आप शादी करने जा रहे है -

सेक्स विज्ञान की जानकारी से लोग पहले परहेज करते थे लेकिन अब समय के परिवर्तन के साथ लोगो में इसकी रूचि बढती जा रही है क्युकि अज्ञानता के कारण पति-पत्नी का सामंजस्य नहीं बेठता है तो कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है -



शादी एक ऐसा बंधन है, जी दो दिलों, दो आत्माओं को एक सूत्र में बांधता है। यह यौन जीवन के शुरूआत की हरी झंडी भी है, जिसका मकसद गृहस्थी व जिम्मेदारियों का संतुलन व विकास लाना होता है। अगर शादी यौन जीवन के शुरुआत की सामजिक व कानूनी स्वीकृति है, तो इसे नजरंदाज करना ठीक नहीं है।

अधिकाश युवक भावी पत्नी को लेकर तरह-तरह के ख्यालों में खोये रहते हैं। उनमें कुछ बातें ऐसी भी होती हैं, जो उन्हें तनाव व दुःख में डुबो देती हैं। जैसे शिश्न के आकार, उत्थान, टेढापन, लिंग पर उभरी नसों का होना, वृषण कोष का आकार, वीर्य की मात्रा व पतलापन, सम्भोग क्षमता, समय, स्त्री जननांगो के बारे में अज्ञानता, सेक्स तकनीक, शीघ्र स्खलन आदि के बारे में सोच-सोचकर वे दुःख में घिर जाते हैं। सौ में से अस्सी  प्रतिशत मामलों में युवक हस्तमैथुन से उपजी काल्पनिक नपुंसकता को लेकर चिंतित रहते हैं।

इसी प्रकार युवतियों में शादी से पूर्व प्रथम शारीरिक संबंध के दौरान होने वाले दर्द रक्तस्त्राव के बारे में चिंता रहती है। कुछ युवतियों में इस बात का भय रहता है की प्रथम शारीरिक संबंध के दौरान काफी दर्द होगा, खून बहेगा.... आदि। इस चिंता के कारण कुछ लड़कियां यौन संबंध के दौरान असहज हो जाती हैं। परिणाम स्वरुप यौन संबंधों में मिलने वाले आनंद के स्थान पर संबंध बनाने में ही दिक्कत आती है। संभावित दर्द व रक्त स्त्राव की कल्पना मात्र से ही लड़की अपने आपको तथा योनि द्वार को इतना कस लेती हैं की संभोग हो पाना ही कठिन हो जाता है।

युवक-युवतियों में ऐसी स्थिति को दूर करने के लिये उन्हें उचित ज्ञान-विज्ञान व तकनीकी को समझाए जाने की जरूरत है। साथ ही उनकी इस धारणा को बदलने की जरूरत है, जो उनमें भय व अंधविश्वास की जड़ है। यहाँ संक्षेप में शादी से पूर्व और शादी के बाद की स्थितियों पर गौर करते हुए कुछ आवश्यक बातों पर प्रकाश डाल रहे हैं, ताकि लड़के-लडकियां इसे आत्मसात करके सहजता से नए यौन-जीवन का सुखद शुभारम्भ कर सकें-

पत्नी के साथ संभोग के लिये मन में उत्साह, शारीरिक सक्रियता, आत्मबल, आत्मविश्वास व आत्मा नियंत्रण आवश्यक है। बाकी बातें गूढ़ हैं, जैसे की शिशन छोटा, टेढा होना, शीघ्र स्खलन आदि। हाँ, पुरूष को स्त्री जननांगों के बारे में जानकारी होनी चाहिए।

उसी प्रकार से दुल्हन को यह बात गाँठ बाँध लेनी चाहिए की प्रथम सहवास के समय जो हल्का-सा दर्द होता है, वह संभोग में मिलने वाले आनंद के मुकाबले में कहीं नहीं ठहरता। दर्द सिर्फ क्षण भर के लिये होता है, फिर गायब हो जाता है। यह कोई ऐसा दर्द नहीं की दुल्हन बेहोश हो जाए।

प्रथम सहवास के दौरान कौमार्य झिल्ली फटती है और रक्तस्त्राव होता है। लेकिन वह मामूली-सा। योनीद्वार पर एक पतली झिल्ली होती है, जिसे हाईमन कहते हैं। योनिद्वार इससे ढका होता है। युवक-युवतियों को यह जान लेना चाहिए की झिल्ली की उपस्थिति का कौमार्य से कोई सीधा संबंध नहीं है। स्कूल-काँलेज में होने वाले खेल-कूद, साइकिल चलाने, दौड़ने आदि के दौरान यह झिल्ली फट सकती है। अतः झिल्ली का फटना कौमार्य नष्ट होना हरगिज नहीं माना जाता चाहिए।

दूल्हा-दुल्हन को प्रथम सहवास के दौरान कमरे में अन्धेरा नहीं रखना चाहिए। अन्धकारक के दौरान दोनों को शारीरिक संरचना (जननांगों के बारे में) का ज्ञान नहीं हो पाता। उसके अलावा अन्धकार के कारण स्त्री-पुरूष को एक-दूसरे से मिलने वाली उत्तेजना तथा आकर्षण का लाभ नहीं मिल पाता।

