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31 अक्तूबर 2015

कलौंजी भी क्या हर मर्ज की दवाई है

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प्रक्रति ने हमें जीवन में वो सब कुछ दिया है जो वरदान स्वरूप है तभी तो किसी ने ये कहा है-क्या खूब ये कलौंजी बनाई है-जो मौत के सिवा हर मर्ज की दवाई है-कलौंजी (Nigella) एक वार्षिक पादप है जिसके बीज औषधि एवं मसाले के रूप में प्रयुक्त होते हैं-



अलग-अलग भाषा में इसके नाम-

संस्कृत-कृष्णजीरा
उर्दू - كلونجى कलौंजी
बांग्ला - कालाजीरो
मलयालम - करीम जीराकम
रूसी - चेरनुक्षा
तुर्की -çörek otu कोरेक ओतु
फारसी - शोनीज
अरबी- हब्बत-उल-सौदा, हब्बा-अल-बराकाحبه البركة,
तमिल - करून जीरागम
तेलुगु - नल्ला जीरा कारा

इसका स्वाद हल्का कड़वा व तीखा और गंध तेज होती है इसका प्रयोग विभिन्न व्यंजनों नान- ब्रेड, केक और आचारों में किया जाता है चाहे बंगाली नान हो या पेशावरी खुब्जा (ब्रेड नान) या कश्मीरी पुलाव हो कलौंजी के बीजों से जरूर सजाये जाते हैं-

कलौंजी में पोषक तत्व-

इसमें 35% कार्बोहाइड्रेट, 21% प्रोटीन और 35-38% वसा होते है। इसमें 100 ज्यादा महत्वपूर्ण पोषक तत्व होते हैं। इसमें आवश्यक वसीय अम्ल 58% ओमेगा-6 (लिनोलिक अम्ल), 0.2% ओमेगा-3 (एल्फा- लिनोलेनिक अम्ल) और 24% ओमेगा-9 (मूफा) होते हैं। इसमें 1.5% जादुई उड़नशील तेल होते है जिनमें मुख्य निजेलोन, थाइमोक्विनोन, साइमीन, कार्बोनी, लिमोनीन आदि हैं। निजेलोन में एन्टी-हिस्टेमीन गुण हैं, यह श्वास नली की मांस पेशियों को ढीला करती है, प्रतिरक्षा प्रणाली मजबूत करती है और खांसी, दमा, ब्रोंकाइटिस आदि को ठीक करती है-

थाइमोक्विनोन बढ़िया एंटी-आक्सीडेंट है, कैंसर रोधी, कीटाणु रोधी, फंगस रोधी है, यकृत का रक्षक है और असंतुलित प्रतिरक्षा प्रणाली को दुरूस्त करता है। तकनीकी भाषा में कहें तो इसका असर इम्यूनोमोड्यूलेट्री है। कलौंजी में केरोटीन, विटामिन ए, बी-1, बी-2, नायसिन व सी और केल्शियम, पोटेशियम, लोहा, मेग्नीशियम, सेलेनियम व जिंक आदि खनिज होते हैं। कलौंजी में 15 अमीनो अम्ल होते हैं जिनमें 8 आवश्यक अमाइनो एसिड हैं। ये प्रोटीन के घटक होते हैँ और प्रोटीन का निर्माण करते हैं। ये कोशिकाओं का निर्माण व मरम्मत करते हैं। शरीर में कुल 20 अमाइनो एसिड होते हैं जिनमें से आवश्यक 9 शरीर में नहीं बन सकते अतः हमें इनको भोजन द्वारा ही ग्रहण करना होता है। अमाइनो एसिड्स मांस पेशियों, मस्तिष्क और केंन्द्रीय तंत्रिका तंत्र के लिए ऊर्जा का स्रोत हैं, एंटीबॉडीज का निर्माण कर रक्षा प्रणाली को पुख्ता करते है और कार्बनिक अम्लों व शर्करा के चयापचय में सहायक होते हैं-

कैंसर में उपचार-

जेफरसन फिलाडेल्फिया स्थित किमेल कैंसर संस्थान के शोधकर्ताओं ने चूहों पर प्रयोग कर निष्कर्ष निकाला है कि कलौंजी में विद्यमान थाइमोक्विनोन अग्नाशय कैंसर की कोशिकाओं के विकास को बाधित करता है और उन्हें नष्ट करता है। शोध की आरंभिक अवस्था में ही शोधकर्ता मानते है कि शल्यक्रिया या विकिरण चिकित्सा करवा चुके कैंसर के रोगियों में पुनः कैंसर फैलने से बचने के लिए कलौंजी का उपयोग महत्वपूर्ण होगा। थाइमोक्विनोन इंटरफेरोन की संख्या में वृध्दि करता है, कोशिकाओं को नष्ट करने वाले विषाणुओं से स्वस्थ कोशिकाओं की रक्षा करता है, कैंसर कोशिकाओं का सफाया करता है और एंटी-बॉडीज का निर्माण करने वाले बी कोशिकाओं की संख्या बढ़ाता है-

कीटाणुरोधी गतिविधि-


कलौंजी का सबसे ज्यादा कीटाणुरोधी प्रभाव सालमोनेला टाइफी, स्यूडोमोनास एरूजिनोसा, स्टेफाइलोकोकस ऑरियस, एस. पाइरोजन, एस. विरिडेन्स, वाइब्रियो कोलेराइ, शिगेला, ई. कोलाई आदि कीटाणुओं पर होती है। यह ग्राम-नेगेटिव और ग्राम-पोजिटिव दोनों ही तरह के कीटाणुओं पर वार करती है। विभिन्न प्रयोगशालाओं में इसकी कीटाणुरोधी क्षमता ऐंपिसिलिन के बराबर आंकी गई। यह फंगस रोधी भी होती है-

कलौंजी में मुख्य तत्व थाइमोक्विनोन होता है। विभिन्न भेषज प्रयोगशालाओं ने चूहों पर प्रयोग करके यह निष्कर्ष निकाला है कि थाइमोक्विनोन टर्ट-ब्यूटाइल हाइड्रोपरोक्साइड के दुष्प्रभावों से यकृत की कोशिकाओं की रक्षा करता है और यकृत में एस.जी.ओ.टी व एस.जी.पी.टी. के स्राव को कम करता है-

मधुमेह प्रयोग-

कई शोधकर्ताओं ने वर्षों की शोध के बाद यह निष्कर्ष निकाला है कि कलौंजी में उपस्थित उड़नशील तेल रक्त में शर्करा की मात्रा कम करते हैं-

शोथ(सुजन ) पे प्रयोग-

कलौंजी दमा, अस्थिसंधि शोथ आदि रोगों में शोथ (इन्फ्लेमेशन) दूर करती है। कलौंजी में थाइमोक्विनोन और निजेलोन नामक उड़नशील तेल श्वेत रक्त कणों में शोथ कारक आइकोसेनोयड्स के निर्माण में अवरोध पैदा करते हैं, सूजन कम करते हैं ओर दर्द निवारण करते हैं। कलौंजी में विद्यमान निजेलोन मास्ट कोशिकाओं में हिस्टेमीन का स्राव कम करती है, श्वास नली की मांस पेशियों को ढीला कर दमा के रोगी को राहत देती हैं-

आंत्र कृमि-

शोधकर्ता कलौंजी को पेट के कीड़ो (जैसे टेप कृमि आदि) के उपचार में पिपरेजीन दवा के समकक्ष मानते हैं। पेट के कीड़ो को मारने के लिए आधी छोटी चम्मच कलौंजी के तेल को एक बड़ी चम्मच सिरके के साथ दस दिन तक दिन में तीन बार पिलाते हैं। मीठे से परहेज जरूरी है-

एच.आई.वी-

मिस्र के वैज्ञानिक डॉ. अहमद अल-कागी ने कलौंजी पर अमेरीका जाकर बहुत शोध कार्य किया, कलौंजी के इतिहास को जानने के लिए उन्होंने इस्लाम के सारे ग्रंथों का अध्ययन किया। उन्होंने माना कि कलौंजी, जो मौत के सिवा हर मर्ज को ठीक करती है, का बीमारियों से लड़ने के लिए अल्ला ताला द्वारा हमें दी गई प्रति रक्षा प्रणाली से गहरा नाता होना चाहिये। उन्होंने एड्स के रोगियों पर इस बीज और हमारी प्रति रक्षा प्रणाली के संबन्धों का अध्ययन करने के लिए प्रयोग किये। उन्होंने सिद्ध किया कि एड्स के रोगी को नियमित कलौंजी, लहसुन और शहद के केप्स्यूल (जिन्हें वे कोनीगार कहते थे) देने से शरीर की रक्षा करने वाली टी-4 और टी-8 लिंफेटिक कोशिकाओं की संख्या में आश्चर्यजनक रूप से वृध्दि होती है। अमेरीकी संस्थाओं ने उन्हें सीमित मात्रा में यह दवा बनाने की अनुमति दे दी थी-

कलौंजी-एक रामबाण दवा-

मिस्र, जोर्डन, जर्मनी, अमेरीका, भारत, पाकिस्तान आदि देशों के 200 से ज्यादा विश्वविद्यालयों में 1959 के बाद कलौंजी पर बहुत शोध कार्य हुआ है। 1996 में अमेरीका की एफ.डी.ए. ने कैंसर के उपचार, घातक कैंसर रोधी दवाओं के दुष्प्रभावों के उपचार और शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली सुदृढ़ करने के लिए कलौंजी से बनी दवा को पेटेंट पारित किया था। कलौंजी दुग्ध वर्धक और मूत्र वर्धक होती है। कलौंजी जुकाम ठीक करती है और कलौंजी का तेल गंजापन भी दूर करता है। कलौंजी के नियमित सेवन से पागल कुत्ते के काटे जाने पर भी लाभ होता है। लकवा, माइग्रेन, खांसी, बुखार, फेशियल पाल्सी के इलाज में यह फायदा पहुंचाती हैं। दूध के साथ लेने पर यह पीलिया में लाभदायक पाई गई है। यह बवासीर, पाइल्स, मोतिया बिंद की आरंभिक अवस्था, कान के दर्द व सफेद दाग में भी फायदेमंद है। कलौंजी को विभिन्न बीमारियों में इस प्रकार प्रयोग किया जाता है-

कैंसर के उपचार में कलौंजी के तेल की आधी बड़ी चम्मच को एक गिलास अंगूर के रस में मिलाकर दिन में तीन बार लें। लहसुन भी खुब खाएं। 2 किलो गेहूँ और 1 किलो जौ के मिश्रित आटे की रोटी 40 दिन तक खिलाएं। आलू, अरबी और बैंगन से परहेज़ करें-

अन्य प्रयोग-

कैंसर के उपचार में कलौंजी के तेल की आधी बड़ी चम्मच को एक गिलास अंगूर के रस में मिलाकर दिन में तीन बार लें। लहसुन भी खुब खाएं। 2 किलो गेहूँ और 1 किलो जौ के मिश्रित आटे की रोटी 40 दिन तक खिलाएं। आलू, अरबी और बैंगन से परहेज़ करें-

