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28 फ़रवरी 2016

सफ़ेद दाग(ल्यूकोडर्मा) का उपचार- Leucoderma Treatment

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यह एक प्रकार का त्वचा का रोग है जिसमें त्वचा के रंग में सफेद चकते पड़ जाते हैं ल्योकोडरमा यानी की सफेद दाग-यह शरीर के जिस हिस्से में होता है उसी जगह सफेद रंग के दाग बनने लगते हैं धीरे-धीरे यह दाग बढ़ने लगते हैं सफेद दाग होना एक आम समस्या है यह दाग हाथों, पैरों, चेहरे, होठों आदि पर छोटे रूप में होते हैं फिर ये बडे़ सफेद दाग का रूप ले लेते हैं यह संक्रामक रोग छोटे बच्चों को भी हो सकता है सफेद दाग का इलाज आयुर्वेद में उपल्ब्ध है अब आपको परेशान होने की जरूरत नहीं है आयुर्वेद के अनुसार पित्त दोष की वजह से सफेद दाग की समस्या होती है-


समाज में यह धारण बन गई है की यह कुष्ठ रोग है पर यह कुष्ठ रोग नहीं होता है -यह न तो कैंसर है-न ही कोढ़ होता है-

सफेद दाग के मुख्य कारण-

-अत्याधिक चिंता करना और तनाव लेना
-पेट में गैस की समस्या
-लीवर की समस्या
-विपरीत भोजन की वजह से जैसे मछली के साथ दूध का सेवन करना
-आनुवंशिक समस्या
-जलने या चोट लगना
-पाचन तंत्र में कीड़े होना
-कैलिश्यम की कमी
-खून में खराबी
-पेट में कीड़े होना आदि

सफ़ेद दाग(White spot) में ध्यान में रखने योग्य बाते-

कॉस्मेटिक प्रसाधन जैसे क्रीम और पाउडर के प्रयोग बंद करदे-खाने में लोहतत्व युक्त पदार्थ जैसे मांस , अनाज, फलीदार सब्जियां, दालें, व हरी पत्तेदार सब्जियों का सेवन करे-

पीड़ित व्यक्ति तनाव से बचे और आराम करे-तथा नहाते समय अत्यधिक साबुन के प्रयोग से बचे सुबह के समय 20 से 30 मिनिट धुप का सेवन (धुप स्नान) करे-

खट्टे फल , इमली, मछली, समुद्री जीव इत्यादि का सेवन न करे-

सफ़ेद दाग के इलाज के दौरान नमक और खारयुक्त पदार्थों का सेवन पूरी तरह बंद रखे-


सफ़ेद दाग के कुछ घरेलु उपाय(White stain some domestic measures)-



जब आप निराश हो गए हों तब ये दवाई जरूर प्रयोग करे-

बावची = 150 ग्राम
खैर की छाल = 650 ग्राम
परवल की जड़=300 ग्राम
देशी गाय का घी = 800 ग्राम
भृंगराज= 40 ग्राम
जवासा =40 ग्राम
कुटकी =40 ग्राम
गूगल = 80 ग्राम

बनाने की विधि(method)-

650 ग्राम खैर की छाल व 150 ग्राम बावची को मोटा कूट कर रख ले-

अब 150 ग्राम बावची, भृंगराज, परवल व जवासे को बारीक पीस ले।और अब गूगल के छोटे टुकड़े बना ले-

इसके बाद 650 ग्राम खैर की छाल + 150 ग्राम बावची को 6.500 किलो पानी मे पकाए। धीमी आग पर पकाए। जब लगभग 1/500 (डेढ़ किलो) ग्राम पानी रह जाए तब छान ले। ठंडा होने पर जो बचा हुआ अंश है उसे कपड़े मे से निचोड़ ले। यह काढ़ा साफ बर्तन मे 1 रात के लिए रख ले। सुबह ऊपर का साफ पानी निथार ले। जो अंश नीचे बैठ जाए उसे छोड़ दे-

एक पीतल की कली की हुई कड़ाही (ना मिले तो लौहे की कड़ाही) मे 800 ग्राम देशी घी व का 1/500 (डेढकिलो) काढ़ा व बाकी बारीक पीसा हुआ पाउडर व गूगल के टुकड़े मिलाकर धीमी आग पर पकाए। बीच बीच कड़छी से हिलाते रहे। कुछ समय बाद कड़ाही मे नीचे काला काला चिपचिपा अंश दिखाई देगा। एक सलाई पर रुई लपेट कर इस पर घी लगाए। इस घी लगी रुई को जलाए। यदि चटर चटर की आवाज आए तो समझे अभी पकाना बाकी है। यदि बिना किसी आवाज के रुई जल जाए तो आग बंद कर दे। जब लगभग सारा पानी जल जाए और केवल घी रह जाए तो आग बंद कर दे। उसके बाद कड़ाही के हल्का ठंडा होने पर ध्यान से घी को एक सूखे बर्तन मे निकाल ले-

घी पकाते समय मिश्रण पूरी तरह न जले। जब तली मे शहद जैसा गाढ़ा बच जाए तब आग बंद करके घी को अलग कर ले। घी अलग करते समय बर्तन मे जरा सा काले रंग का काढ़ा भी आ जाता है । इसलिए बर्तन से घी को एक चौड़े मुंह की काँच की शीशी मे डाल ले-

प्रयोग विधि(The method used)-

यह घी लगाने व खाने मे प्रयोग करे। जिसको रोग कम हो उसे एक समय व जिसे रोग अधिक हो उसे सुबह नाश्ते के बाद व रात को सोने से पहले प्रयोग करे-

मात्रा(Quantity)-

10 ग्राम छोटे बच्चो को भी दे सकते हैं कम मात्रा मे। इसको लगाने से कुछ दिन बाद दाग का रंग बदलने लगता है। यदि इसको लगाने से यदि जलन हो तो बीच बीच मे इसका प्रयोग बंद कर दे। उस समय नारियल का तेल लगाए। बाद मे जब जलन शांत हो जाए तब फिर दवाई लगाना शुरू कर दे। यदि दाग पर दवाई लगाकर ऊपर किसी भी पेड़ का पत्ता रख कर बांधने से जल्दी लाभ होता है । किसी किसी को इस दवाई के लगभग 20 दिन के प्रयोग के बाद शरीर मे जलन व गर्मी महसूस होने लगती है। तब इसे बीच मे बन्द कर दे। इस दवाई के समय नारियल खाने व नारियल का पानी पीने से जलन नहीं होती-

White spot पर लगाने की दवाई-

सफ़ेद दाग मे लगाने की दवाइयाँ प्रायः जलन पैदा करती हैं। परंतु यह दवाई बिलकुल भी जलन पैदा नहीं करती। खाने की दवाइयों के साथ लगाने के लिए यह प्रयोग करे। यदि किसी कि आँख के पास या अन्य किसी कोमल अंग पर सफ़ेद दाग हो तब यह जरूर प्रयोग करें। यह भी बहुत सफल दवाई है-

सामग्री-

सरसों का तेल(mustard oil)- 250 ग्राम (कच्ची घानी का अधिक लाभदायक है)

हल्दी (साबुत हल्दी ले) यदि कच्ची हल्दी(turmeric) मिल जाए जो आधिक गुणकारी है तो वह एक किलो ले। यदि कच्ची हल्दी ना मिले तो सुखी साबुत हल्दी 500 ग्राम ले ।ध्यान दे कि साबुत सुखी हल्दी मे घुन ना लगा हो-

बनाने का तरीका-

एक  किलो कच्ची या गीली हल्दी को या 500 ग्राम सुखी साबुत हल्दी को मोटा मोटा कूट ले। अब इसे 4 किलो पानी मे उबाले। तथा जब एक  किलो पानी बचे तब छान कर इस हल्दी के पानी को रख ले। अब एक लौहे कि कड़ाही ले जिसमे 4 किलो पानी आ सके। इसमे 250 ग्राम सरसों का तेल व 1 किलो हल्दी का पानी मिलाकर धीमी आग पर पकाए। तथा जब हल्दी का पानी खत्म हो जाए व कड़ाही मे नीचे कीचड़ सा बच जाए तब आग बंद कर दे। और ठंडा होने पर तेल को सावधानी से अलग कर ले। यदि आप अधिक प्रभावशाली दवाई बनाना चाहते हैं तो इस तेल मे 3 बार 1-1 किलो हल्दी का पानी मिलाकर पकाए। यह तेल लगाने पर धीरे धीरे सफ़ेद दाग को खत्म कर देता है। साथ मे खाने की दवाई भी जरूर खाए-

एक और सरल प्रयोग(Simple Use)-

बावची का एक  दाना सुबह पानी से खाली पेट ले। अगले दिन दो  दाने ले। इसी तरह 1-1 बढ़ाते हुए 21 तक बढ़ाए। फिर 1-1 कम करते हुए 1 दाने पर ले आए। दोबारा बढ़ाते हुए 1 से 21 तक व 21 से 1 तक ले आए। यह प्रयोग 3-4 बार करने से सफ़ेद दाग ठीक हो जाते हैं। इस प्रयोग से कभी कभी बीच मे गर्मी लगने लगे तो आगे ना बढ़ाए। वहीं से कम करना शुरू कर दे। नारियल का पानी पीने व नारियल की गिरि खाने से गर्मी लगने कि समस्या कम हो जाती है। अधिक लाभ के लिए रात को 2 कप पानी मे 2 चम्मच आंवला चूर्ण डाल दे। सुबह छान कर इस पानी से बावची के दाने ले तो गर्मी नहीं लगती-

अन्य प्रयोग-

100 ग्राम तिल व 100 ग्राम बावची मिलाकर बारीक कूट ले। 1 चम्मच सुबह हर दिन पानी से ले। बीच मे यदि गर्मी लगे तो कुछ दिन बंद कर दे। फिर दोबारा शुरू कर दे। इससे भी सफ़ेद दाग ठीक हो जाते हैं-

