उपचार -Stones Home Remedies

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अम्लता (Acidity ) बढ़ जाने पर लवण (Salt ) जमा होता है और ये फिर जमकर पथरी (Calculus) बन जाते है कई दिनों तक मूत्र (Urine ) में जलन होती है जब ध्यान नहीं दिया जाता तो यही स्थिति भयावह हो जाती है -







तेज गर्मी में काम करने से व घूमने से उष्ण प्रकृति के पदार्थों के अति सेवन से मूत्राशय पर गर्मी का प्रभाव हो जाता है, जिससे पेशाब में जलन होती है।


कभी-कभी जोर लगाने पर पेशाब होती है, पेशाब में भारी जलन होती है, ज्यादा जोर लगाने पर थोड़ी-थोड़ी मात्रा में पेशाब होती है। इस व्याधि को आयुर्वेद में मूत्र कृच्छ कहा जाता है। लेकिन इसका उपचार है-

घरेलू उपचार (Home remedies ):-


बाजार में मिलने वाला कलमी शोरा (Nitre ) बड़ी इलाइची (Black cardamom ) के दाने इन दोनों को समान मात्रा में चूर्ण करके एक शीशी में भर कर रख ले -मलाई रहित ठंडा दूध व पानी 150 -150 मिलीलीटर दोनों को ले के इस 300 एम एल पानी को बनाया हुआ एक चम्मच चूर्ण फांक कर यही आपस में मिलाया दूध पिए इस प्रकार की तीन खुराक लेनी है सुबह-दोपहर-शाम । दो दिन ये प्रयोग करे आपके पेशाब में पैदा हुई जलन समाप्त हो जाती है ये मुँह के छाले व पित्त सुधरता है। शीतकाल में दूध में कुनकुना पानी मिलाएँ-


मूत्र रोग संबंधी सभी शिकायतों यथा प्रोस्टेट ग्रंथि बढ़ने से पेशाब का रुक-रुक कर आना-पेशाब का अपने आप निकलना (युरीनरी इनकाण्टीनेन्स)-नपुंसकता, मूत्राशय की पुरानी सूजन आदि में गोखरू 10 ग्राम, जल 150 ग्राम, दूध 250 ग्राम को पकाकर आधा रह जाने पर छानकर नित्य पिलाने से मूत्र मार्ग की सारी विकृतियाँ दूर होती हैं ।


सिर्फ 6 ग्राम पपीते को जड़ को पीसकर 50 ग्राम पानी मिलकर 21 दिन तक प्रातः और सायं पीने से पथरी गल जाती है।


सात दिन तक गौदुग्ध के साथ गोक्षुर पंचांग (Caltrap Almanac ) का सेवन कराने में पथरी टूट-टूट कर शरीर से बाहर चली जाती है । मूत्र के साथ यदि रक्त स्राव भी हो तो गोक्षुर चूर्ण को दूध में उबाल कर मिश्री के साथ पिलाते हैं ।


खाली गोमूत्र के सेवन से भी पथरी टूट कर निकल जाती है-मात्रा 20 मिलीलीटर प्रतिदिन है साथ ही यवक्षार ( जौ की भस्म ) का सेवन करें -मूली और उसकी हरी पत्तियों के साथ सब्जी का सुबह सेवन करें-


मेहंदी की छाल को उबाल कर पीने से पथरी घुल जाती है-


15 दाने बडी इलायची के एक चम्मच, खरबूजे के बीज की गिरी और दो चम्मच मिश्री, एक कप पानी में मिलाकर सुबह-शाम दो बार पीने से पथरी निकल जाती है।


जितना हो सके पका हुआ जामुन खाए ये पथरी से निजात दिलाने में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। पथरी होने पर पका हुआ जामुन खाना चाहिए।


पथरी की शिकायत है तो प्याज आपके लिए बहुत उपयोगी है। प्याज के रस को sugar में मिलाकर शरबत बनाकर पीने से (stone) की से निजात मिलता है। प्याज का रस सुबह खाली पेट पीने से पथरी अपने-आप कटकर प्यास के रास्ते से बाहर निकल जाती है।इसका सेवन एक दिन में एक बार ही करें।  और प्याज़ के स्वास्थ्य लाभ की पोस्ट नीचे की लिंक पे देखे-



