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19 फ़रवरी 2017

सफ़ेद पानी(श्वेत प्रदर)आने की शिकायत तो नहीं

श्वेत प्रदर या ल्यूकोरिया(Leukorrhea)या सफेद पानी का आना स्त्रियों में होने वाला एक रोग है जिसमें स्त्री की योनि से असामान्य मात्रा में सफेद रंग का गाढा और बदबूदार पानी निकलता है शुरुवाती दौर में श्वेत पानी आना बाद में दही जेसा गाढ़ा बदबूदार पीव जैसा और कभी कभी योनी मार्ग से हरा पीला मिश्रित स्राव जलन के साथ कमजोरी का महसूस होना आदि लक्षण दिखते है महिलाओं एवं किशोरियों में इसकी पहचान कमर में हमेशा दर्द रहता है-

सफ़ेद पानी(श्वेत प्रदर)आने की शिकायत तो नहीं

ये गुप्तांगों से पानी जैसा बहने वाला स्त्राव होता है यह खुद कोई रोग नहीं होता परंतु अन्य कई रोगों के कारण ल्यूकोरिया(Leukorrhea)होता है श्वेत प्रदर वास्तव में एक बीमारी नहीं है बल्कि किसी अन्य योनिगत या गर्भाशयगत व्याधि का लक्षण है तथा सामान्यतः प्रजनन अंगों में सूजन का बोधक है-

ल्यूकोरिया(Leukorrhea)में योनि स्राव-


वैसे महिलाओं में श्वेत प्रदर रोग आम बात है योनि मार्ग से सफेद, चिपचिपा गाढ़ा स्राव होना आज मध्य उम्र की महिलाओं की एक सामान्य समस्या हो गई है सामान्य भाषा में इसे सफेद पानी जाना कहते हैं भारतीय महिलाओं में यह आम समस्या प्रायः बिना चिकित्सा के ही रह जाती है-

सबसे बुरी बात यह है कि इसे महिलाएँ अत्यंत सामान्य रूप से लेकर ध्यान नहीं देती हैं कुछ महिलायें इसे डॉक्टर को नहीं बताती है और लापरवाही करती है श्वेत प्रदर में योनि की दीवारों से या गर्भाशय ग्रीवा से श्लेष्मा का स्राव होता है जिसकी मात्रा, स्थिति और समयावधि अलग-अलग स्त्रियों में अलग-अलग होती है यदि स्राव ज्यादा मात्रा में, पीला, हरा, नीला हो, खुजली पैदा करने वाला हो तो ऐसी स्थिति असामान्य मानी जाएगी-इससे शरीर कमजोर होता है और कमजोरी से श्वेत प्रदर बढ़ता है इसके प्रभाव से हाथ-पैरों में दर्द, कमर में दर्द, पिंडलियों में खिंचाव, शरीर भारी रहना, चिड़चिड़ापन रहता है-इस रोग में स्त्री के योनि मार्ग से सफेद, चिपचिपा, गाढ़ा, बदबूदार स्राव होता है इसे वेजाइनल डिस्चार्ज भी कहते हैं-

ल्यूकोरिया(Leukorrhea)के कारण-


1- सहवास के बाद योनि को स्वच्छ जल से न धोना तथा वैसे ही गन्दे बने रहने से भी ये रोग होता है-

2- अत्यधिक उपवास, उत्तेजक कल्पनाएं, अश्लील वार्तालाप, मुख मैथुन, सम्भोग में उल्टे आसनो का प्रयोग करना आदि भी इसका एक कारण है-

3- रोगग्रस्त पुरुष के साथ सहवास करने से भी ल्यूकोरिया(Leukorrhea)होता है-

4- महिलाओं का बार-बार गर्भपात कराना भी सफेद पानी का एक प्रमुख कारण है-

5- सफेद पानी(श्वेत प्रदर)का एक और कारण प्रोटिस्ट हैं जो कि एक सूक्ष्म जीवों का समूह है-

बचाव एवं चिकित्सा(Rescue And Treatment)-


1- इसके लिये सबसे पहले साफ-सफाई जरूरी है योनि को धोने के लिये सर्वोत्तम उपाय फिटकरी के जल से धोना है फिटकरी एक श्रेष्ठ जीवाणु नाशक और सस्ती औषधि है तथा ये आसानी से सर्वसुलभ है- 