बाबची और इमली के बीज बराबर बराबर मात्रा में पानी में 3-4 दिन भिगोकर रखे फिर छाया में सुखा दे  अब इसका पेस्ट बनाकर सफ़ेद दाग पर नियमित लगाये -

बावची 100 ग्राम व चित्रक्मूल 100 ग्राम ले। मोटा मोटा कूट ले। रात को 2 चम्मच यह मिश्रण +1 कप पानी +2 कप दूध उबाले। जब केवल दूध बच जाए। तब छान कर दहि जमा दे। इस दहि मे ½ कप पानी मिलाकर लस्सी बना ले। इसमे नमक या चीनी ना मिलाए। एसे प्रतिदिन पिए। कभी कभी इसमे से मक्खन निकाल कर उस मक्खन को सफ़ेद दागों पर लगाए व लस्सी पी ले-

रिजका और खीर ककड़ी का रस 100-100 ग्राम मात्रा में मिलाकर सुबह शाम कुछ महीनों तक नियमित सेवन करे-

हरड का पावडर और लहसुन  का रस मिलाकर सफ़ेद दाग पर लगायें-

छाछ पीजिये, ध्यान लगाना सफ़ेद दाग के इलाज में बहुत ही फायदेमंद है-

काले चने का पेस्ट बनाकर प्रभावित क्षेत्र पर चार महीनो तक लगाये-

तांबे के बर्तन में रात को पानी भरकर उसका सुबह सेवन करें। गाजर, लौकी और दालें अधिक से अधिक सेवन करें। एलोवेरा का जूस पीएं दो से चार बादाम डेली सेवन करें। सफेद तिल को खाने में इस्तेमाल करें। पालक, गाय का घी, खजूर का इस्तेमाल करते रहें-

2 चम्मच अखरोट का पाउडर उसमें थोड़ा सा पानी मिलाकर पेस्ट बनाएं और इसे 20 मिनट तक लगा कर रखें दिन में 3 से 4 बारी एैसा करें-

नीम की पत्तीयों का पेस्ट बनाएं उसे छननी में डालकर उसका रस निकाल लें फिर उसमें 1 चम्मच शहद डालें और मिलाकर दिन में 3 बार पीएं-

हरड़ को घिसकर लहसुन के रस में मिलाकर इसके पेस्ट को सफेद दाग पर लगाएं। एैसा करने से सफेद दाग ठीक हो जाते हैं-

अदरख का जूस सफ़ेद दाग में रक्तसंचार(Circulatory) बढ़ाने एवं शक्तिवर्धक होता है-

सफ़ेद दाग पर अदरख(Ginger) की पत्तियों को घिस कर लगाना लाभदायक रहता है-

बथुए (Bathua) की कढी खाए और बथुए का रस सफ़ेद दाग पर दिन में दो से तीन बार लगाये-

एक महीने तक रोजाना अंजीर खाएं-

सूखे अनार की पत्तियों को छाया में सुखाकर चूर्ण बनाकर छान ले सुबह शाम ताजा पानी के साथ 8 ग्राम चूर्ण ले-

ल्यूकोडर्मा से रक्षा के लिए रोजाना अखरोट खाएं-

नीम की पत्तियां, नीम के फुल, नीम की निम्बोलियां सुखाकर तीनों को बराबर बराबर मात्रा मिलाकर चूर्ण पावडर बनाले - एक चम्मच पानी के साथ नियमित ले-

100 ग्राम बावची को लाकर साफ करके कूट ले। इसमे खैर व विजयसार का काढ़ा डाल कर धूप मे सुखाए। काढ़ा इतना ही डालें कि 1 दिन मे सुख जाए। इस तरह कम से कम 10 दिन करे। यदि इस तरह 21 बार काढ़ा डालकर सूखा ले तो अधिक अच्छा। उसके बाद इस बावची को बारीक पीस ले। ½ चम्मच इस बावची पाउडर को सुबह शाम आंवले के पानी से ले। बहुत जल्दी लाभ होता है-

खैर विजयसार का काढ़ा बनाने की विधि-

जड़ी बूटी वाले से 250 ग्राम खैर की छाल व 250 ग्राम विजयसार की लकड़ी ले आए। कूट कर मिला ले। 50 ग्राम इस मिश्रण को 400 ग्राम पानी मे पकाए। धीमी आग पर पकाए। जब लगभग 100 ग्राम पानी रह जाए तब छान ले। ठंडा होने पर जो बचा हुआ अंश है उसे कपड़े मे से निचोड़ ले। यह काढ़ा साफ बर्तन मे 1 रात के लिए रख ले। सुबह ऊपर का साफ पानी निथार ले। जो अंश नीचे बैठ जाए उसे छोड़ दे। {छानने के बाद जो बचता है उसे कचरे मे ना फेंके। किसी पेड़ की जड़ में डाल दे। खाद का काम करेगी।}यह काढ़ा प्रतिदिन ताजा बनाए।आंवले का पनि बनाने की विधि- रात को 2 कप पानी मे 2 चम्मच आंवला चूर्ण डाल दे। सुबह छान कर इस पानी का प्रयोग करे-

सफेद दाग की समस्या कोई लाइलाज बीमारी नहीं है। आयुर्वेदिक उपायों के जरिए इसे पूरी तरह से ठीक किया जा सकता है। साथ ही यह बीमारी छूने से किसी से हाथ मिलाने से, या फिर शररिक संबंध बनाने से भी नहीं फैलती है-

उपचार और प्रयोग-

27 फ़रवरी 2016

मेरी ख़ुशी आपके साथ-

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कहा जाता है गम है तो बाँट लो हल्का हो जाता है और ख़ुशी हो तो भी बाँट दो मजा दूना हो जाता है आपके साथ हम भी एक ख़ुशी बाँट रहे है हमारे घर में कल हमारे बड़े बेटे को पुत्र-रत्न (चित्रांस) की प्राप्ति हुई है आप सभी से आशा ही नहीं अपितु पूर्ण विश्वास है कि हमारे प्रपौत्र को अपने आशीर्वाद से अनुग्रहीत करेगे -



सत्यन श्रीवास्तव-

26 फ़रवरी 2016

Pain-दर्द से निजात पाने का एक सरल उपाय

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हमारे बहुत से आदरणीय वृद्धजनों को हाथ, पैर,घुटने एवं अन्‍य प्रकार के Pain-दर्द रहता है और दु:ख तो तब और बढ़ जाता है जब कोई सेवा करने वाला न हो तो हम आपको दर्द(Pain)से निजात पाने का एक सरल उपाय हम आपको बताते हैं इस नुस्‍खे का उपयोग कर आप अवश्‍य Pain से कुछ हद तक तथा शनै: शनै: बहुत हद तक छुटकारा प्राप्‍त कर सकते हैं-

Pain

दर्द नाशक(Painkillers) तेल घर पर बनायें-

  1. अगर आप जोड़ो के दर्द,पसलियों के दर्द या ठंड में किसी अन्य तरह के दर्द से परेशान हैं तो अजवाइन से बेहतर कोई औषधि नहीं है। अजवाइन को आयुर्वेद में कई बीमारियों की एक दवा माना गया है। अजवाइन गैस व कफ के रोगों को दूर करनेवाली है, दर्द, वायुगोला आदि रोगों का नाश करती है-
  2. आचार्य चरक के अनुसार अजवाइन दर्द(Pain) को मिटाने वाली व भूख बढ़ाने वाली है-आचार्य सुश्रुत ने अजवाइन को दर्द निवारक व पाचक माना है प्रसूता स्त्री के शरीर पर अजवाइन का चूर्ण मलने से प्रसव के कारण हुई शारीरिक पीड़ा दूर हो जाती है-
  3. कैसा भी जोड़ो का दर्द(Pain) हो अगर उस पर अजवाइन का तेल बनाकर लगाया जाए तो दर्द में बहुत जल्दी राहत मिलती है-

आप इसे केसे बनाये-

  • सामग्री-

  • अजवाइन का तेल- 10 ग्राम
  • पिपरमेंट- 10 ग्राम
  • कपूर-20 ग्राम

  • ये सभी चीजे आपको आयुर्वेदिक जड़ी बूटी का सामान बेचने वाले पंसारी से मिल जायेगी -

विधि-

  1. अब आप इन तीनों चीजों को मिलाकर एक बोतल में भर दें कुछ देर में सब एक में घुल मिल  जाएगा तथा छ: घंटे बाद प्रयोग में लावें तथा बीच-बीच में बोतल को हिला दें-
  2. Pain-दर्द या कमरदर्द या पसलीदर्द, सिरदर्द आदि में तुरंत लाभ पहुंचाने वाली औषधि है इसकी कुछ बूंदे मलिए, दर्द छूमंतर हो जाएगा- अजवाइन के तेल की मालिश करने से जोड़ों का दर्द जकडऩ तथा शरीर के अन्य भागों पर भी मलने से दर्द में राहत मिलती है-
  3. और भी देखे-

Upcharऔर प्रयोग -

Waist Pain-कमर दर्द और Back Pain-पीठ दर्द के लिए

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एक मिटटी के बर्तन में रात को पचास ग्राम गेहूँ के दाने पानी में भिगो दें फिर सुबह इन भीगे हुए गेहूँ के साथ तीस ग्राम खसखस के बीज तथा तीस ग्राम सूखी धनिया की मींगी मिलाकर बारीक-बारीक पीस लें अब इस पिसी हुई चटनी को आधा किलो दूध में पका लें और खीर बना लें स्वाद के लिए हल्की मिश्री मिला ले अब इस खीर को आवश्यकतानुसार सप्ताह-दो सप्ताह खाने से Waist Pain-कमर का दर्द एवं Back Pain-पीठ दर्द चला जाता है एवं ताकत बढती है -