खाँसी व दमा छाती और पीठ पर कलौंजी के तेल की मालिश करें, तीन बड़ी चम्मच तेल रोज पीयें और पानी में तेल डाल कर उसकी भाप लें-

अवसाद और सुस्ती एक गिलास संतरे के रस में एक बड़ी चम्मच तेल डाल कर 10 दिन तक सेवन करें। आप को बहुत फर्क महसूस होगा-

स्मरणशक्ति और मानसिक चेतना एक छोटी चम्मच तेल 100 ग्राम उबले हुए पुदीने के साथ सेवन करें-

मधुमेह एक कप कलौंजी के बीज, एक कप राई, आधा कप अनार के छिलके और आधा कप पितपाप्र को पीस कर चूर्ण बना लें। आधी छोटी चम्मच कलौंजी के तेल के साथ रोज नाश्ते के पहले एक महीने तक लें-

गुर्दे की पथरी और मूत्राशय की पथरी पाव भर कलौंजी को महीन पीस कर पाव भर शहद में अच्छी तरह मिला कर रख दें। इस मिश्रण की दो बड़ी चम्मच को एक कप गर्म पानी में एक छोटी चम्मच तेल के साथ अच्छी तरह मिला कर रोज नाश्ते के पहले पियें-

उल्टी और उबकाई एक छोटी चम्मच कार्नेशन और एक बड़ी चम्मच तेल को उबले पुदीने के साथ दिन में तीन बार लें-

हृदय रोग, रक्त चाप और हृदय की धमनियों का अवरोध जब भी कोई गर्म पेय लें, उसमें एक छोटी चम्मच तेल मिला कर लें, रोज सुबह लहसुन की दो कलियां नाश्ते के पहले लें और तीन दिन में एक बार पूरे शरीर पर तेल की मालिश करके आधा घंटा धूप का सेवन करें। यह उपचार एक महीने तक लें-

सफेद दाग और कुष्ठ रोग 15 दिन तक रोज पहले सेब का सिरका मलें, फिर कलौंजी का तेल मलें-

कमर दर्द और गठिया हल्का गर्म करके जहां दर्द हो वहां मालिश करें और एक बड़ी चम्मच तेल दिन में तीन बार लें। 15 दिन में बहुत आराम मिलेगा-

सिर दर्द माथे और सिर के दोनों तरफ कनपटी के आस-पास कलौंजी का तेल लगायें और नाश्ते के पहले एक चम्मच तेल तीन बार लें कुछ सप्ताह बाद सर दर्द पूर्णतः खत्म हो जायेगा-

अम्लता और आमाशय शोथ एक बड़ी चम्मच कलौंजी का तेल एक प्याला दूध में मिलाकर रोज पांच दिन तक सेवन करने से आमाशय की सब तकलीफें दूर हो जाती है-

बाल झड़ना बालों में नीबू का रस अच्छी तरह लगाये, 15 मिनट बाद बालों को शैंपू कर लें व अच्छी तरह धोकर सुखा लें, सूखे बालों में कलौंजी का तेल लगायें एक सप्ताह के उपचार के बाद बालों का झड़ना बन्द हो जायेगा-

नेत्र रोग और कमजोर नजर रोज सोने के पहले पलकों ओर आँखो के आस-पास कलौंजी का तेल लगायें और एक बड़ी चम्मच तेल को एक प्याला गाजर के रस के साथ एक महीने तक लें-

दस्त या पेचिश एक बड़ी चम्मच कलौंजी के तेल को एक चम्मच दही के साथ दिन में तीन बार लें दस्त ठीक हो जायेगा-

रूसी 10 ग्राम कलौंजी का तेल, 30 ग्राम जैतून का तेल और 30 ग्राम पिसी मेहंदी को मिला कर गर्म करें। ठंडा होने पर बालों में लगाएं और एक घंटे बाद बालों को धो कर शैंपू कर लें-

मानसिक तनाव एक चाय की प्याली में एक बड़ी चम्मच कलौंजी का तेल डाल कर लेने से मन शांत हो जाता है और तनाव के सारे लक्षण ठीक हो जाते हैं-

स्त्री गुप्त रोग स्त्रियों के रोगों जैसे श्वेत प्रदर, रक्त प्रदर, प्रसवोपरांत दुर्बलता व रक्त स्त्राव आदि के लिए कलौंजी गुणकारी है। थोड़े से पुदीने की पत्तियों को दो गिलास पानी में डाल कर उबालें, आधा चम्मच कलौंजी का तेल डाल कर दिन में दो बार पियें। बैंगन, आचार, अंडा और मछली से परहेज रखें-

पुरूष गुप्त रोग स्वप्नदोष, स्तंभन दोष, पुरुषहीनता आदि रोगों में एक प्याला सेब के रस में आधी छोटी चम्मच तेल मिला कर दिन में दो बार 21 दिन तक पियें। थोड़ा सा तेल गुप्तांग पर रोज मलें। तेज मसालेदार चीजों से परहेज करें-

इसके अतिरिक्त सुन्दर व आकर्षक चेहरे के लिए, एक बड़ी चम्मच कलौंजी के तेल को एक बड़ी चम्मच जैतून के तेल में मिला कर चेहरे पर मलें और एक घंटे बाद चेहरे को धोलें। कुछ ही दिनों में आपका चेहरा चमक उठेगा। एक बड़ी चम्मच तेल को एक बड़ी चम्मच शहद के साथ रोज सुबह लें, आप तंदुरूस्त रहेंगे और कभी बीमार नहीं होंगे-

कलौंजी के बारे में कई प्राचीन ग्रन्थों में पढ़ने के बाद मैं भी इस निष्कर्ष पर पहुंचा हूँ कि कलौंजी एक महान औषधि है जिसमें हर रोग से लड़ने की अपार, असिमित और अचूक क्षमता है-
Upcharऔर प्रयोग-

क्या आप भी मोटापा कम करने का फार्मूला ढूढ रहें है

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यह सच है कि मोटापा कम करने का ऐसा कोई जादुई फॉर्मूला अभी तक नहीं बना है लेकिन अगर रोजमर्रा की जिंदगी में थोड़ी सावधानी बरती जाए तो इसे जरूर कम किया जा सकता है वैसे भी आज कल लोग मोटापा कम करने के लिये ना जाने कौन कौन से हथकंडे अपनाते हैं तो ऐसे में अगर आप इस आसान से घरेलू नुस्खे अपना लेगें तो इसमें कोई बुरार्इ नहीं है-


Jadui Farmula Motape ka


मैं अक्सर ब्लॉग पर देखता हूं कि तरह तरह के उपाय लोग अक्सर एक दूसरे से बांटते हैं उनमें सबसे ज्यादा मोटापा कम करने के उपाय है ये अजीब सी बात है-


आज से 15-20 साल पहले लोग पूछा करते थे कि हम मोटे कैसे हो सकते हैं...? जबकि आज लोग पूछते हैं कि हम पतले कैसे हो सकते हैं....? 

अब में और तब में बेशक बहुत अंतर आ गया है- हमारा रहन सहन पूरी तरह से बदल गया है- हमारी खाने पीने की आदत  बदल गयी है औऱ बदल गयी है हमारी जीवनशैली- 

हालांकि बाजार में इन दिनों मोटापा कम करने की हजारों दवा मौजूद हैं इनमें से आधी से ज्यादा तो सिर्फ खट्टे-मीठे चूर्ण हैं-जिन्हें खाने के बाद पता चलता है कि हम ठगे गए है- 

खैर ये तो बाजार की बात है जिसकी ज्यादा डिमांड होती है वो बाजार में बेचा जाता है-मोटापा कम करने के लिए हम अक्सर दवाओं की ओर भागते हैं-लेकिन हम कभी भी अपनी दिनचर्या को ठीक करने की बात नहीं सोचते हैं-

fast food and obesity-फास्ट फूड और मोटापा-

एक समय था जब लोग सुबह पार्कों में जाकर व्यायाम किया करते थे- लोगों का खानपान बेहद संतुलित था- लेकिन-आज चाइनिंग फास्ट फूड और साँस ने ना सिर्फ बच्चों की बल्कि बड़ों के भी पेट खराब किए हुए हैं- इसमें बाजार में मिलने वाला लाल कलर का साँस जो कि असल में सड़े कद्दू का होता है औऱ सोया साँस  जो काले रंग का होता है और चाउमीन में डला होता है सेहत के लिए बेहद खतरनाक है- लेकिन हम इन्हें लगातार खा रहे हैं औऱ पेट की बैंड बजा रहे हैं बस जिह्वा का टेस्ट नहीं बिगडना चाहिए भले पेट बिगड जाए बीमारियाँ लग जाए- इतना ही नहीं हम अपने बच्चों को भी यही खिला रहे है क्यों आप अपने ही बच्चों के दुश्मन बने है-

गलत ढंग से आहार-विहार यानी खान-पान और रहन-सहन से जब शरीर पर चर्बी चढ़ती है तो पेट बाहर निकल आता है आपकी कमर मोटी हो जाती है और कूल्हे भारी हो जाते हैं इसी अनुपात से हाथ-पैर और गर्दन पर भी मोटापा आने लगता है जबड़ों के नीचे गरदन मोटी होना और तोंद बढ़ना मोटापे के मोटे लक्षण हैं-


मोटापे से जहाँ शरीर भद्दा और बेडौल दिखाई देता है वहीं स्वास्थ्य से सम्बंधित कुछ disease(व्याधियाँ) पैदा हो जाती हैं लिहाजा ये सच है कि मोटापा किसी भी सूरत में अच्छा नहीं होता है- 

बहुत कम स्त्रियाँ मोटापे का शिकार होने से बच पाती हैं- हर समय कुछ न कुछ खाने की शौकीन, मिठाइयाँ, तले पदार्थों का अधिक सेवन करने वाली और शारीरिक परिश्रम न करने वाली स्त्रियों के शरीर पर मोटापा आ जाता है-

what causes obesity-मोटापा का क्या कारण है-

पहले की स्त्रियां तो घर में कपडे इत्यादि धो लेती थी उनकी एक्सार्साइज हो जाती थी इसलिए मोटापा नहीं होता था ...जबसे वाशिंग मशीन आई है एक मुसीबत साथ लाई है मोटापा ....कपडे मशीन में डाले और सोफे पे रक्खा रिमोट टी वी का हाथ में लिया  सीरियल नहीं छूटे बस मोटापा फिर किसको आएगा ....?


