This website about Treatment and use for General Problems and Beauty Tips ,Sexual Related Problems and his solution for Male and Females. Home treatment,Ayurveda treatment ,Homeopathic Remedies. Ayurveda treatment tips in Hindi and also you can read about health Related problems and treatment for male and female

loading...

31 मार्च 2016

Potatoes-आलू में विटामिन होता है

By With कोई टिप्पणी नहीं:
Potatoes-आलू में कैल्शियम, लोहा, विटामिन-बी तथा फास्फोरस बहुतायत में होता है आलू(Potatoes) खाते रहने से रक्त वाहिनियां बड़ी आयु तक लचकदार बनी रहती हैं तथा कठोर नहीं होने पातीं इसलिए आलू खाकर लम्बी आयु प्राप्त की जा सकती है-

Potatoes-आलू


  1. Potatoes-आलू में विटामिन बहुत होता है इसको मीठे दूध में भी मिलाकर पिला सकते हैं आलू को छिलके सहित गरम राख में भूनकर खाना सबसे अधिक गुणकारी है या इसको छिलके सहित पानी में उबालें और गल जाने पर खाएं-
  2. रक्तपित्त बीमारी में कच्चा आलू बहुत फायदा करता है-कभी-कभी चोट लगने पर नील पड़ जाती है नील पड़ी जगह पर कच्चा आलू पीसकर लगाएँ- -
  3. शरीर पर कहीं जल गया हो या तेज धूप से त्वचा झुलस गई हो या फिर त्वचा पर झुर्रियां हों या कोई त्वचा रोग हो तो कच्चे आलू का रस निकालकर लगाने से फायदा होता है-
  4. भुना हुआ आलू(Potatoes)पुरानी कब्ज और अंतड़ियों की सड़ांध दूर करता है- आलू में पोटेशियम साल्ट होता है जो अम्लपित्त को रोकता है-
  5. चार आलू सेंक लें और फिर उनका छिलका उतार कर नमक+ मिर्च डालकर नित्य खाएं- इससे गठिया ठीक हो जाता है-
  6. गुर्दे की पथरी में केवल Potatoes-आलू खाते रहने पर बहुत लाभ होता है पथरी के रोगी को केवल आलू खिलाकर और बार-बार अधिक पानी पिलाते रहने से गुर्दे की पथरियाँ और रेत आसानी से निकल जाती हैं-
  7. उच्च रक्तचाप के रोगी भी Potatoes खाएँ तो रक्तचाप को सामान्य बनाने में लाभ करता है-
  8. Potatoes-आलू को पीसकर त्वचा पर मलें कुछ ही दिनों में आपका रंग गोरा हो जाएगा-
  9. कच्चा आलू पत्थर पर घिसकर सुबह-शाम काजल की तरह लगाने से 5 से 6 वर्ष पुराना जाला और 4 वर्ष तक का फूला 3 मास में साफ हो जाता है-
  10. आलू का रस दूध पीते बच्चों और बड़े बच्चों को पिलाने से वे मोटे-ताजे हो जाते हैं- आलू के रस में मधु मिलाकर भी पिला सकते हैं-
  11. आलुओं में मुर्गी के चूजों जितना प्रोटीन होता है सूखे आलू में 8.5 प्रतिशत प्रोटीन होता है आलू(Potatoes) का प्रोटीन बूढ़ों के लिए बहुत ही शक्ति देने वाला और बुढ़ापे की कमजोरी दूर करने वाला होता है-
  12. और भी देखे-

Upcharऔर प्रयोग-

शरीर के लिए आवश्यक विटामिन और खनिज

By With कोई टिप्पणी नहीं:
प्रस्तुत है आपकी जानकारी के लिए विटामिन और खनिज के क्या सोर्सेज है जो नीचे दिए जा रहे है -

http://www.upcharaurprayog.com/2015/07/essential-vitamins-and-minerals-for-body.html
vitamins and minerals


आवश्यक खनिज लवण खनिज लवण के प्रमुख स्रोत -


कैल्शियम -            दूध, पालक, टमाटर, अंकुरित अन्न, हरी सब्जी, ताजे                              फल

फॉस्फोरस-             दूध, अंकुरित अन्न ,हरी सब्जी,ताजे अन्न

पोटेशियम-             अंकुरित अन्न, हरी सब्जी

सोडियम -              पनीर, दूध, छेना, हरीसब्जी, ताजेफल

क्लोरिन नमक -     दूध ,हरी सब्जी,अंकुरित अन्न

लोह-                  हरी सब्जी, ताजे फल, अंकुरित अन्न,खुर्बानी, कालीदाक्ष,                           तिल ,सेव, अंगूर

मैंग्नीज-                हरी सब्जियां, फल, अंकुरित अन्न

तांबा-                    ताजी हरी सब्जियां, अंकुरित अन्न

आयोडिन नमक-     दूध, समुद्री- खाद्य पदार्थ

फ्लोरिन हरी-         सब्जी, फल, अंकुरित अन्न

जस्ता खमीर-        अंकुरित गेहूं ,यीस्ट आदि

कोबाल्ट -             अंकुरित अन्न, जीवन्त आहार

मोलिब्डन-            हरी सब्जी, ताजे फल, अंकुरित अन्न

सिलीफोन-            अनाज, हरी सब्जी, ताजे फल, जीवन्त आहार इत्यादि

विटामिन के प्रमुख स्रोत -


विटामिन ‘ए’-   पीले फल, पीली सब्जियां (आम, गाजर, पपीता, कद्दू )
                        गहरी हरी सब्जियां (पालक, मूली पत्ता) गौघृत, मख्खन,                            दूध आदि

विटामिन बी -  जैविक आहार, अन्न ,, हरी पत्तीदार सब्जियां, कण युक्त                          चावल (मील छंटा नहीं) आदि
         
                             बी- 2- ताजी हरी सब्जियां दूध, फल
                             बी- 3- नींबू, अंकुरित अन्न, घी, सब्जियां ,, मूंगफली 
                             बी- 6- अंकुरित अन्न, दूध, मेवे, ताजी सब्जियां, फल
                             बी-12- दूध, दही, अंकुरित अन्न

विटामिन एच-         अंकुरित अन्न, दूध, खमीर आदि

पेन्टोथेनिक एसिड-  अंकुरित अन्न, खमीर

कोलिन-                   फल, साग भाजी, अंकुरित अन्न, दूध

इनोसिटाल-              अंकुरित अन्न, खमीर आदि

फोलिक एसिड-         अंकुरित अन्न, ताजी हरी सब्जियां

विटामिन सी-          आंवला, अमरूद, टमाटर व अन्य खट्टे फल, अंकुरित                               अन्न,ताजी हरी सब्जियां, ताजे फल

विटामिन डी-          सुबह की धूप, दूध

विटामिन ई-          अंकुरित अन्न, हरी सब्जी, गेहूं तथा चावल के अंकुर में                              सबसे अधिक

विटामिन के-          ताजी हरी सब्जी, फल, अंकुरित अन्न

विटामिन पी-          खट्टे फल(नींबू आदि) में

विटामिन एफ-        घाणी का कोई भी तेल

फिर तो आप समझ गए होगे कि लगभग काफी विटामिन और खनिज हमें अंकुरित अन्न से प्राप्त होगे तो देर किस बात की आलस्य छोडिये और शुरू करे अंकुरित अन्न खाना -

उपचार और प्रयोग-

घुटने का दर्द-Knee Pain

By With कोई टिप्पणी नहीं:
घुटने का दर्द-Knee Pain

घुटने का दर्द-Knee Pain

दिल्ली यूनिवर्सिटी के एन्टोंमोलाजी के विभागाध्यक्ष विश्व के जाने माने विज्ञानी डॉ0 प्रसाद जी का एक पुत्र डबरा में महाविध्यालय में प्रध्यापक था -डॉ0 साहब अपने पुत्र के पास डबरा(ग्वालियर) आये हुए थे उनके घुटने में दर्द रहता था उन्होंने अपने लड़के से पूछा कि क्या यहाँ कोई होम्योपैथिक डॉक्टर हैं? मै अपने घुटने के दर्द की दवा लाना भूल गया हूँ मुझे दर्द की दवा लेना है -

लड़के ने धीरे से कहा हाँ है तो-उन्होंने कहा बेटा इतने धीरे क्यों कह रहे हो क्या वह बहुत फीस लेता है - लड़के ने कहा पैसा तो एक भी नहीं लेता है - प्रसाद जी ने कहा तो फिर? लड़के ने कहा कि उनके यहाँ दवा लेने के लिए दो तीन घंटे लाइन में लगना पड़ता है-बिना नम्बर के कोई भी दवा नहीं ले सकता है-उन्होंने कहा मै डा0 एस.एन.प्रसाद,विश्व का माना हुआ एन्टोमोलाजिस्ट,किसकी हिम्मत है जो मुझे तीन घंटे लाइन में लगाएगा मुझे तुम उसके यहाँ ले चलो -

डा0 प्रसाद सभी मरीजो को पीछे छोड़ते हुए सीधे कमरे में प्रवेश करने लगे -सबसे आगे खड़े हुए व्यक्ति ने उनसे पूछा कि क्या आप डॉक्टर साहब के रिश्तेदार है-उन्होंने कहा नहीं मुझे दवा लेनी है-उस व्यक्ति ने कहा तो पीछे हो जाइए-डॉक्टर साहब ने देख लिया तो इस जिन्दगी में दवा नहीं मिल पाएगी और उन्हें पीछे हटा दिया-

आखिर संयोग से उनके लड़के का कोई विध्यार्थी वही लाइन में दूसरे-तीसरे नम्बर पर लगा था-उस लड़के ने पूछा सर क्या बात है -प्रसाद जी के लड़के ने कहा पिता जी को दवा लेनी थी -उसने अपनी जगह डा0 प्रसाद को दे दी  -फिर कुछ देर बाद उनका नम्बर आया -हाल पूछा और दो पुड़ियाँ दे दी -कहा आधे-आधे घन्टे से ले लेना -उस समय 200 पोटेन्सी की 2 अथवा 30 पोटेन्सी की चार पुड़ियाँ दिया करता था -उस समय शीशियो को चलन नहीं था -मै स्वयं अपनी दवाईयों की शीशीयां डिस्टल वाटर के खाली डब्बो में रक्खा करता था-

