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पुत्र-प्राप्ति(Putr-Praapti)हेतु करे अहोई-अष्टमी ब्रत

कार्तिक माह में कश्ष्ण पक्ष की अष्टमी(Ashtami)को पुत्रवती स्त्रियां निर्जल व्रत रखती हैं तथा संध्या समय दीवार पर आठ कानों वाली एक पुतली अंकित की जाती है जिस स्त्री को बेटा हुआ हो अथवा बेटे का विवाह हुआ हो तो उसे अहोई माता(Ahoi Mata)का उजमन करना चाहिए-

पुत्र-प्राप्ति(Putr-Praapti)हेतु करे अहोई-अष्टमी ब्रत

एक थाली में सात जगह चार-चार पूडयां रखकर उन पर थोडा-थोडा हलवा रखें इसके साथ ही एक साडी ब्लाउज उस पर सामर्थ्यानुसार रुपए रखकर थाली के चारों ओर हाथ फेरकर श्रद्धापूर्वक सास के पांव छूकर वह सभी सामान सास को दे दें और हलवा पूरी लोगों को बांटें तथा पुतली के पास ही स्याऊ माता व उसके बच्चे बनाए जाते हैं इस दिन शाम को चंद्रमा को अर्ध्य देकर कच्चा भोजन खाया जाता है तथा यह कथा पढी जाती है-

अहोई अष्टमी(Ahoi Ashtami)कथा-


एक बार ननद-भाभी एक दिन मिट्टी खोदने गई और मिट्टी खोदते-खोदते ननद ने गलती से स्याऊ माता का घर खोद दिया-इससे स्याऊ माता के अण्डे टूट गये व बच्चे कुचले गये-स्याऊ माता ने जब अपने घर व बच्चों की दुर्दशा देखी तो क्रोधित होकर ननद से बोली कि तुमने मेरे बच्चों को कुचला है मैं तुम्हारे पति व बच्चों को खा जाउंगी-

स्याऊ माता को क्रोधित देख ननद तो डर गई पर भाभी स्याऊ माता के आगे हाथ जोडकर विनती करने लगी तथा ननद की सजा स्वयं सहने को तैयार हो गई तब स्याऊ माता बोलीं कि मैं तेरी कोख व मांग दोनों हरूंगी इस पर भाभी बोली कि मां तेरा इतना कहना मानो कोख चाहे हर लो पर मेरी मांग न हरना तो फिर स्याऊ माता मान गईं-

अब समय बीतता गया और भाभी के बच्चा पैदा हुआ और शर्त के अनुसार भाभी ने अपनी पहली संतान स्याऊ माता को दे दी इस तरह वह छह पुत्रों की मां बनकर भी निपूती ही रही और जब सातवीं संतान होने का समय आया तो एक पडोसन ने उसे सलाह दी कि अब स्याऊ मां के पैर छू लेना फिर बातों के दौरान बच्चे को रुला देना जब स्याऊ मां पूछे कि यह क्यों रो रहा है तो कहना कि तुम्हारे कान की बाली मांगता है बाली देकर ले जाने लगे तो फिर पांव छू लेना और यदि वे पुत्रवती होने का आर्शीवाद दें तो बच्चे को मत ले जाने देना-

फिर कुछ समय बाद उसे सातवीं संतान हुई तो स्याऊ माता उसे लेने आईं तो भाभी ने पडोसन की बताई विधि से उसने स्याऊ के आंचल में डाल दिया और बातें करते-करते बच्चे को चुटकी भी काट ली तो बालक रोने लगा तो स्याऊ ने उसके रोने का कारण पूछा तो भाभी बोलीं कि तुम्हारे कान की बाली मांगता है स्याऊ माता ने कान की बाली दे दी और जब चलने लगी तो भाभी ने पुनः पैर छुए तो स्याऊ माता ने पुत्रवती होने का आर्शीवाद दिया तो भाभी ने स्याऊ माता से अपना बच्चा मांगा और कहने लगीं कि पुत्र के बिना पुत्रवती कैसे....? 

आखिर स्याऊ माता ने अपनी हार मान ली तथा कहने लगीं कि मुझे तुम्हारे पुत्र नहीं चाहिएं मैं तो तुम्हारी परीक्षा ले रही थी और यह कहकर स्याऊ माता ने अपनी लट फटकारी तो छह पुत्र पृथ्वी पर आ पडे इस तरह माता ने अपने पुत्र पाए तथा स्याऊ भी प्रसन्न मन से घर गईं-

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