शरीर पर अधिक चर्बी बढ़ने से पेट बाहर निकल आता है और हाथ-पैर, गर्दन, कमर इत्यादि जगहों पर भी चर्बी जमा हो जाती है- जिससे शरीर बेड़ौल होने लगता हैं बहुत कम लोग ऐसे हैं जो वसा से दूर रह पाते हैं यानी लोग मिठाईयों, तले पदार्थों और स्‍नैक्स इत्यादि को आसानी से नहीं छोड़ पाते है-पहले सुबह चबा- चबा लोग चने का सेवन करते थे मुंह व्यायाम होता था और सेहत भी ठीक हो जाती थी अब नींद खुली तो बेड पे चाय और मेगी का सेवन होता है जबकि मैदा और आरारोट सिर्फ कब्ज ही बना सकता है -


भोजन के अन्त में पानी पीना भी उचित नहीं है बल्कि एक-डेढ़ घण्टे बाद ही पानी पीना चाहिए- इससे पेट और कमर पर मोटापा नहीं चढ़ता बल्कि मोटापा हो भी तो कम हो जाता है-


आपको अपना आहार भूख से थोडा कम ही लेना चाहिए- इससे पाचन भी ठीक होता है और पेट बड़ा नहीं होता है तथा पेट में गैस नहीं बने इसका भी खयाल रखना चाहिए- गैस के तनाव से तनकर पेट बड़ा होने लगता है दोनो समय शौच के लिए अवश्य जाना चाहिए-


अब मैं आपको कुछ ऐसे उपाय बताता हूं जो मोटापा कम करने में सहायत सिद्ध हो सकते हैं। और आपकी सेहत भी ठीक कर सकते हैं-

इसे भी पढ़े- बिना खर्च मोटापा घटाए -


1- पहला उपाय ये है कि आपको आलस  छोड़ना पड़ेगा और समय से विस्तर से उठ जाए - सुबह जल्दी उठने की आदात डाले औऱ सैर पर निकले-कम से कम एक घंटा सैर करें और हल्का व्यायाम करें या फिर हो सके तो तेज तेज चले-

2- सुबह उठकर गर्म पानी पीये कम से कम दो गिलास और पेट साफ होने के बाद एक घंटा कुछ ना खाए-

3- नीबूं पानी पीये अपनी सेहत हिसाब से- नमकीन या मीठा और इसमें शहद मिलाया जाए तो मोटापा तेजी से कम होता है इसके अलावा नमक कम खाये-

4- पत्ता गोभी खाये खूब बढ़िया उबालकर-

5- तुलसी के पत्तो का रस 10 बूंद और दो चम्मच शहद एक ग्लास पानी मे मिलाकर कुछ दिन पीने से मोटापा कम होता है  तली -भुनी व मैदे से बनी चीजे न खाये- ताजी सब्जियां व ताजे फल लें- खाने के बाद एक कप तेज गरम पानी घूंट लेकर पीए- मोटापा कम होगा-

6- अनामिका अंगुली के टौप भाग पर अंगूठे से दबाकर कम से कम 5 मिनट तक एक्यूप्रेशर करे- दिन में दो या तीन बार ऐसा कर सकते हैं शरीर का वेट सन्तुलित रहेगा

7- इसके अलावा अगर आप शराब का सेवन करते हैं तो इसे पीना छोड़े- अगर नहीं छोड़ सकते तो कम कर दें- और साथ ही इसके साथ तली भुनी चीजे खाना बंद करें- इसकी जगह सलाद खाए- और अगर आप मांसाहारी है तो आप- रोस्टेड चिकन खाये- वो भी एक या दो पीस और हां...इस दिन एक घंटा ज्यादा व्यायाम करना ना भूले-

8- खाना खाते समय कभी पानी न पीएं- खाने के कम से कम 10-15 मिनट बाद गुनगुना पानी पीएं- 

9- बादी या वात पैदा करने वाले पदार्थ जैसे चावल, अरबी, मीट आदि का सेवन कम ही करें और रात को तो बिल्कुल न खाएं- खाने के बाद टी.वी नहीं देखें और न तत्काल सोएं बल्कि कुछ देर टहलें-

10- हफ्ते में एक बार गर्म पानी से पेट पर सेक करें- ऎसा करने से पसीना अधिक आएगा और चर्बी कम होगी- पेट की स्किन(Abdominal Skin) में कसाव आता है-

11- आप अपने खाने में प्रोटीन की मात्रा बढाएं- ये पचने में ज्यादा समय लेते हैं और पेट देर तक भरा रहता है- अंडे का सफेद भाग, फैट फ्री दूध व दही, ग्रिल्ड फिश और सब्जियां आपको स्लिम व फिट बनाएंगी-

12- दोपहर और रात के बीच में भूख लगने पर तले स्नेक्स खाने के बजाय ग्रीन या ब्लैक टी पिएं-इसमें Thaynain(थायनाइन) नामक अमीनो एसिड होता है जो मस्तिष्क में रिलैक्स केमिकल्स(Relax Chemicals) का स्त्राव करता है और आपकी भूख पर कंट्रोल करता है तथा गर्भावस्था के समय पेट पर तेल से धीरे-धीरे मालिश करते रहना चाहिए-प्रसव बाद हल्के दबाव के साथ पेट को बांध कर रखें- ऎसा करने पेट ज्यादा उभरेगा नहीं-

13- भोजन में गेहूं के आटे की चपाती लेना बन्द करके जौ-चने के आटे की चपाती लेना शुरू कर दें- इसका अनुपात है 10 किलो चना व 2 किलो जौ- इन्हें मिलाकर पिसवा लें और इसी आटे की चपाती खाएं- इससे सिर्फ पेट और कमर ही नहीं सारे शरीर का मोटापा कम हो जाएगा-

14- पेट व कमर का आकार कम करने के लिए सुबह उठने के बाद या रात को सोने से पहले नाभि के ऊपर के उदर भाग को 'बफारे की भाप' से सेंक करना चाहिए-इस हेतु एक तपेली पानी में एक मुट्ठी अजवायन और एक चम्मच नमक डालकर उबलने रख दें और जब भाप उठने लगे- तब इस पर जाली या आटा छानने की छन्नी रख दें- दो छोटे नैपकिन या कपड़े ठण्डे पानी में गीले कर निचोड़ लें और तह करके एक-एक कर जाली पर रख गरम करें और पेट पर रखकर सेंकें- प्रतिदिन 10 मिनट सेंक करना पर्याप्त है- कुछ दिनो में पेट का आकार घटने लगेगा-

15- अगर आप Pot-bellied obesity(थुलथुले मोटापे)से परेशान हैं तो लहसुन की दो कलियां भून लें उसमें सफेद जीरा व सौंफ तथा सैंधा नमक मिलाकर चूर्ण बना लें- इसका सेवन सुबह खाली पेट गर्म पानी से करें- लहसुन की चटनी खाना चाहिए और लहसुन को कुचलकर पानी का घोल बनाकर पीना चाहिए- लहसुन की पांच-छ: कलियां पीसकर पानी  में भिगो दें- सुबह पीस लें और उसमें भुनी हींग और अजवाइन व सौंफ के साथ ही सोंठ व सेंधा नमक, पुदीना मिलाकर चूर्ण बना लें- 5 ग्राम चूर्ण रोज फांकना चाहिए-


एक और जादुई फार्मूला भी अपनाये-

Log Jadui Farmula Dhuudh rahe hai Motape ka


यदि आप इस चाय को अगर आप नियमित पीयेगे -तो आप देखते ही देखते पतले हो जायेगे - चलो आपको बता ही देते  है कि कैसे बनाई जाती है ये हनी एंड सिनामन चाय(Honey and Cinnamon Tea)-


सामग्री-

शहद - 2 चम्‍मच
दालचीनी - 1 चम्‍मच
पानी - एक कप यानी 237 मिलीलीटर

व‍िधि-

1 कप पानी में 1 भाग दालचीनी और 1 चम्‍मच शहद मिला कर खौला लें अब एक कप में दूसरा भाग दालचीनी डाल कर उसके ऊपर से खौलाया हुआ पानी उडे़लें- फिर इसे ढंक दें और पीने लायक ठंडा होने दें- जब पानी ठंडा हो जाए तब उसमें शहद मिला कर मिक्‍स करें- रात को सोने से पहले आधा कप चाय पियें और आधी कप चाय को ठंडा हो जाने के बाद फ्रिज में रख दें- फिर बची हुई चाय को दूसरे दिन बिना गरम किये हुए पियें-

इसे भी पढ़े-ग्रीन टी क्या है और केसे इसे बनाये -


अन्य कुछ और प्रयोग- 


केवल सेवफल का ही आहार में सेवन करने से लाभ होता है- अरनी के पत्तों का 20 से 50 मि.ली. रस दिन में तीन बार पीने से स्थूलता दूर होती है-

चंद्रप्रभावटी की 2-2 गोलियाँ रोज दो बार गोमूत्र के साथ लेने से एवं दूध-भात का भोजन करने से 'डनलप' जैसा शरीर भी घटकर छरहरा हो जायेगा-

आरोग्यवर्धिनीवटी की 3-3 गोली दो बार लेने से व 2 से 5 ग्राम त्रिफला का रात में सेवन करने से भी मोटापा कम होता है- इस दौरान केवल मूँग, खाखरे, परमल का ही आहार लें साथ में हल्का सा व्यायाम व योगासन करना चाहिए-

एक गिलास कुनकुने पानी में आधे नींबू का रस, दस बूँद अदरक का रस एवं दस ग्राम शहद मिलाकर रोज सुबह नियमित रूप से पीने से मोटापे का नियंत्रण करना सहज हो जाता है-

मोटापा घटाने के लिए कुछ आयुर्वेदिक उपाय-

गेहूं ,चावल,बाजरा और साबुत मूंग को समान मात्रा में लेकर सेककर इसका दलिया बना लें ! इस दलिये में अजवायन 20 ग्राम तथा सफ़ेद तिल 50 ग्राम भी मिला दें ! 50 ग्राम दलिये को 400 मि.ली.पानी में पकाएं ! स्वादानुसार सब्जियां और हल्का नमक मिला लें ! नियमित रूप से एक महीनें तक इस दलिये के सेवन से मोटापा और मधुमेह में आश्चर्यजनक लाभ होता है-

अश्वगंधा के एक पत्ते को हाथ से मसलकर गोली बनाकर प्रतिदिन सुबह,दोपहर,शाम को भोजन से एक घंटा पहले या खाली पेट जल के साथ निगल लें ! एक सप्ताह के नियमित सेवन के साथ फल,सब्जियों,दूध,छाछ और जूस पर रहते हुए कई किलो वजन कम किया जा सकता है -

मूली के रस में थोडा नमक और निम्बू का रस मिलाकर नियमित रूप से पीने से मोटापा कम हो जाता है और शरीर सुडौल हो जाता है -

आहार में गेहूं के आटे और मैदा से बने सभी व्यंजनों का सेवन एक माह तक बिलकुल बंद रखें तथा इसमें रोटी भी शामिल है अब  अपना पेट पहले के 4-6 दिन तक केवल दाल,सब्जियां और मौसमी फल खाकर ही भरें और दालों में आप सिर्फ छिलके वाली मूंग कि दाल ,अरहर या मसूर कि दाल ही ले सकतें हैं चनें या उडद कि दाल नहीं तथा सब्जियों में जो इच्छा करें वही ले सकते हैं  गाजर,मूली,ककड़ी,पालक,पतागोभी,पके टमाटर और हरी मिर्च लेकर सलाद बना लें . सलाद पर मनचाही मात्रा में कालीमिर्च,सैंधा नमक,जीरा बुरककर और निम्बू निचोड़ कर खाएं  बस गेहूं कि बनी रोटी छोडकर दाल,सब्जी,सलाद और एक गिलास छाछ का भोजन करते हुए घूंट घूंट करके पीते हुए पेट भरना चाहिए . इसमें मात्रा ज्यादा भी हो जाए तो चिंता कि कोई बात नहीं . इस प्रकार 6-7 दिन तक खाते रहें . इसके बाद गेहूं कि बनी रोटी कि जगह चना और जौ के बने आटे कि रोटी खाना शुरू करें फिर  5 किलो देशी चना और एक किलो जौ को मिलकर साफ़ करके पिसवा लें ! 6-7 दिन तक इस आटे से बनी रोटी आधी मात्रा में और आधी मात्रा में दाल,सब्जी,सलाद और छाछ लेना शुरू करें .एक महीने बाद गेहूं कि रोटी खाना शुरू कर सकते हैं लेकिन शुरुआत एक रोटी से करते हुए धीरे धीरे बढाते जाएँ . भादों के महीने में छाछ का प्रयोग नहीं किया जाता है इसलिए इस महीनें में छाछ का प्रयोग नां करें -..

