This website about Treatment and use for General Problems and Beauty Tips ,Sexual Related Problems and his solution for Male and Females. Home treatment,Ayurveda treatment ,Homeopathic Remedies. Ayurveda treatment tips in Hindi and also you can read about health Related problems and treatment for male and female

30 जनवरी 2016

ग्वारपाठा कई रोगों की दवा है

By With कोई टिप्पणी नहीं:
इसके कई प्रचलित नाम है जैसे-घीकुवार-ग्वार पाठा - घृतकुमारी- रससार-एलुआ- मुसब्वर-एलोवेरा इसका अग्रेजी नाम है ग्वारपाठा(Aloe vera) का पौधा बिना तने का या बहुत ही छोटे तने का एक गूदेदार और रसीला पौधा होता है जिसकी लम्बाई 60-100 सेंटीमीटर तक होती है इसका प्रयोग हमारे किस-किस काम आता है इस पोस्ट में हम आपको बताने का प्रयास कर रहे है जिससे आपको जानकारी के साथ लाभ हो -



एलोवेरा की पत्तियां भालाकार, मोटी और मांसल होती हैं जिनका रंग, हरा, हरा-स्लेटी होने के साथ कुछ किस्मों मे पत्ती के ऊपरी और निचली सतह पर सफेद धब्बे होते हैं तथा पत्ती के किनारों पर की सफेद छोटे दाँतों की एक पंक्ति होती है गर्मी के मौसम में पीले रंग के फूल उत्पन्न होते हैं-




घृत कुमारी(Aloe vera) का स्वाद बहुत ही कड़वा होता है इसके जैल का प्रयोग व्यावसायिक रूप में उपलब्ध दही-पेय पदार्थों और कुछ मिठाइयों मे एक घटक के रूप में किया जाता है-

औषधीय गुण एवं उपयोग(Medicinal properties and uses)-

बालो के लिए उपचार-

1- बालों की खूबसूरती एलोवेरा से बढ़ाए -एलोवेरा के फायदे बहुत हैं यह ना सिर्फ बालों को खूबसूरत और चमकदार बनाता है बल्कि उन्‍हें जड़ से मजबूत बनाता है इससे बालों का टूटना कम होता है बालों को खूबसूरत बनाने के लिए एलोवेरा का इस्तेमाल काफी लाभप्रद रहता है यह बालों से जुड़ी कई तकलीफों से काफी राहत दिलाता है तथा तैलीय बालों की समस्याओं को दूर करने में एलोवेरा जेल बहुत कारगर है बालों और स्‍कैल्‍प में तेल की अतिरिक्‍त मात्रा को सामान्य कर बालों की शक्ति को भी बढ़ाने में एलोवेरा जेल का कोई जवाब नहीं है -

2- बालों के लिए एलोवेरा का इस्तेमाल खूबसूरत बालों की यदि आप ख्वाहिश रखती है तो इसके लिए आपको कुछ खास तत्वों का भी इस्तेमाल करना होगा जिससे आप बालों को खूबसूरत बना सकें ऐसे में आप आवला, शिकाकाई या फिर एलोवेरा का इस्तेमाल कर सकती हैं इन तीनों में से किसी एक के प्रयोग से आप अपने बालों को चमकदार और खूबसूरत बना सकती हैं एलोवेरा के फायदे बहुत हैं यह ना सिर्फ आपके बालों को खूबसूरत और चमकदार बनाता है बल्कि बालों की जड़ों को मजबूत करता है और बालों में जान डालने के लिए भी कारगर है बालों को खूबसूरत बनाने के लिए इधर-उधर के उपाय छोड़ आपको एलोवेरा का इस्तेमाल करना ही सबसे बढि़या रहेगा और इसके इस्तेमाल से बालों संबंधित समस्याओं से भी निजात पाई जा सकती है-

3- बालों संबंधी जितनी भी समस्याएं हैं एलोवेरा के प्रभाव से दूर हो जाती हैं जैसे- बालों का गिरना, रूखे बाल, बालों में डेंड्रफ इत्यादि समस्याएं- एलोवेरा जेल को सिर्फ आधा घंटा लगाने के बाद आप उनको धो सकते हैं- ऐसा आप सिर्फ महीने में दो बार भी करते हें तो आपको इसके परिणाम कुछ ही महीनों में दिखाई देने लगेंगे- ऑयली बालों की समस्याओं को सुलझाने के लिए भी एलोवेरा जेल बहुत कारगर है। बालों और स्कॉल्प में ऑयल की अधिक मात्रा को सामान्य कर बालों की शक्ति को भी बढ़ाता है -

4- एलोवेरा से गंजेपन को भी दूर किया जा सकता है एलोवेरा को स्‍कैल्‍प पर शैंपू की तरह इस्‍तेमाल किया जा सकता है। इससे बाल मजबूत तो होते ही हैं साथ ही रूसी की समस्‍या भी दूर होती है। केश संबंधी समस्‍याओं को एलोवेरा के प्रयोग से दूर किया जा सकता है। इससे बालों का गिरना, रूखे बाल, बालों में डेंड्रफ इत्यादि समस्याओं को दूर किया जा सकता है। एलोवेरा जेल को सिर्फ आधा घंटा लगाने के बाद ही सिर धोया जा सकता है। अगर महीने में सिर्फ दो बार इसे सिर पर लगाया जाए तो कुछ ही महीनों में आपको इसके सकारात्‍मक प्रभाव नजर आने लगेंगे-

5- एलोवेरा पूरी तरह प्राकृतिक है इसके इस्तेमाल का कोई दुष्‍परिणाम नहीं होता है बाजार में एलोवेरा युक्त कई उत्पाद उपलब्‍ध हैं- इन उत्पादों का उपयोग कर आप अपने बालों को खूबसूरत और आकर्षक बना सकते हैं बालों को नरम, चमकदार बनाने के साथ ही लंबे बनाने के लिए आप खुद घर पर एलोवेरा शैंपू भी बना सकते हैं- इसके लिए आपको एलोवेरा जूस में नारियल, दूध और गेहूं और तेल मिलाकर बनाएं-लेकिन यदि आप ऐलोवेरा के नेचुरल प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करेंगे तो उसका आपके बालों पर ना तो कोई अतिरिक्त प्रभाव पड़ेगा और आपके बाल अधिक घने, लंबे और खूबसूरत भी होगे आजकल बाजार में एलोवेरा युक्त बहुत से उत्पाद आते हैं लिहाजा आप उन उत्पादों को खरीदकर अपने बालों के लिए उपयोग कर सकते हैं लेकिन उसके लिए जरूरी है कि आपको अपने बालों के हिसाब से इन उत्पादों का प्रयोग करना होगा-

6- एलोवेरा का सबसे बड़ा फायदा है कि इसके कोई अतिरिक्त प्रभाव नहीं है ऐसे में यदि आप बालों की प्रभावित जगह पर एलोवेरा का सीधा-सीधा इस्तेमाल करती हैं तो इसमें आपको डरने की कोई जरूरत नहीं है इससे आपको नए बालों की ग्रोथ में भी मदद मिलेगी-

7- झुर्रियों से बचाव झुर्रियों आपको समय से पहले बूढ़ा बना देती हैं इससे बचने के लिए रोजाना एलोवेरा जैल से मालिश कीजिये यह त्‍वचा को अंदर से मॉइश्‍चराइज करता है इसका रस स्किन को टाइट बनाता है और इसमें मौजूद विटामिन सी और के कारण त्वचा हाइड्रेट भी बनी रहती है-

