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29 जुलाई 2015

बुधि वर्धक और मस्तिष्क को शक्तिशाली बनाये -

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मस्तिष्क को शक्तिशाली बनाने के लिए कुछ प्रयोग नीचे दिए जा रहे है इनमे से आप किसी एक का भी प्रयोग करके लाभ ले -



बबूल का गोंद आधा किलो शुद्ध गौ घृत में तल कर फूले निकाल लें और ठण्डे करके बारीक पीस लें। इसके बराबर मात्रा में पिसी मिश्री व पांच ग्राम दालचीनी का पाउडर इसमें मिला लें। बीज निकाली हुई मुनक्का 250 ग्राम और बादाम की छिली हुई गिरी 100 ग्राम-दोनों को खल बट्टे (इमाम दस्ते) में खूब कूट-पीसकर इसमें मिला लें और कांच के बर्तन में ढक्कन बन्द कर रखें।

अब आप इसे सुबह नाश्ते के रूप में इसके दो चम्मच खूब चबा-चबा कर खाएं। साथ में एक गिलास मीठा दूध घूंट-घूंट करके पीते.रहे।इसके बाद जब खूब अच्छी भूख लगे तभी भोजन करें। इस प्रयोग से मस्तिष्क को बल मिलता है और याददास्त भी अच्छी होती है -छात्र-छात्राओं के साथ दिमागी महनत करने वाले भी इसका प्रयोग करके लाभ प्राप्त करें।

चार-पांच बादाम की गिरी पीसकर गाय के दूध और मिश्री में मिलाकर पीने से भी मानसिक शक्ति बढ़ती है।

ब्राह्मी, शंखपुष्पी, वच, असगंध, जटामांसी, तुलसी समान मात्रा में लेकर चूर्ण का प्रयोग नित्य प्रतिदिन दूध के साथ करने पर मानसिक शक्ति, स्मरण शक्ति में वृध्दि होती है।

देशी गाय का शुध्द घी, दूध, दही, गोमूत्र, गोबर का रस समान मात्रा में लेकर गरम करें। घी शेष रहने पर उतार कर ठंडा करके छानकर रख लें। यह घी ‘पंचगव्य घृत’ कहलाता है। रात को सोते समय और प्रात: देशी गाय के दूध में 2-2 चम्मच पिघला हुआ पंचगव्य घृत, मिश्री, केशर, इलायची, हल्दी, जायफल, मिलाकर पिएं। इससे बल, बुध्दि, साहस, पराक्रम, उमंग और उत्साह बढ़ता है। हर काम को पूरी शक्ति से करने का मन होता है और मनोवांछित फलों की प्राप्ति होती है।

ब्रह्मी दिमागी शक्ति बढाने की मशहूर जडी-बूटी है। इसका एक चम्मच रस नित्य पीना हितकर है। इसके ७ पत्ते चबाकर खाने से भी वही लाभ मिलता है। ब्राह्मी मे एन्टी ओक्सीडेंट तत्व होते हैं जिससे दिमाग की शक्ति घटने पर रोक लगती है।

बादाम 9 नग रात को पानी में गलाएं।सुबह छिलके उतारकर बारीक पीस कर पेस्ट बनालें। अब एक गिलास दूध गरम करें और उसमें बादाम का पेस्ट घोलें।  इसमें ३ चम्मच शहद भी डालें।भली प्रकार उबल जाने पर उतारकर मामूली गरम हालत में पीयें। यह मिश्रण पीने के बाद दो घंटे तक कुछ न लें। यह स्मरण शक्ति वृद्दि करने का जबर्दस्त उपचार है। दो महीने तक करें।

अखरोट  जिसे अंग्रेजी में वालनट कहते हैं स्मरण शक्ति बढाने में सहायक है। नियमित उपयोग हितकर है। 20 ग्राम वालनट और साथ में 10 ग्राम किशमिस लेना चाहिये।

जिन फ़लों में फ़ास्फ़ोरस तत्व पर्यात मात्रा में पाया जाता है वे स्मरण शक्ति बढाने में विशेषतौर पर  उपयोगी होते है।  अंगूर ,खारक ,अंजीर एवं संतरा दिमागी ताकत बढाने के लिये नियमित उपयोग करना चाहिये।

दालचीनी का पावेडर बनालें। 10 ग्राम पावडर शहद में मिलाकर चाटलें। कमजोर दिमाग की अच्छी दवा है।

आंवला का रस एक चम्मच 2 चम्मच शहद मे मिलाकर उपयोग करें। भुलक्कड पन में आशातीत लाभ होता है।

अदरक ,जीरा और मिश्री  तीनों को पीसकर लेने से कम याददाश्त की स्थिति में लाभ होता है।

काली मिर्च का पावडर एक चम्मच असली घी में मिलाकर उपयोग करने से याददाश्त में इजाफ़ा होता है।

दूध और शहद मिलाकर पीने से भी याद दाश्त में बढोतरी होती है। विद्ध्यार्थियों के लिये फ़ायदेमंद उपचार है।250 मिलि गाय के दूध में 2 चम्मच शहद मिलाकर उपयोग करना चाहिये।

 गाजर में एन्टी ओक्सीडेंट तत्व होते हैं। इससे रोग प्रतिरक्छा प्राणाली ताकतवर बनती है।  दिमाग की ताकत बढाने के उपाय के तौर पर इसकी अनदेखी नहीं करना चाहिये।

तुलसी के 9 पत्ते ,गुलाब की पंखुरी और काली मिर्च नग एक  खूब चबा -चबाकर खाने से दिमाग के सेल्स को ताकत मिलती है।

आम रस (मेंगो जूस) मेमोरी बढाने में विशेष सहायक माना गया है। आम रस में २ चम्मच शहद मिलाकर लेना उचित है।

उपचार और प्रयोग -

रहस्यमयी मंदिर-

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हमारा भारत एक प्राचीनतम सभ्यता वाला सांस्कृतिक देश हैं. यह विश्व के उन गिने-चुने देशों में से एक है जहां हर वर्ग और समुदाय के लोग शांतिपूर्वक रहते हैं. यहां की भगौलिक स्थिति, जलवायु और विविध संस्कृति को देखने के लिए ही विश्व के कोने-कोने से पर्यटक पहुंचते हैं. वैसे अपनी भारत यात्रा के दौरान पर्यटकों को जो चीज सबसे ज्यादा पसंद आती है तो वह हैं भारत की प्राचीनतम मंदिर. मंदिरों की बनावट, विशेषता, महत्व और इतिहास आदि जानने के लिए ही पर्यटक बार-बार भारत की ओर रुख करते हैं. इनमें से कई मंदिर तो ऐसे भी हैं जो कई हजारों साल पुराने हैं और जिनके बारे में जानना पर्यटकों के लिए कौतुहल का विषय है. आइए ऐसे ही मंदिरों पर प्रकाश ड़ालते हैं-


करनी माता का मंदिर:-
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राजस्थान में बीकानेर से 30 किलोमीटर की दूरी पर स्थित देशनोक शहर में करनी माता का मंदिर है. यहां पहुंचने पर आपको इंसानों से ज्यादा शायद आपको चूहे नजर आएंगे. मान्यता है कि ये चूहे मंदिर में स्थित करनी माता की संतानें और वंशज हैं.

लोक कथाओं के अनुसार करनी माता, देवी दुर्गा की अवतार मानी जाती हैं जो बचपन से ही लोक कल्याण करने लगी थीं इसलिए उनका नाम करनी माता पड़ गया. ऐसी मान्यता है कि करनी माता के सौतेले बेटे की मृत्यु हो जाने पर माता ने यमराज को उनके बेटे को जीवित करने का आदेश दिया. माता के आदेशानुसार उनका बेटा जीवित तो हो गया लेकिन वह चूहा बन गया. माता ने जिस जगह अपना देह त्याग किया वहीं आज करनी माता का मंदिर बना है और मंदिर में हजारों चूहे खुलेआम घूमते नजर आते हैं.


हडिंबा देवी मंदिर (हिमाचल प्रदेश):-
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मनाली में हडिंबा देवी मंदिर, भारत के प्रसिद्ध मंदिरों में से एक है. इस मंदिर का आकर्षण इसकी संरचना है जिसे जापान की एक शैली ‘पगोडा’ से लिया गया है. यह पूरा मंदिर लकड़ी से बनाया गया है. पुरातत्वविदों की मानें तो इस मंदिर का निर्माण 1553 में किया था.


शिव मंदिर (वाराणसी, उत्तर प्रदेश): -
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आपको जानकार हैरानी होगी कि इस मंदिर का निर्माण किसी पहाड़ या समतल जगह पर नहीं किया गया है बल्कि यह मंदिर पानी पर बना है. कहने का अर्थ है कि यह शिव मंदिर आंशिक रूप से नदी के जल में डूबा हुआ है. बगल में ही सिंधिया घाट ,  जिसे शिन्दे घाट भी कहते हैं, इस मंदिर की शोभा बढ़ाता है. इस मंदिर में आध्यात्मिक कार्य नहीं होते और यह फिलहाल बंद है. इस मंदिर के बारे में जानने के लिए आज भी लोग जिज्ञासा रखते हैं.


ब्रह्मा मंदिर (पुष्कर, राजस्थान):-
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यह भगवान ब्रह्मा का एकमात्र ऐसा मंदिर है जिसे पूरे विश्व में जाना जाता है. कहा जाता है कि मुगल शासक औरंगजेब के शासन काल में मंदिरों को नष्ट करने के आदेश के बाद जो एकमात्र मंदिर बचा था वह यही है. इस मंदिर का निर्माण 14वीं शताब्दी में किया गया था. इसके निर्माण को लेकर कई रोचक कथाएं कही जाती हैं. मंदिर के बगल में ही एक मनोहर झील है जिसे पुष्कर झील के नाम से जाना जाता है. पुष्कर झील हिन्दुओं के एक पवित्र स्थान के रूप में जानी जाती है.


चाइनीज काली मंदिर (कोलकाता):-
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कोलकाता के टांगरा में एक 60 साल पुराना चाइनीज काली मंदिर है. इस जगह को चाइनाटाउन भी कहते हैं. इस मंदिर में स्थानीय चीनी लोग पूजा करते हैं. यहीं नहीं दुर्गा पूजा के दौरान प्रवासी चीनी लोग भी इस मंदिर में दर्शन करने आते हैं. यहां आने वालों में ज्यादातर लोग या तो बौद्ध हैं या फिर ईसाई. इस मंदिर की खास बात यह है कि यहां आने वाले लोगों को प्रसाद में नूडल्स, चावल और सब्जियों से बनी करी परोसी जाती है.


स्तंभेश्वर महादेव मंदिर (कावी, गुजरात): -
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आप यह कल्पना नहीं कर सकते लेकिन यह बात सच है कि यह मंदिर पल भर के लिए ओझल हो जाता है और फिर थोड़ी देर बाद अपने उसी जगह वापिस भी जाता है. यह मंदिर अरब सागर के बिल्कुल सामने है और वडोदरा से 40 मील की दूरी पर है. खास बात यह है कि आप इस मंदिर की यात्रा तभी कर सकते हैं जब समुद्र में ज्वार कम हो. ज्वार के समय शिवलिंग पूरी तरह से जलमग्न हो जाता है.


ओम बन्ना मंदिर (जोधपुर, राजस्थान ):-
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जोधपुर में ओम बन्ना का मंदिर अन्य सभी मंदिरों से बिल्कुल् ही अलग है. ओम बन्ना मंदिर की विशेषता है कि इसमें पूजा की जाने वाले भगवान की मूर्ति नहीं है बल्कि एक मोटरसाइकिल और उसके साथ ही ओम सिंह राठौर की फोटो रखी हुई है, लोग उन्हीं की पूजा करते हैं. इस मोटरसाइकिल के बारे में कहा जाता है कि इसी मोटरसाइकिल से 1991 में ओम सिंह का एक्सिडेंट हो गया था. एक्सिडेंट में ओम सिंह की तत्काल मौत हो गई. लोकल पुलिस मोटरसाइकिल को पुलिस थाने लेकर चली गई लेकिन दूसरे दिन मोटरसाइकिल वापस एक्सिडेंट वाली जगह पर पहुंच गई.

उपचार और प्रयोग-http://www.upcharaurprayog.com

26 जुलाई 2015

पायें स्वस्थ , मजबूत और चमकदार बाल -How to care of hair find healthy

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सुन्दर काले व चमकदार बाल नारी की सुंदरता में चार चाँद लगा देते हैं। पुराने समय में बालों के रखरखाव व निखार के लिए नारियाँ अनेक तरीके इस्तेमाल में लाती थीं- जिनसे बाल वास्तव में ही काले, घने, मजबूत और चमकदार बनते थे -लेकिन आज के युग में कई तरह के साबुन और अन्य चीजों को बालों की सार-संभाल के लिए प्रयोग में लाया जाने लगा है-





बालों के रख रखाव के बारे में कुछ ऐसी महत्वपूर्ण जानकारियाँ देने जा रहे हैं, जिन्हें इस्तेमाल में लाकर बालों को सुदृढ़, काले और चमकदार बनाया जा सकता है....