प्याज़ के स्वास्थ्य लाभ - Health Benefits of Onion



सहजन की सब्जी खाने से गुर्दे की पथरी टूटकर बाहर निकल जाती है। आम के पत्ते छांव में सुखाकर बहुत बारीक पीस लें और आठ ग्राम रोज पानी के साथ लीजिए, फायदा होगा ।


बेल पत्थर (Bell Stone ) को पर जरा सा पानी मिलाकर घिस लें, इसमें एक साबुत काली मिर्च डालकर सुबह काली मिर्च खाएं। दूसरे दिन काली मिर्च दो कर दें और तीसरे दिन तीन ऐसे सात काली मिर्च तक पहुंचे।आठवें दिन से काली मिर्च की संख्या घटानी शुरू कर दें और फिर एक तक आ जाएं। दो सप्ताह के इस प्रयोग से पथरी समाप्त हो जाती है। याद रखें एक बेल पत्थर दो से तीन दिन तक चलेगा।


पित्त की थेली (Gall bladder ) से पथरी निकालने के लिए पहले पांच दिन रोज चार गिलास एप्पल जूस (Apple Juice ) ले और साथ ही चार या पांच सेव खाए फिर छटे दिन डिनर न ले बल्कि इस छटे दिन शाम छ:बजे एक चम्मच सेंधा नमक (Magnesium sulfate ) एक गिलास गर्म पानी से ले फिर दुबारा दो घंटे आठ बजे एक चम्मच सेंधा नमक एक गिलास गर्म पानी से ले फिर रात को दस बजे आधा कप जेतून का तेल (Olive oil )या तिल का तेल (Sesame oil ) आधा कप नीबू ( Lemon juice ) के रस में मिलके पी ले सुबह आपको स्टूल में आपको हरे रंग के पत्थेर दिखेगे-


आजकल किडनी में पथरी पीड़ितों की संख्या लगातार बढ़ रही है-आयुर्वेद व घरेलू चिकित्सा में किडनी की पथरी में कुलथी (Horsegram ) को फायदेमंद माना गया है। गुणों की दृष्टि से कुल्थी पथरी एवं शर्करानाशक (Sugar Destroyer ) है। वात एवं कफ का शमन करती है और शरीर में उसका संचय रोकती है। कुल्थी में पथरी का भेदन तथा मूत्रल दोनों गुण होने से यह पथरी बनने की प्रवृत्ति और पुनरावृत्ति रोकती है। इसके अतिरिक्त यह यकृत व पलीहा के दोष में लाभदायक है। मोटापा भी दूर होता है-



बनाए :-


250 ग्राम कुल्थी दाने (Kulthy seeds ) कंकड़-पत्थर निकाल कर साफ कर लें। रात में तीन लिटर पानी में भिगो दें। सवेरे भीगी हुई कुल्थी उसी पानी सहित धीमी आग पर चार घंटे पकाएं। जब एक लिटर पानी रह जाए  तब नीचे उतार लें। फिर तीस ग्राम से पचास ग्राम (पाचन शक्ति के अनुसार) देशी घी का उसमें छोंक लगाएं। छोंक में थोड़ा-सा सेंधा नमक, काली मिर्च, जीरा, हल्दी डाल सकते हैं। पथरी नाशक औषधि तैयार है-


प्रयोग विधि:- 


दिन में कम-से-कम एक बार दोपहर के भोजन के स्थान पर यह सारा सूप पी जाएं। 250 ग्राम पानी अवश्य पिएं। एक-दो सप्ताह में गुर्दे तथा मूत्राशय की पथरी गल कर बिना ऑपरेशन के बाहर आ जाती है कुछ दिन लगातार सेवन करते रहना राहत देता है।

यदि भोजन के बिना कोई व्यक्ति रह न सके तो सूप के साथ एकाध रोटी लेने में कोई हानि नहीं है। गुर्दे में सूजन की स्थिति में जितना पानी पी सकें -पीने से दस दिन में गुर्दे का प्रदाह ठीक होता है। यह कमर-दर्द की भी रामबाण दवा है।

