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31 दिसंबर 2016

घरेलू गर्भनिरोधक उपाय आजमायें

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वैसे तो गर्भनिरोधकों के तमाम विकल्प बाजार में मौजूद हैं लेकिन अगर आप इनके केमिकल या साइड एफेक्ट से दूरी रखना चाहते हैं या फिर इन प्रचलित तरीकों में यकीन नहीं रखते हैं तो आपके लिए आयुर्वेद में कु‌छ घरेलू उपाय भी हैं यदि आप आयुर्वेद पर यकीन रखते हैं तो इन उपायों का गर्भनिरोधक(Contraceptive)के तौर पर इस्तेमाल कर सकते हैं-

घरेलू गर्भनिरोधक उपाय आजमायें

वैसे तो इनके साइड एफेक्ट नहीं है लेकिन इनका इस्तेमाल आप किसी अनुभवी आयुर्वेदिक डॉक्टर के परामर्श से करें तो प्राकृतिक और सुरक्षित तौर पर गर्भनिरोध और बेफिक्र सेक्स लाइफ आसान हो सकेगी-

घरेलू उपाय-


1- मासिक धर्म के पश्‍चात स्‍नान करने के बाद एरंड के बीज(Castor seeds) की गिरी छीलकर खाने से गर्भ नहीं ठहरता है एक गिरी निगलने पर एक वर्ष तथा दो गिरी निगलने पर दो वर्ष व तीन गिरी निगलने पर तीन वर्ष तक बच्‍चे पैदा नहीं होंगे बच्‍चे पैदा करने की इच्‍छा हो तो गिरी खाना बंद कर दें एक वर्ष बाद पुन: गर्भधारण करने की क्षमता उत्‍पन्‍न हो जाती है किसी भी हाल में एक साथ तीन से अधिक गिरी न खाएं क्युकि यह नुकसान दायक हो सकता है-

2- पीरियड के बाद लहसुन(Garlic) की दो कलियां छीलकर निगल जाएं तो गर्भ नहीं ठहरेगा-

3- पीपल, सुहागा व बायबिडंग को बराबर-बराबर लेकर पीस लें- जिस दिन पीरियड आरंभ हो उस दिन से सात दिनों तक छह ग्राम चूर्ण पानी से खाएं- एक वर्ष तक गर्म नहीं ठहरेगा-

4- तालीसपत्र व गेरू को 25 ग्राम लेकर चार दिनों तक ठंडे पानी से पीने से स्‍थाई बांझपन आ जाती है-

5- सीताफल का बीज(Pumpkin seeds) पीसकर योनी में मलने से गर्भ नहीं ठहरेगा और इससे गर्भाशय की सफाई भी हो जाती है-

6- पीरियड बंद होने के बाद एक कप तुलसी के पत्‍ते(Basil leaves)लेकर काढ़ा बनाएं और तीन दिन तक लगातार पीएं इससे गर्भ भी नहीं ठहरेगा और कोई नुकसान भी नहीं होगा-

7- हल्‍दी की गांठ(turmeric root) पीसकर उसे छान ले- छह ग्राम पाउडर पानी के साथ खाएं इसे पूरे पीरियड के दौरान खाएं तो गर्भ नहीं ठहरेगा-

8- पीरियड के पांचवें दिन करेले का रस(Bitter gourd juice) पीने से गर्भ नहीं ठहरता है-

9- संभोग के दौरान नीम के तेल(Neem oil) में रूई का फाहा भिंगोकर योनी में रखने से गर्भ ठहरने की संभावना नहीं रहती है-

10- कैस्टर यानी अरंडी के बीज को फोड़ें और इनमें मौजूद एक सफेद बीज को निकालें और सेक्स के 72 घंटे के भीतर महिलाएं इसका सेवन करें तो यह आई-पिल की तरह ही गर्भधारण रोक सकता है- महिलाएं इसका सेवन पीरियड्स के तीन दिनों तक करें तो एक महीने तक इसका प्रभाव रहेगा-

11- त‌िल के तेल में सेंधा नमक का टुकड़ा डुबोएं और सेक्स के बाद इसे महिलाएं अपने प्राइवेट पार्ट पर कम से कम दो मिनट तक रखें-इससे वीर्य गर्भाशय में पहुंचते ही नष्ट हो जाएगा- महिलाएं सेक्स के बाद प्राइवेट पार्ट को गुनगुने पानी और सेंधा नमक से भी साफ कर सकती हैं-इससे भी गर्भ नहीं ठहरेगा-

12- मासिक धर्म से शुद्ध होने पर (पांचवें दिन से) चमेली की एक कली (चमेली का फूल, जो खिला न हो) पानी के साथ रोज लगातार तीन दिन तक निगलने से एक वर्ष तक गर्भनिरोधक का काम करेगा-

13- सूखे पुदीने के पत्ते का पाउडर बनाएं और स्टोर कर लें-सेक्स के पांच मिनट के बाद एक ग्लास गुनगुने पानी के साथ एक चम्मच पाउडर का सेवन करें-महिलाओं के लिए यह नैचुरल कंट्रासेप्टिव दवा का काम करेगा-

14- गुड़हल के फूल का पेस्ट बनाएं इसमें स्टार्च मिलाएं-पीरियड्स के शुरुआती तीन दिनों तक इसका सेवन कंट्रासेप्टिव की तरह ही काम करेगा-

15- संभोग के समय प्‍याज का रस योनी में रखने पर शुक्राणु बेसर हो जाते हैं-

16- आंवला, रसनजनम और हरितकारी को समान मात्रा में लेकर इनका पाउडर बनाएं और स्टोर करें- ये औषध‌ियां क‌िसी भी आयुर्वेदिक स्टोर पर म‌िल जाएंगी- महिलाएं इनका सेवन पीरियड्स के चौथे दिन से 16वें दिन तक करें तो यह गर्भनिरोधक गोलियों की तरह ही असरदार होता है-

17- यदि आप गर्भ निरोधक प्रयोग नहीं करना चाहते या गर्भनिरोधक गोलियों का सेवन नहीं करना चाहते हों तो चावल धुले पानी में चावल के पौधे की जड़ पीसकर छान लें और इसमें शहद मिलाकर पिला दें- यह हानिरहित सुरक्षित गर्भनिरोधक उपाय है-

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Upcharऔर प्रयोग-

30 दिसंबर 2016

सर्दी में होने वाली नजला-जुकाम के लिए

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लोगों को शीत काल में कोल्ड-एलर्जी(Cold-allergy)हो जाती है ये अधिकतर सर्दी की शुरुआत व अंत के समय या तेज शीत लहर चलने पर नाक से पानी टपकाना "नजला जुकाम" से पीड़ित हो जाते है कोल्ड एलर्जी(Cold allergy)से होने वाली खासी जुकाम नजला, नाक टपकना आदि के लिए पूरी सर्दी के लिए टिप्स-

सर्दी में होने वाली नजला-जुकाम के लिए


क्या करे-


सर्दी के शुरू होने से पहले यानी दिवाली के बाद एक ग्राम केसर(Saffron)लाकर उसे खरल में बारीक पीस ले फिर उस पिसी हुई केशर को एक कांच की शीशी में 200-250 ग्राम गुलाब जल(Rose water)में मिला कर रख लें अब आप रोजाना सोते समय इस प्रकार ले-

1- तीन वर्ष से अधिक के बच्चो को आधी चम्मच एक गिलास दुग्ध में दें-

2- दस वर्ष से अधिक आयु वाले एक चम्मच एक गिलास दुग्ध में लेना है-

3- वृद्धो को दो चम्मच गिलास दुग्ध में लेना चाहिए -

प्रति रात्रि सोने से पहले गुनगुने दुग्ध में मिलाकर पीवे केसर मिश्रित गुलाब जल को चम्मच में लेने से पहले शीशी को थोड़ा हिला लेवे-इससे आपको सर्दी में कोल्ड एलर्जी(Cold-allergy)से राहत होगी एक बार इस नुस्खे को अवश्य ही आजमायें-

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ज़ुकाम कुछ सेकंड्स में दूर हो जाता है

Upcharऔर प्रयोग-

29 दिसंबर 2016

इन्द्रायण के आयुर्वेदिक प्रयोग

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इन्द्रायण(Indrayan)एक लता होती है जो पूरे भारत के बलुई क्षेत्रों में पायी जाती है यह खेतों में उगाई जाती है इन्द्रायण तीन प्रकार की होती है पहली छोटी इन्द्रायण, दूसरी बड़ी इन्द्रायण और तीसरी लाल इन्द्रायण होती है तीनों प्रकार की इन्द्रायण में लगभग पचास से लेकर सौ फल आते हैं-

इन्द्रायण के आयुर्वेदिक प्रयोग


यह दस्त लाने वाली तथा कफ-पित्तनाशक है तथा यह कामला(पीलिया),प्लीहा (तिल्ली),पेट के रोग,श्वांस (दमा), खांसी, सफेद दाग, गैस, गांठ, व्रण (जख्म), प्रमेह (वीर्य विकार), गण्डमाला (गले में गिल्टी का हो जाना) तथा विष को नष्ट करता है ये गुण छोटी और बड़ी दोनों इन्द्रायण में होते हैं-

इन्द्रायण का सेवन बड़ी ही सावधानी से करना चाहिए क्योंकि इसके ज्यादा और अकेले सेवन करने से पेट में मरोड़ पैदा होता है और शरीर में जहर के जैसे लक्षण पैदा होते हैं-

विभिन्न रोगों में इन्द्रायण से उपचार-


1- इन्द्रायण के बीजों का तेल नारियल के तेल के साथ बराबर मात्रा में लेकर बालों पर लगाने से बाल काले हो जाते हैं तथा इन्द्रायण की जड़ के 3 से 5 ग्राम चूर्ण को गाय के दूध के साथ सेवन करने से बाल काले हो जाते हैं परन्तु इसके परहेज में केवल सिर्फ दूध ही पीना चाहिए-

2- सिर के बाल पूरी तरह से साफ कराके इन्द्रायण के बीजों का तेल निकालकर लगाने से सिर में काले बाल उगते हैं तथा इन्द्रायण के बीजों का तेल लगाने से सफेद बाल काले हो जाते हैं-

3- इन्द्रायण के पके हुए फल को या उसके छिलके को तेल में उबालकर और छानकर पीने से बहरापन दूर होता है-

4- इसके पके हुए फल की धूनी दांतों में देने से दांत के कीड़े मर जाते हैं-

5- इन्द्रायण की जड़ के चूर्ण को नस्य(नाक में डालने से)दिन में 3 बार लेने से अपस्मार(मिर्गी)रोग दूर हो जाता है-

6- इन्द्रायण के फल में छेद करके उसमें कालीमिर्च भरकर छेद को बंद करके धूप में सूखने के लिए रख दें या गर्म राख में कुछ देर तक पड़ा रहने दें फिर काली मिर्च के दानों को रोजाना शहद तथा पीपल के साथ एक सप्ताह तक सेवन करने से कास (खांसी) के रोग में लाभ होता है-