एरण्ड की जड़ का काढ़ा बनाकर उसको छानकर एक एक चम्मच की मात्रा में शहद के साथ दिन में तीन बार नियमित सेवन करने से मोटापा दूर होता है -

चित्रक कि जड़ का चूर्ण एक ग्राम की मात्रा में शहद के साथ सुबह शाम नियमित रूप से सेवन करने और खानपान का परहेज करनें से भी मोटापा दूर किया जा सकता है -

बिना बुझा चूना 15 ग्राम पीसकर 250 ग्राम देशी घी में मिलाकर कपड़े में छानकर सुबह-शाम 6-6 ग्राम की मात्रा में चाटने से मोटापा कम होता है-

सहजन के पेड़ के पत्ते का रस 3 चम्मच की मात्रा में प्रतिदिन सेवन करने से त्वचा का ढीलापन दूर होता है और चर्बी की अधिकता कम होती है-

अर्जुन के 2 ग्राम चूर्ण को अग्निमथ के काढ़े में मिलाकर पीने से मोटापा दूर होता है-

भृंगराज के पेड़ के ताजे पत्ते का रस 5 ग्राम की मात्रा में सुबह पानी के साथ प्रयोग करने से मोटापा कम होता है-

विडंग के बीज का चूर्ण 1 से 3 ग्राम शहद के साथ दिन में 2 बार सेवन करने से मोटापा में लाभ मिलता है।

वायविंडग, सोंठ, जवाक्षार, कांतिसार, जौ और आंवले का चूर्ण शहद में मिलाकर सेवन करने से मोटापा में दूर होता है-

तुलसी के कोमल और ताजे पत्ते को पीसकर दही के साथ बच्चे को सेवन कराने से अधिक चर्बी बनना कम होता है। तुलसी के पत्तों के 10 ग्राम रस को 100 ग्राम पानी में मिलाकर पीने से शरीर का ढीलापन व अधिक चर्बी नष्ट होती है।तथा तुलसी के पत्तों का रस 10 बूंद और शहद 2 चम्मच को 1 गिलास पानी में मिलाकर कुछ दिनों तक सेवन करने से मोटापा कम होता है-

रात को सोने से पहले त्रिफला का चूर्ण 15 ग्राम की मात्रा में हल्के गर्म पानी में भिगोकर रख दें और सुबह इस पानी को छानकर शहद मिलाकर कुछ दिनों तक सेवन करें। इससे मोटापा जल्दी दूर होता है। त्रिफला, त्रिकुटा, चित्रक, नागरमोथा और वायविंडग को मिलाकर काढ़ा में गुगुल को डालकर सेवन करें। त्रिफले का चूर्ण शहद के साथ 10 ग्राम की मात्रा में दिन में 2 बार (सुबह और शाम) पीने से लाभ होता है-

हरड़ 500 ग्राम, 500 ग्राम सेंधानमक व 250 ग्राम कालानमक को पीसकर इसमें 20 ग्राम ग्वारपाठे का रस मिलाकर अच्छी तरह मिलाकर सूखा लें। यह 3 ग्राम की मात्रा में रात को गर्म पानी के साथ प्रतिदिन सेवन करने से मोटापे के रोग में लाभ मिलता है-

सोंठ, जवाखार, कांतिसार, जौ और आंवला बराबर मात्रा में लेकर पीसकर छान लें और इसमें शहद मिलाकर पीएं। इससे मोटापे की बीमारी समाप्त हो जाती है-

सोंठ, कालीमिर्च, छोटी पीपल, चव्य, सफेद जीरा, हींग, कालानमक और चीता बराबर मात्रा में लेकर अच्छी तरह से पीसकर चूर्ण बना लें। यह चूर्ण सुबह 6 ग्राम चूर्ण में गर्म पानी के साथ पीने से मोटापा कम होता है-

गिलोय, हरड़, बहेड़ा और आंवला मिलाकर काढ़ा बनाकर इसमें शुद्ध शिलाजीत मिलाकर खाने से मोटापा दूर होता है और पेट व कमर की अधिक चर्बी कम होती है-

गिलोय 3 ग्राम और त्रिफला 3 ग्राम को कूटकर चूर्ण बना लें और यह सुबह-शाम शहद के साथ चाटने से मोटापा कम होता है-

गिलोय, हरड़ और नागरमोथा बराबर मात्रा में मिलाकर चूर्ण बना लें। यह 1-1 चम्मच चूर्ण शहद के साथ दिन में 3 बार लेने से त्वचा का लटकना व अधिक चर्बी कम होता है-

गुग्गुल, त्रिकुट, त्रिफला और कालीमिर्च बराबर मात्रा में लेकर चूर्ण बना लें और इस चूर्ण को अच्छी तरह एरण्ड के तेल में घोटकर रख लें। यह चूर्ण 3 ग्राम की मात्रा में सेवन करने से मोटापा की बीमारी ठीक होती है-

तिल के तेल से प्रतिदिन मालिश करने से शरीर पर बनी हुई अधिक चर्बी कम होती है-

दही को खाने से मोटापा कम होता है।तथा छाछ में कालानमक और अजवायन मिलाकर पीने से मोटापा कम होता है-

100 ग्राम कुल्थी की दाल प्रतिदिन सेवन करने से चर्बी कम होती है-

पालक के 25 ग्राम रस में गाजर का 50 ग्राम रस मिलाकर पीने से शरीर का फैट (चर्बी) समाप्त होती है। 50 ग्राम पालक के रस में 15 ग्राम नींबू का रस मिलाकर पीने से मोटापा समाप्त होता है-

डिकामाली (एक तरह का गोंद) लगभग 1 ग्राम का चौथा भाग की मात्रा में गर्म पानी के साथ मिलाकर सुबह-शाम पीने से मोटापा कम होता है-

एरण्ड की जड़ का काढ़ा बनाकर 1-1 चम्मच की मात्रा में शहद के साथ दिन में 2 बार सेवन करने से मोटापा दूर होता है।तथा एरण्ड के पत्तों का रस हींग मिलाकर पीने और ऊपर से पका हुआ चावल खाने से अधिक चर्बी नष्ट होती है। एरंड को अंडी भी कहा जाता है -

पिप्पली का चूर्ण लगभग आधा ग्राम की मात्रा में सुबह-शाम शहद के साथ प्रतिदिन 1 महीने तक सेवन करने से मोटापा समाप्त होता है-

पीप्पल 150 ग्राम और सेंधानमक 30 ग्राम को अच्छी तरह पीसकर कूटकर 21 खुराक बना लें। यह दिन में एक बार सुबह खाली पेट छाछ के साथ सेवन करें। इससे वायु के कारण पेट की बढ़ी हुई चर्बी कम होती है-

पिप्पली के 1 से 2 दाने दूध में देर तक उबाल लें और दूध से पिप्पली निकालकर खा लें और ऊपर से दूध पी लें। इससे मोटापा कम होता है-

जवाखार  35 ग्राम और चित्रकमूल 175 ग्राम को अच्छी तरह पीसकर चूर्ण बना लें। यह 5 ग्राम चूर्ण एक नींबू का रस, शहद और 250 ग्राम गुनगुने पानी में मिलाकर सुबह खाली पेट लगातार 40 दिनों तक पीएं। इससे शरीर की फालतू चर्बी समाप्त हो जाती है और शरीर सुडौल होता है। या फिर जौखार का चूर्ण आधा-आधा ग्राम दिन में 3 बार पानी के साथ सेवन करने से मोटापा दूर होता है-

प्रतिदिन अनन्नास खाने से स्थूलता नष्ट होती है क्योंकि अनन्नास चर्बी को नष्ट करता है-

मोटापा कम करेगी  यह स्पेशल चाय एक चम्मच सूखा अदरक पाउडर, आधा चम्मच धनिया पाउडर, दो चम्मच गुड़, आधा चम्मच सौंफ, एक टी बैग और एक कप पानी। सौंफ को दो मिनट पानी में उबालिए और गर्म पानी में 1 मिनट के लिए टी बैग डालें। इससे फ्लेवर आ जाएगा। और चाय का स्वाद भी कुछ बदल जाएगा जो पीने में अच्छा लगेगा। आखिर में सारे पदार्थ इसमें मिला दें और गुड़ मिलाकर इसे घोलें। जब गुड़ मिल जाए तो स्वाद के साथ पीएं-

आपको दूर करना हो शूगर या फिर मोटापा या आ रही हो कैलोरी की दिक्कत तीनों मर्ज में स्टीविया का करेंगे यूज तो होगा लाभ भरपूर-


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विशेष-

सबसे पहले मोटापे से पीड़ित रोगी को समझना चाहिए कि जब तक आप अपने खान-पान में सुधार नहीं करेगें, तब तक आपका मोटापा दूर नहीं हो सकता है- सादा भोजन और व्यायाम शरीर में अधिक चर्बी को पिघलाता है- मालिश उसमें सहायता करती है और रोगी के शरीर मे कमजोरी नहीं आने देती है, साथ ही चर्बी घटने पर शरीर के मांस को ढीला नहीं पड़ने देती, बल्कि मालिश शरीर को मजबूत तथा आकर्षक बना देती है- इसलिए मोटापा कम करने वाले व्यक्ति को चाहिए कि वह अपने भोजन में सुधार करे तथा प्रतिदिन व्यायाम करें- ठण्डी मालिश मोटापा दूर करने में विशेष सहायता करती है, इसके अलावा तेल मालिश या सूखी मालिश भी की जा सकती है- वैसे तेल मालिश का उपयोग कम ही करें तो अच्छा है क्योंकि तेल की मालिश तभी अधिक लाभ देती है जब रोगी उपवास कर रहा हो-

रोगी को उबली हुई सब्जियां, क्रीम निकला हुआ दूध, संतरा, नींबू आदि खट्टे फल तथा 1-2 चपाती नियमित रूप से कई महीने तक लेनी चाहिए रोगी को तली और भुनी हुई चीजों को अपने भोजन से पूरी तरह दूर रखना चाहिए- उपचार के दौरान रोगी को बीच-बीच में 1-2 दिन का उपवास भी रखना चाहिए- उपवास के दिनों में केवल नींबू पानी अधिक मात्रा में पीना चाहिए- इस प्रकार के भोजन व उपचार से कुछ दिनों तक तो रोगी को कमजोरी महसूस होगी, परन्तु कुछ दिनों के अभ्यास से जब शरीर इसका आदि हो जाएगा, तब रोगी अपने को अच्छा महसूस करने लगेगा-

