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30 जून 2015

शिलाजीत क्या है

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आयुर्वेद में शिलाजीत(Shilaajeet)को बहुत लाभकारी औषधि कहा है यह स्वास्थ्य के लिए हमारी मूल आवश्यकता है तथा शिलाजीत एक ऐसी ही औषधि जो स्वस्थ रहने में हमारी मदद करती है यह पत्थर की शिलाओं में ही पैदा होता है इसलिए इसे शिलाजीत(Shilaajeet)कहा जाता है-

शिलाजीत क्या है

गर्मी के दिनों में सूर्य की तेज किरणों से पर्वत की शिलाओं से लाख की तरह पिघल कर शिलाजीत बाहर निकल आता है शिलाजीत चार प्रकार का होता है-

रजत, स्वर्ण, लौह तथा ताम्र शिलाजीत

प्रत्येक प्रकार की शिलाजीत के गुण अथवा लाभ अलग-अलग हैं रजत शिलाजीत का स्वाद चरपरा होता है यह पित्त तथा कफ के विकारों को दूर करता है-स्वर्ण शिलाजीत मधुर, कसैला और कड़वा होता है जो बात और पित्तजनित व्याधियों का शमन करता है-लौह शिलाजीत कड़वा तथा सौम्य होता है तथा ताम्र शिलाजीत का स्वाद तीखा होता है कफ जन्य रोगों के इलाज के लिए यह आदर्श है क्योंकि इसकी तासीर गर्म होती है-

भारतीय जड़ी-बूटियों में शिलाजीत का एक विशिष्ट स्थान है आयुर्वेद ने शिलाजीत की बहुत प्रशंसा की है और इसकी गुणवत्ता को प्रतिष्ठित किया है आयुर्वेद के बलपुष्टिकारक, ओजवर्द्धक, दौर्बल्यनाशक एवं धातु पौष्टिक अधिकांश नुस्खों में शिलाजीत का प्रयोग किया जाता है-

वास्तविक शिलाजीत में अनेक तरह की गन्दगी होती है इसमें रेत,पत्थर,पत्ते आदि अनेक चीजे इसमें मिक्स होती हैं इसलिए शिलाजीत की अशुद्धियों को दूर करने के लिए सबसे पहले उसे सादे जल से धो लेना चाहिए तथा फिर शिलाजीत की मात्रा से दूना गरम जल लेना चाहिए-शिलाजीत गर्म जल में घुल जाती है और अशुद्धियाँ नीचे बैठ जाती है अब ऊपर से जल निथार कर उसे धुप में सुखाने पर शुद्ध शिलाजीत प्राप्त होती है अशुद्धियों को पुनः गरम जल में घोल देना चाहिए ताकि सारी शिलाजीत पानी में आ जाए और अशुद्धियाँ बिलकुल अलग हो जाएँ-

शिलाजीत(Shilaajeet)के लाभ-


1- इसकी एक बहुत बड़ी विशेषता यह है कि शिलाजीत सिर्फ रोग ग्रस्त का रोग दूर करने के लिए ही उपयोगी नहीं है बल्कि स्वस्थ व्यक्ति के लिए भी उपयोगी है शिलाजीत का यौन दौर्बल्य यानी नपुंसकता से पीड़ित विवाहित व्यक्ति ही नहीं, अविवाहित युवक भी सेवन कर सकता है-

2- विशेषकर मधुमेह, धातु क्षीणता, बहुमूत्र, स्वप्नदोष, सब प्रकार के प्रमेह, यौन दौर्बल्य यानी नपुंसकता, शरीर की निर्बलता, वृद्धावस्था की निर्बलता आदि व्याधियों को दूर करने के लिए शिलाजीत उत्तम गुणकारी सिद्ध होती है-

3- ऐसा कोई साध्य रोग नहीं है जिसे उचित समय पर तथा उचित योगों के साथ विधिपूर्वक किया गया शिलाजीत का प्रयोग नष्ट न कर सके-शिलाजीत सब प्रकार की व्याधियों को नष्ट करने के लिए प्रसिद्ध है-

4- स्वप्नदोष से ज्यादातर तो अविवाहित युवक ही पीड़ित पाए जाते हैं पर विवाहित पुरुष भी इससे अछूते नहीं हैं-

5- शुद्ध शिलाजीत 25 ग्राम, लौहभस्म 10 ग्राम, केशर 2 ग्राम, अम्बर 2 ग्राम, सबको मिलाकर खरल में खूब घुटाई करके महीन कर लें और 1-1 रत्ती की गोलियां बना लें अब एक गोली सुबह-शाम दूध के साथ सेवन करने से स्वप्नदोष होना तो बंद होता ही है साथ ही पाचनशक्ति, स्मरण शक्ति और शारीरिक शक्ति में भी वृद्धि होती है इसलिए यह प्रयोग छात्र-छात्राओं के लिए भी उपयोगी है-

6- शिलाजीत और बंगभस्म 20-20 ग्राम, लौहभस्म 10 ग्राम और अभ्रक भस्म 5 ग्राम, सबको मिलाकर खरल में घुटाई करके मिला लें और 2-2 रत्ती की गोलियां बना लें तथा सुबह-शाम एक-एक गोली दूध के साथ सेवन करने से स्वप्नदोष होना बंद होता है और शरीर में बलपुष्टि आती है

7- यदि शीघ्रपतन के रोगी विवाहित पुरुष इसे सेवन करें तो उनकी यह व्याधि नष्ट होती है खटाई और खट्टे पदार्थों का सेवन बंद करके इन दोनों में से कोई एक नुस्खा कम से कम 60 दिन तक सेवन करना चाहिए-

8- शिलाजीत कफ, चर्बी, मधुमेह, श्वास, मिर्गी, बवासीर उन्माद, सूजन, कोढ़, पथरी, पेट के कीड़े तथा कई अन्य रोगों को नष्ट करने में सहायक होता है यह जरूरी नहीं है कि शिलाजीत का सेवन तभी किया जाए जब कोई बीमारी हो स्वस्थ मनुष्य भी इसका सेवन कर सकता है इससे शरीर पुष्ट होता है और बल मिलता है-

9- शिलाजीत को चरक संहिता के अनुसार निरंतर सात सप्ताह तक प्रयोग करने से यह उचित फल प्रदान करती है हमने अपने प्रयोगों में देखा कि इसे कम से कम सौ दिनों तक लगातार  लेना ही श्रेयस्कर साबित हुआ है लेकिन इसे पांच रत्ती से कम तो कत्तई नहीं लेना चाहिए-

10- शिलाजीत के सेवन के दौरान कब्ज पैदा करने वाली वस्तुओं ,नशा पैदा करने वाली वस्तुओं और भारी अनाज के सेवन का निषेध है-

अगर आपको शुद्ध शिलाजीत प्राप्त न हो तब आप पतंजलि चिकित्सालय का उपयोग करे-

Upcharऔर प्रयोग-

किसी भी प्रकार के बदन दर्द का घरेलू उपचार....!

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सामग्री-

शुद्ध घानी का सरसों का तेल -100 ग्राम

लहसुन की कलियाँ -30 ग्राम

अजवाइन - 10 ग्राम

लौंग - 5 ग्राम

सरसों के तेल में सभी चीजो को डालकर धीमी-धीमी आंच पे पकाए सभी चीजे काली पड़ने पे उतार के ठंडा करे और छान कर एक शीशी  में भर के रख ले -

जब भी लगाना हो एक कटोरी में थोडा निकाल कर गर्म कर ले और जितना सह सके मालिस करे इससे हर प्रकार का बदन दर्द दूर होता है इसे लगाने के बाद  एक घंटे तक स्नान न करे-

जोड़ो के दर्द के लिए-

कैसा भी जोड़ो का दर्द हो अगर उस पर अजवाइन का तेल बनाकर लगाया जाए तो दर्द में बहुत जल्दी राहत मिलती है- 

10 ग्राम अजवाइन का तेल 10 ग्राम पिपरमेंट और 20 ग्राम कपूर तीनों को मिलाकर एक बोतल में भर दें। 

दर्द या कमरदर्द या पसलीदर्द, सिरदर्द आदि में तुरंत लाभ पहुंचाने वाली औषधि है इसकी कुछ बूंदे मलिए, दर्द छूमंतर हो जाएगा- अजवाइन के तेल की मालिश करने से जोड़ों का दर्द जकडऩ तथा शरीर के अन्य भागों पर भी मलने से दर्द में राहत मिलती है-

Upcharऔर प्रयोग-

केला खाए और छिलका उपयोग में -

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केले का सेवन हमारे स्वास्थय के लिए बहुत फ़ायदेमंद होता हैं। रोज़ एक केला खाने से शरीर स्वस्थ रहता हैं-हर मौसम में केले को खाया जा सकता हैं और हर मौसम में यह मार्किट में आसानी के साथ के मिल भी जाता हैं ।केले में बहुत अधिक मात्रा में कैलोरी होती हैं-