और भी देखे-

Upcharऔर प्रयोग-

25 फ़रवरी 2016

सभी मेंबर हार्दिक शुभ -कामनाये - Best wishes to all members

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विगत 13 अक्तूबर 2014 को बस ब्लॉग लिखना शुरू किया था और आज मेरी शादी की सालगिरह 25 फरवरी को ब्लॉग व्यूवर संख्या 33 लाख पहुँच गई है ये सब आपका प्यार और आशीर्वाद है जो सफल रहा -


ब्लॉग में सभी प्रकार की जानकारी है जो आम लोगो के लिए हितकारी है इसमें मेरा अनुभव और ऋषियों के ग्रंथो का प्रसाद है जो आयुर्वेद के खोये हुए अस्तित्व को बेहतर बनाने का एक सार्थक प्रयास है -

हम उन सभी लोगो से छमा चाहेगे जिन लोगो का समय अभाव होने के कारण उनके प्रश्नों का उत्तर नहीं दे पाता हूँ फिर भी लगभग एक असफल प्रयास अवस्य ही करता हूँ मगर मनुष्य जीवन में अनेको परेशानी है घर और परिवार की जिम्मेदारी के साथ -साथ जीविकोपार्जन जैसी भी समस्याए मुंह बाये खड़ी रहती है जिनका सामना भी हमें करना होता है -

प्रस्तुत ब्लॉग में प्रकाशित सभी आर्टिकल आपके ज्ञान को बढाने के लिए है और प्रयोग करने के लिए आपको चाहिए कि किसी वैध्य से सलाह अवस्य ले क्युकि वैसे तो हमारा प्रयास यही होता है कि सभी प्रयोग साधारण और निरापद हो जिनसे आपको किसी प्रकार का कोई भी साइड इफेक्ट न हो परन्तु किसी-किसी के शरीर को कभी-कभी कोई जड़ी-बूटी सहनशील नहीं होती है अत: जरा भी परेशानी होने पे बंद करके निकटतम वैध्य से अवस्य संपर्क करे-

एक आवश्यक सूचना -

हमारी मित्र सूची संख्या 5000 होने वाली है जिसके कारण हम किसी भी आने वाले मित्र की रिक्वेस्ट को स्वीकार नहीं कर पा रहे है आप हमें दूसरी आईडी पे रिक्वेस्ट कर सकते है -

-https://www.facebook.com/satyan.srivastava.720634


उपचार और प्रयोग-

23 फ़रवरी 2016

आपका मूलांक और आपका मोबाइल नंबर

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स्मार्ट युग में स्मार्ट फोन का क्रेज बढ़ता ही जा रहा है हर व्यक्ति की जरुरत बन गया है -एक बार इन्शान भूखा रह सकता है लेकिन मोबाइल गलती से गुम हो जाए या आप अपने घर पे भूल जाए -तो समझो किसी काम में मन नहीं लगता है -



लेकिन जब मोबाइल है तो आपका एक सिम-कार्ड भी होगा -कभी आपने सोचा है कि आप के सिम का नम्बर और आपके मूलांक में क्या गठबंधन का प्रभाव होता है -उचित मोबाइल के नंबर के और आपके मूलांक के चुनाव से आपकी उर्जा-शक्ति और संपर्क की अनुकूलता बढ़ जाती है -

जन्म तारीख के अनुसार आपका मूलांक और प्रभावशाली मोबाइल नम्बर-

यदि आपका मूलांक एक है- 

जन्म तारीखः 1-10-19-28

इस मूलांक वाले मोबाइल नम्बर लेते समय ध्यान रक्खे कि उनके मोबाइल में 1 नंबर का प्रयोग कई बार आये या फिर अंत में 1 नंबर अवस्य ही आये तो आपके लिए ये लकी साबित होगा भूल कर भी आठ के योग का नम्बर प्रयोग न करे ये आपके मूलांक से मैच नहीं करता है -

रंग और वॉलपेपर(Paint and Wallpaper)-

मूलांक एक के लोगो के मोबाइल का रंग अगर लाल या धातु का रंग स्टील बॉडी, सिल्वर, गोल्डन या कॉपर है तो यह आपके लिए लाभकारी है। हो सके तो आप मोबाइल का कवर लाल रंग का रखें। मोबाइल के वॉलपेपर या Screen saver में कोई हंसता या मुस्कुराता हुआ चेहरा रखें। लाल गुलाब, उगता हुआ सूरज और मुस्कुराते हुए बच्चे का चित्र आपके लिए अनुकूल है-

अनुकूल रिंग टोन(Friendly ring tone)-

आप गंभीर व ऊर्जावान धुन या गीत,सेक्सोफोन, सितार आदि सेट कर सकते है जो आपके लिए लाभदायक है -

यदि आपका मूलांक दो है-

जन्म तारीखः 2-11-20-29

यदि आपका मूलांक दो है तो आपके घर और आफिस के नंबर में 2 अंक का कई बार आना आपके लिए शुभ रहेगा -यानि उस नंबर में 2 का अंक एक से अधिक बार आना चाहिए। नंबर का योग 2 आपके लिए शुभ है। ध्यान रखें कि नंबर के अंत में 2 नंबर जरूर हो-

रंग और वॉलपेपर(Paint and Wallpaper)-

मूलांक दो के लोगो का मोबाइल या टेलिफोन का रंग यदि सिल्वर हो तो यह लाभदायक रहेगा मोबाइल का कवर पारदर्शी रखें-सक्रीन सेवर पर पूर्णिमा का चंद्रमा, सुंदर स्त्री या जलती हुई मोमबत्ती या दीपक का चित्र आपके फोन पर होने वाले संपर्कों को लाभकारी बनाएगा-

अनुकूल रिंग टोन(Friendly ring tone)-

इस मूलांक के लोगो को मध्यम गति या तारों पर बजने वाला संगीत और पुराने मधुर गीत। गिटार, सारंगी आदि सेट करना चाहिए  -

यदि आपका मूलांक तीन है-

जन्म तारीखः 3-12-21-30

मूलांक तीन के लोगो को आपने  घर या ऑफिस के फोन का योग 1 या 3 रखना चाहिए और उसमें 3 अंक की पुनरावृत्ति (Recurrence)होनी चाहिए पर नंबर के अंत में 9, 99 या 999 आना शुभ रहेगा। मोबाइल के नंबर का योग 6 रखें और उसमें 6 और 9 अधिक से अधिक रखने का प्रयास करें। मोबाइल नंबर के आखिर में भी 9, 99 या 999 शुभ रहेगा। विशेष परिस्थितियों में मोबाइल नंबर का योग 9 भी अच्छा फल प्रदान कर सकता है। 2, 4 या 8 का योग हानिकारक हो सकता है-

रंग और वॉलपेपर(Paint and Wallpaper)-

मूलांक तीन वाले जातक के लिए मोबाइल का रंग पूर्ण या आंशिक रूप से गोल्डन, ऑरेंज या पीला हो तो अति शुभ है। मोबाइल का कवर गोल्डन या पीले रंग का इस्तेमाल करें। स्क्रीन सेवर और वॉलपेपर सूरजमुखी का फूल, उगता हुआ सूरज, ईश्वर या संत-महात्मा का चित्र इस्तेमाल करें। इससे आपके अच्छे संपर्क बनेंगे-

अनुकूल रिंग टोन(Friendly ring tone)-

आप अपने मोबाइल में तेज गति, स्फूर्ति वाला संगीत और प्रेरणा देने वाला गीत। भक्ति गीत, तबला, ड्रम, धुंघरु या ढोल आदि सेट करे जो आपके लिए उपयुक्त और अनुकूल है -

यदि आपका मूलांक चार है-

जन्म तारीखः 4-13-22-31

आपको अपने घर या कार्यालय के नंबर का योग 4 रखना चाहिए। यदि उसमें 1 नंबर की पुनरावृत्ति हो रही हो तो बहुत अच्छा है। नंबर के अंत में 1 या 4 का आना सौभाग्यकारी रहेगा। मोबाइल के नंबर का योग या 4 रखना शुभकारी होगा। अगर इसमें 1 अंक की पुनरावृत्ति हो और आखिर में 1 या शून्य(0) आए तो यह आपके लिए लाभकारी सिद्ध होगा-

रंग और वॉलपेपर(Paint and Wallpaper)-

मूलांक चार के जातक अपने मोबाइल का रंग ग्रे, सफ़ेद  या सिल्वर रख सकते है ये आपके लिए शुभ  है। मोबाइल का कवर हरे या नीले रंग का हो तो अति उत्तम रहेगा। वॉलपेपर और स्क्रीन सेवर में कोई धार्मिक चिन्ह जैसे स्वास्तिक, ऊं, 786 या किसी यंत्र की तस्वीर लगा सकते हैं। विशेष सफलता के लिए अपने गुरु, मार्गदर्शक, परम मित्र की मुस्कुराती हुई तस्वीर लगाएं-

अनुकूल रिंग टोन(Friendly ring tone)-

आप अपने मोबाइल में पियानो या तरंगों वाला धीमा संगीत व मधुर, शांत, धीमा गीत। वायलिन, बांसुरी आदि सेट करे-

यदि आपका मूलांक पांच है-

जन्म तारीखः 5-14-23

मूलांक पांच वाले जातक को अपने घर और कार्यालय के नंबर का योग 5 रखने का प्रयास करना चाहिए यदि इसमें 1 नंबर की पुनरावृत्ति हो और इसके अंत में 5, 55, 555 या 15 हो तो यह बहुत शुभकारी होगा आपके मोबाइल नंबर का योग अगर 1 हो तो यह भाग्य जगाने में सहायक होगा। इसमें 5 अंक की पुनरावृत्ति और अंत में 1, 11, 111 या 15 आपके लिए सफलता प्रदायक सिद्ध होगा। 2 का अंक हानिकारक हो सकता है-

