21 सितंबर 2016

आज आपका जीवन कैसा होता जा रहा है

Today Your Life


आधुनिक जीवन (Modern Life) में हम तेज गति से दौड़ रहे है बस जीवन (Life) में सभी का एक ही उद्देश्य है कि हम किसी से पीछे न रह जाएँ लेकिन क्या आप जानते है कि जीवन की इस दौड़ में आप क्या-क्या खोते जा रहे है आज आपका जीवन लापरवाही से भरा और अस्त-व्यस्त हो गया है किसी के पास न तो सोने का कोई टाइम है न जागने का कोई टाइम है किसी भी काम की कोई जवाब देही है आज हमारी यही सोच हमारे स्वास्थ पर भी विपरीत प्रभाव डाल रही है-

आज आपका जीवन कैसा होता जा रहा है

आज लोगों की दिनचर्या में एक अलग सा परिवर्तन देखने को मिलता है वैसे तो दरअसल सभी के जीवन में छोटी-मोटी समस्या आती ही रहती है यही वक्त है कि आपको अपने विवेक से उनका समाधान खोजना है न कि अपने जीवन को अस्त-व्यस्त करना है-सही समय पर सही कार्य करना ही संतुलित जीवन (Life) का आधार है-

इसलिये आप समय को पहचानो तथा समय की परवाह करो अन्यथा समय तुम्हारी परवाह नहीं करेगा-जो समय बीत गया वह फिर नहीं आता है सच्चाई ये है कि कोई भी व्यक्ति जीवन में पूर्ण संतुष्ट कभी नहीं हो सकता है आप जितना प्राप्त कर लेगें मन उससे जादा ही खोजने लगता है चूँकि मन की सीमायें अनंत है बस जिस जगह अपने मन में ये सोच लेगें मुझे अब जीवन (Life) में कुछ नहीं चाहिए तो बस आपको संतुष्टता प्राप्त हो जायेगी और जहाँ आप संतुष्ट हो जायेंगे सच मानिये कि आप सुखी हो जायेंगे-

यह आपके मन का भ्रम ही है मन की परिधि पर जीने वाला व्यक्ति मन की मानकर जीने वाला व्यक्ति कभी भी सुखी जीवन (Happy Life) नहीं जी सकता है वह सदैव असंतुष्ट रहेगा क्योंकि असंतुष्ट रहना मन का स्वभाव है आपका मन सदा भविष्य में जीता है-महत्वाकांक्षा में जीता है इसलिए आप अपने मन को एकाग्रता की ओर ले जाएँ-

आप अपने समय, साधन और समझ के अनुरूप योजना बनाएं और कार्यक्षेत्र में कूद पड़े हमें सदा परिश्रम करते रहना चाहिए क्योंकि परिश्रम से जो संतुष्टि मिलती है वह और किसी चीज से नहीं मिलती है वास्तव में संसार के सभी चर्चित महापुरुष हमारे जैसे इंसान ही थे उनका तप और त्याग था जिसकी वजह से वे महानता अर्जित कर सके और वे शिखर तक पहुंचे-

सजगता का बोध (Sense of Alertness)-


योगशास्त्र में एक शब्द आता है-सजगता-इसका अर्थ है आप जो भी करें-जाग कर करें-होशपूर्वक करे-आप जो कर रहे हैं और जो बोल रहे हैं उसका आपको बोध होना चाहिए-अपने कर्तव्य का बोध, अपने वक्तव्य का बोध यदि आपके भीतर नहीं होगा तो उसका परिणाम फिर बस "तेली के बैल" के समान ही रहेगा-जीवन भर चलकर भी तेली का बैल कहीं नहीं पहुंचता है बस एक सर्कल में ही घूमता रहता है-सोचिये जरा अपने जीवन को क्या एक सर्कल में ही घुमाना आपको पसंद है ?

आज व्यक्ति इसी तरह की व्यस्तता का जीवन (Life) जी रहा है क्योंकि उसकी जीवन शैली उतावलापन प्रवृत्ति प्रधान है उतावलापन प्रवृत्ति प्रधान जीवन शैली होने के कारण व्यक्ति का जीवन व्यस्त नहीं बल्कि अस्त-व्यस्त हो गया है-

व्यस्तता व्यक्ति के लिये बुरी नहीं अन्यथा व्यस्तता के अभाव में ‘खाली दिमाग शैतान वाली’’ कहावत चरितार्थ हो सकती है-किन्तु "अति सर्वत्र वर्जयेत्" के अनुसार अति व्यस्तता व्यक्ति के लिए हानिकारक है-अति व्यस्तता का एक प्रमुख कारण है आपका "उतावलापन व अधीरता"

उतावलापन (Temerity) क्या है-


व्यक्ति के किसी भी कार्य को दूरगामी परिणामों पर विचार किए बिना हड़बड़ी में बिना सोचे-समझे कार्य को कर डालने की आदत को उतावलापन कहते हैं यह आदत व्यक्ति के स्वयं के जीवन को ही अस्त-व्यस्त नहीं करती वरन् परिवार और समाज में भी अव्यवस्था को जन्म देती है तथा जिसकी परिणाम अनेक रोगों में देखी जाती है-