8- एलोवेरा एक बेहतरीन स्किन टोनर है एलोवेरा फेशवॉश से त्वचा की नियमित सफाई से त्‍वचा से अतिरिक्त तेल निकल जाता है जो पिम्पल यानी कील-मुहांसे को पनपने ही नहीं देता है एलोवेरा त्वचा को जरूरी मॉश्चयर देता है एलोवेरा त्वचा की नमी को बनाए रखता है-एलोवेरा के पल्प (गुदे) में मुल्तानी मिट्टी या चंदन पाऊडर में मिलाकर लगाने से त्वचा के कील - मुहांसे ठीक हो जाते हैं-

9- गुलाब जल में एलोवेरा का रस मिलाकर त्वचा पर लगाने से त्वचा में नमी बरकरार रहती है और खोई नमी लौटती है-

10- एक गिलास ठंडे नारियल पानी में दो से चार चम्मच एलोवेरा का रस या पल्प (गूदा) मिलाकर पीने से लू लगने का खतरा नहीं रहता है-

11- एलोवेरा का जूस बवासीर- डायबिटीज़- गर्भाशय के रोग तथा पेट के विकारों को दूर करता है-

12- सुबह उठकर खाली पेट एलोवेरा की पत्तियों के रस का सेवन करने से पेट में कब्ज़ की समस्या से निजात मिलती है-

13- गर्मी, उमस और बारिश के कारण निकलने वाले फोड़े - फुंसियों पर भी इसका रस लगाने पर आराम मिलता है और तीन - चार बार लगाने से वो ठीक भी हो जाते हैं-

14- स्ट्रेच मार्क्स त्वचा से संबंधित अलग-अलग तरह के रोगों को दूर करने में एलोवेरा बेहद लाभकारी है इसमें पाए जाने वाले तत्व स्ट्रेच मार्क्स को दूर करने में कारगर साबित हो सकते हैं स्‍ट्रेच मार्क पर ताजा एलोवेरा के गूदे से मसाज करने पर त्वचा टोन होती है इसमें मौजूद एंजाइम खराब हो चुकी त्वचा को हटाकर दूसरी त्वचा को हाइड्रेट करता है एलोवेरा के जूस को भी स्ट्रेच मार्क्स पर लगा सकते हैं इसे लगाने के कुछ मिनट के बाद गुनगुने पानी से धो सकते हैं-

15- वह महिलायें जो मिनरल बेस मेकअप का उपयोग करती है उनकी त्वचा की ड्राईनस को कम करने के लिए एलोवेरा मॉइस्चर के रूप में भी कार्य करता है - ये शरीर के कोमल तत्वों को हानि नहीं पहुंचने देता यदि हानि होती भी है तो उस नुकसान की भरपाई करने में मदद भी करता है तथा जिन तत्वों से बुढापा जल्दी आता है एलोवेरा ऐसे तत्वों को नष्ट करता है एलोवेरा हमारे शरीर की छोटी बड़ी नस- नाड़ियों की सफाई करता है उनमें नवीन शक्ति तथा स्फूर्ति भरता है एलोवेरा जैल हर उम्र के लोग इस्तेमाल कर सकते है यह शरीर में जाकर जो भी सिस्टम खराब है वहां काम करता है इसका कोई साइड इफेक्ट भी नहीं होता इसे संजीवनी बूटी भी कहते हैं-

चमकदार त्वचा के लिए एलोवेरा फेस पैक-

एक चुटकी हल्दी
एक चम्मच शहद
एक चम्‍मच दूध
गुलाब जल की कुछ बूंदे

इन सभी का मिश्रण बना लें फिर आप इसमें थोड़ा सा एलोवेरा का जैल मिला लें और इसे अच्छी तरह से मिक्स करें अब आप इसे चेहरा और गर्दन पर लगायें और इसे 20 मिनट के लिए रखें और फिर ठंडे पानी से धो दें-

टैन हटाने के लिए एलोवेरा फेस मास्क-

नींबू के रस की कुछ बूंदों में एलोवेरा मिश्रण मिलायें तथा प्रभावित क्षेत्र पर लगाएं और 15 मिनट के लिए छोड़ दें फिर आप ठंडे पानी से धोएं-

पिग्मन्टेशन मार्क्स के लिए एलोवेरा फेस पैक-


एलोवेरा और गुलाब जल को मिलाकर पेस्ट तैयार करें अब आप इसे चेहरे पर लगाए और कम से कम 15 मिनट के लिए इसे ऐसे ही रहने दें फिर आप ठंडे पानी से चेहरे को धो लें-

उपचार और प्रयोग-

29 जनवरी 2016

कैसे घरेलू उपचार से तिल हटाये - Kaese Gharelu Upchaar Se Til Hataaye

By With कोई टिप्पणी नहीं:
चेहरे पर एक छोटा सा तिल किसी की भी खूबसूरती में चार चांद लगा सकता है लेकिन तिल का बहुत अधिक संख्‍या में या बड़ा-बड़ा होना खूबसूरती को कम करने के अलावा परेशानी का सबब भी हो सकता है अक्‍सर तिलों को हटाने के लिए सर्जरी की सलाह दी जाती है लेकिन आप घबराइए नहीं क्‍योंकि कुछ घरेलू उपायों को अपनाकर भी इस समस्‍या को दूर किया जा सकता  है-



करे ये उपाय-

1- लहसुन के पेस्‍ट को रोज रात को सोने से पहले तिल पर लगाकर किसी बैंडेज से बांध कर छोड़ दें और  सुबह त्‍वचा को हल्‍के गर्म पानी से धो लें- कुछ दिनों तक इस प्रक्रिया को दोहराने से चेहरे के तिल निकल जाते हैं-

2- तिलों को हटाने के लिए केले का छिलका बहुत फायदेमंद होता है इसके लिए केले के छिलके को छिली हुई तरफ से तिल पर रखकर बांध लें आप देखेगे कि कुछ ही दिनों के इस्‍तेमाल के बाद तिल सूखकर निकल जाएगा-

3- एक चुटकी बेकिंग सोड़ा में कुछ बूंदें अरंडी के तेल की मिलाकर पेस्‍ट बना लें इस पेस्‍ट को तिलों पर लगाकर रातभर के लिए छोड़ दें और सुबह होते ही साफ करें- इस प्रक्रिया को कुछ दिन करने से ही आपको फर्क दिखने लगेगा-

4- फूलगोभी खाने में स्‍वादिष्ट और स्‍वास्‍थ्‍यवर्धक होने के अलावा तिल को साफ करने में भी काफी कारगर होती है घर में इसका रस बनाकर नियमित रूप से तिल वाले स्‍थान पर लगाए इससे कुछ ही दिनों में धीरे-धीरे तिल गायब हो जाएंगें-

5- धनिये की पत्तियों का पेस्‍ट बना कर उसे अपने तिल पर लगाए इससे तिल को दूर होने में थोडा समय जरूर लगेगा लेकिन यह आपके तिल को हमेशा के लिए मिटा देगा-

6- स्ट्रॉबेरी आइस‍क्रीम और शेक को स्‍वादिष्‍ट बनाने के अलावा तिल को दूर करने में भी मदद करती है तिल को दूर करने के लिए स्ट्रॉबेरी को बीच से काटें और तिल पर लगाएं कुछ दिनों तक इसे दोहराएं फिर देखें कैसे आपके तिल निकलने लगते हैं-

7- सेब के सिरके का उपयोग कर बिना किसी निशान के तिल से मुक्ति पाई जा सकती है इसके लिए रूई के एक फोहे पर कुछ बूंद सेब साइडर सिरका डालें अब इस फोहे को तिल के चारों तरफ लगाएं और पट्टी बांध दें अब इसे लगभग एक घंटे के लिए ऐसे ही छोड़ दें ऐसा तब तक करें जब तक कि तिल गायब नहीं हो जाते-