प्रसाद साहब घर चले गए और सोचने लगे दो पुड़ियों के लिए इतनी मारा-मारी और घंटों का इन्तजार किन्तु लड़के आग्रह से उन्होंने ये पुड़ियाँ खाली -दूसरे दिन चाय-नाश्ते के समय लड़के ने पूछा कि पिताजी दर्द कैसा है?डॉक्टर साहब दायें की जगह बाँयां घुटना टटोलने लगे लड़के ने पूछा कि आज इसमें भी दर्द होने लगा है -उन्होंने दोनों घुटने टटोले,उठे,बैठे पर दर्द तो कही था ही नहीं -वे बोले मेरा दर्द तो ठीक हो गया -मै अभी और इसी वक्त उस डॉक्टर से मिलूँगा -लड़का बोला इस समय सात बजने में पांच मिनट है सात बजे वे भीतर चले जायेगे -इसलिए अभी तो आप उनसे नहीं मिल पायेगे -उन्होंने कहा कि नहीं मै अभी उनसे मिलूँगा -लड़के ने कहा मै तो आपके साथ जाऊँगा नहीं क्युकि वे बहुत बेकार आदमी है-आपसे कुछ उल्टा-सीधा बोल देगे-मुझे अच्छा नहीं लगेगा -प्रसाद साहब बोले,ठीक है ,मैने घर देखा है मै अकेला ही चला जाऊँगा-

प्रसाद साहब जब तक मेरे घर पंहुचे तब तक सात बज चुके थे-दरवाजा बन्द था परन्तु प्रतीकात्मक खिड़की खुली हुई थी-उन्होंने दरवाजा खट-खटाया-पूँछा कौन? वे बोले डॉक्टर प्रसाद-मैने कहा शाम को आइये-वे बोले मै आपका बुजुर्ग हूँ-मैने उन्हें अंदर बुला कर आदर से बिठाया-नौकर से चाय लाने के लिए कहा-प्रसाद साहब ने कहा मेरा दर्द ठीक हो गया-मैने उनसे कहा कि दर्द की बात करना हो तो आप शाम को आइये-नौकर को आवाज दे दी, बाबा जा रहे है,चाय कैंसिल-वे हाथ जोड़ने लगे ,कहने लगे बेटा मेरी बात सुन लो -मैने कहा अभी आप मेरे बुजुर्ग थे ,अब आप मेरे हाथ जोड़ रहे है,बताइये मै अब कहाँ जाऊं -उनकी आग्रहपूर्ण मुद्रा देख कर मुझे लगा कि इनसे बात कर ली जाए -

मैने उनसे कहा कि मै आपको पांच मिनट का समय दे रहा हूँ ,आपको जो कुछ भी कहना है जल्दी से कह डालिए -वे बोले मेरा घुटने का दर्द ठीक हो गया-मैने उनसे पूँछा आप कल आये थे-उन्होंने कहा आया था-मैने पूछा लाइन में लगे थे-वे बोले लगा था -मैने कहा आप से हाल पूछा था  -उन्होंने कहा,हाँ,पूँछा था मैने कहा मैने आपको दवा दी थी-उन्होंने कहा हाँ दी थी -मैने पूँछा आपने  दवा  खाई थी-उन्होंने कहा हाँ खाई थी -मैने कहा कि जब आपने दवा खाई और आपका दर्द ठीक हो गया तो आप बताइये कि इसमें आश्चर्य की क्या बात है - उन्होंने कहा कि मै तो बरसों से दवा खा रहा हूँ -मुझे बड़े-बड़े डॉक्टर ने लिटा कर घन्टो हथौड़ो से ठोंका,सुइयां चुभोई और दुनियाभर की जांचे करवाई,ढेरो दवाइयाँ खिलाई मगर लाभ नहीं हुआ - वे डॉक्टर के प्रति अपना रोष प्रगट करने लगे|मैने उनसे कहा कि आप डॉक्टर को दोष मत दीजिये-उन्होंने कहा क्यों?मैने कहा क्युकि आप अपना हाल सही-सही नहीं बता पाते तो डॉक्टर आपको सही दवा कैसे दे सकते है -वे बोले मै डॉक्टर प्रसाद ,कीड़ो मकोड़ों तक के रोम-रोम का हाल जाता हूँ,मै ही अपना हाल नहीं बता पाता -उन्होंने कहा आप अपनी बात सिद्ध कीजिये-मैने कहा अच्छा बताइये आज आपको कैसा लग रहा है -उन्होंने कहा आज मुझे बहुत अच्छा लग रहा है ,शरीर में चुस्ती-फुर्ती है,कोई दर्द नहीं है आदि-मैने उनसे कहा कि अभी एक सिम्पटम और रह गया है-मै आपको पांच मिनट और दे रहा हूँ सोचने के लिए -उन्होंने कुछ और सिम्पटम बताये लेकिन मैने फिर भी कहा कि अभी एक बात रह गई है -वे बोले अब तो कुछ नहीं बचा-मैने कहा अच्छा बताइये आज आपको मोशन कैसा हुआ थे -वे बोले मोशन,मोशन तो आज ऐसा साफ़ हुआ जैसा कि पिछले दस साल से नहीं हुआ होगा -मैने उनसे कहा कि इसे बताने में आपको कुछ शर्म आ रही थी क्या!!वे बोले लेकिन आपको कैसे पता-मैने कहा कि धिक्कार है उस डॉक्टर को जो रोगी को दवा तो दे देता है पर जिसे यह नहीं मालुम कि ये दवा शरीर में जाकर असर क्या करेगी!!सारी गड़बड़ी आपके पेट में ही थी जो अब ठीक हो चुकी है-

कई वर्षो तक मेरे उनसे सम्बन्ध बने रहे|दिल्ली में मेरी भतीजी के विवाह में वे सम्मलित हुए|अपने परिवार और विशिस्ट मित्रो को मुझसे मिलवाया|अनेक विदेशी मरीजो को भी मेरे पास चिकित्सा के लिए भेजा जिनमे से कुछ के बारे में आप आगे के लेख में पढेगे-

आप हमारी सभी पोस्ट होम्योपैथी के केस की एक साथ इस लिंक पे जाके देख सकते है -

लिंक- Disease-Homeopathy

  • मेरा पता-
  • KAAYAKALP
  • Homoeopathic Clinic & Research Centre
  • 23,Mayur Market, Thatipur, Gwalior(M.P.)-474011
  • Director & Chief Physician:

  • Dr.Satish Saxena D.H.B.
  • Regd.N.o.7407 (M.P.)
  • Ph :    0751-2344259 (C) 0751-2342827 (R)
  • Mo:    09977423220

30 मार्च 2016

घुटने की नस का सिकुड़ना-Knee Vein Shrinkage

By With कोई टिप्पणी नहीं:
घुटने की नस का सिकुड़ना-Knee Vein Shrinkage

घुटने की नस का सिकुड़ना-Knee Vein Shrinkage-

यह उस समय का केस है जब मै होम्योपैथिक चिकित्सा जगत(Homeopathic Medical World) में प्रवेश कर ही रहा था और उस समय मै डबरा में पदस्थ था हमारे घर के नीचे एक स्टेशन मास्टर साहब रहा करते थे उस दिन उनके घर गंगा दशहरे के कारण सत्यनारायण की कथा हो रही थी-उनके यहाँ एक अन्य स्टेशन मास्टर श्री खनूजा जी आये हुए थे जो एक पुराने और डी.एच.वी.पास डॉक्टर थे-फिलोसाफी और आर्गेनन पर उनकी बहुत अच्छी पकड़ थी-

मैने उनसे कहा कि मेरी बेटी को बुखार आ रहा है मैने उसे नेट्रम म्यूर 30 दी है पर बुखार नहीं उतर रहा है उन्होंने कहा कि दवा तो तुमने सही दी है परन्तु 6एक्स पोटेंसी में दो-उस समय मै दवाइयां 30 या 200 की पोटेन्सी में ही रखता था-बड़ा एहसान सा जताते हुए उनने कहा कि दो-तीन खुराक तो मै दे दूंगा और लश्कर से जाकर ले आना मैने सोचा कि दो तीन खुराक तो अभी दे ही दूँ  और दवा लेने के लिए उनके घर चला गया वहां उनकी पत्नी ने सोचा कि में भी डॉक्टर हूँ सो वे अपने लड़के को लेकर मेरे पास आकर बोली कि मै इनसे कहती हूँ कि इसको दिल्ली लेकर चलो वहाँ हमारे रिश्तेदार है वे इसके पैर का आपरेशन करवा देंगे -

वह केस इस प्रकार था-लड़के की आयु 10 वर्ष थी और उसके घुटने के उपर की तरफ एक फोड़ा हुआ था जो खिसकते-खसकते घुटने के नीचे की तरफ पोप्लीटियल फोसा में आ गया और उसने मुख्य टेंडन पर स्थित होकर उसे सिकोड़ना शुरू कर दिया यहाँ तक कि उसने पंजे को जमीन से लगभग 15 सेंटीमीटर उपर उठा दिया था चलने के लिए उसे लाठी का सहारा लेना पड़ता था खनूजा जी ने मुझसे कहा कि आप बताइये कि यह केस मेडिसिन का है या सर्जरी का -

केस तो मेरे समझ में आ गया पर सोचा अगर सर्जरी कहता हूँ तो गलत होगा और मेडिसिन का कहता हूँ तो अभी इनकी पत्नी कहेगी कि आप भी इनकी बातो में आ गए-मेरी कोई बात ही नहीं मानता फिर मन में सोचा कि किसी को खुश या नाराज होने के डर से गलत बात नहीं कहना चाहिए -मैने उनसे कहा कि केस तो मेडिसिन का ही है -

खनूजा जी ने मुझसे पूछा कि इसे क्या मेडिसिन देना चाहिए-पहिले तो मैने टाल-मटोल की सोची-सोचा कि ये तो खुद ही एक पुराने डॉक्टर है मेरे जैसा नया आदमी इनको क्या सलाह दे सकता है-कहा कि मुझे किताबे देखनी पड़ेगी-उन्होंने कहा कि ये रक्खी है किताबे देख लो क्या देखना है -मैने विश्वास के साथ स्पष्टरूप से कहा कि इस केस के लिए केवल एक ही पैथी है और वह है होम्योपैथी और होम्योपैथी(Homeopathy) में एक ही दवा है और वह दवा है "कास्टीकम"-वे माथा ठोंक कर बोले,तुम ठीक कहते हो,न जाने क्यों ये दवा मेरे दिमाग में नहीं आई-उन्होंने देखा तो उनके पास "कास्टीकम 30" थी नहीं-मैने कहा कि मेरे पास जर्मनी की है मै आपको दे देता हूँ -

कुछ ही दिनों में दवा के प्रभाव से लड़के का पैर खुलने लगा और पंजा जमीन को छूने लगा था इस बीच उन्होंने एक अन्य डॉक्टर एच.सी.सक्सेना को,जिनका तकिया कलाम था 'बीस साल का तजुर्बा',दिखा दिया और उन्होंने उसे "रसटाक्स 1000" की दवा खिला दी जिसका नतीजा यह हुआ कि पैर फिर से सिकुड़ गया और अब जमीन से 25 सेंटीमीटर उपर उठ गया -दोनों पति-पत्नी मेरे पास आये और बच्चे के सिर पर हाथ रख कर कसम खाई कि अब वे कोई दवा नहीं देगे -