कुल्थी की दाल साधारण दालों की तरह पका कर रोटी के साथ प्रतिदिन खाने से भी पथरी पेशाब के रास्ते टुकड़े-टुकड़े होकर निकल जाती है। यह दाल मज्जा (हड्डियों के अंदर की चिकनाई) बढ़ाने वाली है।


पथरी में क्या खाए (What to eat stones ):-



कुल्थी के अलावा खीरा, तरबूज के बीज, खरबूजे के बीज, चौलाई का साग, मूली, आंवला, अनन्नास, बथुआ, जौ, मूंग की दाल, गोखरु आदि खाएं। कुल्थी के सेवन के साथ दिन में 6 से 8 गिलास सादा पानी पीना, खासकर गुर्दे की बीमारियों में बहुत हितकारी सिद्ध होता है।


पथरी में क्या न खाएं (Do not eat stones ):-



पालक, टमाटर, बैंगन, चावल, उड़द, लेसदार पदार्थ, सूखे मेवे, चॉकलेट, चाय, मद्यपान, मांसाहार आदि। मूत्र को रोकना नहीं चाहिए। लगातार एक घंटे से अधिक एक आसन पर न बैठें।


कुल्थी का पानी भी लाभदायक है :-



कुल्थी का पानी विधिवत लेने से गुर्दे और मूत्रशय की पथरी निकल जाती है और नयी पथरी बनना भी रुक जाता है। किसी साफ सूखे, मुलायम कपड़े से कुल्थी के दानों को साफ कर लें।  किसी पॉलीथिन की थैली में डाल कर किसी टिन में या कांच के मर्तबान में सुरक्षित रख लें।

कुल्थी का पानी बनाने की विधि:- 



किसी कांच के गिलास में 250 ग्राम पानी में 20 ग्राम कुल्थी डाल कर ढक कर रात भर भीगने दें। प्रात: इस पानी को अच्छी तरह मिला कर खाली पेट पी लें। फिर उतना ही नया पानी उसी कुल्थी के गिलास में और डाल दें, जिसे दोपहर में पी लें। दोपहर में कुल्थी का पानी पीने के बाद पुन: उतना ही नया पानी शाम को पीने के लिए डाल दें।

इस प्रकार रात में भिगोई गई कुल्थी का पानी अगले दिन तीन बार सुबह, दोपहर, शाम पीने के बाद उन कुल्थी के दानों को फेंक दें और अगले दिन यही प्रक्रिया अपनाएं। महीने भर इस तरह पानी पीने से गुर्दे और मूत्राशय की पथरी धीरे-धीरे गल कर निकल जाती है।

सहायक उपचार- 


कुल्थी के पानी के साथ हिमालय ड्रग कंपनी की सिस्टोन की दो गोलियां दिन में 2-3 बार प्रतिदिन लेने से शीघ्र लाभ होता है। कुछ समय तक नियमित सेवन करने से पथरी टूट-टूट कर बाहर निकल जाती है। यह मूत्रमार्ग में पथरी, मूत्र में क्रिस्टल आना, मूत्र में जलन आदि में दी जाती है।
(स्वदेशी चिकित्सा सार से साभार)

उपचार और प्रयोग-

खांसी जुकाम एलर्जी सर्दी आदि के लिए.....!

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* सर्दी, खांसी और जुखाम ये एक ही  परिवार के रोग है और इनकी  औषोधी भी लगभग एक है.

* आपको आसान से नुस्खे यहाँ बता रहा हूँ जिसे आप घर पे बनाये और एलोपेथी दवाओं के साइड इफेक्ट से भी बचे .




घर पे बनाये :-
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* ये एक अच्छी दवाई,  खांसी #जुकाम एलर्जी सर्दी आदि के लिए जिसे आप घर पर बना सकते है इसके लिए आपको चाहिए तुलसी के पत्ते, तना और बीज तीनो का कुल वजन 50 ग्राम इसके लिए आप तुलसी के ऊपर से तोड ले इसमें बीज तना और तुलसी के पत्ते तीनो आ जाएंगे इनको एक बरतन में डाल कर 500 मिलि पानी डाल ले और इसमें 100 ग्राम अदरक और 20 ग्राम काली मिर्च दोनो को पीस कर डाले और अच्छे से उबाल कर काढे और जब पानी 100 ग्राम रह जाए तो इसे छान कर किसी कांच की बोतल में डाल कर रखे इसमे थोडा सा शहद मिला कर आप इसके दो चम्मच ले सकते है दिन में 3 बार....