रंग और वॉलपेपर(Paint and Wallpaper)-

इस मूलांक के जातक के मोबाइल का रंग क्रीम और पीला छोड़कर कोई भी हो उत्तम होगा। पर, मोबाइल का कवर हरा या लाल शुभ है। वॉलपेपर और स्क्रीन सेवर पर फलों, पेड़-पौधे, जंगल के दृश्य का हरे रंग का कोई शुभ चिन्ह सौभाग्य-कारी है-

अनुकूल रिंग टोन(Friendly ring tone)-

मूलांक पांच के जातक धीमी और मध्यम गति पर ऊर्जावान संगीत व अर्थपूर्ण गीत। बांसुरी, तबला, सितार आदि सेट करे-

यदि आपका मूलांक छ: है-

जन्म तारीखः 6-15-24

आपके घर, ऑफिस और मोबाइल के नंबर्स का योग 6 हो तो यह अति शुभ है। इसमें 9 नंबर की पुनरावृत्ति आपको सफल बनाएगी। इसका अंत 1 या 9 से होना चाहिए। अंत में 9 अंक की पुनरावृत्ति शुभ रहेगी जैसे 99, 999, 9999-

रंग और वॉलपेपर(Paint and Wallpaper)-

मूलांक छ के जातको के वॉलपेपर या स्क्रीन सेवर पर आपके परिजन, प्रिय मित्र, माता-पिता, सुंदर स्त्री और बच्चों का चित्र आपको सफलता प्रदान करेगा। आपके मोबाइल नंबर का रंग सफेद और सिल्वर सौभाग्यकारक है। सिल्वर या पारदर्शी मोबाइल कवर उत्तम है-

अनुकूल रिंग टोन(Friendly ring tone)-

मुलांक छ के जातको को मिला-जुला  संगीत, मधुर नए-पुराने गीत, गिटार आदि सेट करना चाहिए-

यदि आपका मूलांक सात है-

जन्म तारीखः 7-16-25

आपके घर और कार्यालय के फोन नंबर्स का योग 7 श्रेष्ठ है। इसमें 2 नंबर की अधिक पुनरावृत्ति आपको सौभाग्य प्रदान करेगी। इसके अंत में 7 अंक की पुनरावृत्ति जैसे 77, 777, 7777 आपके सौभाग्य का द्वार खोल सकती है आपके मोबाइल नंबर का योग 2, 7 या 9 उत्तम है। नंबर में 7 नंबर की पुनरावृत्ति शुभकारक है-अंत में 7 या 9 नंबर की पुनरावृत्ति कल्याणकारी रहेगी। जैसे 77, 777, 7777 या 99, 999, 9999-

रंग और वॉलपेपर(Paint and Wallpaper)-

इस मूलांक के लोगो को अपने मोबाइल पर वॉलपेपर या स्क्रीन सेवर पर सफेद पक्षियों, सुंदर स्त्रियों और सफेद स्वास्तिक का चित्र शुभ संकेत रहेगा। मोबाइल का रंग हरा छोड़कर सभी रंग शुभ हैं। क्रीम, सिल्वर रंग विशेष रूप से उत्तम फल प्रदान करेंगे। मोबाइल का कवर पारदर्शी रखें-

अनुकूल रिंग टोन(Friendly ring tone):-

मूलांक सात के लोगो को थिरकने वाले गीत, पुराने गीत, बांसुरी की धुन, सेक्सोफोनआदि सेट करना चाहिए-

यदि आपका मूलांक आठ है-

जन्म तारीखः 8-17-26

आपके घर और कार्यलाय के नंबर का योग 8 शुभ है। इसमें 8 अंक की पुनरावृत्ति उत्तम रहेगी। नंबर के अंत में 5 का अंक अच्छा रहेगा। आपके मोबाइल नंबर का योग 6 आपको सफलता प्रदान करेगा। इसमें 6 अंक की आवृत्ति अधिक होने से आपके आत्मविश्वास में वृद्धि होगी। मोबाइल नंबर के अंत में 0 या 6 अंक शुभ है-

रंग और वॉलपेपर(Paint and Wallpaper)-

इस मूलांक के लोगो के मोबाइल का रंग काला, ग्रे या भूरा श्रेष्ठ है। कवर का रंग भी यदि सिल्वर, काला, ग्रे या भूरा हो तो बेहतर रहेगा। वॉलपेपर और स्क्रीन सेवर पर शुभ धार्मिक चिन्ह, अपने इष्टदेव या गुरु का चित्र लगाना सौभाग्यकारी होगा-

अनुकूल रिंग टोन(Friendly ring tone)-

इस मूलांक के लोगो को आध्यात्मिक व धार्मिक गीत, शांत, धीमा व सुरीला संगीत, बांसुरी की धुन, बीन या संतूर आदि सेट करना उत्तम फलदायक है -

यदि आपका मूलांक नौ है-

जन्म तारीखः 9-18-27

आपके घर व कार्यालय के फोन नंबर का योग 9 या 3 या  6 होना चाहिए। नंबर में 3 की पुनरावृत्ति होनी चाहिए और अंत में 9, 99, 999, 9999 वाला नंबर लेने का प्रयास करना चाहिए, सौभाग्यकारी रहेगा। मोबाइल के नंबरों का योग 9 या 6 शुभ है। मोबाइल नंबर के मध्य में 6 या 9 की पुनरावृत्ति शुभ है। जैसे 696969। नंबर 69 आपके भाग्य में वृद्धि करेगा-

रंग और वॉलपेपर(Paint and Wallpaper):-

इस मूलांक के लोगो के मोबाइल का रंग यथासंभव लाल, मरून, कॉपर, गोल्डन रखने का प्रयास करना चाहिए। मोबाइल कवर कॉपर, गोल्डन या क्रीम रंग का रखना शुभ है। वॉलपेपर पर प्रसिद्ध इमारतें जैसे ताजमहल और पूर्ण चंद्रमा का चित्र, प्राचीन धरोहरें, राजसी कलाकृतियां, पानी पीते हुए पक्षियों का चित्र तथा मशीनों के चित्र शुभकारी हैं-

अनुकूल रिंग टोन(Friendly ring tone):-

इस मूलांक के लोग अधिक जोश व ऊर्जावाले गीत, रिदम व थाप वाला संगीत। ढोल, नगाड़ा, ड्रम, तबला आदि मोबाइल में सेट करे -
उपचार और प्रयोग-

21 फ़रवरी 2016

मादक द्रव्यों का इलाज - Madak Drvy Ka Ilaaj

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जो लोग जो अन्जाने में ही किन्हीं व्यसनों से ग्रस्त हो गए हैं उनके लिए एक रामबाण तरीका बता रहा हूं इसका उपयोग किसी एक विशेष नशे की आदत से छुटकारा पाने के लिए नहीं बल्कि कई तरह के नशों की आदत से छुटकारे के लिए करेगे  इससे आप यदि इन नशीले पदार्थों के आदी हैं तो फिर देर किस बात की है-




एक बार अपने गुरू या इष्ट का स्मरण करके एक बार मन में यह विचार तो लाइए कि आपको उक्त नशा छोड़ना है फिर शेष काम तो यह चमत्कारी औषधि करेगी और कुछ ही दिनों में आप पाएंगे कि जादू हो रहा है कि जिस पदार्थ की आपको जानलेवा तलब होती थी वह पता नहीं कहां विलीन हो गई है  मैंने जिन पदार्थों पर इस श्रेष्ठ औषधि का प्रयोग किया है वे हैं-

बीड़ी
सिगरेट
चिलम
चबाने वाली तम्बाकू
चाय
काफ़ी
अफ़ीम

पारस पीपल (यह एक बड़ा पेड़ होता है इसके पत्ते अचानक देखने में प्रसिद्ध पेड़ पीपल के पत्तों की तरह होते है तथा भिंडी के फूलों की तरह पीले फूल आते हैं तथा कुछ दिनों में ये फूल गाढ़े गुलाबी होकर मुर्झा जाते हैं ,इस पेड़ को मराठी में "भेंडी " ही कहा जाता है ) के पुराने पेड़ की छाल जो स्वतः ही पेड़ से अलग हो जाती है-

उसको लेकर खूब बारीक पीस कर मैदे की तरह बना लें व शीशी में भर लें -यह बारीक चूर्ण बारह ग्राम लेकर 250 मि.ली. पानी में हलकी आंच पर जैसे चाय बनाते हैं वैसे ही पकाएं और 100 मि.ली. पक कर रह जाने पर छान कर चाय की तरह ही हलका गर्म सा पी लीजिए- सुबह शाम नियमित रूप से पंद्रह दिनों तक सेवन कराने से  मादक द्रव्यों की आदत छूट जाती है तथा नफ़रत सी होने लगती है - 

एक बार व्यसन छूट जाए तो पुनः इन दुर्व्यसनों को प्रयोग नहीं करना चाहिए फिर व्यसन से मुक्त होने के बाद आदी व्यक्ति को दो माह तक बैद्यनाथ कंपनी का "दिमाग दोष हरी" नामक दवा का सेवन कराये अगर आपके क्षेत्र में पारस पीपल नहीं पाया जाता है तो किसी महाराष्ट्र में रहने वाले मित्र से मंगवाने में देर न करिए और लाभान्वित होये - ईश्वर को धन्यवाद दीजिये कि उसने साधारण सी दिखने वाली चीज़ों में कैसे दिव्य गुण भर रखे हैं. इसके और गुण से परिचित कराते है -

पारस पीपल के 2 या 3 बीजों को शक्कर के साथ देने से संग्रहणी-बवासीर-सुजाक और पेशाब की गर्मी में लाभ होता है-

इसके पक्के फलों की राख में मिलाकर लगाने से और इसका काढा बनाकर पिलाने से दाद और खुजली में आराम मिलता है-