रसटाक्स को एंटीडोट कर फिर कास्टीकम दिया -धीरे-धीरे पोटेन्सी भी बढाई और अंत में पैर बिलकुल सामान्य हो गया आज वह बालक शासकीय महाविध्यालय में ला फेकल्टी में हेड आफ डिपार्टमेन्ट हैं- उसने अपनी पत्नी से मेरा परिचय कराते हुए कहा कि मेरे बाप ने तो मुझे लंगड़ा कर दिया था,अंकिल जी ने ही मुझे ये टाँगे दी है -मैने कहा होम्योपैथी को ही धन्यवाद दो मुझे नहीं -

प्रस्तुत सभी लेख और प्रयोग मेरे जीवन काल के सत्य अनुभव से जुड़े है उनका उल्लेख किया है कथा या कहानी पे आधारित नहीं है -

आप हमारी सभी पोस्ट होम्योपैथी के केस की एक साथ इस लिंक पे जाके देख सकते है -

लिंक- Disease-Homeopathy
  • मेरा पता-
  • KAAYAKALP
  • Homoeopathic Clinic & Research Centre
  • 23,Mayur Market, Thatipur, Gwalior(M.P.)-474011
  • Director & Chief Physician:

  • Dr.Satish Saxena D.H.B.
  • Regd.N.o.7407 (M.P.)
  • Ph :    0751-2344259 (C) 0751-2342827 (R)
  • Mo:    09977423220
Upcharऔर प्रयोग-

29 मार्च 2016

शोक मुक्ति का इलाज-Treatment Mourning liberation

By With कोई टिप्पणी नहीं:

शोक मुक्ति का इलाज-Treatment Mourning liberation

शोक मुक्ति का इलाज-Treatment Mourning liberation

मेरे पडोस में कई मुस्लिम परिवार रहते थे एक मित्र के चार वर्षीय बेटे की मृत्यु हो गई- माँ शोक से हाल-बेहाल हो गई-समझाने बुझाने का कोई असर नहीं था दीवाल से सिर पटक-पटक कर सारा माथा सुजा लिया और हालत बहुत दयनीय हो गई तब वे मेरे पास आये और बोले बच्चा तो चला गया अब बीबी भी जा रही है बचा सकते हो तो बचा लो- 

तत्काल होने वाले शोक,हानि,आदि अकस्मिक घटनाओं के दुस्प्रभाव को दूर करने के लिए 'इग्निशिया' की बहुत प्रशंसा की गई है इसलिए इसकी 1000 पोटेंसी की दो खुराकें आधे-आधे घन्टे से दी गई -आवश्यक होने के कारण मै आफिस चला गया किन्तु मन में बहुत चिन्ता बनी रही-रह-रह कर मन में विचार आता रहा कि जाने उस बेचारी का क्या हाल होगा-

आफिस से वापस आते ही उनके घर गया-बाहर के दरवाजे से सामने ही उनका रसोई घर था-बाहर से ही मैने उसे हांड़ी पकाते हुए देखा-उसे सामान्य देख कर मै निश्चिन्त हो गया बाद में 'आर्निका' और सिर की चोट को देखते हुए 'नेट्रम सल्फ़' देकर चिकित्सा पूर्ण कर दी गई -

  • मेरा पता-
  • KAAYAKALP
  • Homoeopathic Clinic & Research Centre
  • 23,Mayur Market, Thatipur, Gwalior(M.P.)-474011
  • Director & Chief Physician:

  • Dr.Satish Saxena D.H.B.
  • Regd.N.o.7407 (M.P.)
  • Ph :    0751-2344259 (C) 0751-2342827 (R)
  • Mo:    09977423220

28 मार्च 2016

उल्टी द्वारा मल त्याग-Sewage Coming from Vomiting

By With कोई टिप्पणी नहीं:
उल्टी द्वारा मल त्याग-Sewage Coming from Vomiting

उल्टी द्वारा मल त्याग-Sewage Coming from Vomiting

हमने आपको पिछली पोस्ट में "इग्निशिया" के बारे में अवगत कराया था इस पोस्ट में भी 'इग्निशिया' के बारे में थोड़ी से और चर्चा करते है -

उल्टी द्वारा मल त्याग-

मेरा एक मित्र के साथ एक जज साहब के घर जाना हुआ - उनके निवास के कार्यालय में बैठे हम चर्चा कर ही रहे थे कि तभी घर के अंदर से बहुत जोर-जोर से उल्टी होने की आवाजे सुनाई देने लगी - मैने सोचा कि जज साहब क्या हुआ है यह जानने के लिए घर के अंदर चले जायेगे और बहुत देर तक हमें यही बैठे रहना पड़ेगा -किन्तु जज साहब बिना किसी घबडाहट के वही बैठे चर्चा करते रहे तो मुझे बड़ा आश्चर्य हुआ -

आखिर कौतुहलवश  मैने पूछ ही लिया कि ये आवाजे कैसी है - जज साहब ने बड़े दुखी मन से कहा कि क्या बताऊँ,मेरे 25-26 साल के बड़े बेटे को बरसों से इसी प्रकार उल्टियाँ हो रही है हर प्रकार का इलाज करा लिया कुछ नहीं होता - उसका मल -मलद्वार की जगह इसी तरह उल्टी के जरिये निकलता है - लड़के की हालत बुरी हो जाती है - उच्च शिक्षा और कामयाब वकील होते हुए भी बहुत दुखी व् अवसादग्रस्त रहता है -

मेरे मित्र के कहने पर कि ये सक्सेनाजी बैसे तो पी.डब्लू.डी. में इंजीनियर है पर ये बहुत अच्छे होम्योपैथिक डॉक्टर भी है उन्होंने मुझसे इलाज करने का आग्रह किया-अन्य लक्षण तो सब सामान्य दिखे किन्तु गंभीरता से सोचने के बाद समझ में यही आया कि यह भी रिफ्लेक्सेज के रिवर्स होने के कारण ही हो रहा है- दवा तो वही थी 'इग्निशिया' अत: इसकी 1000 पोटेंसी की दो पुड़ियाँ दी गई-दो तीन दिन में लक्षण सामान्य होने लगे व् एक सप्ताह में उसकी यह कठिनाई पूरी तरह दूर हो गई -

  • मेरा पता-
  • KAAYAKALP
  • Homoeopathic Clinic & Research Centre
  • 23,Mayur Market, Thatipur, Gwalior(M.P.)-474011
  • Director & Chief Physician:

  • Dr.Satish Saxena D.H.B.
  • Regd.N.o.7407 (M.P.)
  • Ph :    0751-2344259 (C) 0751-2342827 (R)
  • Mo:    09977423220

27 मार्च 2016

बच्चों का हकलाना-Children Stutter

By With कोई टिप्पणी नहीं:
बच्चों का हकलाना-Children Stutter

बच्चों का हकलाना-Children Stutter-

ग्वालियर के ए.जी. आफिस में शर्मा जी आडिटर थे तथा शास्त्री नगर के शासकीय आवासों में ही उनका निवास स्थान था उस समय ठाठीपुर में येसा बाजार विकसित नहीं हुआ था जैसा कि आजकल है इसलिए उनको बाजार-हाट के लिए मुरार(ग्वालियर) ही आना पड़ता था -

एक बार शर्मा जी अपनी दवा लेने के लिए मेरे पास आये साथ में उनका चार वर्ष का बेटा भी था -दवा ले कर चलते वक्त शर्मा जी ने अपने बच्चे से कहा कि डॉक्टर अंकल को नमस्ते करो -बच्चा हकलाते हुए बोला- अंकिल ननननमस्ते-

मैने कहा देखो भाई ,हम तो येसे नमस्ते करते नहीं है यह कह कर मैने उसे "स्ट्रैमानियम1000" की दो पुड़ियाँ दे दी और कहा कि आधे-आधे घन्टे से दो बार अभी दे दो -उस समय दिन के ग्यारह बजे थे -सौदा-सामान लेते शर्मा जी को काफी समय लग गया-

लौटते-लौटते शर्मा जी को दो बज गए और संयोग से एक अन्य परिचित उन्हें मिल गए तो उन्होंने बच्चे को उनसे नमस्कार करने को कहा -बच्चे ने बिना हकलाये सीधे-सीधे नमस्कार कर लिया-अब तो शर्मा जी के आश्चर्य का ठिकाना नहीं रहा -उस दिन रविवार था सो मै क्लिनिक पर केवल दोपहर दो बजे तक ही बैठता था शर्मा जी लौटते वक्त मेरे पास आये और बच्चे को मुझसे नमस्ते करने को कहा -उसने शुद्ध उच्चारण के साथ मुझसे नमस्कार कर लिया -

मैने बच्चे से कहा 'यह हुई न कुछ बात और आशीर्वाद दे दिया सदा सुखी भव !'


आप हमारी सभी पोस्ट होम्योपैथी के केस की एक साथ इस लिंक पे जाके देख सकते है -

लिंक- Disease-Homeopathy

  • मेरा पता-
  • KAAYAKALP
  • Homoeopathic Clinic & Research Centre
  • 23,Mayur Market, Thatipur, Gwalior(M.P.)-474011
  • Director & Chief Physician:

  • Dr.Satish Saxena D.H.B.
  • Regd.N.o.7407 (M.P.)
  • Ph :    0751-2344259 (C) 0751-2342827 (R)
  • Mo:    09977423220

26 मार्च 2016

पेशाब में रुकावट-Obstruction In Urine

By With कोई टिप्पणी नहीं:
पेशाब में रुकावट-Obstruction In Urine

पेशाब में रुकावट-Obstruction In Urine-

मेरे चिकित्सक जीवन का यह एक अत्यंत महत्वपूर्ण केस है मनुष्य के शरीर तथा मन-मस्तिष्क पर होम्योपैथिक औषिधियां(Homeopathic drugs) किस प्रकार और किस गहराई तक काम करती है उसका एक अद्रितीय उदाहरण प्रस्तुत है -

ये बात सन 1976 की है हमने अपना एक क्लिनिक मुरार(ग्वालियर) में ठंडी सड़क पर ठीक कोतवाली के सामने खोल रक्खा था सबह-शाम डॉक्टरी करता था दिन भर अपने कार्यालय के काम को निपटाता था हमारा कार्यालय मोती-महल के पिछले हिस्से में था- सामने चौक था  जहाँ से उपर की मंजिल पर लगने वाले एकाउंटेंट जरनल के कार्यालय के लिए रास्ता जाता था - ए.जी.आफिस में ही एक आडिटर थे शर्मा जी जो कि हमारे यहाँ इलाज कराने आते थे -

एक दिन जब शर्मा जी मिले तो उनके साथ उनके एकाउन्ट्स आफिसर श्री मिश्रा जी भी थे -शर्मा जी ने मेरा परिचय मिश्रा जी से कराया - मैने देखा कि मिश्रा जी एक एयरबैग बगल में दबाये हुए है आखिर कौतुहलवश हमने उनसे पूछ ही लिया कि कही से आप आ रहे है? -वे बोले नहीं - फिर कही जा रहे है? -वे बोले नहीं -फिर ये एयरबैग किस लिए?