* जुकाम के लिए 2 चम्मच अजवायन को तवे पर हल्का भूने और फ़िर उसे एक रूमाल या कपडे में बांध ले और पोटली बना ले उस पोटली को नाक से सूंघे और सो जाए.

* खांसी के लिए रोज दिन में 3 बार हल्के गर्म पानी में आधा चम्मच सैंधा नमक डाल कर गरारे करे सुबह उठ कर दोपहर को और फ़िर रात को सोने से पहले एक चम्मच शहद में थोडी सी पीसी हुई काली मिर्च का पाऊडर डाल कर मिलाए और उसे चाटे अगर खासी ज्यादा आ रही हो तो 2 साबुत काली मिर्च के दाने और थोडी सी मिश्री मुंह में रख कर चूसे आपको आराम मिलेगा.

*गले की खराश, या गले मे किसी भी प्रकार का इन्फेक्शन हो, गला बैठ गया है, पानी पिने मे भी तकलीफ हो रही है, लार निकलने मे भी तकलीफ हो रही है, आवाज भरी हो गयी है .. इन सबके लिए एक ग्लास देशी गाय का दूध, एक चम्मच देशी गाय का घी और चौथाई चम्मच हल्दी को मिलाके कुछ देर उबालना है फिर उसको सिप सिप करके चाय की तरह पीना है शाम को एकबार .

एक और प्रस्तुत है खांसी की अचूक दवा:-
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* कई बार खांसते-खांसते हम परेशान हो जाते हैं। दवाएं काम नहीं करती हैं।

* गर्भवती महिलाओं के लिए दो एलोपैथिक दवाएं लेना निराप्रद नहीं माना गया है।

* वहीं शल्य-चिकित्सा कराने वाले रोगियों के लिए ज्यादा देर तक खांसना बिल्कुल ही सेहतमंद नहीं होता है। गले में खरास किच-किच जैसी कुछ होती है।

* ऐसे में एक आसान औषधि, जो हमने स्वयं ही अत्यंत विषम परिस्थिति में आजमाया था आप अगर मुश्किल में हैं तो आजमाइये और अपना अनुभव जरूर बताएं।

दालचीनी- थोड़ी मात्रा( लगभग एक ग्राम )

शहद- आधा चम्मच

प्रयोग विधि;--
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* दालचीनी को पूरी तरह पीसकर पाउडर बना लें। बायीं हाथ की हथेली पर करीब आधा चम्मच शहद लेकर उसके ऊपर दालचीनी (दो चुटकी भर) डालें और दायें हाथ की अंगुली से अच्छी तरह मिलाएं और उसे चाट जाएं।

परिणाम;--
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* दो से तीन मिनट में खांसी जाती रहेगी। दोबारा खांसी हो तो इस प्रयोग को दोबारा आजमा सकते हैं।

* अगर दही खाते है तो उसे बंद करदे और रात को सोते समय दूध न पिए

* तुलसी, काली मिर्च और अदरक की चाय खांसी में सबसे बढि़या रहती हैं।

* हींग, त्रिफला, मुलहठी और मिश्री को नीबू के रस में मिलाकर लेने से खांसी कम करने में मदद मिलती है।

* पीपली, काली मिर्च, सौंठ और मुलहठी का चूर्ण बनाकर चौथाई चम्मच शहद के साथ लेना अच्छा रहता है।

उपचार स्वास्थ्य और #प्रयोग -http://upchaaraurpryog120.blogspot.in/

7 अप्रैल 2015

घर पे ही बना ले ईनो ....!

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* लूट की भी एक हद होती है लेकिन इसमें हमारी भी कमी है हम सब की आदत हो गई है कि हम कुछ करना ही नहीं चाहते है बस बना-बनाया मिले शारीरिक कस्ट न हो जरा सी भी बुधि न लगानी पड़े सब कुछ स्मार्ट तरीके से हो जाए .