इसके पत्तों को पीसकर गरम करके लेप करने से जोडों की सोजन और पित्तज शोध (सोजिश) में आराम मिलता है-

इसके फूलों के रस का लेप करने से दाद मिटता है-

इसके पत्तों पर तेल चुपड़ कर गरम करके बांधने से नारू रोग द्वारा पैदा हुए छाले ओर घाव पर शीघ्र आराम मिलता है-


उपचार और प्रयोग -

एसिडिटी-उल्टी-दस्त-पेट के कीड़े करे प्रयोग

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ज्यादातर लोगों को पता भी नहीं होता है कि हमारे किचन में प्रयोग होने वाला जीरा एक घरेलू औषधि है जिसे कई छोटी-छोटी बीमारियों में इस्तेमाल कर सकते हैं तड़के के लिए इस्तेमाल होने वाला जीरा भारतीय व्यंजनों में इस्तेमाल होने वाला एक सुगंधित मसाला है ये पेट से जुड़ी कई तरह की बीमारी को दूर करने के लिए ये एक कारगर औषधि है-


जीरा-धनिया और मिश्री तीनों को बराबर मात्रा में मलाकर पीस लें -इस चूर्ण की 2-2 चम्मच सुबह-शाम सादे पानी से लेने पर अम्लपित्त या एसिडिटी ठीक हो जाती है-

एसिडिटी से तुरंत राहत पाने के लिये- एक चुटकी कच्चा जीरा ले कर मुंह में डाल कर खाने से भी आपको फायदा मिलता है-

जीरा-सेंधा नमक-काली मिर्च-सौंठ और पीपल सबको समान मात्रा में लेकर पीस लें -इस चूर्ण को एक चम्मच की मात्रा में भोजन के बाद ताजे पानी से लेने पर अपच में लाभ होता है -

पांच ग्राम जीरे को भूनकर तथा पीसकर दही की लस्सी में मिलाकर सेवन करने से दस्तों में लाभ होता है-

15 ग्राम जीरे को 400 मिली पानी में उबाल लें -जब 100 ग्राम शेष रह जाये तब 20-40 मिली की मात्रा में प्रातः-सांय पिलाने से पेट के सभी कीड़े मर जाते हैं-

एक चम्मच भुने हुए जीरे के बारीक़ चूर्ण में एक चम्मच शहद मिलाकर प्रतिदिन भोजन के बाद सेवन करने से उल्टी बंद हो जाती है-

इसमें एंटीसेफ्टिक(Antiseptic) तत्व भी पाया जाता है-जो कि सीने में जमे हुए कफ को निकाल कर बाहर करता है और सर्दी-जुखाम से राहत दिलाता है यह गरम होता है इसलिये यह कफ को बिल्‍कुल अच्छी तरह से सुखा देता है-

यदि आप नींद न आने की बीमारी से ग्रस्त हैं तो एक छोटा चम्मच भुना जीरा पके हुए केले के साथ मैश करके रोजाना रात के खाने के बाद खाएं-

जब भी सर्दी-जुखाम हो, तो एक गिलास पानी में जीरा ले कर उबाल लें और इस पानी को पिएं-कई साउथ इंडियन घरों में सादा उबला पानी न पी कर 'जीरा पानी' पिया जाता है-

जीरे को बारीक़ पीस लें- इस चूर्ण का 3-3 ग्राम गर्म पानी के साथ दिन में दो बार सेवन करने से पेट के दर्द तथा बदन दर्द से छुटकारा मिलता है-

जीरा आयरन का सबसे अच्छा स्त्रोत  है-जिसे नियमित रूप से खाने से खून की कमी दूर होती है साथ ही गर्भवती महिलाएं-जिन्हें  इस समय खून और आयरन की जरुरत होती है उनके लिये जीरा अमृत का काम करता है-

जीरा खाने से लीवर मजबूत होता है और उसकी शरीर से गंदगी निकालने की क्षमता में भी सुधार आता है-

ब्लड में शुगर की मात्रा को नियंत्रित करने के लिए आघा छोटा चम्मच पिसा जीरा दिन में दो बार पानी के साथ पीएं- डायबिटीज रोगियों को यह काफी फायदा पहुंचाता है-

इसकी सबसे ज्यादा खासियत यह है कि यह वजन तेजी से कम करता है जीरा पाउडर के सेवन से शरीर मे वसा का अवशोषण कम होता है जिससे स्वाभाविक रूप से वजन कम करनें में मदद मिलती है  एक बड़ा चम्मच जीरा एक गिलास पानी मे भिगो कर रात भर के लिए रख दें-सुबह इसे उबाल लें और गर्म गर्म चाय की तरह पिये-बचा हुआ जीरा भी चबा लें-इसके रोजाना सेवन से शरीर के किसी भी कोने से अनावश्यक चर्बी शरीर से बहार निकल जाती है-इस बात का विशेष ध्यान रखे की इस चूर्ण को लेने के 1 घंटो तक कुछ ना खायें-

भुनी हुई हींग, काला नमक और जीरा समान मात्रा में लेकर चूर्ण बनाए, इसे 1-3 ग्राम की मात्रा में दिन में दो बार दही के साथ लेने से भी मोटापा कम होता है-इसके सेवन से केवल शरीर से अनावश्यक चर्बी दूर हो जाती है बल्कि शरीर में रक्त का परिसंचारण भी तेजी से होता है और कोलेस्ट्रॅाल भी घटता है-

कब्जियत की शिकायत होने पर जीरा- काली मिर्च- सोंठ और करी पावडर को बराबर मात्रा में लें और मिश्रण तैयार कर लें इसमें स्वादानुसार नमक डालकर घी में मिलाएं और चावल के साथ खाएं- पेट साफ रहेगा और कब्जियत में राहत मिलेगी-

-मादक द्रव्यों का इलाज - Madak Drvy Ka Ilaaj

उपचार और प्रयोग -

20 फ़रवरी 2016

संतान होगी या नहीं करे पहचान

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पुराने जमाने में जब इतना मशीनी अविष्कार नहीं था तब बुजुर्ग लोग या जानकार लोग संतान होगी या नहीं इसकी जानकारी निम्न प्रकार लिया करते थे-
संतान होगी या नहीं करे पहचान

पुरुष और स्त्री के दाहिने हाथ मे साफ़ मिट्टी रख कर उसके अन्दर थोडा दही और पिसी शुद्ध हल्दी रक्खे-यह काम रात को सोने से पहले करना चाहिये-

सुबह अगर दोनो के हाथ में हल्दी का रंग लाल हो गया है तो संतान आने का समय है-

स्त्री के हाथ में लाल है और पुरुष के हाथ में लाल हो गयी है और स्त्री के हाथ में नही तो स्त्री रति सम्बन्धी कारणों से ठंडी है और संतान पैदा करने में असमर्थ है कुछ समय के लिये रति क्रिया को बंद कर देना चाहिये-पुरुष के हाथ में पीली है तो स्त्री के अन्दर कामवासना अधिक है-

19 फ़रवरी 2016

नारी की सुंदरता का वैज्ञानिक कारण - Beauty Of Female Scientific Reason

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शायद आपको पता नहीं होगा स्त्री पुरुषों से ज्यादा सुंदर क्यों दिखाई पड़ती है शायद आपको खयाल न होगा स्त्री के व्यक्तित्व में एक राउन्डनेस एक सुडौलता क्यों दिखाई पड़ती है और ये पुरुष के व्यक्तित्व में क्यों नहीं दिखाई पड़ती-




शायद आपको खयाल में न होगा कि स्त्री के व्यक्तित्व में एक संगीत-एक नृत्य-एक इनर डांस-एक भीतरी नृत्य क्यों दिखाई पड़ता है जो पुरुष में नहीं दिखाई पड़ता-

इसका एक छोटा-सा कारण है एक छोटा सा इतना छोटा है कि आप कल्पना भी नहीं कर सकते- इतने छोटे-से कारण पर व्यक्तित्व का इतना भेद पैदा हो जाता है-

मां के पेट में जो बच्चा निर्मित होता है उसके पहले अणु में तेईस जीवाणु पुरुष के होते है और तेईस जीवाणु स्त्री के होते हैं मानव गुणसूत्रों को 1 से 22 तक की संख्या का नाम दिया गया है जबकि 23 वां गुणसूत्र जिसे  लिंग गुणसूत्र sex  chromosme कहते हैं और वो दो तरह की होती हैं X  और Y 

इस जोड़े में अगर दो X  हुए तो आप मादा होते हैं और अगर X  Y  तो आप नर का जन्म होता है  बगैर  X  के जीवन संभव नहीं है-

हर जोड़ी की एक प्रति माता से और दूसरी पिता से हमें हासिल होती है.और इसलिए शुक्राणु कोशिका(स्पर्म सेल) और अंडाणु कोशिका (Ovum) में 46 की जगह 23 गुणसूत्र ही होते हैं और इनके संगम से बने नए  जीवन में फिर से सही संख्या  हो 46 जाती है-

अगर तेईस-तेईस के दोनों जीवाणु मिलते हैं तो छियालीस जीवाणुओं का पहला सेल(कोष्ठ)निर्मित होता है। छियालीस सेल से जो प्राण पैदा होता है वह स्त्री का शरीर बन जाता है। उसके दोनों बाजू 23-23 सेल के संतुलित होते हैं-