जिन लोगों को मोटापा थायराइड ग्रंथि की गड़बड़ी के कारण हो गया हो, उन्हें मोटापा दूर करने के लिए क्रीम निकले दूध के स्थान पर गाय का दूध पीना चाहिए, इससे रोगी को कोई नुकसान नहीं होगा- रोगी के लिए आवश्यक यह है कि वह एक समय में ही भोजन करे और सुबह और शाम 250 ग्राम से 300 ग्राम दूध के साथ कुछ फल भी ले, इससे रोगी को जल्दी लाभ होगा-


Upcharऔर प्रयोग -

30 अक्तूबर 2015

सेक्स लाइफ को बेहतर करे इन सुपर-फ़ूड से -

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ज्यो-ज्यो उम्र बढती जाती है पुरुष अपनी सेक्स लाइफ बढाने के लिए तरह -तरह की दवाये मोदक पाक ,रसायन का इस्तेमाल करता चला आ रहा है एक होड़ सी है कि कैसे अधिक लम्बे समय तक कामशक्ति स्थिर रहे -वायग्रा आदि की जरुरत से बचे कर कैसे अपनी Sex Power को बरकरार रख सकते है इस प्रकार के कुछ सुपर-फ़ूड (Super-Food ) के बारे में-



Improve Sex Life of these super-foods


प्रतिदिन लहसुन (Garlic) का इस्तेमाल अवस्य करे जो लोग लहसुन का सेवन करते है उनकी कामशक्ति अधिक समय तक स्थिर देखी गई है -कामेच्छा बढाने में लहसुन अपनी भूमिका निभाता है -लहसुन में मौजूद पोषक तत्व जननांगो में Blood Circulation को तेज करता है और आपकी Performance अधिक बढ़ जाती है -

पालक का सेवन भी आपकी Performance को बढ़ा देता है वैसे सबसे उत्तम है पालक का सूप (Spinach Soup) ले फिर भी आप पालक को जीवन में किसी भी तरीके से सम्मलित करे -इसमें एमिनो एसिड (amino acid ) और फोलेट(Folate ) पाया जाता है इसका भी Blood Circulation बढाने में एक बहुत बड़ा योगदान है -

साधारण सी दिखने वाली भिन्डी को कौन नहीं जानता है लेकिन आपको पता है भिन्डी में जिंक और विटामिन भी अधिक मात्रा में पाया जाता है इसके भरपूर सेवन से भी पुरुष सेक्स-समस्याओं से निजात पा सकते है -जिंक की कमी से होने वाली इरेक्टाइल डिस्फंक्शन(Erectile dysfunction ) यानी उत्तेजना की कमी को भिंडी के सेवन से दूर किया जा सकता है-भिंडी के सेवन से थकान दूर होती है और आपकी यौन शक्ति बढ़ती है-

भरपूर मात्रा में विटामिन ए से भरपूर गाजर (Carrots ) भी आपके जीवन में Sexual Performance को बढ़ा देता है -गाजर में sperm बढाने का गुण है इसे कच्चा भी ले सकते है या फिर गाजर का सूप भी लाभदायक है -

चुकंदर भी आपके बेडरूम की Performance के लिए लाभदायक है ये भी आपके जननांगो में Blood Circulation बढाता है -इसके सेवन से हार्मोंस का संतुलन बरकरार रहता है-बेडरूम में होने वाली Slow- Performance को चुंकदर के सेवन से ठीक किया जा सकता है-

लहसुन की तरह प्याज (onion ) भी कई पोषक तत्वों से भरपूर है।  कामेच्छा और Genitals को सेहतमंद रखने में प्याज बहुत कारगर है-

ब्रोकली (Broccoli) का फायदा भी पालक की तरह ही होता है।Blood Circulation को बेहतर करने से लेकर Lower blood pressure को भी ब्रोकली के सेवन से सामान्य रखा जा सकता है।  ब्रोकली के सेवन से बहुत मेहनत किए बिना भी बेड पर देर तक बेहतर Perform कर सकते हैं-

टमाटर(tomato) में मौजूद Liopin से कामेच्छा बढ़ती है। पुरुषों में उत्तेजना की समस्या को दूर करने के साथ ही टमाटर के सेवन से पुरुष देर तक Excited रहते हैं।  पुरुषों में होने वाले Prostate cancer को भी टमाटर के सेवन से दूर किया जा सकता है-

Synthesis Post-

पीपल कितने रोग में लाभकारी -

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पीपल के पत्तों तथा छाल का प्रयोग करने से व्यक्ति बहुत सी बीमारियों से बचा रह सकता है। बीमारियों से बचने का मतलब है स्वस्थ शरीर और ऐसा शरीर ही बहुत समय तक जीवित रह सकता है-यदि हम उनके मूल्य तथा गुणों को पहचान कर लाभ उठाना नहीं चाहते तो इसमें किसका दोष -



                                               ‘‘यत्राश्वत्था प्रतिबुद्धा अभूतन्’’
                                               ‘‘अश्वत्थ व कारणं प्राणवायु..’’

मतलब है कि पीपल का वृक्ष ज्ञानी-ध्यानी लोगों के लिए सब कुछ देता है-जहां यह वृक्ष होता है वहां प्राणवायु मौजूद रहती है। यह बात सच भी मालूम पड़ती है कि आज भी साधु संत और ज्ञानी-ध्यानी लोग पीपल के पेड़ के नीचे कुटिया बनाते तथा धूनी रमाते हैं। वे पीपल की लकड़ी जलाते हैं और रूखा-सूखा खाकर भी दीर्घजीवी होते थे-

पीपल का बूटा-बूटा और पत्ता-पत्ता हमें निरोग बनाता है, स्वस्थ रखता है और लम्बी आयु प्रदान करता है-

पीपल के वृक्ष की विशेषताएं :-


दमा तथा तपेदिक (टी.बी) के रोगियों के लिए पीपल अमृत के समान है। कहा जाता है कि दमा तथा तपेदिक के रोगियों को पीपल के पत्तों की चाय पीनी चाहिए। पीपल की छाल को सुखा कर उसका चूर्ण शहद के साथ लेना चाहिए। जड़ को पानी में उबालकर स्नान करना चाहिए। ये गुण अन्य किसी वृक्ष में नहीं पाए जाते है -

यदि व्यक्ति में नपुंसकता का दोष मौजूद है और वह सन्तान उत्पन्न करने में असमर्थ है तो उसे शमी वृक्ष की जड़ या आसपास उगने वाला पीपल के पेड़ की जटा को औटाकर उसका क्वाथ (काढ़ा) पीना चाहिए। पीपल के जड़ तथा जटा में पुरुषत्व प्रदान करने के गुण विद्यमान हैं-

चर्म-विकारों को जैसे-कुष्ठ, फोड़े-फुन्सी दाद-खाज और खुजली को नष्ट करने वाला है। वैद्य लोग पीपल की छाल घिसकर चर्म रोगों पर लगाने की राय देते हैं। कुष्ठ रोग में पीपल के पत्तों को पीसकर कुष्ठ वाले स्थान पर लगाया जाता है तथा पत्तों का जल सेवन किया जाता है। हमारे ग्रंथों में तो यहां तक लिखा गया है कि पीपल के वृक्ष के नीचे दो घंटे प्रतिदिन नियमित रूप से आसन लगाने से हर प्रकार के त्वचा रोग से छुटकारा मिल जाता है-

विभिन्न रोगों में आजमाए :-


अपच में -


भोजन न पचने की हालत में पेट में दर्द, व्याकुलता जी मिचलाना या कई बार उल्टियां हो जाने की शिकायत हो जाती है। भूख खत्म हो जाती है तथा पेट में गैस अधिक मात्रा में बनने लगती है। कभी-कभी पेट में मरोड़-सा मालूम पड़ता है और जलन के साथ पीड़ा होती है। अम्ल बनने लगता है जो डकारें भी पैदा करता है-

उपचार :-


पीपल के फल 20 ग्राम, जीरा 5 ग्राम, काली मिर्च 5 ग्राम, सोंठ 10 ग्राम, सेंधा नमक 5 ग्राम-सबको अच्छी तरह सुखा लें। फिर पीसकर चूर्ण बनाकर शीशी में रख लें। इसमें से प्रतिदिन सुबह-शाम एक-एक चम्मच चूर्ण गरम पानी के साथ लें। भोजन के बाद भी इस चूर्ण को खाने से काफी लाभ होता है-

आठ लौंग, दो हरड़, चार फल पीपल के तथा दो चुटकी सेंधा नमक-सबको पीसकर चूर्ण बना लें। सुबह-शाम इस चूर्ण का प्रयोग भोजन के बाद करें-

अजयवायन, छोटी हर्र, हींग (2 रत्ती) तथा पीपल की छाल सब 10-10 ग्राम की मात्रा में लेकर पीसकर चूर्ण बना लें। इसमें से आधा चम्मच चूर्ण भोजन के बाद गरम पानी से सेवन करें-

पीपल के पत्तों को कुचल कर एक चम्मच रस निकाल लें। उसमें प्याज का रस आधा चम्मच मिलाएं। दोनों का सेवन सुबह-शाम करें-

पीपल के पत्तों को लेकर सुखा लें। फिर कूट-पीस कर चूर्ण बना लें। एक चम्मच चूर्ण शहद के साथ सुबह-शाम सेवन करें

अजीर्ण रोग में :-


अजीर्ण का रोग हो जाने पर भूख नहीं लगती। खाना भी ठीक से हजम नहीं होता। पेट फूल जाता है और कब्ज के कारण पेट में दर्द होने लगता है। प्यास अधिक लगती है तथा पेट में बार-बार दर्द हो जाता है। जी मिचलाना, बार-बार डकारें आना, पेट में गैस का बनना, सुस्ती, सिर में भारीपन आदि अजीर्ण रोग के प्रमुख लक्षण हैं-

उपचार:-


पीपल की छाल, चार नग लौंग, दो हरड़ तथा एक चुटकी हींग-चारों चीजों को पानी में उबालकर काढ़ा बनाकर सेवन करें।

खट्टी डकारें आती हों तो पीपल के पत्तों को जलाकर उसकी भस्म में आधा नीबू निचोड़ कर सेवन करें।

पीपल के दो फल (गूलर) एक गांठ की दो कलियां लहसुन थोड़ी-सी अदरक, जरा सा हरा धनिया, पुदीना तथा काला नमक सबकी चटनी बनाकर सुबह-शाम भोजन के साथ या बाद में सेवन करें।

पीपल की छाल, जामुन की छाल तथा नीम की छाल तीनों छालों को थोड़ी-छोड़ी मात्रा में लेकर कूट लें। फिर काढ़ा बनाकर सेवन करें। यह काढ़ा पेट के हर रोग के लिए उत्तम दवा है।

