This website about Treatment and use for General Problems and Beauty Tips ,Sexual Related Problems and his solution for Male and Females. Home treatment,Ayurveda treatment ,Homeopathic Remedies. Ayurveda treatment tips in Hindi and also you can read about health Related problems and treatment for male and female

loading...

30 सितंबर 2015

आक के पौधे को बेकार न समझे -

By With कोई टिप्पणी नहीं:
आप जानते ही है कि घर के आसपास जहां भी खाली और Unusable जगह होती है, वहां कई प्रकार के पौधे स्वत: ही पनप जाते हैं। आमतौर इन पौधों को भी Unusable ही माना जाता है। ऐसे स्थान पर एक पौधा, जिसे आंकड़ा कहा जाता है, वह भी पनप जाता है। इस पौधे को आंक, अकौआ भी कहते हैं। सामान्यत: आंकड़े का पौधा जंगलों में आसानी से पनप जाता है, लेकिन आजकल शहरी क्षेत्रों में भी यह आसानी से दिखाई दे जाता है। यह पौधा जहरीला(Poisonous) होता है। आंकडे के पौधे से सफेद दूध भी निकलता है। इस पौधे से प्राप्त होने वाले फूलों और फलों को शिवलिंग पर अर्पित किया जाता है। आंकड़े के कई उपाय भी बताए गए हैं, जिनसे धन संबंधी परेशानियां दूर हो जाती हैं।






आप की जानकारी के लिए इसके कुछ उपयोग दे रहा हूँ जिसका आपको लाभ मिले -




पहला उपाय ये करे:-

=============



यदि किसी व्यक्ति को अपने शरीर की रक्षा नकारात्मक शक्तियों से, बीमारियों से, बुढ़ापे की परेशानियों से करनी है तो उसे ये उपाय अपनाना चाहिए। उपाय के अनुसार आंकड़े के पौधे की जड़ का एक छोटा सा टुकड़ा गले में ताबीज के साथ धारण करना चाहिए।

ध्यान रखें, ताबीज के लिए काले धागे का प्रयोग करें। मार्केट में कई प्रकार के ताबीज आसानी से मिल जाते हैं। अत: उस ताबीज में आंकड़े की जड़ को डालकर धारण करें। इस उपाय से आपके शरीर की रक्षा होगी, क्योंकि ऐसा माना जाता है कि यह ताबीज किसी कवच के समान काम करता है।



दूसरा उपाय ये करे :-

=============


यदि कोई व्यक्ति किसी गंभीर बीमारी से परेशान है तो वह रवि पुष्य नक्षत्र (हिंदी पंचांग से इस नक्षत्र की जानकारी मिल सकती है) के दिन आंकड़े एवं अरण्ड की जड़ निमंत्रण देकर तोड़कर ले आएं। जड़ तोड़ने से पहले जड़ को निमंत्रण दें कि आप हमारे साथ चलिए। इसके बाद घर पर इन जड़ों को गंगाजल से धोएं और सिंदूर आदि पूजन सामग्री अर्पित कर पूजन करें। पूजन के दौरान श्रीगणेशाय नम: मंत्र का जप 108 बार करें।

पूजन हो जाने पर बीमारी से पीड़ित व्यक्ति के ऊपर से इन जड़ों को सात बार सिर से पैर तक वार लें। इसके बाद शाम के समय इन जड़ों को किसी सुनसान स्थान पर जाकर जमीन में गाढ़ दें। इस उपाय के बाद दवाएं असर करने लगेंगी और रोगी जल्दी ठीक हो सकता है।



तीसरा उपाय ये करे :-

==============


शास्त्रों अनुसार आंकड़े के फूल शिवलिंग पर चढ़ाने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण हो जाती हैं और अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। आंकड़े पौधा मुख्यद्वार पर या घर के सामने हो तो बहुत शुभ माना जाता है। इसके फूल सामान्यत: सफेद रंग के होते हैं। विद्वानों के अनुसार कुछ पुराने आंकड़ों की जड़ में श्रीगणेश की प्रतिकृति निर्मित हो जाती है जो कि श्वेतार्क गणेश के नाम से जानी जाती है। गणेशजी के इस स्वरूप की पूजा करने से साधक को शुभ फल प्राप्त होते हैं।

घर के सामने शुभ-दायी है ये पौधा :-

=======================


ज्योतिष के अनुसार जिस घर के सामने या मुख्यद्वार के समीप आंकड़े का पौधा होता है, उस घर पर कभी भी किसी नकारात्मक शक्ति का प्रभाव नहीं पड़ता है। इसके अलावा वहां रहने वाले लोगों को तांत्रिक बाधाएं कभी नहीं सताती। घर के आसपास सकारात्मक और पवित्र वातावरण बना रहता है जो कि हमें सुख-समृद्धि और धन प्रदान करता है। ऐसे लोगों पर महालक्ष्मी की विशेष कृपा रहती है और जहां-जहां से लोग कार्य करते हैं वहीं से इन्हें धन लाभ प्राप्त होता है।

उपचार और प्रयोग-

29 सितंबर 2015

बालो को प्राकतिक काला करे- Natural-black-hair-to-the

By With कोई टिप्पणी नहीं:
आज के खान -पान और रहन -सहन तथा मिलावटी वस्तुओ के सेवन से सभी लोगो में एक आम बीमारी बालो की देखने को मिल रही है कई लोगो की problem है जिनके समाधान हेतु कुछ प्रयोग दिए जा रहे है -




ऑवलें का 50 ग्राम पाउडर लीजिये और उसको लोहे के काले रंग के बरतन में रखें और थोडा पानी मिलाकर पेस्ट जैसा बना दीजिये। इस पेस्ट को आपको पूरे one week के लिये रख देना है,और रोज एक बार इसमें, पुन: थोडा सा पानी मिलाकर अच्छे से चला दीजिये। इस तरहा एक सप्ताह में यह पेस्ट बिल्कुल काला हो जायेगा। तब आप इसको किसी भी अन्य डाई की तरह बालों में लगायें। यह प्रयोग 2-3 महीने तक लगातार कीजिये,बालों में प्राकृतिक रूप से काला रंग आने लगेगा-



