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16 दिसंबर 2015

अगर अंडाणु या स्पर्म काउंट कम है - If the egg or the sperm count is low

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महिलाओं में infertility का एक कारण poly cystic ovary हो सकता है  अगर F S H और L H  हारमोन का असंतुलन हो तो poly cystic ovary की समस्या हो सकती है  इसके कारण periods भी असंतुलित होते हैं  या तो फिर अधिक होते हैं या बहुत कम या फिर होने ही बंद हो जाते हैं  इस समस्या से मुक्ति पाने के लिए सर्वश्रेष्ठ उपाय है कि प्रतिदिन कपालभाति प्राणायाम करें -



आज कल पहले की अपेक्षा Infertility की समस्या अधिक बढी है  इसके प्रमुख कारण हो सकते हैं  तनाव , सब्जी, फलों में कृत्रिम उर्वरकों और कीटनाशकों का होना , शारीरिक श्रम का अभाव और fast food इत्यादि-

कारण कोई भी हो अगर कपालभाति प्राणायाम नियमित रूप से किया जाए तो इन सभी कारणों का प्रभाव भी बहुत कम होगा और infertility की समस्या भी शायद नहीं होगी-

किशोरावस्था में हर लड़की के अंडाशय हर महीने एक विकसित डिम्ब (अण्डा) उत्पन्न करना शुरू कर देते हैं। वह अण्डा अण्डवाहिका नली (फैलोपियन ट्यूव) के द्वारा नीचे जाता है जो कि अंडाशय को गर्भाशय से जोड़ती है। जब अण्डा गर्भाशय में पहुंचता है, उसका अस्तर रक्त और तरल पदार्थ से गाढ़ा हो जाता है। ऐसा इसलिए होता है कि यदि अण्डा उर्वरित हो जाए, तो वह बढ़ सके और शिशु के जन्म के लिए उसके स्तर में विकसित हो सके। यदि उस डिम्ब का पुरूष के शुक्राणु से सम्मिलन न हो तो वह स्राव बन जाता है जो कि योनि से निष्कासित हो जाता है। इसी स्राव को मासिक धर्म, रजोधर्म या माहवारी (Menstural Cycle or MC) कहते हैं-

यह प्रक्रिया स्त्री शरीर की एक कुदरती  प्रक्रिया है और स्वस्थ शरीर में इस प्रक्रिया के दौरान सामान्य रूटीन के कार्य करने से कोई असुविधा या हानि  नहीं होती-

दस से पन्द्रह साल की लड़की के अण्डाशय हर महीने एक परिपक्व अण्डा या अण्डाणु पैदा करने लगता है। वह अण्डा डिम्बवाही थैली (फेलोपियन ट्यूब) में संचरण करता है जो कि अण्डाशय को गर्भाशय से जोड़ती है। जब अण्डा गर्भाशय में पहुंचता है तो रक्त एवं तरल पदाथॅ से मिलकर उसका अस्तर गाढ़ा होने लगता है। यह तभी होता है जब कि अण्डा उपजाऊ हो, वह बढ़ता है, अस्तर के अन्दर विकसित होकर बच्चा बन जाता है। गाढ़ा अस्तर उतर जाता है और वह माहवारी का रूधिर स्राव बन जाता है, जो कि योनि द्वारा शरीर से बाहर निकल जाता है। 

जिस दौरान रूधिर स्राव होता रहता है उसे माहवारी अवधि/पीरियड कहते हैं। औरत के प्रजनन अंगों में होने वाले बदलावों के आवर्तन चक्र को माहवारी चक्र कहते हैं। यह हॉरमोन तन्त्र के नियन्त्रण में रहता है एवं प्रजनन के लिए जरूरी है। माहवारी चक्र की गिनती रूधिर स्राव के पहले दिन से की जाती है क्योंकि रजोधर्म प्रारम्भ का हॉरमोन चक्र से घनिष्ट तालमेल रहता है। माहवारी का रूधिर स्राव हर महीने में एक बार 28 से 32 दिनों के अन्तराल पर होता है। परन्तु महिलाओं को यह याद करना चाहिए कि माहवारी चक्र के किसी भी समय गर्भ होने की सम्भावना है-

अंडाणु कम बन रहे है तो प्रयोग करे -

1- दशमूल क्वाथ के एक चम्मच को एक गिलास पानी में धीमी आंच पर पकाकर , जब वह आधा रह जाए तब पी लें यह काढ़ा कुछ समय सुबह शाम लेते रहने से periods नियंत्रित हो जाते हैं कपालभाति प्राणायाम के साथ यह काढ़ा भी लेते रहने से pregnancy की सम्भावना बहुत अधिक बढ़ जाती है -

2- अगर eggs कम बन रहे हों तो शिवलिंगी और पुत्र जीवक के बीजों का पावडर बराबर मात्रा में मिलाकर रख लें . यह पावडर एक एक ग्राम की मात्रा में सुबह शाम लेने से बहुत जल्द ही pregnancy हो जाती है -

स्पर्म काउंट बढाए -

1- पुरुषों को sperm count कम होने की समस्या हो तो यौवनामृत वटी , चन्द्र प्रभावटी और शिलाजीत रसायन की एक एक गोली लेते रहें और प्राणायाम करते रहें -

2- अश्वगंधा , शतावर , सफ़ेद मूसली और कौंच के बीज इन सबको आपस में मिलाकर लेने से भी  sperm count बढ़ते हैं -
उपचार और प्रयोग-

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