घी खाएं और बालों के जड़ों में घी मालिश करें।


गेहूं के जवारे का रस पीने से भी बाल कुछ समय बाद काले हो जाते हैं।


तुरई या तरोई के टुकड़े कर उसे धूप मे सूखा कर कूट लें। फिर कूटे हुए मिश्रण में इतना नारियल तेल डालें कि वह डूब जाएं। इस तरह चार दिन तक उसे तेल में डूबोकर रखें फिर उबालें और छान कर बोतल भर लें। इस तेल की मालिश करें। बाल काले होंगे।


नींबू के रस से सिर में मालिश करने से बालों का पकना, गिरना दूर हो जाता है। नींबू के रस में पिसा हुआ सूखा आंवला मिलाकर सफेद बालों पर लेप करने से बाल काले होते हैं।


बर्रे(पीली) का वह छत्ता जिसकी मक्खियाँ उड़ चुकी हो 25 ग्राम, 10-15 देसी गुड़हल के पत्ते,1/2 लीटर नारियल तेल में मंद मंद आग पर उबालें सिकते-सिकते जब छत्ता काला हो जाये तो तेल को अग्नि से हटा दें. ठंडा हो जाने पर छान कर तेल को शीशी में भर लें. प्रतिदिन सिर पर इसकी हल्के हाथ से मालिश करने से बाल उग जाते हैं और गंजापन दूर होता है.


कुछ दिनों तक, नहाने से पहले रोजाना सिर में प्याज का पेस्ट लगाएं। बाल सफेद से काले होने लगेंगे।


नीबू के रस में आंवला पाउडर मिलाकर सिर पर लगाने से सफेद बाल काले हो जाते हैं।


तिल का तेल भी बालों को काला करने में कारगर है।


आधा कप दही में चुटकी भर काली मिर्च और चम्मच भर नींबू रस मिलाकर बालों में लगाए। 15 मिनट बाद बाल धो लें। बाल सफेद से काले होने लगेंगे।


नीम का पेस्ट सिर में कुछ देर लगाए रखें। फिर बाल धो लें। बाल झड़ना बंद हो जाएगा।


चाय पत्ती के उबले पानी से बाल धोएं। बाल कम गिरेंगे।


बेसन मिला दूध या दही के घोल से बालों को धोएं। फायदा होगा।


दस मिनट का कच्चे पपीता का पेस्ट सिर में लगाएं। बाल नहीं झड़ेंगे और डेंड्रफ (रूसी) भी नहीं होगी।


50 ग्राम कलौंजी 1 लीटर पानी में उबाल लें। इस उबले हुए पानी से बालों को धोएं। इससे बाल 1 महीने में ही काफी लंबे हो जाते हैं।


नीम और बेर के पत्तो को पानी के साथ पीसकर सिर पर लगा लें और इसके 2-3 घण्टों के बाद बालों को धो डालें। इससे बालों का झड़ना कम हो जाता है और बाल लंबे भी होते हैं।


लहसुन का रस निकालकर सिर में लगाने से बाल उग आते हैं।


सीताफल(शरीफा ) के बीज और बेर के बीज के पत्ते बराबर मात्रा में लेकर पीसकर बालों की जड़ों में लगाएं। ऐसा करने से बाल लंबे हो जाते हैं।


10 ग्राम आम की गिरी को आंवले के रस में पीसकर बालों में लगाना चाहिए। इससे बाल लंबे और घुंघराले हो जाते हैं।


शिकाकाई और सूखे आंवले को 25-25 ग्राम लेकर थोड़ा-सा कूटकर इसके टुकड़े कर लें। इन टुकड़ों को 500 ग्राम पानी में रात को डालकर भिगो दें। सुबह इस पानी को कपड़े के साथ मसलकर छान लें और इससे सिर की मालिश करें। 10-20 मिनट बाद नहा लें। इस तरह शिकाकाई और आंवलों के पानी से सिर को धोकर और बालों के सूखने पर नारियल का तेल लगाने से बाल लंबे, मुलायम और चमकदार बन जाते हैं।


ककड़ी में सिलिकन और सल्फर अधिक मात्रा में होता है जो बालों को बढ़ाते हैं। ककड़ी के रस से बालों को धोने से तथा ककड़ी, गाजर और पालक सबको मिलाकर रस पीने से बाल बढ़ते हैं। यदि यह सब उपलब्ध न हो तो जो भी मिले उसका रस मिलाकर पी लें। इस प्रयोग से नाखून गिरना भी बन्द हो जाता है।


कपूर कचरी 100 ग्राम, नागरमोथा 100 ग्राम, कपूर तथा रीठे के फल की गिरी 40-40ग्राम, शिकाकाई 250 ग्राम और आंवले 200 ग्राम की मात्रा में लेकर सभी का चूर्ण तैयार कर लें। इस मिश्रण के 50 ग्राम चूर्ण में पानी मिलाकर लुग्दी(लेप) बनाकर बालों में लगाना चाहिए। इसके पश्चात् बालों को गरम पानी से खूब साफ कर लें। इससे सिर के अन्दर की जूं-लींकें मर जाती हैं और बाल मुलायम हो जाते हैं।


गुड़हल के फूलों के रस को निकालकर सिर में डालने से बाल बढ़ते हैं।


गुड़हल के ताजे फूलों के रस में जैतून का तेल बराबर मिलाकर आग पर पकायें, जब जल का अंश उड़ जाये तो इसे शीशी में भरकर रख लें। रोजाना नहाने के बाद इसे बालों की जड़ों में मल-मलकर लगाना चाहिए। इससे बाल चमकीले होकर लंबे हो जाते हैं।


बालों को छोटा करके उस स्थान पर जहां पर बाल न हों भांगरा के पत्तों के रस से मालिश करने से कुछ ही दिनों में अच्छे काले बाल निकलते हैं जिनके बाल टूटते हैं या दो मुंहे हो जाते हैं।


त्रिफला के चूर्ण को भांगरा के रस में 3 उबाल देकर अच्छी तरह से सुखाकर खरल यानी पीसकर रख लें। इसे प्रतिदिन सुबह के समय लगभग 2 ग्राम तक सेवन करने से बालों का सफेद होना बन्द जाता है तथा इससे आंखों की रोशनी भी बढ़ती है।


आंवलों का मोटा चूर्ण करके, चीनी के मिट्टी के प्याले में रखकर ऊपर से भांगरा का इतना डाले कि आंवले उसमें डूब जाएं। फिर इसे खरलकर सुखा लेते हैं। इसी प्रकार 7भावनाएं (उबाल) देकर सुखा लेते हैं। प्रतिदिन 3 ग्राम की मात्रा में ताजे पानी के साथ सेवन से करने से असमय ही बालों का सफेद होना बन्द जाता है। यह आंखों की रोशनी को बढ़ाने वाला, उम्र को बढ़ाने वाला लाभकारी योग है।


भांगरा, त्रिफला, अनन्तमूल और आम की गुठली का मिश्रण तथा 10 ग्राम मण्डूर कल्क व आधा किलो तेल को एक लीटर पानी के साथ पकायें। जब केवल तेल शेष बचे तो इसे छानकर रख लें। इसके प्रयोग से बालों के सभी प्रकार के रोग मिट जाते हैं।


250 ग्राम अमरबेल को लगभग 3 लीटर पानी में उबालें। जब पानी आधा रह जाये तो इसे उतार लें। सुबह इससे बालों को धोयें। इससे बाल लंबे होते हैं।


त्रिफला के 2 से 6 ग्राम चूर्ण में लगभग 1 ग्राम का चौथा भाग लौह भस्म मिलाकर सुबह-शाम सेवन करने से बालों का झड़ना बन्द हो जाता है।


खट्टी दही में चुटकी भर ‍िफटकरी मिला लें,साथ ही थोड़ी सी हल्दी भी मिला लें। इस मिश्रण को सिर के बालों में लगाने से सिर की गंदगी तो दूर होती ही,साथ ही सिर में फैला संक्रमण भी दूर होता है। इस क्रिया को करने से सिर के बाल निखर उठते हैं।


बालों को धोने के बाद गोलाकार कंघी से बालों में भली प्रकार से ब्रश करना चाहिए। इसके बाद सिर के बालों की जड़ों में उंगली घुमाते हुए अपना हाथ ऊपर से नीचे की ओर ‍िफराएँ। ऐसा करने से आपके बाल हमेशा मुलायम बने रहेंगे।


भूलकर भी अपने सिर के बालों के साथ ज्यादा एक्सपेरिमेंट न करें। ऐसा करने से बाल कमजोर होकर असमय टूटने लगते हैं।


बालों की साफ-सफाई में लापरवाही न बरतें। याद रखें कि पसीना बालों की जड़ों में पहुँचने पर बालों को नुकसान पहुँचाता है। इससे बचने के लिए हफ्ते में कम से कम दो बार बालों की सफाई जरूर करें।


तीन चम्मच बेसन में डेढ़ गिलास पानी मिला कर इसे सिर के बालों में आधा घन्टे तक लगाए रखें। इसके बाद बालों को गुनगुने पानी से धो डालें। सूखने पर अच्छी तरह से बालों को झाड़ लें। ऐसा करने से सिर में लगे बेसन के कण अच्छी तरह से सिर के बालों से निकल जाते हैं और बाल चमकदार लगने लगते हैं।


लंबे बालों के लिए आंवले का रस और तिल का तेल बराबर मात्रा मिलाकर तब तक गर्म करें जब तक उसमें का पानी ना जल जाए। इसे ठंड़ा कर के शीशी में भरकर रख लें और नियमित रुप से बालों में लगाएं इससे सिर ठंडा तथा बाल लंबे, काले व मजबूत बोते हैं। बाजार में बिकने में वाले तेल केमिकल युक्त होने के कारण बालों के लिए हानिकारक हो सकते हैं। साथ ही बाल धोने के लिए सुखे आंवले को रात में भिगों दे फिर उसी से बाल धोएं। इससे बाल मजबूत व मुलायम होते हैं।

उपचार और प्रयोग -

रहस्मयी अनोखे खज़ाने जो आज भी रहस्य है-

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खजानों की खोज का विचार हमेशा से इंसानी दिमाग में आता रहा है। बहुत से लोगों ने इस तरह की खोजों में अपना जीवन लगा दिया। ऐसे कुछ खजाने खोज भी लिए गए लेकिन कुछ खजाने केवल किवदंतियां बन कर रह गए।

इस दुनिया में सैंकड़ों ऐसे खजाने दबे और छुपे हुए हैं जो कभी किसी काल में खो गए थे। इस तरह के खजाने या तो जानबूझ कर छुपाए गए या फिर दुर्घटनावश वह खो गए। समुद्र के गर्भ में, पहाडियों को चोटी पर, पूजा घरों में, कुओं में, महलों में, और भी जाने कहां कहां इन खजानों को छुपाने का प्रयास किया गया था। भारत में भी ऐसे खजाने और उनकी कहानियों की कोई कमी नहीं है।

हम आपको बताएंगे भारत के ऐसे कुछ खोए हुए खजानों के बारे में जिनकी कहानी भी बेहद दिलचस्प है। हालांकि इनमें से कौन सी कहानी सच्ची है और कौन सी कल्पना इसके बारे में ठीक-ठीक कुछ कहा नहीं जा सकता।


चारमीनार की सुरंग का खजाना:-
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ऐसा माना जाता है कि कभी ऐतिहासिक गोलकुंडा किला और चारमीनार के बीच 15 फुट चौड़ी और 30 फुट ऊंची एक भूमिगत सुरंग थी। इस सुरंग को सुल्तान मोहम्मद कुली कुतुब शाह ने बनवाया था। और माना जाता है कि इस सुरंग में शाही परिवार ने अपना शाही खजाना छिपाकर रखा था जो स्‍थानीय किस्सों के अनुसार आज भी यहां मौजूद है।

सुल्तान ने यूं तो इस सुरंग को इसलिए बनवाया था कि मुश्किल वक्त में जान बचाई जा सके लेकिन बाद में इस सुरंग में उन्होंने गुप्त तहखाने भी बनवाए जिनमें उन्होंने खरबों रुपये के खजाने को छुपा दिया। सैंकडों सालों तक पैसा, सोना, चांदी और अन्य बहुमूल्य रत्न जमा किए गए थे और फिर इस सुरंग में दफना दिए गए। 1936 में निजाम मीर ओसमान अली ने एक सर्वे कराया था और साथ ही नक्शा भी बनवाया था। हालांकि उस दौरान यहां खुदाई नहीं कराई गई थी।

इस खजाने का रहस्य अभी तक भी सुलझ नहीं पाया है और इसके सुलझने की संभावना भी कम ही है लेकिन भी भी इसमें लोगों की दिलचस्पी बनी हुई है।


