21 अगस्त 2017

लकवे का इलाज बूटाटी धाम में होता है

Treatment of Paralysis in Buutati Dham


आज भी जहाँ विज्ञान भी बहुत सी बातो का पता लगा पाने में जहाँ असफल हो जाता है वहां शुरू होती है श्रधा और अंधविश्वास (Superstitions) जब बच्चो को नजर लग जाती है तो नजर उतारने की प्रक्रिया को मजाक में लोग उड़ा देते है मगर वही जब अपना कोई परिचित भरपूर इलाज़ के बाद भी ठीक ना हो रहा हो  या बिना किसी कारण सुस्त, उखड़ा या उदास हो तो हम झट नजर उतारने के हथियार इस्तेमाल करते है और वो बच्चा ठीक भी हो जाता है-

लकवे का इलाज बूटाटी धाम में होता है

लकवा (Paralysis) के रोगियों को भी चिकित्सकों के इलाज के बाद भी उनकी श्रद्धा नागौर के बूटाटी ग्राम में खींच लाती है यहाँ पर हर साल हजारो लोग पैरालायसिस (लकवे) के रोग से मुक्त होकर जाते है यह धाम नागोर जिले के कुचेरा क़स्बे के पास है अजमेर-नागोर रोड पर यह गावं है  लगभग पांच सौ साल पहले एक संत हुये थे चतुरदास जी वो सिद्ध योगी थे-वो अपनी तपस्या से लोगो को रोग मुक्त करते थे आज भी इनकी समाधी पर सात फेरी लगाने से लकवा जड़ से ख़त्म हो जाता है नागोर जिले के अलावा पूरे देश से लोग आते है और रोग मुक्त होकर जाते है हर साल वैसाख, भादवा और माघ महीने मे पूरे महीने मेला लगता है-

यह मंदिर सिद्ध पुरुष चतुरदास जी महाराज की समाधि है लकवा (Paralysis) के मरीजों को सात दिन का प्रवास करते हुए रोज एक परिक्रमा लगाते हैं सुबह की आरती के बाद पहली परिक्रमा मंदिर के बाहर तथा शाम की आरती के बाद दूसरी परिक्रमा मंदिर के अन्दर लगानी होती है  ये दोनों परिक्रमा मिलकर पूरी एक परिक्रमा कहलाती है सात दिन तक मरीज को इसी प्रकार परिक्रमा लगानी होती है जो मरीज स्वयं चलने फिरने में असमर्थ होते हैं उन्हें परिजन परिक्रमा लगवाते हैं निवास के लिए यहाँ सुविधा युक्त धर्मशालाएं हैं यात्रियों को जरुरत का सभी सामान बिस्तर, राशन, बर्तन, जलावन की लकड़ियाँ आदि निःशुल्क उपलब्ध करवाई जाती हैं इसके अतिरिक्त पास में ही बाजार भी हैं जहाँ यात्री अपनी सुविधा से अन्य वस्तुएं खरीद सकते हैं हर माह की शुक्ल पक्ष की द्वादशी को यहाँ मेला लगता है इसके अतिरिक्त वैशाख , भाद्रपद और माघ महीने में भी विशेष मेलों का आयोजन होता है-

वर्षों पूर्व हुई बीमारी का भी काफी हद तक इलाज होता है यहाँ कोई पण्डित महाराज या हकीम नहीं होता ना ही कोई दवाई लगाकर इलाज किया जाता है यहाँ मरीज के परिजन नियमित लगातार 7 दिन मन्दिर की परिक्रमा लगवाते हैं तथा हवन कुण्ड की भभूति लगाते हैं और लकवे (Paralysis) की बीमारी धीरे-धीरे अपना प्रभाव कम कर देती है शरीर के अंग जो हिलते डुलते नहीं हैं वह धीरे-धीरे काम करने लगते हैं लकवे से पीड़ित जिस व्यक्ति की आवाज बन्द हो जाती वह भी धीरे-धीरे बोलने लगता है यहाँ अनेक मरीज मिले जो डॉक्टरो से इलाज करवाने के बाद निराश हो गए थे लेकिन उन मरीजों को यहाँ काफी हद तक बीमारी में राहत मिली है-

दान में आने वाला रुपया मन्दिर के विकास में लगाया जाता है पूजा करने वाले पुजारी को ट्रस्ट द्वारा तनखाह मिलती है मंदिर के आस-पास फेले परिसर में सैकड़ों मरीज दिखाई देते हैं जिनके चेहरे पर आस्था की करुणा जलकती है संत चतुरदास जी महारज की कृपा का मुक्त कण्ठ प्रशंसा करते दिखाई देते है -

बुटाटी की स्थापना 1600 ई की शुरूआत में की गई पैराणिक कथा बुजुर्गो के अनुसार बुरालाल  शर्मा (दायमा) नामक बाह्मण ने बुटाटी की स्थापना की उसी के नाम पर बुटाटी का नामाकरण हुआ इसके बाद बुटाटी पर राजपुतो का अधिकार हो गया था बुटाटी पर भौम सिंह नामक राजपुत ठाकुर साहब ने इस पर अपना अधिपत्य स्थापित कर लिया उसके बाद बुटाटी नये नाम भौम सिंह जी की बुटाटी के नाम से जानी जाने लगी-

मुख्य मंदिर-

लकवे का इलाज बूटाटी धाम में होता है

ग्राम में पश्चिम दिशा की ओर संत श्री चतुरदास जी महाराज का मंदिर है यह मंदिर आस्था का प्रमुख केन्द्र है इस मंदिर में लकवा पीड़ित व्यक्ति मात्र सात परिक्रमा में एकदम स्वस्थ हो जाता है इस मंदिर परिसर के चारों ओर चार दिवारी व दरवाजे बने हुए है-मंदिर के बाहर से  आने वाले यात्रीयों के लिए बिस्तर, भोजन पीने के लिए ठण्डा पानी, खाना बनाने के लिए समान व बर्तन, जलाने के लिए लकङी सात दिन रूकने के लिए कमरे आदि व्यवस्थाएं निःशुल्क होती है इन व्यवस्थाओं को सुचारू रूप से चलाने का सम्पूर्ण कार्य मंदिर अध्यक्ष करता है- 

मंदिर कमेठी के लगभग 50 व्यक्ति समय-समय पर व्यवस्थाओें का जायजा लेते है सर्दी, गर्मी, बरसात किसी भी मौसम में यहां आने वाले यात्रीयों को असुविधा का सामना नहीं करना पङता है नहाने धोने के लिए मंदिर परिसर में उचित व्यवस्था है यहां एक सुलभ शौचालय भी बना हुआ है जिससे यात्रियों को लघु शंका के लिए बाहर नहीं जाना पङता है मंदिर परिसर में पानी की एक बङी टंकी तथा पानी ठंडा करने के लिए जगह-जगह ठंडे पानी की मशीने लगी है मंदिर परिसर की बहार की ओर लगभग 100 दुकानें है प्रत्येक वर्ष मंदिर में कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष में बारस को एक भव्य मेले का आयोजन किया जाता है-

देखे यूट्यूब पर पूरी जानकारी - https://youtu.be/j70oaG5gtbA

प्रस्तुती- Satyan Srivastava

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1 टिप्पणी:

  1. आप के द्वारा उक्त जानकारी के लिए लाखो धन्यवाद डाक्टरों से लुटने के वाद यह केंद्र मुफ्त ३लाज कर २हा है यह एक चमत्काकार से कम /नही लोगो को ठीक

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