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29 सितंबर 2016

चिरचिटा-अपामार्ग हर बीमारी भगायें

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अपामार्ग(Chaff Tree)का पौधा भारत के सभी सूखे क्षेत्रों में उत्पन्न होता है यह गांवों में अधिक मिलता है खेतों के आसपास घास के साथ आमतौर पाया जाता है इसे बोलचाल की भाषा में आंधीझाड़ा या चिरचिटा(Chaff Tree)भी कहते हैं-अपामार्ग की ऊंचाई लगभग 60 से 120 सेमी होती है आमतौर पर लाल और सफेद दो प्रकार के अपामार्ग देखने को मिलते हैं-सफेद अपामार्ग के डंठल व पत्ते हरे रंग के, भूरे और सफेद रंग के दाग युक्त होते हैं इसके अलावा फल चपटे होते हैं जबकि लाल अपामार्ग(RedChaff Tree)का डंठल लाल रंग का और पत्तों पर लाल-लाल रंग के दाग होते हैं-

चिरचिटा-अपामार्ग हर बीमारी भगायें

इस पर बीज नुकीले कांटे के समान लगते है इसके फल चपटे और कुछ गोल होते हैं दोनों प्रकार के अपामार्ग के गुणों में समानता होती है फिर भी सफेद अपामार्ग(White chaff tree) श्रेष्ठ माना जाता है इनके पत्ते गोलाई लिए हुए 1 से 5 इंच लंबे होते हैं चौड़ाई आधे इंच से ढाई इंच तक होती है- पुष्प मंजरी की लंबाई लगभग एक फुट होती है, जिस पर फूल लगते हैं, फल शीतकाल में लगते हैं और गर्मी में पककर सूख जाते हैं इनमें से चावल के दानों के समान बीज निकलते हैं इसका पौधा वर्षा ऋतु में पैदा होकर गर्मी में सूख जाता है-

आपमार्ग(Chaff Tree)के प्रयोग-


गुर्दे की पथरी(Kidney stone)-

लगभग 1 से 3 ग्राम चिरचिटा के पंचांग का क्षार बकरी के दूध के साथ दिन में दो बार लेते हैं इससे गुर्दे की पथरी(Kidney stone) गलकर नष्ट हो जाती है-

खूनी बवासीर(Emerods)-

चिरचिटा की 25 ग्राम जड़ों को चावल के पानी में पीसकर बकरी के दूध के साथ दिन में तीन बार लेने से खूनी बवासीर(Emerods)ठीक हो जाती है-

कुष्ठ(Leprosy)-

चिरचिटा के पंचांग का काढ़ा लगभग 14 से 28 मिलीलीटर दिन में तीन बार प्रतिदिन सेवन करने से कुष्ठ(Leprosy)रोग कुछ दिनों में ठीक हो जाता है-

हैजा(Cholera)-

चिरचिटा की जड़ों को 3 से 6 ग्राम तक की मात्रा में बारीक पीसकर दिन में तीन बार देने से हैजा(Cholera) में लाभ मिलता है-

शारीरिक दर्द(Physical pain)-

चिरचिटा की लगभग 1 से 3 ग्राम पंचांग का क्षार नींबू के रस में या शहद के साथ दिन में तीन बार देने से शारीरिक दर्द(Physical pain) में लाभ मिलता है-

तृतीयक बुखार(Typhoid fever)-

चिरचिटा(अपामार्ग या ओंगा)की जड़ को लाल रंग के 7 धागों में रविवार के दिन लपेटकर रोगी चिरचिटा की कमर में बांध देने से तिजारी बुखार(Typhoid fever) चला जाता है-

खांसी(Cough)-

चिरचिटा को जलाकर, छानकर उसमें उसके बराबर वजन की चीनी मिलाकर 1 चुटकी दवा मां के दूध के साथ रोगी को देने से खांसी बंद हो जाती है-

आंवयुक्त दस्त(Dysentery diarrhea)-

अजाझाड़े (चिरचिटा) के कोमल के पत्तों को मिश्री के साथ मिलाकर अच्छी तरह पीसकर मक्खन के साथ धीमी आग पर रखे जब यह गाढ़ा हो जाये तब इसको खाने से ऑवयुक्त दस्त में लाभ मिलता है-

