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31 दिसंबर 2016

स्त्री में बांझपन रोग के लक्षण

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नपुंसक उस व्यक्ति को कहते हैं जिस पुरुष के वीर्य या लिंग में कमी होती है तथा वह सन्तान की उत्पत्ति के योग्य नहीं रहता है ठीक इसी तरह वह महिला जिसके गर्भाशय में कुछ कमी हो या उसे मासिक धर्म ठीक समय पर नहीं आता है या वह संतान पैदा करने के लायक नहीं है उस महिला को नास्त्रीक कहा जा सकता है-

स्त्री में बांझपन रोग के लक्षण

बांझ उस स्त्री को कहते हैं जिस स्त्री के गर्भाशय नहीं होता है या उसे मासिक धर्म नहीं आता है लेकिन इसके अलावा कई स्त्रियां ऐसी भी होती है जिन्हे मासिक धर्म होते हुए भी नास्त्रीक कहलाती है कई लोग पूर्ण रुप से नपुंसक नहीं होते परंतु उनमें थोड़े-थोड़े गुण नपुंसक के भी मिलते हैं यदि उनकी अच्छी तरह से चिकित्सा की जाए तो उनमें स्त्रियों को गर्भवती करने की शक्ति पैदा हो जाती है और वे बच्चे पैदा करने का पुरुषत्व प्राप्त कर लेते हैं इसी तरह से अनेक महिला भी ऐसी है जिनका ठीक समय पर इलाज न होने पर बांझपन(Infertility)रोग के लक्षण पैदा हो जाते हैं और वह धीरे-धीरे नस्त्रीक बन जाती है-

बांझपन(Infertility)के प्रकार-


बाँझ स्त्री इक्कीस प्रकार की होती है जिसका विवरण इस प्रकार है-


उदावर्ता- जिस स्त्री की योनि में से झागदार मासिक धर्म बहुत ही दर्द के साथ निकलता हो उदावर्ता बाँझ श्रेणी में आती हैं-

बंध्या- जिस स्त्री को कभी मासिक धर्म नहीं आता हो तथा वह सभी तरह से स्वस्थ रहती हो वह बंध्या स्त्री कहलाती है-

बिप्लुता- जिस स्त्री की योनि में सदा दर्द रहता हो बिलुप्ता बाँझ(Infertility)श्रेणी में आती है-

परिप्लुता- वह स्त्री जिसकी योनि में सहवास के समय बहुत अधिक दर्द होता हो परिप्लुता स्त्री की श्रेणी में आती है-

वातला- जिस स्त्री की योनि बहुत अधिक सख्त, खुर्दरी और दर्द करने वाली हो-

लाहिताक्षरा- जिस स्त्री की योनि से बहुत तेज मासिक स्राव निकलता हो-

प्रसंनी- जिस स्त्री की योनि अपनी जगह से हट जाये-

वामनी- जिस स्त्री की योनि मनुष्य के वीर्य को तेजी के साथ उल्टी की तरह बाहर निकाल देती है-

पुत्रध्नी- जिस स्त्री का गर्भ ठहर जाने के कुछ दिनों बाद खून का आना शुरु हो जाता है तथा गर्भपात हो जाता है-

पित्तला- जिस स्त्री को योनि में मवाद और जलन महसूस होती हो-

अत्यानंदा- जिस स्त्री का मन सदा सेक्स करने को करता हो-

कर्णिका- जिस स्त्री की योनि में अधिक गांठे हो-

अतिचरणा- जो स्त्री सेक्स करते समय पुरुष से पहले ही स्खलित हो जाती हो-

आनंद चरण- जिस स्त्री की योनि से संभोग करते समय बहुत ज्यादा स्राव निकले और वह पुरुष से पहले ही स्खलित हो जाए-

श्लेष्मा- जिस स्त्री की योनि शीतल और चिकनी हो तथा खुजली रहती हो-

षण्ढ- जिस स्त्री के स्तन बहुत छोटे हो तथा मासिक स्राव न होता हो और योनि खुरदरी हो या गर्भाशय ही न हो और अगर हो तो काफी छोटा हो-

अण्डभी- जिस स्त्री की योनि सेक्स करते समय या अधिकतर नीचे पैरों पर बैठते समय तथा अण्डकोषों की तरह निकल आए-

विद्रूता- जिस स्त्री की योनि काफी अधिक खुली हुई हो-

सूचीवक्त्रा- जिस स्त्री की योनि इतनी अधिक सख्त हो कि पुरुष का लिंग अंदर ही न जा सके-

त्रिदोषजा- जिस स्त्री की योनि में सदा तेज दर्द तथा हमेशा खुजली होती रहे-

शीतला- जो स्त्रियां शांत स्वभाव की होती है वह शीतला(नस्त्रिक)स्त्री कहलाती है उन स्त्रियों में पुरुष से मिलने की चाह नहीं होती है जब वो शादी के बाद मजबूर होकर पति को खुश करने के लिए सेक्स में तल्लीन होती है तो उन्हें कोई मजा नहीं आता है बस वह निर्जीव शरीर की तरह पड़ी रहती है वे स्त्रियां बड़ी मुसीबत का कारण बनती है अगर शादी के एक-दो महिनों के बाद भी सेक्स का आनन्द न ले तो उनकी अच्छे चिकित्सक से इलाज कराना चाहिए-

हम अगली पोस्ट में बताने का प्रयास करेगें कि बांझपन(Infertility)वाली या उपरोक्त में से किसी भी एक लक्षण वाली स्त्री को किस प्रकार का घरेलू इलाज या क्या उपचार करना चाहिए-

Read More-  बांझपन का घरेलू उपचार क्या है 

Upcharऔर प्रयोग-

घरेलू गर्भनिरोधक उपाय आजमायें

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वैसे तो गर्भनिरोधकों के तमाम विकल्प बाजार में मौजूद हैं लेकिन अगर आप इनके केमिकल या साइड एफेक्ट से दूरी रखना चाहते हैं या फिर इन प्रचलित तरीकों में यकीन नहीं रखते हैं तो आपके लिए आयुर्वेद में कु‌छ घरेलू उपाय भी हैं यदि आप आयुर्वेद पर यकीन रखते हैं तो इन उपायों का गर्भनिरोधक(Contraceptive)के तौर पर इस्तेमाल कर सकते हैं-

घरेलू गर्भनिरोधक उपाय आजमायें

वैसे तो इनके साइड एफेक्ट नहीं है लेकिन इनका इस्तेमाल आप किसी अनुभवी आयुर्वेदिक डॉक्टर के परामर्श से करें तो प्राकृतिक और सुरक्षित तौर पर गर्भनिरोध और बेफिक्र सेक्स लाइफ आसान हो सकेगी-

घरेलू उपाय-


1- मासिक धर्म के पश्‍चात स्‍नान करने के बाद एरंड के बीज(Castor seeds) की गिरी छीलकर खाने से गर्भ नहीं ठहरता है एक गिरी निगलने पर एक वर्ष तथा दो गिरी निगलने पर दो वर्ष व तीन गिरी निगलने पर तीन वर्ष तक बच्‍चे पैदा नहीं होंगे बच्‍चे पैदा करने की इच्‍छा हो तो गिरी खाना बंद कर दें एक वर्ष बाद पुन: गर्भधारण करने की क्षमता उत्‍पन्‍न हो जाती है किसी भी हाल में एक साथ तीन से अधिक गिरी न खाएं क्युकि यह नुकसान दायक हो सकता है-

2- पीरियड के बाद लहसुन(Garlic) की दो कलियां छीलकर निगल जाएं तो गर्भ नहीं ठहरेगा-

3- पीपल, सुहागा व बायबिडंग को बराबर-बराबर लेकर पीस लें- जिस दिन पीरियड आरंभ हो उस दिन से सात दिनों तक छह ग्राम चूर्ण पानी से खाएं- एक वर्ष तक गर्म नहीं ठहरेगा-

4- तालीसपत्र व गेरू को 25 ग्राम लेकर चार दिनों तक ठंडे पानी से पीने से स्‍थाई बांझपन आ जाती है-

5- सीताफल का बीज(Pumpkin seeds) पीसकर योनी में मलने से गर्भ नहीं ठहरेगा और इससे गर्भाशय की सफाई भी हो जाती है-

6- पीरियड बंद होने के बाद एक कप तुलसी के पत्‍ते(Basil leaves)लेकर काढ़ा बनाएं और तीन दिन तक लगातार पीएं इससे गर्भ भी नहीं ठहरेगा और कोई नुकसान भी नहीं होगा-

7- हल्‍दी की गांठ(turmeric root) पीसकर उसे छान ले- छह ग्राम पाउडर पानी के साथ खाएं इसे पूरे पीरियड के दौरान खाएं तो गर्भ नहीं ठहरेगा-

8- पीरियड के पांचवें दिन करेले का रस(Bitter gourd juice) पीने से गर्भ नहीं ठहरता है-

9- संभोग के दौरान नीम के तेल(Neem oil) में रूई का फाहा भिंगोकर योनी में रखने से गर्भ ठहरने की संभावना नहीं रहती है-

10- कैस्टर यानी अरंडी के बीज को फोड़ें और इनमें मौजूद एक सफेद बीज को निकालें और सेक्स के 72 घंटे के भीतर महिलाएं इसका सेवन करें तो यह आई-पिल की तरह ही गर्भधारण रोक सकता है- महिलाएं इसका सेवन पीरियड्स के तीन दिनों तक करें तो एक महीने तक इसका प्रभाव रहेगा-

11- त‌िल के तेल में सेंधा नमक का टुकड़ा डुबोएं और सेक्स के बाद इसे महिलाएं अपने प्राइवेट पार्ट पर कम से कम दो मिनट तक रखें-इससे वीर्य गर्भाशय में पहुंचते ही नष्ट हो जाएगा- महिलाएं सेक्स के बाद प्राइवेट पार्ट को गुनगुने पानी और सेंधा नमक से भी साफ कर सकती हैं-इससे भी गर्भ नहीं ठहरेगा-

12- मासिक धर्म से शुद्ध होने पर (पांचवें दिन से) चमेली की एक कली (चमेली का फूल, जो खिला न हो) पानी के साथ रोज लगातार तीन दिन तक निगलने से एक वर्ष तक गर्भनिरोधक का काम करेगा-

13- सूखे पुदीने के पत्ते का पाउडर बनाएं और स्टोर कर लें-सेक्स के पांच मिनट के बाद एक ग्लास गुनगुने पानी के साथ एक चम्मच पाउडर का सेवन करें-महिलाओं के लिए यह नैचुरल कंट्रासेप्टिव दवा का काम करेगा-

14- गुड़हल के फूल का पेस्ट बनाएं इसमें स्टार्च मिलाएं-पीरियड्स के शुरुआती तीन दिनों तक इसका सेवन कंट्रासेप्टिव की तरह ही काम करेगा-

15- संभोग के समय प्‍याज का रस योनी में रखने पर शुक्राणु बेसर हो जाते हैं-

16- आंवला, रसनजनम और हरितकारी को समान मात्रा में लेकर इनका पाउडर बनाएं और स्टोर करें- ये औषध‌ियां क‌िसी भी आयुर्वेदिक स्टोर पर म‌िल जाएंगी- महिलाएं इनका सेवन पीरियड्स के चौथे दिन से 16वें दिन तक करें तो यह गर्भनिरोधक गोलियों की तरह ही असरदार होता है-