केले में थाइमिन,नियासिन और फोलिक एसिड के रूप में विटामिन ए और  बी अधिक मात्रा में होती हैं । वैसे केला सबको लाभ देता हैं लेकिन महिलाओं के लिए केले  का सेवन बहुत फ़ायदा पहुंचाता हैं |

केले का सेवन महिलाओं में पोटाशियम की कमी नहीं होने  देता जिसके कारण स्ट्रोक की समस्या नहीं होने की संभावना न के बराबर हो जाती हैं। केले में विटामिन ए, बी, सी और ई, मिनिरल्स, पोटैशियम, जिंक, आयरन आदि कई पोषक तत्व हैं जो हमारे शरीर को ऊर्जा देते हैं। केले में प्राकृतिक तौर पर शुगर होता हैं। शारीरिक श्रम या व्यायाम  करने के बाद केले के सेवन से शरीर में इसका स्तर सामान्य होता हैं और थकान महसूस करने पर केले के  सेवन से आपको ताकत मिलती हैं । केले खाने के और भी बहुत से स्वास्थय लाभ होते हैं जो हमें स्वस्थ रखने में मदद करते हैं ।

भले ही रोज एक सेब खाने से आप डॉक्टर के पास जाने से बच सकते हैं, लेकिन केला खाने से आप अपनी पूरी जिन्दगी स्वस्थ्य रह सकते हैं। रिसर्च के मुताबिक केला आपको कई बीमारियों से बचा सकता है।

तो आइए जानते हैं केला खाने का स्वास्थ्यलाभ -

वज़न बढ़ाने के लिए :-
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केला वज़न बढ़ाने में मदद करता हैं । जो लोग पतले हैं या अपना वज़न बढ़ाना चाहते हैं उन्हें रोज़ केला खाना चाहिए या फिर उसका शेक पीना चाहिए ।

गर्भवती महिलाओं के लिए :-
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Pregnancy के समय महिलाओं को काफी मात्रा में विटामिन और मिनरल्स की ज़रूरत होती हैं ।जो की केले में अधिक होते हैं इसलिए गर्भवती महिलाओं को अपने आहार में  केले को शामिल करना चाहिए ।

ऊर्जा के लिए :-
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ब्रेकफास्‍ट में केला खाने से ऊर्जा बढ़ती है और सूकरोज़, फ्रक्‍टोज़ और ग्‍लूकोज जैसे पोषक तत्‍व भी मिलते हैं। वे लोग जो दिन भर भूखे और प्‍यासे रहते हैं,अगर वो  केला ही खा लें तो उन्‍हें अन्‍य फल के मुकाबले केले से तुरंत एनर्जी मिलती हैं ।

दिल के मरीज़ों के लिए :-
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दिल के मरीज़ों के लिए  केला बहुत फ़ायदा पहुँचाता हैं रोज़ दो  केले को शहद में  मिक्स करके खाने से दिल मज़बूत बनता हैं और दिल की बीमारियां भी नहीं होती हैं ।

एनीमिया:-
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केला एनीमिया को दूर करता हैं। जो लोग एनीमिया से प्रभावित हैं, उन्‍हें अपनी डाइट में केला शामिल करना चाहिये। यह शरीर के खून में हीमोग्‍लोबिन को बढ़ाता  हैं । जिससे एनीमिया की समस्या दूर हो जाती हैं। केला शरीर के खून में हीमोग्लोबिन को बढाता है। जिससे एनीमिया की शिकायत दूर हो जाती है।वे लोग जो एनीमिया से प्रभावित हैं, उन्हें अपने भोजन में केला शामिल करना चाहिये।

ब्‍लड प्रेशर:-
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केले में  पोटाशियम होता हैं,जो की ब्लड  प्रेशर के रिस्‍क को कम कर के हार्ट अटैक और हाईपरटेंशन की बीमारी को कंट्रोल करता हैं। उच्चरक्तचाप के रोगियों के लिए विशेष लाभकारी होता है| केला खाने से उच्चरक्तचाप सामान्य बना रहता है |

अनिद्रा :-
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दूध में  केला और शहद मिला कर पीने से अनिद्रा की समस्‍या दूर हो जाती है। साथ ही यह शरीर के शुगर लेवल को भी रेगुलेट करता हैं, जो कि हैंगओवर  के लिए लाभदायक होता हैं । दूध के साथ केला और शहद मिला कर पीने से अनिद्रा की समस्या दूर हो जाती है।

विकास के लिए :-
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बच्चों के विकास के लिए केला लाभदायक होता हैं इसमें विटामिन और मिनरल्स होते हैं, जो की बच्चों का विकास करने में मदद करते  हैं ।

पाचन शक्ति के लिए :-
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केला खाने से पाचन क्रिया मजबूत होती हैं। जो लोग ट्रैवेलिंग करते हैं उन्‍हें अक्‍सर कब्‍ज की शिकायत हो जाती हैं। इसको दूर करने के लिये वो  केले का सेवन कर सकते हैं। अगर आपको पेचिश की समस्या है तो आप दही में केला मिक्स करके खाएं आपको आराम मिलेगा.केले में रेशा पाया जाता है, जिससे पाचन क्रिया मजबूत बनती है। गैस्ट्रिक व कब्ज़ की बीमारी वाले लोंगो के लिये केला बहुत प्रभावशाली उपचार है। अक्सर यात्रा के दौरान कब्ज की शिकायत हो जाती है। इसको दूर करने के लिये केला एक अच्छा विकल्प है |

तनाव :-
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तनाव को कम करने में केला मददगार सिद्ध होता हैं और क्योंकि केले में प्रोटीन, ट्रायफोटोपन पाया जाता है, जो कि माइंड को रिलैक्‍स कर देता है। केले में प्रोटीन पाया जाता है, जो कि दिमाग को आराम देता है इसलिए डिप्रेशन दूर करने में सहायक है |

अल्सर के लिए :-
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केले का सेवन अल्सर के मरीज़ों के लिए बहुत फ़ायदेमंद होता हैं । इसलिए अल्सर के मरीज़ों को केले को अपने खाने में शामिल करना चाहिए ।

मांस पेशियों  के  लिए:-
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रोज़ाना केले के सेवन से मांस पेशियों को मज़बूती मिलती हैं । रोज़ खाना खाने के बाद एक केला खाना चाहिए ।

अन्य लाभ :-
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केला खिलाड़ियों का प्रिय फल है क्योंकि यह तुरंत एनर्जी प्रदान करता है। सुबह नाश्ते में केला खाने से ऊर्जा बढती है और सूकरोज़, फ्रक्टोज़ और ग्लूकोज जैसे पोषक तत्व भी मिलते हैं। यदि आप दिन भर भूखे प्यासे रहते हैं, तो केवल केला ही खा लें देखिये अन्य फल के मुकाबले केले से तुरंत एनर्जी मिलेगी।

दो केले लगभग १०० ग्राम दही के साथ सेवन करने से दस्त व पेचिश में लाभ होता है |

केले पर चीनी और इलायची डालकर खाने से खट्टी डकारें आनी बंद हो जाती हैं |

पके हुए  केले में आंवले के रस  चीनी मिलाकर पीने से बार- बार पेशाब आने की समस्या भी ख़त्म हो जाती हैं।

स्वास्थ के साथ -साथ केला हमारे बालों  और त्वचा के लिए भी फ़ायदा पहुंचाता हैं ।

कच्चे केले को दूध में मिलाकर लगाने से त्वचा में निखार आ जाता हैं ।

केला  के बहुत से फ़ायदे  होते हैं जो हमें इसके सेवन से मिलते हैं।केला तो वैसे 12 महीने ही बाज़ार में  मिल जाता हैं लेकिन बरसात के मौसम में खाने से अधिक लाभ मिलता हैं ।

महिलाओं को रक्त प्रवाह अधिक होता हैं तो केले को दूध में मिक्स करके खाने से लाभ मिलता हैं । केला कच्चा हो या पका हुआ दोनों तरीकों से खाने से लाभ मिलता हैं ।  

लेकिन जिन्हें कफ़ की समस्या रहती हैं उन्हें केले का सेवन नहीं करना चाहिए, अगर आप इसका सेवन करते हैं तो हमेशा केला पका हुआ ही खाएं । इस तरह केला खाने से बहुत से लाभ मिलते हैं ,इसलिए केले को अपने आहार में  ज़रूर ,शामिल करें । अच्छा  होगा कि यदि  आप केले का प्रयोग सीधे करे तो केले को धीरे-धीरे मुंह में खूब चबा के घोल बना के निगले .

