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31 मार्च 2016

Potatoes-आलू में विटामिन होता है

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Potatoes-आलू में कैल्शियम, लोहा, विटामिन-बी तथा फास्फोरस बहुतायत में होता है आलू(Potatoes) खाते रहने से रक्त वाहिनियां बड़ी आयु तक लचकदार बनी रहती हैं तथा कठोर नहीं होने पातीं इसलिए आलू खाकर लम्बी आयु प्राप्त की जा सकती है-

Potatoes-आलू


  1. Potatoes-आलू में विटामिन बहुत होता है इसको मीठे दूध में भी मिलाकर पिला सकते हैं आलू को छिलके सहित गरम राख में भूनकर खाना सबसे अधिक गुणकारी है या इसको छिलके सहित पानी में उबालें और गल जाने पर खाएं-
  2. रक्तपित्त बीमारी में कच्चा आलू बहुत फायदा करता है-कभी-कभी चोट लगने पर नील पड़ जाती है नील पड़ी जगह पर कच्चा आलू पीसकर लगाएँ- -
  3. शरीर पर कहीं जल गया हो या तेज धूप से त्वचा झुलस गई हो या फिर त्वचा पर झुर्रियां हों या कोई त्वचा रोग हो तो कच्चे आलू का रस निकालकर लगाने से फायदा होता है-
  4. भुना हुआ आलू(Potatoes)पुरानी कब्ज और अंतड़ियों की सड़ांध दूर करता है- आलू में पोटेशियम साल्ट होता है जो अम्लपित्त को रोकता है-
  5. चार आलू सेंक लें और फिर उनका छिलका उतार कर नमक+ मिर्च डालकर नित्य खाएं- इससे गठिया ठीक हो जाता है-
  6. गुर्दे की पथरी में केवल Potatoes-आलू खाते रहने पर बहुत लाभ होता है पथरी के रोगी को केवल आलू खिलाकर और बार-बार अधिक पानी पिलाते रहने से गुर्दे की पथरियाँ और रेत आसानी से निकल जाती हैं-
  7. उच्च रक्तचाप के रोगी भी Potatoes खाएँ तो रक्तचाप को सामान्य बनाने में लाभ करता है-
  8. Potatoes-आलू को पीसकर त्वचा पर मलें कुछ ही दिनों में आपका रंग गोरा हो जाएगा-
  9. कच्चा आलू पत्थर पर घिसकर सुबह-शाम काजल की तरह लगाने से 5 से 6 वर्ष पुराना जाला और 4 वर्ष तक का फूला 3 मास में साफ हो जाता है-
  10. आलू का रस दूध पीते बच्चों और बड़े बच्चों को पिलाने से वे मोटे-ताजे हो जाते हैं- आलू के रस में मधु मिलाकर भी पिला सकते हैं-
  11. आलुओं में मुर्गी के चूजों जितना प्रोटीन होता है सूखे आलू में 8.5 प्रतिशत प्रोटीन होता है आलू(Potatoes) का प्रोटीन बूढ़ों के लिए बहुत ही शक्ति देने वाला और बुढ़ापे की कमजोरी दूर करने वाला होता है-
  12. और भी देखे-

Upcharऔर प्रयोग-

शरीर के लिए आवश्यक विटामिन और खनिज

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प्रस्तुत है आपकी जानकारी के लिए विटामिन और खनिज के क्या सोर्सेज है जो नीचे दिए जा रहे है -

http://www.upcharaurprayog.com/2015/07/essential-vitamins-and-minerals-for-body.html
vitamins and minerals


आवश्यक खनिज लवण खनिज लवण के प्रमुख स्रोत -


कैल्शियम -            दूध, पालक, टमाटर, अंकुरित अन्न, हरी सब्जी, ताजे                              फल

फॉस्फोरस-             दूध, अंकुरित अन्न ,हरी सब्जी,ताजे अन्न

पोटेशियम-             अंकुरित अन्न, हरी सब्जी

सोडियम -              पनीर, दूध, छेना, हरीसब्जी, ताजेफल

क्लोरिन नमक -     दूध ,हरी सब्जी,अंकुरित अन्न

लोह-                  हरी सब्जी, ताजे फल, अंकुरित अन्न,खुर्बानी, कालीदाक्ष,                           तिल ,सेव, अंगूर

मैंग्नीज-                हरी सब्जियां, फल, अंकुरित अन्न

तांबा-                    ताजी हरी सब्जियां, अंकुरित अन्न

आयोडिन नमक-     दूध, समुद्री- खाद्य पदार्थ

फ्लोरिन हरी-         सब्जी, फल, अंकुरित अन्न

जस्ता खमीर-        अंकुरित गेहूं ,यीस्ट आदि

कोबाल्ट -             अंकुरित अन्न, जीवन्त आहार

मोलिब्डन-            हरी सब्जी, ताजे फल, अंकुरित अन्न

सिलीफोन-            अनाज, हरी सब्जी, ताजे फल, जीवन्त आहार इत्यादि

विटामिन के प्रमुख स्रोत -


विटामिन ‘ए’-   पीले फल, पीली सब्जियां (आम, गाजर, पपीता, कद्दू )
                        गहरी हरी सब्जियां (पालक, मूली पत्ता) गौघृत, मख्खन,                            दूध आदि

विटामिन बी -  जैविक आहार, अन्न ,, हरी पत्तीदार सब्जियां, कण युक्त                          चावल (मील छंटा नहीं) आदि
         
                             बी- 2- ताजी हरी सब्जियां दूध, फल
                             बी- 3- नींबू, अंकुरित अन्न, घी, सब्जियां ,, मूंगफली 
                             बी- 6- अंकुरित अन्न, दूध, मेवे, ताजी सब्जियां, फल
                             बी-12- दूध, दही, अंकुरित अन्न

विटामिन एच-         अंकुरित अन्न, दूध, खमीर आदि

पेन्टोथेनिक एसिड-  अंकुरित अन्न, खमीर

कोलिन-                   फल, साग भाजी, अंकुरित अन्न, दूध

इनोसिटाल-              अंकुरित अन्न, खमीर आदि

फोलिक एसिड-         अंकुरित अन्न, ताजी हरी सब्जियां

विटामिन सी-          आंवला, अमरूद, टमाटर व अन्य खट्टे फल, अंकुरित                               अन्न,ताजी हरी सब्जियां, ताजे फल