एक चम्मच राई, थोड़ी-सी मेथी तथा पीपल की जड़ की छाल-तीनों चीजों को कूट कर काढ़ा बनाकर सेवन करें।

अरुचि में :-


पेट हर समय भारी-भारी रहता है। भोजन लेने को मन करता है लेकिन खाते समय भीतर से जी भोजन को ग्रहण नहीं करता। मुंह में लार आ जाती है। फीकी तथा खट्टी डकारें आती है। यदि यह रोग बराबर बना रहता है तो रोगी को दूसरे रोग भी घेर लेते हैं-

उपचार:-


पीपल के आठ फल सुखाकर पीस लें। इनमें दो चम्मच अजवायन, एक रत्ती हींग, एक चम्मच सोंठ, जरा-सा काला नमक मिला लें। इस चूर्ण में से एक चम्मच चूर्ण सुबह और एक शाम को भोजन के बाद गरम पानी से लें।

पीपल की छाल 10 ग्राम, पीपल (दवा) 5 ग्राम, सोंठ 5 ग्राम-तीनों को महीन पीसकर चूर्ण बना लें। इसमें से एक चम्मच चूर्ण का सेवन दोपहर के बाद करें।

अम्लपित्त:-


तेज, कठोर, खट्टे गरिष्ठ तथा देर से पचने वाले पदार्थों को खाने से पेट में अम्लपित्त बढ़ जाता है। कुछ लोगों को घी, तेल, मिर्च मसाले तथा मांस-मछली खाने का बहुत शौक होता है। पेट तथा सीने में जलन होती है। कभी-कभी आंतों में हल्के घाव बन जाते हैं। भोजन हजम होने के समय पित्त अधिक मात्रा में बनना शुरू हो जाता है। कभी खट्टी तथा कभी फीकी डकारें आने लगती हैं-

उपचार:-

पीपल की थोड़ी-सी कोंपलें, मुलहठी का चूर्ण आधा चम्मच तथा बच का चूर्ण 2 रत्ती-तीनों की चटनी बनाकर शहद के साथ सेवन करें-

पीपल की छाल को सुखाकर पीस लें। उसमें जरा-सी हींग, जरा सा सेंधा नमक तथा जरा-सी अजवायन मिलाकर गरम पानी के साथ सेवन करें।

पीपल के चार सूखे फल, सफेद जीरा, धनिया तीनों 10-10 ग्राम लेकर कूट पीसकर चूर्ण बना लें। इसमें से एक-एक चम्मच भर चूर्ण सुबह-शाम भोजन से पहले करें। गरम पानी से साथ सेवन करे -

10 फल पीपल मुनक्का 50 ग्राम, सौंफ 25 ग्राम, काला नमक 5 ग्राम-सबको पीसकर रख लें। इसमें से एक चम्मच भर पाउडर भोजन के बाद सेवन करें-

पेट की गैस :-



पेट में बहुत अधिक वायु भर जाती है। उसे सांस लेने में कष्ट का अनुभव होता है। पेट की नसें तन जाती हैं। पेट तथा सीने में जलन होती है। रोगी को लगता है जैसे उसका पेट फट जाएगा। नाड़ी तेजी से चलने लगती है। माथे पर पसीना आ जाता है। पेट की गैस ऊपर की ओर चढ़ जाती है तो रह-रहकर डकारें आने लगती हैं सिर में दर्द, माथे का चकराना तथा गिर पड़ना इस रोग के प्रमुख लक्षण हैं-

उपचार:-


पीपल के पत्तों को सुखाकर चूर्ण बना लें। इस चूर्ण में जरा-सी राई पीसकर मिला लें। दोनों को छाछ या मट्ठे के साथ सेवन करें।

पीपल की जड़ 10 ग्राम, गेहूं की भूसी 10 ग्राम, बाजरे के दाने 10 ग्राम, सेंधा नमक दो चुटकी या आधा चम्मच काला जीरा 8 ग्राम अजवायन 5 ग्राम सबको एक पोटली में बांधकर गरम करें। फिर इससे पेट की सिंकाई करें।

बच का चूर्ण 2 रत्ती, काला नमक 4 रत्ती, हींग 2 रत्ती पीपल की छाल 10 ग्राम-सबको सुखाकर पीस लें। इसमें से प्रतिदिन आधा चम्मच चूर्ण गरम पानी के साथ सेवन करें।

पीपल की छाल को पीसकर चूर्ण बना लें। एक चम्मच चूर्ण में दो रत्ती हींग तथा जरा-सा सेंधा नमक मिलाकर सेवन करें-

पेट का दर्द:-

इस रोग में भोजन के बाद आमाशय में पीड़ा होती है। ऐसा लगता है जैसे नाखून से कोई आंतों को खुरच रहा है। खाने की चीजें पेट में पहुंचते ही दर्द शुरू हो जाता है। दर्द की हालत में बेचैनी बढ़ जाती है। यह रोग, भोजन की अधिकता, पेट में मल के रुकने, आंतों में मल के चिपकने, पाचनदोष तथा पेट में वायु के भर जाने के कारण होता है-

उपचार:-



आमाशय से वायु निकलने वाली दवा का प्रयोग सबसे पहले करना चाहिए।पीपल के पत्ते को गरम करके उस पर जरा-सा घी लगाएं। अब पत्ते को पेट पर रखकर पट्टी बांध लें। वायु निकलते ही पेट का दर्द रुक जाएगा-

पीपल की छाल का चूर्ण, अजवायन का चूर्ण, हींग तथा खाने वाला सोडा-सबकी उचित मात्रा लेकर फंकी लगाएं और ऊपर से गरम पानी पी लें।

पीपल के पत्तों का रस 10 ग्राम, भांगरे के पत्तों का रस 5 ग्राम काला नमक 3 ग्राम सबको मिलाकर सेवन करें। तथा सोंठ का चूर्ण एक चम्मच, पीपल के सूखे फलों का चूर्ण एक चम्मच तथा काला नमक चौथाई चम्मच तीनों को मिलाकर सेवन करने से पेट का दर्द तत्काल रुक जाता है-

अतिसार (दस्त):-


गलत खान-पान, अशुद्ध जल, पाचन क्रिया की गड़बड़ी पेट में कीडों का होना, यकृत की खराबी, मौसम बदलने के कारण पेट में खराबी जुलाब लेने की आदत, चिन्ता, शोक, भय, दु:ख आदि के कारण अतिसार का रोग हो जाता है। इसमें पतले दस्त आते हैं किन्तु दस्त आने से पहले पेट में हल्का दर्द होता है। दस्त लगते ही पिचकारी सी छूटती है। चूंकि पेट का जल दस्तों के साथ बाहर निकल जाता है इसलिए बहुत ज्यादा कमजोरी हो जाती है। आँखें भीतर की तरफ धंस जाती हैं और पीली पड़ जाती है। शरीर की त्वचा रुखी हो जाती है। देखते-देखते रोगी की शक्ति क्षीण हो जाती है। प्यास अधिक लगती है और पेट में गुड़गुड़ होती रहती है-

उपचार:-


पीपल के पत्तों के साथ थोड़े से खजूर में पीसकर चटनी बना लें। यह चटनी घंटे-घंटे भर बाद खाएं-

पीपल की कोंपलें, नीम की कोंपलें, बबूल के पत्ते सब 6-6 ग्राम लेकर पीस लें। इसमें थोड़ा-सा शहद मिला लें। इस चटनी की तीन खुराक करके सुबह-दोपहर-शाम को सेवन करें-

पित्त-नाश व बलवृधि के लिए:-

पीपल के कोमल पत्तों का मुरब्बा बड़ी शक्ति देता है | इसके सेवन से शरीर की कई प्रकार की गर्मी-संबंधी बीमारियाँ चली जाती है | यह किडनी की सफाई करता है | पेशाब खुलकर आता है | पित्त से होने वाली आँखों की जलन दूर होती है | यह गर्भाशय व मासिक संबंधी रोगों में लाभकारी है | इसके सेवन से गर्भपात का खतरा दूर हो जाता है |  पीपल के पत्ते ऐसे नहीं तोड़ना चाहिए | पहले पीपल देवता को प्रणाम करना कि ‘महाराज ! औषध के लिए हम आपकी सेवा लेते हैं, कृपा करना |’ पीपल को काटना नहीं चाहिए | उसमें सात्विक देवत्व होता है -

मुरब्बा बनाने की विधि:-


पीपल के २५० ग्राम लाल कोमल पत्तों को पानी से धोकर उबाल लें, फिर पीसकर उसमें समभाग मिश्री व 50 ग्राम देशी गाय का घी मिलाकर धीमी आँच पर सेंक लें | गाढ़ा होने पर ठंडा करके सुरक्षित किसी साफ बर्तन ( काँच की बरनी उत्तम है ) में रख लें -

सेवन-विधि: -


10-10 ग्राम सुबह-शाम दूध से लें -

हृदय मजबूत करने के लिए :- १०-१२ ग्राम पीपल के कोमल पत्तों का रस और चोथाई चमम्च पीसी मिश्री सुबह-शाम लेने से हृदय मजबूत होता है, हृदयघात (हार्ट -अटैक) नहीं होता | इससे मिर्गी व मूर्च्छा की बीमारी में लाभ होता है -

दमा : -


पीपल की अन्तरछाल (छाल के अन्दर का भाग) निकालकर सुखा लें और कूट-पीसकर खूब महीन चूर्ण कर लें, यह चूर्ण दमा रोगी को देने से दमा में आराम मिलता है। पूर्णिमा की रात को खीर बनाकर उसमें यह चूर्ण बुरककर खीर को 4-5 घंटे चन्द्रमा की किरणों में रखें, इससे खीर में ऐसे औषधीय तत्व आ जाते हैं कि दमा रोगी को बहुत आराम मिलता है। इसके सेवन का समय पूर्णिमा की रात को माना जाता है-

दाद-खाज : -


पीपल के 4-5 कोमल, नरम पत्ते खूब चबा-चबाकर खाने से, इसकी छाल का काढ़ा बनाकर आधा कप मात्रा में पीने से दाद, खाज, खुजली आदि चर्म रोगों में आराम होता है-

मसूड़े :- 


मसूड़ों की सूजन दूर करने के लिए इसकी छाल के काढ़े से कुल्ले करें-

अन्य उपयोग : -


इसकी छाल का रस या दूध लगाने से पैरों की बिवाई ठीक हो जाती है।

पीपल की छाल को जलाकर राख कर लें, इसे एक कप पानी में घोलकर रख दें, जब राख नीचे बैठ जाए, तब पानी नितारकर पिलाने से हिचकी आना बंद हो जाता है।

इसके पत्तों को जलाकर राख कर लें, यह राख घावों पर बुरकने से घाव ठीक हो जाते हैं।

जुकाम, खांसी और दमा में फायदा: पीपल के पांच पत्तों को दूध में उबालकर चीनी या खांड डालकर दिन में दो बार, सुबह-शाम पीने से जुकाम, खांसी और दमा में बहुत आराम होता है-

आंखों के दर्द के लिए: इसके पत्तों से जो दूध निकलता है उसे आंख में लगाने से आंख का दर्द ठीक हो जाता है-