8- ताजा अंगूर लेकर उसका रस निकाल लें अब कई दिनों तक दिन में कई बार जूस को निकालकर तिलों पर लगाएं- दो हफ्तों से एक महीने के भीतर तिल जाने लगते हैं-

9- थोडा सा शहद और सनबीज के तेल लेकर मिला लें इस मिश्रण को नियमित रूप से 5 मिनट तिल पर रगड़ने से त्‍वचा के चमकने के साथ-साथ तिल भी गायब हो जाएगें-



उपचार और प्रयोग-

28 जनवरी 2016

वीर की एक लात और बन गया तालाब - Veer Ki Ek Laat Aur Ban Gya Taalaab

By With कोई टिप्पणी नहीं:
राजस्थान खुद में कई रोचक तथ्य छुपाए हुए है यहां पर बने किलों का इतिहास हजारों साल पुराना है माना जाता है कि महाभारत के पात्र भीम ने यहां करीब 5000 वर्ष पूर्व एक किले का निर्माण करवाया था उसका नाम था 'चित्तौड़गढ़ का किला' ये  समुद्र तल से 1338 फीट ऊंचाई पर स्थित 500 फीट ऊंची एक विशाल आकार में पहाड़ी पर निर्मित यह किला लगभग 3 मील लंबा और आधे मील तक चौड़ा है ये पूरी दुनिया को अपनी ओर आकर्षित करने वाला है -



चित्तौड़गढ़ का किला भारत के सभी किलों में सबसे बड़ा माना जाता है यह 700 एकड़ में फैला हुआ है माना जाता है कि पांडव के दूसरे भाई भीम जब संपत्ति की खोज में निकले तो रास्ते में उनकी एक योगी से मुलाकात हुई और उस योगी से भीम ने पारस पत्थर मांगा तो इसके बदले में योगी ने एक ऐसे किले की मांग की जिसका निर्माण रातों-रात हुआ हो- भीम ने अपने बल और भाइयों की सहायता से किले का काम लगभग समाप्त कर ही दिया था सिर्फ थोड़ा-सा कार्य शेष था- इतना देख योगी के मन में कपट उत्पन्न हो गया- उसने जल्दी सवेरा करने के लिए यति से मुर्गे की आवाज में बांग देने को कहा- जिससे भीम सवेरा समझकर निर्माण कार्य बंद कर दे और उसे पारस पत्थर नहीं देना पड़े- मुर्गे की बांग सुनते ही भीम को क्रोध आया और उसने क्रोध से अपनी एक लात जमीन पर दे मारी- जहां भीम ने लात मारी वहां एक बड़ा सा जलाशय बन गया- आज इसे 'भीमलात' के नाम से जाना जाता है-



यह किला 3 मील लंबा और आधे मील तक चौड़ा है- किले के पहाड़ी का घेरा करीब 8 मील का है- इसके चारो तरफ खड़े चट्टान और पहाड़ थे- साथ ही साथ दुर्ग में प्रवेश करने के लिए लगातार सात दरवाजे कुछ अन्तराल पर बनाए गये थे- इन सब कारणों से किले में प्रवेश कर पाना शत्रुओं के लिए बेहद मुश्किल था-



पास ही महावीर स्वामी का मन्दिर है इस मंदिर का जीर्णोद्धार महाराणा कुम्भा के राज्यकाल में ओसवाल महाजन गुणराज ने करवाया थ- हाल ही में जीर्ण-शीर्ण अवस्था प्राप्त इस मंदिर का जीर्णोद्धार पुरातत्व विभाग ने किया है- इस मंदिर में कोई प्रतिमा नहीं है- आगे महादेव का मंदिर आता है- मंदिर में शिवलिंग है तथा उसके पीछे दीवार पर महादेव की विशाल त्रिमूर्ति है, जो देखने में समीधेश्वर मंदिर की प्रतिमा से मिलती है-



यहाँ का कीर्तिस्तम्भ वास्तुकला की दृष्टि से अपने आप अनुठा है- इसके प्रत्येक मंजिल पर झरोखा होने से इसके भीतरी भाग में भी प्रकाश रहता है- इसमें भगवानों के विभिन्न रुपों और रामायण तथा महाभारत के पात्रों की सैकड़ों मूर्तियां खुदी हैं- कीर्तिस्तम्भ के ऊपरी मंजिल से दुर्ग एवं निकटवर्ती क्षेत्रों का विहंगम दृश्य दिखता है- बिजली गिरने से एक बार इसके ऊपर की छत्री टूट गई थी जिसकी महाराणा स्वरुप सिंह ने मरम्मत करायी थी -

इस किले में नदी के जल प्रवाह के लिए दस मेहरावें बनी हैं-जिसमें नौ के ऊपर के सिरे नुकीले हैं- यह दुर्ग का प्रथम प्रवेश द्वार है- कहा जाता है कि एक बार भीषण युद्ध में खून की नदी बह निकलने से एक पाड़ा (भैंसा) बहता-बहता यहां तक आ गया था- इसी कारण इस द्वार को पाडन पोल कहा जाता है-पाडन पोल से थोड़ा उत्तर की तरफ चलने पर दूसरा दरवाजा आता है जिसे भैरव पोल के रुप में जाना जाता है-



दुर्ग के तृतीय प्रवेश द्वार को हनुमान पोल कहा जाता है क्योंकि पास ही हनुमान जी का मंदिर है- हनुमान जी की प्रतिमा चमत्कारिक एवं दर्शनीय हैं- हनुमान पोल से कुछ आगे बढ़कर दक्षिण की ओर मुड़ने पर गणेश पोल आता है जो दुर्ग का चौथा द्वार है- इसके पास ही गणपति जी का मंदिर है- यह दुर्ग का पांचवां द्वार है और छठे द्वार के बिल्कुल पास होने के कारण इसे जोड़ला पोल कहा जाता है- दुर्ग के इस छठे द्वार के पास ही एक छोटा सा लक्ष्मण जी का मंदिर है जिसके कारण इसका नाम लक्ष्मण पोल है- लक्ष्मण पोल से आगे बढ़ने पर एक पश्चिमाभिमुख प्रवेश द्वार मिलता है जिससे होकर किले के अन्दर प्रवेश कर सकते हैं- यह दरवाजा किला का सातवां तथा अन्तिम प्रवेश द्वार है- इस दरवाजे के बाद चढ़ाई समाप्त हो जाती है-

उपचार और प्रयोग-

26 जनवरी 2016

आपके स्तन अगर बेडौल हैं तो ये तेल बनाएं

By With कोई टिप्पणी नहीं:
लोगो की मांग थी कि कोई येसा तेल बताये जो आपके स्तन को सुडौल और पुष्ट और सही आकार में ला सके बहुत सी महिलाओं को नवजात शिशु को स्तन पान कराने से उनके स्तन बेडौल हो जाते है उनके लिए कुछ ख़ास उपाय है करे -


सामग्री-
अरंडी के पत्ते - 50 ग्राम 
इन्द्रायन की जड़ - 50 ग्राम 
गोरखमुंडी - 50 ग्राम 
पीपल वृक्ष की अन्तरछाल - 50 ग्राम
घीग्वार (ग्वारपाठा) की जड़ - 50 ग्राम
सहिजन के पत्ते - 50 ग्राम
अनार की जड़ और अनार के छिलके - 50-50 ग्राम 
खम्भारी की अन्तरछाल - 50 ग्राम
कूठ और कनेर की जड़ - 50-50 ग्राम
केले का पंचांग - 10-10 ग्राम (फूल, पत्ते, तना, फल व जड़)
सरसों व तिल का तेल - 250-250 मिलीग्राम
शुद्ध देशी कपूर - 15 ग्राम