17- यदि आप गर्भ निरोधक प्रयोग नहीं करना चाहते या गर्भनिरोधक गोलियों का सेवन नहीं करना चाहते हों तो चावल धुले पानी में चावल के पौधे की जड़ पीसकर छान लें और इसमें शहद मिलाकर पिला दें- यह हानिरहित सुरक्षित गर्भनिरोधक उपाय है-

Read More-   प्रेगनेंसी टेस्ट करने से पहले ये भी जाने

Upcharऔर प्रयोग-

30 दिसंबर 2016

सर्दी में होने वाली नजला-जुकाम के लिए

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लोगों को शीत काल में कोल्ड-एलर्जी(Cold-allergy)हो जाती है ये अधिकतर सर्दी की शुरुआत व अंत के समय या तेज शीत लहर चलने पर नाक से पानी टपकाना "नजला जुकाम" से पीड़ित हो जाते है कोल्ड एलर्जी(Cold allergy)से होने वाली खासी जुकाम नजला, नाक टपकना आदि के लिए पूरी सर्दी के लिए टिप्स-

सर्दी में होने वाली नजला-जुकाम के लिए


क्या करे-


सर्दी के शुरू होने से पहले यानी दिवाली के बाद एक ग्राम केसर(Saffron)लाकर उसे खरल में बारीक पीस ले फिर उस पिसी हुई केशर को एक कांच की शीशी में 200-250 ग्राम गुलाब जल(Rose water)में मिला कर रख लें अब आप रोजाना सोते समय इस प्रकार ले-

1- तीन वर्ष से अधिक के बच्चो को आधी चम्मच एक गिलास दुग्ध में दें-

2- दस वर्ष से अधिक आयु वाले एक चम्मच एक गिलास दुग्ध में लेना है-

3- वृद्धो को दो चम्मच गिलास दुग्ध में लेना चाहिए -

प्रति रात्रि सोने से पहले गुनगुने दुग्ध में मिलाकर पीवे केसर मिश्रित गुलाब जल को चम्मच में लेने से पहले शीशी को थोड़ा हिला लेवे-इससे आपको सर्दी में कोल्ड एलर्जी(Cold-allergy)से राहत होगी एक बार इस नुस्खे को अवश्य ही आजमायें-

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ज़ुकाम कुछ सेकंड्स में दूर हो जाता है

Upcharऔर प्रयोग-

29 दिसंबर 2016

आप अपनी स्मरण शक्ति कैसे बढायें

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हमारे समाज में बहुत से लोगों को भूलने की बीमारी होती है उनकी Memory-स्मरण शक्ति कमजोर हो जाती है तो आप को किसी पाठ को रटने की जगह याद करने की आदत डालनी चाहिए जी हाँ सुनने में आपको क्या लगता है क्या हम मजाक कर रहे है लेकिन ये सत्य है कि चमत्कारिक रूप से आपके थोड़े से प्रयास से आपकी स्मरण(Memory)शक्ति ऐसी हो जायेगी कि शायद आप सोच भी नहीं सकते है-

आप अपनी स्मरण शक्ति कैसे बढायें


क्या आपको पता है कि पहले के ऋषि -मुनि सिर्फ सुन के याद कर लेते थे और अपने शिष्यों को उस ज्ञान को दिया करते थे आप जानते है कि वो क्या करते थे वो रात को मनन(Contemplation)करते थे और दिन में किये गए कार्य और सुने गए उपदेश को मनन करने से उनको हमेशा के लिए याद हो जाता था-

स्मरण शक्ति(Memory)एक ऐसा विषय है जिसके बारे में हर कोई जानना चाहता है फिर चाहे विद्यार्थी हो या नौकरी पेशा व्यक्ति, गृहिणी हो या वृद्ध सभी इसके बारे अवश्य जानना चाहते है-

आज की आपाधापी के समय में हर कोई यही कहता नजर आता है कि मेरी याददाश्त(Memory)कमजोर है या जो पढ़ता हूँ याद नहीं रहता-आजकल स्मरणशक्ति(Memory)बढ़ाने के लिए बाजार में तरह-तरह के प्रोडक्ट्स आते हैं जबकि सच ये है कि वास्तव में किसी की भी स्मरणशक्ति(Memory)कमजोर नहीं होती और न ही इस पर उम्र का कोई फर्क पड़ता है- 

फिर आखिर ऐसा क्यों होता है-


आपने एक चीज का अनुभव किया होगा-वास्तव में हम जब फिल्में देख रहे होते हैं या उपन्यास आदि पढ़ रहे होते हैं या कोई नाटक देख रहे होते हैं तब हम उसे रट कर याद  नहीं करते है सिर्फ बस हमारी आँखों के सामने से व हमारी स्मृति पटल(Memory boards)से गुजारते जाते हैं क्योंकि हम उसे याद नहीं करते और दिमाग पर जोर नहीं डालते और बस पढ़ते जाते हैं या सिर्फ देखते जाते हैं और वह हमें याद हो जाता है-

कई बार आपने अनुभव किया होगा कि जब हम कोई घटना या किसी का नाम याद रखने की कोशिश करते हैं तो हमारे मस्तिष्क पर दबाव पड़ता है और जब मस्तिष्क पर दबाव पड़ता है तो वह घटना या किसी का नाम याद नहीं आता है और जैसे ही हम उसे याद करना बंद कर देते है व दूसरे काम में लग जाते हैं तो वह घटना हमें शीघ्र याद आ जाती है क्योंकि उस वक्त हम उसे याद(Remember)नहीं करते हैं-

जबकि हम किसी कोर्स की किताबो को पढ़ते हैं तो या तो हम रटते हैं या याद(Remember)करने की कोशिश करते हैं जबकि हमें पढ़ते वक्त याद नहीं करना चाहिए-बस पढ़ते रहना चाहिए-याद करने की कोशिश ही हमें याद नहीं होने देती है हाँ जोर जोर से और चिल्ला कर किसी को दिखाने के लिए याद कर रहे है तो ये फिर एक अलग बात है-

जब भी हम पढ़ने बैठते हैं तो एक या दो पैरा पढ़कर किताब बंद कर दें और थोड़ी देर विश्राम करें फिर जो पढ़ा है उसे एक कॉपी पर लिखें व मिलाएँ कि हमने जो पढ़ा व लिखा है उसमें कितना मेल है-आप चकित रह जाएँगे कि लगभग जो पढ़ा था वही लिखा है आप धीरे-धीरे यही क्रिया दोहराते रहें-इस प्रकार हम जो पढ़ेंगे उसे आसानी से लिख कर अपने स्मृति पटल पर अच्छी तरह बैठा लेंगे-पढ़ाई किसी भी वक्त करें बस याद न करें बस पढ़ते जाएँ-फिर थोड़ी देर लेट जाएँ व एक कॉपी में जो पढ़ा लिखते जाएँ यह क्रिया आपको तथ्यों याद रखने में सहायक होगी-

अब दूसरी एक क्रिया यह है कि हम रात को सोते वक्त ध्यान करें कि सुबह उठने से लेकर सोते वक्त तक क्या-क्या किया-किस-किस से मिले और क्रमवार सिर्फ ध्यान करते जाएँ-लगभग एक माह में आपको सारा घटनाक्रम हूबहू याद हो जाएगा-

सम्मोहनशक्ति द्वारा स्मरण शक्ति बढायें-


तीसरी क्रिया आत्म सम्मोहन(Self Hypnosis)की है-सर्वप्रथम हम हाथ-पैर धोकर रात्रि में एक खुशबूदार अगरबत्ती लगाकर बिस्तर पर लेट जाएँ व तीन बार गहरी-गहरी साँसे लें व धीरे- धीरे छोड़ें फिर अपने दोनों पैरों को ढीला छोड़ दें फिर दोनों हाथ, सिर व पूरे शरीर को ढीला छोड़ दें-फिर कहें मेरी आँखों में एक सम्मोहक नींद समाती जा रही है ऐसा कम से कम दस बार करें-फिर अपने आपको खुद निर्देश दें कि आज जो भी पढ़ा या लिखा मुझे हमेशा जीवन भर ध्यान में रहेगा और जब भी मैं उसे लिखना चाहूँगा-लिख दूँगा या बताना चाहूँगा बता दूँगा-अब से मेरी याददास्त पहले से अधिक बढ़ गई है-ऐसा क्रम एक माह तक करें फिर देखें कि आपकी से स्मरणशक्ति चमत्कारिक रूप से बढ़ गई है और इसी क्रिया से आपको एक लाभ और भी होगा कि बिना दवा के एक अच्छी नींद भी आएगी -

हम अपना अनुभव भी आपसे शेयर करते है हम देर रात तक लेपटाप पे कुछ न कुछ पोस्ट लिखते है लेकिन यकीन माने हम कभी किसी चीज को याद नहीं करते है न ही जबरजस्ती कभी मस्तिष्क पे जोर-अजमाईस करते है -लेकिन मुझे बहुत कुछ याद रहता है-और जब हम सोने जाते है तो बस मानसिक रूप से बिना होठों को हिलाए मन में गुरु मन्त्र का जप शुरू कर देते है पूरी रात सोने के बाद सुबह तक ये जप अनवरत चलता रहता है कुछ दिन के प्रयास से आप भी इसका अनुभव कर सकते है-

शक्ति को जाग्रत करने के कुछ उपाय दिए जा रहे है आप इनका भी प्रयोग कर सकते है-

दोनों कानों के नीचे के भाग को अंगूठे और अंगुलियों से दबाकर नीचे की ओर खीचें- पूरे कान को ऊपर से नीचे करते हुए मरोड़ें- सुबह 4-5 मिनट और दिन में जब भी समय मिले- कान के नीचे के भाग को खींचे-

सिर व गर्दन के पीछे बीच में मेडुला नाड़ी होती है- इस पर अंगुली से 3-4 मिनट मालिश करें-इससे एकाग्रता बढ़ती है और पढ़ा हुआ याद रहता है-

ज्ञान मुद्रा(Gyanmudraa)का अभ्यास करे- 


प्रात: उठकर पद्यासन या सुखासन में बैठकर हाथों की तर्जनी अंगुली के अग्र भाग को अंगूठे से मिलाकर रखने से ज्ञान मुद्रा बनती है शेष अंगुलियां सहज रूप से सीधी रखें और आंखें बंद तथा कमर व रीढ़ सीधी, यह अत्यंत महत्वपूर्ण मुद्रा है-इसका हितकारी प्रभाव समस्त वायुमंडल और मस्तिष्क(Brain)पर पड़ता है ज्ञानमुद्रा पूरे स्नायुमंडल को सशक्त बनाती है- विशेषकर मानसिक तनाव से होने वाले दुष्प्रभावों को दूर कर मस्तिष्क के ज्ञान तंतुओं को सबल बनाती है- 

ज्ञानमुद्रा(Gyanmudraa)के निरंतर अभ्यास से मस्तिष्क की सभी विकृतियां और रोग दूर होते हैं-जैसे पागलपन, उन्माद, विक्षिप्तता, चिड़चिड़ापन, अस्थिरता, अनिश्चितता क्रोध, आलस्य घबराहट, अनमनापन, व्याकुलता, भय आदि- मन शांत हो जाता है और चेहरे पर प्रसन्नता झलकती है-ज्ञानमुद्रा विद्यार्थियों के लिए वरदान है- इसके अभ्यास से स्मरण शक्ति(Memory) और बुध्दि तेज होती है-