पुरुष का जो जीवाणु होता है वह पैतालीस जीवाणुओं का होता है। एक तरफ तेईस होते हैं,एक तरफ बाईस  । बस यहीं संतुलन टूट गया और वहीं से व्यक्तित्व का भी। स्त्री के दोनों पलड़े व्यक्तित्व के बाबत संतुलन के हैं। उससे सारा स्त्री का सौंदर्य,उसकी सुड़ौलता,उसकी कला,उसके व्यक्तित्व का रस,उसके व्यक्तित्व का काव्य पैदा होता है और पुरुष के व्यक्तित्व में जरा सी कमी है। क्योंकि उसका तराजू संतुलित नहीं है,तराजू का एक पलड़ा तेईस जीवाणुओं से बना है तो दूसरा बाईस का। मां से जो जीवाणु मिलता है वह तेईस का बना हुआ है और पुरुष से जो मिलता है वह बाईस का बना हुआ है-


गुणसूत्र या क्रोमोज़ोम (Chromosome) सभी वनस्पतियों व प्राणियों की कोशिकाओं में पाये जाने वाले तंतु रूपी पिंड होते हैं, जो कि सभी आनुवांशिक गुणों को निर्धारित व संचारित करते हैं। प्रत्येक प्रजाति में गुणसूत्रों की संख्या निश्चित रहती हैं। मानव कोशिका में गुणसूत्रों की संख्या 46 होती है जो 23 के जोड़े में होते है। इनमे से 22 गुणसूत्र नर और मादा मे समान और अपने-अपने जोड़े के समजात होते है। इन्हें सम्मिलित रूप से समजात गुणसूत्र (Autosomes) कहते है। 23वें जोड़े के गुणसूत्र स्त्री और पुरूष में समान नही होते जिन्हे विषमजात गुणसूत्र (heterosomes) कहते है-

पुरुष की जो बेचैनी है वह एक छोटी सी घटना से शुरु होती है और वह घटना है कि उसके एक पलड़े पर एक अणु कम है। उसके व्यक्तित्व का संतुलन कम है- 

स्त्री का संतुलन पूरा है,उसकी लयबद्धता पूरी है। इतनी सी घटना इतना फरक लाती है। इससे स्त्री सुंदर तो हो सकी लेकिन विकासमान नहीं हो सकी; क्योंकि जिस व्यक्तित्व में समता है वह विकास नहीं करता,वह ठहर जाता है।पुरुष का व्यक्तित्व विषम है। विषम होने के कारण वह दौड़ता है,विकास करता है। एवरेस्ट चढ़ता है,पहाड़ पार करता है,चांद पर जाएगा,तारों पर जाएगा,खोजबीन करेगा,सोचेगा,ग्रंथ लिखेगा,धर्म-निर्माण करेगा। स्त्री यह कुछ भी नहीं करेगी। न वह एवरेस्ट पर जाएगी,न वह चांद-तारों पर जाएगी,न वह धर्मों की खोज करेगी,न ग्रंथ लिखेगी,न विज्ञान की शोध करेगी। वह कुछ भी नहीं करेगी-

उसके व्यक्तित्व में एक संतुलन उसे पार होने के लिए तीव्रता से नहीं भरता है। पुरुष ने सारी सभ्यता विकसित की। इस एक छोटी सी जैविक परिघटना के कारण। उसमें एक अणु कम है। स्त्री ने सारी सभ्यताएं विकसित नहीं की। उसमें एक अणु पूरा है। इतनी सी जैविक परिघटना व्यक्तित्व का भेद ला देती है-

लेकिन अब शायद स्त्री की मानसिकता में पहले से बदलाव का एक नया अध्याय शुरू हो चुका है अब स्त्री सुन्दरता की मूर्ति के साथ -साथ हर वह अदम्य साहस का भी परिचय दे रही है जो पहले विकसित नहीं थी -

उपचार और प्रयोग -

18 फ़रवरी 2016

बालतोड़ का आयुर्वेदिक उपचार

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किसी भी कारण शरीर से कोई Hair किसी कारण टूट जाए तो वहां एक बड़ा फो़ड़ा(Abscess)जैसा हो जाता है बाल तोड़(HairPlucking)का होना एक समान्य बात है जब शरीर का कोई बाल टूट जाता है उस जगह पर घाव के साथ फोड़ा बन जाता है और फिर इसमें पस बन जाता है जिसकी वजह से दर्द होता है और शरीर में बेचैनी हो उठती है यह दर्द ज्यादा सहा नहीं जाता है इस फोड़े में पीप(Pus)या पस बन जाता है डॉक्टर के पास जाने पर वह एक चीरा लगाता है तब यह ठीक होने लगता है-

बालतोड़ का आयुर्वेदिक उपचार

आयुर्वेदिक उपायों के जरिए बालतोड़(HairPlucking)के दर्द से निजात पाया जा सकता है यह कोई गंभीर समस्या नहीं है लेकिन HairPlucking(बालतोड़) में दर्द अधिक होता है अब घबराने की जरूरत नहीं है बस इन आसान उपायों को करें-

आयुर्वेदक  उपचार(Ayurvedic treatments)-


1- यदि शुरूआत है तो बालतोड़ होने पर गेहूं के 15 दानों को चबाकर उसका लेप को बालतोड़(HairPlucking) वाली जगह पर लगाने से बाल तोड़ जल्द ठीक हो जाता है या फिर नीम के पत्तों को पीसकर लगाने से भी बालतोड़ में राहत मिलती है-

2- देसी घी में 1 चम्मच मैदा मिलाकर उसे आग में पका लें और इसका पेस्ट बन जाने पर सोते समय बालतोड़(HairPlucking) वाली जगह पर बांध लें दो दिनों के भीतर ही बालतोड़ ठीक हो जाता है-

3- हल्दी में सरसों का तेल मिलाकर उसे हल्का गरम कर लें और इसे HairPlucking-बालतोड़ वाली जगह पर लगाने से शीध्र लाभ मिलता है-

4- पीपल की छाल को पानी के साथ मिलाकर घिस लें और इस पेस्ट को बालतोड़(HairPlucking) पर लगाते रहने से थोड़े ही दिनों में बालतोड़ से निजात मिल जाता है-

5- एक चम्मच मैदा व पाव चम्मच सुहागा डालकर जरा सा घी डालें और इसे आग पर पकाकर हलवे जैसा गाढ़ा बना लें इसे पुल्टिस की तरह बालतोड़ पर रखकर सोते समय पट्टी बांध कर सो जाएं- दो-तीन बार ऐसा करने पर बालतोड़ ठीक हो जाएगा-

6- मैदे में रूई को 15 से 20 मिनट तक भिगों लें और रूई को निचोड़कर बालतोड़ वाली जगह पर बांधने से 3 दिनों में ही यह रोग ठीक हो जाता है-

7- पीसी हुई मेंहदी भिगोकर उसे बालतोड़ के स्थान पर गाढ़ा-गाढ़ा लेप सुबह और रात को लगाने से बालतोड़(HairPlucking) शीघ्र ही ठीक हो जाता है-

8- बालतोड़ वाली जगह को हल्का सा दबाने से उसकी कील निकाल लें यह थोड़ा सा दर्द जरूर करता है लेकिन आसानी से कील निकल जाती है फिर उस जगह हल्दी को लगा लें-ये बालतोड़(HairPlucking) कोई गंभीर बीमारी नहीं है-

Upcharऔर प्रयोग-

16 फ़रवरी 2016

कुछ काम के नुस्खे आपके लिए

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कभी कभी जीवन में छोटी-छोटी चीजे अचानक ही उत्पन्न हो जाती है जब हम इनको भी आजमा सकते है -



यदि किसी स्त्री को बार-बार गर्भपात अथवा गर्भस्त्राव(Abortion or miscarriage) होता है तो निर्गुण्डी की जड को कपडे में बांधकर कमर में धारण करा दें फिर गर्भपात या गर्भस्त्राव नहीं होगा ये पंसारी से जाकर खरीद सकते है-

किसी भी प्रकार का कोई त्वचा विकार(skin disorder) हो अथवा फोडे-फुंसी हों तो किसी रूद्राक्ष को भिगोकर पत्थर पर घिसकर, लेप तैयार कर लगाने से लाभ होता है-


रक्तचाप की दशा में पांचमुखी रूद्राक्ष की माला गले में धारण करें- वह माला ह्रदय के पास तक जानी चाहिए ब्लड प्रेशर धीरे-धीरे नार्मल हो जाएगा -

चारमुखी रूद्राक्ष को दूध में उबालकर प्रात: खाली पेट पीने से स्मरणशक्ति तीव्र हो जाती है-

यदि कोई व्यक्ति सदैव अस्वस्थ रहता है और जल्दी-जल्दी बीमार हो जाता है, तो मोती शंख में काली गाय का दूध भरकर रखें और प्रात: खाली पेट उसे इस दूध का सेवन कराएं- इससे वह पूर्ण स्वस्थ्य हो जाएगा-

सेंधा नमक, आंबा हल्दी और कूठ को समभाग लेकर नींबू के रस में पीसकर लेप करने से मुंह के धब्बे दूर होते हैं-

एक नींबू के दो टुकडे करें और उसमें से बीज निकाल दें। फिर कटे नींबू पर फिटकरी को पकाकर व उसको पीसकर जो चूर्ण बने, उसे कटे नींबू पर तब तक डालते रहें जब तक कि नींबू का रस उसे सोखता रहे- जब सोखना बंद कर दे तो नींबू को अच्छी तरह चूस लें- दो-तीन बार के इस प्रयोग से पीलिया रोग चला जाता है-

इसे भी देखे- 

हमेशा काम आने वाले नुस्खे - Prescriptions Always work to come

उपचार और प्रयोग-

हमेशा काम आने वाले नुस्खे

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हमारे जीवन में रोगों का जीवन में प्रभाव पड़ता ही रहता है -हम छोटी-मोटी बीमारियों का इलाज स्वयं कर सकते है "उपचार स्वास्थ्य और प्रयोग " आपके लिए लाया है आपके लिए साधारण छोटे-छोटे प्रयोग जिनको आप अवस्य अपनाए कुछ प्रयोग नीचे दिए जा रहे है जो आपको घर में ही उपलब्ध है अजमाए और लाभ ले -




