Breaking News

अपामार्ग से शरीर की वसा भी घटा सकते है

जी हाँ चौंकिए मत ये सच है कि अपामार्ग(Chaff tree)यानी कि लटजीरा या चिरचिटा के बीजो के सेवन से शरीर के बढे हुए फैट(Fat)को कम किया जा सकता है ये एक सर्वविदित क्षुपजातीय औषधि है जो चिरचिटा(Chaff tree)नाम से भी जानी जाती है वर्षा के साथ ही यह अंकुरित होती है ऋतु के अंत तक बढ़ती है तथा शीत ऋतु में पुष्प फलों से शोभित होती है इसके पुष्प हरी गुलाबी आभा युक्त तथा बीज चावल सदृश होते हैं जिन्हें ताण्डूल कहते हैं तथा इसे एक वर्ष तक प्रयुक्त किया जा सकता है-

अपामार्ग से शरीर की वसा भी घटा सकते है

अपामार्ग(Chaff tree)के अन्य नाम-


हिन्दी नाम- चिरचिटा, चिचड़ा, ओंगा चिचरी, लटजीरा

मराठी नाम- अघाड़ा, अघेड़ा

बंगाली नाम- अपांग

अंग्रेजी नाम- प्रिकली चाफ फ्लावर(Prikli chaff flower)

अपामार्ग(Chaff tree)के प्रयोग-


1- लटजीरे(Chaff tree)के बीजों को एकत्र करकर मिटटी के बर्तन में भूनकर उसे पीसकर चूर्ण बनाकर लगभग आधा चम्मच इसे खाया जाये तो भूख कम लगती है तथा यह शरीर की वसा को भी कम करता है इस प्रकार यह कम करने में भी मदद करता है इसके कोई दुष्परिणाम भी नहीं है ये आसानी से आयुर्वेद दवा बेचने वाले पंसारी से मिल जाता है इसका पेड़ सड़क के आस-पास देखने को आसानी से मिल जाता है -

2- इसके तने को साफ़ करकर दातुन की तरह उपयोग करें तो दांतों से जो खून बहने की समस्या होती है वह भी धीरे-धीरे इससे समाप्त हो जाती है-

3- सेहुआ रोग जिसमे त्वचा में सफ़ेद चकत्ते पड़ जाते है उसके उपचार के लिए इसका पंचांग बनाकर उसके क्षार बनाकर उसे केले के पत्तों का क्षार और हल्दी मिलाकर सेहुआ पर लगाने से अच्छा लाभ होता है-

4- यदि आपको भस्मक रोग है यानी कि जिसमे खूब खाने के बाद भी भूख नही मिटती और खाने के इच्छा होती ही रहती है उसके निदान के लिए इसके बीजों को खीर में मिलकर देने से लाभ मिलता है-

5- बाहरी प्रयोग के रूप में भी इसका चूर्ण मात्र सूँघने से आधा शीशी का दर्द, बेहोशी, मिर्गी में आराम मिलता है-

6- इसके पत्रों का स्वरस दाँतों के दर्द में लाभ करता है तथा पुराने से पुरानी केविटी को भरने में मदद करता है-

7- कुत्ते के काटे स्थान पर तथा सर्पदंश-वृश्चिक दंश अन्य जहरीले कीड़ों के काटे स्थान पर ताजा स्वरस तुरन्त लगा देने से जहर उतर जाता है यह घरेलू ग्रामीण उपचार के रूप में प्रयुक्त एक सिद्ध प्रयोग है काटे स्थान पर बाद में पत्तों को पीसकर उनकी लुगदी बाँध देते हैं-व्रण दूषित नहीं हो पाता तथा विष के संस्थानिक प्रभाव भी नहीं होते है -

8- बर्र आदि के काटने पर भी अपामार्ग को कूटकर व पीसकर उस लुगदी का लेप करते हैं तो सूजन नहीं आती है-


Upcharऔर प्रयोग-

कोई टिप्पणी नहीं

//]]>