पद्मनाभ मंदिर का खजाना:-
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आज-कल फिलहाल में जिस खजाने की चर्चा सबसे ज्यादा हुई थी वह था पद्मनाभ स्वामी मंदिर का खजाना। माना जाता है कि करीब एक लाख करोड़ का खजाना अभी तक वहां मिल चुका है जबकि इससे कहीं अधिक वहां के तहखानों में बंद है।

कहा जाता है कि 10 वीं शताब्दी में आए राजवंश ने इस मंदिर का निर्माण कराया था। कहीं-कहीं इस मंदिर के 16वीं शताब्दी के होने का भी जिक्र है। इसके बाद 1750 में त्रावणकोर के एक योद्धा मार्तंड वर्मा ने आसपास के इलाकों को जीत कर संपदा बढ़ाई।

त्रावणकोर के शासकों ने शासन को दैवीय स्वीकृति दिला दी थी और राज्य भगवान को समर्पित कर दिया था। मंदिर से भगवान विष्णु की एक मूर्ति भी मिली है जो शालिग्राम पत्थर से बनी हुई है।

मार्तंड वर्मा ने पुर्तगाली समुद्री बेडे और उसके खजाने पर भी कब्जा कर लिया था। यूरोपीय लोग मसालों खासकर काली मिर्च के लिए भारत आते थे। त्रावणकोर ने इस व्यवसाय पर पूरी तरह से कब्जा कर लिया था।

यह मंदिर एक ऐसे इलाके में बना हुआ है जहां कभी कोई विदेशी हमला नहीं हुआ। 1790 में टीपू सुल्तान ने मंदिर पर कब्जे की कोशिश की थी लेकिन कोच्चि में उसे हार का सामना करना पड़ा था।

1991 में त्रावणकोर के अंतिम महाराजा बलराम वर्मा की मौत हो गई। 2007 में एक पूर्व आईपीएस अधिकारी सुंदरराजन ने एक याचिका कोर्ट में दाखिल कर राज परिवार के अधिकार को चुनौती दी। 2011 में सुप्रीम कोर्ट ने तहखाने खोलकर खजाने का ब्यौरा तैयार करने को कहा।

27 जून 2011, यही वो तारीख थी जब तहखाने खोलने का काम शुरू किया गया। तहखाने खुले तो लोगों की आंखे खुली रह गई। पांच तहखानों में करीब एक लाख करोड़ की संपत्ति निकली है जबकि एक तहखाना अभी भी नहीं खोला गया है। उस तहखाने को जोड़कर कई अंधविश्वास जनित कहानियां सुना दी गईं!

माना जा रहा है कि इस तहखाने में जितना खजाना है वह इस पूरे खजाने से बड़ा है। सोचिए उस तहखाने से क्या निकलेगा? क्या यही है दुनिया का सबसे बड़ा खजाना.?


सोनगुफा का खजाना:-
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बिहार के राजगीर में भी खजाना दबे होने की बात कही जाती है। यहां की पहाड़ियों में सोन गुफा का महत्व बेहद खास है। माना जाता है कि इन पहाड़ियों के सीने में दफन है बेशुमार सोना।

कहा जाता है कि यह जगह महाभारत कालीन है। किदवंती है कि यहां भीम ने जरासंध का वध किया था। पहले इस जगह को राजगृह कहा जाता था। कालांतर में यह जगह मगध साम्राज्य के आधीन आ गई।

बौद्ध और जैन धर्म को मानने वाले भी इन गुफाओं को पवित्र मानते हैं। भारतीय पुरातत्व विभाग के मुताबिक ये गुफाएं तीसरी-चौथी शताब्दी की हैं। वहां स्थित सरकारी शिलालेखों के मुताबिक यहां रथ के पहियों के निशान मिले थे और शंख भाषा में लिखे कुछ अंश भी मिले थे।
बिम्बिसार को अजातशत्रु ने इसी जगह पर कैद करके रखा था। यहां से लोहे की हथकड़ियां भी मिली थीं। पिप्पल गुफा में भागवान बुद्ध आया करते थे ऐसा भी माना जाता है।

खजाना किसका है और कबसे यहां दबा पड़ा है ऐसे कोई साक्ष्य नहीं मिलते। कोई खजाने को महाभारत कालीन मानता है तो कोई बिम्बिसार और अजातशत्रु का बताता है। ऐसा भी कहा जाता है कि खजाना अजातशत्रु को ना मिल पाए इसलिए उसके पिता बिम्बिसार ने खजाने को गुफाओं की भूलभुलैया में दफना दिया था।

अंग्रेजों ने भी तोप से इन गुफाओं तो उड़ाने की कोशिश की थी लेकिन असफल रहे। तोप के गोले के निशान अभी भी वहां पर मौजूद हैं। माना जाता है कि शंख भाषा में जो लिखा है वही खजाने की असली कुंजी है लेकिन इस भाषा का कोई जानकार इस दुनिया में नहीं है।
गुफाएं पॉलिश की हुईं है और भागवान विष्णु की मूर्ति भी यहां मिली थी। वर्तमान में यह मूर्ति नालंदा संग्रहालय में रखी है।




जयगढ़ के किले का खजाना:-
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राजस्थान के कुछ खजानों की चर्चा समय समय पर होती रही है। इन्हीं में से एक है मान सिंह प्रथम का खजाना। मान सिंह अकबर का सेनापति था। माना जाता है कि 1580 में उन्होंने अफगानिस्तान को जीत लिया था। वहां से मुहम्मद गजनी के खजाने को लेकर वह हिंदुस्तान तो आ गया लेकिन उसने इसके बारे में अकबर को नहीं बताया। उसने इस खजाने को जयगढ़ किले में दफना दिया। यह माना जाता है कि उसने महल के नीचे तहखाने बनाए और खजाने को उसमें भर दिया। कहा तो ये भी जाता है कि 1976 में इमरजेंसी के दौरान पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने भी इस खजाने की तलाश में जान लगा दी , कई महीनों तक खुदाई चलती रही, लेकिन उनकी ये खोज व्यर्थ गई।

हालांकि कुछ लोग कहते हैं कि छह महीने के बाद खुदाई जब रुकी तो ट्रकों का काफिला किले से निकला। दिल्ली जयपुर रोड को आम आदमियों के लिए बंद कर दिया गया और फौजी ट्रकों में खजाने के प्रधानमंत्री आवास तक पहुंचा दिया गया। एक स्थानीय पत्रकार ने RTI के माध्यम से ये जानना चाहा कि क्या सरकार ने वाकई ऐसी कोई खुदाई कराई थी जिसमें खजाना निकला हो। लेकिन सरकार ने इस RTI का कोई संतोषजनक उत्तर नहीं दिया।

इस खजाने को लेकर एक और भी कहानी राजस्थान में प्रचलित है। ऐसा माना जाता है कि मान सिंह ने इस खजाने के बारे में जोधा बाई को बता दिया था। जोधा ने इस खजाने को फतेहपुर सीकरी स्थित एक मंदिर में रखवा दिया था। वक्त की रेत में ये मंदिर दफन हो गया और साथ ही खो गया खजाने का रहस्य भी। स्थानीय लोग मानते हैं कि खजाना अभी भी उसी मंदिर में है।

हिमाचल प्रदेश की कमरुनाग झील का खजाना:-
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हिमाचल प्रदेश की कमरुनाग झील के बारे में माना जाता है कि इसका अंत पाताल में होता है और खजाने की रक्षा करते हैं नाग देवता। मंडी से करीब 60 किलोमीटर की दूरी पर स्थित इस झील को लोग पवित्र मानते हैं। माना जाता है कि अगर इस झील में आभूषण अर्पित किए जाएं तो मनोकामना पूरी होती है। लोग दूर दूर से आते हैं और गहने आदि इस झील को अर्पित कर देते हैं। वह मानते हैं कि उनकी भेंट सीधे देवताओं तक पहुंच जाती है।

मंदिर के इतिहास के बारे में कोई ठीक-ठीक दावा कर पाना मुश्किल है । दावा तो यह भी किया जाता है कि यह झील महाभारत काल की है। यहां एक लकड़ी का मंदिर भी बना है। इस मंदिर में कमरुनाग की एक पुरानी मूर्ति भी रखी है। स्थानीय लोग इस झील को चमत्कारी भी मानते हैं। कहा जाता है कि रात के वक्त झील से गड़गड़ाहट की आवाजें आती हैं और पानी उपर उठ कर मंदिर तक आता है। पानी प्राचीन मूर्ति के चरणों तक आता है और फिर वापस लौट जाता है। हालांकि इसका कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।

सदियों से झील में गहने चढ़ाने की परंपरा चली आ रही है। झील की तलहटी में जमा खजाने का आकार कितना होगा या उसकी कीमत कितनी होगी यह कोई नहीं जानता लेकिन इसकी कीमत अरबों में होगी इसमें कोई दो राय नहीं।

आखिर सदियों से जमा हो रहे गहनों की कीमत इससे कम हो भी कैसे सकती है?

आधारित-(रहस्यमयी हिन्दी उपन्यास एवं कथाये)

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25 जुलाई 2015

लाश को भी बदल देता है डायमंड में-

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यदि आप अपने किसी प्रियजन कि मृत्यु के बाद उसकी यादों को डायमंड के रूप में सहज के रखना चाहे तो आप संपर्क करे रिनाल्डो विल्ली (Rinaldo Willy) से जिनका काम लाशों को डायमंड में परिवर्तित करना है।




जी हाँ यह बात सुनने में बड़ी ही अजीब लग सकती है पर यह है एकदम सत्य-


स्विट्ज़रलैंड के रिनाल्डो विल्ली एक कम्पनी Algordanza चलाते है जहा कि उन्नत तकनीको का प्रयोग करते हुए, इंसान के अंतिम संस्कार के बाद बची राख को डायमंड में परिवर्तित किया जाता है।


Algordanza एक स्विस शब्द है जिसका हिंदी में अर्थ होता है "यादें" ।  कंपनी हर साल लगभग 850 लाशों को डायमंड में तब्दील कर देती है।  इस काम कि कॉस्टिंग डायमंड के साइज़ पर निर्भर करती है जो कि 3 लाख से 15 लाख के बीच बैठती है।

कैसे आया यह विचार :-
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रिनाल्डो विल्ली को ह्यूमन एशेज से डायमंड बनाने का विचार कैसे आया इसकी कहनी भी बड़ी रोचक है। लगभग 10 साल पहले रिनाल्डो के एक टीचर ने उसे एक आर्टिकल पढ़ने को दिया जो कि सेमी कंडेक्टर इंडस्ट्री में प्रयोग होने वाले सिंथेटिक डायमंड के उत्पादन के ऊपर था। उस आर्टिकल में यह बताया गया था कि किस तरह एशेज( राख ) से डायमंड बनाए जा सकते है। रिनाल्डो ने गलती से इसे ह्यूमन एशेज समझ लिया जबकि आर्टिकल में वेजिटेबल एशेज का जिक्र था। रिनाल्डो को यह आईडिया पसंद आया और उसने अपने टीचर से ह्यूमन एशेज को डायमंड में बदलने के ऊपर और जानकारी मांगी। तब टीचर ने उसे बताया कि तुम गलत समझ रहे हो या ह्यूमन एशेज कि नहीं बल्कि वेजिटेबल एशेज कि बात हो रही है। इस अपर रिनाल्डो ने कहा कि अगर वेजिटेबल एशेज को डायमंड में बदला जा सकता है तो ह्यूमन एशेज को क्यों नहीं. ?


टीचर को यह विचार पसंद आया और उसने उस आर्टिकल के लेखक से संपर्क किया , जो कि वही स्विट्ज़रलैंड में रहता था तथा जिसके पास सिंथेटिक डायमंड बनाने कि कुछ मशीने थी। फिर उन्होंने उस आईडिया पर मिल के काम किया और कम्पनी  Algordanza  अस्तित्व में आई।


कैसे बनता है डायमंड : -
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ह्यूमन एशेज से डायमंड बनाने के लिए वो सबसे पहले ह्यूमन एशेज को स्विट्ज़रलैंड स्तिथ अपनी लैब में मंगवाते है। लैब में एक विशेष प्रकिया के द्वारा उस ह्यूमन एशेज से कार्बन को अलग किया जाता है। इस कार्बन को बहुत अधिक तापमान पर गर्म करके ग्रेफाइट में परिवर्तित किया जाता है। फिर इस ग्रेफाइट को एक मशीन में रखा जाता है जहा पर ऐसी कंडीशन बनाई जाती है जैसी कि जमीन के बहुत नीचे होती है यानि कि बहुत अधिक दवाब और बहुत अधिक तापमान। इस कंडीशन में ग्रेफाइट को कुछ महीनो के लिए रखा जाता है जिससे कि वो ग्रेफाइट डायमंड में बदल जाता है।


सिंथेटिक डायमंड और रियल डायमंड में फर्क :-
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रासायनिक संरचना और गुणों के आधार पे सिंथेटिक डायमंड और रियल डायमंड में कोई फर्क नहीं होता है। दोनों कि रासायनिक संरचना और रासायनिक गुण समान होते है।  एक मात्र फर्क इनकी कीमतो में होता है। रियल डायमंड, सिंथेटिक डायमंड से महंगे आते है। इन दोनों डायमंड में फर्क करना बहुत मुश्किल होता है यहाँ तक कि एक अनुभवी ज्वेलर्स भी उनमे फर्क नहीं कर सकता है।  इनमे फर्क करने का एक मात्र तरीका केमिकल स्क्रीनिंग है जो कि लैब में हो सकती है।


वर्ल्ड में इनकी फिलहाल 12 देशों में ब्रांच है, जिनमे से एशिया में 4 (जापान, सिंगापूर, हांगकांग, थाइलैंड) है।   जहा कि आप अपना आर्डर दे सकते है। भारत में फिलहाल ब्रांच नहीं है। Algordanza के टोटल बिज़नस में अकेले जापान का हिस्सा 25 पर्सेंट है। इसके दो कारण है एक तो जापानिओ का अपनों के प्रति कुछ ज्यादा ही लगाव होता है और दूसरा वहाँ अधिकतर लोगो का विधुत शवगृह में अंतिमसंस्कार किया जाता है जिससे कि ह्यूमन एशेज प्राप्त हो जाती है। जबकि वेस्टर्न कन्ट्रीज में अधिकतर शवो को दफनाया जाता है।

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पीलिया क्या है .?

