जाने तिल के 10 फायदे- 10 Advantages of the Til

10:53 pm Leave a Comment
तिल एक ऐसा भोजन है जो मकर संक्रांति के पर्व से जुड़ा हुआ है इस दिन इसको पकाना खाना और दान करना शुभ माना जाता है आदिकाल से तिल धार्मिक रीति-रिवाजों में इस्तेमाल होता आया है शादी-ब्याह के मौकों पर हवन आदि में तिल के प्रयोग का पौराणिक महत्त्व सिद्ध है ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी तिल को बुरी आत्माओं से बचाने वाला माना जाता है इसके औषधि गुणों के कारण ही इसे स्वास्थ्य-वर्धक एवं मानसिक शांति प्रदान करने वाला कहा गया है-

तिल


आयुर्वेद में तिल को तीव्र असरकारक औषधि(efficacy of Ayurveda medicine) के रूप में जाना जाता है काले और सफेद तिल के अतिररिकत लाल तिल भी होता है। सभी के अलग-अलग गुणधर्म हैं। यदि पौष्टिकता की बात करें तो काले तिल शेष दोनों से अधिक लाभकारी हैं। सफेद तिल की पौष्टिकता काले तिल से कम होती है जबकि लाल तिल निम्न श्रेणी का तिल माना जाता है-

महत्त्वपूर्ण तथ्य यह है कि तिल में चार रस होते हैं इसमें गर्म, कसैला, मीठा और चरपरा स्वाद भी पाया जाता है तिल हजम करने के लिहाज से भारी होता है खाने में स्वादिष्ट और कफनाशक माना जाता है-

यह बालों के लिए लाभप्रद माना गया है। दाँतों की समस्या दूर करने के साथ ही यह श्वास संबंधी रोगों में भी लाभदायक है। स्तनपान कराने वाली माताओं में दूध की वृद्धि करता है। पेट की जलन कम करता है तथा बुद्धि को बढ़ाता है- 

बार-बार पेशाब करने की समस्या पर नियंत्रण पाने के लिए तिल का कोई सानी नहीं है। चूँकि यह स्वभाव से गर्म होता है इसलिए इसे सर्दियों में मिठाई के रूप में खाया जाता है। गजक, रेवड़ियाँ और लड्डू शीत ऋतु में ऊष्मा प्रदान करते हैं-

तिल में विटामिन ए और सी छोड़कर वे सभी आवश्यक पौष्टिक पदार्थ होते हैं जो अच्छे स्वास्थ्य के लिए अत्यंत आवश्यक होते हैं। तिल विटामिन बी और आवश्यक फैटी एसिड्स से भरपूर है। इसमें मीथोनाइन(मिठोनाइन) और ट्रायप्टोफन(ट्रॉयप्टॉन) नामक दो बहुत महत्त्वपूर्ण एमिनो एसिड्स होते हैं जो चना, मूँगफली, राजमा, चौला और सोयाबीन जैसे अधिकांश शाकाहारी खाद्य पदार्थों में नहीं होते- ट्रायोप्टोफन को शांति प्रदान करने वाला तत्व भी कहा जाता है जो गहरी नींद लाने में सक्षम है। यही त्वचा और बालों को भी स्वस्थ रखता है। मीथोनाइन लीवर को दुरुस्त रखता है और कॉलेस्ट्रोल को भी नियंत्रित रखता है। तिलबीज स्वास्थ्यवर्द्धक वसा का बड़ा स्त्रोत है जो चयापचय को बढ़ाता है-

मकर संक्रांति के पर्व पर तिल का विशेष महत्त्व माना जाता है। वैसे तो तिल केवल खाने की चीज है, लेकिन इस दिन इसे दान देने की परम्परा भी प्रचलित है। इस दिन तिल के उबटन से स्नान करके ब्राह्मणों एवं गरीबों को तिल एवं तिल के लड्डू दान किये जाते हैं। यह मौसम शीत ऋतु का होता है, जिसमें तिल और गुड़ से बने लड्डू शरीर को गर्मी प्रदान करते हैं। प्राचीन ग्रंथों में कहा गया है कि संक्रांति के दिन तिल का तेल लगाकर स्नान करना, तिल का उबटन लगाना, तिल की आहुति देना, पितरों को तिल युक्त जल का अर्पण करना, तिल का दान करना एवं तिल को स्वयं खाना, इन छह उपायों से मनुष्य वर्ष भर स्वस्थ, प्रसन्न एवं पाप रहित रहता है-

तिल-गुड़ के लड्डू बनाने के अलावा इन्हें ब्रेड, सलाद और मिठाइयों पर सजावट करने के लिए भी प्रयोग किया जाता है। अनेक प्रकार की गजक और तिलपट्टी में इनका उपयोग होता है। ब्रेड, नान तथा अन्य प्रकार की रोटियों में भी तिल का प्रयोग होता है। तिल का तेल पूरे विश्व में प्रयोग में लाया जाता है-

तिल के आयुर्वेदिक प्रयोग -

1- कब्ज दूर करने के लिये तिल को बारीक पीस लें एवं प्रतिदिन पचास ग्राम तिल के चूर्ण को गुड़, शक्कर या मिश्री के साथ मिलाकर फाँक लें-

2- पाचन शक्ति बढ़ाने के लिये समान मात्रा में बादाम, मुनक्का, पीपल, नारियल की गिरी और मावा अच्छी तरह से मिला लें, फिर इस मिश्रण के बराबर तिल कूट पीसकर इसमें में मिलाएँ, स्वादानुसार मिश्री मिलाएँ और सुबह-सुबह खाली पेट सेवन करें। इससे शरीर के बल, बुद्धि और स्फूर्ति में भी वृद्धि होती है-

3- प्रतिदिन रात्रि में तिल को खूब चबाकर खाने से दाँत मजबूत होते हैं-

4- यदि कोई जख्म हो गया हो तो तिल को पानी में पीसकर जख्म पर बांध दें, इससे जख्म शीघ्रता से भर जाता है-

5- तिल के लड्डू उन बच्चों को सुबह और शाम को जरूर खिलाना चाहिए जो रात में बिस्तर गीला कर देते हैं। तिल के नियमित सेवन करने से शरीर की कमजोरी दूर होती है और रोग प्रतिरोधकशक्ति में वृद्धि होती है-

6- पायरिया और दाँत हिलने के कष्ट में तिल के तेल को मुँह में 10-15 मिनट तक रखें, फिर इसी से गरारे करें। इससे दाँतों के दर्द में तत्काल राहत मिलती है। गर्म तिल के तेल में हींग मिलाकर भी यह प्रयोग किया जा सकता है-

7- पानी में भिगोए हुए तिल को कढ़ाई में हल्का सा भून लें। इसे पानी या दूध के साथ मिक्सी में पीसलें। सादा या गुड़ मिलाकर पीने से रक्त की कमी दूर होती है-

8- जोड़ों के दर्द के लिये एक चाय के चम्मच भर तिल के बीजों को रात भर पानी के गिलास में भिगो दें। सुबह इसे पी लें या हर सुबह एक चम्मच तिल बीजों को आधा चम्मच सूखे अदरक के चूर्ण के साथ मिलाकर गर्म दूध के साथ पी लें। इससे जोड़ों का दर्द जाता रहेगा-

9- तिल गुड़ के लड्डू खाने से मासिकधर्म से संबंधित कष्टों तथा दर्द में आराम मिलता है-

10- भाप से पकाए तिल बीजों का पेस्ट दूध के साथ मिलाकर पुल्टिस की तरह लगाने से गठिया में आराम मिलता है-

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