7- स्त्रियों के स्तन में सूजन आ जाने पर इन्द्रायण की जड़ को घिसकर लेप करने से लाभ होता है-

8- इन्द्रायण का मुरब्बा खाने से पेट के रोग दूर होते हैं तथा इन्द्रायण के फल में काला नमक और अजवायन भरकर धूप में सुखा लें अब इस अजवायन की गर्म पानी के साथ फंकी लेने से दस्त के समय होने वाला दर्द दूर हो जाता है-

9- विसूचिका(हैजा)के रोगी को इन्द्रायण के ताजे फल के 5 ग्राम गूदे को गर्म पानी के साथ या इसके 2 से 5 ग्राम सूखे गूदे को अजवायन के साथ देना चाहिए-

10- इन्द्रायण की जड़ को पानी के साथ पीसकर और छानकर 5 से 10 मिलीलीटर की मात्रा में पीने से पेशाब करते समय का दर्द और जलन दूर हो जाती है-

11- दस से बीस ग्राम लाल इन्द्रायण की जड़, हल्दी, हरड़ की छाल, बहेड़ा और आंवला को 160 मिलीलीटर पानी में उबालकर इसका चौथाई हिस्सा बाकी रह जाने पर काढ़ा बनाकर उसे शहद के साथ सुबह-शाम सेवन करने से मूत्रकृच्छ (पेशाब में दर्द और जलन) का रोग समाप्त हो जाता है-

12- मासिक-धर्म के रुक जाने पर 3 ग्राम इन्द्रवारूणी के बीज और 5 दाने कालीमिर्च को एक साथ पीसकर 200 मिलीलीटर पानी में उबालकर काढ़ा बना लें इस काढ़े को छानकर रोगी को पिलाने से रुका हुआ मासिक धर्म दुबारा शुरू हो जाता है-

13- इन्दायण की जड़ को योनि में रखने से योनि का दर्द और पुष्पावरोध(मासिक-धर्म का रुकना)दूर होता है-

14- इन्द्रायण के फल के गूदे को गर्म करके पेट में बांधने से आंतों के सभी प्रकार के कीड़े मर जाते हैं-

15- इन्द्रायण की फल मज्जा को पानी में उबालकर और छानकर गाढ़ा करके छोटी-2 चने के आकार की गोलियां गोलियां बना लेते हैं इसकी 1-2 गोली ठण्डे दूध से लेने से सुबह साफ दस्त शुरू हो जाते हैं-

16- इन्द्रायण के फल का गूदा तथा बीजों से खाली करके इसके छिलके की प्याली में बकरी का दूध भरकर पूरी रात भर के लिए रख दें सुबह होने पर इस दूध में थोड़ी-सी चीनी मिलाकर रोगी को कुछ दिनों तक पिलाने से जलोदर मिट जाता है इन्द्रायण की जड़ का काढ़ा और फल का गूदा खिलाना भी लाभदायक है परन्तु ये तेज औषधि है इन्द्रायण की जड़ का चूर्ण 1 से 3 ग्राम ग्राम को सोंठ और गुड़ के साथ सुबह और शाम देने से लाभ होता है ध्यान रहें की अधिक मात्रा में सेवन करने से विशाक्त(जहर)बन जाता है और हानि पहुंचाता है किसी वैध्य की देखरेख में लें-

17- इन्द्रायण की जड़ की छाल के चूर्ण में सांभर नमक मिलाकर खाने से जलोदर समाप्त हो जाता है-

18- 100 ग्राम इन्द्रायण की जड़ को 500 मिलीलीटर एरण्ड के तेल में डालकर पकाने के लिए रख दें पकने पर जब तेल थोड़ा बाकी रह जाये तो इस 15 मिलीलीटर तेल को गाय के दूध के साथ सुबह-शाम पीने से उपदंश समाप्त हो जाता है-

19- इन्द्रायण की जड़ों के टुकड़े को 5 गुना पानी में उबाल लें जब उबलने पर तीन हिस्से पानी बाकी रह जाए तो इसे छानकर उसमें बराबर मात्रा में बूरा मिलाकर शर्बत बनाकर पीने से उपदंश और वात पीड़ा मिटती है-

20- इन्द्रायण की जड़ को पीसकर गाय के घी में मिलाकर भग(योनि)पर मलने से प्रसव आसानी से हो जाता है इन्द्रायण के फल के रस में रूई का फाया भिगोकर योनि में रखने से बच्चा आसानी से हो जाता है या इन्द्रायण की जड़ को बारीक पीसकर देशी घी में मिलाकर स्त्री की योनि में रखने से बच्चे का जन्म आसानी से होता है-

21- इन्द्रायण की जड़ों को सिरके में पीसकर गर्म करके शोथयुक्त(सूजन वाली जगह)स्थान पर लगाने से सूजन मिट जाती है अथवा शरीर में सूजन होने पर इन्द्रायण की जड़ को सिरके में पीसकर लेप की तरह से शरीर पर लगाने से सूजन दूर हो जाती है-

22- इन्द्रायण को बारीक पीसकर इसका चूर्ण बना लें फिर 200 मिलीलीटर पानी में 50 ग्राम धनिये को मिलाकर काढ़ा बना लें इसके बाद इन्द्रायण के चूर्ण को इस काढ़े में मिलाकर शरीर पर लेप की तरह लगाने से सूजन खत्म हो जाती है-

23- इन्द्रायण की जड़ और पीपल के चूर्ण को बराबर मात्रा में लेकर गुड़ में मिलाकर 10 ग्राम की मात्रा में रोजाना सेवन करने से संधिगत वायु दूर होती है-

24- 500 मिलीलीटर इन्द्रायण के गूदे के रस में 10 ग्राम हल्दी, काला नमक, बड़े हुत्लीना की छाल डालकर बारीक पीस लें, जब पानी सूख जाए तो चौथाई-चौथाई ग्राम की गोलियां बना लें एक-एक गोली सुबह-शाम दूध के साथ देने से सूजन तथा दर्द थोड़े ही दिनों में अच्छा हो जाता है-

25- इन्द्रायण की जड़ों को बेल पत्रों के साथ पीसकर 10-20 ग्राम की मात्रा में रोजाना सुबह-शाम पिलाने से स्त्री गर्भधारण करती है-

26-  इन्द्रायण के फल का 6 ग्राम गूदा खाने से बिच्छू का (विष) जहर उतरता है तथा 3 ग्राम बड़ी इन्द्रायण की जड़ का चूर्ण पान के पत्ते में रखकर खाने से सर्पदंश में लाभ मिलता है-

27- बच्चों के डिब्बा रोग(पसली चलना)में इसकी जड़ के 1 ग्राम चूर्ण में 250 मिलीग्राम सेंधानमक मिलाकर गर्म पानी के साथ दिन में तीन बार सेवन करने से लाभ मिलता है-

28- लाल इन्द्रायण के फल को पीसकर नारियल के तेल के साथ गर्म करके कान के अन्दर के जख्म पर लगाने से जख्म साफ होकर भर जाता है-

29- इन्द्रायण के फल के रस या जड़ की छाल को तिल के तेल में उबालकर तेल को मस्तक (माथे) पर लेप करने से मस्तक पीड़ा या बार-बार होने वाली मस्तक पीड़ा मिटती है-

30- इन्द्रायण के फलों का रस या जड़ की छाल के काढ़े के तेल को पकाकर, छानकर 20 मिलीलीटर सुबह-शाम उपयोग करने से आधाशीशी (आधे सिर का दर्द), सिर दर्द, पीनस (पुराना जुकाम), कान दर्द और अर्धांगशूल दूर हो जाते हैं-

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Upcharऔर प्रयोग-

28 दिसंबर 2016

एक्सरसाइज से कैलोरी बर्न करे

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क्या आप अपने घरेलू काम काज को करते हुए अपनी कैलोरी बर्न(Calories Burn)कर सकती है जी हाँ आज-कल पहले की अपेक्षा लोगो में मोटापे(Obesity)की शिकायत बढती जा रही है कभी सोचा है आज क्यों ये सब हो रहा है आइये एक नजर डाले-

एक्सरसाइज से कैलोरी बर्न करे

पहले हमारी माताए-बहने प्रात :काल ही उठ जाया करती थी और स्वयं ही घर के सारे काम-काज किया करती थी इसलिए वो स्वस्थ रहा करती थी वक्त बदलता गया बर्तन मांजना भी एक एक्सरसाइज(Exercise) हुआ करता था सारा वक्त दिन में घर के काम से उनकी पूर्णतया एक्सरसाइज(Exercise) हो जाती थी और कैलोरी बर्न(Calories Burn) होती थी तब मोटापा(Obesity) या कोलेस्ट्रोल(Cholesterol) जैसी बीमारी बहुत कम हुआ करती थी -

जैसे-जैसे घरेलू सुख साधन का आवागमन हुआ है बीमारियों का इजाफा भी हुआ है घर में वासिंग मशीन(Washing Machine) ने तो महिलाओं को और भी काम न करने की प्रवृति बढ़ा दी है सम्पन्न घरो की महिलाए तो बिना नौकरानी के रहना स्टेटस और सिम्बल के विपरीत समझती है और धीरे-धीरे -बची खुची थोड़ी बहुत एक्सरसाइज(Exercise) से भी दूर हो जाती है -

समझदार बने और आदत डालें-


आप अपना बिस्तर खुद साफ़ करे डस्टिंग(Dusting) करे और क्लीनिंग(Cleaning) करे-अपने कपडे अपने हाथो से धोये तो यकीन माने आपके घर के काम की भागीदारी से कई फायदे होगे एक फायदा ये भी है कि मेहमान के आ जाने पे आपको आलस नहीं होगा आपकी नौकरानी अवकाश पे जाने से आपको तकलीफ नहीं होगी और आपको की कैलोरी भी बर्न होगी तो आपको मोटापा या चर्बी(Fat) बढ़ने जैसी समस्या से सामना नहीं करना होगा घर में प्रशंसा भी मिलेगी-

यदि आप दिन-भर में 3000 कैलोरी कन्जूम करते है और सिर्फ 2000 ही बर्न कर पा रहे है तो समझ ले कि आप मोटा होने जा रहे है सिर्फ कैलोरी बर्न करके ही मोटापा रोका जा सकता है बाकी आप के पास अगर पैसा है तो बाजार में नीली-पीली गोली दे के डॉक्टर आपको सिर्फ उल्लू बना सकते है और आपके पैसे का वजन जरुर कम कर सकते है -कैलोरी बर्न(Calories Burn) करने के कई तरीके है जिनको करके आप अपनी कैलोरी को बर्न कर सकते है -

क्या कर सकते है-


1- आप महिला है तो घर में डांसिंग(Dancing) करना भी नियमित रूप से आपके लिए एक अच्छा उपाय है-डांसिंग आपकी अतिरिक्त कैलोरी की जमावट को रोकती है और आपकी बाड़ी को पतला करके एक्टिव(Active)भी करती है -