* जो लोग घर में ईनो बनाने के इक्षुक है उनके लिए -



* भारत में जो ईनो की 100 ग्राम की शीशी लगभग 80-85 रुपए की मिलती है उसमें केवल 8 रुपए मूल्य की सामग्री है। 100 ग्राम ईनो में लगभग 45 ग्राम साइट्रिक एसिड होता है इसका मूल्य है पांच रुपए और 55 ग्राम मीठा सोडा होता है जिसका मूल्य है लगभग तीन रुपये ।

साइट्रिक एसिड - 100 रूपए/किलो मीठा सोडा- 60 रूपए/किलो

घर पर ENO बनाने के लिए:-
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1 निम्बू + थोडा मीठा सोडा + चुटकी नमक एक निम्बू का रस निकाले उसमें चुटकी नमक और
थोडा सा मीठा सोडा डाले और एक गिलास पानी डाल के पिए....एक दम ENO जैसा बन जाएगा.

3 अप्रैल 2015

घर पे ही बनाये आंवला कैन्डी.....!

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आंवला कैन्डी:-
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आवश्यक सामग्री:-
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आंवला (Indian Gooseberry) - 1 किग्रा (30 - 35)

चीनी - 700 ग्राम ( 3 1/2 कप)


विधि:-
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* सबसे पहले आप आंवले को साफ पानी से धो लीजिये. किसी बर्तन में इतना पानी डालकर उबालने रखिये कि आंवला उसमें अच्छी तरह डुब सके.अब आप उबलते पानी में आंवले डालिये और फिर से उबाल आने के बाद 2 मिनिट तक आंवले उबलने दीजिये, गैस फ्लेम बन्द कर दीजिये और इन आमलों को 5 मिनिट के लिये ढककर रख दीजिये. आंवलों को ठंडे पानी में मत डालिये, पानी को पहले उबलने दीजिये तब आवंले डाले.

* अब आप इन  उबाले हुये आंवले को चलनी में डालकर पानी हटा दीजिये, ठंडा होने पर इनको चाकू की सहायता से काट कर फांके अलग अलग कर लीजिये और गुठली निकाल कर फैंक दीजिये. ये आंवले की कली किसी बड़े बर्तन में भरिये और 650 ग्राम चीनी ऊपर से भरकर रख दीजिये, बची हुई 50 ग्राम चीनी (आधा कप) का पाउडर बनाकर रख लीजिये.

* अब आप दूसरे दिन आप देखेगे सारी चीनी का शरबत बन गया है, आंवले के ट्कड़े उस शरबत में तैर रहे हैं. आप इस शरबत को चमचे से चला कर, ढककर रख दीजिये. 2-3 दिन बाद यह आंवले के टुकड़े शरबत में तैरने के बजाय बर्तन के तले में नीचे बैठ जायेंगे अब ये तेर नहीं रहे हैं. चीनी आंवले के अन्दर पर्याप्त मात्रा में भर चूकी है और वह भारी होकर नीचे तले में चले गये हैं. अब इस शरबत को चलनी से छान कर अलग कर दीजिये और चलनी में आंवले के टुकड़े रह जायेंगे, पूरी तरह से आंवले से शरबत निकल जाय तब इन टुकड़ों को थाली में डाल कर धूप में सुखा लीजिये. इन सूखे हुये आंवले के टुकड़ों में चीनी का पाउडर मिलाइये. लीजिये ये आंवला कैन्डी (Amla Candy) तैयार हो गई है़, यह कैन्डी आप कन्टेनर में भर कर रख लीजिये और रोजाना 6-7 टुकड़े खाइये, यह स्वाद में तो अच्छी है ही आपकी सेहत के लिये बड़ी फायदे मन्द हैं.