अकारण अंगुलियों को चटकाना, पंजा लड़ाना और अंगुलियों को अनुचित रूप से चलाना आदि आदतें मस्तिष्क और स्नायु-मंडल पर बुरा प्रभाव डालती हैं-इससे प्राणशक्ति का ह्रास होता है और स्मरण शक्ति कमजोर होती हैं अत: आप इनसे बचे -

आज्ञाचक्र(Agya chakra)ललाट पर दोनों भौंहों के मध्य स्थित होता है- इसका संबंध ब्रह्म शरीर से होता है- जिस व्यक्ति का आज्ञाचक्र जाग जाता है वही विशुध्द ब्रह्मचारी हो सकता है और उसके लिए कुछ भी असंभव नहीं रहता आज्ञाचक्र पर ध्यान केन्द्रित करने से आज्ञाचक्र जाग्रत होता है- सफेद रंग की ऊर्जा यहां से निकलती है अत: सफेद रंग के ध्यान से आज्ञाचक्र के जागरण में सहायता मिलती है-

आयुर्वेदिक प्रयोग(Ayurvedic Experiment)-


1- देशी गाय के शुध्द घी में एक बादाम कुचलकर डाल दें और उसे गरम करके ठंडा कर लें तत्पश्चात् छानकर रखें- रात को सोते समय यह घी दो-दो बूंद दोनों नासिका के छिद्रों में थोड़ गुनगुना करके डालें- घी ड्रोपर में रख लें, डालने से पहले ड्रोपर की शीशी गरम पानी में रखें और फिर पतला होने पर नाक में डालें- यही घी नाभि पर डालकर 4-5 बार नाभि को घड़ी की दिशा में और 4-5 बार घड़ी की विपरीत दिशा में घुमाएं- फिर उस पर गीले कपड़े की पट्टी और फिर सूखे कपड़े की पट्टी रखें- ऐसा करीब 10-15 मिनट करें-

2- सोते वक्त दोनों पैरों की पदतलियों में अपने हाथ से घी से मालिश करें-इससे नींद अच्छी आती है तथा मस्तिष्क में शांति, प्रसन्नता और सक्रियता आती है और आपका मनोबल बढ़ता है-

3- चार-पांच बादाम की गिरी पीसकर गाय के दूध और मिश्री में मिलाकर पीने से मानसिक शक्ति बढ़ती है आयुर्वेद के अनुसार ब्राह्मी, शंखपुष्पी, वच, असगंध, जटामांसी, तुलसी समान मात्रा में लेकर चूर्ण का प्रयोग नित्य प्रतिदिन दूध के साथ करने पर मानसिक शक्ति, स्मरण शक्ति में वृध्दि होती है-

4- उत्तर दिशा में मुंह करके पिरामिड की आकृति की टोपी पहनकर पढ़ाई करने से पढ़ा हुआ बहुत शीघ्र याद होता है आप अपनी ये टोपी, कागज, गत्ता या मोटे कपड़े की बनाई जा सकती है इसे एक बार एक माह तक आजमा कर देखें और अपने जीवन में स्मरण शक्ति में वृधि को महसूस करे आपको लगे कि ये बिना पैसे का उत्तम प्रयोग है तो आगे जीवन में इसे पढ़ाई के समय के अलावा भी प्रयोग करे-

5- देशी गाय का शुध्द घी, दूध, दही, गोमूत्र, गोबर का रस समान मात्रा में लेकर गरम करें- घी शेष रहने पर उतार कर ठंडा करके छानकर रख लें- यह घी ‘पंचगव्य घृत’ कहलाता है-इसे रात को सोते समय और प्रात: देशी गाय के दूध में 2-2 चम्मच पिघला हुआ पंचगव्य घृत, मिश्री, केशर, इलायची, हल्दी, जायफल, मिलाकर पिएं- इससे बल, बुध्दि, साहस, पराक्रम, उमंग और उत्साह बढ़ता है- हर काम को पूरी शक्ति से करने का मन होता है और मनोवांछित फलों की प्राप्ति होती है-

6- रात्रि को सोते समय अपने दिन भर के किए हुए कार्यों पर चिंतन-मनन करें तथा उनकी समीक्षा करना चाहिए और गलतियों के प्रति खेद व्यक्त करना और उन्हें पुन: न दोहराने का संकल्प लेना चाहिए- प्रात: सो कर जागते समय ईश्वर को नया जन्म देने हेतु धन्यवाद देना चाहिए और पूरा दिन अच्छे कार्यों में व्यतीत करने का संकल्प लेकर पूरे दिन की योजना बनाकर बिस्तर छोड़ना चाहिए-
Upcharऔर प्रयोग-

इन्द्रायण के आयुर्वेदिक प्रयोग

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इन्द्रायण(Indrayan)एक लता होती है जो पूरे भारत के बलुई क्षेत्रों में पायी जाती है यह खेतों में उगाई जाती है इन्द्रायण तीन प्रकार की होती है पहली छोटी इन्द्रायण, दूसरी बड़ी इन्द्रायण और तीसरी लाल इन्द्रायण होती है तीनों प्रकार की इन्द्रायण में लगभग पचास से लेकर सौ फल आते हैं-

इन्द्रायण के आयुर्वेदिक प्रयोग


यह दस्त लाने वाली तथा कफ-पित्तनाशक है तथा यह कामला(पीलिया),प्लीहा (तिल्ली),पेट के रोग,श्वांस (दमा), खांसी, सफेद दाग, गैस, गांठ, व्रण (जख्म), प्रमेह (वीर्य विकार), गण्डमाला (गले में गिल्टी का हो जाना) तथा विष को नष्ट करता है ये गुण छोटी और बड़ी दोनों इन्द्रायण में होते हैं-

इन्द्रायण का सेवन बड़ी ही सावधानी से करना चाहिए क्योंकि इसके ज्यादा और अकेले सेवन करने से पेट में मरोड़ पैदा होता है और शरीर में जहर के जैसे लक्षण पैदा होते हैं-

विभिन्न रोगों में इन्द्रायण से उपचार-


1- इन्द्रायण के बीजों का तेल नारियल के तेल के साथ बराबर मात्रा में लेकर बालों पर लगाने से बाल काले हो जाते हैं तथा इन्द्रायण की जड़ के 3 से 5 ग्राम चूर्ण को गाय के दूध के साथ सेवन करने से बाल काले हो जाते हैं परन्तु इसके परहेज में केवल सिर्फ दूध ही पीना चाहिए-

2- सिर के बाल पूरी तरह से साफ कराके इन्द्रायण के बीजों का तेल निकालकर लगाने से सिर में काले बाल उगते हैं तथा इन्द्रायण के बीजों का तेल लगाने से सफेद बाल काले हो जाते हैं-

3- इन्द्रायण के पके हुए फल को या उसके छिलके को तेल में उबालकर और छानकर पीने से बहरापन दूर होता है-

4- इसके पके हुए फल की धूनी दांतों में देने से दांत के कीड़े मर जाते हैं-

5- इन्द्रायण की जड़ के चूर्ण को नस्य(नाक में डालने से)दिन में 3 बार लेने से अपस्मार(मिर्गी)रोग दूर हो जाता है-

6- इन्द्रायण के फल में छेद करके उसमें कालीमिर्च भरकर छेद को बंद करके धूप में सूखने के लिए रख दें या गर्म राख में कुछ देर तक पड़ा रहने दें फिर काली मिर्च के दानों को रोजाना शहद तथा पीपल के साथ एक सप्ताह तक सेवन करने से कास (खांसी) के रोग में लाभ होता है-

7- स्त्रियों के स्तन में सूजन आ जाने पर इन्द्रायण की जड़ को घिसकर लेप करने से लाभ होता है-

8- इन्द्रायण का मुरब्बा खाने से पेट के रोग दूर होते हैं तथा इन्द्रायण के फल में काला नमक और अजवायन भरकर धूप में सुखा लें अब इस अजवायन की गर्म पानी के साथ फंकी लेने से दस्त के समय होने वाला दर्द दूर हो जाता है-

9- विसूचिका(हैजा)के रोगी को इन्द्रायण के ताजे फल के 5 ग्राम गूदे को गर्म पानी के साथ या इसके 2 से 5 ग्राम सूखे गूदे को अजवायन के साथ देना चाहिए-

10- इन्द्रायण की जड़ को पानी के साथ पीसकर और छानकर 5 से 10 मिलीलीटर की मात्रा में पीने से पेशाब करते समय का दर्द और जलन दूर हो जाती है-

11- दस से बीस ग्राम लाल इन्द्रायण की जड़, हल्दी, हरड़ की छाल, बहेड़ा और आंवला को 160 मिलीलीटर पानी में उबालकर इसका चौथाई हिस्सा बाकी रह जाने पर काढ़ा बनाकर उसे शहद के साथ सुबह-शाम सेवन करने से मूत्रकृच्छ (पेशाब में दर्द और जलन) का रोग समाप्त हो जाता है-

12- मासिक-धर्म के रुक जाने पर 3 ग्राम इन्द्रवारूणी के बीज और 5 दाने कालीमिर्च को एक साथ पीसकर 200 मिलीलीटर पानी में उबालकर काढ़ा बना लें इस काढ़े को छानकर रोगी को पिलाने से रुका हुआ मासिक धर्म दुबारा शुरू हो जाता है-

13- इन्दायण की जड़ को योनि में रखने से योनि का दर्द और पुष्पावरोध(मासिक-धर्म का रुकना)दूर होता है-

14- इन्द्रायण के फल के गूदे को गर्म करके पेट में बांधने से आंतों के सभी प्रकार के कीड़े मर जाते हैं-

15- इन्द्रायण की फल मज्जा को पानी में उबालकर और छानकर गाढ़ा करके छोटी-2 चने के आकार की गोलियां गोलियां बना लेते हैं इसकी 1-2 गोली ठण्डे दूध से लेने से सुबह साफ दस्त शुरू हो जाते हैं-

16- इन्द्रायण के फल का गूदा तथा बीजों से खाली करके इसके छिलके की प्याली में बकरी का दूध भरकर पूरी रात भर के लिए रख दें सुबह होने पर इस दूध में थोड़ी-सी चीनी मिलाकर रोगी को कुछ दिनों तक पिलाने से जलोदर मिट जाता है इन्द्रायण की जड़ का काढ़ा और फल का गूदा खिलाना भी लाभदायक है परन्तु ये तेज औषधि है इन्द्रायण की जड़ का चूर्ण 1 से 3 ग्राम ग्राम को सोंठ और गुड़ के साथ सुबह और शाम देने से लाभ होता है ध्यान रहें की अधिक मात्रा में सेवन करने से विशाक्त(जहर)बन जाता है और हानि पहुंचाता है किसी वैध्य की देखरेख में लें-

17- इन्द्रायण की जड़ की छाल के चूर्ण में सांभर नमक मिलाकर खाने से जलोदर समाप्त हो जाता है-

18- 100 ग्राम इन्द्रायण की जड़ को 500 मिलीलीटर एरण्ड के तेल में डालकर पकाने के लिए रख दें पकने पर जब तेल थोड़ा बाकी रह जाये तो इस 15 मिलीलीटर तेल को गाय के दूध के साथ सुबह-शाम पीने से उपदंश समाप्त हो जाता है-

