टेसू (पलास) के प्रयोग-Experiment Of Tesu (Palash)

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भारत में टेसू का पेड़ सभी स्थान पर पाए जाते हैं प्राचीन समय से इसका प्रयोग उपचार के लिए औषधि के रूप में किया जाता है टेसू के पेड़ 150 से 450 सेंटीमीटर तक ऊंचे होते हैं इसके पत्ते लगभग 6 इंच लम्बे होते हैं इसकी छाल आधा इंच मोटी और खुरदरी होती है गर्मियों के मौसम में इसकी छाल को काटने पर एक प्रकार का रस निकलता है जो जमने पर लाल गोंद जैसा पदार्थ बन जाता है पलास के फूल चमकीले लाल व नारंगी रंग के होते हैं-


पलास के पत्ते प्रायः पत्तल और दोने आदि के बनाने के काम आते हैं राजस्थान और बंगाल में इनसे तंबाकू की बीड़ियाँ भी बनाते हैं- फूल और बीज ओषधिरूप में व्यवहृत होते हैं। वीज में पेट के कीड़े मारने का गुण विशेष रूप से है। फूल को उबालने से एक प्रकार का ललाई लिए हुए पीला रंगा भी निकलता है जिसका खासकर होली के अवसर पर प्रयोग किया जाता है- फली की बुकनी कर लेने से वह भी अबीर का काम देती हैऔर छाल से एक प्रकार का रेशा निकलता है जिसको जहाज के पटरों की दरारों में भरकर भीतर पानी आने की रोक की जाती है जड़ की छाल से जो रेशा निकलता है उसकी रस्सियाँ बटी जाती हैं- दरी और कागज भी इससे बनाया जाता है इसकी पतली डालियों को उबालकर एक प्रकार का कत्था तैयार किया जाता है जो कुछ घटिया होता है और बंगाल में अधिक खाया जाता है-

मोटी डालियों और तनों को जलाकर कोयला तैयार करते हैं। छाल पर बछने लगाने से एक प्रकार का गोंद भी निकलता है जिसको 'चुनियाँ गोंद' या पलास का गोंद कहते हैं। इसके फूल बहुत ही आकर्षक होते हैं। इसके आकर्षक फूलो के कारण इसे "जंगल की आग" भी कहा जाता है-


टेसू के फूल का सेवन करने से शरीर को शक्ति मिलती है और प्यास दूर होती है इसके सेवन से शरीर में खून की वृद्धि होती है, पेशाब खुलकर आता है- 

कुष्ठरोग, मौसमी बुखार, जलन, खांसी, पेट में गैस बनना, वीर्य सम्बंधी रोग, संग्रहणी (दस्त के साथ आंव आना), आंखों के रोग, रतौंधी, प्रमेह (वीर्य विकार), बवासीर तथा पीलिया आदि रोग इसके सेवन करने से ठीक हो जाते हैं। यह बलगम (कफ) पित्त को कम करता है। पेट के कीड़े को खत्म करता है तथा खून के प्रवाह को कम करता है। इसके गोंद का सेवन करने से एसिडिटी दूर हो जाती है। यह पाचन की शक्ति को बढ़ाता है। इसके पत्ते को सूजन पर लगाने से सूजन कम हो जाती है। यह भूख को बढ़ाता है, लीवर को मजूबूती प्रदान करता है तथा बलगम को कम करता है-

टेसू की जड़ का प्रयोग रतौंधी (रात में दिखाई न देना) को ठीक करने, आंख की सूजन को नष्ट करने तथा आंखों की रोशनी को बढ़ाने के लिए किया जाता है-

अनेक प्रकार के रोगों में उपचार-

अफारा (पेट में गैस बनना)-

टेसू की छाल और शुंठी का काढ़ा 40 मिलीलीटर की मात्रा सुबह और शाम पीने से अफारा और पेट का दर्द नष्ट हो जाता है-

आंखों के रोग-

टेसू की ताजी जड़ का 1 बूंद रस आंखों में डालने से आंख की झांक, खील, फूली मोतियाबिंद तथा रतौंधी आदि प्रकार के आंखों के रोग ठीक हो जाते हैं-

नकसीर (नाक से खून आना)-

टेसू के 5 से 7 फूलों को रात भर ठंडे पानी में भिगोएं। सुबह के समय में इस पानी से निकाल दें और पानी को छानकर उसमें थोड़ी सी मिश्री मिलाकर पी लें इससे नकसीर में लाभ मिलता है-