दांतों के लिए पीपल की ताजी डंडी दातून के लिए बहुत अच्छी होती है- 

बहुत से लोगों को रात में दिखाई नहीं पड़ता। शाम का झुट-पुटा फैलते ही आंखों के आगे अंधियारा सा छा जाता है। इसकी सहज औषध है पीपल। पीपल की लकड़ी का एक टुकड़ा लेकर गोमूत्र के साथ उसे शिला पर पीसें। इसका अंजन दो-चार दिन आंखों में लगाने से रतौंधी में लाभ होता है-

पीपल की ताजी हरी पत्तियों को निचोड़कर उसका रस कान में डालने से कान दर्द दूर होता है। कुछ समय तक इसके नियमित सेवन से कान का बहरापन भी जाता रहता है-

देखे--ब्लॉकेज को भी रिमूव कर देता है पीपल का पत्ता:-

उपचार और प्रयोग-

Heart Blockage-हार्ट ब्लॉकेज के लिए Peeple Leaf

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क्या आपके रक्त-शिराओ में हार्ट ब्लोकेज(Heart Blockage)है तो आप सबसे पहले यह जान ले कि अदरक का सेवन जादा करे क्युकि अदरक(Ginger)आपके खून(Blood)को पतला रखता है और पीपल का पत्ता(Peeple Leaf)आपको हार्ट ब्लाकेज(Heart Blockage)से बचाता है-

Heart Blockage-हार्ट ब्लॉकेज के लिए Peeple Leaf


पीपल के पत्ते(Peeple Leaf)को कैसे लें-

Peeple Leaf-पीपल के 15 से 20 पत्ते लें जो कोमल गुलाबी कोंपलें न हों बल्कि पीपल के पत्ते(Peeple Leaf)हरे कोमल व भली प्रकार विकसित हों अब प्रत्येक पीपल के पत्ते का ऊपर व नीचे का कुछ भाग कैंची से काटकर अलग कर दें तथा पीपल के पत्ते(Peeple Leaf)का बीच का भाग पानी से साफ कर लें अब आप इन्हें एक गिलास पानी में धीमी आँच पर पकने दें और जब पानी उबलकर एक तिहाई रह जाए तब ठंडा होने पर साफ कपड़े से छान लें और उसे ठंडे स्थान पर रख दें-अब ये दवा तैयार है-

पीपल के पत्ते(Peeple Leaf)के काढ़े की तीन खुराकें बनाकर प्रत्येक तीन घंटे बाद प्रातः लें-हार्ट अटैक के बाद कुछ समय हो जाने के पश्चात लगातार पंद्रह दिन तक इसे लेने से हृदय पुनः स्वस्थ हो जाता है और फिर दिल का दौरा पड़ने की संभावना नहीं रहती है -दिल के रोगी इस नुस्खे का एक बार प्रयोग अवश्य करें-इसकी खुराक लेने से पहले पेट एक दम खाली नहीं होना चाहिए बल्कि सुपाच्य व हल्का नाश्ता करने के बाद ही लें- 

परहेज क्या करे-

पीपल के पत्ते(Peeple Leaf)के प्रयोग काल में तली चीजें, चावल आदि न लें तथा मांस, मछली, अंडे, शराब, धूम्रपान का प्रयोग बंद कर दें और नमक, चिकनाई का प्रयोग बंद कर दें-

अनार, पपीता, आंवला, बथुआ, लहसुन, मैथी दाना, सेब का मुरब्बा, मौसंबी, रात में भिगोए काले चने, किशमिश, गुग्गुल, दही, छाछ आदि लें -

Upcharऔर प्रयोग-

28 अक्तूबर 2015

अलसी आपकी देह को ऊर्जावान बना देगी

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सेक्स संबन्धी समस्याओं के उपचारों में सर्वश्रेष्ठ और सुरक्षित है अलसी - एक हर्बल चिकित्सक आपकी सारी सेक्स सम्बंधी समस्याएं अलसी खिला कर ही दुरुस्त कर देगा क्योंकि अलसी आधुनिक युग में स्तंभनदोष के साथ साथ शीघ्रस्खलन, दुर्बल कामेच्छा, बांझपन, गर्भपात, दुग्धअल्पता की भी महान औषधि है -



सेक्स संबन्धी समस्याओं के अन्य सभी उपचारों से सर्वश्रेष्ठ और सुरक्षित है अलसी। बस 30 ग्राम रोज लेनी है-

सबसे पहले तो अलसी आप और आपके जीवनसाथी की त्वचा को आकर्षक,कोमल,नम,बेदाग व गोरा बनायेगी। आपके केश काले, घने, मजबूत, चमकदार और रेशमी हो जायेंगे।

अलसी आपकी देह को ऊर्जावान, बलवान और मांसल बना देगी। शरीर में चुस्ती-फुर्ती बनी गहेगी, न क्रोध आयेगा और न कभी थकावट होगी-मन शांत, सकारात्मक और दिव्य हो जायेगा-

अलसी में विद्यमान ओमेगा-3 फैट, जिंक और मेगनीशियम आपके शरीर में पर्याप्त टेस्टोस्टिरोन हार्मोन और उत्कृष्ट श्रेणी के फेरोमोन ( आकर्षण के हार्मोन) स्रावित होंगे। टेस्टोस्टिरोन से आपकी कामेच्छा चरम स्तर पर होगी। आपके साथी से आपका प्रेम, अनुराग और परस्पर आकर्षण बढ़ेगा। आपका मनभावन व्यक्तित्व, मादक मुस्कान और षटबंध उदर देख कर आपके साथी की कामाग्नि भी भड़क उठेगी-

अलसी में विद्यमान ओमेगा-3 फैट, आर्जिनीन एवं लिगनेन जननेन्द्रियों में रक्त के प्रवाह को बढ़ाती हैं, जिससे शक्तिशाली स्तंभन तो होता ही है साथ ही उत्कृष्ट और गतिशील शुक्राणुओं का निर्माण होता है। इसके अलावा ये शिथिल पड़ी क्षतिग्रस्त नाड़ियों का कायाकल्प करते हैं जिससे सूचनाओं एवं संवेदनाओं का प्रवाह दुरुस्त हो जाता है।

नाड़ियों को स्वस्थ रखने में अलसी में विद्यमान लेसीथिन, विटामिन बी ग्रुप, बीटा केरोटीन, फोलेट, कॉपर आदि की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। ओमेगा-3 फैट के अलावा सेलेनियम और जिंक प्रोस्टेट के रखरखाव, स्खलन पर नियंत्रण, टेस्टोस्टिरोन और शुक्राणुओं के निर्माण के लिए बहुत आवश्यक हैं। कुछ वैज्ञानिकों के मतानुसार अलसी लिंग की लंबाई और मोटाई भी बढ़ाती है।

अलसी के सेवन से कैसे प्रेम और यौवन की रासलीला सजती है, जबर्दस्त अश्वतुल्य स्तंभन होता है, जब तक मन न भरे सम्भोग का दौर चलता है, देह के सारे चक्र खुल जाते हैं, पूरे शरीर में दैविक ऊर्जा का प्रवाह होता है और सम्भोग एक यांत्रिक क्रीड़ा न रह कर एक आध्यात्मिक उत्सव बन जाता है, समाधि का रूप बन जाता है-

अलसी सेवन का तरीकाः-


हमें प्रतिदिन 30 – 60 ग्राम अलसी का सेवन करना चाहिये। 30 ग्राम आदर्श मात्रा है। अलसी को रोज मिक्सी के ड्राई ग्राइंडर में पीसकर आटे में मिलाकर रोटी, पराँठा आदि बनाकर खाना चाहिये। डायबिटीज के रोगी सुबह शाम अलसी की रोटी खायें। कैंसर में बुडविग आहार-विहार की पालना पूरी श्रद्धा और पूर्णता से करना चाहिये। इससे ब्रेड, केक, कुकीज, आइसक्रीम, चटनियाँ, लड्डू आदि स्वादिष्ट व्यंजन भी बनाये जाते हैं-

दूसरा एक तरीका है कि आप अलसी को सूखी कढ़ाई में डालिये, रोस्ट कीजिये (अलसी रोस्ट करते समय चट चट की आवाज करती है) और मिक्सी से पीस लीजिये. इन्हें थोड़े दरदरे पीसिये, एकदम बारीक मत कीजिये. भोजन के बाद सौंफ की तरह इसे खाया जा सकता है .लेकिन आप इसे जादा मात्रा में बना के न रक्खे क्युकि ये खराब हो जाती है .एक हफ्ते के लिए बनाना ही चाहिए .अलसी आपको अनाज बेचने वाले तथा पंसारी या आयुर्वेदिक जड़ी बूटी बेचने वालो के यहाँ से मिल जायेगी -

अलसी की पुल्टिस का प्रयोग गले एवं छाती के दर्द, सूजन तथा निमोनिया और पसलियों के दर्द में लगाकर किया जाता है। इसके साथ यह चोट, मोच, जोड़ों की सूजन, शरीर में कहीं गांठ या फोड़ा उठने पर लगाने से शीघ्र लाभ पहुंचाती है। यह श्वास नलियों और फेफड़ों में जमे कफ को निकाल कर दमा और खांसी में राहत देती है।

इसकी बड़ी मात्रा विरेचक तथा छोटी मात्रा गुर्दो को उत्तेजना प्रदान कर मूत्र निष्कासक है।

यह पथरी, मूत्र शर्करा और कष्ट से मूत्र आने पर गुणकारी है।

अलसी के तेल का धुआं सूंघने से नाक में जमा कफ निकल आता है और पुराने जुकाम में लाभ होता है। यह धुआं हिस्टीरिया रोग में भी गुण दर्शाता है।

अलसी के काढ़े से एनिमा देकर मलाशय की शुद्धि की जाती है। उदर रोगों में इसका तेल पिलाया जाता हैं।

अलसी के तेल और चूने के पानी का इमल्सन आग से जलने के घाव पर लगाने से घाव बिगड़ता नहीं और जल्दी भरता है।

पथरी, सुजाक एवं पेशाब की जलन में अलसी का फांट पीने से रोग में लाभ मिलता है। अलसी के कोल्हू से दबाकर निकाले गए (कोल्ड प्रोसेस्ड) तेल को फ्रिज में एयर टाइट बोतल में रखें। स्नायु रोगों, कमर एवं घुटनों के दर्द में यह तेल पंद्रह मि.ली. मात्रा में सुबह-शाम पीने से काफी लाभ मिलेगा।

इसी कार्य के लिए इसके बीजों का ताजा चूर्ण भी दस-दस ग्राम की मात्रा में दूध के साथ प्रयोग में लिया जा सकता है। यह नाश्ते के साथ लें।

बवासीर, भगदर, फिशर आदि रोगों में अलसी का तेल (एरंडी के तेल की तरह) लेने से पेट साफ हो मल चिकना और ढीला निकलता है। इससे इन रोगों की वेदना शांत होती है।