19- इन्द्रायण की जड़ों के टुकड़े को 5 गुना पानी में उबाल लें जब उबलने पर तीन हिस्से पानी बाकी रह जाए तो इसे छानकर उसमें बराबर मात्रा में बूरा मिलाकर शर्बत बनाकर पीने से उपदंश और वात पीड़ा मिटती है-

20- इन्द्रायण की जड़ को पीसकर गाय के घी में मिलाकर भग(योनि)पर मलने से प्रसव आसानी से हो जाता है इन्द्रायण के फल के रस में रूई का फाया भिगोकर योनि में रखने से बच्चा आसानी से हो जाता है या इन्द्रायण की जड़ को बारीक पीसकर देशी घी में मिलाकर स्त्री की योनि में रखने से बच्चे का जन्म आसानी से होता है-

21- इन्द्रायण की जड़ों को सिरके में पीसकर गर्म करके शोथयुक्त(सूजन वाली जगह)स्थान पर लगाने से सूजन मिट जाती है अथवा शरीर में सूजन होने पर इन्द्रायण की जड़ को सिरके में पीसकर लेप की तरह से शरीर पर लगाने से सूजन दूर हो जाती है-

22- इन्द्रायण को बारीक पीसकर इसका चूर्ण बना लें फिर 200 मिलीलीटर पानी में 50 ग्राम धनिये को मिलाकर काढ़ा बना लें इसके बाद इन्द्रायण के चूर्ण को इस काढ़े में मिलाकर शरीर पर लेप की तरह लगाने से सूजन खत्म हो जाती है-

23- इन्द्रायण की जड़ और पीपल के चूर्ण को बराबर मात्रा में लेकर गुड़ में मिलाकर 10 ग्राम की मात्रा में रोजाना सेवन करने से संधिगत वायु दूर होती है-

24- 500 मिलीलीटर इन्द्रायण के गूदे के रस में 10 ग्राम हल्दी, काला नमक, बड़े हुत्लीना की छाल डालकर बारीक पीस लें, जब पानी सूख जाए तो चौथाई-चौथाई ग्राम की गोलियां बना लें एक-एक गोली सुबह-शाम दूध के साथ देने से सूजन तथा दर्द थोड़े ही दिनों में अच्छा हो जाता है-

25- इन्द्रायण की जड़ों को बेल पत्रों के साथ पीसकर 10-20 ग्राम की मात्रा में रोजाना सुबह-शाम पिलाने से स्त्री गर्भधारण करती है-

26-  इन्द्रायण के फल का 6 ग्राम गूदा खाने से बिच्छू का (विष) जहर उतरता है तथा 3 ग्राम बड़ी इन्द्रायण की जड़ का चूर्ण पान के पत्ते में रखकर खाने से सर्पदंश में लाभ मिलता है-

27- बच्चों के डिब्बा रोग(पसली चलना)में इसकी जड़ के 1 ग्राम चूर्ण में 250 मिलीग्राम सेंधानमक मिलाकर गर्म पानी के साथ दिन में तीन बार सेवन करने से लाभ मिलता है-

28- लाल इन्द्रायण के फल को पीसकर नारियल के तेल के साथ गर्म करके कान के अन्दर के जख्म पर लगाने से जख्म साफ होकर भर जाता है-

29- इन्द्रायण के फल के रस या जड़ की छाल को तिल के तेल में उबालकर तेल को मस्तक (माथे) पर लेप करने से मस्तक पीड़ा या बार-बार होने वाली मस्तक पीड़ा मिटती है-

30- इन्द्रायण के फलों का रस या जड़ की छाल के काढ़े के तेल को पकाकर, छानकर 20 मिलीलीटर सुबह-शाम उपयोग करने से आधाशीशी (आधे सिर का दर्द), सिर दर्द, पीनस (पुराना जुकाम), कान दर्द और अर्धांगशूल दूर हो जाते हैं-

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Upcharऔर प्रयोग-

28 दिसंबर 2016

एक्सरसाइज से कैलोरी बर्न करे

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क्या आप अपने घरेलू काम काज को करते हुए अपनी कैलोरी बर्न(Calories Burn)कर सकती है जी हाँ आज-कल पहले की अपेक्षा लोगो में मोटापे(Obesity)की शिकायत बढती जा रही है कभी सोचा है आज क्यों ये सब हो रहा है आइये एक नजर डाले-

एक्सरसाइज से कैलोरी बर्न करे

पहले हमारी माताए-बहने प्रात :काल ही उठ जाया करती थी और स्वयं ही घर के सारे काम-काज किया करती थी इसलिए वो स्वस्थ रहा करती थी वक्त बदलता गया बर्तन मांजना भी एक एक्सरसाइज(Exercise) हुआ करता था सारा वक्त दिन में घर के काम से उनकी पूर्णतया एक्सरसाइज(Exercise) हो जाती थी और कैलोरी बर्न(Calories Burn) होती थी तब मोटापा(Obesity) या कोलेस्ट्रोल(Cholesterol) जैसी बीमारी बहुत कम हुआ करती थी -

जैसे-जैसे घरेलू सुख साधन का आवागमन हुआ है बीमारियों का इजाफा भी हुआ है घर में वासिंग मशीन(Washing Machine) ने तो महिलाओं को और भी काम न करने की प्रवृति बढ़ा दी है सम्पन्न घरो की महिलाए तो बिना नौकरानी के रहना स्टेटस और सिम्बल के विपरीत समझती है और धीरे-धीरे -बची खुची थोड़ी बहुत एक्सरसाइज(Exercise) से भी दूर हो जाती है -

समझदार बने और आदत डालें-


आप अपना बिस्तर खुद साफ़ करे डस्टिंग(Dusting) करे और क्लीनिंग(Cleaning) करे-अपने कपडे अपने हाथो से धोये तो यकीन माने आपके घर के काम की भागीदारी से कई फायदे होगे एक फायदा ये भी है कि मेहमान के आ जाने पे आपको आलस नहीं होगा आपकी नौकरानी अवकाश पे जाने से आपको तकलीफ नहीं होगी और आपको की कैलोरी भी बर्न होगी तो आपको मोटापा या चर्बी(Fat) बढ़ने जैसी समस्या से सामना नहीं करना होगा घर में प्रशंसा भी मिलेगी-

यदि आप दिन-भर में 3000 कैलोरी कन्जूम करते है और सिर्फ 2000 ही बर्न कर पा रहे है तो समझ ले कि आप मोटा होने जा रहे है सिर्फ कैलोरी बर्न करके ही मोटापा रोका जा सकता है बाकी आप के पास अगर पैसा है तो बाजार में नीली-पीली गोली दे के डॉक्टर आपको सिर्फ उल्लू बना सकते है और आपके पैसे का वजन जरुर कम कर सकते है -कैलोरी बर्न(Calories Burn) करने के कई तरीके है जिनको करके आप अपनी कैलोरी को बर्न कर सकते है -

क्या कर सकते है-


1- आप महिला है तो घर में डांसिंग(Dancing) करना भी नियमित रूप से आपके लिए एक अच्छा उपाय है-डांसिंग आपकी अतिरिक्त कैलोरी की जमावट को रोकती है और आपकी बाड़ी को पतला करके एक्टिव(Active)भी करती है -

2- घर में अगर सीढियाँ है तो दिन में कई बार उपयोग करे आपके बार बार चढ़ने उतरने से शरीर का मेटा बोलिज्म(Metabolism)बढ़ता है इससे भी कैलोरी बर्न होती है और आपके पैर भी चुस्त-दुरुस्त रहते है माल में भी एस्केलेटर्स(Escalators) की जगह सीढियों का ही उपयोग करे रोज बीस-तीस मिनट पैदल चलने की आदत डाले-

3- एरोबिक्स(Aerobics) भी एक अच्छी कसरत है यदि संभव हो तो आधे घंटे अवस्य करे -

4- तैरने से भी कैलोरी बर्न होती है अगर आस-पास तैरने जैसा कोई माहौल है तो अवस्य तैरना आरम्भ करे-

5- ये जरुरी नहीं है कि एथेलेटिक्स में जाना है तभी दौड़े लेकिन नियमित सुबह दौड़ने से भी आपकी कैलोरी बर्न होगी और आपका स्टेमिना(Stamina) भी मजबूत होगा -

6- ग्रीन टी(Green tea)का प्रयोग अवस्य करे-ग्रीन टी भी कैलोरी बर्न करने का काम करती है आप दिन में तीन से चार कप ग्रीन टी पिए तो आप मोटे नहीं होगे और एक अंतिम बात सिर्फ पोस्ट पढने से कुछ नहीं होगा इस पे अमल में लाने से ही मोटापा कम होगा-

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Upcharऔर प्रयोग-

कमर की चौड़ाई मोटापे की निशानी होती है

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महिलाओं में मोटापा(Obesity)एक बीमारी कर रूप लेती जा रही है और खासकर शादी होने या बच्‍चे होने के बाद महिलाएं अपने फिटनस को लेकर लापरवाह हो जाती हैं जिससे वह आसानी से Obesity-मोटापे की शिकार होती चली जाती हैं-

कमर की चौड़ाई मोटापे की निशानी होती है


जब कमर की चौड़ाई(Waist Width)34 ईंच से अधिक होने लगे तो सावधान हो जाना चाहिए इससे अधिक कमर की चौड़ाई होना मोटापे(Obesity)की निशानी है यहां हम कुछ ऐसे घरेलू नुस्‍खे बता रहे हैं जिससे न केवल कमर की मोटाई कम की जा सकती है बल्कि उसे पतली आकर्षक और कमनीय बनाया जा सकता है-

कमर की चौड़ाई(Waist Width)कम करने के लिए क्या करे-


1- सबसे पहले आंवले व हल्‍दी को पीसकर चूर्ण बना लें और इस चूर्ण को नियमित रूप से छाछ के साथ लें कुछ दिन में आपके पेट का मोटापा घट जाएगा और कमर की चौड़ाई(Waist Width)भी कम हो जाएगी-

2- आप छोटी पीपल का चूर्ण बना लें इस चूर्ण को तीन ग्राम प्रतिदिन सुबह के समय छाछ के साथ लेने से निकला हुआ पेट का मोटापा(Obesity)घट जाता है और कमर की चौड़ाई कम जाती है-

3- मालती की जड़ को पीसकर उसे शहद में मिलाएं और उसे छाछ के साथ पीएं ये प्रसव के बाद बढ़ने वाले मोटापे(Obesity)में यह रामवाण की तरह काम करता है और कमर की चौड़ाई(Waist Width) कम हो जाती है मालती की जड़ आपको किसी भी पुराने आयुर्वेद दवा बेचने वाले पंसारी से प्राप्त हो जायेगी-

4- पपीता के मौसम में इसे नियमित खाएं और लंबे समय तक पपीता के सेवन से कमर की न केवल अतिरिक्‍त चर्बी कम होती है बल्कि वह बेहद आकर्षक हो जाता है-