2- बोरिक एसिड के घोल का भी प्रयोग करा जा सकता है और यदि अंदरूनी सफ़ाई के लिये पिचकारी से धोना (डूश लेना)हो तो आयुर्वेद की अत्यंत प्रभावकारी औषधि “नारायण तेल” का प्रयोग सर्वोत्तम होता है-

3- मैथुन के पश्चात अवश्य ही साबुन से सफाई करना चाहिए-

4- प्रत्येक बार मल-मूत्र त्याग के पश्चात अच्छी तरह से संपूर्ण अंग को साबुन से धोना चाहिए-

5- बार-बार गर्भपात कराना भी सफेद पानी का एक प्रमुख कारण है अतः महिलाओं को अनचाहे गर्भ की स्थापना के प्रति सतर्क रहते हुए गर्भ निरोधक उपायों का प्रयोग(कंडोम, कापर टी, मुँह से खाने वाली गोलियाँ) अवश्य करना चाहिए तथा साथ ही एक या दो बच्चों के बाद अपना या अपने पति का नसबंदी आपरेशन कराना चाहिए-

6- आप शर्म त्यागकर इसके बारे में अपने पति एवं डाक्टर को अवस्य ही बताये नहीं तो आगे चलकर ये रोग असाध्य हो जाता है वैसे इस रोग की प्रमुख औषधियां अशोकरिष्ट, अशोक घनबटी, प्रदरांतक लौह, प्रदरहर रस आदि हैं-

ल्यूकोरिया(Leukorrhea)होने पर करे उपचार-


1- घृतकुमारी को गुड या मिस्री के साथ आप खाली पेट ले ये रोज आपको एक चम्मच लेना है पांच या दस दिनों तक लेना है और अगर ये रोग पुराना है तो फिर इसे एक दो माह तक जारी रखे (बीच में एक हफ्ते अंतराल करके भी दुबारा ले सकती है)-

2- अशोक के पेड की छाल 60 ग्राम को एक लीटर पानी में इतना उबाल ले कि पानी सिर्फ 250 मिलीलीटर ही रह जाए आप इसे दो चम्मच प्रतिदिन एक या दो माह तक लेना है -

3- शतावर(Asparagus Racemosus)की ताज़ी कंदमूल या सूखी जड़ो का चूर्ण 5-10 ग्राम स्वादानुसार जीरे के चूर्ण के साथ एक कप ढूध में सुबह खाली पेट में पिलाने से कमजोरी और तनाव से होने वाली श्वेत प्रदर दो से तीन सप्ताह में ठीक हो जाती है-

4- ब्राम्ही, बेंग साग(Centella asiatica)का चूर्ण दो छोटी चम्मच या उसका स्वरस एक या दो चाय की चम्मच दिन में दो बार मिसरी के साथ 15 -20 दिन तक दें-

5- अरहर(Canjanus cajan)के पत्तों का स्वरस(बिना पानी मिलाये)एक चम्मच दिन में दो बार 12-15 दिन तक लें अथवा अरहर का जूस, सेंधा नमक में मिलकर दिन में एक बार 30 दिनों तक लें-

6- सेमल  की छाल- 200 ग्राम         
    पलाश की छाल- 200 ग्राम
    शतावरी की जड़-200 ग्राममूलकंद

उपरोक्त तीनों को बराबर मात्रा में लेकर कूट- पिसकर छान कर चूर्ण को कांच की शीशी में भरकर रख लें और इस चूर्ण को 1-2 चम्मच ठण्डे पानी या चावल के पानी, या मांड (ठण्डा) के साथ 15-20 दिन तक सुबह-शाम लें-

नोट- धृतकुमारी के गुच्छे का प्रयोग करने से पूर्व इसके काँटों को साफ कर लें ये ज़हरीला है -

परहेज-

तेल, खटाई, मसाला, टमाटर, गर्मी पैदा करने वाला भोजन व कब्ज जनित खाध पदार्थों का सेवन न करें-




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