2- घर में अगर सीढियाँ है तो दिन में कई बार उपयोग करे आपके बार बार चढ़ने उतरने से शरीर का मेटा बोलिज्म(Metabolism)बढ़ता है इससे भी कैलोरी बर्न होती है और आपके पैर भी चुस्त-दुरुस्त रहते है माल में भी एस्केलेटर्स(Escalators) की जगह सीढियों का ही उपयोग करे रोज बीस-तीस मिनट पैदल चलने की आदत डाले-

3- एरोबिक्स(Aerobics) भी एक अच्छी कसरत है यदि संभव हो तो आधे घंटे अवस्य करे -

4- तैरने से भी कैलोरी बर्न होती है अगर आस-पास तैरने जैसा कोई माहौल है तो अवस्य तैरना आरम्भ करे-

5- ये जरुरी नहीं है कि एथेलेटिक्स में जाना है तभी दौड़े लेकिन नियमित सुबह दौड़ने से भी आपकी कैलोरी बर्न होगी और आपका स्टेमिना(Stamina) भी मजबूत होगा -

6- ग्रीन टी(Green tea)का प्रयोग अवस्य करे-ग्रीन टी भी कैलोरी बर्न करने का काम करती है आप दिन में तीन से चार कप ग्रीन टी पिए तो आप मोटे नहीं होगे और एक अंतिम बात सिर्फ पोस्ट पढने से कुछ नहीं होगा इस पे अमल में लाने से ही मोटापा कम होगा-

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Upcharऔर प्रयोग-

कमर की चौड़ाई मोटापे की निशानी होती है

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महिलाओं में मोटापा(Obesity)एक बीमारी कर रूप लेती जा रही है और खासकर शादी होने या बच्‍चे होने के बाद महिलाएं अपने फिटनस को लेकर लापरवाह हो जाती हैं जिससे वह आसानी से Obesity-मोटापे की शिकार होती चली जाती हैं-

कमर की चौड़ाई मोटापे की निशानी होती है


जब कमर की चौड़ाई(Waist Width)34 ईंच से अधिक होने लगे तो सावधान हो जाना चाहिए इससे अधिक कमर की चौड़ाई होना मोटापे(Obesity)की निशानी है यहां हम कुछ ऐसे घरेलू नुस्‍खे बता रहे हैं जिससे न केवल कमर की मोटाई कम की जा सकती है बल्कि उसे पतली आकर्षक और कमनीय बनाया जा सकता है-

कमर की चौड़ाई(Waist Width)कम करने के लिए क्या करे-


1- सबसे पहले आंवले व हल्‍दी को पीसकर चूर्ण बना लें और इस चूर्ण को नियमित रूप से छाछ के साथ लें कुछ दिन में आपके पेट का मोटापा घट जाएगा और कमर की चौड़ाई(Waist Width)भी कम हो जाएगी-

2- आप छोटी पीपल का चूर्ण बना लें इस चूर्ण को तीन ग्राम प्रतिदिन सुबह के समय छाछ के साथ लेने से निकला हुआ पेट का मोटापा(Obesity)घट जाता है और कमर की चौड़ाई कम जाती है-

3- मालती की जड़ को पीसकर उसे शहद में मिलाएं और उसे छाछ के साथ पीएं ये प्रसव के बाद बढ़ने वाले मोटापे(Obesity)में यह रामवाण की तरह काम करता है और कमर की चौड़ाई(Waist Width) कम हो जाती है मालती की जड़ आपको किसी भी पुराने आयुर्वेद दवा बेचने वाले पंसारी से प्राप्त हो जायेगी-

4- पपीता के मौसम में इसे नियमित खाएं और लंबे समय तक पपीता के सेवन से कमर की न केवल अतिरिक्‍त चर्बी कम होती है बल्कि वह बेहद आकर्षक हो जाता है-

5- आप किसी योग्‍य आयुर्वेद चिकित्‍सक की सलाह ले सकती है- 
Upcharऔर प्रयोग-

27 दिसंबर 2016

हमने तो छोड़ दिया आप सिगरेट आप कब छोड़ेगे

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आज हम कुछ बात करते है सिगरेट छोड़ने की-वैसे तो सिगरेट(Cigarettes)की आदत को छोड़ना इतना आसान नही होता है लेकिन यदि आप मेरे लिखे कुछ प्वाइंट्स के आजमाएंगे तो यकीनन आप सिगरेट की आदत से छुटकारा पा जाएंगे-

हमने तो छोड़ दिया आप सिगरेट आप कब छोड़ेगे

सबसे पहले मै आपको कुछ बताना चाहूंगा कि स्कूल और कालेज टाइम मे मैने भी स्मोकिंग के ढेरो रिकार्ड तोड़े थे हर सिगरेट(Cigarettes)बीड़ी और सिगार को ट्राई किया था या आप ये समझे कि ट्राई क्या था एक सिगरेट(Cigarettes)बुझती नही थी और दूसरी जलाने के लिए मन-मचलने लगता था सच माने तो ऐसा कोई ब्रांड नही था जिसे हमने ट्राई नही किया था तो आप समझ ही गए होंगें कि स्टूडेंट लाइफ थी बड़े रहीसजादों का
साथ था धीरे-धीरे सब समझ आ गई लेकिन आज अगर कोई बगल मे खड़ा होकर सिगरेट पीता है तो मुझे धुंए से भी दिक्कत होती है

तो आइए हम अपने अनुभव से कुछ प्वाइंट बताते है जिससे आप अपनी(अथवा अपने साथियों की)सिगरेट(Cigarettes)छुड़वा सकते है हो सकता है आप हमारे कुछ अनुभवों से सीख ले सकें अन्यथा आप इन अनुभवों को दूसरे धूम्रपान करने वालों को बता सकते है-

क्या करें-


1- सबसे पहले तो आप अपने परिवार की एक ग्रुप फोटो अपने पास जरुर रखें और जब भी आप सिगरेट पीजिए तो धुंए के आर-पार अपने परिवार की फोटो को देखिए-वैसे भी असली जिंदगी मे यही होता है सिगरेट आप पीते है और आपका पूरा परिवार पैसिव स्मोकिंग झेलता है धुंए के पार फोटो देखने से आपको लगेगा कि आप सिगरेट(Cigarettes)पी रहे है लेकिन धुंआ आपका परिवार झेल रहा है-

2- अब आप ही यह निश्चय करें कि आप ही सिगरेट छोड़ना चाहते है अब कारण चाहे कोई भी हो लेकिन बिना आपकी मर्जी के कोई भी आपसे सिगरेट नही छुड़वा सकता है ये बात आपके अंदर से ही आनी चाहिए तभी कुछ आगे बात बनेगी-

3- लेकिन आप कभी भी जल्दबाजी या आवेश मे आकर सिगरेट छोड़ने की गलती नही करें-यदि आप तैश मे आकर सिगरेट छोड़ने की कसम खाते है तो यकीनन आपका दिमाग अगले ही पल कसम तोड़ने के बहाने तलाशने लगेगा-इसलिए सिगरेट छोड़ने का फैसला पूरे होशो हवाश बिना आवेग मे आकर ही करें-दॄढ निश्चय के बाद दूसरी सबसे जरुरी चीज जो आपको चाहिए होगी वो है आत्मसंयम-यदि आप अपने ऊपर कंट्रोल नही रख पाएंगे तो सारा किया धरा धुंए मे उड़ जाएगा इसलिए आपको आत्म संयम और आत्म नियंत्रण बहुत जरुरी है और हो सकता है कि आपको शुरु-शुरु मे दिक्कत आएं लेकिन आप कर सकते है-

4- आपके पास कम से कम एक किताब तो ऐसी जरुर होनी चाहिए जिसमे सिगरेट पीने के बुरे परिणामो के बारे मे लिखा हो और कोशिश करिएगा कि उस किताब मे कुछ चित्र भी हो और जब भी आपके पास खाली समय हो तो उस किताब के पन्ने जरुर पलटिएगा-

5- आप जितनी चाहे सिगरेट पीजिएगा लेकिन आप एक बात अवश्य ही ध्यान रखियेगा कि अपनी ऐश ट्रे को साफ मत करिएगा ताकि ये आपको याद दिलाती रहेगा कि आपने कितनी सिगरेट पी है फिर हफ़्ते के हफ़्ते(अथवा हर पंद्रह दिनो में) आप अपनी ऐश ट्रे मे बुझी सिगरेटों की गणना करिएगा और निश्चय करिएगा कि अगली गणना मे यह संख्या और कम हो जाए यदि आप अलग अलग जगहों पर सिगरेट पीते है तो भी ध्यान रखिएगा आप बुझी सिगरेट की बट अपने साथ घर ले आएं और घर मे एक गिलास मे सारे बट डालकर रखें ताकि आपको यह पी हुई सिगरेट की याद दिलाता रहे-

अब जाने सिगरेट(Cigarettes)के बारे में-


अमूमन एक नजर मेँ देखने पर हमेँ सिगरेट कागज मेँ लिपटी हुई तम्बाकू से ज्यादा कुछ नहीँ लगेगा पर सिगरेट बनाने वाली कंपनिया इसके धुएं मेँ फ्लेवर देने के लिए क्या मिलाती हैँ ये आपको कभी नहीँ बताती है सिगरेट सुलगाने के बाद और भी ज्यादा खतरनाक उत्पाद बनते हैँ-

आप जाने सबकी लिस्ट इस प्रकार है-


एसीटिक एसिड (सिरका)
अमोनिया (टॉयलेट क्लीनर)
आर्सेनिक (एक जहर)
ब्यूटेन (एक तरह की ज्वलनशील गैस)
कैडमियम (बैटरी मेँ प्रयुक्त होने वाला तत्व)
कार्बन मोनो ऑक्साइड (कोयले के जलने पर बनने वाली गैस)
मीथेन (सीवर गैस)
निकोटीन (कैँसर कारक)

इसके अलावा कुछ मात्रा मेँ ये तत्व भी बनते हैँ-


हेक्सामाइन(Hexa Mine)
इन्सेक्टीसाइड
पेन्ट
टॉलूईन

यदि अब आपने देखा और समझा हो तो धूम्रपान त्यागिए क्योँकि एक सिगरेट पीने से आप इतना जहर अपने शरीर मेँ उतार रहे होते हैँ तो मित्रों आप कब सिगरेट छोड रहे है मेरे लिए नहीं सिर्फ अपने और अपने परिवार के लिए-

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तम्बाखू छोड़ने के कुछ घरेलू प्रयोग आजमायें

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21 दिसंबर 2016

क्या आप जानते है कि छुहारे का अचार गुणकारी होता है

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अचार तो बहुत सी चीजों का बनता है परन्तु क्या आपको पता है कि छुहारे का अचार काफी गुणकारी अचार होता है ये आचार अपच को खत्म करने वाला तथा भूख को बढ़ाने वाला होता है तो आइये आज आपको इस अचार को कैसे बनाते है इसकी विधि का वर्णन कर रहा हूँ आप इसे घर पर बनाएं और इसका लाभ लें-


क्या आप जानते है कि छुहारे का अचार गुणकारी होता है

छुहारे का अचार(Chhuhara-Pickle)बनाने की विधि-


सबसे पहले आप लगभग एक किलो छुहारे लेकर पहले नींबू के रस में इन्हें 5 दिन तक भिगोकर रखें और बाद में जब छुहारे फूल जाए तो अन्दर के बीजों को निकालकर निम्न मिश्रण को भरते हैं-