विटामिन डी-          सुबह की धूप, दूध

विटामिन ई-          अंकुरित अन्न, हरी सब्जी, गेहूं तथा चावल के अंकुर में                              सबसे अधिक

विटामिन के-          ताजी हरी सब्जी, फल, अंकुरित अन्न

विटामिन पी-          खट्टे फल(नींबू आदि) में

विटामिन एफ-        घाणी का कोई भी तेल

फिर तो आप समझ गए होगे कि लगभग काफी विटामिन और खनिज हमें अंकुरित अन्न से प्राप्त होगे तो देर किस बात की आलस्य छोडिये और शुरू करे अंकुरित अन्न खाना -

उपचार और प्रयोग-

घुटने का दर्द-Knee Pain

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घुटने का दर्द-Knee Pain

घुटने का दर्द-Knee Pain

दिल्ली यूनिवर्सिटी के एन्टोंमोलाजी के विभागाध्यक्ष विश्व के जाने माने विज्ञानी डॉ0 प्रसाद जी का एक पुत्र डबरा में महाविध्यालय में प्रध्यापक था -डॉ0 साहब अपने पुत्र के पास डबरा(ग्वालियर) आये हुए थे उनके घुटने में दर्द रहता था उन्होंने अपने लड़के से पूछा कि क्या यहाँ कोई होम्योपैथिक डॉक्टर हैं? मै अपने घुटने के दर्द की दवा लाना भूल गया हूँ मुझे दर्द की दवा लेना है -

लड़के ने धीरे से कहा हाँ है तो-उन्होंने कहा बेटा इतने धीरे क्यों कह रहे हो क्या वह बहुत फीस लेता है - लड़के ने कहा पैसा तो एक भी नहीं लेता है - प्रसाद जी ने कहा तो फिर? लड़के ने कहा कि उनके यहाँ दवा लेने के लिए दो तीन घंटे लाइन में लगना पड़ता है-बिना नम्बर के कोई भी दवा नहीं ले सकता है-उन्होंने कहा मै डा0 एस.एन.प्रसाद,विश्व का माना हुआ एन्टोमोलाजिस्ट,किसकी हिम्मत है जो मुझे तीन घंटे लाइन में लगाएगा मुझे तुम उसके यहाँ ले चलो -

डा0 प्रसाद सभी मरीजो को पीछे छोड़ते हुए सीधे कमरे में प्रवेश करने लगे -सबसे आगे खड़े हुए व्यक्ति ने उनसे पूछा कि क्या आप डॉक्टर साहब के रिश्तेदार है-उन्होंने कहा नहीं मुझे दवा लेनी है-उस व्यक्ति ने कहा तो पीछे हो जाइए-डॉक्टर साहब ने देख लिया तो इस जिन्दगी में दवा नहीं मिल पाएगी और उन्हें पीछे हटा दिया-

आखिर संयोग से उनके लड़के का कोई विध्यार्थी वही लाइन में दूसरे-तीसरे नम्बर पर लगा था-उस लड़के ने पूछा सर क्या बात है -प्रसाद जी के लड़के ने कहा पिता जी को दवा लेनी थी -उसने अपनी जगह डा0 प्रसाद को दे दी  -फिर कुछ देर बाद उनका नम्बर आया -हाल पूछा और दो पुड़ियाँ दे दी -कहा आधे-आधे घन्टे से ले लेना -उस समय 200 पोटेन्सी की 2 अथवा 30 पोटेन्सी की चार पुड़ियाँ दिया करता था -उस समय शीशियो को चलन नहीं था -मै स्वयं अपनी दवाईयों की शीशीयां डिस्टल वाटर के खाली डब्बो में रक्खा करता था-

प्रसाद साहब घर चले गए और सोचने लगे दो पुड़ियों के लिए इतनी मारा-मारी और घंटों का इन्तजार किन्तु लड़के आग्रह से उन्होंने ये पुड़ियाँ खाली -दूसरे दिन चाय-नाश्ते के समय लड़के ने पूछा कि पिताजी दर्द कैसा है?डॉक्टर साहब दायें की जगह बाँयां घुटना टटोलने लगे लड़के ने पूछा कि आज इसमें भी दर्द होने लगा है -उन्होंने दोनों घुटने टटोले,उठे,बैठे पर दर्द तो कही था ही नहीं -वे बोले मेरा दर्द तो ठीक हो गया -मै अभी और इसी वक्त उस डॉक्टर से मिलूँगा -लड़का बोला इस समय सात बजने में पांच मिनट है सात बजे वे भीतर चले जायेगे -इसलिए अभी तो आप उनसे नहीं मिल पायेगे -उन्होंने कहा कि नहीं मै अभी उनसे मिलूँगा -लड़के ने कहा मै तो आपके साथ जाऊँगा नहीं क्युकि वे बहुत बेकार आदमी है-आपसे कुछ उल्टा-सीधा बोल देगे-मुझे अच्छा नहीं लगेगा -प्रसाद साहब बोले,ठीक है ,मैने घर देखा है मै अकेला ही चला जाऊँगा-

प्रसाद साहब जब तक मेरे घर पंहुचे तब तक सात बज चुके थे-दरवाजा बन्द था परन्तु प्रतीकात्मक खिड़की खुली हुई थी-उन्होंने दरवाजा खट-खटाया-पूँछा कौन? वे बोले डॉक्टर प्रसाद-मैने कहा शाम को आइये-वे बोले मै आपका बुजुर्ग हूँ-मैने उन्हें अंदर बुला कर आदर से बिठाया-नौकर से चाय लाने के लिए कहा-प्रसाद साहब ने कहा मेरा दर्द ठीक हो गया-मैने उनसे कहा कि दर्द की बात करना हो तो आप शाम को आइये-नौकर को आवाज दे दी, बाबा जा रहे है,चाय कैंसिल-वे हाथ जोड़ने लगे ,कहने लगे बेटा मेरी बात सुन लो -मैने कहा अभी आप मेरे बुजुर्ग थे ,अब आप मेरे हाथ जोड़ रहे है,बताइये मै अब कहाँ जाऊं -उनकी आग्रहपूर्ण मुद्रा देख कर मुझे लगा कि इनसे बात कर ली जाए -