नोट- सभी सामान आयुर्वेद औषधि की दुकान पर मिल जाएगा-

बनाने की विधि-

आप इन सब द्रव्यों को मोटा-मोटा कूट-पीसकर 5 लीटर पानी में डालकर उबालें और  जब पानी सवा लीटर बचे तब उतार लें। इसमें सरसों व तिल का तेल डालकर फिर से आग पर रखकर उबालें। जब पानी जल जाए और सिर्फ तेल बचे, तब उतारकर ठंडा कर लें, इसमें शुद्ध कपूर मिलाकर अच्छी तरह मिला लें- बस ये दवा तैयार है-

कैसे प्रयोग करे-

इस तेल को नहाने से आधा घंटा पूर्व और रात को सोते समय स्तनों पर लगाकर हलके-हलके मालिश करें। इस तेल के नियमित प्रयोग से 2-3 माह में स्तनों का उचित विकास हो जाता है और वे पुष्ट और सुडौल हो जाते हैं। ऐसी युवतियों को तंग चोली नहीं पहननी चाहिए और सोते समय चोली पहनकर नहीं सोना चाहिए। इस तेल का प्रयोग लाभ न होने तक करना चाहिए-

एक और प्रयोग-
जैतून का तेल- 100 मिली
कड़वे बादाम का तेल- 100 मिली
काशीशादि तेल - 100 मिली (सभी आयुर्वेदिक दूकान से ले )

तीनो लेकर एक प्याली में थोडा-थोडा ब्रेस्ट की हल्के हाथों से गोलाई में मालिश करें। इस तेल का प्रभाव के आने में दो से तीन माह लग जाते हैं लेकिन बहुत दिनों तक स्थायी रहने वाला प्रभाव मिलता है- 

अन्य और प्रयोग-

1- छोटी कटेरी नामक वनस्पति की जड़ व अनार की जड़ को पानी के साथ घिसकर गाढ़ा लेप करें। इस लेप को स्तनों पर लगाने से कुछ दिनों में स्तनों का ढीलापन दूर हो जाता है-

2- बरगद के पेड़ की जटा के बारीक नरम रेशों को पीसकर स्त्रियां अपने स्तनों पर लेप करें तो स्तनों का ढीलापन दूर होता है और कठोरता आती है-

3- स्तनों की शिथिलता दूर करने के लिए एरण्ड के पत्तों को सिरके में पीसकर स्तनों पर गाढ़ा लेप करने से कुछ ही दिनों में स्तनों का ढीलापन दूर हो जाता है। कुछ व्यायाम भी हैं, जो वक्षस्थल के सौन्दर्य और आकार को बनाए रखते हैं-

4- असगंध और शतावरी को बारीक पीसकर चूर्ण बनाकर लगभग 2-2 ग्राम की मात्रा में शहद के खाकर ऊपर से दूध में मिश्री को मिलाकर पीने से स्तन आकर्षक हो जाते हैं-

5- कमलगट्टे की गिरी यानी बीच के भाग को पीसकर पाउडर बनाकर दही के साथ मिलाकर प्रतिदिन 1 खुराक यानी लगभग 5 ग्राम के रूप में सेवन करने से स्तन आकार में सुडौल हो जाते हैं-

6- गम्भारी की छाल 100 ग्राम व अनार के छिलके सुखाकर कूट-पीसकर महीन चूर्ण कर लें। दोनों चूर्ण 1-1 चम्मच लेकर जैतून के इतने तेल में मिलाएं कि लेप गाढ़ा बन जाए। इस लेप को स्तनों पर लगाकर अंगुलियों से हलकी-हलकी मालिश करें। आधा घंटे बाद कुनकुने गर्म पानी से धो डालें-

7- फिटकरी 20 ग्राम, गैलिक एसिड 30 ग्राम, एसिड आफ लेड 30 ग्राम, तीनों को थोड़े से पानी में घोलकर स्तनों पर लेप करें और एक घंटे बाद शीतल जल से धो डालें। लगातार एक माह तक यदि यह प्रयोग किया गया तो 45 वर्ष की नारी के स्तन भी नवयौवना के स्तनों के समान पुष्ट हो जाएंगे-

देखे- किशोरियों के स्तन बढाने के उपाए- Breast augmentation measures Girls 

उपचार और प्रयोग-

कैसे खाए रोज क्युकि हेल्थ बनाती है

By With कोई टिप्पणी नहीं:
एक सस्ता और आसान सा दिखने वाला चना  हमारे  सेहत के लिए कितना फायदेमंद है हम इस पोस्ट में जानने का प्रयास करेगे-



काले चने भुने हुए हों, अंकुरित हों या इसकी सब्जी बनाई हो, यह हर तरीके से सेहत के लिए बहुत ही फायदेमंद होते हैं आपको पता है कि इसमें भरपूर मात्रा में कार्बोहाइड्रेट्स, प्रोटीन्स, फाइबर, कैल्शियम, आयरन और विटामिन्स पाए जाते हैं-



आपके शरीर को सबसे ज्यादा फायदा अंकुरित काले चने खाने से होता है, क्योंकि अंकुरित चने क्लोरोफिल, विटामिन ए, बी, सी, डी और के, फॉस्फोरस, पोटैशियम, मैग्नीशियम और मिनरल्स का अच्छा स्रोत होते हैं। साथ ही इसे खाने के लिए किसी प्रकार की कोई खास तैयारी नहीं करती पड़ती। रातभर भिगोकर सुबह एक-दो मुट्ठी खाकर हेल्थ अच्छी हो सकती है। वेसे भी चने ज्यादा महंगे भी नहीं होते और इसमें बीमारियों से लड़ने के गुण भी छिपा हुए हैं- वैसे भी आजकल दूध तो शुद्ध मिल नहीं रहा है तो भरपूर विटामिन और सेहत के लिए खाए शुद्ध चने -

इसके खाने से कब्ज में राहत मिलती है- चने में मौजूद फाइबर की मात्रा पाचन के लिए बहुत जरूरी होती है।

आप रात-भर भिगोए हुए चने से पानी अलग कर उसमें नमक, अदरक और जीरा मिक्स कर खाने से कब्ज जैसी समस्या से राहत मिलती है। साथ ही जिस पानी में चने को भिगोया गया था, उस पानी को पीने से भी राहत मिलती है। लेकिन कब्ज दूर करने के लिए चने को छिलके सहित ही खाएं-

ये एनर्जी बढ़ाता है कहा तो यहाँ तक जाता है यदि आपको इंस्टेंट एनर्जी चाहिए, तो रात-भर भिगोए हुए या अंकुरित चने में हल्का सा नमक, नींबू, अदरक के टुकड़े और काली मिर्च डालकर सुबह नाश्ते में खाएं, बहुत फायदेमंद होता है। आप चने का सत्तू भी खा सकते हैं। यह बहुत ही फायदेमंद होता है।गर्मियों में चने के सत्तू में नींबू और नमक मिलाकर पीने से शरीर को एनर्जी तो मिलती ही है, साथ ही भूख भी शांत होती है।