मेथी के बीजों में फॉस्फेट, लेसिथिन और न्यूक्लिओ-अलब्यूमिन होने से ये कॉड-लिवर ऑयल जैसे पोषक और बल प्रदान करने वाले होते हैं। इसमें फोलिक एसिड, मैग्नीशियम, सोडियम, जिंक, कॉपर, नियासिन, थियामिन, कैरोटीन आदि पोषक तत्व पाए जाते हैं जो बालों की बेहतर सेहत के लिए अत्यंत आवश्यक हैं। बालों में रूसी होने पर मेथी दानों को कुचलकर या ग्राईंडर में पीसकर चूर्ण बनाया जाए। लगभग 3 ग्राम चूर्ण लेकर इसमें पानी मिलाया जाए ताकि पेस्ट तैयार हो जाए। इस पेस्ट को बालों में लगाएं और आधा घंटे बाद धो लें, सप्ताह में 2 से 3 बार ऐसा करने से डेंड्रफ की समस्या से छुटकारा मिल जाता है-


नारियल और जैतून के तेल की बराबर मात्रा लेकर इसमें कुछ बूंदे नींबू के रस की मिला ली जाएं और इस मिश्रण से बालों की मालिश लगभग 10 मिनिट तक की जाए और फिर गर्म तौलिए से सिर को 3 मिनिट के लिए ढक लिया जाए, बालों से जुडी समस्याओं में काफी फायदा करता है-


बालों के रोग : -

बरगद के पत्तों की 20 ग्राम राख को 100 मिलीलीटर अलसी के तेल में मिलाकर मालिश करते रहने से सिर के बाल उग आते हैं। हाँ अगर  अनुवांशिक न हो तो तीन माह  में आशातीत लाभ होता है .

बरगद के साफ कोमल पत्तों के रस में, बराबर मात्रा में सरसों के तेल को मिलाकर आग पर पकाकर गर्म कर लें, इस तेल को बालों में लगाने से बालों के सभी रोग दूर हो जाते हैं।

25-25 ग्राम बरगद की जड़ और जटामांसी का चूर्ण, 400 मिलीलीटर तिल का तेल तथा 2 लीटर गिलोय का रस को एकसाथ मिलाकर धूप में रख दें, इसमें से पानी सूख जाने पर तेल को छान लें। इस तेल की मालिश से गंजापन दूर होकर बाल आ जाते हैं और बाल झड़ना बंद हो जाते हैं।

बरगद की जटा और काले तिल को बराबर मात्रा में लेकर खूब बारीक पीसकर सिर पर लगायें। इसके आधा घंटे बाद कंघी से बालों को साफ कर ऊपर से भांगरा और नारियल की गिरी दोनों को पीसकर लगाते रहने से बाल कुछ दिन में ही घने और लंबे हो जाते हैं।

नीम एक बेहतरीन हेयर कंडीशनर भी होता है , नीम की पत्तियों को पानी में उबालने के बाद इसे पीस कर पेस्ट बना लें। अब इस नीम के पेस्ट में शहद मिलाकर इस पेस्ट को बालों में लगाने से रूसी की समस्या खत्म होती है और बाल बहुत ही मुलायम और चमकीले भी हो जाते हैं।

नीम का पेस्ट सिर में कुछ देर लगाए रखें। फिर बाल धो लें। बाल झड़ना बंद हो जाएगा।

बेसन मिला दूध या दही के घोल से बालों को धोएं। फायदा होगा।

दस मिनट का कच्चे पपीता का पेस्ट सिर में लगाएं। बाल नहीं झड़ेंगे और डेंड्रफ (रूसी) भी नहीं होगी।

अगर बाल असमय ही सफेद हो रहे हैं तो करेले का गाढा रस निकालें और उसे बालों पर लगाएं। ऐसा पूरे 10 दिनों तक करें और लाभ पाएं।

नीम और बेर के पत्तों को पानी के साथ पीसकर सिर पर लगायें व 2-3 घण्टों के बाद बालों को धो डालें. इससे बालों का झड़ना कम हो जाता है और बाल लंबे भी होते हैं.

लहसुन का रस निकालकर सिर में लगाने से नए बाल उगने लग जाते हैं.

त्रिफला के 2 से 6 ग्राम चूर्ण में लगभग एक चौथाई ग्राम लौह भस्म मिलाकर सुबह-शाम सेवन करने से बालों का झड़ना बन्द हो जाता है.

घने बालो के लिए आप  50 ग्राम कलौंजी 1 लीटर पानी में उबाल लें. इस उबले हुए पानी को ठंडाकर इससे बालों को धोएं. बाल 1 महीने में ही काफी लंबे हो जाते हैं.

सीताफल के बीज और बेर के बीज/पत्ते बराबर मात्रा में पीसकर बालों की जड़ों में लगाएं. ऐसा करने से बाल लंबे हो जाते हैं.

शिकाकाई और सूखे आँवले 25-25 ग्राम लेकर थोड़ा-सा कूटकर इन टुकड़ों को 500 ग्राम पानी में रात को डालकर भिगो दें. सुबह इस पानी को कपड़े के साथ मसलकर छान लें और इससे सिर की मालिश करें. मालिश करने के 10-20 मिनट बाद नहा लें. बालों के सूखने पर नारियल का तेल लगा लें. ऐसा करने से बाल लंबे, मुलायम और चमकदार बन जाते हैं. गर्मियों के मौसम में यह प्रयोग सही रहता है. इससे बाल सफेद नहीं होते व जिनके बाल सफेद हों तो वे भी काले हो जाते हैं.

आधी से 1 मूली रोजाना दोपहर में खाना-खाने के बाद, कालीमिर्च के साथ नमक लगाकर खाने से बालों का रंग साफ होता है और बाल लंबे भी हो जाते हैं. इसका प्रयोग 3-4 महीने तक लगातार करें.

नोट :- मूली जिनको सूट न करती हो वे इसका प्रयोग न करें-

सूखे आँवले और सूखी मेंहदी को समान मात्रा में लेकर शाम को पानी में भिगो दें. प्रात:काल इससे बालों को धोयें. इसका प्रयोग लगातार कई दिनों तक करने से बाल मुलायम और लंबे हो जायेंगे.

