सोयाबीन का उपयोग रोगों में-Use of soybean diseases

क्या है सोयाबीन इतना उपयोगी- What is so useful soybean-का शेष भाग -

गर्भधारण करने वाली स्त्रियों को सोयाबीन का प्रयोग बिलकुल नही करना चाहियें इससे होने वाली सन्तान पर बुरा असर पड़ता है-



मानसिक रोगों में-

सोयाबीन में फॉस्फोरस इतनी होती है कि यह मस्तिष्क (दिमाग) तथा ज्ञान-तन्तुओं की बीमारी, जैसे-मिर्गी, हिस्टीरिया, याददाश्त की कमजोरी, सूखा रोग (रिकेट्स) और फेफड़ो से सम्बन्धी बीमारियों में उत्तम पथ्य का काम करता है। सोयाबीन के आटे में लेसीथिन नमक एक पदार्थ तपेदिक और ज्ञान-तन्तुओं की बीमारी में बहुत लाभ पहुंचता है। भारत में जो लोग गरीब है। या जो लोग मछली आदि नही खा सकते है, उनके लियें यह मुख्य फास्फोरस प्रदाता खाद्य पदार्थ है। इसको खाना गरीबों के लियें सन्तुलित भोजन होता है-

दिल के रोग में-

सोयाबीन में 20 से 22 प्रतिशत वसा पाई जाती है। सोयाबीन की वसा में लगभग 85 प्रतिशत असन्तृप्त वसीय अम्ल होते हैं, जो दिल के रोगियों के लियें फायदेमंद है। इसमें ‘लेसीथिन’ नामक प्रदार्थ होता है। जो दिल की नलियों के लियें आवश्यक है। यह कोलेस्ट्रांल को दिल की नलियों में जमने से रोकता है-

सोयाबीन खून में कोलेस्ट्रोल की मात्रा को कम करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसलिए यह दिल के रोगियों के लिये फायदेमंद है। ज्यादातर दिल के रोगों में खून में कुछ प्रकार की वसा बढ़ जाती है जैसे-ट्रायग्लिसरॉइड्स, कोलेस्ट्रॉल और एलडीएल, जबकि फायदेमंद वसा यानी एचडीएल कम हो जाती है। सोयाबीन में वसा की बनावट ऐसी है कि उसमें 15 प्रतिशत सन्तृप्त वसा, 25 प्रतिशत मोनो सन्तृप्त वसा और 60 प्रतिशत पॉली असन्तृप्त वसा है। खासकर 2 वसा अम्ल, जो सोयाबीन में पायें जाते हैं। यह दिल के लियें काफी उपयोगी होते हैं। सोयाबीन का प्रोटीन कोलेस्ट्रल एवं एलडीएल कम रखने में सहायक है। साथ ही साथ शरीर में लाभप्रद कोलेस्ट्रॉल एचडीएल भी बढ़ाता है-

उच्च रक्त चाप-

रोज कम नमक में भुने आधा कप सोयाबीन का 8 हफ्तों तक सेवन करने से ब्लड़प्रेशर काबू मे रहता है। इसका स्वाद बढ़ाने के लियें इसमें कालीमिर्च भी डालकर सकते हैं। सिर्फ आधा कप रोस्टेड सोयाबीन खाने से महिलाओं का बढ़ा हुआ ब्लडप्रेशर कम होने लगता है। लगातार 8 हफ्ते तक सोयाबीन खाने से महिलाओं का 10 प्रतिशत सिस्टोलिक प्रेशर, 7 प्रतिशत डायस्टोलिक और सामान्य महिलाओं का 3 प्रतिशत ब्लडप्रेशर कम हो जाता है। तो आप भी एक मुट्ठी सोयाबीन को 8 से 12 घण्टे पानी में भिगोकर रख दें और सुबह ही गर्म कर के खायें-

लेसीथिन-

सोयाबीन में लेसीथिन पाया जाता है जो मस्तिष्क (दिमाग) के ज्ञान-तन्तुओं तथा लीवर (जिगर) के लियें फायदेमंद है।