आपको एक बात से और अवगत कराता हूँ कि ये पथरी की प्रॉब्लम दूर करता है- दूषित पानी और खाने से आजकल किडनी और गॉल ब्लैडर में पथरी की समस्या आम हो गई है। हर दूसरे-तीसरे आदमी के साथ स्टोन की समस्या हो रही है। इसके लिए रातभर भिगोए हुए काले चने में थोड़ी सी शहद की मात्रा मिलाकर खाएं। रोजाना इसके सेवन से स्टोन के होने की संभावना काफी कम हो जाती है और अगर स्टोन है तो आसानी से निकल जाता है। इसके अलावा चने के सत्तू और आटे से मिलकर बनी रोटी भी इस समस्या से राहत दिलाती है।

काला चना शरीर की गंदगी को पूरी तरह से बाहर भी निकालता है ।

एनर्जी बढ़ाता है, ये डायबिटीज से छुटकारा मिलता है, एनीमिया की समस्या दूर होती है, बुखार में पसीना आने की समस्या दूर होती है, पुरुषों के लिए फायदेमंद, हिचकी में राहत दिलाता है, जुकाम में आराम मिलता है, मूत्र संबंधित रोग दूर होते हैं, त्वचा की रंगत निखारता है।

डायबिटीज से छुटकारा दिलाता है चना ताकतवर होने के साथ ही शरीर में एक्स्ट्रा ग्लूकोज की मात्रा को कम करता है जो डायबिटीज के मरीजों के लिए कारगर होता है। लेकिन इसका सेवन सुबह-सुबह खाली पेट करनाचाहिए-

चने का सत्तू डायबिटीज़ से बचाता है। एक से दो मुट्ठी ब्लड चने का सेवन ब्लड शुगर की मात्रा को भी नियंत्रित करने के साथ ही जल्द आराम पहुंचाता है-

एनीमिया की समस्या दूर होती है शरीर में आयरन की कमी से होने वाली एनीमिया की समस्या को रोजाना चने खाकर दूर किया जा सकता है। चने में शहद मिलाकर खाना जल्द असरकारक होता है। आयरन से भरपूर चना एनीमिया की समस्या को काफी हद तक कम कर देता है। चने में 27 फीसदी फॉस्फोरस और 28 फीसदी आयरन होता है जो न केवल नए बल्ड सेल्स को बनाता है, बल्कि हीमोग्लोबिन को भी बढ़ाता है।

युवा महिलाओं को हफ्ते में कम से कम एक बार चना और गुड़ खाना चाहिए।

गुड़ आयरन का समृद्ध स्रोत है और चने में बड़ी मात्रा में प्रोटीन होता है। ये दोनों मिलकर महिलाओं की माहवारी के दौरान होने वाले रक्त के नुकसान को पूरा करते हैं। तथा सभी महिलाओं को आने वाले माघ महीने में हर रोज कम से कम 40-60 मिनट धूप में बैठकर तिल के लड्डू या गजक खाने चाहिए, जिसमें कैल्शियम की मात्रा काफी ज्यादा होती है। इससे उनके शरीर में कैल्शियम और विटामिन डी की कमी पूरी हो जाएगी।

हिचकी में राहत दिलाए हिचकी की समस्या से ज्यादा परेशान हैं, तो चने के पौधे के सूखे पत्तों का धूम्रपान करने से हिचकी आनी बंद हो जाती है। साथ ही चना आंतों इंटेस्टाइन की बीमारियों के लिए भी काफी फायदेमंद होता है।

बुखार में पसीना आने पर बुखार में ज्यादा पसीना आने पर भुने हुए चने को पीसकर, उसमें अजवायन मिलाएं। फिर इससे मालिश करें। ऐसा करने से पसीने की समस्या खत्म हो जाती है।

मूत्र संबंधित रोग में  भुने हुए चने का सेवन करने से बार-बार पेशाब जाने की बीमारी दूर होती है। साथ ही गुड़ व चना खाने से यूरीन से संबंधित किसी भी प्रकार की समस्या में राहत मिलती है। रोजाना भुने हुए चनों के सेवन से बवासीर ठीक हो जाती है।

पुरुषों के लिए फायदेमंद चीनी-मिट्टी के बर्तन में रातभर भिगोए हुए चने को चबा-चबाकर खाना पुरुषों के लिए बहुत फायदेमंद होता है। पुरुषों की कई प्रकार की कमजोरी की समस्या खत्म होती है। जल्द असर के लिए भीगे हुए चने के साथ दूध भी पिएं। भीगे हुए चने के पानी में शहद मिलाकर पीने से पौरुषत्व बढ़ता है।

त्वचा की रंगत निखारता हैचना केवल हेल्थ के लिए ही नहीं, स्किन के लिए भी बहुत फायदेमंद है- चना खाकर चेहरे की रंगत को बढ़ाया जा सकता है। वैसे चने की फॉर्म बेसन को हल्दी के साथ मिलाकर चेहरे पर लगाना सबसे ज्यादा फायदेमंद होता है। नहाने से पहले बेसन में दूध या दही मिक्स करें और इसे चेहरे पर 15-20 लगा रहने दें। सूखने के बाद ठंडे पानी से धो लें। रंगत के साथ ही कील-मुहांसों, दाद-खुजली और त्वचा से जुड़ी कई प्रकार की समस्याएं दूर होती हैं-

जुकाम में राहतगर्म चने को किसी साफ कपड़े में बांधकर सूंघने से जुकाम ठीक हो जाता है।

25 जनवरी 2016

जाँघों के कालेपन से परेशान हैं

By With कोई टिप्पणी नहीं:
पुरुष और महिलाएं दोनों डार्कनेस को हटाने के लिए और जाँघों को खूबसूरत बनाने के लिए ये टिप्स अपना सकते हैं-



जांघों के कालेपन से बचने का अच्छा तरीका है पावों की त्वचा की सही देखभाल। जांघों के कालेपन को कम करने के लिए आप घरेलु उपचार जैसे नीम्बू, शहद, हल्दी, बेसन, ग्वारपाठा, जैतून का तेल आदि का इस्तेमाल कर सकते हैं और स्किन को गोरा बना सकते हैं-

1- खीरे के टुकड़ों को रोजाना पांच मिनट तक जाँघों पर रगड़ें। स्किन लाइटनिंग और मॉइस्चराइजिंग तत्व के होने से काली स्किन और जांघें निखर जाएंगी। इसको ज्यादा प्रभावशाली बनाने के लिए इसमें कुछ नींबू की बूंदें भी मिला लें और फिर इस्तेमाल करें-

2- त्वचा की अशुद्धियों को गहराई तक हटाने के लिए पपीते के स्क्रब को इस्तेमाल किया जा सकता है। पपीते का पेस्ट बना लें और इसे स्किन पर परत की भांति लगा लें। अपनी त्वचा को चमकदार बनाने के लिए एक नरम बाल खड़े ब्रश का उपयोग कर इस घरेलु नुस्खें का इस्तेमाल करें-

3- अपनी जाँघों पर शहद लगाएं और पांच मिनट तक रगड़ें, फिर 20 मिनट तक इसे छोड़ दें। बेहतर परिणाम के लिए इस क्रिया को हर सप्ताह दोहराएं-

4- एक आलू लें और इसे पीस लें। अब इस आलू के जूस को जाँघों पर मलकर सूखने के लिए छोड़ दें। काली त्वचा पर यह एंजाइम काम करेगा और इसे सफ़ेद और सुन्दर बनाएगा-

5- हल्दी में संतरे का जूस मिलकर स्क्रब तैयार कर लें। संतरे के जूस में विटामिन सी की प्रचुरता होती है और हल्दी में मौजूद तत्व डार्क स्किन से निजात दिलाने में मददगार हैं। त्वचा से यह पेस्ट हटाने के लिए गर्म पानी का इस्तेमाल करें-

