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7 दिसंबर 2015

पानी को चुम्बकांकित करने की विधि - The method of water Chumbkankit

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एक काँच की बॉटल में पानी भरकर डाट लगाकर फिट करके उसकी एक ओर उत्तर ध्रुव एवं दूसरी ओर दक्षिण ध्रुव आये इस प्रकार से चुम्बक लगायें। ये चुम्बक लगभग 2000 से 3000 गोस की शक्तिवाले चाहिए। इन चुम्बकों का उत्तरी ध्रुव उत्तर दिशा की ओर एवं दक्षिण ध्रुव दक्षिण दिशा की ओर आये इस प्रकार से जमायें-





सामान्यतया 24 घंटों में चुम्बकांकित पानी तैयार होता है। फिर भी यदि जल्दी उपयोग में लेना हो तो 12 से 14 घण्टे तक का प्रभावित जल भी लिया जा सकता है।

इस पानी को न तो गरम करें और न ही फ़्रीज में रखें। यदि किसी संक्रामक रोग का उपद्रव चल रहा हो तब उबाले हुए पानी को लोह चुम्बकांकित करके उपयोग में लाया जाये तो रोग का सामना आसानी से किया जा सकता है-

यह पानी औषधीय गुणों से युक्त होता है। स्वस्थ व्यक्ति उसका उपयोग करके पाचन क्रिया को सुधार सकता है और थकान मिटा सकता है। यह पानी रक्तवाहिनियों में कोलेस्टरोल को जमा होने से रोकता है तथा जमी हुई कोलेस्टरोल को दूर करके हृदय की कार्यक्षमता बढ़ाता है- 

यह पानी मूत्र होकर मूत्राशय, मूत्रपिंड एवं पित्ताशय की तकलीफों में उपयोगी है- 

इस पानी के द्वारा पथरी पिघल जाती है-

स्त्रियों की मासिक धर्म की अनियमितताएँ दूर होती हैं एवं गर्भाशय की तकलीफों में भी राहत मिलती है-

बुखार, दर्द, दमा, सर्दी, खाँसी आदि में, बालकों के विकास में तथा जहर के असर को मिटाने के लिए भी यह पानी उपयोगी है-

चुम्बकांकित पानी की मात्रा (Amount of water Chumbkankit)


दिन में चार बार, लगभग आधा-आधा गिलास जितना लें। बुखार में ज्यादा बार लें। छोटे बच्चों को केवल पाव गिलास पानी दें-

इस पानी का उपयोग आँखें धोने, जख्म साफ करने तथा जलने पर भी किया जा सकता है-

उसके अतिरिक्त अलग-अलग अंगों की चिकित्सा के लिए अलग-अलग शक्तिवाले चुम्बक के बनाये गये साधन, पट्टे आदि मिलते हैं। उनके द्वारा भी दिन में दो-तीन बार चिकित्सा करने से शरीर के अंग क्रियाशील होकर स्वस्थ होने में मदद करते हैं-

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