मैने उनसे कहा कि मै आपको पांच मिनट का समय दे रहा हूँ ,आपको जो कुछ भी कहना है जल्दी से कह डालिए -वे बोले मेरा घुटने का दर्द ठीक हो गया-मैने उनसे पूँछा आप कल आये थे-उन्होंने कहा आया था-मैने पूछा लाइन में लगे थे-वे बोले लगा था -मैने कहा आप से हाल पूछा था  -उन्होंने कहा,हाँ,पूँछा था मैने कहा मैने आपको दवा दी थी-उन्होंने कहा हाँ दी थी -मैने पूँछा आपने  दवा  खाई थी-उन्होंने कहा हाँ खाई थी -मैने कहा कि जब आपने दवा खाई और आपका दर्द ठीक हो गया तो आप बताइये कि इसमें आश्चर्य की क्या बात है - उन्होंने कहा कि मै तो बरसों से दवा खा रहा हूँ -मुझे बड़े-बड़े डॉक्टर ने लिटा कर घन्टो हथौड़ो से ठोंका,सुइयां चुभोई और दुनियाभर की जांचे करवाई,ढेरो दवाइयाँ खिलाई मगर लाभ नहीं हुआ - वे डॉक्टर के प्रति अपना रोष प्रगट करने लगे|मैने उनसे कहा कि आप डॉक्टर को दोष मत दीजिये-उन्होंने कहा क्यों?मैने कहा क्युकि आप अपना हाल सही-सही नहीं बता पाते तो डॉक्टर आपको सही दवा कैसे दे सकते है -वे बोले मै डॉक्टर प्रसाद ,कीड़ो मकोड़ों तक के रोम-रोम का हाल जाता हूँ,मै ही अपना हाल नहीं बता पाता -उन्होंने कहा आप अपनी बात सिद्ध कीजिये-मैने कहा अच्छा बताइये आज आपको कैसा लग रहा है -उन्होंने कहा आज मुझे बहुत अच्छा लग रहा है ,शरीर में चुस्ती-फुर्ती है,कोई दर्द नहीं है आदि-मैने उनसे कहा कि अभी एक सिम्पटम और रह गया है-मै आपको पांच मिनट और दे रहा हूँ सोचने के लिए -उन्होंने कुछ और सिम्पटम बताये लेकिन मैने फिर भी कहा कि अभी एक बात रह गई है -वे बोले अब तो कुछ नहीं बचा-मैने कहा अच्छा बताइये आज आपको मोशन कैसा हुआ थे -वे बोले मोशन,मोशन तो आज ऐसा साफ़ हुआ जैसा कि पिछले दस साल से नहीं हुआ होगा -मैने उनसे कहा कि इसे बताने में आपको कुछ शर्म आ रही थी क्या!!वे बोले लेकिन आपको कैसे पता-मैने कहा कि धिक्कार है उस डॉक्टर को जो रोगी को दवा तो दे देता है पर जिसे यह नहीं मालुम कि ये दवा शरीर में जाकर असर क्या करेगी!!सारी गड़बड़ी आपके पेट में ही थी जो अब ठीक हो चुकी है-

कई वर्षो तक मेरे उनसे सम्बन्ध बने रहे|दिल्ली में मेरी भतीजी के विवाह में वे सम्मलित हुए|अपने परिवार और विशिस्ट मित्रो को मुझसे मिलवाया|अनेक विदेशी मरीजो को भी मेरे पास चिकित्सा के लिए भेजा जिनमे से कुछ के बारे में आप आगे के लेख में पढेगे-

आप हमारी सभी पोस्ट होम्योपैथी के केस की एक साथ इस लिंक पे जाके देख सकते है -

लिंक- Disease-Homeopathy

  • मेरा पता-
  • KAAYAKALP
  • Homoeopathic Clinic & Research Centre
  • 23,Mayur Market, Thatipur, Gwalior(M.P.)-474011
  • Director & Chief Physician:

  • Dr.Satish Saxena D.H.B.
  • Regd.N.o.7407 (M.P.)
  • Ph :    0751-2344259 (C) 0751-2342827 (R)
  • Mo:    09977423220

24 मार्च 2016

स्वस्थ रहना है तो दही का सेवन करें

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Curd-दही आपके लिए एक स्वास्थ्यप्रद आहार है इसमें कैलोरी कम होती है इसमें आपके शरीर के लिए लाभदायक बैक्टीरिया पाया जाता है वैज्ञानिको द्वारा अध्ययन से भी अब ये सिद्ध हो चुका है दही(curd) में आपको दीर्घायु प्रदान करने की विशेष शक्ति है दही का सेवन आपके लिए fitness tips से कम नहीं है-

Curd-दही


Curd-दही खाने के फायदे-

  1. Curd-दही हमें स्वस्थ ही नहीं रखता बल्कि दही हमें दूसरी अन्य प्रकार की बीमारियों से भी बचाता है दही कैंसर जैसी भयानक बीमारियों से भी लड़ने की शक्ति भी देता है -
  2. गर्मियों में घरेलू इलाज के लिए सर्वोत्तम आहार है इन दिनों होने वाले फोड़े-फुन्सी से भी आपको निजात दिला सकता है -
  3. अधिक खा लेने से अजीर्ण हो गया हो तो दही(curd) में सेंधा नमक +काली मिर्च +भुना जीरा बराबर की मात्रा में पीसकर डाल दे आप खाने के बाद इसमें थोडा पानी मिला कर प्रयोग में ले जब तक आपको अजीर्ण से छुटकारा न मिले इसे लेते रहे -
  4. कई बार गर्मी में पेट खराब हो जाता है या फिर लू लग जाती है दोनों ही स्थितियों में दही(curd)में जौ का सत्तू मिलाकर लेने से लाभ होता है -
  5. कभी-कभी जल्द बाजी में गर्म पेय पदार्थो या गरमा-गर्म सब्जी खा लेने से आपका मुंह जल जाता है तो आप दही में पानी मिला कर कुल्ला करे -
  6. गर्मी के कारण मुंह में छाले हो गए हो तो ताजा और मीठा Curd(दही) और शहद बराबर की मात्रा में मिलाकर चाटे आराम मिलेगा -
  7. दही आपके रक्त को भी साफ़ करने का काम करता है एवं दिमाक को भी शांत बनाने का कार्य करता है जिनको भूंख नहीं लगती है या फिर कम लगती है उनके लिए दही का सेवन बहुत ही उपयोगी है ये आपके fitness में भी सहायक है -
  8. गर्मियों में फोड़े-फुंसी से जल्द छुटकारा पाना चाहते है तो दही(curd) और सरसों का तेल बराबर मात्रा में मिलाकर पेस्ट बना ले और दिन में दो-तीन बार लगाए आराम होगा -
  9. दही में दिल के रोग-हाई ब्लड प्रेशर और गुर्दों की बीमारियों को रोकने की क्षमता है तथा यह कोलेस्ट्रॉल को बढ़ने से रोकता है और दिल की धड़कन सही बनाए रखता है - 
  10. जिन लोगो को जोडों का दर्द रहता है उनको हींग का छौंक लगाकर दही का सेवन करने से काफी लाभ होता है -
  11. दही शरीर पर लगाकर नहाने से त्वचा कोमल और खूबसूरत बन जाती है इसमें नींबू का रस मिलाकर चेहरे, गर्दन, कोहनी, एड़ी और हाथों पर लगाने से शरीर निखर जाता है दही की लस्सी में शहद मिलाकर पीने से सुंदरता बढ़ने लगती है - 