5- आप किसी योग्‍य आयुर्वेद चिकित्‍सक की सलाह ले सकती है- 
Upcharऔर प्रयोग-

ब्लडप्रेशर प्राकर्तिक रूप से कैसे कम करें

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आज कल लोगों को कम उम्र में ही तनाव के चलते उच्‍च रक्‍तचाप यानी की हाई ब्‍लड प्रेशर(High blood pressure)की बीमारी होने लग गई है जहाँ रोगी के रक्त का दबाव 140/80 से अधिक हो जाता है वहीं रोगी का सिर चकराने लगता है आँखों के आगे अंधेरा छाने लगता है और रोगी घबराहट महसूस करता है-जब किसी के शरीर में रक्त-प्रवाह सामान्य से कम हो जाता है तो उसे निम्न रक्तचाप(Low blood pressure)कहते है नार्मल ब्लड प्रेशर 120/80 होता है थोड़ा बहुत ऊपर-नीचे होने से कोई फर्क नही पड़ता लेकिन यदि ऊपर 90 से कम हो जाए तो फिर उसे लो ब्लड प्रेशर यानि निम्न-रक्तचाप(Low-blood pressure)कहते हैं-

ब्लडप्रेशर प्राकर्तिक रूप से कैसे कम करें


ऐसे मरीज के हाथ-पैर ठंडे रहते हैं तथा हार्ट में मिस्ड बीट्स महसूस की जाती है इस तरह के मरीजों के चेकअप में ब्लड प्रेशर में काफी अंतर होता हैं अगर मरीज लेटा हो, बैठा हो और बाद में खड़ा हो तो उसके ब्लड प्रेशर(Blood pressure)में काफी बदलाव आ जाता है-

ब्लड प्रेशर(Blood pressure)बचाव के तरीके-


इससे बचाव के लिये कुछ प्रभावी तरीके भी हैं जिन्‍हें आजमाने से आप इस बीमारी से सदा के लिये छुटकारा पा सकते हैं जो लोग व्‍यायाम(Exercise)नहीं करते हैं उन्‍हें हाई ब्लड प्रेशर(High blood pressure)की बीमारी जल्‍दी होती है मोटे लोगों के दिल पर ज्‍यादा प्रेशर पड़ता है और हार्ट ब्‍लॉकेज(heart blockage)ज्‍यादा प्रतिशत में होता है-उच्च रक्तचाप का एक प्रमुख कारण होता है रक्त का गाढा होना है जिससे रक्त गाढा होने से उसका प्रवाह धीमा हो जाता है और इस कारण से धमनियों और शिराओं में दवाब बढ जाता है-

1- लहसुन(Garlic)ब्लड प्रेशर ठीक करने में बहुत मददगार घरेलू उपाय है यह रक्त का थक्का नहीं जमने देती है तथा धमनी की कठोरता में लाभदायक है रक्त में ज्यादा Cholesterol(कोलेस्ट्ररोल)होने की स्थिति का समाधान करती है इसलिए लहसुन का जादा सेवन भी सहायक होता है-

2- पांच तुलसी के पत्ते(Basil leaves)तथा दो नीम की पत्तियों को पीसकर 20 ग्राम पानी में घोलकर खाली पेट सुबह पिएं आपको 15 दिन में लाभ नजर आने लगेगा-हाई ब्लडप्रेशर(High blood pressure)के मरीजों के लिए पपीता भी बहुत लाभ करता है इसे प्रतिदिन खाली पेट चबा-चबाकर खाएं-

3- तरबूज के बीज की गिरी तथा खसखस अलग-अलग पीसकर बराबर मात्रा में मिलाकर रख लें और एक चम्मच मात्रा में प्रतिदिन खाली पेट पानी के साथ लें-

4- जब ब्लड प्रेशर जादा बढा हुआ हो तो आधा गिलास मामूली गर्म पानी(hot water)में काली मिर्च(Black pepper)पाउडर एक चम्मच घोलकर 2-2 घंटे के फ़ासले से पीते रहें ये ब्लड प्रेशर सही करने का बढिया उपचार है या फिर बढे हुए ब्लड प्रेशर को जल्दी कंट्रोल करने के लिये आधा गिलास पानी में आधा नींबू निचोड़कर 2-2 घंटे के अंतर से पीते रहें-

5- आप ब्राउन चावल(Brown Rice)उपयोग में लाए-इसमें नमक(Salt)कोलेस्टरोल(Cholesterol)और चर्बी(fat) नाम मात्र की होती है-यह उच्च रक्त चाप रोगी के लिये बहुत ही लाभदायक भोजन है-नमक ब्लड प्रेशर बढाने वाला प्रमुख कारक है इसलिए यह बात सबसे महत्‍वपूर्ण है कि हाई बी पी वालों को नमक का प्रयोग कम कर देना चाहिए-

6- प्याज और लहसुन की तरह अदरक(Ginger)भी रक्त-संचार में काफी फायदे मंद होता है-जादा कोलेस्ट्रोल धमनियों की दीवारों पर प्लेक यानी कि कैल्‍शियम युक्त मैल पैदा करता है जिससे रक्त के प्रवाह में रुकावट होता जाता है और नतीजा उच्च रक्तचाप(High Blood Pressure)के रूप में सामने आता है अदरक में बहुत हीं ताकतवर एंटीओक्सीडेट्स(Antiokseedets)होते हैं जो कि खराब  कोलेस्ट्रोल को नीचे लाने में काफी असरदार होते हैं-अदरक से आपके रक्तसंचार में भी सुधार होता है-धमनियों के आसपास की मांसपेशियों को भी आराम मिलता है जिससे कि उच्च रक्तचाप नीचे आ जाता है-

7- सुबह शाम रोजाना नंगे पैर हरी घास पर दस पंद्रह मिनट चलें इस प्रकार प्रतिदिन चलने से भी  ब्लड प्रेशर नार्मल हो जाता है-

8- जीरा-शक्कर-सौंफ(cumin-sugar-anise)इन तीनो को एक समान मात्रा में पावडर बना कर एक कांच के बर्तन में रख ले-इसे रोज सुबह-शाम खाने से पहले एक गिलास सादे पानी में एक चम्मच पावडर को घोलकर पिए कुछ दिन में ही आपका ब्लड-प्रेशर(Blood Pressure)सामान्य हो जाता है -

9- बाजार में बिकने वाला करेला(bitter gourd)और सहजन की फली(drumstick)भी उच्च-रक्त चाप रोगी के लिए भी लाभदायक है -

10- साधारण रूप से तीन ग्राम मेथीदाना पावडर सुबह-शाम पानी के साथ लें-इसे पंद्रह दिनों तक लेने से लाभ मालूम होता है-एक बडा चम्मच आंवले का रस और इतना ही शहद मिलाकर सुबह-शाम लेने से भी हाई ब्लड प्रेशर में लाभ होता है-

Upcharऔर प्रयोग-

27 दिसंबर 2016

Cigarettes-सिगरेट आप कब छोड़ेगे

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आज हम कुछ बात करते है सिगरेट छोड़ने की-वैसे तो सिगरेट(Cigarettes)की आदत को छोड़ना इतना आसान नही होता है लेकिन यदि आप मेरे लिखे कुछ प्वाइंट्स के आजमाएंगे तो यकीनन आप सिगरेट की आदत से छुटकारा पा जाएंगे-

Cigarettes-सिगरेट आप कब छोड़ेगे

सबसे पहले मै आपको कुछ बताना चाहूंगा-स्कूल और कालेज टाइम मे मैने भी स्मोकिंग के ढेरो रिकार्ड तोड़े थे हर सिगरेट(Cigarettes)बीड़ी और सिगार को ट्राई किया था या आप ये समझे कि ट्राई क्या-एक सिगरेट(Cigarettes)बुझती नही थी और दूसरी जलाने के लिए मन मचलने लगता था-ऐसा कोई ब्रांड नही था जो हमने ट्राई नही किया था-जाहिर है संगत भी वैसी थी-लेकिन आज अगर कोई बगल मे खड़ा होकर सिगरेट पीता है तो मुझे धुंए से भी दिक्कत होती है

तो आइए हम अपने अनुभव से कुछ प्वाइंट बताते है जिससे आप अपनी(अथवा अपने साथियों की)सिगरेट(Cigarettes)छुड़वा सकते है-हो सकता है आप हमारे कुछ अनुभवों से सीख ले सकें अन्यथा आप इन अनुभवों को दूसरे धूम्रपान करने वालों को बता सकते है-

क्या करें-


1- आप अपने परिवार की एक ग्रुप फोटो अपने पास जरुर रखें-जब भी आप सिगरेट पीजिए तो धुंए के आर-पार उस फोटो को देखिए-वैसे भी असली जिंदगी मे यही होता है सिगरेट आप पीते है और आपका पूरा परिवार पैसिव स्मोकिंग झेलता है धुंए के पार फोटो देखने से आपको लगेगा कि आप सिगरेट(Cigarettes)पी रहे है लेकिन धुंआ आपका परिवार झेल रहा है-

2- अब आप ही यह निश्चय करें कि आप सिगरेट छोड़ना चाहते है कारण चाहे कोई भी हो लेकिन बिना आपकी मर्जी के कोई भी आपसे सिगरेट नही छुड़वा सकता है ये बात आपके अंदर से ही आनी चाहिए तभी कुछ आगे बात बनेगी-

3- आप कभी भी जल्दबाजी या आवेश मे आकर सिगरेट छोड़ने की गलती नही करें-यदि आप तैश मे आकर सिगरेट छोड़ने की कसम खाते है तो यकीनन आपका दिमाग अगले ही पल कसम तोड़ने के बहाने तलाशने लगेगा-इसलिए सिगरेट छोड़ने का फैसला पूरे होशो हवाश बिना आवेग मे आकर करें-दॄढ निश्चय के बाद दूसरी सबसे जरुरी चीज जो आपको चाहिए होगी वो है आत्मसंयम-यदि आप अपने ऊपर कंट्रोल नही रख पाएंगे तो सारा किया धरा धुंए मे उड़ जाएगा-इसलिए आत्म संयम और आत्म नियंत्रण बहुत जरुरी है और हो सकता है शुरु- शुरु मे दिक्कत आएं-लेकिन आप कर सकते है-

4- आपके पास कम से कम एक किताब तो ऐसी जरुर होनी चाहिए जिसमे सिगरेट पीने के बुरे परिणामो के बारे मे लिखा हो और कोशिश करिएगा कि उस किताब मे कुछ चित्र भी हो-जब भी आपके पास खाली समय हो तो उस किताब के पन्ने जरुर पलटिएगा-

5- आप जितनी चाहे सिगरेट पीजिएगा लेकिन अपनी ऐश ट्रे को साफ मत करिएगा ताकि ये आपको याद दिलाती रहेगा कि आपने कितनी सिगरेट पी है फिर हफ़्ते के हफ़्ते(अथवा हर पंद्रह दिनो में) आप अपनी ऐश ट्रे मे बुझी सिगरेटों की गणना करिएगा और निश्चय करिएगा कि अगली गणना मे यह संख्या और कम हो जाए-यदि आप अलग अलग जगहों पर सिगरेट पीते है ध्यान रखिएगा आप बुझी सिगरेट की बट अपने साथ घर ले आएं और घर मे एक गिलास मे सारे बट डालकर रखें ताकि आपको यह पी हुई सिगरेट की याद दिलाता रहे-