अब केले खाकर इधर-उधर छिलके फेंकने की आपकी भी आदत है तो उसे बदल लीजिए क्योकि इसके छिलकों में कमाल के गुण हैं:-

केला खाकर अगर आप इधर उधर फेंकते है तो जान लीजिये आप निहायती बेवकूफ है क्योंकि एक तो अगर आप केले के छिलके को इधर उधर फेंकते है तो कोई न कोई इसकी चपेट में आकर फिसल सकता है और दूसरा इसमें इतने औषधीय गुण भरे है कि जान लेने के बाद आपको केले (Banana) के छिलके पर भी प्यार आयेगा |

यह आपके सिर के दिर्द को छूमंतर कर सकता है क्योंकि आपको सिर दर्द तब होता है जब आपकी धमनियो में तनाव आता है और तनाव जब आता है जब आप बिना मतलब की बातों पर अपना वक़्त जाया करते है इसलिए experts कहते है कि केले (Banana) के छिलके को पीस कर उसका पेस्ट दर्द के स्थान पर अगर आप लगाते है तो कुछ ही मिनटों में आपका सिर दिर्द ऐसे गायब हो जाता है जैसे वो कभी था ही नहीं |

केले (Banana) का छिलका आपको दर्द से भी रहत दे सकता है अगर आप इसका इस्तेमाल चोट लगने वाली जगह पर लगाते है या मधुमखी के काटने वाली जगह पर भी इसे लगाने से बड़ा आराम मिलता है आप चाहे तो एक मधुमक्खी के छते को छेड़कर ये प्रयोग कर सकते है |

इन छिलकों में भरपूर मात्रा में पोषक तत्व और कार्बोहाइड्रेट होते हैं। इसमें विटामिन बी-6, बी-12, मैगनीशियम, कार्बोहाइड्रेट, एंटीऑक्सीडेंट, पोटेशियम, मैगनीशियम और मैंगनीज जैसे पोषक तत्व होते हैं जो मेटाबॉलिज्म के लिए बेहद उपयोगी होते हैं।

खुश रहने के लिए सेरोटोनिन हार्मोन जिम्मेदार होता है। चीन में हुए शोध के मुताबिक केले के छिलके में इस हार्मोन को सामान्य बनाए रखने के गुण मौजूद होते हैं।

केले के छिलके को पीसकर उसका पेस्ट सिर दर्द के स्थान पर 15 मिनट तक लगाए रखने से सिरदर्द दूर होता है। सिर का दर्द खून की धमनियों में पैदा होने वाले तनाव के कारण होता है और केले के छिलके में मौजूद मैगनीशियम धमनियों में जाकर सिर के दर्द को रोकने में सहायक सिद्ध होता है।

 केले के छिलके को रोजाना दांतों पर रगड़ने से उनमें चमक आती है क्योंकि इसमें उपस्थित पोटेशियम, मैगनीशियम और मैंगनीज दांतों पर जमे पीलेपन को हटाने में मदद करता है। ऎसा नियमित कुछ दिन करने से दांतों में कुदरती चमक आ जाती है। दिन में दो बार केले के छिलके दांतों पर रगड़ने से लाभ होता है। यह आपके दांतों को भी किसी टूथपेस्ट से अधिक चमकीला और आकर्षक बना सकता है  इसमें मैग्नीशियम और पोटेशियम होता है जो आपके दांतों में जमा केविटी और पीलेपन को हटाने में मदद करता है और उनमे कुदरती चमक लेके आता है जैसी आप टीवी ads में colgate वाली लड़की के दांत देखते है ठीक उसी तरह से | इसके लिए आपको केले (Banana) के छिलके को दांतों से रगड़ना होता है और वो भी हर दिन |

पैरों या हाथों में निकले वाट्र्स या मस्सों पर केले के छिलके को रगड़ने और रातभर ऎसे ही छोड़ देने से दोबारा उस जगह पर वाट्र्स नहीं निकलते हैं।

मुंहासों पर छिलके को मसलकर पांच मिनट तक लगाने से फायदा होता है। मस्से और मुहांसों के लिए भी यह बहुत कारगर होता है अगर आप केले (Banana) के छिलके को मस्सो पर नियमित रगड़ते है और रात भर पेस्ट बनाकर उसे छोड़ते है तो उस जगह पर एक बार ठीक हो जाने पर मुहांसे नहीं होते है और अगर आपके चेहरे पर मुहांसे होते है तो इसका पेस्ट रोज पांच से दस मिनट तक लगाने से अच्छा वाला फायदा होता है |

केले के छिलके त्वचा में पानी की कमी को पूरा कर देते हैं।आप इसे अंडे की जर्दी में केले केछिलके(पीसकर) को मिलाकर चेहरे पर लगाएं, इससे झुर्रियां भी दूर होती हैं।

जलन और दर्द से राहत पाने के लिए आप दर्द वाली जगह पर छिलके को पीसकर लगाने से आराम मिलता है। कीड़े के काटने पर जलन वाली जगह पर केले के छिलके को घिसने से जलन दूर होती है।

केले के छिलके में मौजूद ल्यूटेन नामक एंटीऑक्सीडेंट हमारी आंखों की अल्ट्रा वायलेट किरणों से रक्षा करता है। थकान महसूस होेने पर पांच मिनट के लिए छिलकों को आंखों पर रखें, आराम मिलेगा।

Upcharऔर प्रयोग-

29 जून 2015

एक छोटे से नीबू में बडे औषधीय गुण होते है ....!

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* कोई भी मौसम हो, नींबू ऎसा फल है जो हर घर में हर समय मिलता है। यह केवल खाने का स्वाद ही नहीं बढाता बल्कि इसमें कई औषधीय व सौंदर्यवर्धक गुण भी मौजूद हैं। इसमें विटामिन-सी पर्याप्त मात्रा में होता है।





सौंदर्य निखार के लिए :-
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* नारियल के तेल में नींबू का रस मिलाकर रात में सिर में हल्के हाथ से, एक हफ्ते तक रोजाना मालिश कर, सुबह सिर धोने से बालों की खुश्की दूर हो जाती है।

* यदि मालिश न भी करें तो सिर धोने के पानी में दो नींबू निचोडकर एक हफ्ता लगातार प्रयोग करने से बाल मुलायम होते हैं, उनका झडना कम होता है और खुश्की या रूसी भी कम होती है।

* नारियल के तेल में नींबू का रस और कपूर लगाकर सिर की मालिश करने से बालों के रोग खत्म हो जाते हैं।

* सुबह स्नान करने से पहले नींबू के छिलकों को चेहरे पर धीरे-धीरे मलकर 2-3 मिनट बाद चेहरे को पानी से धो लें। इसे 10-15 दिन लगातार करने से चेहरे का रंग साफ हो जाता है। यह बाजार में मिलने वाले किसी भी ब्लीचिंग क्रीम या ब्यूटी पार्लर में कराए जाने वाले ब्लीच का काम करेगा।

* नींबू का रस और गुलाबजल समान मात्रा में मिलाकर चेहरे पर लगाएं, कुछ दिनों के लगातार प्रयोग से चेहरा बेदाग,त्वचा कोमल व स्वच्छ हो जाती है।

* नींबू और तुलसी की पत्तियों का रस समान मात्रा में मिलाकर किसी कांच के बर्तन में रख लें और दिन में कम से कम दो बार हल्के हाथ से चेहरे पर लगाएं। कुछ दिन के लगातार इस्तेमाल से चेहरे पर झाइयां व किसी भी प्रकार के निशान मिट जाते हैं।

* चेहरा जल जाने पर यदि चेहरे पर काले दाग पड गए हों तो एक टमाटर के गूदे में नींबू के रस की कुछ बूंदें मिलाकर सुबह-शाम लगाएं और थोडी देर बाद धो लें।

औषधि के रूप में:-
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* बदहजमी होने पर नींबू काटकर उसकी फांक या छोटे टुकडे में काला नमक लगाकर चूसने से आराम आता है।

* जिनको भूख कम लगती है और पेट दर्द की शिकायत रहती है उनको नींबू की फांक में काला या सेंधा नमक लगाकर उसको तवे पर गर्म करके चूसने से न केवल दर्द में आराम मिलता है बल्कि भूख भी खुलकर लगती है।

* यदि चक्कर आ रहे हों या उल्टी आ रही हों तो नींबू के टुकडे पर काला नमक, काली मिर्च लगाकर खाने से चक्कर आने बंद हो जाते हैं और उल्टी भी बंद हो जाती है।

* एक गिलास पानी में एक नींबू का रस निचोडकर एक चम्मच चीनी पीसकर मिलाकर पीने से हैजे जैसा रोग भी ठीक हो जाता है।

* शहद, नींबू और पानी के साथ गुड मॉर्निंग करना सेहत के लिहाज से अच्छा माना गया है। कोई अपनी त्वचा में ग्लो पाने के लिए नींबू-शहद पानी के साथ्‍ा पीता है, तो कोई वजन कम करने के लिए। और भी कई वजहें हैं नींबू-शहद का पानी पीने की। आधा नींबू का रस, एक छोटा चम्मच शहद और हल्का गर्म पानी मिक्स करें और इसे तुरंत पी जाएं। इसको पीने के एक घंटे बाद ही चाय या कॉफी लें।

