18 दिसंबर 2015

साबुन अथवा जैल में आप क्या प्रयोग करते है

आपकी रोज की ये भाग-दौड़ और प्रदूषित वातावरण(polluted environment) आपके शरीर को गंदा करता है और जिसके लिये आप रोज साबुन लगा कर नहाते हैं लेकिन अब लोग बाल्‍टी के पानी से कम और बाथ टब में शावर जैल(shower gels) डाल कर ज्‍यादा नहाना पसंद करने लगे हैं अब धीरे-धीरे शावर जैल का क्रेज बढ़ता जा रहा है लेकिन रोज-रोज साबुन का प्रयोग करना क्‍या हमारे शरीर और त्‍वचा के लिये अच्‍छा होता है हैं कि साबुन और शावर जैल में क्‍या फर्क होता है और कौन सा प्रोडक्‍ट(product) हमारे शरीर और त्‍वचा के लिये अच्‍छा होता है-



साबुन और जैल में क्या अंतर है -

जो लोग नित्य साबुन का इस्तेमाल करते है वे सभी लोग जानते है कि नहाने के बाद उनके शरीर पर पानी की बूंदे दिखाई पड़ती हैं बजाए उनके जो जैल का प्रयोग करते हैं तथा साबुन त्‍वचा के लिये कठोर होता है लेकिन जैल स्‍किन को मुलायम रखता है इसके अलावा शावर जैल को बस जरा सा इस्तेमाल  करने पर बहुत सा झाग होता है लेकिन साबुन को कई बार रगड़ने से ही झाग पैदा होता है प्रयोग करने के बाद पता होगा कि साबुन की तुलना में जैल सस्ता पड़ता है क्युकि ये कम लगता है -

जब जैल को लूफा में मिला कर शरीर पर रगड़ा जाता है, तो शरीर से मैल साफ होती है। लेकिन कई लोग बस साबुन को ही अपने शरीर से मलते रह जाते हैं और सोंचते हैं कि उनका शरीर साफ हो गया। जैल में अरोमा होता है, जिससे अच्‍छी खुशबू पैदा होती है और कीटाणु दूर होते हैं-

हर घर में सबका साबुन अलग-अलग होना चाहिये वरना इससे त्‍वचा रोग होने की संभावना पैदा हो जाती है। लेकिन यह बात शावर जैल के मामले में गलत है। बाजार में मिलने वाला हर शावर जैल बॉटल में आता है, जिसे केवल दबा कर निकालना ही पड़ता है। इसलिये स्‍किन इन्‍फेक्‍शन होने का कोई खतरा नहीं होता-

हर शावर जैल में कुछ न कुछ ऐसी सामग्रियां होती हैं जो त्‍वचा को कोमल बनाने के साथ कीटाणुओं से भी लड़ती है। जैसे की मिंट, जो शरीर को जरुरी प्रोटेक्‍शन प्रदान करता करती है-

विशेषज्ञों का कहना है कि विशेष एंटीसेप्टिक जैल हाथ और शरीर पर अधिक प्रभावी ढंग से और जल्दी साबुन की तुलना में कीटाणुओं को मार डालते हैं-

फैसला आपके हाथ है कि आप क्या प्रयोग करेगे-

उपचार और प्रयोग-
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