अमरबेल : 250 ग्राम अमरबेल को लगभग 3 लीटर पानी में उबालें. जब पानी आधा रह जाये तो इसे उतार लें. सुबह इससे बालों को धोयें. इससे बाल लंबे होते हैं.

10 ग्राम आम की गिरी (गुठली ) को आँवले के रस में पीसकर बालों में लगाना चाहिए. इससे बाल लंबे और घुंघराले हो जाते हैं.

कपूर कचरी 100 ग्राम, नागरमोथा 100 ग्राम, कपूर तथा रीठे के फल की गिरी 40-40 ग्राम, शिकाकाई 250 ग्राम और आँवले 200 ग्राम. इन सभी का चूर्ण तैयार कर लें. इस मिश्रण की 50 ग्राम मात्रा में पानी मिलाकर लुग्दी (लेप) बनाकर बालों में लगायें. इसके पश्चात बालों को गरम पानी से अच्छी तरह धो लें. इससे सिर के अन्दर की जूं-लींकें भी मर जाती हैं और बाल घने तथा मुलायम होते हैं.

गुड़हल के पत्तों को पीसकर लुग्दी बना लें. इस लुग्दी को नहाने से 2 घंटे पहले बालों की जड़ों में अच्छी तरह मालिश करके लगायें और दो घंटे के बाद नहायें. इस प्रयोग को नियमित रूप से करते रहने से न केवल बालों को पोषण मिलता है, बल्कि मस्तिष्क में ठंड़क भी पहुँचती है.

रीठा, आँवला एवं सिकाकाई को आपस में मिलाकर बाल धोने से बाल सिल्की, चमकदार, रूसी-रहित और घने हो जाते हैं.

गुड़हल के ताजे फूलों के रस में बराबर मात्र में जैतून का तेल मिलाकर आग पर पकायें. जब जल का अंश उड़ जाये तो इसे शीशी में भरकर रख लें. रोजाना नहाने के बाद इसे बालों की जड़ों में मल-मलकर लगाना चाहिए. इससे बाल चमकीले एवं लंबे हो जाते हैं.

गुड़हल के पत्ते और फूलों को बराबर मात्रा में लेकर पीसकर लेप तैयार करें. इस लेप को सोते समय बालों में लगाएं और सुबह धोयें. ऐसा कुछ दिनों तक नियमित रूप से करने से बाल स्वस्थ बने रहते हैं.

बालों को छोटा करके उस स्थान पर जहां पर बाल न हों भांगरा के पत्तों के रस से मालिश करने से कुछ ही दिनों में अच्छे काले बाल निकलते हैं. जिनके बाल टूटते हैं या दो-मुँहे हो जाते हैं उन्हें इस प्रयोग को अवश्य अपनाना चाहिए.

शंखपुष्पी से निर्मित तेल रोजाना नियमित रूप से बालों में लगाने से सफेद बाल काले हो जाते हैं.

ककड़ी में सिलिकन और सल्फर अधिक मात्रा में होते हैं जो बालों को बढ़ाते हैं. ककड़ी के रस से बालों को धोने से तथा ककड़ी+गाजर+पालक के मिक्स रस को पीने से बाल बढ़ते हैं. इस प्रयोग से नाखून गिरना भी बन्द हो जाता है.

त्रिफला के चूर्ण को भांगरा के रस में तीन उबाल देकर अच्छी तरह से सुखाकर खरलकर/पीसकर रख लें. इसे प्रतिदिन सुबह के समय लगभग 2 ग्राम तक सेवन करने से बालों का सफेद होना बन्द हो जाता है तथा इससे आँखों की रोशनी भी बढ़ती है.

आँवलों को दरदरा पीसकर चीनी-मिट्टी के प्याले में रखकर ऊपर से इतना भांगरे का रस डालें कि आँवले उसमें डूब जाएं. फिर इसे खरलकर सुखा लें. इसी प्रकार आँवलों को भांगरा रस में 7 उबाल देकर भी अच्छी तरह सुखाकर पीसकर रखा जा सकता है. प्रतिदिन 3 ग्राम चूर्ण ताजे पानी के साथ सेवन करने से असमय ही बालों का सफेद होना बन्द हो जाता है. यह आँखों की रोशनी को बढ़ाने वाला एवं उम्र को बढ़ाने वाला लाभकारी योग है.

उपचार और प्रयोग-

28 सितंबर 2015

मोटापा कम करे लेकिन केसे -

By With कोई टिप्पणी नहीं:


जाने मोटापा क्यूं होता है और दूर करे ये उपाय-



पहला प्रयोगः- 

केवल सेवफल का ही आहार में सेवन करने से लाभ होता है-

दूसरा प्रयोगः -

अरनी के पत्तों का 20 से 50 मि.ली. रस दिन में तीन बार पीने से स्थूलता दूर होती है।

तीसरा प्रयोगः- 

चंद्रप्रभावटी की 2-2 गोलियाँ रोज दो बार गोमूत्र के साथ लेने से एवं दूध-भात का भोजन करने से 'डनलप' जैसा शरीर भी घटकर छरहरा हो जायेगा।

चौथा प्रयोगः- 

आरोग्यवर्धिनीवटी की 3-3 गोली दो बार लेने से व 2 से 5 ग्राम त्रिफला का रात में सेवन करने से भी मोटापा कम होता है। इस दौरान केवल मूँग, खाखरे, परमल का ही आहार लें। साथ में हल्का सा व्यायाम व योगासन करना चाहिए।

पाँचवाँ प्रयोगः -

एक गिलास कुनकुने पानी में आधे नींबू का रस, दस बूँद अदरक का रस एवं दस ग्राम शहद मिलाकर रोज सुबह नियमित रूप से पीने से मोटापे का नियंत्रण करना सहज हो जाता है।

मोटापा घटाने के लिए कुछ  और आयुर्वेदिक उपाय :-

* मूली के रस में थोडा नमक और निम्बू का रस मिलाकर नियमित रूप से पीने से मोटापा कम हो जाता है और शरीर सुडौल हो जाता है !