तब उन्होंने बताया कि ये बड़े दुःख -दर्द की कहानी है -मैने पूछा कि वह क्या है?वे बोले मुझे पेशाब नहीं होती है सभी प्रकार की जांचे और इलाज करा लिए लेकिन कोई लाभ नहीं हुआ-जांच के लिए मद्रास के अपोलो अस्पताल में एक महीने भर्ती रहा किन्तु कुछ भी परिणाम नहीं निकला-न प्रोस्टेट बढ़ा हुआ है नही किसी नली में सुकड़ाव आदि है-डॉक्टर हर नारायण दुबे जी से भी होम्योपैथिक इलाज करवाया - डॉक्टर दुबे  एम्.बी.बी.एस. तथा मिलिट्री  सर्विसेज से रिटायर्ड डॉक्टर और उस समय ग्वालियर के सिविल सर्जन थे - वे होम्योपैथी के बहुत प्रसिद्ध चिकित्सक भी थे -उनके पास देश-विदेश में छपी दुर्लभ पुस्तको का बहुत बड़ा संग्रह था - उनकी दवाईयों से तो कोई लाभ नहीं हुआ पर उन्होंने मुझे बताया कि तुम सिर के बल खड़े होकर पेशाब किया करो- इससे पेशाब तो हो जाती है पर कई बार कपडे खराब हो जाते है इस लिए कपडे लेकर चलना पड़ता है-स्वीपर को अलग से पैसे देकर बाथरूम की सफाई करवाता हूँ- इसी कारण कही आ जा नहीं सकता हूँ न लम्बा सफर कर सकता हूँ - हर तरफ से निराश हो चुका हूँ कि क्या करूँ - अनायास ही मेरे मुंह से निकल गया 'आप , मेरे पास आ जाना ,मै आपको ठीक कर दूंगा '-

अगले दिन रविवार था -सुबह क्लिनिक खोलते-खोलते ही मिश्रा जी आ खड़े हुए - बोले लो जी मै आ गया हूँ अब आप मुझे ठीक कर दीजिये ?

अब तो मेरे चौकने की बारी थी - यों तो मै यह कभी भी किसी से भी नहीं कहता हूँ कि मै ठीक कर दूंगा पर उस दिन का कहना मुझे भारी पड़ गया - डा0 हैनीमन साहब ने भी कहा है "मै इलाज करता हूँ ,वह ठीक करता है " यही पूर्ण सत्य भी है - लेकिन अब हो भी क्या सकता था -मन ही मन भगवान् से प्रार्थना की कि "प्रभु ! गलती हो गई क्षमा करो,"-इस बार तो मेरी इज्जत रख लो ,आगे से मेरी तोबा-

इसके पश्चात कुछ संयत होकर विचार करना शुरू किया जांचो में कही कोई रुकावट नहीं पाई गई है-दूसरे होम्योपैथी सहित सभी प्रकार की चिकित्सा हो चुकी है तथा पेशाब सम्बन्धी सभी दवाइयाँ भारी मात्रा में पाहिले ही दी जा चुकी है -जहाँ तक सिर के बल खड़े होकर पेशाब करने का सवाल है सोचा कि भगवान् ने उन इन्द्रियों को येसी जगह बनाया है कि उनकी उंचाई में किसी भी स्थिति में कोई अंतर नहीं आता -गंभीरतापूर्वक सोचने पर एक ही संभावना नजर आई कि हो न हो रिफ्लेक्सेज के पलटने के कारण हो सकता है -

फिर ध्यान में मेडिसिन आई 'इग्निशीया' - यह एक ऐसी दवा है जिसमे सामान्य से उल्टा प्रभाव पाया जाता है जैसे किसी से कहा आइये ,बैठिये , सामने वाला कहता है ,नहीं मै तो जा रहा हूँ - पूँछा चाय पियोगे ? सामने वाला कहता है ,नहीं मुझे नहीं पीना - यदि आपने नहीं पूँछा तो कहेगा,क्या बात है ,आज नाराज हो क्या,चाय तक को भी नहीं पूंछ रहे हो - वैसे भी मै गणित का विध्यार्थी रहा हूँ - गणित में दो ऋणात्मक संख्याये मिलने पर वे धनात्मक हो जाती है - सोचा कि यदि यह सही है तो उल्टे का उल्टा सीधा हो जाना चाहिए - भगवान् का नाम लेकर इग्निशीया 1000 की दो ख़ुराके और कुछ प्लेन गोलियां देकर अगले सप्ताह मिलने के लिए कह दिया -

अगले दिन क्लिनिक खोलने के पहले ही मिश्रा जी खड़े थे - सोचा आज तो दिन बेकार जाने वाला है अब ये कहेगे कि मुझे कोई फायदा नहीं है -सुबह-सुबह ही आशंका मन में आने लगी - लेकिन मिश्रा जी तो बहुत खुश थे -बोले- डॉक्टर साहब,आज तो मै जैसे ही लेट्रिन के लिए बैठा वैसे ही मुझे खुलकर पेशाब हो गई-आपको बहुत-बहुत धन्यवाद - मैने कहा अभी तो आपके पास छ: दिन की दवा और है उसे तो ले लीजिये फिर बताना- कहना न होगा इसके बाद तो उन्हें दवा की आवश्यकता ही नहीं हुई -

यदि यहाँ  केवल शरीरिक लक्षणों को ले कर बात समाप्त कर दी जाए तो बात अधूरी ही रहेगी- हुआ यों कि इंजीनियर-इन-चीफ,लोक निर्माण विभाग कार्यालय ,भोपाल में मेरे एक मित्र कार्यरत थे जिन्हें मै अपने बड़े भाई की तरह सम्मान देता था-उनका पत्र मेरे पास आया जिसमे उन्होंने लिखा था कि मैने सुपीरियर क्लर्कशिप की परीक्षा दी है-उसमे मेरा एक पेपर खराब हो गया है- उसकी कापी ग्वालियर के एक एकाउन्ट्स आफिसर मिश्रा साहब के पास गई है- मिश्रा साहब एक बहुत ही ईमानदार और सख्त अधिकारी है- यदि कोई उनसे सिफारिस आदि करता है तो वे पास को भी फेल कर देते है- इसलिए यदि तुम्हारे पास कोई अच्छा सा सोर्स हो तो ही कोशिश करना- यह मेरा तीसरा और आखिरी चांस है - यदि इसमें पास नहीं हुआ तो मै कभी भी सुपरिंटेडेन्ट नहीं बन सकूंगा -

मन में सोचा क्या किया जाए-वैसे तो मुझसे अच्छा कोई सोर्स हो ही नहीं सकता था - वैसे भी यदि फेल को कोई फेल कर भी देता है तो हानि क्या होगी- फिर एक बात और मन में आई कि देखा जाय कि "इग्निशिया" से मिश्रा जी के मानसिक लक्षणों में क्या परिवर्तन आया-अत: मैने मिश्रा जी के घर जाना ही उचित समझा -दूसरे दिन सुबह मै उनके घर जा पंहुचा -

मुझे अपने घर आया देख कर मिश्रा जी बहुत प्रसन्न हो गए- कभी ठंडा तो कभी गरम तो कभी कुछ मेरे स्वागत में रखते- इतना तो वे समझ ही गए कि डॉक्टर साहब के किसी केन्डीडेट की कापी शायद आई है-चाय नाश्ते के बाद हाथ जोड़ कर खड़े हो गए और बोले-मेरे लायक कोई सेवा हो तो बताइये-मैने औपचारिकता का ध्यान रखते हुए कहा कि आप कहते रहते है कि मै आता नहीं हूँ ,आज मै इधर से निकल रहा था सोचा आप से मिलता चलूँ - वे बोले आपने मुझ पर बड़ी कृपा की किन्तु मै जानता हूँ कि आपको मरने की फुरसत नहीं होती है इसलिए यदि मेरे लायक कोई सेवा हो तो निसंकोच कहिये-मैने उनसे कहा कि आप एक सिंद्धांत वाले आदमी है और मै भी एक सिंद्धांत वाला आदमी हूँ और एक सिद्धांतवाला आदमी किसी दूसरे सिद्धांतवाले आदमी का सिद्धांत नहीं तुड़वाता है-उन्होंने मुझे बड़ा प्यारा सा उत्तर दिया-सिद्धान्त तो जिन्दगी से लगे है और आपने मुझे एक नई जिन्दगी दी है -यदि कोई सेवा हो तो नि:संकोच बता दीजिये- मैने वह पत्र जेब से निकालकर उनके हाथ में दे दिया - वे पढ़ते जाएँ और मुस्कराते जायं क्युकि उसमे उनकी ईमानदारी और चरित्र की प्रसंशा भी थी-उन्होंने उसमे से रोल नम्बर नोट कर लिया-फिर बोले एक कापी ग्वालियर में और आई है ,मै उसको भी भी देख लूँगा -

वे दूसरे परीक्षक के पास भी गए और रोल नम्बर देते हुए उससे निवेदन किया कि आप इसे अवस्य देख लीजिये अब उस परीक्षक के चौंकने की बारी थी- उसे अपार आश्चर्य हुआ कि जिस व्यक्ति ने कभी किसी की सिफारिश न मानी हो वह आज किसी दूसरे के लिए हाथ जोड़ रहा है -उन्होंने यही कहा कि मिश्रा जी यह व्यक्ति तो समझो पास हो गया- यदि इसने कुछ भी नहीं लिखा होगा तो मै अपने हाथ से लिख कर इसे पास कर दूंगा पर मुझे यह बताइये कि यह भाग्यशाली व्यक्ति है कौन ? उन्होंने कहा कि मै इसे नहीं जानता -यह हमारे डॉक्टर साहब का केन्डीडेट है ,इसलिए मै आपसे फिर निवेदन कर रहा हूँ -

रिजल्ट आने के बाद भोपाल से मेरे पास भाई साहब का फोन आया -बोले भईया मै पास हो गया आपको बधाई -मैने कहा भाई साहब आप ये कौन सी भाषा बोल रहे है ,पास आप हुए है -आपको बहुत-बहुत बधाई - वे बोले मै तो केवल कागज में पास हुआ हूँ- वास्तव में पास तो तुम हुए हो जिसने असम्भव को संभव करके बता दिया - मैने उनसे कहा कि पास तो मै भी नहीं हुआ हूँ , पास तो होम्योपैथी हुई है इसलिए होम्योपैथी को बधाई !!