मसालेदार आंवला कैन्डी:-
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* आंवला कैन्डी को मसालेदार (Spicy Amla Candy) बनाने के लिये आप सूखी कैन्डी में पिसी हुई चीनी के साथ एक छोटी चम्मच काला नमक, आधा छोटी चम्मच काली मिर्च पाउडर और आधा छोटी चम्मच अमचूर पाउडर मिलाइये. जिन्हें एकदम मीठा पसंद नहीं हो तो वे चटपटी आमला कैन्डी (Spicy Amla Candy) खा सकते है

आंवले का शर्बत:-
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* आंवले से निकला मीठे शरबत को आप गाड़ा करके आने वाले गर्मियों के मोसम में ठंडा आंवले का शरबत बना कर पीजिये. शरबत को गाड़ा करने के लिये इस शरबत को गैस फ्लेम पर पकने रख दीजिये जब ये शरबत गाड़ा दिखाई देने लगे, शरबत को ठंडा कीजिये और छान कर किसी कांच या प्लास्टिक के एअर टाइट कन्टेनर में भर कर रख लीजिये. इसका शरबत का स्वाद आंवले का विशिष्ट फ्लेवर लिये हुये होता है. जो आंवले का मुरब्बा या चटनी पसंद करते हैं उन्हें यह शरबत पसंद आयेगा.

* चकुंदर (उसको बीट भी कहें ते है )के टुकड़े करके चाशनी में डालकर पका लें l जैसे आंवला केंडी बनती है, वैसे ही ये चकुंदर केंडी बन गयी l थोडा रोज खाये ...खूब खून बनेगा.... भोजन के बाद या कैसे भी खाये

* आंवला हमारे जीवन में नित्य प्रयोग से त्रिदोष शांत होता है जीवन की अस्सी प्रतिशत बीमारियों से हमें आंवला खाने से निजात मिलती है .

* हमारी सभी पोस्ट हमारे ब्लॉग में नीचे दिए लिंक पे जाके देख सकते है ...!
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पेट के निचले भाग की चर्बी को कम करे-

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पेट की चर्बी घटाना आसान है पर वहीं पर पेट के निचले भाग की चर्बी घटाना थोड़ा मुश्‍किल है। हमारी लाइफस्‍टाइल कुछ ऐसी हो चुकी है कि हम ना चाह कर भी अपने शरीर का वजन बढ़ाते चले जा रहे हैं। कुछ लड़कियों का पूरा शरीर देखने में पतला लगता है पर पेट काफी ज्‍यादा निकला होता है। लेकिन जब आप किलो भर वजन कम करने लगेगीं तो ‘बैली फैट’ अपने आप ही खतम होने लगेगा-



बैलेंस डाइट और रेगुलर एक्‍सरसाइज करने से आप अपना वज़न कंट्रोल कर सकते हैं।


आपको कुछ ऐसे फूड बताउंगा जिसे खाने से आप अपने पेट के निचले भाग की चर्बी को कमकर सकते हैं। मैं आपको कोई डाइट करने के लिये नहीं बोल रहा हूँ, बल्कि यह ऐसे खाघ पदार्थ हैं, जो जल्‍दी से वजन कम करते हैं, जैसे नींबू पानी, जड़ी बूटियां, ग्रीन टी आदि।




पेट के नीचे की चर्बी को घटाने के लिये हर रोज 7 से 8 गिलास पानी जरुर पियें। इससे शरीर की गंदगी बाहर निकलेगी और आपका मैटाबॉलिज्‍म बढेगा।

जड़ी बूटियां.....
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आपको सोडियम लेना कम करना होगा नहीं तो शरीर में पानी की मात्रा बढेगी और आप मोटे लगेगें। भोजन में नमक की मात्रा को केंट्रोल करें और इसे कंट्रोल करने के लिये कुछ तरह की जड़ी बूटियों का सेवन करें। त्रिफला खाएं और वजन घटाएं। आंवला या आंवले के जूस का सेवन भी कर सकतें हैं……




शहद का सेवन करे ...मोटापा बढने की एक और वजह है, वह है चीनी की मात्रा। चीनी की जगह पर आप शहद का सेवन कर सकते हैं।



दालचीनी पावडर से .... आप अपनी सुबह की कॉफी या चाय में दालचीनी पाउडर डाल कर ब्‍लड शुगर को कंट्रोल कर सकती हैं। यह एक चीनी को रिपलेस करने का एक अच्‍छा तरीका भी है।




