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1 जनवरी 2017

लोगो ने सिखाया और हमने सीखा

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लोगो ने सिखाया और हमने सीखा


मेरे मन की बात -


मै अपने जीवन में एक खुली किताब रहा हूँ कोई भी मुझे पढ़ और समझ सकता है बस सामने वाले के पास मुझे पढने और समझने लायक एक दिल हो -


हमने जीवन भर ईमानदारी और उर्जा -पूरित जीवन जिया है मुझे नित-नित नए आयाम से कुछ न कुछ सीखने को मिला है लोभ से दूर शान्ति प्रिय जीवन पसंद व्यक्ति रहा हूँ जो भी आया मेरे जीवन में बस मुझे एक हल्का सा धक्का दे के खुद आगे निकल गया-हाँ मगर फायदा ये हुआ कि जाते-जाते वो कुछ समझने की सीख दे गया -

आप यूँ भी कह सकते हैं कि रिश्ते की डोर मेरे जीवन में कमजोर ही रही है - हो सकता है कि किसी को हम समझ नहीं पाए हों या फिर कोई हमें समझ नहीं पाया आखिर किसी एक की गलती रही ही होगी जिसका आज तक कोई भी निष्कर्ष नहीं निकल पाया-

जब भी इमानदारी से मन की बात की तो उसमे भी लोगो ने  अपना स्वार्थ खोजा-दूर रहकर भी हम सभी को समझते रहे और पास रह कर भी लोग मुझे समझ नहीं पाए अब पता नहीं ये दोष मेरा था या उनका -

वक्त की थपेड़ो से मुझे जीना सिखाया है ये सीख शायद किसी को दे सकूँ और कोई मुझे समझे-इस दिल मे बहुत कुछ समेटे हुए हूँ जो औरो के काम कभी शायद आ सकेगा-शायद मुझे लोगों से सीखने को अभी कुछ और भी मिलेगा और हो सकता है वो भी मेरे काम की चीज हो-

इन्शान कभी जीवन में पूर्ण नहीं होता ये जीवन भर सीखने और सिखाने का स्कूल है-नवजात शिशु तो एक कोरा कागज ही होता है शुरुवात लिखने की माँ-बाप,गुरु,समाज करता है और वही कोरा कागज एक दिन महाकाव्य बन जाता है और वो रचियता बनकर दुसरो को अपने जीवन के अनुभव से सिंचित करता है -

संघर्ष युक्त जीवन ही अनुभव देता है-जिसने आँख खोली और संघर्ष नहीं देखा तो " वो क्या जाने पीर पराई -जिसके पाँव न पड़ी बिवाई " मगर कुछ लोग दूसरे को ज्ञान देने से गुरेज भी नहीं करते-कभी-कभी लगता है इनमें एक अदभुत संसार समाया है-

पेड़ को सिंचित करने वाला माली खुद ये नहीं समझ पाता है कि जिस पेड़ को परोपकार वश लगाया है एक आंधी के झोके से पेड़ के नीचे स्थित उसका झोपड़ा भी तबाह  कर सकता है -

आप दूसरो में जो खोजते है वो नाश्वर है असली तो आपके अंदर समाया है मगर कहाँ फुर्सत है खुद में खोजने की-समय तो बीत रहा है दुसरो के अवगुण ढूढने में-उतना समय खुद की गलतियों को ढूढने में लगाया होता तो अभी आप जहाँ है हो सकता है इससे कई गुना आगे होते-पल-पल समय को नाकामियों में जीना और समय को कामयाबी से जीना तो कुछ लोग ही कर पाते है -

कोई बात नहीं आपने मेरे अंतर्मन की बात सुनी यदि आपके पास अगर कोई अतिरिक्त ज्ञान है तो मुझे भी अपने ज्ञान-गंगा से अवस्य सिंचित करे-शायद मुझे कुछ और सीखने को मिल जाए -

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धन्यवाद -

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