आप हमारी सभी पोस्ट होम्योपैथी के केस की एक साथ इस लिंक पे जाके देख सकते है -

लिंक- Disease-Homeopathy

  • मेरा पता-
  • KAAYAKALP
  • Homoeopathic Clinic & Research Centre
  • 23,Mayur Market, Thatipur, Gwalior(M.P.)-474011
  • Director & Chief Physician:

  • Dr.Satish Saxena D.H.B.
  • Regd.N.o.7407 (M.P.)
  • Ph :    0751-2344259 (C) 0751-2342827 (R)
  • Mo:    09977423220

25 मार्च 2016

दवा और पोटेन्सी-Drug and Potensi

By With 1 टिप्पणी:
 दवा और पोटेन्सी-Drug and Potensi

दवा और पोटेन्सी-Drug and Potensi

सिम्पटम(Symptoms)की तरह ही पोटेंसी(Potensi) का प्रकरण भी बहुत गंभीर है यों तो सभी दवाइयाँ पोटेंसियो में ही कार्य करती है परन्तु कुछ सिम्पटम येसे विशिष्ठ होते है जो किसी ख़ास पोटेंसी में ही अच्छा कार्य करते है जैसे उदाहरण के रूप में मेरा निजी एक अनुभव है -

लक्षणों के अनुसार निर्देशित होने पर 'केल्केरिया कार्ब(Calcarea carb)' 200 शक्ति में देने पर वजन कम करती है तथा इसकी अन्य शक्तियां वजन बढाती है इसी प्रकार गुर्दे की पथरी में 'लायकोपोडियम(Laikopodiam)' की उच्च शक्ति का प्रयोग तभी करना चाहिए जब पथरी को बाहर निकालना हो इसलिए पोटेंसी का निर्णय करते समय यह देखना आवश्यक है कि रोग पुराना है अथवा नया मस्क्युलर या फिजिकल प्लेन पर है अथवा मेटल या वाइटल प्लेन पर -

आप शायद नहीं समझे है तो चलिए आपको एक और उदाहरण से समझाने का प्रयास करता हूँ -मानलीजिये आप कुएं से पानी निकाल रहे है -यदि पानी बीस मीटर गहराई पर है तो आपको रस्सी कम से कम इक्कीस मीटर लम्बी होनी चाहिए तभी आपको पानी मिल सकेगा यदि रस्सी उन्नीस मीटर की है तो रस्सी,बाल्टी,पानी आदि सब कुछ होते हुए भी आपको पानी नहीं मिलेगा -इसके विपरीत आप तीस-चालीस मीटर लम्बी रस्सी डाल दे तो पानी तो आपको मिलेगा पर आपकी बहुत सारी शक्ति और समय यों ही व्यर्थ चला जाएगा -इसलिए पोटेंसी का चुनाव उपरोक्त बातो को ध्यान में रख कर ही करना चाहिए -

जीवनी शक्ति का पोटेंसी के साथ बहुत गहरा सम्बन्ध है जीवनी शक्ति दुर्बल हो पर कभी-कभी उच्च शक्ति में दी गई औषिधि प्राणों के लिए घातक भी हो सकती है - मै आपको यहाँ अपने जीवन का एक उदाहरण और देना चाहूँगा -

मेरे एक मित्र की श्वास रोग से पीड़ित पत्नी अत्यधिक बीमार थी वे उनका इलाज स्वयं ही कर रहे थे -मैने उनसे पूछा कि क्या दवाइयां दे रहे हो तो उन्होंने बताया कि मै उन्हें सेनेगा,इपिकाक,आर्सेनिकम एल्वम आदि दे चूका हूँ इनके लक्षण कैप्सिकम से बहुत मिल रहे है इसलिए मै इन्हें इसकी हाई डोज देना चाहता हूँ मैने उनसे कहा कि इनकी जीवनी शक्ति बहुत कमजोर हो गई है इसलिए इन्हें भूल कर भी नहीं देना - दीपक की लों जहाँ मंद गति की वायु से अधिक चमकती है वही हवा के तेज झोके से बुझ भी जाती है इसे आप अवस्य ही ध्यान रक्खे -

कहावत है "जाको प्रभु दारुण दुःख देही ताकि मति पहिले हर लेहीं "-मेरी सलाह का उन पर कोई प्रभाव नहीं हुआ और जैसे ही उन्होंने कैप्सिकम 1000 की खुराक दी जीवन दीप बुझ गया जब मै उनके यहाँ सहानुभूति दिखाने पंहुचा तो वे मुझसे लिपट कर रोने लगे और बोले मैने अपनी पत्नी की हत्या कर दी अब मै क्या कहता सिवाय इसके कि भगवान् को यही मंजूर था इसमें किसी का क्या दोष -

एक दूसरा उदाहरण देखिये मेरे एक मित्र की पत्नी को हार्ट अटैक हुआ तत्काल एलोपेथिक चिकित्सा सुविधाए मिल जाने के कारण उनके जीवन की रक्षा हो गई इसके बाद उन्होंने अपनी होम्योपैथिक चिकित्सा प्रारंभ कर दी एक दिन उनने मुझसे कहा कि मेरा ब्लड प्रेशर नापने का यन्त्र खराब हो गया है आप क्लिनिक से लौटते हुए जरा मैडम का ब्लड-प्रेशर देख लेना -क्लिनिक से लौटते समय मैने उनका बी.पी. चेक किया जो लगभग ठीक था मैने उनसे पूछा आप इन्हें क्या दवाई दे रहे है -जो दवाइयाँ उन्होंने मुझे बताई उन्हें डिजीटेलिस 1000 भी थी तब मैने उनसे कहा कि डिजीटेलिस इतनी ऊँची पोटेंसी में देना उचित नहीं है तो वे बोले कि मुझे बहुत लाभ दिख रहा है -तीसरे दिन उनकी पत्नी के ह्रदय की विध्युत प्रणाली गड़बड़ा गई तथा गंभीर दशा में देहली ले जाकर पेसमेकर लगवाना पड़ा -इस बीच उन्होंने कई पुस्तको का अध्ययन किया और ग्वालियर आते ही उनने मझसे कहा कि आप ठीक कहते थे -डिजीटेलिस 12 पोटेंसी से अधिक में नहीं देना चाहिए -

जीवन में दो एक बार इस प्रक्रिया का उल्टा प्रयोग करने का भी अवसर आया एक उदाहरण देखिये -नगर के एक प्रतिष्ठित डॉक्टर साहब के बुजुर्ग पिताजी दमा रोग से पीड़ित थे रोग चिकित्सा द्वारा आरोग्य होने की सीमा से बाहर जा चुका था- वे कई बार जीवन की अंतिम सीमा को छू-छू कर वापिस आ जाते-घर वाले सभी असमंजस्य में -रिश्तेदार आ-आ कर चले जाते-मेरे विभाग के चीफ इंजीनियर साहब जो ,उन डॉक्टर साहब के अच्छे मित्र थे,के साथ उनके घर जाना हुआ-मेरा परिचय भी एक डॉक्टर की तरह ही करवाया गया -डॉक्टर साहब व् उनकी पत्नी ने भी बड़ी डबडबाई आँखों से मुझसे कहा कि- डॉक्टर साहब ,पिताजी का कष्ट अब देखा नहीं जाता है क्या आपकी पैथी में कोई ऐसी दवा है जो इन्हें इस यातना से मुक्ति दिला सके-

इनकी इस बात ने मुझे असमंजस में डाल दिया हमारे चीफ इंजीनियर साहब को विश्वाश था कि येसी दवा जरुर जानता होऊंगा इसलिए वे भी मुझसे आग्रह करने लगे- अपने यहाँ कहावत है "जब तक सांस तब तक आस " दुसरे कोई भी चिकित्सक ये नहीं चाहेगा कि उसका मरीज जिए नहीं - कौन येसा चिकित्सक होगा जिसका हाथ येसा प्रिक्रिप्शन लिखते समय कपेंगा नहीं-यहाँ तो लगभग वही स्थिति बन जाती है जैसे कि जब कोई जज किसी को फांसी की सजा लिखता है - चीफ इंजीनियर साहब मेरे मन की उलझन को समझ गए थे परन्तु उनने फिर भी मुझे दवा बताने के लिए आग्रह किया कि कोई दवा हो तो बताओ -मैने साहस करके उनसे कहा कि इनके लिए आर्सेनिकम एल्वम 1000 ही एक येसी दवा है जिससे ये इस पार लौट आयेगे या उस पार जा सकते है उन्होंने अपने पेन से फ़ौरन दवा लिखी और ड्राइवर को भेज कर मंगवा ली और एक खुराक दिलवा भी दी -आधे घंटे बाद दूसरी खुराक देने की बात कह कर हम लोग चले आये -कुछ और काम निपटा कर जब बंगले पर पहुंचे तो  मैने घडी देखी और ठिठक कर वरामदे की सीढियों पर खड़ा रह गया- चीफ इंजीनियर साहब आओ सक्सेना वहां क्यों खड़े हो -मैने कहा आधा घंटा हो गया है -जैसे ही उन्होंने कमरे में प्रवेश किया,फोने की घंटी बजी डॉक्टर साहब कह रहे थे 'सी .ई .साहब पिताजी चले गए -

रिपीटीशन(Repetition)-

औषिधि और पोटेंसी के चुनाव के बाद तीसरा महत्वपूर्ण विषय है दवा के रिपीटीशन का -जहाँ एक्यूट कंडीशन में कम पोटेंसी की दवा जल्दी-जल्दी देने से शीघ्र लाभ हो सकता है वही क्रोनिक केसेज में जल्दी-जल्दी रिपीटीशन और बार-बार दवा बदलने से शीघ्र लाभ होने की आशा नहीं करना चाहिए -जब एक से अधिक दवाये पर्याय क्रम से देना हो तो ये देखना भी आवश्यक है कि प्रत्येक दवा को कार्य करने के लिए पर्याप्त अवकाश मिल सके-सबसे अच्छा नियम तो ये है कि जब तक दवा लाभ कर रही हो तब तक अनावश्यक रूप से दवाईयों को रिपीट किया जाए - अनावश्यक रूप से बार-बार दवा को रिपीट करने में एक खतरा ये भी है कि दवा अपना प्रूविंग करना शुरू कर दे- यदि दवा का चुनाव सही हो तो नए -नए सिम्पटम भी सामने आ सकते है -येसे में कई बार रोग एक नया मोड़ ले सकता है-

पथ्य और परहेज(Avoiding Dietary)-

रोग होने में तो देर नहीं लगती परन्तु ठीक होने में समय लगता है -औषिधियो के अतिरिक्त कुछ खाध्य प्रदार्थ येसे है जो औषिधियो के कार्य में बाधा उत्पन्न कर सकते है अथवा हानि भी पंहुचा सकते है -हमारे आग्रिम लेखो में इसके बारे में विस्तार से दिया जाएगा -जिसे ध्यान में रखना चाहिए -मैने देखा है कि यदि रोगी को थूजा दिया गया है उसे कच्चे प्याज का उपयोग करने के लिए मना कर देना चाहिए- प्याज से एलियम सीपा नाम की दवा बनती है जो थूजा के विपरीत है -अन्य औषिधियो के बारे में इसी प्रकार विचार करना चाहिए -