उतावलापन वर्तमान युग की महामारी है आज सभी इस रोग से ग्रस्त हैं प्रत्येक कार्य के प्रति जल्दीबाजी, काम तत्काल होना चाहिए तथा उसका परिणाम भी तत्काल होना चाहिए अब चाहे डाॅक्टर के पास जाना हो या किसी अफसर के पास या किसी साधु के पास-सभी को उतावलापन है उसका कार्य शीघ्र हो-तुरंत हो-

व्यक्ति चाहे कुछ भी देने के लिए तैयार है किन्तु उसका कार्य शीघ्रताशीघ्र होना चाहिए वह प्रतीक्षा की बात ही नहीं जानता है जीवन में जहां इतनी अधीरता व जल्दीबाजी होती है वहां व्यक्ति निश्चित रूप से मानसिक तौर पर अस्त-व्यस्त हो जाता है इससे केवल बनते हुए काम ही नहीं बिगड़ते अपितु लाभ को हानि में और सफलता को असफलता में बदल देता है-

ईश्वर-कृपा से आपको जो कुछ मिलता है आप उसका पूरा आनंद नहीं ले पाते है और जो नहीं मिला उसके लिए ही अपनी किस्मत को रोते रहते हैं या ईश्वर से शिकायत करते रहते हैं जो व्यक्ति अपने पास उपलब्ध साधनों की अपेक्षा नई-नई इच्छाएं करता रहता है और इस प्रकार उदास रहता है वह सदा लोभ-लालच में फंसकर अपने मन का चैन खो बैठता है तथा मानसिक विकार के चलते ही डिस्परेसन की बीमारी से ग्रसित हो जाता है-

मनुष्य में अधीरता (Impatience) है-


आधुनिक युग में मनुष्य जितना बेचैन व अधीर (Impatience) है उतना कभी पहले नहीं था-आज हर समय दौड़-धूप और हर काम में उतावलेपन व अधीरता ने मनुष्य के मन और मस्तिष्क को खोखला बना दिया है-क्या आप जानते है कि अधीर व्यक्ति हमेशा कठिन और प्रतिकूल परिस्थितियों का सामना करने से कतराता है ऐसे व्यक्ति प्रायः मानसिक तौर पर उदासी, मायूसी, घबराहट और तनाव से घिरे रहते हैं तथा शारीरिक स्तर पर रक्तचाप, कैंसर, अल्सर और हृदयघात जैसी बीमारियों से पीडि़त रहते हैं-

धैर्य का विकास (Development of Patience)-


आज की दुनिया तेज गति की दीवानी भले ही हो किन्तु इस फास्ट लाइफ ने लोगों का चैन छीन लिया है तथा अनेक रोगों को जन्म दिया है उनमें से एक प्रमुख रोग है नर्वस ब्रेक डाउन-जिसके कारण व्यक्ति का मन शंका-कुशंका, भय और भ्रम की आशंका से घिर जाता है और ऐसे व्यक्ति स्वयं तो समस्या-ग्रस्त रहते ही हैं तथा दूसरों के लिए समस्या पैदा करते रहते हैं वर्तमान युग की इस बीमारी से निपटने के लिए जरूरी है-धैर्य का विकास हो व कार्य करने की शैली योजनाबद्ध ढंग से अपनायी जाए-

व्यस्त जीवन शैली (Busy Lifestyles) को संतुलित करने के लिए-


आज आपका जीवन कैसा होता जा रहा है

ध्यान, योगाभ्यास, प्राणायाम, जप, स्वाध्याय तथा चिंतन-मनन जैसी सरल क्रियाओं के द्वारा आपके जीवन अस्त-व्यस्तता से निजात पायी जा सकती है अति अस्त-व्यस्तता व्यक्ति को चिड़चिड़ा व क्रोधी बना देती है तब शांत चित्त और मधुर व्यवहार के द्वारा इस व्याधि से सहज ही छुटकारा पा सकते हैं और इसके लिये जरूरी है व्यक्ति का स्वयं पर अनुशासन हो-अस्त-व्यस्त जीवन शैली को व्यवस्थित व संतुलित करने के लिए व्यक्ति अपने जीवन (Life) में प्रवृत्ति के साथ निवृत्ति की आदत डालें-हर समय काम ही काम नहीं बल्कि अकाम भी जरूरी है इससे उसकी जीवनशैली व्यवस्थित होगी तथा जीवन को एक नई दिशा व नया आलोक मिलेगा-

मन की उथल-पुथल (Upheaval of Mind) से पार पायें-


क्या आप दुनिया को जीतना चाहते है ? क्या आप अपने आप को अब तक जीत पाए है ? यदि नहीं तो सबसे पहले आपको स्वयं को जीतना चाहिए और मान लीजिये आपने दुनियां जीत भी ली सब कुछ प्राप्त कर लिया तो आप फिर भी अधूरे है क्यूंकि आप खुद को नहीं जीत पाये तो फिर आपका जीवन सार्थक कहाँ रहा है-