मेवे खाये ... फैट को कम करने के लिये आपको फैट खाना पडे़गा। जी हां, कई लोग इस बात पर यकीन नहीं करते हैं,
लेकिन मेवों में अच्‍छा फैट पाया जाता है। तो ऐसे में आप बादाम, मूगंफली और अखरोट आदि का सेवन करें। इनमें हेल्‍दी फैट होता है जो शरीर के लिये जरुरी होता है।




एवोकाडो का सेवन भी फायदे मंद है .. इसमे ऐसा वसा होता है जो शरीर के लिये आवश्‍यक होता है। इसका जूस पीने से आपका पेट पूरे दिन भरा रहेगा और आप ओवर ईटिंग नहीं करेगें।



संतरा ले ... आप को जब भी भूख लगे , तो उस समय अपने पर्स या बैग में संतरे रखें। इससे पेट भी भरा रहेगा और आप मोटे भी नहीं होगें।




दही खाये .... अगर आपको पतला होना है तो अनहेल्‍दी डेजर्ट खाने से बचें और इसकी जगह पर दही खाएं। इसमें बहुत सारा पोषण होता है और कैलोरी बिल्‍कुल भी नहीं होती।




ग्रीन टी दिन में एक कप ग्रीन टी पीने से लाभ मिलता है। इससे शरीर का मैटाबॉलिज्‍म बढता है और फैट बर्न होता है।




सालमन.... इसमें ओमेगा 3 फैटी एसिड होता है जो कि शरीर के लिये जरुरी वसा है और शरीर को अच्‍छे से कार्य करने के लिये मदद करता है। यह फैट आपका पेट पूरे दिन भरा रखता है और ज्‍यादा खाने से बचाता है।




ब्रॉकली खाये ... इसमें विटामिन सी होता है और साथ ही यह शरीर में एक तत्‍व बनाता है जो कि शरीर फैट से एनर्जी को बदलने में प्रयोग करता है।





नींबू का प्रयोग करे .... रोज सुबह नींबू पानी पीने से आपकी चर्बी कम हो सकती है। अगर पानी गर्म हो तो और भी अच्‍छा है। इसमें शहद मिला कर पीजिये।



कच्‍चा लहसुन चबाने से पेट की निचले भाग की चर्बी कम होगी। अगर इसमें थोड़ा सा नींबू का रस छिड़क दिया जाए तो और भी अच्‍छा। इससे पेट भी कम होगा और ब्‍लड सर्कुलेशन भी अच्‍छा रहेगा।



अपने भोजन में अदरक शामिल करें क्‍योंकि इसे खाने से पेट के निचले भाग की चर्बी कम होती है। इसमें एंटीऑक्‍सीडेंट होता है जो कि इंसुलिन को बढने से रोकता है और ब्‍लड शुगर लेवल कंट्रोल में रहता है।

उपचार और प्रयोग-

2 अप्रैल 2015

करे आप और लाभ ले -

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अन्धविश्वाश से दूर रहने वाले सज्जन इस पोस्ट पे ध्यान न दे क्युकि उनके लिए ये पोस्ट सार्थक नहीं है -


अगर विश्वाश हो करे और देखे -फिर तर्क करे -क्युकि इस ग्रुप में कोई दान-दक्षिणा की प्रथा नहीं है सिर सेवा भाव से काम कर रहे है अगर एक व्यक्ति को भी लाभ होता है तो मेरी पोस्ट को सार्थकता मिल जाती है ...!


छोटे-छोटे उपाय हर घर में लोग जानते हैं, पर उनकी विधिवत् जानकारी के अभाव में वे उनके लाभ से वंचित रह जाते हैं।


घर में किसी भी व्यक्ति की रोग की अवस्था में घर की सभी घडियों को चालू हालत में रखें।


पांवों का कैसा भी रोग हो सोलह दांत वाली पीली कौडी में सूराख करके बांध लें।


नींद न आने पर श्वेत घुंघची की जड को तकिए के नीचे रखकर सोएं।कुछ ही दिन में नींद अच्छी आने लगेगी बिना पैसे की दवा है श्वेत घुघुची सुनार या पंसारी से मिल जायेगी |