* नींबू, शहद और गर्म पानी, ये तीनों मिलकर आपकी पाचनशक्ति को बढ़ाते हैं। नींबू में मौजूद कुछ तत्व से लिवर में जूस बनाने में आसानी होती है, जिससे भोजन का पाचन भी ठीक होता है।

* यदि आपको एसिडिटी की समस्या है, तो नींबू और शहद पीजिए। इसमें शहद एंटी-बैक्टीरियल होता है, जो बैक्‍टीरिया और जर्म्‍स को साफ करता है।साथ ही गरम पानी भी गले से कफ को एकदम साफ कर देता है। इसके अलावा यह शरीर से टॉक्सिन को भी निकालने का काम करता है।

* इसके सेवन से पथरी होने की आशंका कम हो जाती है। दरअसल, किडनी स्‍टोन कुछ नहीं, बल्कि जमा हुआ कैल्‍शियम होता है, जिसे यह नींबू और शहद पानी जमने से रोकता है।

* सुबह-सुबह गुनगुने पानी में शहद और नींबू मिक्स कर पीने से आप पूरे दिन फिट भी रहती हैं। क्‍योंकि यह मेटाबॉलिज्म सही करता है, जिससे थकान दूर होती है और आप पूरे दिन भर ऊर्जावान महसूस करती हैं।

* शहद जहां एनर्जी बूस्टर का काम करता है, वहीं पानी मस्तिष्क को फ्रेश ब्लड उपलब्‍ध करवाने में मदद करता है। नींबू की खुशबू आपके मूड को रिलैक्स करने का भी काम करती है।

* नींबू में पेक्टिन नाम का फाइबर होता है, जो पेट भरे होने का एहसास कराता है। गर्म पानी, शहद और नींबू मिलकर क्षार का निर्माण करते हैं, जिससे वजन कम करने की प्रक्रिया में तेजी आ जाती है।

*  खट्टे फलों में विटामिन-सी प्रचुर मात्रा में होता है, जो सर्दी-जुकाम से लड़ने और इम्यून सिस्टम को सही रखने का काम करता है। नींबू में पोटेशियम भी होता है, जोकि दिमाग को भी संतुलित करने का काम करता है और ब्लड प्रेशर को भी नियंत्रित करता है।

उपचार स्वास्थ्य और प्रयोग-

Refined oil-रिफाइंड तेल से ह्रदय रोग-मधुमेह व कैंसर भी

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Refined oil-रिफाइंड आयल के बारे में शायद आप नहीं जानते है इसलिये बे-झिझक आप इसका प्रयोग करते है लेकिन क्या आपको पता है कि आपके स्वास्थ के लिए ये रिफाइंड तेल(Refined oil) हानिकारक है रिफाइनिग हेतु तिलहन को 200-500 डिग्री सेल्सेयस के बीच कई बार गरम किया जाता है और घातक पैट्रोलियम उत्पाद हेग्जेन का प्रयोग बीजों से 100% तेल निकालने के लिए किया जाता है तथा कई घातक रसायन कास्टिक सोड़ा, फोसफेरिक एसीड, ब्लीचिंग क्लेंज आदि मिलाए जाते है ताकि निर्माता हानिकारक व खराब बीजों से भी तेल निकाले तो उपभोक्ता को उसको पता न चले-इसलिए रिफाइंड तेलों(Refined oil)को गन्ध-रहित, स्वाद-रहित व पारदर्शी बनाया जाता है-

Refined oil-रिफाइंड तेल से ह्रदय रोग-मधुमेह व कैंसर भी


क्या होता है-

रिफाइंड, ब्लीच्ड एवं डिओडोराइन्ड की प्रक्रिया में तेल के अच्छे तत्व समाप्त हो जाते है व घातक जहर घुल जाते है तभी तो ऐसे तेल को तकनीकी भाषा में चीप कामर्शियल आर बी डी ऑॅयल कहते हैं।

शोध के अनुसार तेल को 200 डिग्री से 225 डिग्री पर आधे घंटे तक गर्म करने से उसमें एच एन ई नामक बहुत ही टोक्सिक पदार्थ बनता है यह लिनोलिक एसिड के ऑक्सीकरण से बनता है और उत्तकों में प्रोटीन और अन्य आवश्यक तत्वों को क्षति पहुँचाता है यह ऐथेरास्क्लिरोसिस, स्ट्रोक, पार्किसन, एल्जाइमर रोग, यकृत रोग आदि का जनक माना जाता है-

संतृप्त वसा को गर्म करने पर ऑक्सीकृत नहीं होते हैं और इसलिए गर्म करने पर उनमें एच एन ई भी नहीं बनते हैं इसलिए घी, मक्खन और नारियल का तेल कई दशकों से मानव स्वास्थ्य को रोगग्रस्त करने की बदनामी झेलने के बाद आज कल पुनः आहार शास्त्रियों के चेहते बने हुए हैं-

अब तो मुख्य धारा के बड़े-बड़े चिकित्सक भी स्वीकार कर चुकें हैं कि शरीर में ओमेगा 3 और ओमेगा 6 का अनुपात सामान्य (1:1 या 1:2) रखना आवश्यक है-

गृहणियों को खाना बनाने के लिए रिफाइंड तेल(Refined oil)का प्रयोग नहीं करना चाहिए-कच्ची घाणी से निकला तेल ही अच्छा माना जाता है-हमें कच्ची घाणी से निकला नारियल तेल, सरसों या तिल का तेल काम में लेना चाहिए-ये तेल स्वास्थ के लिए हानिकारक नहीं होते है-

जैतून का तेल भी बढि़या होता है जो हमारे यहाँ बहुत मंहगा मिलता है-मूंगफली का तेल अच्छा माना जाता है-

Upcharऔर प्रयोग-

महिलाओं के लिए अजीब सी बात है ये....!

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यह अजीब सी बात है कि दिन भर खटने के बाद जब महिलाए रात  में बिस्तर पर पहुंचती हैं तो आधे घंटे तक दर्द से कराहती रहती हैं इसके कई कारण हैं-



युवावस्था में दो फुल्के खाकर काम चला लेना-

जंक फ़ूड ज्यादा खाना-

पानी कम पीना-

अपनी छोटी छोटी बीमारियों को नज़र अंदाज करना-

अनुचित मात्रा में कास्मेटिक्स प्रयोग करना-

चलिए दर्द खत्म करने का एक सामान्य तरीका बता रहा हूँ-


एक किलो मेथी दाने घी में भून लीजिए फिर पीस लीजिए ,अब इसमें 250 ग्राम बबूल का गोंद घी में भून कर और पीस कर मिला दीजिए .अब सुबह शाम एक-एक चम्मच यानी कि पांच-पांच  ग्राम पानी से निगल लीजिए जब तक यह पूरी दवा खत्म होगी आप अपने आपको अधिक सुन्दर ,ताकतवर महसूस करेंगी.और दर्द का कहीं नामोनिशान नहीं रहेगा-

उपचार और प्रयोग-

28 जून 2015

Microwave Oven-माइक्रोवेव ओवन भोजन को जहरीला बना देता है

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मानव शरीर की प्रकृति विधुत रासायनिक है और कोई भी शक्ति जो मनुष्य के विधुत  रासायनिक व्यवस्था को बाधित करता है वो शरीर के शरीरक्रिया व्यवस्था को भी प्रभावित करेगा-सूक्ष्मतरंग चूल्हा,या माइक्रोवेव ओवन(Microwave Oven) (60 to 90 GHz) एक रसोईघर उपकरण है जो कि खाना पकाने और खाने को गर्म करने के काम आता है इस कार्य के लिये यह चूल्हा द्विविद्युतीय(dielectric)उष्मा का प्रयोग करता है यह खाने के भीतर उपस्थित पानी और अन्य ध्रुवीय अणुओं को सूक्ष्मतरंग विकिरण का उपयोग करके गर्म करता है मैग्नेट्रॉन इसका मुख्य अवयव है जो सूक्ष्मतरंगे पैदा करता है-

Microwave Oven-माइक्रोवेव ओवन भोजन को जहरीला बना देता है


माइक्रोवेव ओवन का इतिहास-

माइक्रोवेव ओवन मूलतः नाजियों द्वारा अपने mobile support operations में उपयोग के लिए विकसित किया गया था द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद माइक्रोवेव ओवन पर जर्मनों द्वारा किया गया चिकित्सा अनुसंधान मित्र शक्ति के हाथ  लगा-सोवियत संघ ने भी कुछ माइक्रोवेव ओवन निकाल लिया और उनके जैविक प्रभाव पर सबसे अधिक गहन शोध किया और सोवियत संघ ने माइक्रोवेव ओवन की स्वास्थ्य के खतरों पर एक अंतरराष्ट्रीय (जैविक और पर्यावरण) चेतावनी जारी किया-

अन्य पूर्वी यूरोपीय वैज्ञानिकों ने भी माइक्रोवेव विकिरण के हानिकारक प्रभावों की सूचना दी और इसके सख्त पर्यावरण सीमा निर्धारित किया पर किसी अज्ञात कारणों से अमेरिका ने इसके हानिकारक प्रभावों के यूरोपीय रिपोर्टों को स्वीकार नहीं किया-