* गेहूं ,चावल,बाजरा और साबुत मूंग को समान मात्रा में लेकर सेककर इसका दलिया बना लें ! इस दलिये में अजवायन २० ग्राम तथा सफ़ेद तिल ५० ग्राम भी मिला दें ! ५० ग्राम दलिये को ४०० मि.ली.पानी में पकाएं ! स्वादानुसार सब्जियां और हल्का नमक मिला लें ! नियमित रूप से एक महीनें तक इस दलिये के सेवन से मोटापा और मधुमेह में आश्चर्यजनक लाभ होता है !



* अश्वगंधा के एक पत्ते को हाथ से मसलकर गोली बनाकर प्रतिदिन सुबह,दोपहर,शाम को भोजन से एक घंटा पहले या खाली पेट जल के साथ निगल लें ! एक सप्ताह के नियमित सेवन के साथ फल,सब्जियों,दूध,छाछ और जूस पर रहते हुए कई किलो वजन कम किया जा सकता है !



* आहार में गेहूं के आटे और मैदा से बने सभी व्यंजनों का सेवन एक माह तक बिलकुल बंद रखें ! इसमें रोटी भी शामिल है ! अपना पेट पहले के ४-६ दिन तक केवल दाल,सब्जियां और मौसमी फल खाकर ही भरें ! दालों में आप सिर्फ छिलके वाली मूंग कि दाल ,अरहर या मसूर कि दाल ही ले सकतें हैं चनें या उडद कि दाल नहीं ! सब्जियों में जो इच्छा करें वही ले सकते हैं !



* गाजर,मूली,ककड़ी,पालक,पतागोभी,पके टमाटर और हरी मिर्च लेकर सलाद बना लें ! 



* सलाद पर मनचाही मात्रा में कालीमिर्च,सैंधा नमक,जीरा बुरककर और निम्बू निचोड़ कर खाएं ! बस गेहूं कि बनी रोटी छोडकर दाल,सब्जी,सलाद और एक गिलास छाछ का भोजन करते हुए घूंट घूंट करके पीते हुए पेट भरना चाहिए ! इसमें मात्रा ज्यादा भी हो जाए तो चिंता कि कोई बात नहीं ! इस प्रकार ६-७ दिन तक खाते रहें ! इसके बाद गेहूं कि बनी रोटी कि जगह चना और जौ के बने आटे कि रोटी खाना शुरू करें ! ५ किलो देशी चना और एक किलो जौ को मिलकर साफ़ करके पिसवा लें ! ६-७ दिन तक इस आटे से बनी रोटी आधी मात्रा में और आधी मात्रा में दाल,सब्जी,सलाद और छाछ लेना शुरू करें ! एक महीने बाद गेहूं कि रोटी खाना शुरू कर सकते हैं लेकिन शुरुआत एक रोटी से करते हुए धीरे धीरे बढाते जाएँ ! भादों के महीने में छाछ का प्रयोग नहीं किया जाता है इसलिए इस महीनें में छाछ का प्रयोग नां करें !!



* एरण्ड की जड़ का काढ़ा बनाकर उसको छानकर एक एक चम्मच की मात्रा में शहद के साथ दिन में तीन बार नियमित सेवन करने से मोटापा दूर होता है !!



* चित्रक कि जड़ का चूर्ण एक ग्राम की मात्रा में शहद के साथ सुबह शाम नियमित रूप से सेवन करने और खानपान का परहेज करनें से भी मोटापा दूर किया जा सकता है !!



नींबू:-

<<>>


* 25 ग्राम नींबू के रस में 25 ग्राम शहद मिलाकर 100 ग्राम गर्म पानी के साथ प्रतिदिन सुबह-शाम पीने से मोटापा दूर होता है।



* एक नींबू का रस प्रतिदिन सुबह गुनगुने पानी में मिलाकर पीने से मोटापे की बीमारी दूर होती है।।



* नींबू का रस 250 ग्राम पानी में मिलाकर थोड़ा सा नमक मिलाकर सुबह-शाम 1-2 महीने तक पीएं। इससे मोटापा दूर होता है।



* नींबू का 25 ग्राम रस और करेला का रस 15 ग्राम मिलाकर कुछ दिनों तक सेवन करने से मोटापा नष्ट होता है।



* 250 ग्राम पानी में 25 ग्राम नींबू का रस और 20 ग्राम शहद मिलाकर 2 से 3 महीने तक सेवन करने से अधिक चर्बी नष्ट होती है।



* 1 कप गर्म पानी  प्रतिदिन सुबह-शाम भोजन के बाद पीने से शरीर की चर्बी कम होती है। इसके सेवन से चर्बी कम होने के साथ-साथ गैस, कब्ज, कोलाइटिस (आंतों की सूजन) एमोबाइसिस और कीड़े भी नष्ट होते हैं।



सेब और गाजर:-

<<<<<>>>>>


* सेब और गाजर को बराबर मात्रा में कद्दूकस करके सुबह खाली पेट 200 ग्राम की मात्रा में खाने से वजन कम होता है और स्फूर्ति व सुन्दरता बढ़ती है। इसका सेवन करने के 2 घंटे बाद तक कुद नहीं खाना चाहिए।



मूली:-

<<>>


* मूली का चूर्ण 3 से 6 ग्राम शहद मिले पानी में मिलाकर सुबह-शाम पीने से मोटापे की बीमारी से छुटकारा मिलता है। मूली के 100-150 ग्राम रस में नींबू का रस मिलाकर दिन में 2 से 3 बार पीने से मोटापा कम होता है। मूली के बीजों का चूर्ण 6 ग्राम और ग्राम यवक्षार के साथ खाकर ऊपर से शहद और नींबू का रस मिला हुआ एक गिलास पानी पीने से शरीर की चर्बी घटती है। 6 ग्राम मूली के बीजों के चूर्ण को 20 ग्राम शहद में मिलाकर खाने और लगभग 20 ग्राम शहद का शर्बत बनाकर 40 दिनों तक पीने से मोटापा कम होता है। मूली के चूर्ण में शहद में मिलाकर सेवन करने से मोटापा दूर होता है।



मिश्री:-

<<>>


* मिश्री, मोटी सौंफ और सुखा धनिया बराबर मात्रा में पीसकर एक चम्मच सुबह पानी के साथ लेने से अधिक चर्बी कम होकर मोटापा दूर होता है।



चूना:-

<<>>


* बिना बुझा चूना 15 ग्राम पीसकर 250 ग्राम देशी घी में मिलाकर कपड़े में छानकर सुबह-शाम 6-6 ग्राम की मात्रा में चाटने से मोटापा कम होता है। पथरी के रोगी न खाये ....