भरावन के लिए सामग्री-

कालीमिर्च - 100 ग्राम
पीपल - 100 ग्राम
तेजपत्ता -100 ग्राम मात्रा,
सोंठ -50 ग्राम
जीरा - 50 ग्राम
शाहजीरा - 50 ग्राम
कालानमक -300 ग्राम
चीनी -2 किलो

उपरोक्त सभी सामग्री को कूट-पीसकर मिश्रण को तैयार कर लेते हैं तथा छुहारे में उपरोक्त मिश्रण को भरकर एक बर्नी (जार) में डाल देते हैं तथा ऊपर से नींबू का रस निचोड़ देते हैं अब इस बर्तन को 4-5 दिन धूप में खुला रख देते हैं बस आपका स्वास्थ वर्धक और गुणकारी अचार तैयार है-

आप इस अचार को भोजन के समय या बाद में खा सकते हैं यह अचार पाचक व रुचिवर्द्धक होता है तथा अपचन को दूर करता है-

Upcharऔर प्रयोग-

20 दिसंबर 2016

क्या आप दुबलेपन से परेसान है तो वजन बढ़ाये

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अक्सर आपने लोगों को वजन घटाने या वजन प्रबंधन के बारे में बात करते हुए सुना होगा लेकिन क्या आप जानते हैं कुछ लोग ऐसे भी हैं जो वजन बढ़ाने की बात करते हैं दरअसल वे उस वर्ग के लोग हैं जिन्हे या तो भूख बहुत कम लगती है और उनका वजन कम है या फिर जो लोग जरूरत से ज्यादा Debility हैं वजन बढ़ाने के लिए कई दवाईयां आती हैं लेकिन वजन बढ़ाने के लिए किसी दवाई का प्रयोग न करके बल्कि प्राक़तिक या आयुर्वेदिक प्रणाली का ही इस्तेमाल करना चाहिए और वजन बढ़ाने के लिए आयुर्वेदिक नुस्खों को अपनाने से किसी तरह को कोई साइड इफेक्ट भी नहीं होता है-

क्या आप दुबलेपन से परेसान है तो वजन बढ़ाये


आयुर्वेद के अनुसार अत्यंत मोटे तथा अत्यंत दुबले शरीर वाले व्यक्तियों को निंदित व्यक्तियों की श्रेणी में माना गया है दुबलापन(debility)एक रोग न होकर मिथ्या आहार-विहार एवं असंयम का परिणाम मात्र है-

दुबलापन(debility)रोग होने का सबसे प्रमुख कारण मनुष्य के शरीर में स्थित कुछ कीटाणुओं की रासायनिक क्रिया का प्रभाव होना है जिसकी गति थायरायइड ग्रंथि(thayrayid gland) पर निर्भर करती हैं यह गले के पास शरीर की गर्मी बढ़ाती है तथा अस्थियों की वृद्धि करने में मदद करती है तथा यह ग्रंथि जिस मनुष्य में जितनी ही अधिक कमजोर और छोटी होगी वह मनुष्य उतना ही कमजोर और पतला होता है तथा ठीक इसके विपरीत जिस मनुष्य में यह थायरायइड ग्रंथि स्वस्थ और मोटी होगी वह मनुष्य उतना ही सबल और मोटा होगा-

वैसे देखा जाए तो 30 वर्ष से अधिक आयु के व्यक्ति का वजन यदि उसके शरीर और उम्र के अनुपात सामान्य से कम है तो वह दुबला व्यक्ति कहलाता है तथा जो व्यक्ति अधिक दुबला होता है वह किसी भी कार्य को करने में थक जाता है तथा उसके शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता(Immunity)कम हो जाती है ऐसे व्यक्ति को कोई भी रोग जैसे- सांस का रोग, क्षय रोग, हृदय रोग, गुर्दें के रोग, टायफाइड, कैंसर बहुत जल्दी हो जाते हैं ऐसे व्यक्ति को अगर इस प्रकार के रोग होने के लक्षण दिखे तो जल्दी ही इनका उपचार कर लेना चाहिए नहीं तो उसका रोग आसाध्य हो सकता है और उसे ठीक होने में बहुत दिक्कत आ सकती है अधिक दुबली स्त्री गर्भवती होने के समय में कुपोषण(Malnutrition)का शिकार हो सकती है-

अत्यंत दुबले व्यक्ति के नितम्ब, पेट और ग्रीवा शुष्क होते हैं तथा अंगुलियों के पर्व मोटे तथा शरीर पर शिराओं का जाल फैला होता है जो स्पष्ट दिखता है तथा शरीर पर ऊपरी त्वचा और अस्थियाँ(Bones)ही शेष दिखाई देती हैं-

इसमें अग्निमांद्य या जठराग्नि का मंद होना ही अतिकृशता का प्रमुख कारण है अग्नि के मंद होने से व्यक्ति अल्प मात्रा में भोजन करता है जिससे आहार रस या ‘रस’ धातु का निर्माण भी अल्प मात्रा में होता है इस कारण आगे बनने वाले अन्य धातु(रक्त, मांस, मेद, अस्थि, मज्जा और शुक्रधातु)भी पोषणाभाव(denutrition)से अत्यंत अल्प मात्रा में रह जाते हैं जिसके फलस्वरूप व्यक्ति निरंतर कृश से अतिकृश होता जाता है इसके अतिरिक्त लंघन, अल्प मात्रा में भोजन तथा रूखे अन्नपान का अत्यधिक मात्रा में सेवन करने से भी शरीर की धातुओं का पोषण नहीं होता है-

वजन बढ़ाने के लिए सबसे पहले तो आपका फिट रहना जरूरी है यदि आप वजन बढ़ाना चाहते हैं इसका ये अर्थ नहीं कि आप फिजीकली बिल्कुल भी सक्रिय नहीं होंगे आपको व्यायाम(exercise)करना तब भी जरूरी होगा-

वजन बढ़ाने(Weight Increase)के लिए सबसे बढि़या उपाय है आप हाई कैलोरी का खाना खाएं तथा उन खाद्य पदार्थों का सेवन ज्यादा करें जिनमें कैलोरी की मात्रा अधिक हो लेकिन इसका ये अर्थ नहीं कि आप जंकफूड(junk food)भारी मात्रा में खाने लगे बल्कि आपको हेल्दी और हाई कैलोरी भोजन को प्राथमिकता देनी हैं अगर आप Weight Increase हेल्दी रूप से बढ़ाना चाहते हैं तो आपको सुबह का नाश्ता हेवी करना होगा- 

च्यवनप्राश भी वजन बढ़ाने के लिए आयुर्वेदिक औषधी है और यह लगभग सभी के लिए आमतौर पर भी हेल्दी रहता है इससे न सिर्फ शारीरिक उर्जा बढ़ती है बल्कि मेटाबोलिज्म(metabolism)भी मजबूत रहता है शतावरी कल्पा लेने से न सिर्फ आंखें और मसल्स अच्छी रहती है बल्कि इससे वजन भी बढ़ता है वसंतकुसुमकर रस शरीर को न सिर्फ आंतरिक उर्जा देता है बल्कि वजन को जल्दी बढ़ाने में भी लाभकारी है-

दुबलापन(Debility)होने के कारण ये है-


  1. पाचन शक्ति में गड़बड़ी के कारण भी व्यक्ति अधिक दुबला हो सकता है-
  2. मानसिक, भावनात्मक तनाव, चिंता की वजह से भी व्यक्ति दुबला हो सकता है-
  3. यदि शरीर में हार्मोन्स असंतुलित हो जाए तो व्यक्ति दुबला हो सकता है-
  4. चयापचयी क्रिया में गड़बड़ी हो जाने के कारण व्यक्ति दुबला हो सकता है-
  5. बहुत अधिक या बहुत ही कम व्यायाम करने से भी व्यक्ति दुबला हो सकता है-
  6. आंतों में टेपवोर्म या अन्य प्रकार के कीड़े हो जाने के कारण भी व्यक्ति को दुबलेपन का रोग हो सकता है-
  7. मधुमेह, क्षय, अनिद्रा, जिगर, पुराने दस्त या कब्ज आदि रोग हो जाने के कारण व्यक्ति को दुबलेपन का रोग हो जाता है-
  8. शरीर में खून की कमी हो जाने के कारण भी दुबलेपन का रोग हो सकता है-

आपके लिए यह जानना जरूरी है कि आपके बॉडी मास इंडेक्स यानी बीएमआई के हिसाब से यह जानने कि कोशिश करें कि आपकी लंबाई और उम्र के हिसाब से आपका वजन क‌ितना होना चाहिए-इसका फार्मूला ये है-

बीएमआई = वजन (किलोग्राम) / (ऊंचाई X ऊंचाई (मीटर में)

आमतौर पर 18.5 से 24.9 तक बीएमआई आदर्श स्थिति है इसलिए वजन बढ़ाने के क्रम में ध्यान रखें कि आप इसके बीच में ही रहें-

दुबलापन(Debility)घरेलू और आयुर्वेदिक उपाय-


1- आप अपनी डाइट में कार्बोहाइड्रेट और हेल्दी फैट्स की मात्रा बढ़ाएं अध‌िक कैलोरी वाली डाइट जैसे रोटियां, रेड मीट,राजमा, सब्जियां, मछली, चिकन, ऑलिव्स और केले जैसे फल आदि की मात्रा बढ़ाएं तथा दिन में कम से कम पांच बार थोड़ी-थोड़ी डाइट लें-

2- नाश्ते में बादाम,दूध,मक्खन घी  का पर्याप्त मात्रा में उपयोग करने से आप तंदुरस्त रहेंगे और वजन भी बढेगा-

3- भोजन में प्रोटीन की मात्रा बढाएं तथा दालों में प्रोटीन की मात्रा ज्यादा होती है अडा,मछली,मीट भी प्रोटीन के अच्छे स्रोत हैं-बादाम,काजू का नियमित सेवन करें-

4- च्यवनप्राश वजन बढाने की और स्वस्थ रहने की मशहूर आयुर्वेदिक औषधि है सुबह -शाम दूध के साथ सेवन करते रहें-

5- आयुर्वेद में अश्वगंधा और सतावरी  के उपयोग से वजन बढाने का उल्लेख मिलता है आप 3-3 ग्राम  दोनों रोज सुबह लं का चूर्ण दूध के साथ प्रयोग करें तथा वसंतकुसुमाकर रस भी काफ़ी असरदार  दवा है-

6- रोज सुबह 3-4  किलोमीटर  घूमने का नियम बनाएं इससे आपको ताजा हवा भी मिलेगी और आपका मेटाबोलिस्म  भी ठीक रह्र्गा और भोजन खूब अच्छी तरह से चबा चबा कर खाना चाहिये-दांत का काम आंत पर डालना उचित नहीं है- दोनों वक्त शोच निवृत्ति की आदत डालें-