माइक्रोवेव ओवन के सूक्ष्मतरंग विकिरण भोजन को जहरीला बना देता है उसमे कैंसर पैदा करने वाले पदार्थों का गठन होता है-

मांस माइक्रोवेव ओवन में पकाने से उसमे d-Nitrosodiethanolamines नामक एक कैंसर पैदा करने वाली तत्व का गठन होता है-

दूध और अनाज माइक्रोवेव ओवन(Microwave Oven)में गरम करने या पकाने से उनके कुछ अमीनो एसिड परिवर्तित हो कर कैंसर पैदा करने वाला तत्व बन जाता है-

बेबी फ़ूड को माइक्रोवेव ओवन(Microwave Oven)में गरम करने से उसमे एक ऐसा तत्व उतपन्न होता है जो बच्चे की तंत्रिका तंत्र और गुर्दे के लिए ज़हर होता है-

Microwave Oven में भोजन की पोषक तत्वों के विनाश होता है-

रूसी शोधकर्ताओं ने अपने माइक्रोवेव ओवन(Microwave Oven) परीक्षण में सभी खाद्य पदार्थों में 60 से 90% Food Value की कमी पायी ।

माइक्रोवेव ओवन में पके सभी खाद्य पदार्थों में विटामिन बी कॉम्प्लेक्स, विटामिन सी, विटामिन ई, आवश्यक खनिज और lipotropic कारकों की कमी पायी गयी ।

माइक्रोवेव-Microwave Oven खाद्य पदार्थों जैसे पिज्जा, फ्रेंच फ्राइज़, पॉपकॉर्न के ऊष्मा-शोशक पैकेजिंग से कई जहरीले रसायनों के रिसाव उसमे होता है-

माइक्रोवेव ओवेन(Microwave Oven) में पका खाना खाने वालों के शरीर में क्या होता है-

माइक्रोवेव में पके खाद्य पदार्थों के उपभोगताओं में पैथोजेनिक परिवर्तन पाया गया है जैसे-लसीका संबंधी विकार पाया गया जो कुछ प्रकार के कैंसर रोकने कि क्षमता को कम किया-रक्त में कैंसर सेल के गठन दर की वृद्धि हुई और पेट और आंतों के कैंसर होने की दर में बृद्धि आई तथा पाचन विकार की उच्च दर और उन्मूलन प्रणालियों के टूटने का क्रम देखा गया

माइक्रोवेव ओवेन में गरम किया हुआ रक्त से मौत-

1991 में अमेरिका में एक मुकदमा नोर्मा लेविट नामक व्यक्ति के मौत से संबंधित था जो एक साधारण से कूल्हे की सर्जरी के बाद खून चढ़ाने से निधन हो गया-नर्स ने गलती से खून चढ़ाने से पहले उसको माइक्रोवेव ओवन में गरम किया था-महिला की मृत्यु हो गई थी जब उसने रक्त प्राप्त किया-रक्त चढ़ाने से पहले नियमित तौर पर गर्म किया जाता है लेकिन नहीं माइक्रोवेव ओवन में नही- इस घटना से पता चलता है कि माइक्रोवेव ओवन में गरम करने के दौरान रक्त एक घातक पदार्थ में बदल गया था-

माइक्रोवेव बीमारी-

1950 में रडार के विकास के दौरान रुसीओं ने हजारो श्रमिको के ऊपर माइक्रोवेव के संपर्क में आने पर शोध किया था-

उस शोध रिपोर्ट में बताया है-इसका पहला लक्षण कम रक्तचाप और धीमी नाड़ी हैं,बाद में संवेदनिक तंत्रिका प्रणाली में उत्तेजना और उच्च रक्तचाप है इस चरण में अक्सर सिरदर्द, चक्कर आना, आंख में दर्द, अनिद्रा, चिड़चिड़ापन, चिंता, पेट दर्द, तंत्रिका तनाव, ध्यान केंद्रित करने में असमर्थता, बालों के झड़न, पथरी, मोतियाबिंद, प्रजनन समस्याओं, और कैंसर की वृद्धि की घटना भी शामिल है -बाद में अधिवृक्क थकावट और हृदय रोग जैसे कोरोनरी धमनियों कि रुकावट और दिल का दौरा पड़ना भी शामिल है-

Upcharऔर प्रयोग-

टिनिटस क्या है जाने लक्षण एवं उपचार....!

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* ये एक अजीब सी बीमारी है जिसके अंतर्गत कानों के अंदर बिना किसी वजह के एक आवाज़ गूंजती रहती है। यह कोई आम समस्या नहीं है। यह कोई बीमारी नहीं है बल्कि किसी बीमारी का लक्षण है। यह रक्तवाहिनियों की समस्या या उम्र के साथ सुनने की शक्ति क्षीण पड़ने से जोड़ी जा सकती है। लोग टिनिटस से काफी परेशान रहते हैं क्योंकि इससे सुनने की क्षमता पर असर पड़ता है जो कि हमारे जीवन का काफी महत्वपूर्ण भाग है। इसके बावजूद टिनिटस कोई बड़ी समस्या नहीं है। उम्र के साथ लोगों के सुनने की क्षमता कम होती जाती है। कुछ उपचारों की मदद से आप इसे ठीक कर सकते हैं।

टिनिटस के लक्षण:-
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* आसपास किसी भी तरह की आवाज़ ना होते हुए भी आपके कानों में किसी आवाज़ का गूंजना ही टिनिटस कहलाता है।

इसके कुछ लक्षण हैं:-
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सिसकारी

दहाड़

कानबजना

आवाज़गूंजना

* स्थिति के गंभीर होने के मुताबिक़ कान में आवाज़ का गूंजना कम या ज़्यादा हो सकता है। कुछ लोगों को ये आवाज़ें एक कान में ही सुनाई देती है तो कुछ को दोनों कानों में। कुछ लोगों को ये आवाज़ें इतनी तेज़ सुनाई देती है कि वो असली आवाज़ ही नहीं सुन पाते। कुछ लोगों के लिए यह समस्या अस्थायी रूप से परेशान करने वाली होती है और अन्य लोगों को काफी दिनों तक ये समस्या सताती है।

टिनिटस के प्रकार:-
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व्यक्तिपरक टिनिटस:-
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* यह एक ख़ास प्रकार का टिनिटस होता है जिसमें आप सुन सकते हैं। ज़्यादातर लोग इस प्रकार के टिनिटस से जूझते हैं। इस प्रकार के टिनिटस का मुख्य कारण कान के अंदरूनी, बाहरी तथा मध्य भाग में समस्या होना है। अगर आप सुनने की नसों में आई समस्याओं से परेशान हैं तो आपको व्यक्तिपरक टिनिटस की समस्या है।

वस्तुगत टिनिटस:-
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* यह टिनिटस काफी कम लोगों में पाया जाता है तथा सिर्फ डॉक्टर ही जांच के दौरान इसे सुन सकते हैं। इस प्रकार के टिनिटस का मुख्य कारण खून की धमनियों में किसी प्रकार की कोई समस्या है। यह अंदरूनी हड्डियों की कोई समस्या मांसपेशियों में मरोड़ की परेशानी हो सकती है।

टिनिटस के कारण:-
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* तेज़ आवाज़ों के संपर्क में रहना

* आमतौर पर फैक्ट्री में भारी उपकरणों की आवाज़ से काफी शोर पैदा होता है। इसके अलावा गाने बजाने के तमाम उपकरण काफी शोर पैदा करते हैं। अगर आप इनमें से किसी चीज़ के संपर्क में हैं तो आपको टिनिटस होने की संभावना काफी ज़्यादा है।

कान की हड्डियों में परिवर्तन:-
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* अगर आपके कान की हड्डी कान के बीच में कड़ी हो रही है तो इससे आपके सुनने की क्षमता पर असर पड़ता है। यह हड्डियों के अतिरिक्त रूप से बढ़ने की वजह से भी होती है जिसका कारण आनुवांशिक हो सकता है।

उम्र आधारित समस्या:-
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* उम्र बढ़ने के साथ शरीर में कई समस्याएं आती हैं। सुनने की क्षमता क्षीण होने का उम्र के साथ भी सम्बन्ध हो सकता है। इससे टिनिटस की समस्या भी हो सकती है। ६० साल की उम्र से यह समस्या शुरू हो सकती है।

इसका एक चिकित्सकीय नाम भी है – प्रेस्बाईक्यूसिस।

कान में वैक्स जमा होना:-
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* कानों का मोम कानों में गन्दगी एवं बैक्टीरिया जाने से रोकता है। पर कभी कभी अतिरिक्त मात्रा में मोम हमारे कानों में एकत्रित हो जाता है। ऐसे में भी टिनिटस की समस्या हो सकती है।