चक्कर आने की अवस्था में किसी भी रविवार या मंगलवार को गुलाबजल में 2 माशा गोरोचन पीसकर सेवन कर लें।ये भी जड़ी बूटी बेचने वाले पंसारी से ले बस असली हो |


सुलेमानी रत्न को चांदी की अंगूठी में पहनने से स्मरणशक्ति का विकास होता है। सुनार या रत्न विक्रेता से ले |


श्वेत गुंजा की जड को गाय के शुद्ध घृत में पीसकर लेप लैयार करें। यह लेप शिश्न पर मलने से कामशक्ति की वृद्धि के साथ स्तंभन शक्ति में भी वृद्धि होती है।


शनिवार  के दिन एक रुपये  का सिक्का या सरसों  का तेल किसी  कोढ़ी को दान करे लाभ के रूप में |


महाकाली का पूजन शुद्ध  घी के दीपक से करे. मनोकामना के लिए |


काम में जाने से पहले  पूजा घर में  रखे  जल कलश को  प्रणाम  करके जाए.पूरा दिन आपका अच्छा व्यतीत होगा |


हर बुधवार एक कटोरी चावल  दान कर गणेशजी  पर एक  सुपारी एक  वर्ष  तक चढ़ाये आपकी धन संपदा में वृधि उतरोत्तर होती जायगी |


सुबह उठकर स्नान आदि से निवृत्त होकर उत्तर दिशा में मुंह रख कर बैठें। सामने बाजोट(पटिया) रखें व उस पर पीला कपड़ा बिछाएं। अब बाजोट पर गेहूं की ढेरी बनाएं और उस पर 7 गोमती चक्र स्थापित करें। अब उस पर कुंकुम का तिलक करें और हर चक्र पर एक-एक सिक्का अर्पित करें। अब फूल चढ़ाकर धूप-दीप करें और फल अर्पित करें। अब नीचे लिखे मंत्र की 7 माला जप करें।


मंत्र-  "ऊँ ह्रीं क्लीं महालक्ष्म्यै नम:"

हर माला जप की समाप्ति पर हर चक्र पर एक फूल अर्पित करें। दूसरे दिन यह सभी सामग्री ले जाकर किसी सुनसान स्थान पर रख आएं। आपके जीवन से धन संबंधी समस्याओं का निराकरण हो जाएगा।माला असली स्फटिक की प्रयोग में ले |


लक्ष्मी जी को प्रसन्न करने के लिए हर एकादशी को घर के पूजा स्थल पर ग्यारह दीपक जलाएं।


कुछ और प्रयोग भी आजमाए :-
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घर में सदा अन्न का भंडार बना रहे आश्लेषा नक्षत्र में बरगद वृक्ष का एक पत्ता तोड़ कर लायें। उस पत्ते को गंगाजल से छींटा मारकर धूप देकर प्रार्थना करें कि हे अन्नपूर्णा देवी मेरे घर में सदा अन्न का भंडार भरा रहे कभी इसकी कमी न हो। उस पत्ते को चावल या गेहूं के अंदर दबा कर रख देने से कभी कमी नहीं होगी।


फसल की सुरक्षा के लिए सफेद सरसों तथा बालू को एक साथ मिलाकर खेत के चारों ओर जल देने से खेत में चूहों से, कीड़ों से एवं टिड्डी आदि से फसल की रक्षा होती है।


जो स्त्री निःसंतान है जिसको बांझ भी बोलते हैं उसे पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र में आम की जड़ को गाय के दूध में घिसकर पिलाने से उसे संतान हो जाती है। इस नक्षत्र में यह प्रयोग करती रहें। इसी प्रकार उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र में नीम की जड़ को लाकर स्त्री अपने पास में किसी लाल कपड़े में बांध कर शरीर पर धारण करे तो जो दोष होता है वह शांत हो जाता है। तब संतान हो जाती है।


स्वाति नक्षत्र मं मोगरा की जड़ लेकर भैंस के दूध में घिसकर पीने से रंग में परिवर्तन व मुख सुंदर होता है।


आपके जीवन में सुख समर्धि का निरंतर आगमन हो यही मेरी कामना है .

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