6- नींबू का इस्तेमाल त्वचा को साफ़ करने, मृत कोशिकाओं और अन्य अशुद्धियों को हटाने के लिए उपयोगी है। नींबू के रस को सीधे त्वचा पर नहीं रगड़ें। नींबू के रस में एसिड होने के कारण इससे त्वचा जल सकती है या लाल हो सकती है। इस समस्या के समाधान के लिए इसमें पानी मिलाएं और पतले नींबू के रस को डार्क एरिया पर पांच मिनट तक लगाये और फिर पानी से धों लें-

7- एलोवेरा के रस को गोल गोल क्लॉक वाइज और एंटी- क्लॉक वाइज घुमाकर पांच मिनट तक लगाये और सूखने के लिए छोड़ दें। त्वचा से इस रस को हटाने के लिए गर्म पानी का इस्तेमाल करें। जब आप इस रस को सूखने तक त्वचा पर लगते हैं तो इससे पौष्टिक तत्व और एंटीऑक्सीडेंट त्वचा को मिलते हैं जिससे इसको ठीक होने में मदद मिलती है-

8- एंटीऑक्सीडेंट प्रदान करने और त्वचा की गन्दगी को हटाने की खूबी के कारण टमाटर ने यह प्रसिद्धि हांसिल की है। क्या आप जानते हैं कि बहुत से ब्यूटीसियन्स त्वचा से ऑयल को हटाने और मृत कोशिकाओं को हटाने के लिए टमाटर का सुझाव देते हैं? टमाटर का पेस्ट बनाकर इसे त्वचा पर पांच मिनट तक लगाएं और फिर 20 मिनट तक स्किन पर ही बाँध लें। यह डार्कनेस को काम करेगा और उन्हें गोरा बनाएगा-

उपचार और प्रयोग -http://www.upcharaurprayog.com

24 जनवरी 2016

मोतियाबिंद का आयुर्वेदिक इलाज है

By With कोई टिप्पणी नहीं:
मोतियाबिंद एक आम समस्या बनता जा रहा है, अब तो युवा भी इस रोग के शिकार होने लगे हैं अगर इस रोग का समय रहते इलाज न किया जाए तो रोगी अंधेपन का शिकार हो जाता है मोतियाबिंद रोग कई कारणों से होता है-आंखों में लंबे समय तक सूजन बने रहना- जन्मजात सूजन होना- आंख की संरचना में कोई कमी होना- आंख में चोट लग जाना- चोट लगने पर लंबे समय तक घाव बना रहना- कनीनिका में जख्म बन जाना- दूर की चीजें धूमिल नजर आना या सब्जमोतिया रोग होना- आंख के परदे का किसी कारणवश अलग हो जाना- कोई गम्भीर दृष्टि दोष होना- लंबे समय तक तेज रोशनी या तेज गर्मी में कार्य करना- डायबिटीज होना- गठिया होना- धमनी रोग होना आदि समस्याएँ मोतियाति‍बिंद को जन्म दे सकती हैं-



रक्त मोतियाबिंद में सभी चीजें लाल, हरी, काली, पीली और सफेद नजर आती हैं। परिम्लामिन मोतियाबिंद में सभी ओर पीला-पीला नजर आता है। ऐसा लगता है जैसे कि पेड़-पौधों में आग लग गई हो-

सभी प्रकार के मोतियाबिंद में आंखों के आस-पास की स्थिति भी अलग-अलग होती है। वातज मोतियाबिंद में आंखों की पुतली लालिमायुक्त, चंचल और कठोर होती है। पित्तज मोतियाबिंद में आंख की पुतली कांसे के समान पीलापन लिए होती है-

कफज मोतियाबिंद में आंख की पुतली सफेद और चिकनी होती है या शंख की तरह सफेद खूँटों से युक्त व चंचल होती है। सन्निपात के मोतियाबिंद में आंख की पुतली मूंगे या पद्म पत्र के समान तथा उक्त सभी के मिश्रित लक्षणों वाली होती है। परिम्लामिन में आंख की पुतली भद्दे रंग के कांच के समान, पीली व लाल सी, मैली, रूखी और नीलापन लिए होती है-


आंखों में लगाने वाली औषधियाँ-

त्रिफला के जल से आंखें धोना-

आयुर्वेद में हरड़ की छाल (छिलका), बहेड़े की छाल और आमले की छाल - इन तीनों को त्रिफला कहते हैं । यह त्रिदोषनाशक है अर्थात् वात, पित्त, कफ इन तीनों दोषों के कुपित होने से जो रोग उत्पन्न होते हैं उन सबको दूर करने वाला है । मस्तिष्क सम्बन्धी तथा उदर रोगों को दूर भगाता है तथा इन्हें शक्ति प्रदान करता है । सभी ज्ञानेन्द्रियों के लिये लाभदायक तथा शक्तिप्रद है । विशेषतया चक्षुरोग के लिये तो रामबाण है । कभी-कभी स्वस्थ मनुष्यों को भी त्रिफला के जल से अपने नेत्र धोते रहना चाहिये । नेत्रों के लिए अत्यन्त लाभदायक है । कभी-कभी त्रिफला की सब्जी खाना भी हितकर है-

धोने की विधि-

त्रिफला को जौ से समान (यवकुट) कूट लो और रात्रि के समय किसी मिट्टी, शीशे वा चीनी के पात्र में शुद्ध जल में भिगो दो । दो तोले या 25 ग्राम त्रिफला को आधा सेर वा एक सेर शुद्ध जल में भिगो दे । प्रातःकाल पानी को ऊपर से निथार कर छान लो । उस जल से नेत्रों को खूब छींटे लगाकर धोवो । सारे जल का उपयोग एक बार के धोने में ही करो । इससे निरन्तर धोने से आंखों की उष्णता, रोहे, खुजली, लाली, जाला, मोतियाबिन्द आदि सभी रोगों का नाश होता है । आंखों की पीड़ा (दुखना) दूर होती है, आंखों की ज्योति बढ़ती है । शेष बचे हुए अवयव को सिर पर रगड़ने से लाभ होता है-


त्रिफला की टिकिया-

1- त्रिफला को जल के साथ पीसकर टिकिया बनायें और आंखों पर रखकर पट्टी बांध दें । इससे तीनों दोषों से दुखती हुई आंखें ठीक हो जाती हैं-

2- हरड़ की गिरी (बीज) को जल के साथ निरन्तर आठ दिन तक खरल करो । इसको नेत्रों में डालते रहने से मोतियाबिन्द रुक जाता है । यह रोग के आरम्भ में अच्छा लाभ करता है-

3- मोतियाबिंद की शुरुआती अवस्था में भीमसेनी कपूर स्त्री के दूध में घिसकर नित्य लगाने पर यह ठीक हो जाता है-

4- हल्के बड़े मोती का चूरा 3 ग्राम और काला सुरमा 12 ग्राम लेकर खूब घोंटें। जब अच्छी तरह घुट जाए तो एक साफ शीशी में रख लें और रोज सोते वक्त अंजन की तरह आंखों में लगाएं। इससे मोतियाबिंद अवश्य ही दूर हो जाता है-

5- छोटी पीपल, लाहौरी नमक, समुद्री फेन और काली मिर्च सभी 10-10 ग्राम लें। इसे 200 ग्राम काले सुरमा के साथ 500 मिलीलीटर गुलाब अर्क या सौंफ अर्क में इस प्रकार घोटें कि सारा अर्क उसमें सोख लें। अब इसे रोजाना आंखों में लगाएं-