आज के आधुनिक जीवन में सबसे बड़ी समस्या तो मन की उथल-पुथल से पार पाने की है हम जितना आराम और सुख चाहते हैं आज के प्रचलित आधुनिक सुख-साधनों से तो आपका मन और भी अशांत हो रहा है-सुख-साधन से घर तो भर गया है आगे-पीछे नौकर-चाकर-बगलें-गाडी सब कुछ तो प्राप्त कर लिया मगर एक बार शांति पूर्वक सोचे-क्या यही आपका मानसिक और आत्मिक सुख है आप अब खुद को सुखी कह सकते है आपको ये सब पाकर सिर्फ शरीरिक सुख ही तो मिल पा रहा है लेकिन मानसिक सुख मिला क्या ?

सच तो ये है कि हर अस्त-व्यस्त इंसान महसूस करता है कि उसे लंबे अर्से से सुकून नहीं मिला है ये सुख चैन आपको किसी भी तरह के से धन से खरीद कर नहीं मिलेगा हाँ शरीरिक सुख मिल सकता है लेकिन आत्मिक सुख तो आपसे कोसों दूर है-

इंसान की जीवन-शैली का तो यही हाल बन गया है कि रात को बारह बजे तक जागना और सुबह नौ बजे तक सोना फिर काम की आपाधापी में पड़ जाना और काम इतना कि खुद के लिए भी समय ना मिलना-बस आपका यही जीवन है आप जीवन में सिर्फ शारीरिक सुख के लिए दौड़ लगा रहे है आत्मिक और मानसिक सुख तो आपके पास अब कहाँ है ?

ईश्वर की दी गई जिन्दगी का कोई भी लम्हा मामूली नहीं होता है हर पल वह हमारे लिये कुछ-न-कुछ नया प्रस्तुत करता रहता है इसके लिये जरूरी है कि हम रोज स्वयं को अनुशासित करने का प्रयास करते रहे-स्वस्थ और संतुलित जीवन-शैली के लिए जरूरी है दोनों के बीच संतुलन स्थापित होना है और संतुलन के लिये जरूरी है "ध्यान" का कुछ क्षण-जिसे आप करना ही नहीं चाहते है-स्मार्ट युग में मोबाइल ही से आपको फुर्सत कहाँ है-

आप एक बार अवश्य सोचे कि स्मार्ट फोन से रिश्ते बना कर आपने वास्तविक रिश्तों को तो दरकिनार कर दिया है साथ ही साथ अपने शरीर के लिए घातक रेडियेशन के रूप में मन-मष्तिष्क को भी अपंग बना चुके है-

ध्यान (Meditation) से मिलती है आत्म संतुष्टि-


ध्यान एक ऐसी प्रक्रिया है जो हमें सुख शांति प्रदान करती है यदि वास्तव में आपको जिंदगी में सुकून चाहिए तो ध्यान को अपने दैनिक जीवन के साथ अवश्य ही जोड़ें-यह आपको सुकून तो देगा ही तथा आपके जीवन जीने का अंदाज ही बिलकुल बदल देगा आप सिर्फ एक बार जीवन में इसकी शुरुवात करके अनुभव करे और जो आपको आत्मिक संतुष्टि आज तक नहीं मिली है उसे अवश्य ही प्राप्त करे-


उत्तम विकल्प वैकल्पिक चिकित्साए-


1- ध्यान व मेडिटेशन्स के साथ साथ आयुर्वेदीक मसाज, शिरोधारा तथा हेड मसाज भी शरीर को आराम व ताजगी देने में उपयुक्त है-

2- नैसर्गिक चिकित्सा की बात करे तो एक्यूप्रेशर, म्यूजिक थेरापी जिसमे अलग अलग शास्त्रीय राग तथा म्यूजिक इंस्ट्रूमेंट्स को सुनना, सक्रिय ध्यान वगेरे विकल्प भी तन व मन को तनाव मुक्त करने में बेहद कारगर है-

3- बेचफ्लॉवर रेमेडीज मानसिक व भावनात्मक तकलीफ़ों को दूर करने में तथा सकारात्मक सोच व जीवन मे एक लयबद्धता लाने में आश्चर्य जनक लाभ देने वाली चिकित्सा है अगर नियमित व धैर्य से इसे किया जाए तो मन के सारे नेगेटिव इमोशन्स दूर होकर मन प्रसन्न तथा शांत रहता है जिससे जीवन के प्रति हमारा नजरिया बदलता है, अच्छी नींद आती है,भावनात्मक उलझने कम होने से शरीर व मन मे ताजगी तथा उत्साह बढ़ता है व नई ऊर्जा का संचार होता है-

प्रस्तुती- Satyan Srivastava

Upcharऔर प्रयोग की सभी पोस्ट का संकलन

loading...

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

Tags Post

Information on Mail

Loading...