दमे के लिये तुलसी और वासा:-

दमे के रोगियों को तुलसी की १० पत्तियों के साथ वासा (अडूसा या वासक) का २५० मिलीलीटर पानी में उबालकर काढ़ा बनाकर दें। लगभग २१ दिनों तक सुबह यह काढ़ा पीने से आराम आ जाता है-

मौसमी खाँसी के लिये सेंधा नमक:-

सेंधा नमक की लगभग एक सौ ग्राम डली को चिमटे से पकड़कर आग पर, गैस पर या तवे पर अच्छी तरह गर्म कर लें। जब लाल होने लगे तब गर्म डली को तुरंत आधा कप पानी में डुबोकर निकाल लें और नमकीन गर्म पानी को एक ही बार में पी जाएँ। ऐसा नमकीन पानी सोते समय लगातार दो-तीन दिन पीने से खाँसी, विशेषकर बलगमी खाँसी से आराम मिलता है। नमक की डली को सुखाकर रख लें एक ही डली का बार बार प्रयोग किया जा सकता है-

बैठे हुए गले के लिये मुलेठी का चूर्ण:-

मुलेठी के चूर्ण को पान के पत्ते में रखकर खाने से बैठा हुआ गला ठीक हो जाता है। या सोते समय एक ग्राम मुलेठी के चूर्ण को मुख में रखकर कुछ देर चबाते रहे। फिर वैसे ही मुँह में रखकर जाएँ। प्रातः काल तक गला साफ हो जायेगा। गले के दर्द और सूजन में भी आराम आ जाता है-

मुँह और गले के कष्टों के लिये सौंफ और मिश्री:-

भोजन के बाद दोनों समय आधा चम्मच सौंफ चबाने से मुख की अनेक बीमारियाँ और सूखी खाँसी दूर होती है, बैठी हुई आवाज़ खुल जाती है, गले की खुश्की ठीक होती है और आवाज मधुर हो जाती है-

खराश या सूखी खाँसी के लिये अदरक और गुड़:-

गले में खराश या सूखी खाँसी होने पर पिसी हुई अदरक में गुड़ और घी मिलाकर खाएँ। गुड़ और घी के स्थान पर शहद का प्रयोग भी किया जा सकता है। आराम मिलेगा-

पेट में कीड़ों के लिये अजवायन और नमक:-

आधा ग्राम अजवायन चूर्ण में स्वादानुसार काला नमक मिलाकर रात्रि के समय रोजाना गर्म जल से देने से बच्चों के पेट के कीडे नष्ट होते हैं। बडों के लिये- चार भाग अजवायन के चूर्ण में एक भाग काला नमक मिलाना चाहिये और दो ग्राम की मात्रा में सोने से पहले गर्म पानी के साथ लेना चाहिये-

अरुचि के लिये मुनक्का हरड़ और चीनी:-

भूख न लगती हो तो बराबर मात्रा में मुनक्का (बीज निकाल दें), हरड़ और चीनी को पीसकर चटनी बना लें। इसे पाँच छह ग्राम की मात्रा में (एक छोटा चम्मच), थोड़ा शहद मिला कर खाने से पहले दिन में दो बार चाटें-

बदन के दर्द में कपूर और सरसों का तेल:-

10 ग्राम कपूर, 200 ग्राम सरसों का तेल - दोनों को शीशी में भरकर मजबूत ठक्कन लगा दें तथा शीशी धूप में रख दें। जब दोनों वस्तुएँ मिलकर एक रस होकर घुल जाए तब इस तेल की मालिश से नसों का दर्द, पीठ और कमर का दर्द और, माँसपेशियों के दर्द शीघ्र ही ठीक हो जाते हैं-

जोड़ों के दर्द के लिये बथुए का रस:-

बथुआ के ताजा पत्तों का रस पन्द्रह ग्राम प्रतिदिन पीने से गठिया दूर होता है। इस रस में नमक-चीनी आदि कुछ न मिलाएँ। नित्य प्रातः खाली पेट लें या फिर शाम चार बजे। इसके लेने के आगे पीछे दो-दो घंटे कुछ न लें। दो तीन माह तक लें-

पेट में वायु-गैस के लिये मट्ठा और अजवायन:-

पेट में वायु बनने की अवस्था में भोजन के बाद 125 ग्राम दही के मट्ठे में दो ग्राम अजवायन और आधा ग्राम काला नमक मिलाकर खाने से वायु-गैस मिटती है। एक से दो सप्ताह तक आवश्यकतानुसार दिन के भोजन के पश्चात लें-

फटे हाथ पैरों के लिये सरसों या जैतून का तेल:-

नाभि में प्रतिदिन सरसों का तेल लगाने से होंठ नहीं फटते और फटे हुए होंठ मुलायम और सुन्दर हो जाते है। साथ ही नेत्रों की खुजली और खुश्की दूर हो जाती है-

सर्दी बुखार और साँस के पुराने रोगों के लिये तुलसी:-

तुलसी की 21 पत्तियाँ स्वच्छ खरल या सिलबट्टे (जिस पर मसाला न पीसा गया हो) पर चटनी की भाँति पीस लें और 10 से 30 ग्राम मीठे दही में मिलाकर नित्य प्रातः खाली पेट तीन मास तक खाएँ। दही खट्टा न हो। यदि दही माफिक न आये तो एक-दो चम्मच शहद मिलाकर लें। छोटे बच्चों को आधा ग्राम तुलसी की चटनी शहद में मिलाकर दें। दूध के साथ भूलकर भी न दें। औषधि प्रातः खाली पेट लें। आधा एक घंटे पश्चात नाश्ता ले सकते हैं-

अधिक क्रोध के लिये आँवले का मुरब्बा और गुलकंद:-

बहुत क्रोध आता हो तो सुबह आँवले का मुरब्बा एक नग प्रतिदिन खाएँ और शाम को गुलकंद एक चम्मच खाकर ऊपर से दूध पी लें। क्रोध आना शांत हो जाएगा-

घुटनों में दर्द के लिये अखरोट:-

सवेरे खाली पेट तीन या चार अखरोट की गिरियाँ खाने से घुटनों का दर्द मैं आराम हो जाता है-

काले धब्बों के लिये नीबू और नारियल का तेल:-

चेहरे व कोहनी पर काले धब्बे दूर करने के लिये आधा चम्मच नारियल के तेल में आधे नीबू का रस निचोड़ें और त्वचा पर रगड़ें, फिर गुनगुने पानी से धो लें-

कोलेस्ट्राल पर नियंत्रण सुपारी से:-

भोजन के बाद कच्ची सुपारी 20 से 40 मिनट तक चबाएँ फिर मुँह साफ़ कर लें। सुपारी का रस लार के साथ मिलकर रक्त को पतला करने जैसा काम करता है। जिससे कोलेस्ट्राल में गिरावट आती है और रक्तचाप भी कम हो जाता है-

मसूढ़ों की सूजन के लिये अजवायन:-

मसूढ़ों में सूजन होने पर अजवाइन के तेल की कुछ बूँदें पानी में मिलाकर कुल्ला करने से सूजन में आराम आ जाता है-

हृदय रोग में आँवले का मुरब्बा:-

आँवले का मुरब्बा दिन में तीन बार सेवन करने से यह दिल की कमजोरी, धड़कन का असामान्य होना तथा दिल के रोग में अत्यंत लाभ होता है, साथ ही पित्त, ज्वर, उल्टी, जलन आदि में भी आराम मिलता है-

शारीरिक दुर्बलता के लिये दूध और दालचीनी:-

दो ग्राम दालचीनी का चूर्ण सुबह शाम दूध के साथ लेने से शारीरिक दुर्बलता दूर होती है और शरीर स्वस्थ हो जाता है। दो ग्राम दालचीनी के स्थान पर एक ग्राम जायफल का चूर्ण भी लिया जा सकता है-

हकलाना या तुतलाना दूर करने के लिये दूध और काली मिर्च:-

हकलाना या तुतलाना दूर करने के लिये 10 ग्राम दूध में 250 ग्राम कालीमिर्च का चूर्ण मिलाकर रख लें। 2-2 ग्राम चूर्ण दिन में दो बार मक्खन के साथ मिलाकर खाएँ-

श्वास रोगों के लिये दूध और पीपल:-

एक पाव दूध में 5 पीपल डालकर गर्म करें, इसमें चीनी डालकर सुबह और ‘शाम पीने से साँस की नली के रोग जैसे खाँसी, जुकाम, दमा, फेफड़े की कमजोरी तथा वीर्य की कमी आदि रोग दूर होते हैं-

अच्छी नींद के लिये मलाई और गुड़:-

रात में नींद न आती हो तो मलाई में गुड़ मिलाकर खाएँ और पानी पी लें। थोड़ी देर में नींद आ जाएगी-

कमजोरी को दूर करने का सरल उपाय:-

एक-एक चम्मच अदरक व आंवले के रस को दो कप पानी में उबाल कर छान लें। इसे दिन में तीन बार पियें। स्वाद के लिये काला नमक या शहद मिलाएँ-

घमौरियों के लिये मुल्तानी मिट्टी:-

घमौरियों पर मुल्तानी मिट्टी में पानी मिलाकर लगाने से रात भर में आराम आ जाता है-

पेट के रोग दूर करने के लिये मट्ठा:-

मट्ठे में काला नमक और भुना जीरा मिलाएँ और हींग का तड़का लगा दें। ऐसा मट्ठा पीने से हर प्रकार के पेट के रोग में लाभ मिलता है। यह बासी या खट्टा नहीं होना चाहिये-

खुजली की घरेलू दवा:-

फटकरी के पानी से खुजली की जगह धोकर साफ करें, उस पर कपूर को नारियल के तेल मिलाकर लगाएँ लाभ होगा-