टिनिटस का उपचार:-
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* बार-बार दवाई बदलना कई बार दवाइयों के साइड इफ़ेक्ट से भी टिनिटस होता है, अतः अपनी दवाइयों को कम बदलें।

* कान का मोम निकालें अगर आपके कान में काफी मोम जम गया है तो इसे निकालना आवश्यक है। परन्तु इसके लिए हेयर पिन का प्रयोग न करें क्योंकि इससे कानों को हानि पहुँच सकती है।

* कान ढकने का यंत्र आप अब कानों को स्वस्थ रखने के लिए कान ढकने के मास्क का प्रयोग कर सकते हैं। इसको पहनने के बाद आपको बाहरी शोर का सामना नहीं करना पडेगा।

* वाइट नॉइज़ मशीन ये ऐसे यंत्र होते हैं जो पर्यावरण सम्बन्धी आवाज़ निकालते हैं जैसे समुद्र की लहरें और बारिश। यह टिनिटस का काफी महत्वपूर्ण उपचार है।

उपचार स्वास्थ्य और प्रयोग-

23 जून 2015

मनुष्य को शनिदेव के नाम से ही डर लगता है - Manushy Ko shanidev ke naam se hi dar lagta hai

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जी हाँ आज शनि के नाम से ही हर व्यक्ति डरने लगता है। शनि की दशा एक बार शुरू हो जाए तो साढ़ेसात साल बाद ही पीछा छोड़ती है लेकिन हनुमान भक्तों को शनि से डरने की तनिक भी जरूरत नहीं। शनि ने हनुमान को भी डराना चाहा लेकिन मुंह की खानी पड़ी आइए जानें कैसे-





आप सभी जानते है कि महान पराक्रमी हनुमान अमर हैं। पवन पुत्र हनुमान रघुकुल के कुमारों के कहने से प्रतिदिन अपनी आत्मकथा का कोई भाग सुनाया करते थे-

उन्होंने कहा कि मैं एक बार संध्या समय अपने आराध्य श्री राम का स्मरण करने लगा तो उसी समय ग्रहों में पाप ग्रह, मंद गति सूर्य पुत्र शनि देव पधारे। वह अत्यंत कृष्ण वर्ण के भीषणाकार थे। वह अपना सिर प्रायः झुकाये रखते हैं। जिस पर अपनी दृष्टि डालते हैं वह अवश्य नष्ट हो जाता है। शनिदेव हनुमान के बाहुबल और पराक्रम को नहीं जानते थे। हनुमान ने उन्हें लंका में दशग्रीव के बंधन से मुक्त किया था-

वह हनुमान जी से विनयपूर्वक किंतु कर्कश स्वर में बोले हनुमान जी ...! 

मैं आपको सावधान करने आया हूं। त्रेता की बात दूसरी थी, अब कलियुग प्रारंभ हो गया है। भगवान वासुदेव ने जिस क्षण अपनी अवतार लीला का समापन किया उसी क्षण से पृथ्वी पर कलि का प्रभुत्व हो गया। यह कलियुग है। इस युग में आपका शरीर दुर्बल और मेरा बहुत बलिष्ठ हो गया है-

अब आप पर मेरी साढेसाती की दशा प्रभावी हो गई है। मैं आपके शरीर पर आ रहा हूं। शनिदेव को इस बात का तनिक भी ज्ञान नहीं था कि रघुनाथ के चरणाश्रि्रतों पर काल का प्रभाव नहीं होता।  करुणा निधान जिनके हृदय में एक क्षण को भी आ जाते हैं, काल की कला वहां सर्वथा निष्प्रभावी  हो जाती है। प्रारब्ध के विधान वहां प्रभुत्वहीन हो जाते हैं। सर्व समर्थ पर ब्रह्म के सेवकों का नियंत्रण-संचालन-पोषण प्रभु ही करते हैं। उनके सेवकों की ओर दृष्टि उठाने का साहस कोई सुर-असुर करे तो स्वयं अनिष्ट भाजन होता है। शनिदेव के अग्रज यमराज भी प्रभु के भक्त की ओर देखने का साहस नहीं कर पाते-

हनुमान जी ने शनिदेव को समझाने का प्रयत्न किया, आप कहीं अन्यत्र जाएं। ग्रहों का प्रभाव पृथ्वी के मरणशील प्राणियों पर ही पड़ता है। जो कलयुग में इश्वेर के नाम का स्मरण नहीं करेगे और असंस्कारित होगे आप उनका ही अहित कर सकेगे अत: आप मुझे अपने आराध्य का स्मरण करने दें। मेरे शरीर में श्री रघुनाथजी के अतिरिक्त दूसरे किसी को स्थान नहीं मिल सकता-

लेकिन शनिदेव को इससे संतोष नहीं मिला वह बोले, मैं सृष्टिकर्ता के विधान से विवश हूं। आप पृथ्वी पर रहते हैं। अतः आप मेरे प्रभुत्व क्षेत्र से बाहर नहीं हैं। पूरे साढे बाईस वर्ष व्यतीत होने पर साढ़े सात वर्ष के अंतर से ढाई वर्ष के लिए मेरा प्रभाव प्राणी पर पड़ता है। किंतु यह गौण प्रभाव है। आप पर मेरी साढ़े साती आज इसी समय से प्रभावी हो रही हो। मैं आपके शरीर पर आ रहा हूं। इसे आप टाल नहीं सकते-

फिर हनुमान जी कहते हैं, जब आपको आना ही है तो आइए, अच्छा होता कि आप मुझ वृद्ध को छोड़ ही देते तो अच्छा होता - -शनिदेव कहते हैं, कलियुग में पृथ्वी पर देवता या उपदेवता किसी को नहीं रहना चाहिए। सबको अपना आवास सूक्ष्म लोकों में रखना चाहिए जो पृथ्वी पर रहेगा। वह कलियुग के प्रभाव में रहेगा और उसे मेरी पीड़ा भोगनी पड़ेगी और ग्रहों में मुझे अपने अग्रज यम का कार्य मिला है। मैं मुख्य मारक ग्रह हूं। और मृत्यु के सबसे निकट वृद्ध होते हैं। अतः मैं वृद्धों को कैसे छोड़ सकता हूं-

हनुमान जी पूछते हैं, आप मेरे शरीर पर कहां बैठने आ रहे हैं। शनिदेव गर्व से कहते हैं प्राणी के सिर पर। मैं ढाई वर्ष प्राणी के सिर पर रहकर उसकी बुद्धि विचलित बनाए रखता हूं। मध्य के ढाई वर्ष उसके उदर में स्थित रहकर उसके शरीर को अस्वस्थ बनाता हूं व अंतिम ढाई वर्ष पैरों में रहकर उसे भटकाता हूँ -

ये कह कर फिर शनिदेव हनुमान जी के मस्तक पर आ बैठे तो हनुमान जी के सिर पर खाज हुई। इसे मिटाने के लिए हनुमान जी ने बड़ा पर्वत उठाकर सिर पर रख लिया-

तब तो पत्थर के भार से विचलित हो कर शनिदेव चिल्लाते हैं यह क्या कर रहे हैं आप.? 

फिर हनुमान जी कहते हैं, जैसे आप सृष्टिकर्ता के विधान से विवश हैं वैसे मैं भी अपने स्वभाव से विवश हूं। मेरे मस्तक पर खाज मिटाने की यही उपचार पद्धति है। और आप अपना कार्य करें और मैं अपना कार्य-

ऐसा कहते ही हुनमान जी ने दूसरा पर्वत उठाकर सिर पर रख लिया। इस पर शनिदेव कहते हैं, आप इन्हें उतारिए मैं आपसे संधि करने को तैयार हूँ- 

उनके इतना कहते ही हनुमान जी ने तीसरा पर्वत उठाकर सिर पर रख लिया तो शनि देव चिल्ला कर कहते हैं, मैं अब आपके समीप नहीं आऊंगा। फिर भी हनुमान जी नहीं माने और चौथा पर्वत उठाकर सिर पर रख लिया। शनिदेव फिर चिल्लाते हैं, पवनकुमार ! 

                  त्राहि माम ताहि माम ! रामदूत ! आंजनेयाय नमः 

मैं उसको भी पीड़ित नहीं करूंगा जो आपका स्मरण करेगा। मुझे उतर जाने का अवसर दें-

हनुमान जी कहते हैं अरे शनि महराज जी आपने तो बहुत शीघ्रता की। अरे अभी तो पांचवां पर्वत (शिखर) बाकी है। और इतने में ही शनि मेरे पैरों में गिर गए और कहा' मैं सदैव आपको दिये वचनों को स्मरण रखूंगा-

आघात के उपचार के लिए शनिदेव तेल मांगने लगे। हनुमान जी तेल  कहां देने वाले थे। वही शनिदेव आज भी तेलदान से तुष्ट होते हैं-

जो व्यक्ति कलयुग में शनि प्रभाव से बचना चाहता हो उसे हमेशा ही हनुमान जी की पूजा अर्चना  करनी चाहिए वो शनि के प्रभाव से मुक्त रहता है आप यदि हनुमान जी की आराधना करते है या जिस घर में बजरंग बाण का  नित्य एक पाठ भी  होता है वहां शनि का प्रभाव कभी भी व्याप्त नहीं होता और न ही नकारात्मक उर्जा का प्रवेश होता है आज भी हनुमान जी का कलयुग में प्रतक्ष्य प्रभाव है ..!