सावधानी-

  1. ध्यान रहे रात को दही(curd) का सेवन न करे और फ्रिज में देर तक रक्खा दही भी इस्तेमाल से बचे क्युकी ताजे दही में ही सभी लाभदायक तत्व मौजूद रहते है -
  2. curd-दही को पीतल-ताम्बे-एल्युमीनियम के बर्तन में न रक्खे इसमें रक्खा गया दही विषाक्त हो जाता है दही को मिटटी के बर्तन में ही ज़माना उत्तम है इससे आपका दही गाढ़ा और थक्केदार जमता है क्युकि फ़ालतू पानी को मिटटी का बर्तन सोख लेता है -
  3. खांसी-बुखार-जुखाम के रोगी को दही नहीं खाना चाहिए-


Upcharऔर प्रयोग-

20 मार्च 2016

अतिबला के क्या फायदे हैं

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अतिबला यानी इसे खिरैटी(Kirati) भी कहा जाता है ये पौष्टिक गुणों से भरपूर है ये आयुर्वेद में बाजीकरण के रूप में भी प्रयुक्त की जाती है धातु सम्बंधित रोग में इसका प्रयोग कारगर है ये यौन दौर्बल्य-धातु क्षीणता- नपुंसकता तथा शारीरिक दुर्बलता(Physical infirmity) दूर करने के अलावा अन्य व्याधियों को भी दूर करने की अच्छी औषीधी है-


Atibala


इसकी और भी कई जातियां हैं पर बला- अतिबला- नागबला- महाबला- ये चार जातियां ही ज्यादा प्रचलित हैं बला चार प्रकार की होती है चारों प्रकार की बला शीतवीर्य-मधुर रसयुक्त-बलकारक-कान्ति-वर्द्धक-वात रक्त पित्त-रक्त विकार और व्रण को दूर करने वाली होती है इसके जड़ और बीज को उपयोग में लिया जाता है-

उपयोग(Use)-

1- शुक्रमेह के लिए खरैटी की ताजी जड़ का एक छोटा टुकड़ा लगभग 5-6 ग्राम एक कप पानी के साथ कूट-पीस और घोंट-छानकर सुबह खाली पेट पीने से कुछ दिनों में शुक्र धातु गाढ़ी हो जाती है और शुक्रमेह होना बंद हो जाता है-

2- महिला को श्वेत प्रदर(Leukorrhea) रोग हो तो बला के बीजों का बारीक पिसा और छना चूर्ण एक एक  चम्मच सुबह-शाम शहद में मिलाकर कर दे और फिर ऊपर से मीठा दूध हल्का गर्म पी लें-

3- शरीरिक कमजोरी के लिए आधा चम्मच की मात्रा में इसकी जड़ का महीन पिसा हुआ चूर्ण सुबह-शाम मीठे हल्के गर्म दूध के साथ लेने और भोजन में दूध-चावल की खीर शामिल कर खाने से शरीर का दुबलापन दूर होता है शरीर सुडौल बनता है सातों धातुएं पुष्ट व बलवान होती हैं तथा बल वीर्य तथा ओज बढ़ता है-

4- खरैटी के बीज और छाल समान मात्रा में लेकर कूट-पीस-छानकर महीन चूर्ण कर लें तथा  एक चम्मच चूर्ण घी-शकर के साथ सुबह-शाम लेने से वस्ति और मूत्रनलिका की उग्रता दूर होती है और मूत्रातिसार होना बंद हो जाता है-

5- बवासीर के रोगी को मल के साथ रक्त भी गिरे तो इसे रक्तार्श यानी खूनी बवासीर कहते हैं बवासीर रोग का मुख्य कारण खानपान की बदपरहेजी के कारण कब्ज बना रहना होता है बला के पंचांग को मोटा-मोटा कूटकर डिब्बे में भरकर रख लें और प्रतिदिन सुबह एक गिलास पानी में दो चम्मच यानी कि लगभग 10 ग्राम यह जौकुट चूर्ण डालकर उबालें और जब चौथाई भाग पानी बचे तब उतारकर छान लें फिर ठण्डा करके एक कप दूध मिलाकर पी पाएं- इस उपाय से बवासीर का खून गिरना बंद हो जाता है-

6- अतिबला की जड़ का काढ़ा 40 मिलीलीटर की मात्रा में सुबह-शाम पीने से पेशाब में खून का आना बंद हो जाता है-

7- अतिबला के पत्तों का काढ़ा बनाकर प्रतिदिन तीन से चार बार कुल्ला करें ये प्रयोग  रोजाना करने से मसूढ़ों की सूजन व मसूढ़ों का ढीलापन खत्म होता है-

8- जिनको मासिक धर्म रुक जाता है या अनियमित आता है उनको खिरैटी+ चीनी+मुलहठी+ बड़ के अंकुर+ नागकेसर+ पीले फूल की कटेरी की जड़ की छाल लेकर इनको दूध में पीसकर घी और शहद में मिलाकर कम से कम 15 दिनों तक लगातार पिलाना चाहिए- इससे मासिकस्राव (रजोदर्शन) आने लगता है-