कई छोटे-मोटे रोग तो संयमित जीवन ,उचित आहार व्यवहार ,तथा परहेज बिना औषिधि के ही ठीक हो जाते है या औषिधियो के प्रभाव को बढ़ा कर शीघ्र आरोग्य प्रदान करते है -

आप हमारी सभी पोस्ट होम्योपैथी के केस की एक साथ इस लिंक पे जाके देख सकते है -

लिंक- Disease-Homeopathy

  • मेरा पता-
  • KAAYAKALP
  • Homoeopathic Clinic & Research Centre
  • 23,Mayur Market, Thatipur, Gwalior(M.P.)-474011
  • Director & Chief Physician:

  • Dr.Satish Saxena D.H.B.
  • Regd.N.o.7407 (M.P.)
  • Ph :    0751-2344259 (C) 0751-2342827 (R)
  • Mo:    09977423220
Upcharऔर प्रयोग-

24 मार्च 2016

औषिधि चयन में लक्षणों का महत्व-Importance of Symptoms in Aushidhi Selection

By With कोई टिप्पणी नहीं:
औषिधि चयन में लक्षणों का महत्व-Importance of Symptoms in Aushidhi Selection

औषिधि चयन में लक्षणों का महत्व-Importance of Symptoms in Aushidhi Selection-

होम्योपैथी लक्षणों(Homeopathy Symptoms) पर आधारित चिकित्सा पद्धिति है इसमें लक्षणों का जितना ही मंथन किया जाएगा उतना ही अधिक उपचार सम्बन्धी नवनीत आपको प्राप्त होगा -लक्षणों को शब्दों में व्यक्त करना एक कठिन काम है इसमें एक ही प्रकार के अनुभव को अलग-अलग रोगी अलग-अलग तरह से व्यक्त करते है अत:शब्दों को अधिक महत्व न देते हुए उसके पीछे छिपी हुई भावना अथवा मंतव्य को समझने का प्रयत्न करना चाहिए -

आइये हम इसे थोडा और आपको स्पष्ट करे -मुझे जब भी समय मिलता था तो मै डबरा (ग्वालियर के पास ) के एक बुजुर्ग होम्योपैथ डा० एच.सी.सक्सेना के पास बैठा करता था -उनका एक तकिया कलाम था "बीस साल का तजुर्बा " लेकिन वृद्ध होने के कारण तथा कम्पन रोग के कारण उनका हाथ हिलता था तो उनका दवा लिखने काम मै आसानी से कर दिया करता था और इस तरह मुझे भी कुछ सीखने को मिल जाता था -

एक बार मै उनकी क्लिनिक की सीढियां चढ़ रहा था तो वही एक बड़े सेठ जी के लड़के को दवा लेकर नीचे उतरते देखा -जब मै डाक्टर साहब के पास पहुंचा तो उन्होंने मुझसे कहा कि अरे ! आज आप कहाँ रह गए थे आज हमने एक महत्वपूर्ण केस लिया है -तुम होते तो तुम भी कुछ सीख लेते यह कहते हुए केस की हिस्ट्री उन्होंने मुझे पकड़ा दी -हिस्ट्री तो बिलकुल हिस्ट्री के किताब जैसी थी - रोगी के कमरे का दरवाजा खुला था ,खिड़की बंद थी -रोगी का सिरहाना ऊँचा था ,पैताना नीचा था- रौशनी इधर से आ रही थी और हवा उधर जा रही थी -मरीज दाई करवट लेटा था ,पैर उसके मुड़े हुए थे आदि-आदि-

जब पूरी हिस्ट्री पढ़ कर प्रिस्किप्शन देखा तो पाया कि उसे 'पल्सटिला 30' प्रिस्क्राइव किया गया था जबकि मुझे अपनी निजी जानकारी से ये पता था कि उसको कैंसर है जिससे उसको पेट में भयंकर दर्द व् जलन रहती है पल्सटिला पढ़ कर तो मेरा दिमाक चकरा गया कि येसी गंभीर बिमारी का इतना हल्का -फुल्का इलाज-

मैने आखिर पूछ ही लिया कि दवा तो आपने अच्छी दी है पर किस सिम्पटम पर दी है यह मुझे समझ नहीं आ रहा है तब वे बोले बस तुम्हारे अंदर यही कमी है कि रोगी की हिस्ट्री को ध्यान से नहीं पढ़ते हो और ये कह कर उन्होंने एक लाल पेन्सिल उठाई और एक सिम्पटम को अंडरलाइन कर दिया "मरीज हाल बताते बताते रो दिया "निश्चित रूप से यह पल्सटिला के लक्षण है किन्तु यह तो उसके साथ लागू होता है जो भावुकतावश रोता है पेट के कैंसर के रोगी से आप हाल पूछे या न पूछे उसे तो रोना ही है -मैने सोचा एलोपैथिक सब दवाइयाँ इन्होने बंद करवा दी है और होम्योपैथी की कोई गंभीर दवा कर्सिनासिन,आर्सेनीकम एल्वम आदि दी नहीं है इसलिए मरीज तो अगली सुबह देख नहीं पायेगा-मैने अपने मन में सोचा कि तुमको इनसे क्या सीखना है-मरीज को मारना या ठीक करना -बचाना तो इनको आता ही नहीं है- अत: जाने के लिए उठ खड़ा हुआ-वे बोले आज बहुत जल्दी जा रहे हो-हाँ कुछ जरुरी कागजात ग्वालियर भेजने है-मै तो आपको नमस्कार करने आया था लेकिन जब मै सीढियां उतर रहा था तो मन ही मन यही प्रार्थना कर रहा था कि प्रभु !अब इनसे दुबारा नमस्कार मत करवाना और हुआ भी यही-

सामान्य से सामान्य लक्षण के पीछे कोई न कोई गहरी बात छिपी रहती है -मान लीजिये आपने किसी रोगी से पूछा की आपको प्यास कैसी लगती है ? यो अपने यहाँ पानी की इतनी कमी तो नहीं है कि इसके बारे में कुछ जादा सोच विचार किया जाए -किन्तु रोगी कहता है कि मुझे प्यास बहुत लगती है -मै एक बार में एक गिलास पानी पी लेता हूँ जैसा कि ब्रायोनिया आदि में होता है तो इसका अर्थ क्या हुआ ? इसका अर्थ यही हुआ कि रोगी के पेट में खुश्की है -आंते उचित मात्रा में श्राव नहीं बना रही - यदि रोगी कहता है कि मुझे प्यास बहुत कम लगती है जैसा पल्साटिला आदि में होता है तो इसका मतलब है आंतो में पर्याप्त गीलापन है -यदि रोगी कहता है कि मुझे थोड़े-थोड़े पानी की बार-बार प्यास लगती है जैसा कि आर्सेनिकम एल्वम आदि में होता है तो इसका मतलब है कि रोगी के पेट में न केवल खुश्की वरन ताप भी अधिक है -इसी प्रकार आप भूंख से जिगर का कार्य ,पाखाने से आमाशय और आंतो का कार्य तथा नींद से नर्वस सिस्टम के कार्य के बारे में पर्याप्त जानकारी पा सकते है यदि आपने लक्षणों की भाषा पढ़ ली तो आपने रोग की थाह ले ली समझो-

लक्षण रोग के कारण का भी पता देते है होम्योपैथिक(Homeopathy) चिकित्सा पद्धिति दवा का निर्धारण लक्षणों की समग्रता के आधार पर करने का निर्देश देती है किन्तु तीव्र रोगों में सदा ही येसा कर पाना सम्भव नहीं हो पाता है -दिन प्रतिदिन में तो रोगी को जो सबसे कष्टदायक लक्षण होते है ,पहिले उन्ही को देखना पड़ता है जैसे तीव्र ज्वर,तीव्र पीड़ा,बारबार दस्त होना आदि -सबसे पाहिले इनकी ही चिकित्सा अनिवार्य होती है -

जब दवाईयों की प्रूविग की जाती है तो विभिन्न व्यक्तियों पर अलग-अलग प्रतिक्रिया होती है -इन सब को जनरेलाईज करके सिम्पटम निर्धारित किया जाता है - कुछ सिम्पटम अति विशिस्ट तथा मार्ग दर्शक होते है जिनके द्वारा सही दवा का चुनाव करने में सुविधा रहती है -इसलिए सिम्पटम की व्यापकता तथा गहराई देख कर ही उचित निर्णय लेना चाहिए -चिकित्सा सम्बन्धी प्रकरणों में इस सम्बन्ध में आपको अधिक जानकारी मिल सकेगी -आपसे मिलते है अब अपनी अगली पोस्ट में-

आप हमारी सभी पोस्ट होम्योपैथी के केस की एक साथ इस लिंक पे जाके देख सकते है -

लिंक- Disease-Homeopathy

  • मेरा पता-
  • KAAYAKALP
  • Homoeopathic Clinic & Research Centre
  • 23,Mayur Market, Thatipur, Gwalior(M.P.)-474011
  • Director & Chief Physician:

  • Dr.Satish Saxena D.H.B.
  • Regd.N.o.7407 (M.P.)
  • Ph :    0751-2344259 (C) 0751-2342827 (R)
  • Mo:    09977423220

Upcharऔर प्रयोग-

स्वस्थ रहना है तो दही का सेवन करें

By With कोई टिप्पणी नहीं:
Curd-दही आपके लिए एक स्वास्थ्यप्रद आहार है इसमें कैलोरी कम होती है इसमें आपके शरीर के लिए लाभदायक बैक्टीरिया पाया जाता है वैज्ञानिको द्वारा अध्ययन से भी अब ये सिद्ध हो चुका है दही(curd) में आपको दीर्घायु प्रदान करने की विशेष शक्ति है दही का सेवन आपके लिए fitness tips से कम नहीं है-