7- 50 ग्राम किशमिश रात को पानी में भिगो दे  सुबह भली प्रकार चबा चबा कर खाएं- दो-तीन  माह के प्रयोग से वजन बढेगा-किशमिश में अनाज की 99 % कैलोरी पायी जाती है और फाइबर भी बहुत अच्छी मात्रा में पाया जाता है- ये शरीर के फैट को हटा के स्वस्थ कैलोरी में परिवर्तित करता है-

8- मलाई- मिल्क क्रीम में आवश्यकता से ज्यादा फैटी एसिड होता है- और ज्यादातर खाद्य उत्पादों की तुलना में अधिक कैलोरी की मात्रा होती है-मिल्क क्रीम को पास्ता और सलाद के साथ खाने से Weight Increase होगा-

9- अखरोट में आवश्यक मोनोअनसेचुरेटेड फैट होता है जो स्वस्थ कैलोरी को उच्च मात्रा में प्रदान करता है रोज़ 20 ग्राम अखरोट खाने से वजन तेजी से प्राप्त होगा-

10- तुरंत वजन बढाना हो तो केला खाइये-रोज़ दो या दो से अधिक केले खाने से आपका पाचन तंत्र भी अच्छा रहेगा आप केले को दूध में फेट के भी ले सकते है -

11- आलू कार्बोहाइड्रेट और काम्प्लेक्स शुगर का अच्छा स्त्रोत है-ये ज्यादा खाने से शरीर में फैट की मात्रा बढ़ जाती है-

12- नारियल का तेल को प्रयोग में लें यह आहार तेलों का समृद्ध स्रोत है और भोजन के लिए अच्छा तथा स्वादिस्ट जायके के लिए जाना जाता है तथा नारियल के तेल में भोजन पकाने से खाने में कैलोरी बढ़ेगी जिससे आपके वजन में वृधि होगी-

13- जो लोग शाकाहारी है और नॉनवेज नहीं खाते उनके लिए बीन्स से अच्छा कोई विकल्प नहीं है-बीन्स के एक कटोरी में 300 कैलोरी होती है-यह सिर्फ वजन बढ़ने में ही मदद नहीं करता बल्कि पौष्टिक भी होता है-

14- मक्खन में सबसे ज्यादा कैलोरी पाई जाती है- मक्खन खाने के स्वाद को सिर्फ बढ़ाता ही नहीं बल्कि वजन बढ़ाने में भी मदद करता है-

15- ब्राउन राइस कार्बोहाइड्रेट और फाइबर की एक स्वस्थ खुराक का स्रोत है भूरे रंग के चावल कार्बोहाइड्रेट का भंडार है इसलिए नियमित रूप से इसे खाने से वजन तेजी से हासिल होगा-

16- काजू स्वस्थ काया पाने का आसान तरीका है काजू के तेल में न केवल वजन बढ़ाने बल्कि काजू रोज़ खाने से आपकी त्वचा कोमल और बाल चमकदार दिखने लगेने-

17- जैतून के तेल में आवश्यक कैलोरी बहुत बड़ी मात्रा में पाई जाती है और यह हृदय रोग से लड़ने में भी बहुत मदद करता है-

18- अश्वगंघा अवलेह को पानी और दूध से लेने से जल्दी असर करता है और वजन प्रबंधन में भी मदद करता है इसका चूर्ण दूध, घी या शहद से लेने में भी असरकारक है-द्रकशरिष्ठा को लगातार एक महीने को गर्म और ठंडे पानी में शहद मिलाकर लेने से अच्छा रहता है इन आयुर्वेदिक औषधियों को लेने से कोई साइड इफेक्ट नहीं होगा और आप आराम से अपना वजन भी बढा़ सकते हैं-

19- आप 2 चम्मच असली शहद एक गिलास गुनगुने पानी में मिलाकर सुबह खाली पेट पियें  दोनो टाइम खाना खाने के आधा घँटे बाद आधा चम्मच पाचक चूर्ण पानी के साथ लें-

इसे आप बनाये इस प्रकार-


छोटी हरड,बहेडा,आँवला,सोंठ,पीपर,कालीमिर्च,कालानमक ये सब 20-20 ग्राम असली हींग दो ग्राम सब कूट पीस कर रख लें पाचक चूर्ण तैयार है ये रात का खाना सोने से 2 घंटे पहले अवश्य खालें और रात को सोते समय 2 छोटी हरड का चूर्ण थोडे गुनगुने पानी से लें तथा बसा और ज्यादा मिर्च मसाले युक्त भोजन न करें-

Upcharऔर प्रयोग-

19 दिसंबर 2016

कचनार आपके लिए एक उपयोगी औषिधि है

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अगर पूरा देश जान जाए कचनार किस-किस रोग की दवा है तो बेचारा कचनार दुर्लभ फूल की श्रेणी में आ जाएगा और ये भी हो सकता है कि तब सरकार को इसे प्रतिबंधित फूल घोषित करना पड़ेगा रोगी के लिए कचनार(Bauhinia)का सेवन अमृत के समान गुणकारी सिद्ध होता है कचनार का फूल कितना खूबसूरत होता है कि देखते ही बस जी मचल जाता है-

कचनार आपके लिए एक उपयोगी औषिधि है


कचनार(Bauhinia)सफेद रंग की होती है तथा इसका स्वाद कषैला होता है कचनार एक पेड़ है जो बागों और फूल की क्यारियों में उगाई जाती हैं कचनार के पत्ते, छिवलके पत्ते या लसोहड़ा के पत्ते के समान होते हैं परन्तु इसके पत्ते एक या दो जोड़ों में ही होते हैं इसके फूल सफेद व लाल रंग के होते हैं और फली छ से बारह इंच लंबी होती है-फरवरी-मार्च में पतझड़ के समय कचनार के इस वृक्ष में फूल आते हैं और अप्रैल-मई में फल आते हैं इसकी छाल पंसारी की दुकान पर मिलती है और मौसम के समय इसके फूल सब्जी बेचने वालों के यहां मिलते हें-

इसके तने की छाल भी दवा के काम आती है इसमें शर्करा और टैनिन्स की बहुत मात्रा पायी जाती है तथा साथ ही मिर्सीताल और ग्लाइकोसाइड भी मौजूद है-

प्रयोग मात्रा-


1- इसके छाल का चूर्ण 3 से 6 ग्राम की मात्रा में प्रयोग किया जाता है इसके फूलों का रस 10 से 20 मिलीलीटर की मात्रा में प्रयोग किया जाता है और छाल का काढ़ा 40 से 80 मिलीलीटर की मात्रा में प्रयोग किया जाता है-

2- Bauhinia-कचनार की छाल का महीन पिसा-छना चूर्ण 3 से 6 ग्राम (आधा से एक चम्मच) ठंडे पानी के साथ सुबह-शाम लें तथा इसका काढ़ा बनाकर भी सुबह-शाम 4-4 चम्मच मात्रा में (ठंडा करके) एक चम्मच शहद मिलाकर ले सकते हैं-

कचनार(Bauhinia)का रोगों में प्रयोग-


1- कचनार की एक चम्मच छाल को एक कप मट्ठा यानि छांछ के साथ दिन में तीन  बार सेवन करने से बवासीर(Hemorrhoids)में खून गिरना बंद होता है-

2- शरीर में कहीं शोथ हो या गांठ हो या लसिका ग्रंथि में कोई विकृति हो तो इसे दूर करने में जिस जड़ी-बूटी का नाम सर्वोपरि है वह यही है कचनार- इसके अद्भुत गुणों के कारण संस्कृत भाषा में इसे गुणवाचक नामों से सम्बोधित किया गया है जैसे-गण्डारि यानी चमर के समान फूल वाली,कोविदार यानी विचित्र फूल और फटे पत्ते वाली आदि-आज किसी को शरीर में कहीं गांठ हो जाती है तो वह चिंतित व दुःखी हो जाता है क्योंकि उसे कचनार के गुणधर्म और उपयोग की जानकारी नहीं है-कचनार की जड़ को पानी में घिसकर लेप बना लें और इसे गर्म कर लें इसके गर्म-गर्म लेप को सूजन(swelling)पर लगाने से आराम मिलता है-

3- कचनार की छाल का काढ़ा बनाकर उसमें थोड़ा-सा कत्था मिलाकर मुंह के छालों(Mouth ulcers)पर लगाने से आराम मिलता है-

4- प्रमेह रोग(Gonorrhea disease)में कचनार की हरी व सूखी कलियों का चूर्ण और मिश्री मिलाकर प्रयोग किया जाता है इसके चूर्ण और मिश्री को समान मात्रा में मिलाकर 1-1चम्मच दिन में तीन बार कुछ हफ्ते तक खाने से प्रमेह रोग में लाभ होता है-

5- यदि आपको पेट गैस(acidity)की शिकायत है तो कचनार की छाल का काढ़ा बनाकर फिर इसके 20 मिलीलीटर काढ़ा में आधा चम्मच पिसी हुई अजवायन मिलाकर प्रयोग करने से लाभ मिलता है तथा सुबह-शाम भोजन करने बाद इसका सेवन करने से अफरा(पेट फूलना)व गैस की तकलीफ से भी छुटकारा मिलता है -

6- कचनार की छाल का काढ़ा बनाकर उसमें सोंठ का चूर्ण मिलाकर आधे कप की मात्रा में दिन में तीन  बार पीने से गण्डमाला(Goitre)रोग ठीक होता है-

7- अगर आपको भूंख न लगने की शिकायत है तो कचनार की फूल की कलियां घी में भूनकर सुबह-शाम खाने से भूख बढ़ती है-

8- शहद के साथ कचनार की छाल का काढ़ा 2 चम्मच की मात्रा में दिन में 3 बार सेवन करने से खांसी और दमा में आराम मिलता है-

9- कचनार के पेड़ की छाल को आग में जलाकर उसकी राख को बारीक पीसकर मंजन बना लें और इस मंजन से सुबह एवं रात को खाना खाने के बाद मंजन करने से दांतों का दर्द तथा मसूढ़ों से खून का निकलना बंद होता है या फिर आप कचनार की टहनियों की राख से मंजन करेंगे तो दांतों में दर्द कभी नहीं होगा और अगर हो रहा होगा तो ख़त्म हो जायेगा-

10- कचनार की छाल को पानी में उबाल लें और उस उबले पानी को छानकर एक शीशी में बंद करके रख लें अब यह पानी 50-50 मिलीलीटर की मात्रा में गर्म करके रोजाना तीन बार कुल्ला करें तो इससे दांतों का हिलना, दर्द, खून निकलना, मसूढों की सूजन और पायरिया खत्म हो जाता है-

11- यदि आपको पेट के अफारा जैसी शिकायत है तो कचनार की जड़ का काढ़ा बनाकर सेवन करने से अफारा दूर होता है-

12- जिन लोगों को सुन्नता की परेशानी है तो आप कचनार की छाल का चूर्ण बनाकर 2 से 4 ग्राम की मात्रा में खाने से रोग में लाभ होता है इसका प्रयोग रोजाना सुबह-शाम करने से त्वचा एवं रस ग्रंथियों की क्रिया ठीक हो जाती है और त्वचा या जीभ की सुन्नता दूर होती है-