बवासीर(Hemorrhoids)-

250 ग्राम चिरचिड़ा का रस, 50 ग्राम लहसुन का रस, 50 ग्राम प्याज का रस और 125 ग्राम सरसों का तेल इन सबको मिलाकर आग पर पकायें और पके हुए रस में 6 ग्राम मैनसिल को पीसकर डालें और 20 ग्राम मोम डालकर महीन मलहम (पेस्ट) बनायें अब इस मलहम को मस्सों पर लगाकर पान या धतूरे का पत्ता ऊपर से चिपकाने से बवासीर के मस्से सूखकर ठीक हो जाते हैं-

चिरचिटा के पत्तों के रस में 5-6 काली मिर्च पीसकर पानी के साथ पीने से बवासीर में आराम मिलता है-

गुर्दे के रोग(Kidney disease)-

5 ग्राम से 10 ग्राम चिरचिटा की जड़ का काढ़ा 1 से 50 ग्राम सुबह-शाम मुलेठी, गोखरू और पाठा के साथ खाने से गुर्दे की पथरी खत्म हो जाती है इसकी क्षार अगर भेड़ के पेशाब के साथ खायें तो गुर्दे की पथरी में ज्यादा लाभ होता है-

पक्षाघात-लकवा(Paralysis)-

एक ग्राम कालीमिर्च के साथ चिरचिटा की जड़ को दूध में पीसकर नाक में टपकाने से लकवा या पक्षाघात ठीक हो जाता है-

जलोदर(Dropsy)-

अजाझाड़े (चिरचिटा) का चूर्ण लगभग 1 ग्राम का चौथाई भाग की मात्रा में लेकर पीने से जलोदर (पेट में पानी भरना) की सूजन कम होकर समाप्त हो जाती है-

शीतपित्त(Urticaria)-

अपामार्ग(चिरचिटा) के पत्तों के रस में कपूर और चन्दन का तेल मिलाकर शरीर पर मालिश करने से शीतपित्त की खुजली और जलन खत्म होती है-

घाव-व्रण(Wound)-

फोड़े की सूजन व दर्द कम करने के लिए चिरचिटा, सज्जीखार अथवा जवाखार का लेप बनाकर फोड़े पर लगाने से फोड़ा फूट जाता है जिससे दर्द व जलन में रोगी को आराम मिलता है-

उपदंश-सिफलिस(Syphilis)-

चिरचिटा की धूनी देने से उपदंश के घाव मिट जाते हैं-10 ग्राम चिरचिटा की जड़ के रस को सफेद जीरे के 8 ग्राम चूर्ण के साथ मिलाकर पीने से उपदंश में बहुत लाभ होता है-इसके साथ रोगी को मक्खन भी साथ में खिलाना चाहिए-

नाखून की खुजली(Nail itch)-

चिरचिटा के पत्तों को पीसकर रोजाना 2 से 3 बार लेप करने से नाखूनों की खुजली दूर हो जाती है-

नासूर(Ulcer)-

नासूर दूर करने के लिए चिरचिटे की पत्तियों को पानी में पीसकर रूई में लगाकर नासूर में भर दें- इससे नासूर मिट जाता है-

शरीर में सूजन(Swelling)-

लगभग 5-5 ग्राम की मात्रा में चिरचिटा खार, सज्जी खार और जवाखार को लेकर पानी में पीसकर सूजन वाली गांठ पर लेप की तरह से लगाने से सूजन दूर हो जाती है-

बच्चों के रोगों में लाभकारी(Children disease)-

अगर बच्चे की आंख में माता (दाने) निकल आये तो दूध में चिरमिटी को घिसकर आंख में काजल की तरह लगाएं-

बिच्छू का जहर(Poison Scorpion)-  

जिस बच्चे या औरत-आदमी के बिच्छू ने डंक मारा हो, उसे चिरचिटे की जड़ का स्पर्श करायें अथवा 2 बार दिखायें- इससे जहर उतर जाता है-

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Upcharऔर प्रयोग-

2 टिप्‍पणियां:

  1. प्राकृतिक रूप से अपने आप उगने वाली खरपतवार का बहुत बड़ा औषधीय स्वरूप है यह जानकर हैरानी के साथ प्रशन्नता भी पैदा हुई की सभी प्रकार के अधिकतर रोगों में चिरपटा का उपयोग किया जा सकता है।

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  2. प्राकृतिक रूप से अपने आप उगने वाली खरपतवार का बहुत बड़ा औषधीय स्वरूप है यह जानकर हैरानी के साथ प्रशन्नता भी पैदा हुई की सभी प्रकार के अधिकतर रोगों में चिरपटा का उपयोग किया जा सकता है।

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