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* जब भी रोगी का यह लगे कि उसका शरीर पीला हो रहा है तथा उसे पीलिया हो सकता है, तो वह पानी की मात्रा बढ़ा दे क्योंकि पानी की मात्रा कम होने पर शरीर से उत्सर्जित होने वाले तत्व रक्त में मिल जाते हैं। इससे व्यक्ति की हालत बिगडऩे लगती है।





* यदि कच्चा पपीता सलाद के रूप में लिया जाए तो भी पीलिया का असर कम होता है। कई लोग यह मानते हैं कि पीलिया के रोगी को मीठा नहीं खाना चाहिए जबकि आयुर्वेद चिकित्सक ऐसा नहीं मानते उनका कहना है कि पीलिया का रोगी गाय के दूध से बना पनीर व छेने का रसगुल्ला आराम से खा सकता है यह रोगी को कोई नुकसान नहीं बल्कि लाभ पहुंचाता है।

* पीलिया का आयुर्वेद में अचूक इलाज है। आयुर्वेद चिकित्सकों के अनुसार यदि मकोय की पत्तियों को गरम पानी में उबालकर उसका सेवन करें तो रोग से जल्द राहत मिलती है। मकोय पीलिया की अचूक दवा है और इसका सेवन किसी भी रूप में किया जाए स्वास्थ्य के लिए लाभदायक ही होता है।

एक और अजमाया हुआ प्रयोग:-
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सरसों के तेल की खली 100 ग्राम का चूर्ण बना लें इस चूर्ण की एक चम्मच मात्रा 100 ग्राम दही में मिलाकर सुबह 8-9 बजे लें स्वाद अनुसार नमक या चीनी भी डाल सकते है एक सप्ताह लगातार लेने से पीलिया मल मार्ग से बाहर निकल जायेगा..लेकिन  घी तेल में तली चीजो से 10 दिनो तक परहेज करें तो सच माने आपका पीलिया एक सप्ताह में पीलिया जड से समाप्त हो जायेगा-

अन्य उपाय :-
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* नाश्ते में अंगूर ,सेवफल पपीता ,नाशपती तथा गेहूं का दलिया लें । दलिया की जगह एक रोटी खा सकते हैं।

* मुख्य भोजन में उबली हुई पालक, मैथी ,गाजर , दो गेहूं की चपाती और ऐक गिलास छाछ लें।

* करीब दो बजे नारियल का पानी और सेवफल का जूस लेना चाहिये।

* रात के भोजन में एक कप उबली सब्जी का सूप , गेहूं की दो चपाती ,उबले आलू और उबली पत्तेदार सब्जी जैसे मेथी ,पालक ।

* रात को सोते वक्त एक गिलास मलाई निकला दूध दो चम्मच शहद मिलाकर लें।

* सभी वसायुक्त पदार्थ जैसे घी ,तेल , मक्खन ,मलाई कम से कम १५ दिन के लिये उपयोग न करें। इसके बाद थौडी मात्रा में मक्खन या जेतून का तैल उपयोग कर सकते हैं। प्रचुर मात्रा में हरी सब्जियों और फलों का जूस पीना चाहिेये। कच्चे सेवफल और नाशपती अति उपकारी फल हैं।

* दालों का उपयोग बिल्कुल न करें क्योंकि दालों से आंतों में फुलाव और सडांध पैदा हो सकती है। लिवर के सेल्स की सुरक्षा की दॄष्टि से दिन में 3-4 बार नीबू का रस पानी में मिलाकर पीना चाहिये।

* मूली के हरे पत्ते पीलिया में अति उपादेय है। पत्ते पीसकर रस निकालकर छानकर पीना उत्तम है। इससे भूख बढेगी और आंतें साफ होंगी।

* धनिया के बीज को रातभर पानी में भिगो दीजिये और फिर उसे सुबह पी लीजिये। धनिया के बीज वाले पानी को पीने से लीवर से गंदगी साफ होती है।

* एक गिलास पानी में एक बड़ा चम्मच पिसा हुआ त्रिफला रात भर के लिए भिगोकर रख दें। सुबह इस पानी को छान कर पी जाएँ। ऐसा 12 दिनों तक करें।

* जौ आपके शरीर से लीवर से सारी गंदगी को साफ करने की शक्‍ति रखता है।

* जब आप पीलिया से तड़प रहे हों तो, आपको गन्‍ने का रस जरुर पीना चाहिये। इससे पीलिया को ठीक होने में तुरंत सहायता मिलती है।

* गोभी और गाजर का रस बराबर मात्रा में मिलाकर एक गिलास रस तैयार करें। इस रस को कुछ दिनों तक रोगी को पिलाएँ।

* रोगी को दिन में तीन बार एक एक प्लेट पपीता खिलाना चाहिए।

* टमाटर पीलिया के रोगी के बहुत लाभदायक होता है। एक गिलास टमाटर के जूस में चुटकी भर काली मिर्च और नमक मिलाएं। यह जूस सुबह के समय लें। पीलिया को ठीक करने का यह एक अच्छा घरेलू उपचार है।

* टमाटर में विटामिन सी पाया जाता है, इसलिये यह लाइकोपीन में रिच होता है, जो कि एक प्रभावशाली एंटीऑक्‍सीडेंट हेाता है। इसलिये टमाटर का रस लीवर को स्‍वस्‍थ्‍य बनाने में लाभदायक होता है।

* इस रोग से पीड़ित रोगियों को नींबू बहुत फायदा पहुंचाता है। रोगी को 20 ml नींबू का रस पानी के साथ दिन में 2 से तीन बार लेना चाहिए।

* आमला मे भी बहुत सारा विटामिन सी पाया जाता है। आप आमले को कच्‍चा या फिर सुखा कर खा सकते हैं। इसके अलावा इसे लीवर को साफ करने के लिये जूस के रूप में भी प्रयोग कर सकते हैं।

* यह एक प्राकृतिक उपाय है जिसेस लीवर साफ हो सकता है। सुबह सुबह खाली पेट 4-5 तुलसी की पत्‍तियां खानी चाहिये।

* नीम के पत्तों को धोकर इनका रस निकाले। रोगी को दिन में दो बार एक बड़ा चम्मच पिलाएँ। इससे पीलिया में बहुत सुधार आएगा।

* पीलिया के रोगी को लहसुन की पांच कलियाँ एक गिलास दूध में उबालकर दूध पीना चाहिए , लहसुन की कलियाँ भी खा लें। इससे बहुत लाभ मिलेगा।

पीलिया में क्या करे परहेज:-
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* पीलिया के रोगियों को मैदा, मिठाइयां, तले हुए पदार्थ, अधिक मिर्च मसाले, उड़द की दाल, खोया, मिठाइयां नहीं खाना चाहिए।

* पीलिया के रोगियों को ऐसा भोजन करना चाहिए जो कि आसानी से पच जाए जैसे खिचड़ी, दलिया, फल, सब्जियां आदि।

उपचार स्वास्थ्य और प्रयोग -

What is jaundice.?

Whenever the patient took it that his body is yellow and the jaundice, it may increase the amount of water excreted from the body because the water content is low, the element gets in the blood. The person's condition does Bigdnhe.





* If raw papaya salad when taken as is also less affected by jaundice. Many believe that the jaundice patient should not eat sweet while Ayurveda practitioner will not accept it, they say, and whey cheese made from cow's milk jaundice patient could eat the dumpling comfort but it does no harm to the patient benefit Fires.

* Jaundice treatment in Ayurveda is unmistakable. According to Ayurveda practitioners consume the sap of the leaves boiled in hot water, so the disease is relieved soon. McCoy jaundice and the unmistakable drug abuse in any form, whether it is only beneficial to health.

Another experiment was Ajmaya: -
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Make the powder of 100 grams of mustard oil cake volume 100 g yogurt mixed with a teaspoon of this powder in the morning, take 8-9 hours a week to taste salt or sugar can also take persistent jaundice will get out of sewer. But fried in ghee oil visitation until 10 days avoided if you will accept jaundice jaundice Judd finished a week Jayega-

Other measures: -
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* Breakfast grapes, Sevfl papaya, and wheat groats Nashpti it. Can eat oatmeal instead of bread.

* In the main dining boiled spinach, Azadirachta, carrots, wheat bread and two glasses of buttermilk a guide it.

* About two o'clock coconut water and juices should Sevfl.

* Dinner, a cup of boiled vegetable soup, wheat two chapatis, boiled potatoes and boiled leafy vegetables like fenugreek, spinach.

* Rubbing out a glass of milk at bedtime, take two teaspoons of honey.

* All fatty foods such as butter, oil, butter, sour cream, do not use for at least 15 days. Then Thudi amount of butter or oil Zetoon can use. Chahieye abundant green vegetables and fruits juice drink. Raw Sevfl and Nashpti very helpful fruit.

* Do not just use pulses because pulses and Sdand ​​can cause swelling in the intestines. Protecting liver cells from the eye 3-4 times a day should drink lemon juice mixed with water.

* The green leaves of radish jaundice is the most viable. It is better to drink juice is extracted by grinding the leaves filter. This will increase hunger and bowel will be clean.

* Coriander seeds soaked in water overnight, please, and then take her morning drink. Coriander seeds, drinking water is clean dirt from the liver.

* A glass of water a tablespoon granulated triphala place for overnight soaking. Visit morning drink this water filter. Make it 12 days.

* Barley whole mess to clean up your body keeps power lever.

* If you're dying of jaundice, you should drink sugar cane juice must. This immediately helps to heal jaundice.

* Cabbage and carrot juice mixed in equal quantities, prepare a glass of juice. Pilaaa the juice for a few days the patient.

* Patients need to be fed three times a day a plate papaya.

* Tomatoes are very beneficial for patients of jaundice. A glass of tomato juice, add a pinch of pepper and salt. Take the juice in the morning. Jaundice is a good home remedies to fix it.

* Vitamin C is found in tomatoes, because it is rich in lycopene, a powerful antioxidant that Heata. Therefore tomato juice is beneficial in creating a healthy liver.

* The disease causes a lot of benefit to patients suffering from lime. The patient 20 ml lemon juice with water three times a day should be 2.

* Amla Vitamin C is found in a single lot. Amle you can eat raw or dried. In addition to cleaning up the lever can be used as juice.

* This is a natural remedy that can clear Jises lever. Early in the morning on an empty stomach should eat 4-5 basil leaves.

* Wash their juice extracted neem leaves. Pilaaa a tablespoon twice a day patient. This will greatly improve jaundice.

* Jaundice patients for five buds of garlic boiled in a glass of milk to drink milk, eat garlic buds too. Will benefit.

What to avoid jaundice: -
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* Jaundice patients flour, sweets, fried foods, more chili spices, urad dal, lost, should not eat sweets.

* Jaundice patients should food that is easily digestible such as cereal, oatmeal, fruits, vegetables.