अब जाने सिगरेट(Cigarettes)के बारे में-


अमूमन एक नजर मेँ देखने पर हमेँ सिगरेट कागज मेँ लिपटी हुई तम्बाकू से ज्यादा कुछ नहीँ लगेगा पर सिगरेट बनाने वाली कंपनिया इसके धुएं मेँ फ्लेवर देने के लिए क्या मिलाती हैँ ये आपको कभी नहीँ बताती है सिगरेट सुलगाने के बाद और भी ज्यादा खतरनाक उत्पाद बनते हैँ-

आप जाने सबकी लिस्ट इस प्रकार है-

एसीटिक एसिड (सिरका)
अमोनिया (टॉयलेट क्लीनर)
आर्सेनिक (जहर)
ब्यूटेन (एक तरह की ज्वलनशील गैस)
कैडमियम (बैटरी मेँ प्रयुक्त होने वाला तत्व)
कार्बन मोनो ऑक्साइड (कोयले के जलने पर बनने वाली गैस)
मीथेन (सीवर गैस)
निकोटीन (कैँसर कारक)

इसके अलावा कुछ मात्रा मेँ ये तत्व भी बनते हैँ-

हेक्सामाइन(Hexa Mine)
इन्सेक्टीसाइड
पेन्ट
टॉलूईन

अब आपने देखा समझा तो धूम्रपान त्यागिए क्योँकि एक सिगरेट पीने से आप इतना जहर अपने शरीर मेँ उतार रहे होते हैँ तो मित्रों आप कब सिगरेट छोड रहे है मेरे लिए नहीं सिर्फ अपने और अपने परिवार के लिए-

Upcharऔर प्रयोग-

25 दिसंबर 2016

गुलर आपके लिए वरदान से कम नहीं है

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गूलर(Ficus racemosa)लंबी आयु वाला वृक्ष है यह सम्पूर्ण भारत में पाया जाता है यह नदी−नालों के किनारे एवं दलदली स्थानों पर उगता है उत्तर प्रदेश के मैदानों में यह अपने आप ही उग आता है लेकिन शायद इतनी जानकारी नहीं होगी कि गूलर कितने गुणों से भरपूर है तो आज आपको इसके गुणों से अवगत कराते है कि ये आपके कितने काम आ सकती है और इसके क्या प्रयोग है-

गुलर आपके लिए वरदान से कम नहीं है

गूलर(Ficus racemosa)का एक परिचय जान लें-


इसके भालाकार पत्ते 10 से सत्रह सेमी लंबे होते हैं जो जनवरी से अप्रैल तक निकलते हैं इसकी छाल का रंग लाल-घूसर होता है तथा फल गोल और गुच्छों में लगते हैं इसके फल मार्च से जून तक आते हैं कच्चा फल छोटा हरा होता है पकने पर फल मीठे, मुलायम तथा छोटे−छोटे दानों से युक्त होता है इसका फल देखने में अंजीर के फल जैसा लगता है इसके तने से क्षीर(Milk)निकलता है-

गूलर का कच्चा फल कसैला एवं दाहनाशक है पका हुआ गूलर रुचिकारक,मीठा,शीतल,पित्तशामक, तृषाशामक, श्रमहर, कब्ज मिटाने वाला तथा पौष्टिक है इसकी जड़ में रक्तस्राव(Bleeding)रोकने तथा जलन शांत करने का गुण है गूलर के कच्चे फलों की सब्जी बनाई जाती है तथा पके फल खाए जाते हैं तथा  इसकी छाल का चूर्ण बनाकर या अन्य प्रकार से उपयोग किया जाता है-आपको चाहिए कि गूलर महत्व को समझे और इसके वृक्ष को काटने से रोके और आने वाली पीढ़ी को इस शौगात से अवगत कराये-

गूलर के प्रयोग-


1- गूलर के नियमित सेवन से शरीर में पित्त एवं कफ का संतुलन बना रहता है इसलिए पित्त एवं कफ विकार नहीं होते है साथ ही इससे उदरस्थ अग्नि एवं दाह भी शांत होते हैं पित्त रोगों में इसके पत्तों के चूर्ण का शहद के साथ सेवन भी फायदेमंद होता है-

2- गूलर की छाल ग्राही है रक्तस्राव को बंद करती है साथ ही यह मधुमेह में भी लाभप्रद है गूलर के कोमल ताजा पत्तों का रस शहद में मिलाकर पीने से भी मधुमेह में राहत मिलती है इससे पेशाब में शर्करा की मात्रा भी कम हो जाती है-

3- गूलर के तने का दूध बवासीर एवं दस्तों के लिए श्रेष्ठ दवा है खूनी बवासीर के रोगी को गूलर के ताजा पत्तों का रस पिलाना चाहिए इसके नियमित सेवन से त्वचा का रंग भी निखरने लगता है-

4- हाथ पैरों की त्वचा फटने या बिवाई फटने पर गूलर के तने के दूध का लेप करने से आराम मिलता है और पीड़ा से छुटकारा मिलता है-

5- गूलर से स्त्रियों की मासिक धर्म संबंधी अनियमितताएं भी दूर होती हैं स्त्रियों में मासिक धर्म के दौरान अधिक रक्तस्राव होने पर इसकी छाल के काढ़े का सेवन करना चाहिए- इससे अत्याधिक बहाव रुक जाता है ऐसा होने पर गूलर के पके हुए फलों के रस में खांड या शहद मिलाकर पीना भी लाभदायक होता है-

6- विभिन्न योनि विकारों में भी गूलर काफी फायदेमंद होता है योनि विकारों में योनि प्रक्षालन के लिए गूलर की छाल के काढ़े का प्रयोग करना बहुत फायदेमंद होता है-

7- मुंह के छाले हों तो गूलर के पत्तों या छाल का काढ़ा मुंह में भरकर कुछ देर रखना चाहिए इससे फायदा होता है इससे दांत हिलने तथा मसूढ़ों से खून आने जैसी व्याधियों का निदान भी हो जाता है यह क्रिया लगभग दो सप्ताह तक प्रतिदिन नियमित रूप से करें-

8- आग से या अन्य किसी प्रकार से जल जाने पर प्रभावित स्थान पर गूलर की छाल को लेप करने से जलन शांत हो जाती है इससे खून का बहना भी बंद हो जाता है- पके हुए गूलर के शरबत में शक्कर, खांड या शहद मिलाकर सेवन करने से गर्मियों में पैदा होने वाली जलन तथा तृषा शांत होती है-

9- नेत्र विकारों में जैसे आंखें लाल होना-आंखों में पानी आना- जलन होना आदि के उपचार में भी गूलर उपयोगी है इसके लिए गूलर के पत्तों का काढ़ा बनाकर उसे साफ और महीन कपड़े से छान लें तथा ठंडा होने पर इसकी दो-दो बूंद दिन में तीन बार आंखों में डालें- इससे नेत्र ज्योति भी बढ़ती है-

10- नकसीर फूटती हो तो ताजा एवं पके हुए गूलर के लगभग 25 मिली लीटर रस में गुड़ या शहद मिलाकर सेवन करने या नकसीर फूटना बंद हो जाती है-

11- धातुदुर्बलता के लिए 1 बताशे में 10 बूंद गूलर का दूध डालकर सुबह-शाम सेवन करने और 1 चम्मच की मात्रा में गूलर के फलों का चूर्ण रात में सोने से पहले लेने से धातु दुर्बलता दूर हो जाती है इस प्रकार से इसका उपयोग करने से शीघ्रपतन रोग भी ठीक हो जाता है-

12- मर्दाना शक्तिवर्द्धक के लिए एक छुहारे की गुठली निकालकर उसमें गूलर के दूध की 25 बूंद भरकर सुबह रोजाना खाये इससे वीर्य में शुक्राणु बढ़ते हैं तथा संतानोत्पत्ति में शुक्राणुओं की कमी का दोष भी दूर हो जाता है-

13- एक चम्मच गूलर के दूध में दो बताशे को पीसकर मिला लें और रोजाना सुबह-शाम इसे खाकर उसके ऊपर से गर्म दूध पीएं इससे मर्दाना कमजोरी दूर होती है-

14- पका हुआ गूलर सुखाकर पीसकर चूर्ण बना लें तथा इस चूर्ण में इसी के बराबर की मात्रा में मिश्री मिलाकर किसी बोतल में भर कर रख दें- इस चूर्ण में से 2 चम्मच की मात्रा गर्म दूध के साथ सेवन करने से मर्दाना शक्ति बढ़ जाती है दो-दो घंटे के अन्तराल पर गूलर का दूध या गूलर का यह चूर्ण सेवन करने से दम्पत्ति वैवाहिक सुख को भोगते हुए स्वस्थ संतान को जन्म देते हैं-

15- बाजीकारक(काम उत्तेजना) के लिए 4 से 6 ग्राम गूलर के फल का चूर्ण और बिदारी कन्द का चूर्ण बराबर मात्रा में मिलाकर मिश्री और घी मिले हुए दूध के साथ सुबह-शाम सेवन करने से पौरुष शक्ति की वृद्धि होती है व बाजीकरण की शक्ति बढ़ जाती है यदि इस चूर्ण का उपयोग इस प्रकार से स्त्रियां करें तो उनके सारे रोग ठीक हो जाएंगे-

16- गर्मी के मौसम में गूलर के पके फलों का शर्बत बनाकर पीने से मन प्रसन्न होता है और शरीर में शक्ति की वृद्धि होती है तथा कई प्रकार के रोग जैसे- कब्ज-खांसी और दमा आदि ठीक हो जाते हैं-

17- उपदंश(फिरंग)के लिए 40 ग्राम गूलर की छाल को एक लीटर पानी में उबालकर काढ़ा बना लें और इसमें मिश्री मिलाकर पीने से उपदंश की बीमारी ठीक हो जाती है-

18- शरीर को शक्तिशाली बनाने के लिए लगभग 100 ग्राम की मात्रा में गूलर के कच्चे फलों का चूर्ण बनाकर इसमें 100 ग्राम मिश्री मिलाकर रख दें- अब इस चूर्ण में से लगभग 10 ग्राम की मात्रा में रोजाना दूध के साथ लेने से शरीर को भरपूर ताकत मिलती है-

19- प्रदर के लिए गूलर के फूलों के चूर्ण को छानकर उसमें शहद एव मिश्री मिलाकर गोली बना लें रोजाना एक गोली का सेवन करने से 7 दिन में प्रदर रोग से छुटकार मिल जाता है-

20- गूलर के पके फल को छिलके सहित खाकर ऊपर से ताजे पानी पीयें इससे श्वेत प्रदर रोग ठीक हो जाता है-गूलर के फलों के रस में शहद मिलाकर सेवन करने से प्रदर रोग में आराम मिलता है-रक्तप्रदर के लिए गूलर की छाल 5 से 10 ग्राम की मात्रा में या फल 2 से 4 की मात्रा में सुबह-शाम चीनी मिले दूध के साथ सेवन करने से अधिक लाभ मिलता है तथा रक्तप्रदर रोग ठीक हो जाता है-

21- 20 ग्राम गूलर की ताजी छाल को 250 मिलीलीटर पानी में उबालें जब यह 50 मिलीलीटर की मात्रा में बच जाए तो इसमें 25 ग्राम मिश्री और 2 ग्राम सफेद जीरे का चूर्ण मिलाकर सेवन करें इससे रक्तप्रदर रोग में लाभ मिलता है-