जय श्री राम जय हनुमान ...!

उपचार और प्रयोग-

17 जून 2015

असुरक्षित यौन संबंध -

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असुरक्षित यौन संबंधों के चलते कई बीमारियां फैल रही हैं-



इसके पीछे सबसे बड़ी वजह है जानकारी का अभाव। अधिकतर लोग सावधानियों के प्रति जागरुक नहीं होते। और इसी वजह से कई तरह की परेशानियों में घिर जाते हैं।


असुरक्षित यौन संबंधों को लेकर लोगों में कई प्रकार की दुविधा होती है। सही स्रोतों से जानकारी के अभावों में युवा अक्‍सर इसे लेकर अनिश्‍चितता में रहते हैं। वह यही सोचते हैं कि यौन संबंधों का मतलब है सेक्स के दौरान सावधानियां बरतना। 


लेकिन वे यह भूल जाते हैं कि असुरक्षित यौन संबंधों का अर्थ है यौन संचारित रोगों को जानना, संक्रमण की संभावनाओं इत्यादि के बारे में जागरूक होना। आइए जानें असुरक्षित यौन संबंध आखिर है क्या। 


असुरक्षित यौन संबंध:-
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असुरक्षित यौन संबंधों का अर्थ है, सेक्स के दौरान सावधानियां न बरतना। इन सावधानियों में जरूरी है कि सेक्स जोर-जबरदस्ती से न किया जाए।


माहवारी के दौरान सेक्स करने से संक्रमण की संभावना बढ जाती है।एक से ज्यादा साथी फिर चाहे वह महिला हो या पुरूष के साथ संबंध बनाने से संक्रमण हो सकता है।


असुरक्षित यौन संबंधों के दौरान यौन संचारित रोगों के होने का खतरा बना रहता है।बहुत अधिक कंट्रासेप्टिक पिल्स का सेवन, पहली बार सेक्स के दौरान कंडोम का सेवन न करना असुरक्षित यौन संबंधों के अंतगर्त आता है।


प्रोफेशनल सेक्स वर्कर से संपर्क बनाने से भी संक्रमण की संभावना रहती है।


सामूहिक रूप से सेक्स‍ करना यानी एक ग्रुप में आपस में एक-दूसरे के साथ सेक्स करना भी असुरक्षित यौन संबंधों के अंतर्गत शामिल है।


वाइफ स्‍वैपिंग यानी एक दूसरे के पार्टनर को एक रात के लिए बदलने से भी असुरक्षित यौन संबंधों का खतरा रहता है।पुरूष या महिला में से किसी को यौन संबंधी इंफेक्शेन होने से भी संक्रमण होने का खतरा बढ़ जाता है।


ओरल सेक्स से भी इंफेक्शन होने का खतरा लगातार बरकरार रहता है। इसीलिए ओरल सेक्स में साफ-सफाई का खास ध्यान रखने की जरूरत होती है।सेक्स के दौरान, सेक्स से पहले खासतौर पर सावधानियां बरतनी आवश्यक हैं। असुरक्षित यौन संबंध के कारण होने वाली बीमारियों की सूची लंबी है, लेकिन थोड़े संयम और सावधानी अपनाकर इनसे बचा जा सकता है।

उपचार और प्रयोग-http://www.upcharaurprayog.com

11 जून 2015

जहाँ भगवान श्रीराम को दिया जाता है गार्ड ऑफ ऑनर - Where Lord Rama is given a guard of honor

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इस युग में राम का राज सुनकर कानों को भले ही यकीन न हो, पर यह सच है जी हाँ ये सच है -



लाला हरदौल की पवित्र नगरी ओरछा के एक मन्दिर में भगवान श्रीराम की नहीं, बल्कि राजा ‘राम' की पूजा-अर्चना की जाती है और यहां मध्य प्रदेश पुलिस अपने को चारों पहर की आरती में गार्ड ऑफ ऑनर भी देती है। किसी क्षेत्र में प्रवेश करते समय देश के राष्‍ट्रपति और प्रधानमंत्री जैसे अति विशिष्‍ट हस्तियों को सिर्फ एक ही बार ‘गार्ड ऑफ ऑनर' दिए जाने की संवैधानिक व्यवस्था है, पर मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ जिले की पवित्र नगरी ओरछा, जो देश में लाला हरदौल के ब्रम्हचर्य की वजह से प्रसिद्ध है, में एक ऐसा मंदिर बना है, जहां भगवान श्रीराम को मध्‍य प्रदेश शासन के एक दर्जन पुलिसकर्मी बतौर रक्षक तैनात हैं-

ऐसा इसलिए क्‍योंकि यहां श्रीराम को भगवान नहीं बल्कि नहीं, अयोध्या नरेश ‘राम' के रूप में जाना जाता है। कहा जाता है कि देश का यह इकलौता मंदिर है, जहां श्रीराम को राजा के रूप में देखा जाता है, भगवान के रूप में नहीं।

राजा राम की ड्योढ़ी में मध्य प्रदेश शासन के एक दर्जन पुलिस कर्मी बतौर रक्षक तैनात हैं। इतना ही नहीं, यहां चारों पहर राजा राम की आरती होती है और पुलिस कर्मी हर बार उन्हें ‘गार्ड ऑफ ऑनर' देते हैं-

मध्य प्रदेश की सरकार बुंदेला शासकों के दौर की इस परम्परा को सदियों से बखूबी निभाती चली आ रही है। ओरछा में भगवान श्रीराम को राजा का दर्जा दिए जाने के पीछे एक लोककथा के बारे में संत रामषरण दास त्यागी जी महराज बताते हैं कि ‘संवत 1600 में यहां के तत्कालीन बुंदेला शासक महाराजा मधुकर शाह की पत्नी महारानी कुअंरि गणेश उन्हें अयोध्या से ओरछा लाई थीं। उस समय मर्यादा पुरुशोत्तम श्रीराम ने शर्त रखी थी कि वे ओरछा तभी जाएंगे, जब इलाके में उन्हीं की सत्ता रहे और राजशाही पूरी तरह से खत्म हो जाए। तब महाराजा शाह ने ओरछा में ‘रामराज' की स्थापना की थी, जो आज भी कायम है-

Diabetes-मधुमेह के रोगियों के लिए चने का सत्तू रामबाण

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ग्रीष्म काल शुरू हो रहा है ग्रीष्मकाल शुरू होते ही भारत में अधिकांश लोग सत्तू का प्रयोग करते हैं खासकर दूर-दराज के छोटे क्षेत्रों व कस्बों में यह भोजन का काम करता है चना, मक्का, जौ, ज्वार, बाजरा, चावल, सिंघाड़ा, राजगीरा, गेहूं आदि को बालू में भूनने के बाद उसको चक्की में पीसकर बनाए गए चूर्ण(पावडर)को सत्तू कहा जाता है-

Diabetes-मधुमेह के रोगियों के लिए चने का सत्तू रामबाण


चने वाले सत्तू में प्रोटीन की मात्रा अधिक होती है और मक्का वाले सत्तू में कार्बोहाइड्रेट की मात्रा अधिक होती है इसी प्रकार सभी का अपना-अपना गुणधर्म है इन सभी प्रकार के सत्तू का अकेले-अकेले या सभी को किसी भी अनुपात में मिलाकर सेवन किया जा सकता है-

सत्तू के विभिन्न नाम-

भारत की लगभग सभी आर्य भाषाओं में सत्तू शब्द का प्रयोग मिलता है, जैसे- पाली प्राकृत में सत्तू, प्राकृत और भोजपुरी में सतुआ, कश्मीरी में सोतु, कुमाउनी में सातु-सत्तू, पंजाबी में सत्तू, सिन्धी में सांतू, गुजराती में सातु तथा हिन्दी में सत्तू एवं सतुआ-

यह इसी नाम से बना बनाया बाजार में मिलता है गुड़ का सत्तू व शक्कर का सत्तू दोनों अपने स्वाद के अनुसार लोगों में प्रसिद्ध हैं। सत्तू एक ऐसा आहार है जो बनाने, खाने में सरल है, सस्ता है, शरीर व स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है और निरापद भी है-

विभिन्न प्रकार के सत्तू-

जौ का सत्तू-

जौ का सत्तू शीतल, अग्नि प्रदीपक, हलका, दस्तावर (कब्जनाशक), कफ तथा पित्त का शमन करने वाला, रूखा और लेखन होता है। इसे जल में घोलकर पीने से यह बलवर्द्धक, पोषक, पुष्टिकारक, मल भेदक, तृप्तिकारक, मधुर, रुचिकारक और पचने के बाद तुरन्त शक्ति दायक होता है। यह कफ, पित्त, थकावट, भूख, प्यास और नेत्र विकार नाशक होता है-