Fitness health and exercise -

24 जुलाई 2015

क्यों जरुरी और कितनी महत्वपूर्ण है हेल्थ पालिसी -

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अधिकतर लोग हेल्थ पॉलिसी का चुनाव इंश्योरेंस एडवाइजर की सलाह पर करते हैं और ऐसे में वे सही जानकारी से महरूम रह जाते हैं-विशाल जनसंख्या वाले इस देश में ज्यादातर लोगों के पास हेल्थ कवर नहीं है जिनके पास है भी, उनको इसकी सही समझ नहीं होती कि उनके लिए कौन सा हेल्थ कवर ठीक है-




कस्टमर हेल्थ इंश्योरेंस खरीदने में कहां गलती करते हैं -

जी हाँ मैं कस्टमर की गलती के विषय में नहीं बल्कि उनके अपेक्षाओं के बारे में बताना चाहूंगा- ये तीन महत्वपूर्ण बिंदु पर प्रकाश डाल रहा हूं- ज्यादातर उपभोक्ताओं को यह गलतफहमी रहती है कि हेल्थ इंश्योरेंस, हॉस्पिटल में होने वाले खर्च के बराबर होता है- यदि कंपनी की ओर से ग्रुप इंश्योरेंस कराई जाती है तो भी वह समझते हैं कि हेल्थकेयर के लिए सोचने की जरूरत नहीं है- इस तरह की गलती अममून बहुतायत उपभोक्ताओं के साथ देखने को मिलती है-

हेल्थ केयर का कास्ट कुछ सालों के अंदर कई गुणा बढ़ गया है हालांकि हेेल्थ इंश्योरेंस बहुत जरूरी है इसी को देखते हुए कुछ कम्पनियां  'बिगडिसिजन' के माध्यम से लोगों को जानकारी देते हैं कि उनके लिए कौन सा हेल्थ इंश्यारेंस जरूरी है-

यदि आप दूसरी मुख्य बात पर नजर डालें तो लोगों को सही पालिसी की समझ नहीं होती- कई ऐसी पालिसी होती है जो बीमारी को देखते हुए भुगतान करती है- कस्टमर को पालिसी लेने से पहले उससे जुड़ी जानकारियां जुटानी चाहिए या एडवाइजर से जानकारी लेनी चाहिए-

बीमा कंपनियां पैसे बनाने के लिए मार्केट में काम कर रही है वे अपने लाभ को अधिक करने के लिए प्रीमियम अधिक लेना चाहते हैं प्रीमियम की गणनना कस्टमर द्वारा दी गई जानकारी पर आधारित होती है कंपनियां प्रीमियम की गणनना परिवार के इतिहास, तम्बाकू सेवन आदि को देखते हुए तय करती हैं सही जानकारी देकर आप कम प्रीमियम भुगतान करके भी हेल्थ इंश्योरेंस ले सकते हैं-

पालिसी लेने पहला फैसला महत्वपूर्ण है-

यह हर किसी के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है कि वह बीमार होने का इंतजार किए बिना, अपनी जरूरत को देखते हुए हेल्थ पालिसी लेनी चाहिए- जब आप युवा होते हैं तो आपका प्रीमियम कम होता है-उम्र बढऩे के साथ प्रीमियम बढ़ता जाता है- इसलिए प्रीमियम का चुनाव करने के लिए शुरुआती फै सला काफी महत्वपूर्ण होता है अन्यथा पालिसी पर क्लेम का लाभ कम ही मिलता है और आश्चर्य अधिक होता है- आप किसी भी इंश्योंरेस कंपीनी के पास ऐसे इंश्योरेंस लिजिए जिसका प्रीमियम कम हो और सम इंश्योरर्ड ज्यादा हो- इसके साथ ही कोशिश करनी चाहिए कि आपको उसी इंश्योरेंस कंपनी से ज्यादा लाभ मिल सके, जैसे कि अधिक विस्तृत कवर बीमारियों पर और ज्यादा नो-क्लेम बोनस-

आपकी बीमारी में जो खर्च हुआ उसके मुकाबले इंश्योरेंस कंपनी पैसा कम देती है जानते है ऐसा क्यों होता है -


ऐसा उस केस में होता है, जब बिल अमाउंट बीमा पालिसी में दिए हुए एश्योर्ड रकम से अधिक हो जाता है ऐसी हालत में पालिसी-धारक को ही पैसा देना होता है दूसरी स्थिति तब आती है जब खर्च की गई रकम बहुत ही कम होती है और उसे क्लेम नहीं किया जा सकता- इसके अलावा भी कई अन्य कारण हो सकते हैं, जो बेईमानी की ओर इशारा करते हैं-

इलाज का खर्च बहुत ही बढ़ गया है एक आदमी इस बढ़ी हुई महंगाई में हेल्थ इंश्योरेंस कैसे ले-

यही एक ऐसा क्षेत्र है, जिसमें इंसान गलती नहीं कर सकता है तो वह हेल्थ केयर है आपको पता होना चाहिए की कुछ सालों के अंदर ही हेल्थ कास्ट किस तेजी से बढ़ गया है हेल्थ इंश्योरेंस आपको इसमें मदद करता है-

वर्तमान में हेल्थ इंश्योरेंस का दायरा काफी बढ़ गया है जो कि 5-10 साल पहले नहीं हुआ करता था- मान ले कि एक फैमिली मेंबर का हास्पिटल का बिल 10 लाख आया और इंश्योरेंस कावर मात्र तीन लाख रुपए का था-  हेल्थ इंश्योरेंस वास्तव में एक धन संरक्षण उपकरण है- यदि बीमा की रकम कम है तो यह आपके परिवार को कई साल पीछे कर देता है-

कम खर्च में पूरे परिवार का बीमा कैसे लिया जाए-

हेल्थ इंश्योरेंस में दो प्रकार से बीमा किया जाता है- पहला व्यक्तिगत बीमा, जिसमें प्रत्येक व्यक्ति का बीमा होता है और दूसरा पूरे परिवार का बीमा, जिसमें परिवार के सदस्यों की कोई सीमा नहीं होती- यदि आप व्यक्तिगत बीमा कराते हैं और आपके परिवार में 4 लोग हैं और सभी की पालिसी 3 लाख रुपए है तो 12 लाख रुपए की पालिसी आपके पूरे परिवार की हुई- इस बीमा में व्यक्तिगत बीमा कवर 3 लाख रुपया हुआ, जबकि दूसरे केश में सदस्यों की कोई संख्या नहीं है- दूसरे हालात में प्रीमियम परिवार के सबसे बड़े सदस्य को देखते हुए तय किया जाता है- ज्यादातर मामलों में फैमिली फ्लोटर अच्छा होता है न्यूक्लियर फैमिली के मुकाबले, जब परिवार के सबसे बड़े सदस्य की आयु 30 से 40 साल हो- बड़े परिवार व्यक्तिगत पालिसी के मुकाबले फ्लोटर पालिसी अच्छी मानी जाती है-

बीमा पालिसी मुख्य रुप से निवेश के लिए इस्तेमाल होती है इस स्थिति को कैसे सही किया जाए-

हमारे देश के अंदर ज्यादातर लोगों के पास बीमा पालिसी नहीं है और जिनके पास है भी उनका सम एश्योर्ड बहुत ही कम है- जिससे उनके परिवार का गुजर-बसर नहीं चल सकता है- बीमा की रकम कम होने से वे न तो अपने घर का लोन दे सकते हैं न ही कुछ और कर सकते है- इंश्योरेंस सेक्टर में काम कर रही कंपनियों को चाहिए कि वे लोगों को जागरुक करें और सम एश्योर्ड अमाउंट को बढ़ाएं- निवेश के जरिए बचत करना अच्छी बात है, पर इससे आपके परिवार की जरूरत भी पूरी होनी चाहिए-

यदि उपभोक्ता के पास हेल्थ कवर है तो अस्पतालों में ज्यादा चार्ज किया जाता है और उपभोक्ता को अगले साल अधिक प्रीमियम का भुगतान करना होता है-

आपसी  ताल-मेल से बीमा कंपनियों और हास्पिटल्स को साथ बैठकर इस मामले को सुलझाना चाहिए और उपभोक्ताओं के अधिकारों की रक्षा को सुनिश्चित करना चाहिए- उपभोक्ताओं से बिल्कुल सही प्रीमियम लेना चाहिए। किसी की बीमारी से फायदा उठाना बहुत ही बुरी बात है- किसी व्यक्ति से सिर्फ इसलिए ज्यादा चार्ज लेना क्योंकि उसके पास हेल्थ कवर है, बहुत घटिया परंपरा है, इस अवश्य रोक लगनी चाहिए-

अंत में ये कहना है कि उपभोक्ता को अपनी जरूरत को देखते हुए सही पालिसी लेनी चाहिए- इसके लिए आप थोड़ा समय लें और सही तरह से समझने के बाद ही पालिसी का चुनाव करें- इसमें नई कार या फोन खरीदने जैसा रोमांच नहीं हो सकता है, पर इसका महत्व व इसकी कीमत बहुत बड़ी है-

आपका चुनाव और  सही निर्णय आपके जीवन के लिए सही फलीभूत होगा अत:सोचे समझे और फिर पालिसी ले -

Upcharऔर प्रयोग-

टान्सिल उपचार Tonsils Treatment

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गले के प्रवेश द्वार के दोनों तरफ मांस की गांठ सी होती है जिसे हम Tonsils-टॉन्सिल कहते हैं जब इनमे सूजन आ जाती है इसे हम टॉन्सिल(Tonsils) होना कहते हैं ये सूजन कम या ज्यादा हो सकती है इसमें गले में बहुत दर्द होता है इनमें पैदा होने वाली सूजन को टॉन्सिलाइटिस कहा है इसमें गले में बहुत दर्द होता है तथा खाने का स्वाद भी पता नहीं चलता है-


Tonsils


चावल या ज्यादा ठन्डे पेय पदार्थों का सेवन-मैदा तथा ज्यादा खट्टी वस्तुओं का अधिक प्रयोग करना Tonsils-टॉन्सिल बढ़ने का मुख्य कारण है इन सबसे अम्ल (गैस) बढ़ जाती है जिससे कब्ज़ हो जाती है-सर्दी लगने से -मौसम के अचानक बदल जाने से-जैसे गर्म से अचानक ठंडा हो जाना तथा दूषित वातावरण में रहने से भी कई बार टॉन्सिल(Tonsils) बढ़ जाते हैं इस रोग के होते ही ठण्ड लगने के साथ बुखार भी आ जाता है  गले पर दर्द के मरे हाथ नहीं रखा जाता और थूक निगलने में भी परेशानी होती है -

टॉन्सिलाइटिस(Tonsilaitis) दो प्रकार का होता है-

पहला प्रकार-

पहले दोनों ओर की तालुमूल ग्रंथि (Tonsils) या एक तरफ की एक टॉन्सिल, पीछे दूसरी तरफ की टॉन्सिल फूलती है इसका आकार सुपारी के आकार का हो सकता है उपजिह्वा भी फूलकर लाल रंग की हो जाती है खाने-पीने की नली भी सूजन से अवरुद्ध हो जाती है‍ जिससे खाने-पीने के समय दर्द होता है टॉन्सिल का दर्द कान तक फैल सकता है एवं 103-104 डिग्री सेल्सियस तक बुखार चढ़ सकता है तथा जबड़े में दर्द होता है- गले की गाँठ फूलती है मुँह फाड़ नहीं सकता है- पहली अवस्था में अगर इलाज से रोग न घटे तो धीरे-धीरे टॉन्सिल(Tonsils) पक जाता है और फट भी सकता है-

दूसरे प्रकार का-

जिन व्यक्तियों को बार-बार टॉन्सिल(Tonsils) की बीमारी हुआ करती है तो वह क्रोनिक हो जाती है इस अवस्था में श्वास लेने और छोड़ने में भी कठिनाई होती है तथा टॉन्सिल का आकार सदा के लिए सामान्य से बड़ा दिखता है-

टॉन्सिलाइटिस(Tonsilaitis) के कुछ उपचार-

गर्म (गुनगुने ) पानी में एक चम्मच नमक डालकर गरारे करने से गले की सूजन में काफी लाभ होता है-

दालचीनी को पीस कर चूर्ण बना लें -इसमें से चुटकी भर चूर्ण लेकर शहद में मिलाकर प्रितिदिन 3 बार चाटने से टॉन्सिल(Tonsils) के रोग में सेवन करने से लाभ होता है- इसी प्रकार तुलसी की मंजरी के चूर्ण का उपयोग भी किया जा सकता है -

एक गिलास पानी में एक चम्मच अजवायन डालकर उबाल लें अब इस पानी को ठंडा करके उससे गरारे और कुल्ला करने से टॉन्सिल(Tonsils) में आराम मिलता है-

दो चुटकी पिसी हुई हल्दी, आधी चुटकी पिसी हुई कालीमिर्च और एक चम्मच अदरक के रस को मिलाकर आग पर गर्म कर लें और फिर शहद में मिलाकर रात को सोते समय लेने से दो दिन में ही टॉन्सिल की सूजन दूर हो जाती है -

गले में टॉन्सिल(Tonsils) होने पर सिंघाड़े को पानी में उबालकर उसके पानी से कुल्ला करने से आराम होता है -

भोजन में बिना नमक की उबली हुई सब्ज़ियाँ खाने से Tonsils-टॉन्सिल में जल्दी आराम आ जाता है -मिर्च-मसाले , ज्यादा तेल की सब्ज़ी , खट्टी व ठंडी वस्तुओं का सेवन नहीं करना चाहिए -गर्म पदार्थों के सेवन के पश्चात ठंडे पदार्थों का सेवन कदापि न करें-