22- पके गूलर के फलों को सुखाकर इसे कूटे और पीसकर छानकर चूर्ण बना लें- फिर इसमें बराबर मात्रा में मिश्री मिलाकर किसी ढक्कनदार बर्तन में भर कर रख दें तथा इसमें से 6 ग्राम की मात्रा में रोजाना सुबह-शाम दूध या पानी के साथ सेवन करने से रक्तप्रदर ठीक हो जाता है-

23- पके गूलर के फल को लेकर उसके बीज को निकाल कर फेंक दें जब उसके फल शेष रह जायें तो उसका रस निकाल कर शहद के साथ सेवन करने से रक्त प्रदर में लाभ मिलता है-रोगी इसके सब्जी का सेवन भी कर सकते हैं-

24- एक चम्मच गूलर के फल का रस में बराबर मात्रा में मिश्री मिलाकर सुबह-शाम नियमित रूप से सेवन करने से कुछ ही हफ्तों में न केवल रक्त प्रदर ठीक होता है बल्कि मासिकधर्म में खून अधिक आने की तकलीफ भी दूर होती है-

25- महिलाओ के श्वेत प्रदर के लिए एक किलो कच्चे गूलर लेकर इसके 3 भाग कर लें अब इसमें से कच्चे गूलर को एक भाग उबाल लें और इनकों पीसकर एक चम्मच सरसों के तेल में फ्राई कर लें तथा इसकी रोटी बना लें- रात को सोते समय रोटी को नाभि के ऊपर रखकर कपड़ा बांध लें-इस प्रकार बचे शेष 2 भागों से इसी प्रकार की क्रिया 2 दिनों तक करें इससे श्वेत प्रदर रोग की अवस्था में आराम मिलता है-

26- गर्भावस्था में खून का बहना और गर्भपात होने के लक्षण दिखाई दें तो तुरन्त ही गूलर की छाल 5 से 10 ग्राम की मात्रा में अथवा 2 से 4 गूलर के फल को पीसकर इसमें चीनी मिलाकर दूध के साथ पीएं-जब तक रोग के लक्षण दूर न हो तब तक इसका प्रयोग 4 से 6 घंटे पर उपयोग में लें-

27- गूलर की जड़ अथवा जड़ की छाल का काढ़ा बनाकर गर्भवती स्त्री को पिलाने से गर्भस्राव अथवा गर्भपात होना बंद हो जाता है-

28- भगन्दर के लिए गूलर के दूध में रूई का फोहा भिगोंकर इसे नासूर और भगन्दर के ऊपर रखें और इसे प्रतिदिन बदलते रहने से नासूर और भगन्दर ठीक हो जाता है-

29- खूनी बवासीर के लिए गूलर के पत्तों या फलों के दूध की 10 से 20 बूंदे को पानी में मिलाकर रोगी को पिलाने से खूनी बवासीर और रक्तविकार दूर हो जाते हैं-गूलर के दूध का लेप मस्सों पर भी लगाना लाभकारी है-

30- 10 से 15 ग्राम गूलर के कोमल पत्तों को बारीक पीसकर चूर्ण बना लें फिर 250 ग्राम गाय के दूध की दही में थोड़ा सा सेंधानमक तथा इस चूर्ण को मिलाकर सुबह-शाम सेवन करने से खूनी बवासीर के रोग में लाभ मिलता है-

31- आंव(पेचिश)के लिए 5 से 10 ग्राम गूलर की जड़ का रस सुबह-शाम चीनी मिले दूध के साथ सेवन करने से आमातिसार ठीक हो जाता है-बताशे में गूलर के दूध की 4-5 बूंदे डालकर रोगी को खिलाने से आमातिसार(आंव) ठीक हो जाता है-गूलर के पके फल खायें इससे पेचिश रोग ठीक हो जाता है-गूलर को गर्म जल में उबालकर छान लें और इसे पीसकर रोटी बना लें फिर इसे खाएं इससे पेचिश में लाभ होता है -

32- दस्त और ग्रहणी के रोग में 3 ग्राम गूलर के पत्तों का चूर्ण और 2 दाने कालीमिर्च के थोड़े से चावल के पानी के साथ बारीक पीसकर, उसमें कालानमक और छाछ मिलाकर फिर इसे छान लें और इसे सुबह-शाम सेवन करें इससे लाभ मिलेगा- गूलर की 10 ग्राम पत्तियां को बारीक पीसकर 50 मिलीलीटर पानी में डालकर रोगी को पिलाने से सभी प्रकार के दस्त समाप्त हो जाते हैं-

33- गूलर के दूध की 5-6 बूंदे चीनी के साथ बच्चे को देने से बच्चों के आंव ठीक हो जाते हैं-

34- विसूचिका(हैजा)के रोगी को गूलर का रस पिलाने से रोगी को आराम मिलता है-

35- रक्तपित्त(खूनी पित्त) के लिए पके हुए हुए गूलर, गुड़ या शहद के साथ खाना चाहिए अथवा गूलर की जड़ को घिसकर चीनी के साथ खाने से लाभ मिलेगा और रक्तपित्त दोष दूर हो जाएगा-हर प्रकार के रक्तपित्त में गूलर की छाल 5 ग्राम से 10 ग्राम तथा उसका फल 2 से 4 ग्राम तथा गूलर का दूध 10 से 20 मिलीलीटर की मात्रा के रूप में सेवन करने से लाभ मिलता है-

36- फोड़े पर गूलर का दूध लगाकर उस पर पतला कागज चिपकाने से फोड़ा जल्दी ठीक हो जाता है-शरीर के अंगों में घाव होने पर गूलर की छाल से घाव को धोएं इससे घाव जल्दी ही भर जाते हैं-

37- गूलर के पत्तों को छांया में सूखाकर इसे पीसकर बारीक चूर्ण बना लें इसके बाद घाव को साफ करकें इसके ऊपर इस चूर्ण को छिड़के तथा इस चूर्ण में से 5-5 ग्राम की मात्रा सुबह तथा शाम को पानी के साथ सेवन करें इससे लाभ मिलेगा-

38- गूलर के दूध में बावची को भिगोंकर इसे पीस लें और 1-2 चम्मच की मात्रा में रोजाना इससे घाव पर लेप करें इससे घाव जल्दी ही ठीक हो जाते हैं-

39- शीतला(चेचक)के लिए गूलर के पत्तों पर उठे हुए कांटों को गाय के ताजे दूध में पीसकर इसमें थोड़ी सी चीनी मिलाकर चेचक से पीड़ित रोगी को पिलाये इससे उसका यह रोग ठीक हो जाएगा-

40- शरीर के किसी भी अंग पर गांठ होने की अवस्था में गूलर का दूध उस अंग पर लगाने से लाभ मिलता है-

41- एक चम्मच गूलर के कच्चे फलों के चूर्ण को 2 चम्मच शहद और दूध के साथ सेवन करने से पेशाब का अधिक मात्रा में आने का रोग दूर हो जाता है-

42- पेशाब में खून आने पर गूलर की छाल 5 ग्राम से 10 ग्राम या इसके फल 2 से 4 लेकर पीस लें और इसमें चीनी मिलाकर दूध के साथ खायें इससे यह रोग पूरी तरह से ठीक हो जाता है-

43- प्रतिदिन सुबह गूलर के 2-2 पके फल रोगी को सेवन करने से मूत्रकच्छ (पेशाब की जलन) में लाभ मिलता है

44- गूलर के 8-10 बूंद को 2 बताशों में भरकर रोजाना सेवन करने से मूत्ररोग(पेशाब के रोग) तथा पेशाब करने के समय में होने वाले कष्ट तथा जलन दूर हो जाती है-

45- मधुमेह के लिए एक चम्मच गूलर के फलों के चूर्ण को एक कप पानी के साथ दोनों समय भोजन के बाद नियमित रूप से सेवन करने से पेशाब में शर्करा आना बंद हो जाता है इसके साथ ही गूलर के कच्चे फलों की सब्जी नियमित रूप से खाते रहना अधिक लाभकारी होता है मधुमेह रोग ठीक हो जाने के बाद इसका सेवन करना बंद कर दें-

46- दांतों की मजबूती के लिए गूलर की छाल के काढे़ से गरारे करते रहने से दांत और मसूड़ों के सारे रोग दूर होकर दांत मजबूत होते हैं-

47- गूलर के पत्तों पर उठे हुए कांटों को पीसकर इसे मीठे या दही मिला दें और इसमें चीनी मिलाकर रोजाना एक  बार सेवन करें इससे कंठमाला के रोग से मुक्ति मिलती है-

48- खांसी के लिए रोगी को बहुत तेज खांसी आती हो तो गूलर का दूध रोगी के मुंह के तालू पर रगड़ने से आराम मिलता है-

49- पके गूलर में चीनी भरकर घी में तलें, इसके बाद इस पर काली मिर्च तथा इलायची के दानों का आधा-आधा ग्राम चूर्ण छिड़कर प्रतिदिन सुबह के समय में सेवन करें तथा इसके बाद बैंगन का रस मुंह पर लगाएं इससे नाक से खून गिरना बंद हो जाता है-

50- गूलर का पेड़, शाल पेड़, अर्जुन पेड़, और कुड़े के पड़े की पेड़ की छाल को बराबर मात्रा में लेकर पानी के साथ पीसकर चटनी बना लें अब इन सब चीजों का काढ़ा भी बनाकर रख लें तथा इसके बाद इस चटनी तथा इससे 4 गुना ज्यादा घी और घी से 4 गुना ज्यादा काढ़े को कढ़ाही में डालकर पकाएं अब पकने पर जब घी के बराबर मात्रा रह तो इसे उतार कर छान लें-अगर नाक पक गई हो तो इस घी को नाक पर लगाने से बहुत जल्दी आराम मिलता है-

51- नाक से, मुंह से, योनि से, गुदा से होने वाले रक्तस्राव में गूलर के दूध की 15 बूंदे 1 चम्मच पानी के साथ दिन में 3 बार सेवन करने से लाभ मिलता है-

52- गूलर का दूध कुछ बूंदों की मात्रा में मां या गाय-भैंस के दूध के साथ मिलाकर नियमित रूप से कुछ महीने तक रोजाना एक बार बच्चों को पिलाने से शरीर हृष्ट-पुष्ट और सुडौल बनाता है लेकिन गूलर के दूध बच्चों उम्र के अनुसार ही उपयोग में लेना चाहिए-

53- पांच बूंद गूलर के दूध को एक बताशे पर डालकर इसका सेवन बच्चों को कराएं इससे सूखा रोग(रिकेटस) ठीक हो जाता है-

54- बच्चों के गाल की सूजन को दूर करने के लिए उनके गाल पर गूलर के दूध का लेप करें इससे लाभ मिलेगा-

55- जहां पर बिच्छू ने काटा हो उस स्थान पर गूलर के अंकुरों को पीसकर लगाए इससे जहर चढ़ता नहीं है और दर्द से आराम मिलता है-

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Upcharऔर प्रयोग-

23 दिसंबर 2016

क्या आप सुपारी के गुण जानते है

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बहुत ही साधारण सी चीज है सुपारी(Betel Nut)जो आमतौर पर सभी लोग जानते है और ये आसानी से बाजार में उपलब्ध भी है पर क्या आपको आज तक सुपारी के कुछ गुणों की जानकारी थी जिनसे आप आजतक अनजान है तो आइये आपको सुपाड़ी(Betel Nut)के कुछ ऐसे गुणों से भी अवगत कराते है जिन्हें जानकार आप इसे अवश्य ही प्रयोग करना चाहेगें-