सहजन:-

<<<>>>


* सहजन के पेड़ के पत्ते का रस 3 चम्मच की मात्रा में प्रतिदिन सेवन करने से त्वचा का ढीलापन दूर होता है और चर्बी की अधिकता कम होती है।



विजयसार:-

<<<>>>


* विजयसार के काढ़े में #शहद मिलाकर पीने से मोटापा कम होता है।



अर्जुन:-

<<>>


* अर्जुन के 2 ग्राम चूर्ण को अग्निमथ के काढ़े में मिलाकर पीने से मोटापा दूर होता है।



भृंगराज:-

<<<>>>


* भृंगराज के पेड़ के ताजे पत्ते का रस 5 ग्राम की मात्रा में सुबह पानी के साथ प्रयोग करने से मोटापा कम होता है।



शहद:-

<<>>


* 120 से 240 ग्राम शहद 100 से 200 मिलीलीटर गुनगुना पानी के साथ दिन में 3 बार लेने से शरीर का थुलथुलापन दूर होता है।



विडंग:-

<<>>


* विडंग के बीज का चूर्ण 1 से 3 ग्राम शहद के साथ दिन में 2 बार सेवन करने से मोटापा में लाभ मिलता है।

वायविंडग, सोंठ, जवाक्षार, कांतिसार, जौ और आंवले का चूर्ण शहद में मिलाकर सेवन करने से मोटापा में दूर होता है।


तुलसी:-

<<>>


* तुलसी के कोमल और ताजे पत्ते को पीसकर दही के साथ बच्चे को सेवन कराने से अधिक चर्बी बनना कम होता है। तुलसी के पत्तों के 10 ग्राम रस को 100 ग्राम पानी में मिलाकर पीने से शरीर का ढीलापन व अधिक चर्बी नष्ट होती है। तुलसी के पत्तों का रस 10 बूंद और शहद 2 चम्मच को 1 गिलास पानी में मिलाकर कुछ दिनों तक सेवन करने से मोटापा कम होता है।



बेर:-

<<>>


* बेर के पत्तों को पानी में काफी समय तक उबालकर पीने से चर्बी नष्ट होती है।



टमाटर:-

<<<>>>


* टमाटर और प्याज में थोड़ा-सा सेंधानमक डालकर खाना खाने से पहले सलाद के रूप में खाने से भूख कम लगती है और मोटापा कम होता है।



त्रिफला:-

<<<>>>


* रात को सोने से पहले त्रिफला का चूर्ण 15 ग्राम की मात्रा में हल्के गर्म पानी में भिगोकर रख दें और सुबह इस पानी को छानकर शहद मिलाकर कुछ दिनों तक सेवन करें। इससे मोटापा जल्दी दूर होता है। त्रिफला, त्रिकुटा, चित्रक, नागरमोथा और वायविंडग को मिलाकर काढ़ा में गुगुल को डालकर सेवन करें। त्रिफले का चूर्ण शहद के साथ 10 ग्राम की मात्रा में दिन में 2 बार (सुबह और शाम) पीने से लाभ होता है। 2 चम्मच त्रिफला को 1 गिलास पानी में उबालकर इच्छानुसार मिश्री मिलाकर सेवन करने से मोटापा दूर होता है। त्रिफला का चूर्ण और गिलोय का चूर्ण 1-1 ग्राम की मात्रा में शहद के साथ चाटने से पेट का बढ़ना कम होता है।



हरड़:-

<<>>


* हरड़ 500 ग्राम, 500 ग्राम सेंधानमक व 250 ग्राम कालानमक को पीसकर इसमें 20 ग्राम ग्वारपाठे का रस मिलाकर अच्छी तरह मिलाकर सूखा लें। यह 3 ग्राम की मात्रा में रात को गर्म पानी के साथ प्रतिदिन सेवन करने से मोटापे के रोग में लाभ मिलता है। हरड़ पीसकर बारीक चूर्ण बना लें और इसे नहाने से पहले पूरे शरीर पर लगाकर नहाएं। इससे पसीने के कारण आने वाली बदबू दूर होती है। हरड़, बहेड़ा, आंवला, सोंठ, कालीमिर्च, पीपल, सरसों का तेल और सेंधानमक को एक साथ पीसकर 6 महीने तक लगातार सेवन करने से मोटापा, कफ और वायु रोग समाप्त होता है।



सोंठ:-

<<>>


* सोंठ, जवाखार, कांतिसार, जौ और आंवला बराबर मात्रा में लेकर पीसकर छान लें और इसमें शहद मिलाकर पीएं। इससे मोटापे की बीमारी समाप्त हो जाती है। सोंठ, कालीमिर्च, छोटी पीपल, चव्य, सफेद जीरा, हींग, कालानमक और चीता बराबर मात्रा में लेकर अच्छी तरह से पीसकर चूर्ण बना लें। यह चूर्ण सुबह 6 ग्राम चूर्ण में गर्म पानी के साथ पीने से मोटापा कम होता है।



गिलोय:-

<<<>>>


* गिलोय, हरड़, बहेड़ा और आंवला मिलाकर काढ़ा बनाकर इसमें शुद्ध शिलाजीत मिलाकर खाने से मोटापा दूर होता है और पेट व कमर की अधिक चर्बी कम होती है। गिलोय 3 ग्राम और त्रिफला 3 ग्राम को कूटकर चूर्ण बना लें और यह सुबह-शाम शहद के साथ चाटने से मोटापा कम होता है। गिलोय, हरड़ और नागरमोथा बराबर मात्रा में मिलाकर चूर्ण बना लें। यह 1-1 चम्मच चूर्ण शहद के साथ दिन में 3 बार लेने से त्वचा का लटकना व अधिक चर्बी कम होता है।