होमियोपैथी(Homeopathy) इलाज-

साधारण औषधि-

बेराईटा, बेलाडोना, एसिड बेन्जो, बार्बेरिस, कैन्थर, कैप्सिकम, सिस्टस, फेरमफॉस, गुएकेम, हिपर सल्फर, हाईड्रैस्टीस, इग्नेसिया, कैलीबाईक्रोम, लैकेसिस, मरक्युरियस, लाईकोपोडियम, मर्क प्रोटो ऑयोड, मर्क बिन आमोड, नेट्रम सल्फ, एसिड नाइट्रीकम, फाईटोलैक्का, रसटक्स, सालिसिया, सल्फर एवं एसिड सल्फर कारगर दवाएँ हैं-

क्रोनिक की अवस्था में-

200 पोटेन्सी की उपरोक्त लक्षणानुसार दवा बारंबारता से दोहराव करने पर रोग का कुछ महीनों में शमन होता है एवं आरोग्यता आती है-

जो रोगी जो सर्जरी से बचना चाहते हैं या कम उम्र के बच्चे , डायबिटीज अथवा हृदय रोग से पी‍ड़ित रोगी जिन्हें टॉन्सिल्स हैं, एक बार होम्योपैथिक दवाओं का चमत्कार आजमा कर स्वस्थ हो सकते हैं-

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Upcharऔर प्रयोग-

20 जुलाई 2015

सेक्स को सनक न बनाये - Sex Ko Sanak Na Banaye

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जी हाँ खाने के की तरह सेक्‍स भी लाइफ का इंपॉर्टेंट पार्ट है। लेकिन किसी भी चीज की अति अंतत: बुरे परिणाम ही देती है-



कई बार आपने अपने पार्टनर को मन न होने पर भी सेक्‍स के लिए तैयार किया होगा। हालांकि सेक्‍स करने में तभी मजा आता है, जो दोनों तैयार हों। क्‍या आप ज्‍यादातर पार्टनर को उसकी मर्जी के बगैर सेक्‍स के लिए मजबूर करते हैं, तो सोचिए कहीं आपको सेक्स की सनक तो नहीं सवार है।

हर कोई सेक्‍स को अपने तरीके से एंज्‍वॉय करता है। सेक्स में कुछ चीजे जिन्हें आप पसंद करते हों जरूरी नहीं पार्टनर को भी उसमें मजा आता हो। इसलिए कुछ भी नया ट्राइ करने या फिर सिर्फ अपने मजे के लिए कुछ न करें। यदि किसी चीज के लिए पार्टनर इनकार भी कर दे, तो नाराज होने से बेहतर है कि आप उनके मन की बात समझें और सम्मान करें।

सेक्‍स में एनर्जी लेवल बहुत मायने रखता है। हो सकता है कि आपकी एनर्जी लेवल बहुत अधिक हो, लेकिन पार्टनर की भी इतनी ही हो ऐसा जरूरी नहीं है। यदि पार्टनर रोज सेक्स के लिए तैयार न हो या फिर जल्दी थक जातीं हों तो उनका ख्याल रखें। सेक्स में दोनों पार्टनर की खुशी और संतुष्टि मायने रखती है। महीने के कुछ दिनों में औरतें यूं भी सेक्स नहीं करना चाहती हैं। इसलिए ऐसा न हो कि आपकी सनक उनके लिए सजा ही बन जाए।

सेक्स का दर्द हमेशा तकलीफ देता है मजा नहीं। लेकिन कुछ मर्द ऐसा मानते हैं कि सेक्स के दौरान महिलाओं को जितना दर्द दिया जाए उन्हें मज़ा आता है। यह गलत सोच है। कुछ महिलाओं को सेक्स के दौरान दर्द को लेकर यूं भी मनोवैज्ञानिक डर रहता है। वहीं अगर आप उन्हें अपनी तरफ से यही देना चाहेंगे तो उनके लिए बेडरूम बिल्कुल भी आरामदायक जगह नहीं रहेगी।

आपके लिए पॉर्न फिल्म  देखना स्‍वास्‍थ्‍य के लिए हानिकारक साबित होता है, इस बात की तस्‍दीक कई वैज्ञानिक कर चुके हैं। यदि आप भी दिन में कई घंटे मोबाइल पर पॉर्न फिल्में देखकर बिताते हैं औऱ वैसी ही फैंटेसी पाल रहे हैं। तो फिर एक बार आपको सोचने की जरूरत है। पॉर्न फिल्मों में काम करने वाले लोग प्रफेशनल होतें है। अपने पार्टनर से वैसी ही अपेक्षाएं रखना अतार्किक है। इसलिए वाइल्ड फैंटेसी को जीवन में साकार करने की जगह प्यार और आपसी तालमेल को जगह दें।

अश्लीलता देखना और अपने पार्टनर को दिखाना शुरूं में तो अच्छा लगता है लेकिन देखने में आया है कि कुछ समय बाद ये एक आवश्यकता बन जाती है और इसके बगेर आप या आपका पार्टनर उत्तेजित नहीं होता है और आगे चल कर आपकी ये मज़बूरी आपके लिए घातक हो जाती है इसलिए पोर्न से बचे आदत न बनाए -

आप को अपने पार्टनर के मूड  को और तकलीफ को समझना ही आपके  वैवाहिक जीवन को सफल बनाता है न कि आपकी एक सनक...?

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क्या आप तर्जनी ऊँगली से उठा सकते है नब्बे किलो का पत्थर ....?

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जी हाँ क्या आप तर्जनी अंगुली से 90 कि.ग्रा. वजन के पत्थर को अपने सर तक उठा सकते है.?

अमूमन ज्यादा तर लोगों का जबाव नहीं में ही होगा-लेकिन महाराष्ट्र में पुणे स्थित 'बाबा हजरत कमर अली की दरगाह' में यह चमत्कार आप कर सकते है-

यहां अंगुली से 11 भक्त उठाते हैं चमत्कारी पत्थर....!

यहां है चमत्कारी दरगाह-

हजरत कमर अली दरवेश बाबा की दरगाह पुणे-बेंगलुरु हाईवे पर स्थित शिवपुर गांव में है-यहां पर आज से 700 वर्ष पहले सूफी संत हजरत कमर अली को दफनाया गया था-

हजरत कमर अली एक सूफी थे जिनका निधन मात्र 18 साल की उम्र में हो गया था- उन्हें उनकी मृत्यु के पश्चात संत की उपाधि से सम्मानित किया गया था-

इस दरगाह में सूफी संत की चमत्कारिक शक्तियां आज भी मौजूद हैं- यहां दरगाह परिसर में रखा करीब 90 कि.ग्रा. का पत्थर है- यदि इस पत्थर को 11 लोग सूफी संत का नाम लेते हुए अपनी तर्जनी अंगुली (इंडेक्स फिंगर) से उठाते है तो यह पत्थर आसानी से ऊपर उठ जाता है-

लेकिन यदि इस पत्थर को दरगाह परिसर से बाहर ले जाकर उठाएं तो यह टस से मस भी नहीं होता है- भक्त इसका कारण दरगाह में आज भी विधमान हजरत कमर अली दरवेश बाबा की शक्तियों को मानते हैं-

इसके अलावा भी इस पत्थर से एक और रहस्य जुड़ा है यदि लोग तर्जनी अंगुली के अलावा कोई दूसरी अंगुली का इस्तेमाल करें या लोगों की संख्या 11 से कम या ज्यादा हो तो भी पत्थर नहीं हिलता है-

इस दरगाह पर साल भर सभी धर्म, जाति और समुदाय के लोगों का तांता लगा रहता है-ख़ास बात यह है कि अन्य दरगाहों की तरह यहां पर महिलाओं को लेकर कोई बंदिश नहीं है- अन्य धार्मिक स्थलों की तरह यहां भी भक्तों की मान्यता है कि यहां मांगी हुई हर मुराद पूरी होती है-सर्वधर्म समभाव का प्रतीक है -

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19 जुलाई 2015

आप शादी करने जा रहे है -

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सेक्स विज्ञान की जानकारी से लोग पहले परहेज करते थे लेकिन अब समय के परिवर्तन के साथ लोगो में इसकी रूचि बढती जा रही है क्युकि अज्ञानता के कारण पति-पत्नी का सामंजस्य नहीं बेठता है तो कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है -



शादी एक ऐसा बंधन है, जी दो दिलों, दो आत्माओं को एक सूत्र में बांधता है। यह यौन जीवन के शुरूआत की हरी झंडी भी है, जिसका मकसद गृहस्थी व जिम्मेदारियों का संतुलन व विकास लाना होता है। अगर शादी यौन जीवन के शुरुआत की सामजिक व कानूनी स्वीकृति है, तो इसे नजरंदाज करना ठीक नहीं है।

अधिकाश युवक भावी पत्नी को लेकर तरह-तरह के ख्यालों में खोये रहते हैं। उनमें कुछ बातें ऐसी भी होती हैं, जो उन्हें तनाव व दुःख में डुबो देती हैं। जैसे शिश्न के आकार, उत्थान, टेढापन, लिंग पर उभरी नसों का होना, वृषण कोष का आकार, वीर्य की मात्रा व पतलापन, सम्भोग क्षमता, समय, स्त्री जननांगो के बारे में अज्ञानता, सेक्स तकनीक, शीघ्र स्खलन आदि के बारे में सोच-सोचकर वे दुःख में घिर जाते हैं। सौ में से अस्सी  प्रतिशत मामलों में युवक हस्तमैथुन से उपजी काल्पनिक नपुंसकता को लेकर चिंतित रहते हैं।

इसी प्रकार युवतियों में शादी से पूर्व प्रथम शारीरिक संबंध के दौरान होने वाले दर्द रक्तस्त्राव के बारे में चिंता रहती है। कुछ युवतियों में इस बात का भय रहता है की प्रथम शारीरिक संबंध के दौरान काफी दर्द होगा, खून बहेगा.... आदि। इस चिंता के कारण कुछ लड़कियां यौन संबंध के दौरान असहज हो जाती हैं। परिणाम स्वरुप यौन संबंधों में मिलने वाले आनंद के स्थान पर संबंध बनाने में ही दिक्कत आती है। संभावित दर्द व रक्त स्त्राव की कल्पना मात्र से ही लड़की अपने आपको तथा योनि द्वार को इतना कस लेती हैं की संभोग हो पाना ही कठिन हो जाता है।

युवक-युवतियों में ऐसी स्थिति को दूर करने के लिये उन्हें उचित ज्ञान-विज्ञान व तकनीकी को समझाए जाने की जरूरत है। साथ ही उनकी इस धारणा को बदलने की जरूरत है, जो उनमें भय व अंधविश्वास की जड़ है। यहाँ संक्षेप में शादी से पूर्व और शादी के बाद की स्थितियों पर गौर करते हुए कुछ आवश्यक बातों पर प्रकाश डाल रहे हैं, ताकि लड़के-लडकियां इसे आत्मसात करके सहजता से नए यौन-जीवन का सुखद शुभारम्भ कर सकें-

पत्नी के साथ संभोग के लिये मन में उत्साह, शारीरिक सक्रियता, आत्मबल, आत्मविश्वास व आत्मा नियंत्रण आवश्यक है। बाकी बातें गूढ़ हैं, जैसे की शिशन छोटा, टेढा होना, शीघ्र स्खलन आदि। हाँ, पुरूष को स्त्री जननांगों के बारे में जानकारी होनी चाहिए।

उसी प्रकार से दुल्हन को यह बात गाँठ बाँध लेनी चाहिए की प्रथम सहवास के समय जो हल्का-सा दर्द होता है, वह संभोग में मिलने वाले आनंद के मुकाबले में कहीं नहीं ठहरता। दर्द सिर्फ क्षण भर के लिये होता है, फिर गायब हो जाता है। यह कोई ऐसा दर्द नहीं की दुल्हन बेहोश हो जाए।

प्रथम सहवास के दौरान कौमार्य झिल्ली फटती है और रक्तस्त्राव होता है। लेकिन वह मामूली-सा। योनीद्वार पर एक पतली झिल्ली होती है, जिसे हाईमन कहते हैं। योनिद्वार इससे ढका होता है। युवक-युवतियों को यह जान लेना चाहिए की झिल्ली की उपस्थिति का कौमार्य से कोई सीधा संबंध नहीं है। स्कूल-काँलेज में होने वाले खेल-कूद, साइकिल चलाने, दौड़ने आदि के दौरान यह झिल्ली फट सकती है। अतः झिल्ली का फटना कौमार्य नष्ट होना हरगिज नहीं माना जाता चाहिए।

दूल्हा-दुल्हन को प्रथम सहवास के दौरान कमरे में अन्धेरा नहीं रखना चाहिए। अन्धकारक के दौरान दोनों को शारीरिक संरचना (जननांगों के बारे में) का ज्ञान नहीं हो पाता। उसके अलावा अन्धकार के कारण स्त्री-पुरूष को एक-दूसरे से मिलने वाली उत्तेजना तथा आकर्षण का लाभ नहीं मिल पाता।