6- 10 ग्राम गिलोय का रस, 1 ग्राम शहद, 1 ग्राम सेंधा नमक सभी को बारीक पीसकर रख लें। इसे रोजाना आंखों में अंजन की तरह प्रयोग करने से मोतियाबिंद दूर होता है-

मोतियाबिंद में उक्त में से कोई भी एक औषधि आंख में लगाने से सभी प्रकार का मोतियाबिंद धीरे-धीरे दूर हो जाता है। सभी औषधियां परीक्षित हैं-

नेत्र रोगों में कुदरती पदार्थों से ईलाज करना फ़ायदेमंद रहता है। मोतियाबिंद बढती उम्र के साथ अपना तालमेल बिठा लेता है। अधिमंथ बहुत ही खतरनाक रोग है जो बहुधा आंख को नष्ट कर देता है-


आंखों की कई बीमारियों में नीचे लिखे सरल उपाय करने हितकारी सिद्ध होंगे-

सौंफ़ नेत्रों के लिये हितकर है। मोतियाबिंद रोकने के लिये इसका पावडर बनालें। एक बडा चम्मच भर सुबह शाम पानी के साथ लेते रहें। नजर की कमजोरी वाले भी यह उपाय करें-

विटामिन ए नेत्रों के लिये अत्यंत फ़ायदेमंद होता है। इसे भोजन के माध्यम से ग्रहण करना उत्तम रहता है। गाजर में भरपूर बेटा केरोटिन पाया जाता है जो विटामिन ए का अच्छा स्रोत है। गाजर कच्ची खाएं और जिनके दांत न हों वे इसका रस पीयें। 200 मिलि.रस दिन में दो बार लेना हितकर माना गया है। इससे आंखों की रोशनी भी बढेगी। मोतियाबिंद वालों को गाजर का उपयोग अनुकूल परिणाम देता है-

आंखों की जलन,रक्तिमा और सूजन हो जाना नेत्र की अधिक प्रचलित व्याधि है। धनिया इसमें उपयोगी पाया गया है।सूखे धनिये के बीज 10 ग्राम लेकर 300 मिलि. पानी में उबालें। उतारकर ठंडा करें। फ़िर छानकर इससे आंखें धोएं। जलन,लाली,नेत्र शौथ में तुरंत असर मेहसूस होता है-

आंवला नेत्र की कई बीमारियों में लाभकारी माना गया है। ताजे आंवले का रस 10 मिलि. इतने  ही शहद में मिलाकर रोज सुबह लेते रहने से आंखों की ज्योति में वृद्धि होती है। मोतियाबिंद रोकने के तत्व भी इस उपचार में मौजूद हैं-

भारतीय परिवारों में खाटी भाजी की सब्जी का चलन है। खाटी भाजी के पत्ते के रस की कुछ बूंदें आंख में सुबह शाम डालते रहने से कई नेत्र समस्याएं हल हो जाती हैं। मोतियाबिंद रोकने का भी यह एक बेहतरीन उपाय है-

कद्दू के फ़ूल का रस दिन में दो बार आंखों में लगाने से मोतियाबिंद में लाभ होता है। कम से कम दस मिनिट आंख में लगा रहने दें-

घरेलू चिकित्सा के जानकार विद्वानों का कहना है कि शहद आंखों में दो बार लगाने से मोतियाबिंद नियंत्रित होता है-

लहसुन की 2-3 कली रोज चबाकर खाना आंखों के लिये हितकर है। यह हमारे नेत्रों के लेंस को स्वच्छ करती है-

पालक का नियमित उपयोग करना मोतियाबिंद में लाभकारी पाया गया है। इसमें एंटीआक्सीडेंट तत्व होते हैं। पालक में पाया जाने वाला बेटा केरोटीन नेत्रों के लिये परम हितकारी सिद्ध होता है। ब्रिटीश मेडीकल रिसर्च में पालक का मोतियाबिंद नाशक गुण प्रमाणित हो चुका है-

एक और सरल उपाय बताते हैं- अपनी दोनों हथेलियां आंखों पर ऐसे रखें कि ज्यादा दबाव मेहसूस न हो। हां, हल्का सा दवाब लगावे। दिन में चार-पांच बार और हर बार आधा मिनिट के लिये करें। मोतियाबिंद से लडाई का अच्छा तरीका है-

किशमिश ,अंजीर और खारक पानी में रात को भिगो दें और सुबह खाएं । मोतियाबिंद की अच्छी घरेलू दवा है-

भोजन के साथ सलाद ज्यादा मात्रा में शामिल करें । सलाद पर थोडा सा जेतून का तेल भी डालें। इसमें प्रतिरक्षा तंत्र को मजबूत करने के गुण हैं जो नेत्रों के लिये भी हितकर है-

खाने वाली औषधियाँ-

आंखों में लगने वाली औषधि के साथ-साथ जड़ी-बूटियों का सेवन भी बेहद फायदेमन्द साबित होता है एक योग इस प्रकार है जो सभी तरह के मोतियाबिंद में फायदेमन्द है-

500 ग्राम सूखे आँवले गुठली रहित, 500 ग्राम भृंगराज का संपूर्ण पौधा, 100 ग्राम बाल हरीतकी, 200 ग्राम सूखे गोरखमुंडी पुष्प और 200 ग्राम श्वेत पुनर्नवा की जड़ लेकर सभी औषधियों को खूब बारीक पीस लें। इस चूर्ण को अच्छे प्रकार के काले पत्थर के खरल में 250 मिलीलीटर अमरलता के रस और 100 मिलीलीटर मेहंदी के पत्रों के रस में अच्छी तरह मिला लें। इसके बाद इसमें शुद्ध भल्लातक का कपड़छान चूर्ण 25 ग्राम मिलाकर कड़ाही में लगातार तब तक खरल करें, जब तक वह सूख न जाए। इसके बाद इसे छानकर कांच के बर्तन में सुरक्षित रख लें। इसे रोगी की शक्ति व अवस्था के अनुसार 2 से 4 ग्राम की मात्रा में ताजा गोमूत्र से खाली पेट सुबह-शाम सेवन करें-

फायदेमन्द व्यायाम व योगासन-

औषधियाँ प्रयोग करने के साथ-साथ रोज सुबह नियमित रूप से सूर्योदय से दो घंटे पहले नित्य क्रियाओं से निपटकर शीर्षासन और आंख का व्यायाम अवश्य करें-

आंख के व्यायाम के लिए पालथी मारकर पद्मासन में बैठें। सबसे पहले आंखों की पुतलियों को एक साथ दाएँ-बाएँ घुमा-घुमाकर देखें फिर ऊपर-नीचे देखें। इस प्रकार यह अभ्यास कम से कम 10-15 बार अवश्य करें। इसके बाद सिर को स्थिर रखते हुए दोनों आंखों की पुतलियों को एक गोलाई में पहले सीधे फिर उल्टे (पहले घड़ी की गति की दिशा में फिर विपरीत दिशा में) चारों ओर घुमाएँ। इस प्रकार कम से कम 10-15 बार करें। इसके बाद शीर्षासन करें-

कुछ खास हिदायतें-

मोतियाबिंद के रोगी को गेहूँ की ताजी रोटी खानी चाहिए। गाय का दूध बगैर चीनी का ही पीएँ। गाय के दूध से निकाला हुआ घी भी सेवन करें। आंवले के मौसम में आंवले के ताजा फलों का भी सेवन अवश्य करें। फलों में अंजीर व गूलर अवश्यक खाएं-