जौ:-

<>


* जौ का रस व शहद को त्रिफले के काढ़े में मिलाकर पीने से मोटापा समाप्त होता है। जौ को 12 घंटे तक पानी में भिगोकर सूखा लें और इसका छिलका उतारकर पीसकर एक कप दूध में खीर बनाकर प्रतिदिन सुबह कुछ दिनों तक खाने से कमजोरी दूर होती है।



गुग्गुल:-

<<<>>>


* गुग्गुल, त्रिकुट, त्रिफला और कालीमिर्च बराबर मात्रा में लेकर चूर्ण बना लें और इस चूर्ण को अच्छी तरह एरण्ड के तेल में घोटकर रख लें। यह चूर्ण 3 ग्राम की मात्रा में सेवन करने से मोटापा की बीमारी ठीक होती है।

1 से 2 ग्राम शुद्ध गुग्गुल को गर्म पानी के साथ दिन में 3 बार सेवन करने से अधिक मोटापा कम होता है।


तिल:-

<<>>


* तिल के तेल से प्रतिदिन मालिश करने से शरीर पर बनी हुई अधिक चर्बी कम होती है।



सरसो:-

<<>>


* सरसो के तेल से प्रतिदिन मालिश करने से मोटापा नष्ट होता है।



दही:-

<<>>


* दही को खाने से मोटापा कम होता है।



छाछ:-

<<>>


* छाछ में कालानमक और अजवायन मिलाकर पीने से मोटापा कम होता है।



आलू:-

<<>>


* आलू को तलकर तीखे मसाले और घी में मिलाकर खाने से चिकनाई वाले पदार्थो के सेवन से उत्पन्न मोटापा दूर होता है।

आलू को उबालकर गर्म रेत में सेंकर खाने से मोटापा दूर होता है।


अपामार्ग:-

<<<>>>


* अपामार्ग के बीजों को पानी में पकाकर खाने से भूख कम लगती है और चर्बी कम होने लगती है।



कुल्थी:-

<<>>


* 100 ग्राम कुल्थी की दाल प्रतिदिन सेवन करने से चर्बी कम होती है।



पीपल:-

<<>>


* 4 पीपल पीसकर आधा चम्मच शहद मिलाकर सेवन करने से मोटापा कम होता है।



पालक:-

<<<>>>


* पालक के 25 ग्राम रस में गाजर का 50 ग्राम रस मिलाकर पीने से शरीर का फैट (चर्बी) समाप्त होती है। 50 ग्राम पालक के रस में 15 ग्राम नींबू का रस मिलाकर पीने से मोटापा समाप्त होता है।



पानी:-

<<>>


* भोजन से पहले 1 गिलास गुनगुना पानी पीने से भूख का अधिक लगना कम होता है और शरीर की चर्बी घटने लगती है।

बासी ठंडे पानी में शहद मिलाकर प्रतिदिन पीने से मोटापा में लाभ मिलता है। 250 ग्राम गुनगुने पानी में 1 नींबू का रस और 2 चम्मच शहद मिलाकर खाली पेट पीना चाहिए। इससे अधिक चर्बी घटती है और त्वचा का ढीलापन दूर होता है।


डिकामाली:-

<<<>>>>


* डिकामाली (एक तरह का गोंद) लगभग 1 ग्राम का चौथा भाग की मात्रा में गर्म पानी के साथ मिलाकर सुबह-शाम पीने से मोटापा कम होता है।



कूठ:-

<<>>


* कूठ को गुलाब जल में पीसकर पेट पर लेप करने से पेट की बढ़ती हुई अवस्था में लाभ होता है। इसका लेप हाथ, पांव पर लेप करने से सूजन कम होती है।



माधवी:-

<<<>>>


* माधवी के फूल की जड़ 10 ग्राम की मात्रा में सुबह-शाम छाछ के साथ सेवन करने से कमर पतली व सुडौल होता है।



बरना:-

<<>>


* बरना के पत्तों का साग नियामित रूप से सेवन करने से मोटापा दूर होता है।



एरण्ड:-

<<>>


* एरण्ड की जड़ का काढ़ा बनाकर 1-1 चम्मच की मात्रा में शहद के साथ दिन में 2 बार सेवन करने से मोटापा दूर होता है।

एरण्ड के पत्तों का रस हींग मिलाकर पीने और ऊपर से पका हुआ चावल खाने से अधिक चर्बी नष्ट होती है।


पिप्पली:-

<<<>>>


* पिप्पली का चूर्ण लगभग आधा ग्राम की मात्रा में सुबह-शाम शहद के साथ प्रतिदिन 1 महीने तक सेवन करने से मोटापा समाप्त होता है। पीप्पल 150 ग्राम और सेंधानमक 30 ग्राम को अच्छी तरह पीसकर कूटकर 21 खुराक बना लें। यह दिन में एक बार सुबह खाली पेट छाछ के साथ सेवन करें। इससे वायु के कारण पेट की बढ़ी हुई चर्बी कम होती है। पिप्पली के 1 से 2 दाने दूध में देर तक उबाल लें और दूध से पिप्पली निकालकर खा लें और ऊपर से दूध पी लें। इससे मोटापा कम होता है।



जौखार:-

<<<>>>


* जौखार 35 ग्राम और चित्रकमूल 175 ग्राम को अच्छी तरह पीसकर चूर्ण बना लें। यह 5 ग्राम चूर्ण एक नींबू का रस, शहद और 250 ग्राम गुनगुने पानी में मिलाकर सुबह खाली पेट लगातार 40 दिनों तक पीएं। इससे शरीर की फालतू चर्बी समाप्त हो जाती है और शरीर सुडौल होता है। जौखार का चूर्ण आधा-आधा ग्राम दिन में 3 बार पानी के साथ सेवन करने से मोटापा दूर होता है।