सुहागरात को कक्ष में प्रवेश करने से पूर्व पुरूष अपने मन में यह संकल्प करके न जाए की उसे हर हाल में दुल्हन के साथ यौन संबंध कायम करना है। यह जरूरी नहीं है की पहली रात में ही यौन संबंध स्थापित किया जाए। यह सब पति-पत्नी की सहमति, इच्छा, वातावरण आदि पर निर्भर करता है। दुल्हन का स्वभाव होता है की वह पहले प्यार चाहती है, फिर सेक्स। पुरूष को उसकी भावनाओं का सम्मान करना चाहिए।

सुहागरात को पति हो या पत्नी, दोनों में से किसी को भी अपने पूर्व संबंधों (अगर भूलवश ऐसा हो) के बारे में चर्चा नहीं करनी चाहिए। विवाहित संबंध परस्पर विश्वास व सहयोग के तालमेल पर टिके होते हैं। इस विश्वास को पहली रात में ही तोड़ने की चेष्टा न करें।

यौन संबंध स्थापित करने से पूर्व पुरूष दुल्हन का मूड देखकर उसे इसके लिये तैयार करे। चूंकि स्त्रियाँ स्वभाव से ही लज्जाशील व संकोची होती हैं, अतः वह जल्दी तैयार नहीं होती। इसके लिये पुरूष को ही पहल करने की जरूरत पड़ती है। पति, स्त्री से प्यार करे, उसे हौले से आलिंगन में ले, स्त्री के बालों को सहलाए, उसे चूमे, स्त्री का सिर अपनी गोदी में रखकर उसकी आँखों के समक्ष एक रोमांटिक सीन तैयार करे, शेरो-शायरी करे, साथ ही स्त्री के अंगों पर हाथ फेरता रहे। कुछ देर के प्रयास में स्त्री का मूड बनने लगेगा। इसके बाद प्यार व फोर प्ले शुरू कर देना चाहिए। हालांकि पहली रात में युवक इतने बेसब्र होते हैं की वे जल्द से जल्द दुल्हन का जिस्म पा लेना चाहते हैं। वे खुद पर ज्यादा देर तक नियंत्रण में नहीं रख सकते। पर उन्हें याद रखना चाहिए की फर्स्ट इम्प्रेसन का प्रभाव पूरी उम्र बना रहता है। पत्नी का दिल जीतने और सफल संभोग के लिये थोड़ा धैर्य, थोड़ी समझदारी आवश्यक है।

जब लगे की स्त्री काम विहल्ल होती जा रही है, जैसे की स्त्री आँख मूंदने लगे। चुम्बनों का आदान -प्रदान करने लगे, अपनी टाँगे पुरूष की टांगों पर फेंकने की चेष्टाएं समेत उसके शारीरिक गतिविधियों में यौन बदलाव आते ही पुरूष को संभोग का कार्य शुरू कर देना चाहिए। संभोग में सहज आसनों का प्रयोग करना चाहिए अथवा दोनों की सहमति होने पर ही आगे बढना चाहिए।

जिस प्रकार पुरूष को स्त्री जननांगों का ज्ञान होना चाहिए आवश्य है, उसी तरह स्त्री को भी पुरूष के जननांगों के बारे में जानकारे होना जरूरी है। उत्तेजित अवस्था में लिंग मोटा व लंबा हो जाता है। इससे घबराने की जरूरत नहीं है। क्योंकि योनि की दीवारें लचीली होती हैं। वह आसानी से प्रवेश के समय फ़ैल जाती हैं। इसलिए लिंग प्रवेश को लेकर मन में किसी तरह की कोई चिंता न पालें पति का सहयोग करें, लज्जाशील अवश्य रहें, मगर इतना भी नहीं की पति को आगे बढ़ने में परेशानी हो। संभोग के लिये तत्पर होने पर शरीर को ढीला छोड़ दें।

संभोग के बाद पति-पत्नी को तुरंत एक दूसरे से अलग नहीं हो जाना चाहिए। चूंकि यह पहली रात होती है, अतः संभोग के बाद प्यार व वार्तालाप करें, घर-गृहस्थी की चर्चा कर सकते हैं, अनुशासन व पारिवारिक सामंजस्य पर बातें करें। बीच-बीच में चुम्बन-आलिंगन करते रहें। पत्नी को ऐसे लगेगा की वह अजनबियों के बीच में नहीं है तथा उसका पति उसके दिल में रहता है।

अतः यदि आपका विवाह होने जा रहा है, और आप सुखी दाम्पत्य जीवन जीना चाहते हैं, तो सर्वप्रथम अपनी गलतफहमियों व शंकाओं का समाधान करें, अच्छी यौन विज्ञान की पुस्तक पढ़ें अथवा किसी कुशल सेक्स विशेषज्ञ से परामार्श करें। अभी से ही आने वाले कल की तैयारे में जुट जाएं।

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कैसे करें गरीबी दूर ? कैसे हो माँ लक्ष्मी की कृपा

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अगर जीवन में माँ लक्ष्मी ( Laxmi ) की कृपा न हो तो जीवन निरर्थक लगने लगता है . धन ( Money) के अभाव में न मान सम्मान ( Respect ) मिलता है और न ही जीवन यापन सही ही हो पाता है चारो तरफ दुःख ही दुःख नजर आता है तो कैसे हो माँ लक्ष्मी की कृपा ?



क्या आप भी गरीबी के शिकार है अथवा धन की कमी से जूझ रहे हैं तो करें ये उपाय-


नोट : केवल महिलाएं करें ये उपाय-

घर-परिवार में स्त्रियों को साक्षात् महालक्ष्मी का ही रूप माना जाता है। जिस घर में स्त्रियां सुखी, अच्छे स्वभाव वाली, पतिव्रता है वहां पैसों की कोई कमी नहीं रहती है। फिर भी यदि धन की कोई समस्या सता रही है तो घर की प्रमुख महिला को यहां बताया गया उपाय करना चाहिए।


यदि किसी कारणवश परिवार में आर्थिक तंगी का दौर चल रहा है तो उस घर की महिला सूर्योदय से पहले उठें। इसके बाद नित्य कर्मों से निवृत्त होकर स्नानादि कर्म कर लें। इसके बाद एक तांबे के लौटे में शुद्ध जल भरें और इसे मुख्य द्वार पर छिड़कें। इसके बाद धन की देवी महालक्ष्मी सहित इष्टदेवों का पूजन करें। ऐसा नियमित रूप से प्रतिदिन किया जाना चाहिए। इसके साथ घर का वातावरण भी पूरी तरह शुद्ध और पवित्र बनाए रखें। किसी भी प्रकार की गंदगी, धूल-मिट्टी आदि नहीं होना चाहिए। घर में शांति बनाए रखें। किसी भी प्रकार के वाद-विवाद की स्थिति से बचें।

इसके साथ ही अपने कर्मों में किसी प्रकार की कोई कमी न रखें। ईमानदारी से मेहनत करें।


अगर आप ऊपर लिखे उपायों को अच्छी तरह से करते हैं तो धन की देवी महालक्ष्मी के साथ साथ आपको भगवान विष्णु की कृपा भी प्राप्त होगी और धन सम्बन्धी समस्या ( Money Related Problem ) भी दूर होगी . क्यूंकि जो स्थान माँ लक्ष्मी को प्रिय होता है वहां भगवान विष्णु भी निवास करते है 

जय महालक्ष्मी !!

18 जुलाई 2015

ब्लूबेरी से करे कंट्रोल ये सब .?

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जी हाँ -ब्‍लूबेरी खाए ये हाइपरटेंशन, मधुमेह, ब्‍लड प्रेशर के साथ यह मोटापे को भी काबू में लाता है.?


ब्लूबेरी नीले रंग के छोटे गोल बेरीस् होते हैं, जिनमें खटास होने के बाद भी, इनका स्वाद हल्का मीठा होता है। इसके आस-पास चांदी के रंग जैसी कलियां होती है जो पुरी तरह पकने के बाद हरे से लाल रंग में बदलकर अंत में नीले रंग में बदल जाते हैं। बेरी मई और जून के महिने में पकते हैं और इसलिए यह मौसम ब्लूबेरी टार्ट, पाई के मज़े लेने का पर्याप्त मौसम है और साथ ही ब्लूबेरी जैम, डेज़र्ट टॉपिंग और सिरप भी बनाते है .


ब्‍लूबेरी जितना स्‍वादिष्‍ट फल है उससे कहीं ज्‍यादा स्‍वास्‍थ्‍य के लिए फायदेमंद है। ब्‍लूबेरी में एंटी-ऑक्‍सीडेंट भरपूर मात्रा में पाया जाता है। हाइपरटेंशन, मधुमेह, ब्‍लड प्रेशर के साथ यह मोटापे को भी काबू में लाता है। ब्‍लूबेरी कैंसर जैसी घातक बीमारी से भी बचाव करता है। यानी यदि आप नियमित रूप से ब्‍लूबेरी का सेवन करेंगे कई खतरनाक बीमारियों से बचे रहेंगे।


यदि आपका वजन अधिक है तो नियमित ब्‍लूबेरी का सेवन करके आप इसे नियंत्रित कर सकते हैं। ब्‍लूबेरी पेट के पास जमा अतिरिक्‍त चर्बी से निजात दिलाता है।


ब्‍लूबेरी में कैलोरी की मात्रा कम होती है और इसमें पाया जाने वाला फाइबर मोटापे को निंयत्रित करता है। कई शोधों में भी यह बात साबित हो चुकी है कि ब्‍लूबेरी शरीर से शुगर के स्‍तर को कम करता है जिससे मोटापे की समस्‍या नहीं होती है।


ब्‍लूबेरी में पाया जाने वाला एंटीऑक्‍सीडेंट त्‍वचा की विकृतियों से निजात दिलाता है। इस‍का नियमित सेवन करने से आप हमेशा जवां रह सकते हैं। ब्‍लूबेरी में मौजूद एंटीऑक्‍सीडेंट मुक्त कण को बेअसर करता है और कोशिकाओं को क्षतिग्रस्‍त होने से बचाता है। ब्‍लूबेरी शरीर के लिए हानिकारक एचडीएल कोलेस्‍ट्रॉल को कम करता है, जो झाइयों और झुर्रियों के लिए जिम्‍मेदार प्रमुख कारक है।


दरअसल ब्‍लूबेरी में आर्टेरियसलेरोसिस नामक तत्‍व पाया जाता है, जो रक्‍त वाहिकाओं में अतिरिक्‍त कोलेस्‍ट्रॉल को जमा होने से रोकता है। चूंकि इसमें कैलोरी की मात्रा बहुत कम होती है तो इसे खाने से शरीर में अतिरिक्‍त चर्बी जमा नहीं होती है। यदि आपने उच्‍च कैलोरीयुक्‍त आहार का सेवन भी कर लिया तो उसके बाद ब्‍लूबेरी खाने से उसके प्रभाव को कम कर सकते हैं।


मधुमेह पर नियंत्रण के लिए ब्‍लूबेरी का सेवन कीजिए। डायबिटिक्‍स भी इसका सेवन करके मधुमेह पर नियंत्रण पा सकते हैं। ब्‍लूबेरी के अलावा इसकी पत्तियां भी बहुत गुणकारी हैं। जर्नल ऑफ न्यूट्रीशन के अनुसार, ब्‍लूबेरी की पत्तियों में एंथोसियानीडीनस नामक तत्‍व भारी मात्रा में मौजूद होते हैं जो मेटाबॉलिज्‍म की प्रक्रिया नियंत्रित करते हैं और ग्‍लूकोज को शरीर के विभिन्‍न हिस्‍से में सही तरीके से पहुंचाने में मदद करता है। इस खास गुण के कारण ही ब्‍लड में शुगर का स्‍तर नहीं बढ़ता और मधुमेह जैसी बीमारी नहीं होती है।


तनाव से परेशान हैं तो ब्‍लूबेरी आपके लिए बहुत फायदेमंद साबित हो सकती है। तनाव से बचने के लिए हफ्ते में दो बार मुट्ठीभर ब्लूबेरी खाना बेहद फायदेमंद है। एक्‍सप्रेस डॉट को डॉट यूके की रिपोर्ट के मुताबिक ब्लूबेरीज में पाए जाने वाले बायो-एक्टिव पदार्थ एंथोकायनिंस से तनाव से बचाव हो सकता है।


ब्‍लूबेरी हार्ट अटैक की संभावनाओं को भी कम करता है। अमेरिकी कृषि विभाग की अगुआई में हुए एक शोध में शोधकर्ताओं ने पाया कि कि ब्लूबेरी खाने से दिल का दौरा पड़ने की आशंका कम हो जाती है। उनका कहना है कि ब्लूबेरी धमनियों में कड़ापन नहीं आने देंती जो अक्सर दिल के दौरे की वजह होता है। इसमें फ्लेवोनॉयड नामक पदार्थ पाया जाता है जो दिल की बीमारियों से बचाता है।