Curd-दही


Curd-दही खाने के फायदे-

  1. Curd-दही हमें स्वस्थ ही नहीं रखता बल्कि दही हमें दूसरी अन्य प्रकार की बीमारियों से भी बचाता है दही कैंसर जैसी भयानक बीमारियों से भी लड़ने की शक्ति भी देता है -
  2. गर्मियों में घरेलू इलाज के लिए सर्वोत्तम आहार है इन दिनों होने वाले फोड़े-फुन्सी से भी आपको निजात दिला सकता है -
  3. अधिक खा लेने से अजीर्ण हो गया हो तो दही(curd) में सेंधा नमक +काली मिर्च +भुना जीरा बराबर की मात्रा में पीसकर डाल दे आप खाने के बाद इसमें थोडा पानी मिला कर प्रयोग में ले जब तक आपको अजीर्ण से छुटकारा न मिले इसे लेते रहे -
  4. कई बार गर्मी में पेट खराब हो जाता है या फिर लू लग जाती है दोनों ही स्थितियों में दही(curd)में जौ का सत्तू मिलाकर लेने से लाभ होता है -
  5. कभी-कभी जल्द बाजी में गर्म पेय पदार्थो या गरमा-गर्म सब्जी खा लेने से आपका मुंह जल जाता है तो आप दही में पानी मिला कर कुल्ला करे -
  6. गर्मी के कारण मुंह में छाले हो गए हो तो ताजा और मीठा Curd(दही) और शहद बराबर की मात्रा में मिलाकर चाटे आराम मिलेगा -
  7. दही आपके रक्त को भी साफ़ करने का काम करता है एवं दिमाक को भी शांत बनाने का कार्य करता है जिनको भूंख नहीं लगती है या फिर कम लगती है उनके लिए दही का सेवन बहुत ही उपयोगी है ये आपके fitness में भी सहायक है -
  8. गर्मियों में फोड़े-फुंसी से जल्द छुटकारा पाना चाहते है तो दही(curd) और सरसों का तेल बराबर मात्रा में मिलाकर पेस्ट बना ले और दिन में दो-तीन बार लगाए आराम होगा -
  9. दही में दिल के रोग-हाई ब्लड प्रेशर और गुर्दों की बीमारियों को रोकने की क्षमता है तथा यह कोलेस्ट्रॉल को बढ़ने से रोकता है और दिल की धड़कन सही बनाए रखता है - 
  10. जिन लोगो को जोडों का दर्द रहता है उनको हींग का छौंक लगाकर दही का सेवन करने से काफी लाभ होता है -
  11. दही शरीर पर लगाकर नहाने से त्वचा कोमल और खूबसूरत बन जाती है इसमें नींबू का रस मिलाकर चेहरे, गर्दन, कोहनी, एड़ी और हाथों पर लगाने से शरीर निखर जाता है दही की लस्सी में शहद मिलाकर पीने से सुंदरता बढ़ने लगती है - 


सावधानी-

  1. ध्यान रहे रात को दही(curd) का सेवन न करे और फ्रिज में देर तक रक्खा दही भी इस्तेमाल से बचे क्युकी ताजे दही में ही सभी लाभदायक तत्व मौजूद रहते है -
  2. curd-दही को पीतल-ताम्बे-एल्युमीनियम के बर्तन में न रक्खे इसमें रक्खा गया दही विषाक्त हो जाता है दही को मिटटी के बर्तन में ही ज़माना उत्तम है इससे आपका दही गाढ़ा और थक्केदार जमता है क्युकि फ़ालतू पानी को मिटटी का बर्तन सोख लेता है -
  3. खांसी-बुखार-जुखाम के रोगी को दही नहीं खाना चाहिए-


Upcharऔर प्रयोग-

23 मार्च 2016

जुकाम का बस एक दिन के लिए इलाज

By With कोई टिप्पणी नहीं:
सभी को कभी न कभी जुकाम(Colds)होता रहता है इसके बारे में कहा जाता है कि जुकाम दवा से भी एक सप्ताह में चला जाता है लेकिन अगर दवा न भी ले तो भी ये एक सप्ताह में साधारण colds(जुकाम) चला ही जाता है यानी कि अपने समय ये खुद ही चला जाता है -

जुकाम का बस एक दिन के लिए इलाज

किसी भी पैथी में इसकी संतोषजनक कोई दवा है ही नहीं-लेकिन आयुर्वेद तो है ही सभी रोगों के लिए रामबाण इलाज-आइये आपको इसी आयुर्वेद के ग्रंथ की एक अनमोल मोती जुकाम(Colds)के लिए भेंट करता हूँ जो आपके जुकाम को एक दिन में ही ठीक करने का गुण रखता है -

जुकाम के लिए इलाज(Cure for colds)-


सामग्री-

काली मिर्च- 5 नग
तुलसी के पत्ते - 7 पत्ते
सितोपलादि चूर्ण - 2.5 ग्राम
शहद - 5 ग्राम

प्रयोग विधि-

1- जब आपको जुकाम(Colds)के जरा से भी लक्षण महसूस होने लगे देर न करे तुलसी के सात पत्ते +काली मिर्च 5 नग मुंह में रखकर चबा-चबा कर खा जाए और इसके तुरंत बाद ही ढाई ग्राम सितोपलादि चूर्ण को 5 ग्राम शहद में मिलाकर चाट ले-

2- यदि सिर में जकडन हो तथा खांसी(cough)भी हो तो पान और अदरक का 3-3 ग्राम रस निकाल कर शहद में सितोपलादि चूर्ण के साथ ले ले आराम आ जाएगा-

मात्रा- आयु के अनुसार निर्धारित कर लेना चाहिए-

कुछ बाते ध्यान रक्खे-

जुकाम होने के दिन से ही सूर्यास्त के बाद भोजन न करे और दिन में बिलकुल भी न सोये तथा तेल-मिर्च-खटाई-घी-चावल-तली भुनी चीजो का परहेज करे तथा दिन बिना छौंक की सादी दाल और रोटी गर्म-गर्म ही ले लेकिन पानी न पिए-खाने के दो या तीन घंटे बाद ही पानी ले -

इन सभी उपाय से जुकाम एक दिन में ही चला जाता है लेकिन उपरोक्त दवा तीन दिन अवस्य ही ले-

Upcharऔर प्रयोग-

22 मार्च 2016

मेरी बात आपके साथ-My Talk With You

By With कोई टिप्पणी नहीं:
मेरी बात आपके साथ-My Talk With You

मेरी बात आपके साथ-My Talk With You-

मै डॉ सतीश सक्सेना लगभग पिछले 40 वर्षो से होम्योपैथी चिकित्सा(Homeopathy) जगत से जुड़ा हुआ हूँ और इस बीच मुझे लाखो रोगियों की सेवा करने का सुअवसर मिला है यद्यपि होम्योपैथी के सिधान्तों(Principle Of Homeopathy)के अनुसार प्रत्येक रोगी अपनी एक अलग छाप रखता है तथा उसकी चिकित्सा सामूहिक आधार पर न होकर व्यक्तिगत आधार पर होना चाहिए किन्तु सामान्यत: चिकित्सा करते समय इसका पालन पूर्णरूपेण संभव नहीं हो पाता है -

मेरे ही नहीं प्रत्येक चिकित्सक के सामने ऐसे अनेक प्रकरण आते है जिसमे न हमारी पुस्तकें काम आती है और न वैसे उदाहरण पिछले समय के मिलते है -तब यहाँ चिकित्सक को लीक से हट कर विचार करना पड़ता है यदि कोई निर्णायक सूत्र(Breakthrough formula) मिल जाता है तो रोगी का कल्याण हो जाता है अन्यथा भटकना तो निश्चित ही है-

मेरे लम्बे चिकित्सकीय जीवन में ऐसे अनेक प्रकरण उपस्थित हुए जिनकी चिकित्सा करने के लिए मुझे कुछ अलग ही सोच अपनानी पड़ी हमारे सभी लेख संग्रहित केस या तो ऐसे ही है अथवा ऐसे जिनमें आशा से अधिक जादुई परिणाम मुझे प्राप्त हुए-

यहाँ प्रस्तुत सभी अपने अनुभव के लेख को लिखने जस का तस लिखने का एक मात्र उद्देश्य सिर्फ इतना है कि हमारे सभी लेखो को पढ़े समझे और हमारे चिकित्सक बंधू लकीर के फ़कीर न बने और आवश्यकता होने पर एक नए द्रष्टिकोण और सूझ-बूझ के साथ रोग की जड को पकड सके तथा रोगी को आरोग्य प्रदान करने में सक्षम बने-

जब तक देश,काल,परिस्थिति और परिवेश का पूरा ज्ञान न हो तब तक मात्र लक्षणों के आधार पर अतिविशिष्ट ,बिगड़े तथा उलझे हुए रोगियों का निराकरण कर पाना संभव नहीं है -रोगियों के नाम ,पते,तारीखों आदि को विशेष महत्व न देते हुए उन परिस्थितियों पर अधिक ध्यान दिया गया है जो हमे मर्ज की मूल तक पंहुचने और उचित दवा खोजने में सहायक हो-

हमारे सभी होम्योपैथी लेख को लिखने में मेरे परिवार का और विशेष रूप से मेरे  बड़े सुपुत्र 'डॉक्टर मनीष सक्सेना' का भी मुझे पूर्ण सहयोग रहा है -

आप हमारी सभी पोस्ट होम्योपैथी के केस की एक साथ इस लिंक पे जाके देख सकते है -

लिंक- Disease-Homeopathy


  • मेरा पता-
  • KAAYAKALP
  • Homoeopathic Clinic & Research Centre
  • 23,Mayur Market, Thatipur, Gwalior(M.P.)-474011
  • Director & Chief Physician:

  • Dr.Satish Saxena D.H.B.
  • Regd.N.o.7407 (M.P.)
  • Ph :    0751-2344259 (C) 0751-2342827 (R)
  • Mo:    09977423220

Upcharऔर प्रयोग-

21 मार्च 2016

रोग और विशिष्ट उपचार-Disease and Specific Treatments

By With कोई टिप्पणी नहीं:
रोग और विशिष्ट उपचार-Disease and Specific Treatments

रोग और विशिष्ट उपचार-Disease and Specific Treatments-

"Upcharऔर प्रयोग" आपके लिए एक ख़ुशी की खबर लाया है जो लोग होमियोपैथी में विश्वास करते है उनके लिए 40 वर्षो के अनुभवशील 'डा0 सतीश सक्सेना' द्वारा लिखित और अनुभव का ज्ञान आपकी सेवा में "Upcharऔर प्रयोग" साईट क्रमवार प्रकाशित होगी -

"डा0 सतीश सक्सेना" जी ने अपने जीवन में बहुत से ऐसे कठिन रोगों को अपने अनुभव से ठीक किया है जो वास्तव में काबिले-तारीफ़ है आज वे काफी वृद्धवस्था को प्राप्त हो गए है लेकिन उनका अनुभव हमारे आपके काम आ सकता है जिन लोगो को निराशा हाथ लगी हो आप उनसे संपर्क कर सकते है -

50 वर्षो के अनुभव में चिकित्सा जगत में काफी रोगियों की सेवा करने का अवसर उनको प्राप्त है और सबसे बड़ी बात ये है कि होमियोपैथी(Homeopathy)की दवा सस्ती भी है और इसको घोटने-पीसने की भी आवश्यकता भी नहीं है न ही इसका कोई साईट इफेक्ट भी है आप एक बार जाकर उनसे मिल कर अपने रोग के लिए संपर्क कर सकते है या फिर आप उनसे फोन पे भी जानकारी ले सकते है -

वे एक अत्यंत ही साधारण सुलझे हुए इन्शान है और सेवा कार्य ही उनका मुख्य उद्देश्य रहा है अत: हम भी उनसे काफी प्रेरित रहे है डा0 सतीश सक्सेना जी के द्वारा दिए गए सभी अनुभव को हम उनके ही शब्दों में आपके लिए इस साईट में यथावत प्रकाशित करेगे जिससे आप सभी को लाभ मिले -