लुके मगसूल:-

<<<<>>>>


* 50 ग्राम लुके मगसूल को कूटकर चूर्ण बना लें और यह चूर्ण 1 ग्राम की मात्रा में सुबह पानी के साथ सेवन करें। इससे मोटापा दूर होता है। 39 माजून मुहज्जिल माजून मुहज्जिल 10 ग्राम की मात्रा में लेकर पानी के साथ रात को सोते समय पीने से पेट का बढ़ना कम होता है।



बबूल:-

<<>>


* बबूल के पत्तों को पानी के साथ पीसकर शरीर पर करने से त्वचा का ढीलापन दूर होकर मोटापा कम होता है।



सुगन्धबाला:-

<<<<>>>>


* सुगन्धबाला, नागकेशर और मोतिया के पत्तों को बारीक पीसकर शरीर पर लगाने से पसीने के कारण आने वाली बदबू दूर होती है।



चित्रक:-

<<>>


* चित्रक की जड़ का बारीक चूर्ण शहद के साथ सेवन करने से पेट की बीमारियां और मोटापा समाप्त होता है।



बेल:-

<<>>


* बेल के पत्तों के रस में शंख का चूर्ण मिलाकर लेप करने से शरीर के अन्दर से आने वाली बदबू कम हो जाती है।

बेल के पत्ते, काली अगर, खस, सुगन्धवाला और चंदन मिलाकर पीसकर शरीर पर लेप करने से शरीर की बदबू मिटती है।
बेल के पत्ते और हरड़ बारीक पीसकर लगाने से मोटापा दूर होता है।


परवल:-

<<>>


* परवल और चीते का काढ़ा बनाकर सौंफ और हींग का चूर्ण मिलाकर सेवन करने से मोटापा कम होता है।



समुद्रफेन:-

<<<>>>


* समुद्रिफेन को ब्राह्मी के रस में पीसकर शरीर पर लगाने से पसीने की बदबू समाप्त होती है।



असगंध:-

<<<>>>


* असगंध 50 ग्राम, मूसली 50 ग्राम और काली मूसली 50 की मात्रा में लेकर चूर्ण बना लें और 10 ग्राम की मात्रा में सुबह दूध के साथ लेने से मोटापे की बीमारी समाप्त होती है।



अजवायन:-

<<<>>>


* अजवायन 20 ग्राम, सेंधानमक 20 ग्राम, जीरा 20 ग्राम और कालीमिर्च 20 ग्राम को कूटकर चूर्ण बना लें और यह चूर्ण प्रतिदिन सुबह खाली पेट छाछ के साथ पीएं। इससे शरीर की अधिक चर्बी नष्ट होती है।



चावल:-

<<<>>>


* चावल का गर्म-गर्म मांड लगातार कुछ दिनों तक सेवन करने से मोटापा दूर होता है।



करेला:-

<<>>


* करेले के रस में 1 नींबू का रस मिलाकर सुबह सेवन करने से शरीर की चर्बी कम होती है।



चाय:-

<<>>


* चाय में पोदीना डालकर पीने से मोटापा कम होता है।



दालचीनी:-

<<<>>>


* एक कप पानी में आधा चम्मच दालचीनी का चूर्ण डालकर उबालतें और इसमें एक चम्मच शहद प्रतिदिन सुबह खाली पेट और रात को सोते समय खाएं। इससे शरीर का अधिक वनज कम होता है और मोटापा दूर होता है।



रस:-

<>


* फलों का रस बहुत उपयोगी है। मोटापा कम करने के लिए 6 से 8 महीने तक फलों का रस लेना लाभदायक होता है। इसके सेवन से किसी भी प्रकार के दुष्परिणामों का सामना नहीं करना पड़ता। फलों का रस कैलोरी को कम करता है जिससे स्वभाविक रूप से वसा कम हो जाती है। इससे शरीर का वजन और मोटापा कम होता है। गाजर, ककड़ी, पत्तागोभी, टमाटर, तरबूज, सेब व प्याज का रस फायदेमंद होता है।



धनिया:-

<<<>>>


* सूखा धनिया 10 ग्राम, गुलाब के सूखे फूल 20 ग्राम और मिश्री को मिलाकर चूर्ण बना लें और यह 2-2 चुटकी सुबह-शाम दूध के साथ लेने से चर्बी नष्ट होती है और मोटापा दूर होता है।



छाछ:-

<<>>


* मोटापे से परेशान व्यक्ति को प्रतिदिन छाछ पीना चाहिए।



ईसबगोल:-

<<<>>>


* ईसबगोल के नियमित सेवन करने से कोलेस्ट्राल नियंत्रित होता है और शरीर में अधिक चर्बी नहीं बनती।



अनन्नास:-

<<<<>>>>


* प्रतिदिन अनन्नास खाने से स्थूलता नष्ट होती है क्योंकि अनन्नास चर्बी को नष्ट करता है।



मोटापा कम करे यह स्पेशल चाय:--

<<<<<<<<<<<>>>>>>>>>>>


* एक चम्मच सूखा अदरक पाउडर, आधा चम्मच धनिया पाउडर, दो चम्मच गुड़, आधा चम्मच सौंफ, एक टी बैग और एक कप पानी। सौंफ को दो मिनट पानी में उबालिए और गर्म पानी में 1 मिनट के लिए टी बैग डालें। इससे फ्लेवर आ जाएगा। और चाय का स्वाद भी कुछ बदल जाएगा जो पीने में अच्छा लगेगा। आखिर में सारे पदार्थ इसमें मिला दें और गुड़ मिलाकर इसे घोलें। जब गुड़ मिल जाए तो स्वाद के साथ पीएं।



मालिश की भूमिका :--

<<<<<<>>>>>>>


* सबसे पहले मोटापे से पीड़ित रोगी को समझा देना चाहिए कि जब तक आप अपने खान-पान में सुधार नहीं करेगें, तब तक आपका मोटापा दूर नहीं हो सकता है। सादा भोजन और व्यायाम शरीर में अधिक चर्बी को पिघलाता है। मालिश उसमें सहायता करती है और रोगी के शरीर मे कमजोरी नहीं आने देती है, साथ ही चर्बी घटने पर शरीर के मांस को ढीला नहीं पड़ने देती, बल्कि मालिश शरीर को मजबूत तथा आकर्षक बना देती है। इसलिए मोटापा कम करने वाले व्यक्ति को चाहिए कि वह अपने भोजन में सुधार करे तथा प्रतिदिन व्यायाम करें। ठण्डी मालिश मोटापा दूर करने में विशेष सहायता करती है, इसके अलावा तेल मालिश या सूखी मालिश भी की जा सकती है। वैसे तेल मालिश का उपयोग कम ही करें तो अच्छा है क्योंकि तेल की मालिश तभी अधिक लाभ देती है जब रोगी उपवास कर रहा हो।