13- कचनार के फूलों को चीनी के साथ घोटकर शर्बत की तरह बनाकर सुबह-शाम पीने से कब्ज दूर होती है और मल साफ होता है कचनार के फूलों का गुलकन्द रात में सोने से पहले दो चम्मच की मात्रा में कुछ दिनों तक सेवन करने से कब्ज दूर होती है कचनार का गुलकन्द आपको पातंजलि चिकित्सालय से भी प्राप्त हो जाएगा-

14- कचनार की छाल का काढ़ा बनाकर पीने से पेट का कैंसर ठीक होता है-

15- कचनार के फूलों का चूर्ण बनाकर एक से दो ग्राम चूर्ण सुबह-शाम चटाने से रक्त पित्त का रोग ठीक होता है तथा कचनार का साग खाने से भी रक्त पित्त में आराम मिलता है-

16- यदि आपके मुंह से खून आता हो तो कचनार के पत्तों का रस 6 ग्राम की मात्रा में पीएं इसके सेवन से मुंह से खून का आना बंद हो जाता है-

17- कचनार के सूखे फूलों का चूर्ण बनाकर लें और यह चूर्ण एक चम्मच की मात्रा में शहद के साथ दिन में तीन बार सेवन करें इसके सेवन से रक्तपित्त में लाभ होता है तथा इसके फूलों की सब्जी बनाकर खाने से भी खून का विकार(खून की खराबी)दूर होता है-

18- दस्त के साथ खून आने पर कचनार के फूल का काढ़ा सुबह-शाम सेवन करना चाहिए- इसके सेवन से खूनी दस्त (रक्तातिसर)में जल्दी लाभ मिलता है-

19- कचनार की छाल का चूर्ण बना लें और यह चूर्ण 3 ग्राम की मात्रा में एक गिलास छाछ के साथ लें इसका सेवन प्रतिदिन सुबह-शाम करने से बवासीर एवं खूनी बवासीर में बेहद लाभ मिलता है-

20- कचनार का चूर्ण 5 ग्राम की मात्रा में प्रतिदिन सुबह पानी के साथ खाने से भी बवासीर ठीक होता है-

21- कचनार के फूलों का काढ़ा बनाकर सुबह-शाम पीने से पेशाब में खून का आना बंद होता है तथा इसके सेवन से रक्त प्रदर एवं रक्तस्राव आदि भी ठीक होता है-

22- कचनार की छाल का काढ़ा बनाकर दिन में दो बार पीने से दस्त रोग में ठीक होता है-

23- जिन महिलाओं को स्तनों की गांठ(रसौली)की परेशानी है वो कचनार की छाल को पीसकर चूर्ण बना लें यह चूर्ण लगभग आधे ग्राम की मात्रा में सौंठ और चावल के पानी (धोवन) के साथ मिलाकर पीने और स्तनों पर लेप करने से स्तन की गांठ ठीक होती है-

24- उपंदश(गर्मी का रोग या सिफिलिस)होने पर कचनार की छाल+इन्द्रायण की जड़+बबूल की फली+छोटी कटेरी के जड़ व पत्ते और पुराना गुड़ 125 ग्राम इन सभी को तीन किलोग्राम पानी में मिलाकर मिट्टी के बर्तन में पकाएं और यह पकते-पकते जब थोड़ा सा बचे तो इसे उतारकर छान लें अब इसे एक बोतल में बंद करके रख लें और सुबह-शाम सेवन करें-

25- कचनार की छाल+वरना की जड़ और सौंठ को मिलाकर काढ़ा बना लें- यह काढ़ा लगभग 20 से 40 ग्राम की मात्रा में सुबह-शाम पीना चाहिए- इसके सेवन से सिर का फोड़ा पक जाता है और ठीक हो जाता है- इसके काढ़े को फोड़े पर लगाने से भी लाभ होता है-

26- अगर कुबड़ापन का रोग बच्चों में हो तो उसके पीठ के नीचे कचनार का फूल बिछाकर सुलाने से कुबड़ापन दूर होता है तथा साथ ही लगभग एक ग्राम का चौथाई भाग कचनार और गुग्गुल को शहद के साथ मिलाकर सेवन करने से कुबड़ापन दूर होता है तथा बड़े लोगों को कुबड़ापन के दूर करने के लिए कचनार का काढ़ा बनाकर सेवन करना चाहिए-

27- गलकोष प्रदाह (गलकोष की सूजन)होने पर-खैर (कत्था) के फल, दाड़िम पुष्प और कचनार की छाल- इन तीनों को मिलाकर काढ़ा बना लें और इससे सुबह-शाम गरारा करने से गले की सूजन मिटती है-सिनुआर के सूखे पत्ते को धूम्रपान की तरह प्रयोग करने से भी रोग में आराम मिलता है-

28- कचनार की छाल का काढ़ा बनाकर- इसके 20 ग्राम काढ़े में सोंठ मिलाकर सुबह-शाम पीने से गले की गांठ ठीक होती है-

29- चेचक(मसूरिका)में कचनार की छाल के काढ़ा बनाकर उसमें सोने की राख डालकर सुबह-शाम रोगी को पिलाने से लाभ होता है-

30- कचनार की छाल को पीसकर, चावलों के पानी में डालकर उसमे मिश्री मिलाकर पीने से कण्ठामाला(गले की गांठे)ठीक हो जाती हैं-

31- कचनार मुंह में रखकर चबाने या चूसने से गला साफ होता है इसको चबाने से आवाज मधुर (मीठी) होती है और यह गाना गाने वाले व्यक्ति के लिए विशेष रूप से लाभकारी है-

32- पीले कचनार के पेड़ की छाल का काढा आंतो के कीड़े को मार देता है-

33- मुंह के छाले किसी दवा से ठीक न हो रहे हों तो कचनार की छाल के काढ़े से गरारे और कुल्ला कीजिए और फिर देखिये चमत्कार-

34- कचनार के फूल थाईरायड की सबसे अच्छी दवा हैं आपको हाइपो हो या हाइपर थाईराइड कचनार के तीन फूलों की सब्जी या पकौड़ी बनाकर सुबह शाम खाएं तथा दो माह बाद टेस्ट कराएँ-

35- गले में गांठे हो गयी हों तो कचनार की छाल को चावल के धोवन में पीसिये उसमे आधा चम्मच सौंफ का पावडर मिलाकर खा लीजिये बस एक महीने तक खाएं फिर बताये कि लाभ हुआ या नहीं-

36- खूनी बवासीर में कचनार की कलियों के पावडर को मक्खन और शक्कर मिलकर खाएं 21 दिन लगातार खाए और चमत्कार देखें-

37- कचनार की छाल के काढ़े में बावची के तेल की 20-25 बूंदे मिलाकर रोज पीने से बहुत पुराना कोढ़ भी ख़त्म हो जाता है-

38- अगर आपका पेट निकल रहा हो तो आधा चम्मच अजवाइन को कचनार की जड़ के काढ़े से निगल लीजिये 10-11 दिनों तक बस आपका पेट अन्दर हो जाएगा-

39- लीवर में कोई तकलीफ हो तो कचनार की जड़ का काढ़ा पीयें ये लीवर की सुजन को ख़तम कर देता है-

40- हमने तो बस आपको इसके गुण बताये है और अच्छा होगा कि आप इसके पेड़ की पहचान करके उपरोक्त किसी भी बीमारी में प्रयोग करे और लाभ  पाए-

Read More-  तेजपात भी बहुत काम की चीज होती है

Upcharऔर प्रयोग-

अच्छे स्वास्थ्य के लिए नींद लेना जरुरी है

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नींद आना और भरपूर नींद आना दोनों में बहुत अंतर है क्युकि नींद हमारे जीवन का एक अहम् हिस्सा है आपने कभी न कभी तो महसूस किया होगा कि जब आप गहरी नींद(Deep Sleep) या ये फिर ये समझे चैन की नींद पूरी करके जागते है तो खुद को कितना तरोताजा और स्फूर्तिवान महसूस करते है नींद(Sleep) न केवल हमारे स्वास्थ के लिए अच्छी होती है बल्कि हमारी आयु सीमा भी इसी पर र्निभर करती है अगर आप रात में ढंग से सोएगें नहीं तो यह आपके दिमाए पर सीधा असर करेगा

अच्छे स्वास्थ्य के लिए नींद लेना जरुरी है


आजकल की टेंशन भरी लाइफ में यह लोगों की एक आम समस्या बन गई है पर आप इसे बिल्‍कुल भी इसे साधारण बात न समझे क्‍योंकि यह स्लीपिंग डिसऑर्डर (Sleeping Disorders)भी हो सकता है और इसके प्रति लापरवाही बरतना कितना खतरनाक हो सकता है बहुत से लोगों को इसका अंदाजा भी नहीं है अगर इस प्रकार की समस्या आपको भी है तो करें ये उपाय-

नींद न आने की बीमारी(Sleeping sickness)के लिए अपनाएं यह उपाय- 


1- आपका बेड़ रूम साफ-सुथरा और हवादार होना चाहिये जिसमें न तो बाहरी आवाज़ आए और न ही किसी प्रकार की अशांती हो तथा सोते समय तकिया ऊंचा न लें और मुलायम गद्दे पर ही सोएं-

2- सोने से पहले अपने दिमाग को हर चिंताओं से दूर करें और ऐसा करने के लिए आप अपने इष्ट या गुरु में ध्यान लगा सकते हैं या फिर जिन लोगो ने गुरु मन्त्र लिया है उनको "गुरु-मन्त्र" का नेत्र बंद करके मानसिक जप करना चाहिए अच्छी नींद के साथ-साथ उतरोत्तर मन्त्र साधना भी बढती है-

3- जो लोग रात को देर से सोते हैं उनकी तबियत कभी भी ठीक नहीं रह सकती है इसलिए कोशिश करें कि अपना हर कार्य समय पर निपटा कर ठीक समय पर सो जाएं सोने का एक निश्चित समय निर्धारित करे-

4- एक अच्छे स्वास्थ के लिए प्रतिदिन 7 घंटे की नींद लेना आवश्यक है इसके बाद हमारा शरीर पुन: अगले दिन के लिए कार्य करने योग्य हो जाता है -

5- जितना हो सके दिन में कम ही सोएं अगर आपको रात में किसी कारणवश जगना पड़ गया हो तो आप दिन में आप वह नींद पूरी कर सकते हैं- 

6- रात में सोते वक्त अपने सिर और पैर की किसी अच्छे तेल से मालिश करें ये आपको अच्छी नींद आने में सहायक है-

7- निद्रा में तीव्र मांसपेशीय शिथलीकरण उपचार(शवासन)लाभदायक है अर्थात सोते समय सकारात्मक विचार मस्तिष्क को शांति देते हैं-

8- हर सुबह एक निश्चित समय पर उठें और रात को निश्चित समय पर सोएं आप लेट नाइट पार्टियों व टीवी का लाभ लेना छोड़ें-