प्रोटीन के लिये-

प्रोटीन शरीर के विकास के लियें आवश्यक है। त्वचा, मांसपेशियां, नाखून, बाल वगैरह की रचना प्रोटीन से होती है। इसके अतिरिक्त मस्तिष्क (दिमाग), दिल, फेफड़े आदि मनुष्य शरीर के आंतरिक अंगों की रचना में प्रोटीन के स्रोत सोयाबीन, अंकुरित गेहूं, बिनौल का आटा, चना, मसूर, मटर, सेम तथा विभिन्न प्रकार की दालें, मूंगफली इत्यादि में है-

हड्डी के कमजोर होने पर-

सोयाबीन हडि्डयों से सम्बन्धित रोग जैसे हडि्डयों में कमजोरी को दूर करता है। सोयाबीन को अपनाकर हम स्वस्थ जीवन व्यतीत कर सकते हैं। अस्थिक्षारता एक ऐसा रोग है जिसमें हडि्डयां कमजोर हो जाती हैं और उसमें फैक्चर हो जाता है। हडि्डयो में कैल्श्यिम की मात्रा कम हो जाती है। इसका परिणाम यह होता है कि हडि्डयां टूटती ज्यादा है और बनती कम है-

रजोनिवृत्ति-

महिलाओं में जब रजोनिवृत्ति (मासिकधर्म) होती है, उस समय स्त्रियों को बहुत ही कष्ट होते हैं। रजोनिवृत्त महिलाएं हडि्डयों में तेजी से होने वाले क्षरण से मुख्य रूप से ग्रसित होती है, जिसके कारण उन्हें आंस्टियो आर्थराइटिस बीमारी आ जाती है। घुटनों में दर्द रहने लगता है। यह इसलियें होता है, क्योंकि मासिक धर्म बंद होने से एस्ट्रोजन की कमी हो जाती है क्योकि सोयाबीन में फायटोएस्ट्रोजन होता है। जो उस द्रव की तरह काम करता है, इसलियें 3-4 महीने तक सोयाबीन का उपयोग करने से स्त्रियों की लगभग सभी कठिनाइयां समाप्त हो जाती है। महिलाओ को सोयाबीन न केवल अच्छे प्रकार का प्रोटीन देती है बल्कि मासिकधर्म के पहले होने वाले कष्टों-शरीर में सूजन, भारीपन, दर्द, कमर का दर्द, थकान आदि में भी बहुत लाभ करती है-

पेट में कीड़े-

सोयाबीन की छाछ पीने से पेट के कीड़े मर जाते हैं-

मधुमेह (डायबिटीज)-

सोयाबीन मोटे भारी-भरकम शरीर वालों के तथा मधुमेह (डायबिटीज) वाले लोगों के लियें उत्तम पथ्य है। सोया आटे की रोटी उत्तम आहार है-

आमवात या गठिया-

सोया आटे की रोटी खाने तथा दूध पीने से गठिया (जोड़ों का दर्द) रोग दूर होता है-

दूध को बढ़ाने के लियें-

दूध पिलाने वाली स्त्री यदि सोया दूध (सोयाबीन का दूध) पीये तो बच्चे को पिलाने के लिये उसके स्तनों में दूध की मात्रा बढ़ जाती है-

मूत्ररोग-

सोयाबीन का रोजाना सेवन करने से मधुमेह (डायबिटीज) के रोगी का मूत्ररोग (बार-बार पेशाब के आने का रोग) ठीक हो जाता है-

प्रोटीन युक्त सोया मिल्क गाय भैंस के दूध का बहुत अच्छा विकल्प है. बहुत से लोग मैडिकल कारण की वजह से सामान्य दूध प्रयोग में नहीं लाते है या वे लोग जो जानवरो से प्राप्त किये हुये पदार्थ नहीं खाते पीते, या एसे बच्चे जिनमें लेक्टोज से परेशानी होती है, उनके लिये तो सोया मिल्क ही आसरा है-

सोयाबीन का दूध न्यूट्रीसियस होते हुये भी घर में बनाने में काफी सस्ता पड़ता है. 1 लीटर सोयाबीन दूध बनाने के लिये लगभग 125 ग्राम सोयाबीन की आवश्यकता होती है-

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उपचार और प्रयोग-
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