9- अतिबला+कंटकारी+बृहती+वासा (अड़ूसा) के पत्ते और अंगूर को बराबर मात्रा में लेकर काढ़ा बना लेते हैं फिर इसे 15 से 30 मिलीमीटर की मात्रा में 5 ग्राम शर्करा के साथ मिलाकर दिन में दो बार लेने से गीली खांसी ठीक हो जाती है-

10- अतिबला(खिरैटी) के साथ नागकेसर को पीसकर ऋतुस्नान  के बाद दूध के साथ सेवन करने से लम्बी आयु वाला (दीर्घजीवी) पुत्र उत्पन्न होता है-


गोक्षुरादि चूर्ण चूर्ण बनाए-

नागबला+अतिबला+कौंच के शुद्ध छिलकारहित बीज+ शतावर+तालमखाना और गोखरू इन सब द्रव्य को बराबर वजन में लेकर कूट-पीस-छानकर महीन चूर्ण करके मिला लें और छन्नी से तीन बार छान लें ताकि सब द्रव्य अच्छी तरह मिलकर एक जान हो जाएं-

प्रयोग -

यह चूर्ण एक-एक चम्मच सुबह-शाम या रात को सोते समय मिश्री मिले कुनकुने गर्म दूध के साथ पीने से बहुत बलवीर्य और यौनशक्ति की वृद्धि होती है शीघ्रपतन के रोगी पुरुषों के लिए यह योग आयुर्वेद के वरदान के समान है यह योग बना-बनाया बाजार में आयुर्वेदिक दवा विक्रेता के यहां इसी नाम से मिलता हैं-

Upcharऔर प्रयोग-

18 मार्च 2016

How Improve Your Skin-त्वचा को कैसे निखारे

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टमाटर के गूदे और दही दोनों को बराबर की मात्रा में ले कर पेस्ट बनाये -अब इस पेस्ट को आप चहरे और गर्दन पर लगाए -जब सूख जाए -इसे पानी से धो ले -कुछ दिन प्रयोग से आपका रंग साफ़ हो जाएगा -इससे कील और मुहांसे में भी फायदा होगा -साधारण है -हर्बल है -बिना साइड इफेक्ट के लाभ देगा -




जिन लोगों को हथेलियों और तलवों में जलन की शिकायत रहती है-पुदीना ठंडक का अच्चा स्रोत है-आराम मिलेगा-इसी तरह इस पेस्ट को चेहरे पर भी लगाया जा सकता है-गर्मियों में ये चेहरे को ताजगी और ठंडक प्रदान करेगा-



आटे का चोकर या फिर सूजी -चेहरे या हाथ पैरो  की स्क्रबिंग के लिए अच्छा विकल्प है इसको दही या मलाई में मिला-कर लगाए -तथा तौलिये से सूखने पे साफ़  करे - तेलीय त्वचा वाले छाछ और रुखी त्वचा वाले मलाई का प्रयोग का प्रयोग करे - तथा घर का बना ये स्क्रब आपकी त्वचा से ब्लेक हेड्स भी निकालने में आपकी मदद भी करेगा -



संतरे में विटामिन सी होता है -इसे खाने से त्वचा आपकी स्वस्थ रहती है -और इसके छिलकों को आप छाया में सुखा ले फिर इसका आप पावडर बना ले और इसे आप मलाई या दही या शहद में मिला के उबटन की तरह चेहरे पर लगाए -इससे आपके चेहरे की मृत कोशिकाए निकलेगी -


मुलायम त्वचा के लिए शहद और निम्बू का रस मिलकर लगाएं-इससे न सिर्फ त्वचा कोमल होगी बल्कि चेहरे पर चमक और रंग भी निखर जायेगा-ध्यान रहे,निम्बू की मात्रा ज्यादा न हो कभी कभी शहद की जगह निम्बू में मलाई की मात्र बड़ा सकते हैं-

खीरे को पीसकर चेहरे व गर्दन पे लगाये -सूखने पे धो ले -आपको चेहरे पे चमक के साथ ठंडक प्रदान करेगा-


अनार का जूस निकालकर बोतल में भरकर रख लें-इसका रस गर्मियों में टोनिंग,क्लीनिंग,त्वचा के रोमछिद्र खोलने में मददगार साबित होगा|इसका प्रयोग स्प्रे के माध्यम से भी कर सकते हैं-


जिनकी त्वचा तेलीय है वो लोग ध्यान रक्खे कि चेहरे पर कुछ भी लगाने के बाद जादा नहीं रगड़े -येसा करने से खरोच पड़ सकते है -

Upcharऔर प्रयोग-

16 मार्च 2016

गर्मी का अमृत है मठ्ठा -Garmi Ka Amrat Hai Mattha

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दही से जमने वाला मठ्ठा आपके लिए सारे पौष्टिक गुणों से भरपूर है जी हाँ चाय से पीछा छुडाये और मठ्ठे का सेवन शुरू कर दे यकीन माने कुछ दिन बाद आप इसके गुणों से परिचित होते जायेगे -


जो भी व्यक्ति भोजन के बाद एक गिलास मठ्ठे  का सेवन करता है उसे पेट का कोई भी रोग नहीं होता है जो लोग दही नापसंद करते है वो भी मठ्ठे  का सेवन कर सकते है स्वाद के लिए आप इसमें काला नमक और जीरा तथा जरा सी हींग मिला के ले सकते है यह आसानी से पच भी जाता है-

किसी भी कारण यदि आपका पेट गड़बड़ हो गया है तो घबडाए नहीं आप काला नमक +मिश्री+सेंधा नमक मिला के एक गिलास इसका सेवन करे और लाभ देखे-

ये आपके शरीर की प्रतिरोधक छमता को भी बढाता है जिनको जादा गर्मी लगती है उनके लिए तो ये बहुत ही फायदेमंद है ये आपके शरीर को भी ठंडक देता है -

यह उन महिलाओं को भी बहुत ठंडक पहुंचाता है जिनको मेनोपॉज के बाद गर्मी लगती है-

अगर आपके बाल झड़ रहे है तो हफ्ते में मठ्ठे से दो दिन बालों को धुलें और यदि झुर्रियां हैं तो आटे में मठ्ठा मिला कर चेहरे पर लेप लगाएं इससे आपकी झुर्रियां कम होने लगेंगी-