9- सोने से पूर्व मानसिक गतिविधियों की उत्तेजना भी नींद में बाधा पहुंचा सकती है-

10- तीन हफ्तों तक जारी रहने वाली अनिद्रा की अवस्था को ट्रांजियंट इनसोम्निया कहा जाता है यह निद्रा में बाधा की एक अल्पकालिक अवस्था है जिसका मुख्य कारण मानसिक संघर्ष, अपरिचित या नया वातावरण, भावनात्मक सदमा, प्रियजनों की मृत्यु, तलाक या नौकरी में बदलाव आदि हो सकते हैं-

Upcharऔर प्रयोग-

18 दिसंबर 2016

मस्सों का होम्योपैथिक उपचार क्या है

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मस्से मुख्य रूप से बीस से पच्चीस साल की उम्र के आसपास होते हैं लेकिन ये तीस से चालीस साल की उम्र में भी उभरकर सामने आ सकते हैं और कुछ मस्सों(Wart)में बाल भी होते हैं पर ज़्यादातर ऐसा नहीं होता है त्वचा का कोई हिस्सा जब अनावश्यक रूप से बड़ा हो जाए तो उसे मस्सा कहते हैं ये मस्से किशोरावस्था एवं गर्भावस्था के दौरान गहरा रंग ले लेते हैं-

मस्सों का होम्योपैथिक उपचार क्या है


कुछ मस्से जन्म से ही होते हैं अगर तीस की उम्र के बाद ये मस्से निकले तो कैंसर होने की संभावना काफी बढ़ जाती है और अगर इन मस्सों से खून निकले या खुजली हो तो फिर तुरंत किसी डॉक्टर से संपर्क कीजिये लेकिन साधारण रूप से आप इन मस्सों का होम्योपैथी उपचार भी कर सकते है-

मस्से(Wart)का होम्योपैथिक उपचार क्या है-


थूजा-

ये एक प्रधान एंटीसाइकोटिक दवा है इस औषधि का प्रयोग किसी भी प्रकार के मस्सों में किया जा सकता है मस्सों के यह सबसे अच्छी औषधि है मस्सों के झुण्ड निकलने,सिर के पीछे मस्से जैसे दाने होने, ठोड़ी पर मस्से होने, लटकने वाले मस्से होने, खूनी मस्से जिससे कभी-कभी खून निकलता रहता है इन सभी प्रकार के मस्सों को ठीक करने के लिए थूजा औषधि की 30 और 200  शक्ति का सेवन करना लाभदायक होता है-इन मस्सों में थूजा औषधि के सेवन के साथ-साथ थूजा Q (मूल अर्क ) को रूई पर लगाकर मस्सों पर लगाना चाहिए- गर्भावस्था के दौरान स्त्री को पहले कुछ दिनों तक सल्फर औषधि की 30 शक्ति का सेवन कराने और फिर कुछ दिनों तक थूजा औषधि की 30 शक्ति का सेवन कराने और अंत में मर्क सौल औषधि की 30 शक्ति सेवन कराने से बच्चे को मस्से नहीं होते है यदि त्वचा पर मस्से गोभी की तरह दिखाई दे तो इस औषधि का प्रयोग करना लाभकारी होता है-

नाइट्रिक ऐसिड का प्रयोग-

फूलगोभी की तरह बड़े खुरदरे मस्से,टेढ़े-मेढ़े मस्से एवं ऐसे मस्से जिसे धोने से बदबूदार खून निकलने लगता हो या फिर छूने  पर भी खून निकलने लगता है इस तरह के मस्सों में नाइट्रिक ऐसिड औषधि की 12 शक्ति का प्रयोग किया जाता है इस औषधि का प्रयोग लटकने एवं होंठों पर मस्से की तरह दाने होने पर भी किया जाता है-

नैट्रम म्यूर-

पुराने ऐसे मस्से जिसमें दर्द हो और मस्से को हल्का सा छू देने पर असहनीय दर्द हो ये मस्से कभी-कभी जख्म में बदल जाता है-हाथ और अंगूठे में अनगिनित मस्से,ऐसे लक्षणों वाले मस्सों का उपचार नैट्रम-म्यूर औषधि की 30 शक्ति से फयदेमन्द होता है यह रक्तहीन,कमजोर और हरित पाण्डु रोग ग्रस्त स्त्रियों की बीमारी में खास रूप से फायदा करती है-

ऐन्टिम टार्ट-

पुरुषों के जननेन्द्रिय की सुपारी के पीछे मस्से हो गए हों तो ऐन्टिम टार्ट औषधि की 12 शक्ति का प्रयोग किया जाता है-

कॉस्टिकम-

कास्टिकम एक प्रधान बिष-नाशक और फास्फोरस की विरोधिनी दवा है अगर शरीर पर छोटे-छोटे बहुत से ठोस मस्से हो गए हों जिसके जड़ मुलायम एवं ऊपर के मुंह कठोर और नोकदार हो तो ऐसे मस्सों को ठीक करने के लिए कॉस्टिकम औषधि की 30 शक्ति का प्रयोग करना लाभकारी होता है तथा नाखूनों के किनारे, बाहों, हाथों, पलकों एवं चेहरे पर होने वाले मस्सों में भी इस औषधि का उपयोग किया जाता है-

कैलि म्यूर-

हाथों पर मस्से होने पर कैलि म्यूर औषधि का सेवन करने के साथ इस औषधि की 3x मात्रा को एक चम्मच पानी में मिलाकर लोशन बनाकर मस्सों पर लगाना भी चाहिए-

सीपिया-

जननेन्द्रिय की आगे की त्वचा के अगले भाग या शरीर पर बड़े-बड़े कठोर एवं काले मस्से होने पर सीपिया औषधि की 30 शक्ति का प्रयोग करना हितकारी होता है सीपिया के बाद सल्फर की जरूरत पड़ती है-

नैट्रम म्यूर-

हथेलियों पर मस्से होने पर नैट्रम-म्यूर औषधि की 3x से 200  शक्ति का सेवन करना लाभकारी होता है-

अपने हाथों से खाना खाने के क्या लाभ होते हैं

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वर्तमान में आजकल हमने पाश्चात्य संस्कृति का अनुसरण करते हुए चम्मच और कांटे से खाना शुरू कर दिया है लेकिन क्या आप जानते हैं कि अपने हाथों से खाना खाने के स्वास्थ्य से संबंधित हमें कई फायदे हैं आज भी दक्षिण भारत में अधिकतर भारतीय अपने हाथों से खाना खाते हैं...

अपने हाथों से खाना खाने के क्या लाभ होते हैं


आइये इस लेख में हम जानेगें कि हमें अपने हाथों से खाना-खाने के क्या-क्या लाभ है और किस तरह ये हमारे स्वास्थ के लिए हितकारी है हाथों से खाना खाने से सबसे बड़ा फायदा यह है कि ये आपके प्राणाधार की एनर्जी को संतुलित रखता है-

1- आयुर्वेद में कहा गया है हमारा शरीर मूल रूप से पंच महाभूतों से मिलकर बना हैं जिन्हें जीवन ऊर्जा भी कहते हैं और ये पाँचों तत्व हमारे हाथ में मौजूद हैं(आपका अंगूठा अग्नि का प्रतीक है और तर्जनी अंगुली हवा की प्रतीक है तथा मध्यमा अंगुली आकाश की प्रतीक है और अनामिका अंगुली पृथ्वी की प्रतीक है और सबसे छोटी अंगुली जल की प्रतीक है)तो हमारे द्वारा ग्रहण किये जाने वाले भोजन में भी यह पंच तत्त्व मौजूद होते हैं जब हम कांटे और चम्मच की बजाय हाथ से खाना खाते हैं तो एक तरह से पंचतत्त्व से पंचतत्त्व का मेल हो जाता है जिसके फलस्वरूप हमारे शरीर में उर्ज़ा अपनी सम्पूर्णता और व्यापकता के साथ प्रवेश करती है इनमे से किसी भी एक तत्व का असंतुलन बीमारी का कारण बन सकता है-

2- आप जब हाथ से खाना खाते हैं तो आप अँगुलियों और अंगूठे को मिलाकर खाना खाते हैं हर मुद्रा के अपने-अपने स्वास्थ्य लाभ होते हैं इसी तरह जब हम खाना खाते समय हाथ के अंगूठे और अंगुलियों को मिलाते है तो उससे ज्ञान मुद्रा बनती है और इस मुद्रा के निर्माण से हमारा भोजन ज़्यादा ऊर्जावान बनता है-इसमें शरीर को निरोग रखने की क्षमता निहित है इसलिए जब हम खाना खाते हैं तो इन सारे तत्वों को एक जुट करते हैं जिससे भोजन ज्यादा ऊर्जा दायक बन जाता है और यह स्वास्थ्य-प्रद बनकर हमारे प्राणाधार की एनर्जी को संतुलित रखता है-

3- जब हम हाथ से खाना खाते है तो कई बैक्टीरिया हमारे शरीर के अन्दर प्रवेश कर जाते हैं इस तरह से हमारा शरीर इनसे लड़कर अपनी इम्युनिटी को बढ़ाता है आपने अकसर देखा भी होगा कि जो लोग कांटे और चम्मच से खाना खाते हैं मौसम बदलने होने पर अक्सर बीमार पड़ जाते हैं-

4- टच हमारे शरीर का सबसे मजबूत अक्सर इस्तेमाल होने वाला अनुभव है जब हम हाथों से खाना खाते हैं तो हमारा मस्तिष्क हमारे पेट को यह संकेत देता है कि हम खाना खाने वाले हैं और इससे हमारा पेट इस भोजन को पचाने के लिए तैयार हो जाता है जिससे पाचन क्रिया सुधरती है इससे खाने पे दिमाग लगता है तथा हाथ से खाना खाने में आपको खाने पर ध्यान देना पड़ता है इसमें आपको खाने को देखना पड़ता है और जो आपके मुह में जा रहा है उस पर ध्यान केंद्रित करना पड़ता है तो इसे हम  माइंडफुल ईटिंग भी कहते है और यह मशीन कि भांति चम्मच और कांटे से खाना खाने से ज्यादा स्वास्थयप्रद है-

5- माइंडफुल ईटिंग के कई फायदे भी हैं इनमे से सबसे महत्वपूर्ण फायदा यह है कि इससे खाने के पोषक तत्व बढ़ जाते हैं जिससे पाचन क्रिया सुधरती है और यह आपको स्वस्थ रखता है-

6- यह आपके मुंह को जलने से बचाता है तथा आपके हाथ एक अच्छे तापमान संवेदक का काम भी करते हैं जब आप भोजन को छूते हैं तो आपको अंदाजा लग जाता है कि यह कितना गर्म है और यदि यह ज्यादा गर्म होता है तो आप इसे मुंह में नहीं लेते हैं इस प्रकार यह आपकी जीभ को जलने से बचाता है-