मुहाँसों के लिये संतरे के छिलके:-

संतरे के छिलके को पीसकर मुहाँसों पर लगाने से वे जल्दी ठीक हो जाते हैं। नियमित रूप से ५ मिनट तक रोज संतरों के छिलके का पिसा हुआ मिश्रण चेहरे पर लगाने से मुहाँसों के धब्बे दूर होकर रंग में निखार आ जाता है-

बंद नाक खोलने के लिये अजवायन की भाप:-

एक चम्मच अजवायन पीस कर गरम पानी के साथ उबालें और उसकी भाप में साँस लें। कुछ ही मिनटों में आराम मालूम होगा-

चर्मरोग के लिये टेसू और नीबू:-

टेसू के फूल को सुखाकर चूर्ण बना लें। इसे नीबू के रस में मिलाकर लगाने से हर प्रकार के चर्मरोग में लाभ होता है-

माइग्रेन के लिये काली मिर्च, हल्दी और दूध:-

एक बड़ा चम्मच काली मिर्च का चूर्ण एक चुटकी हल्दी के साथ एक प्याले दूध में उबालें। दो तीन दिन तक लगातार रहें। माइग्रेन के दर्द में आराम मिलेगा-

गले में खराश के लिये जीरा:-

एक गिलास उबलते पानी में एक चम्मच जीरा और एक टुकड़ा अदरक डालें ५ मिनट तक उबलने दें। इसे ठंडा होने दें। हल्का गुनगुना दिन में दो बार पियें। गले की खराश और सर्दी दोनों में लाभ होगा-

सर्दी जुकाम के लिये दालचीनी और शहद:-

एक ग्राम पिसी दालचीनी में एक चाय का चम्मच शहद मिलाकर खाने से सर्दी जुकाम में आराम मिलता है-

टांसिल्स के लिये हल्दी और दूध:-

एक प्याला (200 मिलीली.) दूध में आधा छोटा चम्मच (2 ग्राम) पिसी हल्दी मिलाकर उबालें। छानकर चीनी मिलाकर पीने को दें। विशेषरूप से सोते समय पीने पर तीन चार दिन में आराम मिल जाता है। रात में इसे पीने के बात मुँह साफ करना चाहिये लेकिन कुछ खाना पीना नहीं चाहिये-

ल्यूकोरिया से मुक्ति:-

ल्यूकोरिया नामक रोग कमजोरी, चिडचिडापन, के साथ चेहरे की चमक उड़ा ले जाता हैं। इससे बचने का एक आसान सा उपाय- एक-एक पका केला सुबह और शाम को पूरे एक छोटे चम्मच देशी घी के साथ खा जाएँ 11-12 दिनों में आराम दिखाई देगा। इस प्रयोग को 21 दिनों तक जारी रखना चाहिए-

मधुमेह के लिये आँवला और करेला:-

एक प्याला करेले के रस में एक बड़ा चम्मच आँवले का रस मिलाकर रोज पीने से दो महीने में मधुमेह के कष्टों से आराम मिल जाता है-

मधुमेह के लिये कालीचाय:-

मधुमेह में सुबह खाली पेट एक प्याला काली चाय स्वास्थ्यवर्धक होती है। चाय में चीनी दूध या नीबू नहीं मिलाना चाहिये। यह गुर्दे की कार्यप्रणाली को लाभ पहुँचाती है जिससे मधुमेह में भी लाभ पहुँचता है-

उच्च रक्तचाप के लिये मेथी:-

सुबह उठकर खाली पेट आठ-दस मेथी के दाने निगल लेने से उच्चरक्त चाप को नियंत्रित करने में सफलता मिलती है-

माइग्रेन और सिरदर्द के लिये सेब:-

सिरदर्द और माइग्रेन से परेशान हों तो सुबह खाली पेट एक सेब नमक लगाकर खाएँ इससे आराम आ जाएगा-

अपच के लिये चटनी:-

खट्टी डकारें, गैस बनना, पेट फूलना, भूक न लगना इनमें से किसी चीज से परेशान हैं तो सिरके में प्याज और अदरक पीस कर चटनी बनाएँ इस चटनी में काला नमक डालें। एक सप्ताह तक प्रतिदिन भोजन के साथ लें, आराम आ जाएगा-

मुहाँसों से मुक्ति:-

जायफल, काली मिर्च और लाल चन्दन तीनो का पावडर बराबर मात्रा में मिलाकर रख लें। रोज सोने से पहले 2-3 चुटकी भर के पावडर हथेली पर लेकर उसमें इतना पानी मिलाए कि उबटन जैसा बन जाए खूब मिलाएँ और फिर उसे चेहरे पर लगा लें और सो जाएँ, सुबह उठकर सादे पानी से चेहरा धो लें। 15 दिन तक यह काम करें। इसी के साथ प्रतिदिन 250 ग्राम मूली खाएँ ताकि रक्त शुद्ध हो जाए और अन्दर से त्वचा को स्वस्थ पोषण मिले। 15-20  दिन में मुहाँसों से मुक्त होकर त्वचा निखर जाएगी-

जलन की चिकित्सा चावल से:-

कच्चे चावल के 8-10  दाने सुबह खाली पेट पानी से निगल लें। 21 दिन तक नियमित ऐसा करने से पेट और सीन की जलन में आराम आएगा। तीन माह में यह पूरी तरह ठीक हो जाएगी-

दाँतों के कष्ट में तिल का उपयोग:-

तिल को पानी में 4 घंटे भिगो दें फिर छान कर उसी पानी से मुँह को भरें और 10 मिनट बाद उगल दें। चार पाँच बार इसी तरह कुल्ला करे, मुँह के घाव, दाँत में सड़न के कारण होने वाले संक्रमण और पायरिया से मुक्ति मिलती है-

विष से मुक्ति:-

10-10 ग्राम हल्दी, सेंधा नमक और शहद तथा 5 ग्राम देसी घी अच्छी तरह मिला लें। इसे खाने से कुत्ते, साँप, बिच्छु, मेढक, गिरगिट, आदि जहरीले जानवरों का विष उतर जाता है-

खाँसी में प्याज:-

अगर बच्चों या बुजुर्गों को खांसी के साथ कफ ज्यादा गिर रहा हो तो एक चम्मच प्याज के रस को चीनी या गुड मिलाकर चटा दें, दिन में तीन चार बार ऐसा करने पर खाँसी से तुरंत आराम मिलता है-

स्वस्थ त्वचा का घरेलू नुस्खा :-

नमक, हल्दी और मेथी तीनों को बराबर मात्रा में लेकर पीस लें, नहाने से पाँच मिनट पहले पानी मिलाकर इनका उबटन बना लें। इसे साबुन की तरह पूरे शरीर में लगाएँ और 5 मिनट बाद नहा लें। सप्ताह में एक बार प्रयोग करने से घमौरियों, फुंसियों तथा त्वचा की सभी बीमारियों से मुक्ति मिलती है। साथ ही त्वचा मुलायम और चमकदार भी हो जाती है-

पेट साफ रखे अमरूद:-

कब्ज से परेशान हों तो शाम को चार बजे कम से कम 200 ग्राम अमरुद नमक लगाकर खा जाएँ, फायदा अगली सुबह से ही नज़र आने लगेगा। 10 दिन लगातार खाने से पुराने कब्ज में लाभ होगा। बाद में जब आवश्यकता महसूस हो तब खाएँ-

बीज पपीते के स्वास्थ्य हमारा:-

पके पपीते के बीजों को खूब चबा-चबा कर खाने से आँखों की रोशनी बढ़ती है। इन बीजों को सुखा कर पावडर बना कर भी रखा जा सकता है। सप्ताह में एक बार एक चम्मच पावडर पानी से फाँक लेन पर अनेक प्रकार के रोगाणुओं से रक्षा होती है-

मुलेठी पेप्टिक अलसर के लिये:-

मुलेठी के बारे में तो सभी जानते हैं। यह आसानी से बाजार में भी मिल जाती है। पेप्टिक अल्सर में मुलेठी का चूर्ण अमृत की तरह काम करता है। बस सुबह शाम आधा चाय का चम्मच पानी से निगल जाएँ। यह मुलेठी का चूर्ण आँखों की शक्ति भी बढ़ाता है। आँखों के लिये इसे सुबह आधे चम्मच से थोड़ा सा अधिक पानी के साथ लेना चाहिये-

सरसों का तेल केवल पाँच दिन:-

रात में सोते समय दोनों नाक में दो दो बूँद सरसों का तेल पाँच दिनों तक लगातार डालें तो खाँसी-सर्दी और साँस की बीमारियाँ दूर हो जाएँगी। सर्दियों में नाक बंद हो जाने के दुख से मुक्ति मिलेगी और शरीर में हल्कापन मालूम होगा-

भोजन से पहले अदरक:-

भोजन करने से दस मिनट पहले अदरक के छोटे से टुकडे को सेंधा नमक में लपेट कर [थोड़ा ज्यादा मात्रा में ] अच्छी तरह से चबा लें। दिन में दो बार इसे अपने भोजन का आवश्यक अंग बना लें, इससे हृदय मजबूत और स्वस्थ बना रहेगा, दिल से सम्बंधित कोई बीमारी नहीं होगी और निराशा व अवसाद से भी मुक्ति मिल जाएगी-

अजवायन का साप्ताहिक प्रयोग:-

सुबह खाली पेट सप्ताह में एक बार एक चाय का चम्मच अजवायन मुँह में रखें और पानी से निगल लें। चबाएँ नहीं। यह सर्दी, खाँसी, जुकाम, बदनदर्द, कमर-दर्द, पेटदर्द, कब्जियत और घुटनों के दर्द से दूर रखेगा। 10 साल से नीचे के बच्चों को आधा चम्मच 2 ग्राम और 10 से ऊपर सभी को एक चम्मच यानी 5 ग्राम लेना चाहिए-

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