अधिकतर स्वाद के लिए हम मसालेदार भोजन का प्रयोग अधिक मात्रा में करते है इसलिए एक गिलास लेने से ये मसाले से होने वाली जलन को शांत कर देता है इसमें चूँकि प्रोटीन अधिक होता है और ये एसिडिटी भी नहीं होने देता है-

जो लोग दूध नहीं पसंद करते है वो मट्ठे से भी कैल्सियम प्राप्त कर सकते है कैल्सियम के साथ-साथ इसमें प्रोटीन -विटामिन बी -पौटेशियम की भी मात्रा होती है ये सभी मिनरल्‍स आपके स्वास्थ के लिये अच्छे हैं इसे पीने से आपके शरीर का इम्‍यून सिस्‍टम भी मजबूत होता है-

ये बवासीर रोगी के लिए भी काफी लाभदायक है तथा इसके नियमित सेवन से कैंसर-कोलेस्ट्रोल और ब्लड प्रेशर ठीक हो जाता है क्युकि इसमें बायो एक्टिव  प्रोटीन हेाता है जो कि कोलेस्ट्रोल को कम कर के ब्लड प्रेशर को कम करने के लिये जाना जाता है-

हिचकी चलने पर मट्ठे में एक चम्मच सौंठ डालकर सेवन करें तथा उल्टी होने पर मट्ठे के साथ जायफल घिसकर चाटें -

मुंहासे होने पर गुलाब की जड़ मट्ठे में पीसकर मुंह पर लगानी चाहिए-पैर की एड़ियों के फटने पर मट्ठे का ताजा मक्खन लगाने से आराम मिलता है- 

मोटापा अधिक होने पर छाछ को छौंककर सेंधा नमक डालकर पीना चाहिए- सुबह-शाम मट्ठा या दही की पतली लस्सी पीने से स्मरण शक्ति तेज होती है-

उच्च रक्तचाप होने पर गिलोय का चूर्ण मट्ठे के साथ लेना चाहिए-

जले हुए स्थान पर तुरंत छाछ या मट्ठा मलना चाहिए-विषैले जीव-जंतु के काटने पर मट्ठे में तम्बाकू मिलाकर लगाना चाहिए-


अमलतास के पत्ते छाछ में पीस लें और शरीर पर मलें तथा कुछ देर बाद स्नान करें इससे शरीर की खुजली नष्ट हो जाती है-

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Upcharऔर प्रयोग-

15 मार्च 2016

Gudhal-गुडहल के क्या प्रयोग है

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Gudhal-गुडहल का पौधा सामान्यत: सर्वत्र मिल जाता है लेकिन जब तक आप इसके उपयोग की जानकारी से अनजान है तब तक ये एक फूल का पौधा समझ कर ही लोग इसका उपयोग करते है Gudhal-गुड़हल-Hibiscus का फूल दिखने में जितना सुंदर होता है ये उतना ही फायदों से भरपूर भी होता है आयुर्वेद के अनुसार इसके गुडहल(Gudhal) फूल बहुत उपयोगी होते है-

Gudhal-गुडहल


Gudhal-गुड़हल सामान्यत: दो प्रकार के है सफ़ेद गुडहल की जड़ो को पीस कर कई दवाओं का निर्माण होता है  कई प्रकार के ब्यूटी प्रोडक्ट्स बनाने और यहां तक कि ब्यूटी ट्रीटमेंट में गुड़हल के फूल का उपयोग किया जाता है स्ट्रेस और पॉल्यूशन के कारण कम उम्र में बालों के झड़ने की समस्या से परेशान हों या मुहांसे और पिंपल्स की समस्या से -यह इन दोनों में ही कारगर है आइए- जानते हैं किस तरह से गुड़हल(Gudhal) के फूल का इस्तेमाल किया जा सकता है-