जो लोग उनसे संपर्क करना चाहते है उनका पता और फोन नम्बर भी प्रकाशित करेगे ताकि आप उनसे समय लेके संपर्क कर सके -

आगामी सभी प्रकाशित लेख "Disease-Homeopathy" में यथावत प्रकाशित होगा -

देखे- मेरी बात आपके साथ-My Talk With You

Improve Yourself Like Mirror-खुद को निखारे आईने की तरह

By With कोई टिप्पणी नहीं:

Improve Yourself Like Mirror-खुद को निखारे आईने की तरह-

हम और आप इस दुनियां में एक समयावधि तक के लिए ही आये है और समय पूरा होने पे सभी को ये जीवन छोड़ कर जाना है बस यही एक यथार्थ सत्य(the truth is) है तो फिर अपना जीवन कांच की तरह न बनाए जो आप दुसरो को चुभे बल्कि खुद को आईना बनाने का सफल प्रयास करे जिसमे लोग अपना प्रतिबिम्ब देख सके इसलिए खुद को निखारे -Improve Yourself

The truth(सत्य) ये भी है कि कभी-कभी बोला गया कटु सत्य आपको कष्ट में अवश्य डाल देता है लेकिन ये भी सत्य है कि आपको अंदर की आत्म-संतुष्टि भी देता है -meaning of truth(सत्य का अर्थ) को  समझना आपके जीवन को उन्नतिशील बना देता है -

आप जो शिक्षा दुसरो को देना चाहते है तो एक बार तो सोचे क्या आप उसका पालन अपने जीवन में करते है सिर्फ अच्छे कपडे पहनने से आप की सुन्दरता तो निखर सकती है लेकिन आंतरिक सुन्दरता आपके अंदर समाहित गुणों की होती है जिनसे आप जीवन में निखरते है -


जब भी आप कही जाए या किसी से मिले तो मुस्कराहट आप के चेहरे पे हो क्युकि ये एक येसी चाभी है जो आपके प्रगति के रास्ते खोल देती है लोगो को ये न लगे कि आप घमंडी है बल्कि आप मिलनसार है इस प्रकार सामने वाला आपसे दोस्ती का इक्छुक होगा -

खुद में आत्मविश्वास को जाग्रत करे हर बात में एक वजन लाये हल्कापन आपकी प्रतिभा को गिरा सकता है सोच समझ कर बोले जो भी बोले सच का समावेश हो क्युकि आपका बोला गया झूठ कुछ समय बाद आपको ही याद नहीं रहता है हो सकता है सामने वाला आपकी बातो को याद रक्खे-

सबसे पहले applying makeup आपका साधारण हो ये आवश्यक है जादा मेकअप आपको हंसी का पात्र न बना दे यदि पार्टी में है तो सबसे स्वयं ही आगे बढ़ कर मिलिए और ख़ुद लोगों से बात-चीत कीजिये बजाये इंतज़ार करने के कि कौन आपसे पहले बात करेगा ऐसा करने से आप मिलनसार और एक आत्मविश्वास से भरे हुए इंसान नज़र आएँगे लोग आपको पसंद करेंगे-

दूसरी बात जब भी किसी से बात करे उनकी आँखों में आँखें डाल के बात करें ताकि सामने वाले को लगे कि आप उनकी बात ध्यान से सुन रहे हैं और उनकी बात आपके लिए मायने रखती है जब आप किसी को ध्यान से सुनते है तो आप उसकी इज्जत ही बढाते है और जब इज्जत देगे तभी आप इज्जत पाने के अधिकारी है -

हम सभी Importance की अपेक्षा करते है तो आप सामने वाले को उसके नाम से बीच-बीच में संबोधन देते रहे क्युकि हर व्यक्ति का नाम उसके लिए ख़ास मायने रखता है और जब वो इज़्ज़त से और एक अपनेपन से लिया जाए तो उसका असर बहुत गहरा पड़ता है-

लम्बी-लम्बी फेक बाते न करे तो ही अच्छा है क्युकि ये जरुरी नहीं है सामने वाला बेवकूफ है दुनियां में सभी तरह के लोग है तुरंत भांप लेते है कि आप कितनी लम्बी फेक रहे है जो उनके लिए लपेटना मुस्किल हो रहा है और आगे से वो आपको नजर-अंदाज कर सकते है खुद को ignore होने से बचाना है तो जो बोले वजन के साथ सत्य ही बोले -

किसी की आलोचना से बचे हो सकता है जिसकी आप आलोचना कर रहे हो सामने वाले की उससे आत्मयिता हो और कुछ ही पल में वो आपको अपनी नजरो से गिरा दे आप में भी कुछ न कुछ बुराई है ही वर्ना आप भगवान् का दर्जा प्राप्त कर लेते इसलिए "आलोचना" से बचे -

                                     कांच पर पारा चढाएं तो 
                                     वह आईना बन जाता है 
                                     और किसी को आईना दिखाएं तो 
                                     देखने वाले का पारा चढ़ जाता है-

देखे -  

Upcharऔर प्रयोग-

20 मार्च 2016

Atibala Ke Fayde-अतिबला के फायदे

By With कोई टिप्पणी नहीं:
अतिबला यानी इसे खिरैटी(Kirati) भी कहा जाता है ये पौष्टिक गुणों से भरपूर है ये आयुर्वेद में बाजीकरण के रूप में भी प्रयुक्त की जाती है धातु सम्बंधित रोग में इसका प्रयोग कारगर है ये यौन दौर्बल्य-धातु क्षीणता- नपुंसकता तथा शारीरिक दुर्बलता(Physical infirmity) दूर करने के अलावा अन्य व्याधियों को भी दूर करने की अच्छी औषीधी है-


Atibala


इसकी और भी कई जातियां हैं पर बला- अतिबला- नागबला- महाबला- ये चार जातियां ही ज्यादा प्रचलित हैं बला चार प्रकार की होती है चारों प्रकार की बला शीतवीर्य-मधुर रसयुक्त-बलकारक-कान्ति-वर्द्धक-वात रक्त पित्त-रक्त विकार और व्रण को दूर करने वाली होती है इसके जड़ और बीज को उपयोग में लिया जाता है-

उपयोग(Use)-

1- शुक्रमेह के लिए खरैटी की ताजी जड़ का एक छोटा टुकड़ा लगभग 5-6 ग्राम एक कप पानी के साथ कूट-पीस और घोंट-छानकर सुबह खाली पेट पीने से कुछ दिनों में शुक्र धातु गाढ़ी हो जाती है और शुक्रमेह होना बंद हो जाता है-

2- महिला को श्वेत प्रदर(Leukorrhea) रोग हो तो बला के बीजों का बारीक पिसा और छना चूर्ण एक एक  चम्मच सुबह-शाम शहद में मिलाकर कर दे और फिर ऊपर से मीठा दूध हल्का गर्म पी लें-

3- शरीरिक कमजोरी के लिए आधा चम्मच की मात्रा में इसकी जड़ का महीन पिसा हुआ चूर्ण सुबह-शाम मीठे हल्के गर्म दूध के साथ लेने और भोजन में दूध-चावल की खीर शामिल कर खाने से शरीर का दुबलापन दूर होता है शरीर सुडौल बनता है सातों धातुएं पुष्ट व बलवान होती हैं तथा बल वीर्य तथा ओज बढ़ता है-

4- खरैटी के बीज और छाल समान मात्रा में लेकर कूट-पीस-छानकर महीन चूर्ण कर लें तथा  एक चम्मच चूर्ण घी-शकर के साथ सुबह-शाम लेने से वस्ति और मूत्रनलिका की उग्रता दूर होती है और मूत्रातिसार होना बंद हो जाता है-

5- बवासीर के रोगी को मल के साथ रक्त भी गिरे तो इसे रक्तार्श यानी खूनी बवासीर कहते हैं बवासीर रोग का मुख्य कारण खानपान की बदपरहेजी के कारण कब्ज बना रहना होता है बला के पंचांग को मोटा-मोटा कूटकर डिब्बे में भरकर रख लें और प्रतिदिन सुबह एक गिलास पानी में दो चम्मच यानी कि लगभग 10 ग्राम यह जौकुट चूर्ण डालकर उबालें और जब चौथाई भाग पानी बचे तब उतारकर छान लें फिर ठण्डा करके एक कप दूध मिलाकर पी पाएं- इस उपाय से बवासीर का खून गिरना बंद हो जाता है-

6- अतिबला की जड़ का काढ़ा 40 मिलीलीटर की मात्रा में सुबह-शाम पीने से पेशाब में खून का आना बंद हो जाता है-

7- अतिबला के पत्तों का काढ़ा बनाकर प्रतिदिन तीन से चार बार कुल्ला करें ये प्रयोग  रोजाना करने से मसूढ़ों की सूजन व मसूढ़ों का ढीलापन खत्म होता है-

8- जिनको मासिक धर्म रुक जाता है या अनियमित आता है उनको खिरैटी+ चीनी+मुलहठी+ बड़ के अंकुर+ नागकेसर+ पीले फूल की कटेरी की जड़ की छाल लेकर इनको दूध में पीसकर घी और शहद में मिलाकर कम से कम 15 दिनों तक लगातार पिलाना चाहिए- इससे मासिकस्राव (रजोदर्शन) आने लगता है-

9- अतिबला+कंटकारी+बृहती+वासा (अड़ूसा) के पत्ते और अंगूर को बराबर मात्रा में लेकर काढ़ा बना लेते हैं फिर इसे 15 से 30 मिलीमीटर की मात्रा में 5 ग्राम शर्करा के साथ मिलाकर दिन में दो बार लेने से गीली खांसी ठीक हो जाती है-

10- अतिबला(खिरैटी) के साथ नागकेसर को पीसकर ऋतुस्नान  के बाद दूध के साथ सेवन करने से लम्बी आयु वाला (दीर्घजीवी) पुत्र उत्पन्न होता है-


गोक्षुरादि चूर्ण चूर्ण बनाए-

नागबला+अतिबला+कौंच के शुद्ध छिलकारहित बीज+ शतावर+तालमखाना और गोखरू इन सब द्रव्य को बराबर वजन में लेकर कूट-पीस-छानकर महीन चूर्ण करके मिला लें और छन्नी से तीन बार छान लें ताकि सब द्रव्य अच्छी तरह मिलकर एक जान हो जाएं-

प्रयोग -

यह चूर्ण एक-एक चम्मच सुबह-शाम या रात को सोते समय मिश्री मिले कुनकुने गर्म दूध के साथ पीने से बहुत बलवीर्य और यौनशक्ति की वृद्धि होती है शीघ्रपतन के रोगी पुरुषों के लिए यह योग आयुर्वेद के वरदान के समान है यह योग बना-बनाया बाजार में आयुर्वेदिक दवा विक्रेता के यहां इसी नाम से मिलता हैं-

Upcharऔर प्रयोग-