मिर्गी-

4 से 5 बूंद टेसू की जड़ों का रस नाक में डालने से मिर्गी का दौरा बंद हो जाता है-

गलगण्ड (घेंघा) रोग-

टेसू की जड़ को घिसकर कान के नीचे लेप करने से गलगण्ड मिटता है-

उदरकृमि (पेट के कीड़े)-

टेसू के बीज, कबीला, अजवायन, वायविडंग, निसात तथा किरमानी को थोड़े सी मात्रा में मिलाकर बारीक पीसकर रख लें। इसे लगभग 3 ग्राम की मात्रा में गुड़ के साथ देने से पेट में सभी तरह के कीड़े खत्म हो जाते हैं। टेसू के बीजों के चूर्ण को 1 चम्मच की मात्रा में दिन में 2 बार सेवन करने से पेट के सभी कीड़े मरकर बाहर आ जाते हैं-

प्रमेह (वीर्य विकार)-

टेसू की मुंहमुदी (बिल्कुल नई) कोपलों को छाया में सुखाकर कूट-छानकर गुड़ में मिलाकर लगभग 10 ग्राम की मात्रा में सुबह-शाम खाने से प्रमेह नष्ट हो जाता है-

टेसू की जड़ का रस निकालकर उस रस में 3 दिन तक गेहूं के दाने को भिगो दें। उसके बाद दोनों को पीसकर हलवा बनाकर खाने से प्रमेह, शीघ्रपतन (धातु का जल्दी निकल जाना) और कामशक्ति की कमजोरी दूर होती है-

रक्तार्श (खूनी बवासीर)-

टेसू के पंचाग (जड़, तना, पत्ती, फल और फूल) की राख लगभग 15 ग्राम तक गुनगुने घी के साथ सेवन करने से खूनी बवासीर में आराम होता है। इसके कुछ दिन लगातार खाने से बवासीर के मस्से सूख जाते हैं-

अतिसार (दस्त)-

टेसू के गोंद लगभग 650 मिलीग्राम से लेकर 2 ग्राम तक लेकर उसमें थोड़ी दालचीनी और अफीम (चावल के एक दाने के बराबर) मिलाकर खाने से दस्त आना बंद हो जाता है-

टेसू के बीजों का क्वाथ (काढ़ा) एक चम्मच, बकरी का दूध 1 चम्मच दोनों को मिलाकर खाने के बाद दिन में 3 बार खाने से अतिसार में लाभ मिलता है-

सूजन-

टेसू के फूल की पोटली बनाकर बांधने से सूजन नष्ट हो जाती है-

सन्धिवात (जोड़ों का दर्द)-

टेसू के बीजों को बारीक पीसकर शहद के साथ दर्द वाले स्थान पर लेप करने से संधिवात में लाभ मिलता है-

बंदगांठ (गांठ)-

टेसू के पत्तों की पोटली बांधने से बंदगांठ में लाभ मिलता है-

टेसू के जड़ की तीन से पांच ग्राम छाल को दूध के साथ पीने से बंदगांठ में लाभ होता है-

अंडकोष की सूजन-

टेसू के फूल की पोटली बनाकर नाभि के नीचे बांधने से मूत्राशय (वह स्थान जहां पेशाब एकत्रित होता हैं) के रोग समाप्त हो जाते हैं और अंडकोष की सूजन भी नष्ट हो जाती है-

टेसू की छाल को पीसकर लगभग 4 ग्राम की मात्रा में पानी के साथ सुबह और शाम देने से अंडकोष का बढ़ना खत्म हो जाता है-

हैजा-

टेसू के फल 10 ग्राम तथा कलमी शोरा 10 ग्राम दोनों को पानी में घिसकर या पीसकर लेप बना लें। फिर इसे रोगी के पेडू पर लगाएं। यह लेप रोगी के पेड़ू पर बार-बार लगाने से हैजा रोग ठीक हो जाता है-

वाजीकरण (सेक्स पावर)-

5 से 6 बूंद टेसू के जड़ का रस प्रतिदिन 2 बार सेवन करने से अनैच्छिक वीर्यस्राव (शीघ्रपतन) रुक जाता है और काम शक्ति बढ़ती है-

टेसू के बीजों के तेल से लिंग की सीवन सुपारी छोड़कर शेष भाग पर मालिश करने से कुछ ही दिनों में हर तरह की नपुंसकता दूर होती है और कामशक्ति में वृद्धि होती है-

गर्भनिरोध-

टेसू के बीजों को जलाकर राख बना लें और इस राख से आधी मात्रा हींग को इसमें मिलाकर रख लें। इसमें से तीन ग्राम तक की मात्रा ऋतुस्राव (माहवारी) प्रारंभ होते ही और उसके कुछ दिन बाद तक सेवन करने से स्त्री की गर्भधारण करने की शक्ति खत्म हो जाती है-

टेसू के बीज दस ग्राम, शहद बीस ग्राम और घी 10 ग्राम सब को मिलाकर इसमें रुई को भिगोकर बत्ती बना लें और इसे स्त्री प्रसंग से 3 घंटे पूर्व योनिभाग में रखने से गर्भधारण नहीं होता है-

Upcharऔर प्रयोग-

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