This website about Treatment and use for General Problems and Beauty Tips ,Sexual Related Problems and his solution for Male and Females. Home treatment,Ayurveda treatment ,Homeopathic Remedies. Ayurveda treatment tips in Hindi and also you can read about health Related problems and treatment for male and female

loading...

2 अक्तूबर 2015

कदम्ब के वृक्ष का उपयोग - Using The Kadamb Tree

By
कदम्ब के  पत्ते बड़े और मोटे होते हैं जिनसे गोंद भी निकलता है। कदम्ब के पेड़ के पत्ते महुए के पत्तों जैसे और फल नींबू की तरह गोल होते है और फूल फलों के ऊपर ही होते है। फूल छोटे और खुशबुदार होते हैं। कदम्ब की कई सारी जातियाँ हैं-



राजकदम्ब
धूलिकदम्ब
कदम्बिका

ब्रज मैं कदम्ब के पेड़ की बहुत महिमा है। कृष्ण की लीलाओ से जुडा होने के कारण कदम्ब का उल्लेख ब्रजभाषा के अनेक कवियों ने किया है।  इस वृक्ष के नीचे ही वे बांसुरी बजाया करते थे-

इसका इत्र भी बनता है जो बरसात के मौसम मैं अधिक उपयोग में आता है।

यह वृक्ष जहरशामक होता है . किसी भी दवाई से एलर्जी हो  जाए या किसी प्रकार का ज़हरीला असर हो जाए तो इसकी सूखी छाल, फल व पत्तियों को बराबर मात्रा में लेकर 10 ग्राम मिश्रण को 400 ग्राम पानी में उबालकर काढ़ा बनायें . इसे सवेरे शाम ले लें -

इसकी छाल और पत्तियों को उबालकर उसके पानी से धोने पर घाव बहुत जल्दी ठीक हो जाते हैं . घाव पर इसकी पत्तियों का रस भी लगा सकते हैं-

मुंह में छाले होने पर इसके पत्तों को चबाकर लार बाहर जाने दें .इसके फलों के छाया में सूखे हुए टुकड़ों का पावडर सवेरे शाम खाने से छाले तो ठीक होते ही हैं-

कोई कीड़ा मकोड़ा लग जाए तो उसका ज़हर भी उतर जाता है . पैरों में सूजन या चोट हो तो , इसके छाल व पत्तों को उबालें . इसमें नमक मिलाकर पैरों की सिकाई करें .इसके फलों  का पावडर शारीरिक दुर्बलता को दूर करता है-

माताओं को दूध कम  आता हो तो कदम्ब  के  फल के पावडर के साथ शतावर (asparagus) का  पावडर भी लें-

अगर fever  है तो इसके पेड़ की 5 ग्राम  छाल में 4-5 तुलसी के पत्ते डालकर काढ़ा बनायें और कुछ दिन पी लें -

अगर urine कम आ रहा है तो इसे लेने से यह समस्या हल हो जाती है-

ग्रामीण अंचलों में इसका उपयोग खटाई के लिए होता है। इसके बीजों से निकला तेल खाने और दीपक जलाने के काम आता है-

बच्चों में हाजमा ठीक करने के लिए कदंब के फलों का रस बहुत ही फ़ायदेमंद होता है-

पशुओं को कोई रोग हो जाए तो इसके फूलों और पत्तियों को पशुओं को बाड़े में रखे . रोग नहीं फैलेगा-

इसकी छाल को घिस कर बाहर से लगाने पर कनजक्टीवाइटिस ठीक हो जाता है-

उपचार और प्रयोग-

0 comments:

एक टिप्पणी भेजें

लेबल