कैंसर एक जानलेवा बीमारी है जिसका उपचार आसानी से नहीं हो पाता, यह किसी को भी हो सकता है। लेकिन क्‍या आपको पता है कि ब्‍लूबेरी का सेवन करने से कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी से बचाव किया जा सकता है। दरअसल ब्‍लूबेरी में एलेगिक एसिड और टेरोस्टिलबीन नामक तत्‍व पाया जाता है जो कैंसर से बचाता है, विशेषकर पेट के कैंसर से।


आंखों की बीमारियों से बचना है तो ब्‍लूबेरी का सेवन कीजिए। बढ़ती उम्र के कारण यदि आपको आंखों की समस्‍यायें हो रही हैं तो इससे बचाव किया जा सकता है। इतना ही नहीं ब्‍लूबेरी आंखों की रोशनी बढ़ाता है। इसमें पाया जाने वाला एंथोसाइनोसाइड्स नामक कंपोनेंट पाया जाता है जो आंखों को बीमारियों से बचाता है। इसके अलावा यह मोतियाबिंद और मायोपिया जैसी बीमारियों से भी बचाव करता है।


ब्‍लूबेरी एंटीऑक्‍सीडेंट गुणों से भरपूर है, जिसके कारण यह संक्रमण से भी बचाव करता है। घरेलू उपचार के लिए बहुत पहले से ही ब्‍लूबेरी का प्रयोग होता आया है। यूरीनरी ट्रैक्‍ट इंफेक्‍शन होने पर ब्‍लूबेरी का इस्‍मेमाल करना चाहिए।


बढ़ती उम्र की वजह से याददाश्‍त कमजोर होने की शिकायत सामान्‍य है, लेकिन यदि आप ब्‍लूबेरी का सेवन कर रहे हैं तो आपकी याददाश्‍त कमजोर नहीं होगी। इसलिए याददाश्‍त को बढ़ाने और बरकरार रखने के लिए ब्‍लूबेरी का सेवन कीजिए।


यदि आपकी पाचन शक्ति कमजोर है तो ब्‍लूबेरी का सेवन कीजिए। यह फाइबर का बहुत अच्‍छा स्रोत है जो कब्‍ज की शिकायत को दूर कर खाने को अच्‍छे से पचाने में मदद करता है। इसमें पाये जाने वाले मिनरल और अन्‍य पोषक तत्‍व पाचन क्रिया को मजबूत बनाते हैं।


पोषण तत्व ब्लूबेरी में :-
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मात्रा प्रति 100 ग्राम में क्या और कितना :-
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कैलोरी (kcal)- 57 ग्राम

कुल वसा- 0.3 ग्राम

संतृप्त वसा- 0 ग्राम

बहुअसंतृप्त वसा- 0.1 ग्राम

मोनोअसंतृप्त वसा- 0 ग्राम

कोलेस्टेरॉल- 0 मिलीग्राम

सोडियम- 1 मिलीग्राम

पोटैशियम -77 मिलीग्राम

कुल कार्बोहायड्रेट- 14 ग्राम

आहारीय रेशा -2.4 ग्राम

शक्कर 10 ग्राम

प्रोटीन --0.7 ग्राम

विटामिन- ए- 54 IU

विटामिन सी- 9.7 मिलीग्राम

कैल्शियम- 6 मिलीग्राम

आयरन- 0.3 मिलीग्राम

विटामिन डी- 0 IU

विटामिन बी6- 0.1 मिलीग्राम

विटामिन बी 12 0 µg

मैग्नेशियम- 6 मिलीग्राम

नोट :-
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ताज़ी बेरी खरीदते समय, किसी भी तरह के कीटणु संक्रमण, दाग या धब्बों की जाँच कर लें।

समान रुप से पीले रंग के बेरी (पुरी तरह से पके हुए) और बिना किसी लाल धब्बे वाले (हल्के कच्चे) ब्लूबेरी ही चुनें।

खरीदने पर ब्लूबेरी पके हुए होने चाहिए, क्योंकि तोड़ने के बाद यह अपने आप नहीं पकते हैं।

पानी जैसे या फफूंदी दाग वाले बेरीस् ना चुने। बेरी पर चमकीली चाँदी जैसी परत अच्छा संदेह है क्योंकि यह बेरी को प्राकृतिक तरह से संगह्र करता है।

ऐसे बेरी ना खरीदें जिनके उपर आपको पानी का छिड़काव या अन्य स्प्रै का छिड़काव दिखे, क्योंकि ऐसा उन्हें ताज़ा दिखाने के लिए किया जाता है। पैक की हुई बेरी खरीदते समय, पैकेट की जाँच कर लें। दाग लगे या लीक होने वाले डब्बे इस बात का संकेत है कि उसमें फल खराब हो चुके हैं।

ब्लूबेरी से जैम या ज्यूस बनाया जा सकता है। फल के पेक्टिन और ब्लूबेरी से बना जैम बेहद मशहुर है। इसके अलावा, ब्लूबेरी का प्रयोग पाई, केक, मफिंन, जैम और जैली में किया जाता है।

इसे हवा बद डब्बे में रखकर फ्रिज में रखें। संग्रह करने से पहले उन्हें पानी से ना धोऐं, क्योंकि उनकी सतह पर पानी इन्हें जल्दी खराब कर देता है। फ्रिज में रखने से इन्हें लगभग 2 हफ्तों तक रखा जा सकता है।

उपचार स्वास्थ्य और प्रयोग-

15 जुलाई 2015

आपका एक उपवास रोग निवारक के साथ शक्तिवर्धक भी है

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क्या आप जानते है कि व्यवस्थित रूप से चलने वाले दफ्तरों, कारखानों में सप्ताह में एक दिन अवकाश का रहता है और  कहीं- कहीं तो पाँच दिन का भी सप्ताह माना जाने लगा है और दो दिन छुट्टी में हलके- फुलके रहने के लिए मिलते हैं यह छुट्टी में प्रत्यक्ष काम की हानि होती हुई दीखती है किंतु परोक्ष में उससे लाभ ही रहता है दो दिनों में हलका- फुलका रहकर व्यक्ति अधिक उत्साहपूर्वक अधिक मात्रा में काम कर सकता है-




जी हाँ -यही बात पाचनतंत्र के बारे में भी है। पेट, आमाशय, आँतें मिलकर एक तंत्र बनता है, इसमें फूलने सिकुड़ने की क्रिया होती रहती है, और उलट पुलट के लिए जगह की गुंजाईश रखे जाने की आवश्यकता पड़ती है। इस सारे विभाग में ठूँसा -भरा जाए और कसी हुई स्थिति में रखा जाए, तो स्वभावतः पाचन में बाधा पड़ेगी, अवयवों पर अनावश्यक दबाव- खिंचाव रहने से उनकी कार्यक्षमता में घटोतरी होती जाएगी-

उन अंगों से पाचन के निमित्त जो रासायनिक स्राव होते हैं, उनकी मात्रा न्यून रहेगी और सदा हल्की- भारी कब्ज बनी रहेगी। खुलकर दस्त होने और पेट हलका रहने की वह स्थिति न बन पड़ेगी जो शरीर को स्वस्थ बनाए रखने के लिए आवश्यक है-

पाचन तंत्र ही आहार को रक्त के रूप में परिणत करने की आश्चर्य भरी प्रयोग शाला चलाता है। इसके कलपुर्जों से अनावश्यक छेड़खानी नहीं करनी चाहिए। इससे कई प्रकार की परेशानियाँ व्यर्थ ही उत्पन्न होती हैं। अधिक मात्रा में खाना, इसी तोड़ फोड़ का प्रत्यक्ष स्वरूप है-

आयुर्विज्ञान ने इसी तथ्य का यह कहकर समर्थन किया है कि कम मात्रा में खाया हुआ, अच्छी तरह पच जाता है। फलतः वह अधिक ठूँसने की तुलना में आर्थिक बचत भी करता है। अंगों को सुव्यवस्थित भी रखता है और पोषण भी अधिक मात्रा में प्रदान करता है-

वृद्धावस्था के लिए तो यह अनिवार्य अनुशासन है कि वे अपने पाचन तंत्र की क्षमता को देखते हुए आहार की मात्रा घटाएँ। यह न सोचें कि ऐसा करने से शक्ति सामर्थ्य घटेगी, किंतु देखा इससे ठीक उलटा गया है कि मात्रा घटा देने पर आहार सही रूप से पचता है, वह उपयुक्त पोषण बढ़ाता है और पाचन तंत्र में विकृति नहीं खड़ी होने देता-

बच्चों के आहार के संबंध में भी यही सावधानी बरती जानी चाहिए। हर वयस्क उन्हें प्रेम प्रदर्शन के रूप में अपने साथ खिलाने लगे, तो उसका परिणाम यह होता है कि उन्हें बार- बार खाने की, बड़ों जैसे गरिष्ठ पदार्थों को लेने की आदत पड़ जाती है। इस कारण उत्पन्न होने वाले संकटों से बचने के लिए यही उचित है -

बच्चों को खाते समय पास भले ही बिठा लिया जाए, पर उनके आहार का स्तर, अनुपात एवं समय सर्वथा भिन्न रखा जाए। कोमल पेट पर अनावश्यक मात्रा थोपना एक प्रकार से उनके मरण की पूर्व भूमिका विनिर्मित करना है-

उपवास को धर्म प्रयोजनों में बढ़- चढ़कर महत्त्व दिया गया है। धार्मिक प्रकृति के लोग वैसा करते भी रहते हैं। महिलाओं में इसके लिए अधिक उत्साह एवं साहस देखा जाता है। पर इस संदर्भ में जो अनियमितता बरती जाती है, वह सब प्रकार से खेदजनक है-

उपवास के दिन फलाहारी समझे जाने वाले कूटू, आलू, सिंघाड़ा आदि गरिष्ठ पकवानों को स्वादिष्टता के कारण और भी अधिक मात्रा में खाया जाता है। फलतः परिणाम ठीक उलटा होता है। मात्रा घटाने और सात्विकता बढ़ाने के रूप में ही फलाहार हो सकता है। जब नाम फलाहार है तो उसे शब्दों के अनुरूप ही होना चाहिए। ताजे सुपाच्य पेड़ के पके फल आवश्यकतानुसार फलाहार में एक बार लिए जा सकते हैं-

अधिक मँहगे और कोल्डस्टोरों में रखे होने के कारण शाकाहार से काम चलाना चाहिए। ताजे फल मिल सकें, तो वे भी ठीक रहते हैं। अच्छा तो यह है कि शाकों को उबालकर बनाया हुआ रस या फलों का रस काम में लिया जाए । दूध, दही, छाछ जैसी प्रवाही वस्तुएँ भी काम दे सकती हैं। यह सब जंजाल भी जितना कम किया जाए, उतना ही अच्छा-

वास्तविक उपवास वह है, जिसमें पानी तो बार बार और अधिक मात्रा में पिया जाए, पर पेट पर वजन डालने वाला कोई भी आहार न लिया जाए, छुट्टी- सो। उस दिन पेट को एक प्रकार से पूर्ण विश्राम लेने दिया जाए। सफाई करने के लिए गुनगुने पानी में नींबू का रस, तनिक- सा खाने का सोडा और शहद अथवा गुड़ मिलाकर दिन में कई बार चाय की तरह पीया जा सकता है -

यदि अच्छा लगे तो इस पेय में तुलसी की थोड़ी- सी पत्तियाँ भी डाली जा सकती हैं। इस पेय से पेट की सफाई भी होती है और भूख के कारण पेट में जो ऐंठन पड़ती है, उसकी संभावना भी नहीं रहती-

आपको पता है कि पशु- पक्षियों में से कोई कभी बीमार पड़ता है तो वे अपना उपचार स्वयं करते हैं। भोजन बंद कर देते हैं निराहार रहने से शरीर में अन्यत्र काम करने वाली जीवनी शक्ति एकत्रित होकर रोग निवारण में लग जाती है और वे इतने भर उपचार से रोगमुक्त हो जाते हैं। मनुष्यों के लिए भी इस आधार को अपनाना रोगमुक्ति का सर्वसुलभ उपचार सिद्ध हो सकता है-

सप्ताह में एक दिन का पूर्ण उपवास करना ही चाहिए। इतनी छूट सुविधा तो पाचन तंत्र को देनी ही चाहिए-

शरीर जुकाम, खाँसी, ज्वर आदि की चपेट में आ गया हो तो एक दिन से अधिक का उपवास भी किया जा सकता है। निराहार उपवास आरम्भ करने से पहले कम से कम एक बार तो खिचड़ी जैसा हल्का भोजन करना ही चाहिए। उपवास तोड़ने के बाद भी आरम्भ में एक बार फिर क्रमशः थोड़ा हलका भोजन लेने के उपरांत ही सामान्य ढर्रे पर आना चाहिए-

उपचार और प्रयोग-