जौ-चने का सत्तू-

चने को भूनकर पिसवा लेते हैं और चौथाई भाग जौ का सत्तू मिला लेते हैं। यह जौ चने का सत्तू है। इस सत्तू को पानी में घोलकर, घी-शकर मिलाकर पीना ग्रीष्मकाल में बहुत हितकारी, तृप्ति दायक, शीतलता देने वाला होता है-

चावल का सत्तू-

चावल का सत्तू अग्निवर्द्धक, हलका, शीतल, मधुर ग्राही, रुचिकारी, बलवीर्यवर्द्धक, ग्रीष्म काल में सेवन योग्य उत्तम पथ्य आहार है-

जौ-गेहूँ चने का सत्तू-

चने की दाल एक किलो, गेहूँ आधा किलो और जौ 200 ग्राम। तीनों को 7-8 घंटे पानी में गलाकर सुखा लेते हैं और जौ को साफ करके तीनों को अलग- अलग घर में या भड़भूंजे के यहां भुनवा कर, तीनों को मिला लेते हैं और पिसवा लेते हैं। यह गेहूँ, जौ, चने का सत्तू है-

सेवन विधि-

इनमें से किसी भी सत्तू को पतला पेय बनाकर पी सकते हैं या लप्सी की तरह गाढ़ा रखकर चम्मच से खा सकते हैं। इसे मीठा करना हो तो उचित मात्रा में देशी शक्कर या गुड़ पानी में घोलकर सत्तू इसी पानी से घोलें। नमकीन करना हो तो उचित मात्रा में पिसा जीरा व सेंधा नमक पानी में डालकर इसी पानी में सत्तू घोलें। इच्छा के अनुसार इसे पतला या गाढ़ा रख सकते हैं। सत्तू अपने आप में पूरा भोजन है, यह एक सुपाच्य, हलका, पौष्टिक और तृप्तिदायक शीतल आहार है, इसीलिए इसका सेवन ग्रीष्म काल में किया जाता है-

चिकित्सा विज्ञान में सत्तू के लाभ-


  1. चिकित्सा विज्ञान की कई खोजों में यह दावा किया गया है कि पेट की बीमारियों तथा मधुमेह के रोगियों के लिए चने का सत्तू रामबाण है-
  2. कीटनाशक युक्त जहरीले बहुब्राण्ड शीतल पेय पीने से शरीर में कई बीमारियां होती हैं, लेकिन चने के सत्तू का सेवन ख़ासकर गर्मी के मौसम में पेट की बीमारियों तथा शरीर के तापमान को नियंत्रित करने में मदद करता है। ख़ासकर यह मधुमेह रोगियों के लिए रामबाण है-
  3. कई डॉक्टर कहते हैं कि चने के सत्तू का सेवन हर आयु वर्ग के लोग कर सकते हैं, लेकिन जोड़ों के दर्द के रोगी को इसके सेवन से बचना चाहिए-
  4. जहां एक तरफ बहुब्राण्ड शीतल पेय कम्पनियां भीषण गर्मी में अपने ग्राहकों को रिझाने तथा अपने ब्राण्ड का प्रचार करने के लिए समाचार पत्रों, टीवी के माध्यम से प्रचार करके लोगों को आकर्षित करने का प्रयास कर रही हैं उसी के बीच अपनी गुणवत्ता तथा स्वास्थ्यवर्धक होने के कारण सत्तू बिना किसी प्रचार के मुंबई, दिल्ली, बैंगलोर, हैदराबाद जैसे महानगरों सहित पूरे भारत में पुनः लोगों की ख़ास पसन्द बन गया है-
  5. एक ओर कोकाकोला, पैप्सी, लिमका आदि पेयजल पीने से शरीर में वसा की मात्रा बढ़ जाती है, जिसके कारण कई बीमारियां हो सकती हैं, तो दूसरी ओर चने के सत्तू के सेवन से खासकर गर्मी के मौसम में पेट की बीमारियों तथा शरीर के तापमान को नियंत्रित करने में मदद मिलता है. विशेष रूप से डायबीटीज के मरीजों के लिए यह विशेष गुणकारीहै.आयुर्वेद के जानकारों के अनुसार चने का सत्तू गर्मी के मौसम में तापमान को नियंत्रित करने के साथ साथ स्वास्थ्यवर्धक भी है-
  6. जानकारों का कहना है कि सत्तू के सेवन से ख़ासकर गर्मी के मौसम में पेट की समस्याओं से निजात पाया जा सकता है। चने से बनने वाले सत्तू के गुणकारी परिणाम से आज यह आम वर्ग के साथ साथ सुविधा सम्पन्न लोगों की पहली पसन्द बनता जा रहा है-
  7. बाज़ार में बिकने वाले शीतल पेय पदार्थ लोगों को आकर्षित तो कर सकते हैं, लेकिन गर्मी के मौसम में संतुष्ट करके स्वास्थ्य नहीं दे सकते बल्कि हानिकारक होते है, जबकि चने से बना सत्तू गर्मी से निजात दिलाने के साथ साथ शरीर के लिए काफ़ी लाभदायक है और इसी का परिणाम है कि आज सत्तू पीने वालों में सभी वर्गों के लोग आते हैं और सत्तू का सेवन करते हैं-
  8. मोटापे में भूख लगने पर जौ एवं चने से निर्मित सत्तू का सेवन करने पर भूख तो शांत होती ही है साथ ही लंबे समय तक क्षुधा शांत रहती है। साधारणतया सत्तू में गुड़ या शक्कर पानी में घोलकर सेवन किया जाता है। डायबिटीज के रोगी चाहें तो गुड़ या शक्कर के स्थान पर नमक भी डालकर स्वादिष्ट बना सकते हैं-

सत्तू से बने स्वादिष्ट लड्डू-

सत्तू से हम पेय, परांठे, कचौरी तो बनाते ही हैं लेकिन सत्तू से स्वादिष्ट लड्डू भी बहुत आसानी से और बहुत जल्दी बनकर तैयार हो जाते हैं. किसी त्यौहार पर यदि आपको तुरत फुरत मिठाई बनानी हो तो सत्तू के लड्डू बना लीजिये. सभी को बहुत पसंद आयेगे-

सामग्री-

सत्तू - 2 कप (250 ग्राम)
बूरा या चीनी पाउडर- 1.5 कप (200 - 250 ग्राम)
घी - 1 कप (200 ग्राम)
छोटी इलायची - 7-8
पिस्ते - 10-12
काजू - 20-25
बादाम - 20-25

विधि-

कढा़ई में घी डालकर पिघला लीजिए, घी पिघलने के बाद सत्तू डालकर अच्छी तरह मिक्स करते हुए, लगातार चलाते हुये, मीडियम और धीमी आग पर हल्का सा भून लीजिए. सत्तू 5-6 मिनिट में अच्छी महक के साथ भुन कर तैयार हो जाता है, गैस बंद कर दीजिए और मिश्रण को अलग प्याले में निकाल लीजिए, ताकि ये जल्दी से ठंडा हो जाय., अगर भुने हुये सत्तू को बहुत जल्दी ठंडा करना हो तो इसे फ्रिज में रखकर ठंडा किया जा सकता है.

काजू, पिस्ते और बादाम को छोटे-छोटे टुकडों में काट कर तैयार कर लीजिए. इलायची को छील कर पाउडर बना लीजिए. सत्तू के ठंडा होने पर इसमें बूरा, कटे हुए काजू, बादाम, पिस्ते(थोडे़ से पिस्ते बचा कर रख लें) और इलायची पाउडर डाल दीजिए और सभी चिजों को अच्छी तरह मिलाकर मिक्स करके तैयार कर लीजिए. लड्डू बनाने के लिये मिश्रण तैयार है.

मिश्रण को थोड़ा-थोड़ा हाथ में लीजिये और दबा दबा कर अपने मन पसन्द आकार के लड्डू बना कर थाली में रखिये. सारे मिश्रण से लड्डू बना कर थाली में रख लीजिये. सभी लड्डूओं पर पिस्ते के टुकडे़ सजाएं. बहुत ही अच्छे और स्वादिष्ट सत्तू के लड्डू बनकर तैयार, परोसिये और खाइये. बचे हुये लड्डू कन्टेनर में भर कर रख लीजिये और 2 महिने तक खाते रहिये-

गरम सत्तू में बूरा नहीं मिलाएं क्योंकि ऎसा करने से मिश्रण बहुत पतला हो जाता है और लड्डू बनाना बांधना मुश्किल हो जाता है-

चने के सत्तू का बाज़ार कितना बड़ा है इसका कोई अधिकृत आंकड़ा नहीं है, लेकिन इसकी खपत से माना जा रहा है कि इसका रोज़ाना का करोड़ों रुपए का व्यापार होता है और देश में हजारों लोगों को इससे रोजगार प्राप्त होता है-

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