Gudhal-गुड़हल के लाभ-

  1. Gudhal-गुडहल की पत्ती से बनी चाय एलडीएल कोलेस्टेरॉल को कम करने में काफी प्रभावी है इसमें पाए जाने वाले तत्व अर्टरी में प्लैक को जमने से रोकते हैं जिससे कोलेस्टेरॉल का स्तर कम होता है-गुड़हल के फूलों में एंटी-ऑक्सीडेंट पाया जाता है जो कोलेस्ट्रॉल कम करने के साथ ब्लड प्रेशर को भी कंट्रोल करता है -इसके लिए इसके फूलों को गरम पानी में उबालकर पीना फायदेमंद होता है-
  2. डायबिटीज के लिए नियमित आप इसकी 20 से 25 पत्तियों का सेवन शुरू कर दे ये आपकी डाइबिटीज का शर्तिया इलाज है-इसका पौधा नर्सरी से आसानी से मिल जाता है और इसे आप घर में लगा सकते है -
  3. अगर आपको किडनी की समस्या है तो आप गुडहल(Gudhal) की पत्ती से बनी चाय का सेवन करे इसी चाय का लाभ डिप्रेसन के लिए भी होता है -
  4. Gudhal(गुड़हल) का शर्बत दिल और दिमाग को शक्ति प्रदान करता है तथा ये आपकी मेमोरी पावर को बढ़ाता है  जो लोग बढ़ते उम्र के साथ मेमोरी लॉस होने की समस्या से परेशान है और जब कम उम्र में याददाश्त कमजोर होने लगे तो गुड़हल इस समस्या को दूर करने में भी बहुत ही कारगर है गुड़हल की 10 पत्तियां और 10 फूल लें फिर इन्हें सुखाकर और पीसकर उसका पाउडर बना लें और किसी एयर टाइट डिब्बे में बंद करके रखें दिन में दो बार दूध के साथ इस पाउडर को लेना से आपकी मेमोरी पावर में काफी इजाफा होता है - 
  5. मुंह में छाले हो गए है तो आप गुडहल(Gudhal) के पत्ते चबाये आराम हो जाएगा -
  6. मैथीदाना+गुड़हल और बेर की पत्तियां पीसकर पेस्ट बना लें आप इसे 15 मिनट तक बालों में लगाएं इससे आपके बालों की जड़ें मजबूत और स्वस्थ होंगे-
  7. गुडहल-Gudhal में अधिक मात्रा में विटामिन सी होता है जब चाय या अन्य रूपों में इसका सेवन किया जाता है तो यह सर्दी और खांसी के लिए काफी फायदेमंद होता है इससे आपको सर्दी से जल्द राहत मिलेगी-
  8. बालों के झड़ने की समस्या से लगभग हर कोई परेशान है गुड़हल के फूल इस समस्या को दूर करने में बहुत ही कारगर हैं ये न सिर्फ बालों का झड़ना रोकते हैं बल्कि इसके इस्तेमाल से एक अलग ही शाइनिंग बालों में नजर आने लगती है-गुड़हल की 6-8 पत्तियों को लेकर अच्छे से पीस लें इसे सिर और स्केल्प में अच्छे से लगाएं 3 घंटे रखने के बाद गुनगुने पानी से धो लें ये स्केल्प को पोषण देने के साथ ही बालों की ग्रोथ में भी बहुत ही फायदेमंद होता है-
  9. बुखार व प्रदर में भी लाभकारी होता है यह शर्बत बनाने के लिए गुड़हल के सौ फूल लेकर कांच के पात्र में डालकर इसमें 20 नीबू का रस डालें व ढक दें। रात भर बंद रखने के बाद सुबह इसे हाथ से मसलकर कपड़े से इस रस को छान लें। इसमें 80 ग्राम मिश्री+20 ग्राम गुले गाजबान का अर्क+20 ग्राम अनार का रस+ 20 ग्राम संतरे का रस मिलाकर मंद आंच पर पका लें-
  10. गुड़हल(Gudhal) का फूल सूजन के साथ ही खुजली और जलन जैसी समस्याओं से भी आपको राहत दिलाता है -गुड़हल के फूल की पत्तियों को मिक्सी में अच्छे से पीस लें तथा सूजन और जलन वाले हिस्से पर लगाएं  कुछ ही मिनटों में समस्या दूर हो जाएगी-
  11. पिंपल्स और मुहांसों की समस्या से परेशान हैं तो गुड़हल की पत्तियों को पानी के साथ उबालकर अच्छे से पीस लें और इसमें शहद मिलाकर पिंपल्स पर लगाएं-
  12. महिलाओं को अक्सर आयरन की कमी से एनीमिया की समस्या हो जाती है लेकिन बहुत ही कम लोग इस बात को जानते होंगे कि गुड़हल के फूल से भी एनीमिया का इलाज संभव है आप 40-50 गुड़हल की कलियों को सुखा कर फिर अच्छे से पीसकर उन्हें किसी एयर टाइट डिब्बे में बंद कर दें और रोजाना सुबह-शाम एक कप दूध के साथ यह पाउडर लें सिर्फ एक महीने में ही एनीमिया की समस्या दूर हो जाएगी-इससे स्टेमिना भी बढ़ता है-
  13. और पोस्ट के लिए-


Upcharऔर प्रयोग-

13 मार्च 2016

Holly-होली त्यौहार के बारे में Scientific वैज्ञानिक मान्यताये

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हमें अपने पूर्वजों का शुक्रगुजार होना चाहिए कि उन्होंने वैज्ञानिक(Scientific)दृष्टि से बेहद उचित समय पर होली(Holly)का त्योहार मनाने की शुरूआत की थी लेकिन Holly-होली के त्योहार की मस्ती इतनी अधिक होती है कि लोग इसके वैज्ञानिक(Scientific)कारणों से अंजान रहते हैं-

Holly-होली त्यौहार के बारे में Scientific वैज्ञानिक मान्यताये


होली(Holly)का त्योहार न केवल मौज-मस्ती-सामाजिक सदभाव और मेल-मिलाप का त्योहार है बल्कि इस त्योहार को मनाने के पीछे कई वैज्ञानिक(Scientific)कारण भी हैं जो न केवल पर्यावरण को बल्कि मानवीय सेहत के लिए भी गुणकारी हैं-

होली(Holly)का त्योहार साल में ऐसे समय पर आता है जब मौसम में बदलाव के कारण लोग उनींदे और आलसी से होते हैं और ठंडे मौसम के गर्म रूख अख्तियार करने के कारण शरीर का कुछ थकान और सुस्ती महसूस करना प्राकृतिक है-शरीर की इस सुस्ती को दूर भगाने के लिए ही लोग फाग के इस मौसम में न केवल जोर से गाते हैं बल्कि बोलते भी थोड़ा जोर से हैं इस मौसम में बजाया जाने वाला संगीत भी बेहद तेज होता है ये सभी बातें मानवीय शरीर को नई ऊर्जा प्रदान करती हैं इसके अतिरिक्त रंग और अबीर (शुद्ध रूप में) जब शरीर पर डाला जाता है तो इसका उस पर अनोखा प्रभाव होता है-

होली(Holly)पर शरीर पर ढाक(पलाश) के फूलों से तैयार किया गया रंगीन पानी, विशुद्ध रूप में अबीर और गुलाल डालने से शरीर पर इसका सुकून देने वाला प्रभाव पड़ता है और यह शरीर को ताजगी प्रदान करता है जीव वैज्ञानिकों का मानना है कि गुलाल या अबीर शरीर की त्वचा को उत्तेजित करते हैं और पोरों में समा जाते हैं और शरीर के आयन मंडल को मजबूती प्रदान करने के साथ ही स्वास्थ्य को बेहतर करते हैं और उसकी सुदंरता में निखार लाते हैं-

Holly-होली का त्योहार मनाने का एक और वैज्ञानिक कारण है- हालाँकि यह होलिका दहन की परंपरा से जुड़ा है शरद ऋतु की समाप्ति और बसंत ऋतु के आगमन का यह काल पर्यावरण और शरीर में बैक्टीरिया की वृद्धि को बढ़ा देता है लेकिन जब होलिका जलाई जाती है तो उससे करीब 145 डिग्री फारेनहाइट तक तापमान बढ़ता है परंपरा के अनुसार जब लोग जलती होलिका की परिक्रमा करते हैं तो होलिका से निकलता ताप शरीर और आसपास के पर्यावरण में मौजूद बैक्टीरिया को नष्ट कर देता है और इस प्रकार यह शरीर तथा पर्यावरण को स्वच्छ करता है- 

