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15 दिसंबर 2015

कान में साँय- साँय की आवाज़ आती है

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बाजार में आसानी से उपलब्ध मूली और उसके हरे -हरे पत्ते पेट को ठीक रखने के लिए बहुत अच्छे होते हैं इसे हमेशा पानी से अच्छी तरह धोकर ही मूली या उसके पत्ते खाने चाहिए इसके और क्या प्रयोग है जाने -



यदि आपके कान में दर्द है या फिर साँय-साँय की आवाज़ आती है तो आप 200 ग्राम मूली के पत्तों में 50 ग्राम सरसों का तेल मिलाकर धीमी-धीमी आंच पर पकाएं और जब केवल तेल रह जाए तो इसे शीशी में भरकर रख लें बस इस तेल की कुछ बूँदें कान में डालने से कान की पीड़ा से छुटकारा मिलता है-

मूली क्षार श्वास के रोगों व खांसी की अचूक दवा है इसे बनाने के लिए मूली के टुकड़े करके उन्हें छाया में सुखा लें फिर आप इनको जलाकर राख बना लें और इस राख में 8 गुना पानी मिलाकर 6-7 घंटे रख दें तथा बीच बीच में हिलाते रहें इसके बाद ऊपर से निथार  दें तथा नीचे जो मटमैला सा अवशेष बचेगा बस वही मूली क्षार है अब आप इसे सुखाकर रख लें  यह श्वास रोगों के लिए बहुत ही लाभदायक है इसे  अगर छोटे बच्चे को खांसी है तो 100 मि0 ग्रा0 पावडर को शहद में मिलाकर चटाएं तथा बड़ा व्यक्ति 1\2 ग्राम(आधा ग्राम ) पावडर शहद के साथ ले सकता है-

पथरी होने पर मूली क्षार सवेरे सवेरे लें  तथा किडनी स्टोन( Kidney stone) होने पर मूली का रस एक कप की मात्रा में सुबह सुबह  खाली पेट ले लें  इससे आगे चलकर दोबारा पथरी बनने की संभावना भी कम हो जाएगी - 

पीलिया की बीमारी के लिए भी मूली अमृततुल्य है । इसके लिए मूली की सब्जी खाएं और सवेरे खाली पेट मूली का एक कप रस पीएँ  

आँखों में यदि जाला या लालिमा है तो मूली के स्वच्छ रस में कुछ पानी मिलाकर आँखे डुबोकर धोएं-

अगर आपको यदि एसिडिटी (एसिडिटी) की समस्या  है तो मूली के पत्तों का सेवन किया जा सकता है मूली का रस भी इस समस्या से मुक्ति दिलाता है -

पेट में अफारा हो तो मूली  के चार टुकड़े कर लें अब इस के ऊपर 3-4 ग्राम नौशादर बुरक लें । रात भर ऐसे ही रहने दें । सवेरे मूली के टुकड़ों के साथ थोडा पानी भी दिखाई देगा । खाली पेट पहले इस पानी को पी लें । फिर मूली के टुकड़े चबा चबाकर खाएं । बच्चों के लिए नौशादर की मात्रा कम रखें । यह कुछ समय तक ही करना है । इससे शत प्रतिशत लाभ मिलता है-

इसके बीजों के पावडर में मिश्री मिलाकर एक चम्मच सवेरे दूध के साथ लेने से शक्ति में वृद्धि होती है । इसकी सूखी पत्तियों का पावडर सवेरे लेने से बवासीर और अफारे में आराम आता है । पेट के रोग ठीक करने हों तो मूली को काली मिर्च और काला नमक लगाकर खाएँ-

मूली को प्रात:काल सोना तथा दिन के समय चाँदी और रात को मल के समान माना गया है अत: रात को मूली का सेवन भूल कर  भी नहीं करना चाहिए यह भी कहा जाता है कि  मूली खाकर जंगल जाना चाहिए और अदरक खाकर सभा में बैठना चाहिए इसका अर्थ ये है मूली के सेवन के बाद थोडा अदरक का टुकड़ा खा लिया जाए तो मूली की डकार नहीं आती और मूली भली भाँति पच भी जाती है । मूली को भोजन से एकदम पहले नहीं लेना चाहिए । यह अपचन का कारण बन सकती है । नाश्ते से आधा घंटा पहले मूली खाई जा सकती है । या फिर आधा खाना खा चुकने के बाद मूली खाएँ । इस प्रकार मूली अधिक लाभकारी रहेगी । मूली खाने के बाद दूध या दही नहीं खाना चाहिए-

उपचार और प्रयोग-

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