Upcharऔर प्रयोग-

15 दिसंबर 2016

न्यूमोनिया का प्राथमिक उपचार

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फेफड़े में प्रदाह होने की हालत को Pneumonia का नाम दिया गया है यह एक गंभीर ज्वर है इसमें यथाशीघ्र डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी रहता है यदि ऐसा नहीं किया जाता तो मृत्यु की संभावना बढ़ जाती है मलेरिया रोग फेफड़ों में ठंड लगने के बाद उसमें सूजन आ जाने से होता है ऐसे में रोगी को सांस लेने में अपार कष्ट होता है और धीरे-धीरे कफ बनना शुरू हो जाता है जो फेफड़ों में जम जाता है तथा यदि दोनों तरफ के फेफड़ों में सूजन आ जाती है तो उसे 'डबल न्यूमोनिया' कहते हैं-

न्यूमोनिया का प्राथमिक उपचार


इस रोग में तेज बुखार आता है तथा पसलियों में दर्द होता है और सिर में दर्द, पैरों में दर्द, छाती में हल्का दर्द, बेचैनी, प्यास अधिक लगना, जीभ का सूख जाना, श्वास लेने में तकलीफ, खांसी आदि न्यूमोनिया के प्रमुख लक्षण हैं-

न्यूमोनिया(Pneumonia)होने पर प्राथमिक उपचार-


1- तारपीन के तेल में थोड़ा-सा कपूर मिलाकर रोगी की छाती तथा पसलियों पर मलने से न्यूमोनिया(Pneumonia)रोगी को पूर्ण आराम मिलता है-

2- आप थोड़े-से तुलसी के पत्ते और आठ-दस कालीमिर्च एक कप पानी में औटाएं और जब पानी आधा रह जाए तो छानकर जरा-सा सेंधा नमक डालकर न्यूमोनिया(Pneumonia)को पिलायें-

3- न्यूमोनिया(Pneumonia)रोगी की छाती तथा पसलियों पर शुद्ध शहद का लेप लगाएं तथा शहद को पानी में मिलाकर पिलाने से भी रोगी को काफी लाभ पहुंचता है-

4- न्यूमोनिया(Pneumonia)से ग्रसित बच्चे की पसलियां चल रही हों तो रत्ती भर हींग गरम पानी में घोलकर उसे पिलाएं-

5- अदरक तथा तुलसी का रस शहद में मिलाकर न्यूमोनिया रोगी को दिन में तीन-चार बार चटाएं-

6- न्यूमोनिया रोगी को दो मुनक्कों में रत्ती-रत्ती भर हींग भरकर रोगी को नित्य दो बार तीन-चार दिनों तक खिलाएं-

7- आंवला, जीरा, पीपल, कौंच के बीज और हरड़ - सभी 10-10 ग्राम लेकर कूट-पीसकर कपड़छन कर लें तथा इसमें से चार-चार ग्राम चूर्ण सुबह-शाम शहद के साथ सेवन करें-

8- तेजपात,बड़ी इलायची और कपूर का काढ़ा बनाकर न्यूमोनिया रोगी सुबह-शाम पिएं-

9- तुलसी के पत्ते, सोंठ, कालीमिर्च तथा काले नमक की चटनी बनाकर सुबह-शाम रोगी को खिलाएं-

न्यूमोनिया रोगी क्या खाएं क्या नहीं-


न्यूमोनिया के रोगी को घी-तेल की चीजें खाने को न दें तथा उनसी जगह सूखी रोटी, मूंग की दाल, तरोई, टिण्डे, लौकी चौलाई, मेथी, पालक आदि की उबली हुई सब्जियां दें और गेहूं की रोटी मोटे आटे की बनाकर खिलाएं तथा दोपहर को गाय के दूध में अदरक डालकर दें साथ में पीने को पानी उबला हुआ देना चाहिए-

रोगी को निर्देश दें की वह पानी एक साथ न पीकर घूंट-घूंट पिए तथा भोजन के बाद उसे आठ-दस कदम अवश्य चलाएं तथा दूध में चीनी की जगह गुड़ या शहद प्रयोग करें-

खटाई, मिठाई, तरबूज, अमरूद, सेब, केला आदि का सेवन न करें रोगी को पपीते का रस दें सकते हैं-

Upcharऔर प्रयोग-

क्या है महिलाओं के बेवफाई लक्षण

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आमतौर पर जब भी बेवफाई की बात आती है तो हमारे दिमाग में पुरुषों का ख्याल आता है लेकिन अब महिलाएं भी अपने पार्टनर के साथ बेवफाई करने में हिचकिचाती नहीं हैं जी हाँ कई बार ऐसा होता है कि आपको उनके अंदर आने वाले बदलाव से इसका अंदेशा हो जाता है लेकिन आपके लिए इसको साबित करना मुश्किल हो जाता है तो आइए हम आपको बताते हैं महिलाओं में बेवफाई के लक्षण क्या होते हैं-

क्या है महिलाओं के बेवफाई लक्षण


1- आज हमारे समाज में इन्टरनेट और टी वी देखी जाने वाली अश्लीलता और खुला पन से शादी-शुदा  महिलाए भी अब सेक्स के प्रति खुले दिमाग की हो रही है हो सकता है कि ये प्रस्तुत लाइन आपको थोडा सा विचलित कर सकती है लेकिन सच यही है आज एक नया दौर निकला है जो यही खुले विचार ही महिलाओं को Infidelity की तरफ प्रेरित कर रही है तथा फेसबुक फ्रेंड का बढ़ता ट्रेंड इसका एक प्रमुख कारण भी है फेसबुक फ्रेंड बनाया और कुछ दिनों की चैटिंग के बाद फोन नम्बर दे देना-इसमें भी दो तरह से बेवफाई कही जा सकती है फोन पर मानसिक रूप से प्यार भरी बाते करना और दूसरा घर बुला कर फिजिकल रिलेशन बनाना-

2- अब आप कैसे जानेगे कि आपकी पत्नी या पार्टनर कैसे आप से बेवफाई कर रही है चूँकि ये एक बड़ा मुस्किल काम है क्युकी आप तो जीवन की सभी सुविधाओं की पूर्ति एक निष्ठावान बन कर पत्नी या पार्टनर के प्रति वफादार बनकर उपलब्ध करा रहे है और आपकी मज़बूरी है कि आफिस या बिजनेस को करना आवश्यक है यदि नहीं जायेगे तो जीविको-पार्जन की समस्या मुंह फैलाए खड़ी है-

3- Women's Infidelity का एक कारण ये भी है कि वास्तव में महिलाए दिल की साफ़ होती है और जल्दी ही लोगो की छलावे वाली बातो की वजह से आकर्षित हो जाती है और किसी से फिजिकल रिलेशन बनाते समय  खुद के वश में नहीं रह पाती है उनके दिल का नाजुक होना भी महिलाओं की बेवफाई का प्रमुख कारण है-

4- अब तो सर्वेक्षण से भी साबित हो गया है कि महिलाए पुरुषो की अपेक्षा जादा चैटिंग में व्यस्त रहती है उसका एक मुख्य कारण ये भी है संयुक्त परिवार से अलग-थलग होता परिवार आज के नव-युवा नई प्रथा इस ओर बढ़ रहे है ये जादा आंकड़े सैन्य अधिकारियों की पत्नियों में देखने को मिलता है या फिर जादा अवधि के लिए घर से बाहर रहने वाले लोगो के यहाँ देखने को मिलता है-

कहीं आप भी तो बेवफाई(Infidelity)के शिकार तो नहीं-

1- यदि आपका पार्टनर या पत्नी आपसे जुड़ी हुई या आपकी कही हुई बातों पर ध्यान देना बंद कर दे और अपनी ही सपनों की दुनिया में खोए रहे तो जरा सावधान हो जाइए ये हो सकता है कि आपका पार्टनर आपसे बेवफाई कर रहा हो-

2- यदि कामकाजी महिलाओं का काम का बहाना करके रात के देर से घर आना और दबे पांव से कमरे में दाखिल हो तथा आपके पूछने पर-आपको डिस्टर्ब नहीं करने का बहाना बनाना या जादा थक गई हूँ अभी बात करने का मूड़ नहीं है तो सावधान होने की जरुरत है-

3- अब तक जो चीजें आप एक दूसरे की शेयर करते थे अचानक उसमें प्राइवेसी की जरूरत होना-जैसे ईमेल या फोन के पासवर्ड बदल देना या फिर  क्रेडिट कार्ड का बिल छिपाना और जब आप जानकारी के लिए बिल मांगे तो नाराज होकर यह कहना कि तुम मुझ पर शक कर रहे हो -यह भी आपसे Infidelity का संकेत है-

4- जब आपका पार्टनर अपने दोस्त से लगातार मिले और ज्यादा से ज्यादा समय उसके साथ बिताए और पूछने पर यह कहे कि हम सिर्फ अच्छे दोस्त हैं तो हमारे बीच दोस्ती के अलवा कुछ भी नहीं है यह महिलाओं में बेवफाई का सबसे बड़ा लक्षण हैं-

5- किसी भी नए रिश्ते की शुरुवात ज्यादा से ज्यादा बातचीत से ही होती है तो अगर आपका पार्टनर(पत्नी) ज्यादा समय इंटरनेट पर चैटिंग करे तो यह आपके लिए खतरे की घंटी हो सकती है-

6- यदि आपका पार्टनर फोन पर ज्यादा समय बिताने लगे और अचानक आपके कमरे में आते ही फोन कट कर देना या कॉल डिलीट कर देना तथा पूछने पर नाराज होकर ये कहे कि चाहो तो मेरा फोन चेक कर लो या तुम मुझ पे शक करते हो समझे कि दाल में कुछ न कुछ काला हो सकता है -

7- आपका पार्टनर आपके साथ रहते हुए अपने नए दोस्त के बारे में कुछ ज्यादा बातें करता है तो इसका मतलब है कि वो उसकी तरफ आकर्षित हो रहा है तो यहाँ भी आपको सावधान होने की आवश्यकता है -

8- आपका पार्टनर यदि पहले की अपेक्षा जरूरत से ज्यादा समय शीशे के सामने बिताये या अपने हेयर स्टाइल या कपड़े पहनने के ढंग में बदलाव करती है बाहर जाते वक्त तो भी सोचना आवश्यक है कही वो किसी और को आकर्षित करने के लिए तो ऐसा नहीं कर रही है -

9- जब कोई महिला आपके दोस्तों व परिवार वालों के बीच खुद को असहज महसूस करती है और उनसे बात करने में कतराती है तो हो सकता है कि वो आपसे बेवफाई कर रही है-

10- एक ही रूट पे अलग-अलग टाइम पर ऑफिस जाना या किसी छोटे से काम को जरूरत से ज्यादा समय देना रोज नए बहाने बना कर आपके साथ न जाना तो आप समझे की वो आपको क्यों एवाइड करती है -

नोट-

ये भी हो सकता है उपरोक्त बातो से सभी को सरोकार न हो-ये लेख सभी से जुड़ा कदापि नहीं हो सकता है कुछ वफादार भी है अन्यथा अतिरिक्त और अनावश्यक रूप से शक करना भी आपके जीवन को नारकीय बना सकता है बस ध्यान ये देना है कि इन्टरनेट के लाभ और नुकसान दोनों है बस ये आपकी आवश्यकता है कि आप क्या लेना चाहते है "ज्ञान या अज्ञान "

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