सुबह-शाम आंखों में ताजे पानी के छींटे अवश्य मारें। मोतियाबिंद के रोगी को कम या बहुत तेज रोशनी में नहीं पढ़ना चाहिए और रोशनी में इस प्रकार न बैठें कि रोशनी सीधी आंखों पर पड़े। पढ़ते-लिखते समय रोशनी बार्ईं ओर से आने दें-

वनस्पति घी, बाजार में मिलने वाले घटिया-मिलावटी तेल, मांस, मछली, अंडा आदि सेवन न करें। मिर्च-मसाला व खटाई का प्रयोग न करें। कब्ज न रहने दें। अधिक ठंडे व अधिक गर्म मौसम में बाहर न निकलें-

आभार -बालकृष्ण जी महराज

उपचार और प्रयोग -http://www.upcharaurprayog.com

23 जनवरी 2016

मधुमालती का पौधा मधुमेह के लिए लाभदायक है

By With कोई टिप्पणी नहीं:
मधुमालती(Madhulati)एक बहुत ही सौम्य प्रकृति का पौधा है इसकी लताएं कम भूमि और कम पानी में भी अधिक हरियाली प्रदान करती है व छाया देती है साथ ही रंग रंगीले फूलों से घर आंगन की शोभा भी बढ़ती है इस कारण इन्हें घरों या कार्यालयों के प्रवेश स्थल, दीवारों के साथ साथ या किनारों पर लगाना बहुत ही उपयोगी रहता है मधुमालती एक ऐसी लता है जो साल भर हरी रहती है और इस पर लाल, गुलाबी व सफेद रंग के मिश्रित गुच्छों के रूप में फूल आते हैं जिनमें भीनी खुशबू होती है-

मधुमालती का पौधा मधुमेह के लिए लाभदायक है

इसकी डालियाँ नर्म होती है जिन्हें आसानी से  काटा छांटा जा सकता है यह लता बहुत कम देख भाल मांगती है और एक बार जड़ पकड़ लेने के बाद पानी नहीं देने पर भी चलती रहती है-

ये लता संग हरियाली के साथ आपके घरों की खूबसूरती भी बढ़ाएगी इसकी लताएं वातावरण से कार्बन डाई आॅक्साइड अवशोषित कर हमें आक्सीजन भी प्रदान करती है इनके पत्ते अपनी सतह पर धूल कण रोक कर हवा में धूल के कणों की मात्रा भी कम करती हैं-

इसकी लताओं के पत्ते पानी को वाष्पोत्सर्जित करते है जिससे हवा का तापमान और सूखापन घटता है इसकी लताएं घनी होती हैं इस कारण दीवारों पर भी धूप की मार कम पड़ती है और इसका नतीजा ये है कि घरों का तापमान भी सामान्य बना रहता है-मधुमालती भी एक ऐसी ही लता है जो साल भर हरी रहती है और इसके फूलों के गुच्छों से भीनी भीनी खुशबू आती रहती है मालती या मधुमालती के फूल भी बहुत सुन्दर होते है-

मधुमालती(Madhulati)का रोग में उपयोग-


1- मधुमालती(Madhulati)के फूल और पत्तियों का रस मधुमेह के लिए बहुत अच्छा है इसके फूलों से आयुर्वेद में वसंत कुसुमाकर रस नाम की दवाई बनाई जाती है इसकी 2-5 ग्राम की मात्रा लेने से शरीर की कमजोरी दूर होती है और हारमोन ठीक हो जाते हैं-

2- मधुमालती(Madhulati)प्रमेह, प्रदर, पेट दर्द, सर्दी जुकाम और मासिक धर्म आदि सभी समस्याओं का यह समाधान है प्रमेह या प्रदर मे इसके 3-4 ग्राम फूलों का रस मिश्री के साथ लेंना चाहिए-

3- शुगर की बीमारी में करेला,खीरा, टमाटर के साथ मधुमालती(Madhulati)के फूल डालकर जूस निकालें और सवेरे खाली पेट लें या फिर आप केवल इसकी 5-6 पत्तियों का रस ही ले तो वह भी काम करेगा-

4- पेट दर्द में इसके फूल और पत्तियों का रस लेने से पाचक रस बनने लगते हैं यह बच्चे भी आराम से ले सकते हैं-

5- सर्दी ज़ुकाम के लिए इसकी एक ग्राम फूल पत्ती और एक ग्राम तुलसी का काढ़ा बनाकर पीयें यह किसी भी तरह का नुकसान नहीं करता है यह बहुत सौम्य प्रकृति का पौधा है-

Read Next Post-



Upcharऔर प्रयोग-

22 जनवरी 2016

छोटी-छोटी बाते हमें बचाती है-Small Things Protecting Us

By With कोई टिप्पणी नहीं:
जीवन की कुछ बाते है जिनको भले आप अन्धविश्वाश समझ कर नकार दे मगर करने पे ही इनका फल आपको प्राप्त होता है इनमे अंधविश्वास ही सही लेकिन आपको प्रयोग करने से नुकसान नहीं बल्कि फायदा ही होगा-

http://www.upcharaurprayog.com



सूर्यास्त के समय किसी को भी दूध,दही या प्याज माँगने पर ना दें इससे घर की बरक्कत समाप्त हो जाती है -

माह में एक बार किसी भी दिन घर में मिश्री युक्त खीर जरुर बनाकर परिवार सहित एक साथ खाएं अर्थात जब पूरा परिवार घर में इकट्ठा हो उसी समय खीर खाएं तो माँ लक्ष्मी की जल्दी कृपा होती है-

फल खूब खाओ स्वास्थ्य के लिए अच्छे है लेकिन उसके छिलके कूडादान में ना डालें वल्कि बाहर फेंकें इससे मित्रों से लाभ होगा-

रात्री में सोने से पहले रसोई में बाल्टी भरकर रखें इससे क़र्ज़ से शीघ्र मुक्ति मिलती है और यदि बाथरूम में बाल्टी भरकर रखेंगे तो जीवन में उन्नति के मार्ग में बाधा नही आवेगी-

मुख्य द्वार के पास कभी भी कूड़ादान ना रखें इससे पड़ोसी शत्रु हो जायेंगे-

छत पर कभी भी अनाज या बिस्तर ना धोएं-हाँ सुखा सकते है इससे ससुराल से सम्बन्ध खराब होने लगते हैं-

वृहस्पतिवार के दिन घर में कोई भी पीली वस्तु अवश्य खाएं हरी वस्तु ना खाएं तथा बुधवार के दिन हरी वस्तु खाएं लेकिन पीली वस्तु बिलकुल ना खाएं इससे सुख समृद्धि बड़ेगी-

रात्रि को झूठे बर्तन कदापि ना रखें इसे पानी से निकाल कर रख सकते है हानि से बचोगें-

माह में एक बार अपने कार्यालय में भी कुछ मिष्ठान जरुर ले जाएँ उसे अपने साथियों के साथ या अपने अधीन नौकरों के साथ मिलकर खाए तो धन लाभ होगा-

स्नान के बाद गीले या एक दिन पहले के प्रयोग किये गये तौलिये का प्रयोग ना करें इससे संतान हठी व परिवार से अलग होने लगती है अपनी बात मनवाने लगती है अतः रोज़ साफ़ सुथरा और सूखा तौलिया ही प्रयोग करें-

कभी भी यात्रा में पूरा परिवार एक साथ घर से ना निकलें आगे पीछे जाएँ इससे यश की वृद्धि होगी-

ऐसे ही अनेक अपशकुन है जिनका हम ध्यान रखें तो जीवन में किसी भी समस्या का सामना नही करना पड़ेगा तथा सुख समृद्धि बड़ेगी-

उपचार और प्रयोग-