अलसी के बीजों का मिक्सी में बनाया गया दरदरा चूर्ण पंद्रह ग्राम, मुलेठी पांच ग्राम, मिश्री बीस ग्राम, आधे नींबू के रस को उबलते हुए तीन सौ ग्राम पानी में डालकर बर्तन को ढक दें। तीन घंटे बाद छानकर पीएं। इससे गले व श्वास नली का कफ पिघल कर जल्दी बाहर निकल जाएगा। मूत्र भी खुलकर आने लगेगा।

इसकी पुल्टिस हल्की गर्म कर फोड़ा, गांठ, गठिया, संधिवात, सूजन आदि में लाभ मिलता है।

डायबिटीज के रोगी को कम शर्करा व ज्यादा फाइबर खाने की सलाह दी जाती है। अलसी व गैहूं के मिश्रित आटे में (जहां अलसी और गैहूं बराबर मात्रा में हो)

अलसी बांझपन, पुरूषहीनता, शीघ्रस्खलन व स्थम्भन दोष में बहुत लाभदायक है।

कई असाध्य रोग जैसे अस्थमा, एल्ज़ीमर्स, मल्टीपल स्कीरोसिस, डिप्रेशन, पार्किनसन्स, ल्यूपस नेफ्राइटिस, एड्स, स्वाइन फ्लू आदि का भी उपचार करती है अलसी। कभी-कभी चश्में से भी मुक्ति दिला देती है अलसी। दृष्टि को स्पष्ट और सतरंगी बना देती है अलसी।

जोड़ की हर तकलीफ का तोड़ है अलसी। जॉइन्ट रिप्लेसमेन्ट सर्जरी का सस्ता और बढ़िया उपचार है अलसी। ­­ आर्थ्राइटिस, शियेटिका, ल्युपस, गाउट, ओस्टियोआर्थ्राइटिस आदि का उपचार है अलसी।

लिगनेन का सबसे बड़ा स्रोत अलसी ही है जो जीवाणुरोधी, विषाणुरोधी, फफूंदरोधी और कैंसररोधी है। अलसी शरीर की रक्षा प्रणाली को सुदृढ़ कर शरीर को बाहरी संक्रमण या आघात से लड़ने में मदद करती हैं और शक्तिशाली एंटी-आक्सीडेंट है।

लिगनेन वनस्पति जगत में पाये जाने वाला एक उभरता हुआ सात सितारा पोषक तत्व है जो स्त्री हार्मोन ईस्ट्रोजन का वानस्पतिक प्रतिरूप है और नारी जीवन की विभिन्न अवस्थाओं जैसे रजस्वला, गर्भावस्था, प्रसव, मातृत्व और रजोनिवृत्ति में विभिन्न हार्मोन्स् का समुचित संतुलन रखता है। लिगनेन मासिकधर्म को नियमित और संतुलित रखता है। लिगनेन रजोनिवृत्ति जनित-कष्ट और अभ्यस्त गर्भपात का प्राकृतिक उपचार है। लिगनेन दुग्धवर्धक है। लिगनेन स्तन, बच्चेदानी, आंत, प्रोस्टेट, त्वचा व अन्य सभी कैंसर, एड्स, स्वाइन फ्लू तथा एंलार्ज प्रोस्टेट आदि बीमारियों से बचाव व उपचार करता है।

त्वचा, केश और नाखुनों का नवीनीकरण या जीर्णोद्धार करती है अलसी। अलसी के शक्तिशाली एंटी-ऑक्सीडेंट ओमेगा-3 व लिगनेन त्वचा के कोलेजन की रक्षा करते हैं और त्वचा को आकर्षक, कोमल, नम, बेदाग व गोरा बनाते हैं। अलसी सुरक्षित, स्थाई और उत्कृष्ट भोज्य सौंदर्य प्रसाधन है जो त्वचा में अंदर से निखार लाता है। त्वचा, केश और नाखून के हर रोग जैसे मुहांसे, एग्ज़ीमा, दाद, खाज, खुजली, सूखी त्वचा, सोरायसिस, ल्यूपस, डेन्ड्रफ, बालों का सूखा, पतला या दोमुंहा होना, बाल झड़ना आदि का उपचार है अलसी। चिर यौवन का स्रोता है अलसी। बालों का काला हो जाना या नये बाल आ जाना जैसे चमत्कार भी कर देती है अलसी। किशोरावस्था में अलसी के सेवन करने से कद बढ़ता है।

अलसी एक फीलगुड फूड है :-

क्योंकि अलसी से मन प्रसन्न रहता है, झुंझलाहट या क्रोध नहीं आता है, पॉजिटिव एटिट्यूड बना रहता है यह आपके तन, मन और आत्मा को शांत और सौम्य कर देती है। अलसी के सेवन से मनुष्य लालच, ईर्ष्या, द्वेश और अहंकार छोड़ देता है। इच्छाशक्ति, धैर्य, विवेकशीलता बढ़ने लगती है, पूर्वाभास जैसी शक्तियाँ विकसित होने लगती हैं। इसीलिए अलसी देवताओं का प्रिय भोजन थी। यह एक प्राकृतिक वातानुकूलित भोजन है।

अलसी कॉलेस्ट्रॉल, ब्लड प्रेशर और हृदयगति को सही रखती है। रक्त को पतला बनाये रखती है अलसी। रक्तवाहिकाओं को साफ करती रहती है अलसी।

अलसी शर्करा ही नियंत्रित नहीं रखती, बल्कि मधुमेह के दुष्प्रभावों से सुरक्षा और उपचार भी करती है। अलसी में रेशे भरपूर 27% पर शर्करा 1.8% यानी नगण्य होती है। इसलिए यह शून्य-शर्करा आहार कहलाती है और मधुमेह के लिए आदर्श आहार है। अलसी बी.एम.आर. बढ़ाती है, खाने की ललक कम करती है, चर्बी कम करती है, शक्ति व स्टेमिना बढ़ाती है, आलस्य दूर करती है और वजन कम करने में सहायता करती है। चूँकि ओमेगा-3 और प्रोटीन मांस-पेशियों का विकास करते हैं अतः बॉडी बिल्डिंग के लिये भी नम्बर वन सप्लीमेन्ट है अलसी

आयुर्वेद के अनुसार हर रोग की जड़ पेट है और पेट साफ रखने में यह इसबगोल से भी ज्यादा प्रभावशाली है। आई.बी.एस., अल्सरेटिव कोलाइटिस, अपच, बवासीर, मस्से आदि का भी उपचार करती है अलसी।

ओमेगा-3 हमारे शरीर की सारी कोशिकाओं, उनके न्युक्लियस, माइटोकोन्ड्रिया आदि संरचनाओं के बाहरी खोल या झिल्लियों का महत्वपूर्ण हिस्सा होता है। यही इन झिल्लियों को वांछित तरलता, कोमलता और पारगम्यता प्रदान करता है। ओमेगा-3 का अभाव होने पर शरीर में जब हमारे शरीर में ओमेगा-3 की कमी हो जाती है तो ये भित्तियां मुलायम व लचीले ओमेगा-3 के स्थान पर कठोर व कुरुप ओमेगा-6 फैट या ट्रांस फैट से बनती है, ओमेगा-3 और ओमेगा-6 का संतुलन बिगड़ जाता है, प्रदाहकारी प्रोस्टाग्लेंडिन्स बनने लगते हैं, हमारी कोशिकाएं इन्फ्लेम हो जाती हैं, सुलगने लगती हैं और यहीं से ब्लडप्रेशर, डायबिटीज, मोटापा, डिप्रेशन, आर्थ्राइटिस और कैंसर आदि रोगों की शुरूवात हो जाती है।

फिर अभी भी क्या सोच रहे है आज ही अपनाए और देखे इसके फायदे ....गर्मी में आप इसकी मात्रा आधी कर ले सिर्फ 15 ग्राम ही सेवन करे -

उपचार और प्रयोग -

आपका ह्रदय रोग और चुकंदर का सेवन

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Beet-चुकंदर का रस हृदय(Heart)अटैक के रोगियों के लिए फायदेमंद है यह दिल(Heart)के साथ रोगियों की मांसपेशियों को मजबूत करता हैं-

Heart disease-ह्रदय रोग और Beet-चुकंदर


Beet-चुकंदर के रस में नाइट्रेट की उच्च मात्रा होने के कारण मांसपेशियों में बहुत ही सुधार होता है-अध्ययनों में भी ये साबित हो चुका है कि खान पान में नाइट्रेट(Nitrate)के सेवन से कई प्रख्यात खिलाड़ियों की मांसपेशियों में सुधार आया है-

कई शोधकर्ताओं द्वारा चुकंदर(Beet)का रस पीने के दो घंटों के बाद रोगियों की मांसपेशियों की ताकत में अभूतपूर्व सुधार का परिणाम प्राप्त किया है तथा शोधकर्ताओं ने यह भी बताया कि रोगियों के दिल की गति से लेकर रक्तचाप में गिरावट जैसा कोई विशेष साइड इफेक्ट(side effect)महसूस नहीं हुआ जो हृदयाघात(heart attack)के रोगियों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है-

Beet-चुकंदर में पाया जाने वाला लाल रंग बेटाईन(Betain)नामक रसायन की वजह से होता है जो कैंसरग्रस्त कोशिकाओं(Cancerous cells)की वृद्दि रोकने में मददगार साबित हुआ है-

चुकंदर(Beet)शरीर में रक्त में हीमोग्लोबिन(Hemoglobin)की मात्रा बढ़ती है सफेद चुकंदर(white beet)से व्यवसायिक तौर इस्तेमाल किया जाता है इससे शर्करा प्राप्त की जाती है जबकि लाल चुकंदर सलाद और सब्जी के तौर पर अपनाया जाता है-

चुकंदर मोटापे के लिए बहुत उपयोगी है यह बात बहुत कम लोग जानते है कि चुकंदर(Beet)के रस के साथ गाजर का रस समान मात्रा में मिलाकर पीने से शरीर की ताकत तो बढ़ती है लेकिन साथ ही मोटापा भी नहीं बढ़ता और अनावश्यक चर्बी भी कम हो जाती है-

आपका वजन कम करने के लिए चुंकदर भी एक बेहतर विकल्प है कच्चा चुकंदर(Beet)या कम से कम दो या तीन चुकंदर का जूस तैयार कर प्रतिदिन सुबह खाली पेट लिया जाए तो यह वजन करने में सहायक साबित होता है-

चुकंदर को कच्चा चबाने से शरीर को पर्याप्त मात्रा में फाईबार मिलते हैं जो पाचन क्रिया संतुलित कर अपचन की समस्या को दूर करता है-

चुकंदर के रस में समान मात्रा में खीरे का रस और एक या दो चम्मच नींबू का रस भी मिलाएं और प्रतिदिन 200 से300 मिलीमीटर तक पीने से कब्ज से छुटकारा मिल जाता है-

चुकंदर(Beet)का सेवन महिलाओं को मासिक धर्म के दौरान भी करना चाहिए -यह महिलाओं को ताकत प्रदान करता है और शरीर में रक्त की मात्रा तैयार करने में मददगार साबित होता है-चुकंदर में भरपूर मात्रा में लौह तत्व और फ़ोलिक एसिड पाए जाते हैं जो रक्त निर्माण के लिए मददगार होते हैं-

Upcharऔर प्रयोग-