क्या आप सुपारी के गुण जानते है


पान में सुपारी का स्वाद सभी को लुभाता है भारतीय लोग सालों से सुपारी का उपयोग पान के एक मसाले के रूप में और माउथ फ्रेशनर के रूप में करते आ रहे हैं सामाजिक,सांस्कृतिक अवसरों पर इसकी एक खास जगह रही है सुपारी आयुर्वेद में कई पेट के रोगों जैसे गैस, सूजन, कब्ज, पेट के कीड़े आदि में बहुत उपयोगी है सुपारी में कार्बोहाइड्रेट,फैट और प्रोटीन के साथ ही मिनरल्स भी मौजूद होते हैं तथा साथ ही, टैनिन, गैलिक एसिड और लिगनिन भी पाए जाते हैं सुपारी की इसी उपयोगिता को ध्यान में रखते हुए चलिए आज जानते हैं सुपारी का उपयोग बीमारियों के उपचार में किस तरह किया जा सकता है-

दांतों को चमकाने(Shineing Teeth)के लिए-


आप तीन सुपारी लेकर उसे भून लें तथा फिर भूनी हुई सुपारियों को पीसकर आप पाउडर बना लें अब इस पाउडर में नींबू रस की करीब पांच बूंदें डाल लीजिए और करीब एक ग्राम काला नमक भी मिला लें आप रोज दिन में दो बार इस मिश्रण से अपने दांतों की सफाई करें आप देखेगें कि आपके दांत एक सप्ताह में चमकने लगेंगे-


क्या आप जानते है कि सुपारी में एंटी-बैक्टीरियल(Anti-Bacterial)गुण होते हैं इसके कारण इसका इस्तेमाल दांतों की सड़न को रोकने के लिए मंजन के रूप में किया जाता है दांतों में कीड़ा लगने पर सुपारी को जलाकर उसका पाउडर बना लें और इससे रोजाना मंजन करें तो आपको अवश्य फायदा होगा-


स्किजोफ्रेनिया(Schizophrenia)एक तरह की दिमागी पागलपन की बीमारी है इस बीमारी के लक्षणों को सुपारी के सेवन से कम किया जा सकता है एक ताजा रिसर्च के अनुसार इस बीमारी में जो रोगी सुपारी का सेवन करते हैं उनके लक्षणों में काफी सुधार होता है-


डायबिटीज(Diabetes)के कारण कई लोगों को बार-बार मुंह सूखने की समस्या होती है यदि आपके साथ भी यह समस्या है तो जब भी मुंह सूखे एक सुपारी का टुकड़ा मुंह में रखें ऐसे लोगों को इस स्थिति से बचने के लिए सुपारी बहुत मदद करती हैं क्योंकि इसे चबाने से बड़ी मात्रा में सलाइवा निकलती है-


क्या आप जानते है कि सुपारी खाने से हाई ब्लडप्रेशर नियंत्रित रहता है ये भी एक रिसर्च में ये बात सामने आई है कि सुपारी में मौजूद टैनिन नामक तत्व एंजियोटेनसिन हाई ब्लडप्रेशर के कंट्रोल में उपयोगी हैं-




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विद्यार्थी लोग दिमागी ताकत प्राप्त करे

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मुझसे अक्सर बहुत से विद्यार्थी(Student)पूछते है कि आप हमें दिमागी ताकत(Strength of mind)और तरावट के लिए कोई फार्मूला बताये तो आज एक पौष्टिक(Nutritious)योग आपको बता रहे है जिसके खाने से आपको दिमागी तरावट और मस्तिस्क को ताकत भी मिलेगी-

विद्यार्थी लोग दिमागी ताकत प्राप्त करे



नुस्खा इस प्रकार है-


सामग्री-

बबूल की गोंद- 500 ग्राम
घी - 100 ग्राम
मुनक्का- 250 ग्राम
बादाम - 100 ग्राम
मिश्री - 250 ग्राम 

बनाने की विधि-

सबसे पहले 500 ग्राम बबूल की गोंद(Acacia gum)को आप शुद्ध घी में तलें तथा फूल जाने पर निकाल के बारीक़ पीस लें तथा अब इसमें 250 ग्राम पिसी मिश्री मिला लें और 250 ग्राम बीज निकाला हुआ मुनक्का और 100 ग्राम बादाम (Almond)की गिरी दोनों को कूट-पीसकर भी इसमें मिला लें -

मात्रा-

आप इसे सुबह नाश्ते के रूप में इसे दो चम्मच अर्थात लगभग 20-25 ग्राम खूब चबा-चबाकर खायें तथा फिर एक गिलास मीठा दूध घूँट –घूँट करके पी लें-अच्छी तरह खुलकर भूख लगने पर ही भोजन करें-ये प्रयोग दिन में एक बार नियमित कुछ दिन करे-आपकी याददाश्त(Memory)और मस्तिष्क का विकास तीव्र होने लगेगा -

Upcharऔर प्रयोग-

21 दिसंबर 2016

पलाश के क्या-क्या फायदे हैं

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प्रकर्ति ने हमें सब कुछ दिया है मगर जब तक आपको किसी भी वनस्पति की जानकारी नहीं है तब तक वह वनस्पति आपके लिए व्यर्थ ही है लेकिन जब आप उसके सही गुणों को जान और पहचान जाते है तब आप कह उठते है अरे ये तो हमें पहले नहीं पता था इसी में एक नाम है "पलाश"

पलाश के क्या-क्या फायदे हैं

भारत में इसे विभिन्न नामो से जाना जाता है-इसे ढाक-टेशू-पलाश-गुजराती में खाकरा-तमिल में पुगु-कतुमुसक-किन्जुल आदि नामों से पुकारते है-

पलाश(Bastard Teak)के औषधीय गुण-


1- दूध के साथ प्रतिदिन एक Palash(पलाश)पुष्प पीसकर दूध में मिला के गर्भवती माता को पिलायें तो इससे बल-वीर्यवान संतान की प्राप्ति होती है-

2- यदि किसी कारण से आपका अंडकोष बढ़ गया हो तो पलाश(Palash)की छाल का 6  ग्राम चूर्ण पानी के साथ निगल लीजिये-

3- किसी भी महिला को गर्भ धारण करते ही अगर गाय के दूध में Palash के कोमल पत्ते पीस कर पिलाते रहिये तो शक्तिशाली और पहलवान बालक पैदा होगा-

4- इसी पलाश के बीजों(Palash seeds)को मात्र लेप करने से महिलायें अनचाहे गर्भ से बच सकती हैं-

5- यदि पेशाब में जलन हो रही हो या पेशाब रुक रुक कर हो रहा हो तो पलाश के फूलों(Palash flowers)का एक चम्मच रस निचोड़ कर दिन में बस 3 बार पी लीजिये -

6- बवासीर के मरीजों को पलाश के पत्तों(Palash leaves)का साग ताजे दही के साथ खाना चाहिए लेकिन साग में घी ज्यादा होना चाहिए-

7- बुखार में शरीर बहुत तेज दाहक रहा हो तो पलाश के  पत्तों का रस लगा लीजिये शरीर पर 15 मिनट में सारी जलन ख़त्म हो जाती है -

8- जो घाव भर ही न रहा हो उस पर पलाश की गोंद  का बारीक चूर्ण छिड़क लीजिये फिर देखिये-

9- फीलपांव या हाथीपाँव में पलाश की जड़ के रस में सरसों का तेल मिला कर रख लीजिये बराबर मात्रा में और फिर सुबह शाम 2-2 चम्मच पीजिये-

10- यदि आपको नेत्रों की ज्योति बढानी है तो पलाश के फूलों का रस निकाल कर उसमें शहद मिला लीजिये और आँखों में काजल की तरह लगाकर सोया कीजिए-अगर रात में दिखाई न देता हो तो पलाश की जड़ का अर्क आँखों में लगाइए-

11- लोगों में होने वाली नपुंसकता की चिकित्सा के लिए भी इसके बीज काम आते हैं अन्य दवाओं में  मिला के इसका प्रयोग होता है -

12- शरीर में अन्दर कहीं गांठ उभर आयी हो तो इसके पत्तों को  गर्म करके बांधिए या उनकी चटनी पीस कर गरम करके उस स्थान पर लेप कीजिए-

13- इसके बीजों को नीबू के रस में पीस कर लगाने से दाद खाज खुजली में आराम मिलता है-

14- इसी पलाश से एक ऐसा रसायन भी बनाया जाता है जिसके अगर खाया जाए तो बुढापा और रोग आस-पास नहीं आ सकते-

15- इसके पत्तों से बनी पत्तलों पर भोजन करने से चाँदी के पात्र में किये गये भोजन के समान लाभ प्राप्त होते हैं पहले लोग शादी ब्याह और अन्य संस्कार में पत्तल और दोने पलाश(ढाक)का ही करते थे और आज की अपेक्षा जादा स्वस्थ थे -

16- इसका गोंद हड्डियों को मजबूत बनाता है पलाश का 1 से 3 ग्राम गोंद मिश्रीयुक्त दूध अथवा आँवले के रस के साथ लेने से बल एवं वीर्य की वृद्धि होती है तथा अस्थियाँ मजबूत बनती हैं और शरीर पुष्ट होता है-

17- वसंत ऋतु में पलाश लाल फूलों से लद जाता है इन फूलों को पानी में उबालकर केसरी रंग बनायें- यह रंग पानी में मिलाकर स्नान करने से आने वाली ग्रीष्म ऋतु की तपन से रक्षा होती है तथा कई प्रकार के चर्मरोग भी दूर होते हैं-

18- महिलाओं के मासिक धर्म में अथवा पेशाब में रूकावट हो तो फूलों को उबालकर पुल्टिस बना के पेड़ू पर बाँधें-अण्डकोषों की सूजन भी इस पुल्टिस से ठीक होती है-

19- रतौंधी की प्रारम्भिक अवस्था में फूलों का रस आँखों में डालने से लाभ होता है-

20- आँख आने पर(Conjunctivitis)फूलों के रस में शुद्ध शहद मिलाकर आँखों में आँजें-

21- पलाश के बीजों में पैलासोनिन नामक तत्त्व पाया जाता है जो एक उत्तम कृमिनाशक है तीन से छ ग्राम बीज का चूर्ण सुबह दूध के साथ तीन दिन तक दें-चौथे दिन सुबह 10 से 15 मि.ली. अरण्डी का तेल गर्म दूध में मिलाकर पिलायें इससे पेट के कृमि निकल जायेंगे-

22- पलाश बीज-चूर्ण को नींबू के रस में मिलाकर दाद पर लगाने से वह मिट जाती है-

23- पलाश के बीज+आक(मदार)के दूध में पीसकर बिच्छूदंश की जगह पर लगाने से दर्द मिट जाता है-

24- नाक-मल-मूत्रमार्ग अथवा योनि द्वारा रक्तस्राव होता हो तो छाल का काढ़ा (50 मि.ली.) बनाकर ठंडा होने पर मिश्री मिला के पिलायें-इसे इन्ही गुणों के कारण ब्रह्मवृक्ष कहना उचित है-

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