सुहागरात को कक्ष में प्रवेश करने से पूर्व पुरूष अपने मन में यह संकल्प करके न जाए की उसे हर हाल में दुल्हन के साथ यौन संबंध कायम करना है। यह जरूरी नहीं है की पहली रात में ही यौन संबंध स्थापित किया जाए। यह सब पति-पत्नी की सहमति, इच्छा, वातावरण आदि पर निर्भर करता है। दुल्हन का स्वभाव होता है की वह पहले प्यार चाहती है, फिर सेक्स। पुरूष को उसकी भावनाओं का सम्मान करना चाहिए।

सुहागरात को पति हो या पत्नी, दोनों में से किसी को भी अपने पूर्व संबंधों (अगर भूलवश ऐसा हो) के बारे में चर्चा नहीं करनी चाहिए। विवाहित संबंध परस्पर विश्वास व सहयोग के तालमेल पर टिके होते हैं। इस विश्वास को पहली रात में ही तोड़ने की चेष्टा न करें।

यौन संबंध स्थापित करने से पूर्व पुरूष दुल्हन का मूड देखकर उसे इसके लिये तैयार करे। चूंकि स्त्रियाँ स्वभाव से ही लज्जाशील व संकोची होती हैं, अतः वह जल्दी तैयार नहीं होती। इसके लिये पुरूष को ही पहल करने की जरूरत पड़ती है। पति, स्त्री से प्यार करे, उसे हौले से आलिंगन में ले, स्त्री के बालों को सहलाए, उसे चूमे, स्त्री का सिर अपनी गोदी में रखकर उसकी आँखों के समक्ष एक रोमांटिक सीन तैयार करे, शेरो-शायरी करे, साथ ही स्त्री के अंगों पर हाथ फेरता रहे। कुछ देर के प्रयास में स्त्री का मूड बनने लगेगा। इसके बाद प्यार व फोर प्ले शुरू कर देना चाहिए। हालांकि पहली रात में युवक इतने बेसब्र होते हैं की वे जल्द से जल्द दुल्हन का जिस्म पा लेना चाहते हैं। वे खुद पर ज्यादा देर तक नियंत्रण में नहीं रख सकते। पर उन्हें याद रखना चाहिए की फर्स्ट इम्प्रेसन का प्रभाव पूरी उम्र बना रहता है। पत्नी का दिल जीतने और सफल संभोग के लिये थोड़ा धैर्य, थोड़ी समझदारी आवश्यक है।

जब लगे की स्त्री काम विहल्ल होती जा रही है, जैसे की स्त्री आँख मूंदने लगे। चुम्बनों का आदान -प्रदान करने लगे, अपनी टाँगे पुरूष की टांगों पर फेंकने की चेष्टाएं समेत उसके शारीरिक गतिविधियों में यौन बदलाव आते ही पुरूष को संभोग का कार्य शुरू कर देना चाहिए। संभोग में सहज आसनों का प्रयोग करना चाहिए अथवा दोनों की सहमति होने पर ही आगे बढना चाहिए।

जिस प्रकार पुरूष को स्त्री जननांगों का ज्ञान होना चाहिए आवश्य है, उसी तरह स्त्री को भी पुरूष के जननांगों के बारे में जानकारे होना जरूरी है। उत्तेजित अवस्था में लिंग मोटा व लंबा हो जाता है। इससे घबराने की जरूरत नहीं है। क्योंकि योनि की दीवारें लचीली होती हैं। वह आसानी से प्रवेश के समय फ़ैल जाती हैं। इसलिए लिंग प्रवेश को लेकर मन में किसी तरह की कोई चिंता न पालें पति का सहयोग करें, लज्जाशील अवश्य रहें, मगर इतना भी नहीं की पति को आगे बढ़ने में परेशानी हो। संभोग के लिये तत्पर होने पर शरीर को ढीला छोड़ दें।

संभोग के बाद पति-पत्नी को तुरंत एक दूसरे से अलग नहीं हो जाना चाहिए। चूंकि यह पहली रात होती है, अतः संभोग के बाद प्यार व वार्तालाप करें, घर-गृहस्थी की चर्चा कर सकते हैं, अनुशासन व पारिवारिक सामंजस्य पर बातें करें। बीच-बीच में चुम्बन-आलिंगन करते रहें। पत्नी को ऐसे लगेगा की वह अजनबियों के बीच में नहीं है तथा उसका पति उसके दिल में रहता है।

अतः यदि आपका विवाह होने जा रहा है, और आप सुखी दाम्पत्य जीवन जीना चाहते हैं, तो सर्वप्रथम अपनी गलतफहमियों व शंकाओं का समाधान करें, अच्छी यौन विज्ञान की पुस्तक पढ़ें अथवा किसी कुशल सेक्स विशेषज्ञ से परामार्श करें। अभी से ही आने वाले कल की तैयारे में जुट जाएं।

उपचार और प्रयोग-http://www.upcharaurprayog.com
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