* देखा गया है कि मालिश में दलना, मरोड़ना, मांसपेशियों को मसलना, झकझोरना, खड़ी थपकी देना, तेज मुक्की देना और थपथपाना आदि विधियों के प्रयोग से शरीर की फालतू की चर्बी समाप्त हो जाती है।



* ये क्रियाएं चर्बी कम करने में महत्त्वपूर्ण साबित होती है। इसके अलावा रोगी को प्रतिदिन 20 मिनट का कटि-स्नान तथा सप्ताह में 2 बार पूरी चादर का लपेट करना चाहिए (इसमें सारे शरीर को गीली चादर में लपेटकर फिर कंबलों से लपेटा जाता है।) इसके अलावा रोगी को कभी-कभी वाष्प-स्नान और `एपसम साल्ट बाथ´ देना चाहिए।



* रोगी को उबली हुई सब्जियां, क्रीम निकला हुआ दूध, संतरा, नींबू आदि खट्टे फल तथा 1-2 चपाती नियमित रूप से कई महीने तक लेनी चाहिए। रोगी को तली और भुनी हुई चीजों को अपने भोजन से पूरी तरह दूर रखना चाहिए। उपचार के दौरान रोगी को बीच-बीच में 1-2 दिन का उपवास भी रखना चाहिए। उपवास के दिनों में केवल नींबू पानी अधिक मात्रा में पीना चाहिए। इस प्रकार के भोजन व उपचार से कुछ दिनों तक तो रोगी को कमजोरी महसूस होगी, परन्तु कुछ दिनों के अभ्यास से जब शरीर इसका आदि हो जाएगा, तब रोगी अपने को अच्छा महसूस करने लगेगा।



* जिन लोगों को मोटापा थायराइड ग्रंथि की गड़बड़ी के कारण हो गया हो, उन्हें मोटापा दूर करने के लिए क्रीम निकले दूध के स्थान पर गाय का दूध पीना चाहिए, इससे रोगी को कोई नुकसान नहीं होगा। रोगी के लिए आवश्यक यह है कि वह एक समय में ही भोजन करे और सुबह और शाम 250 ग्राम से 300 ग्राम दूध के साथ कुछ फल भी ले, इससे रोगी को जल्दी लाभ होगा।



मोटापा रोग का प्राकृतिक चिकित्सा से उपचार:-

<<<<<<<<<<<<<<<<>>>>>>>>>>>>>>


* इस रोग को ठीक करने के लिए सबसे पहले रोगी व्यक्ति को अपने भोजन करने की आदत पर संतुलन करना चाहिए और इसके बाद प्राकृतिक चिकित्सा से उपचार करना चाहिए।



* शारीरिक रूप से नियमित व्यायाम करने से काफी हद तक इस बीमारी से छुटकारा मिल सकता है।



* भूख से ज्यादा भोजन कभी नहीं करना चाहिए तथा शर्करा और चर्बी वाले पदार्थो का भोजन नहीं खाना चाहिए।



* जहां तक हो सके तो भोजन में नमक का इस्तेमाल कम करना चाहिए। यदि नमक खाना भी है तो सेंधानमक का इस्तेमाल करना चाहिए।



* अपने भोजन में साग-भाजी तथा हरी सब्जियों का रस ज्यादा लें। अंकुरित दालों का सेवन भी करते रहना चाहिए। अधिकतर गेहूं या चावल से बने पदार्थ ही खाएं। अपने आहार की मात्रा को घटाते रहना चाहिए, इससे चर्बी का बनना रुक जाता है।



* वैसे कहा जाए तो उतना ही भोजन सेवन करना चाहिए जितनी की शरीर को आवश्यकता हो। प्रतिदिन सुबह के समय में खाली पेट स्वास्थ्य पेय या पानी में शहद व नीबू डालकर हल्का गर्म पानी पीएं। इससे कुछ दिनों में ही रोगी को बहुत अधिक लाभ मिलता है।



* तांबा-चांदी-सोना के बर्तन में पानी रखकर उसे गरम या गुनगुना करके पीने से शरीर की फालतू चर्बी कम हो जाती है।



* मोटापा रोग से पीड़ित रोगी को एक गिलास पानी में तुलसी का रस मिलाकर पीना चाहिए तथा पेट पर मिट्टी की पट्टी तथा इसके कुछ देर बाद पेट पर गर्म या ठंडा सेंक करना चाहिए। रोगी को एनिमा क्रिया करके अपने पेट को भी साफ करना चाहिए।



* रोगी व्यक्ति को कुंजल क्रिया करके उसके बाद भाप स्नान करना चाहिए और सप्ताह में एक बार गीली लपेट का शरीर पर प्रयोग करना चाहिए तथा शंख प्रक्षालन, सूर्यस्नान, गर्म पादस्नान तथा सूखा घर्षण करना चाहिए। इससे मोटापा रोग कुछ ही दिनों में ठीक हो जाता है।



* सूर्यतप्त नांरगी बोतल का पानी प्रतिदिन पीने तथा गहरी सांस लेते हुए सैर पर जाने और प्रतिदिन 2 मिनट तक ठहाके लगाकर हंसने से मोटापे का रोग ठीक होने लगता है।



* मोटापे रोग को ठीक करने के लिए कई प्रकार के आसन हैं जिसको करने से यह रोग ठीक हो जाता है। ये आसन इस प्रकार हैं- भुजंगासन, शलभासन, वज्रासन, पश्चिमोत्तानासन, पवनमुक्तासन, उडि्डयान बंध, मूलबंध तथा सूर्य नमस्कार आदि।


Upcharऔर प्रयोग-