कुछ वैज्ञानिकों का यह भी मानना है कि रंगों से खेलने से स्वास्थ्य पर इनका सकारात्मक प्रभाव पड़ता है क्योंकि रंग हमारे शरीर तथा मानसिक स्वास्थ्य पर कई तरीके से असर डालते हैं पश्चिमी फीजिशियन और डॉक्टरों का मानना है कि एक स्वस्थ शरीर के लिए रंगों का महत्वपूर्ण स्थान है हमारे शरीर में किसी रंग विशेष की कमी कई बीमारियों को जन्म देती है और जिनका इलाज केवल उस रंग विशेष की आपूर्ति करके ही किया जा सकता है- होली के मौके पर लोग अपने घरों की भी साफ-सफाई करते हैं जिससे धूल गर्द, मच्छरों और अन्य कीटाणुओं का सफाया हो जाता है एक साफ-सुथरा घर आमतौर पर उसमें रहने वालों को सुखद अहसास देने के साथ ही सकारात्मक ऊर्जा भी प्रवाहित करता है-

होलिका दहन व पूजन आदि निम्न प्रकार से करना चाहिए-

होलाष्टक के पहले दिन किसी पेड़ की शाखा को काटकर उस पर रंग-बिरंगे कपड़े के टुकड़े बांधे जाते हैं- मोहल्ले, गांव या नगर के प्रत्येक व्यक्ति को उस शाखा पर एक वस्त्र का टुकड़ा बांधना होता है पेड़ की शाखा जब वस्त्र के टुकड़ों से पूरी तरह ढंक जाती है तब इसे किसी सार्वजनिक स्थान पर गाड़ दिया जाता है शाखा को इस तरह गाड़ा जाता है कि वह आधे से ज्यादा जमीन के ऊपर रहे- फिर इस शाखा के चारों ओर सभी समुदाय के व्यक्ति गोल घेरा बनाकर नाचते-गाते हुए घूमते हैं इस दौरान अर्थात घूमते-घूमते एक-दूसरे पर रंग-गुलाल, अबीर आदि डालकर प्रेम और मित्रता का वातावरण उत्पन्न किया जाता है होलाष्टक के आखिरी दिन यानी फागुन पूर्णिमा को मुख्य त्योहार होली मनाया जाता है-

मुख्य त्योहार यानी फागुन पूर्णिमा को अर्धरात्रि के बाद घास-फूस, लकड़ियों, कंडों तथा गोबर की बनाई हुई विशेष आकृतियों (गूलेरी या बड़गुले) को सुखाकर एक स्थान पर ढेर लगाया जाता है इसी ढेर को होलिका कहा जाता है इसके बाद मुहूर्त के अनुसार होलिका का पूजन किया जाता है-

अलग- अलग क्षेत्र व समाज की अलग-अलग पूजन विधियां होती हैं अतः होलिका का पूजन अपनी पारंपरिक पूजा पद्धति के आधार पर ही करना चाहिए- आठ पूरियों से बनी अठावरी व होली के लिए बने मिष्ठान  आदि से भी पूजा होती है-

होलिका पूजन के समय निम्न मंत्र का उच्चारण करना चाहिए -

                   "अहकूटा भयत्रस्तैः कृता त्वं होलि बालिशैः ।
             अतस्वां पूजयिष्यामि भूति-भूति प्रदायिनीम्‌ ॥"

घरों में गोबर की बनी गूलरी की मालाओं से निर्मित होली का पूजन भी इसी प्रकार होता है कुछ स्थानों पर होली को दीवार पर चित्रित कर या होली का पाना चिपकाकर पूजा की जाती है यह लोक परंपरा के अंतर्गत आता है-

पूजन के पश्चात होलिका का दहन किया जाता है यह दहन सदैव उस समय करना चाहिए जब भद्रा लग्न न हो ऐसी मान्यता है कि भद्रा लग्न में होलिका दहन करने से अशुभ परिणाम आते हैं, देश में विद्रोह, अराजकता आदि का माहौल पैदा होता है इसी प्रकार चतुर्दशी, प्रतिपदा अथवा दिन में भी होलिका दहन करने का विधान नहीं है-

दहन के दौरान गेहूँ की बाल को इसमें सेंकना चाहिए- ऐसा माना जाता है कि होलिका दहन के समय बाली सेंककर घर में फैलाने से धन-धान्य में वृद्धि होती है दूसरी ओर यह त्योहार नई फसल के उल्लास में भी मनाया जाता है-

होलिका दहन के पश्चात उसकी जो राख निकलती है जिसे होली-भस्म कहा जाता है उसे शरीर पर लगाना चाहिए-

भस्म लगाते समय निम्न मंत्र का उच्चारण करना चाहिए -

             वंदितासि सुरेन्द्रेण ब्रम्हणा शंकरेण च ।
         अतस्त्वं पाहि माँ देवी! भूति भूतिप्रदा भव ॥

ऐसी मान्यता है कि जली हुई होली की गर्म राख घर में समृद्धि लाती है साथ ही ऐसा करने से घर में शांति और प्रेम का वातावरण निर्मित होता है-

नवविवाहिता क्यों नहीं देखती होली-

नववधू को होलिका दहन की जगह से दूर रहना चाहिए विवाह के पश्चात नववधू को होली के पहले त्योहार पर सास के साथ रहना अपशकुन माना जाता है और इसके पीछे मान्यता यह है कि होलिका (दहन) मृत संवत्सर की प्रतीक है- अतः नवविवाहिता को मृत को जलते हुए देखना अशुभ है-

Upchar और प्रयोग-

11 मार्च 2016

How are you healthy-कैसे आप स्वस्थ रहे

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आज से पचास वर्ष पहले कोई व्यक्ति रिफाइंड आयल का नाम नहीं जानता था -तो क्या लोग स्वस्थ नहीं रहते थे ये आप हमसे नहीं-अपने आप से ही पूछे यही सच है आज की अपेक्षा पहले के लोग जादा स्वस्थ हुआ करते थे आज की तरह गली-मोहल्ले में इतने डॉक्टर भी नहीं हुआ करते थे और लोग इतने बीमार भी नहीं हुआ करते थे-

 How are you healthy-कैसे आप स्वस्थ रहे

क्या कभी आपने गहराई से इस बात को सोचा है- शायद नहीं -क्युकि भागम-भाग की दौड़ में सोचने का समय नहीं है -

मुझे आज भी याद है जादातर लोगो को साधारण बीमारियाँ ही हुआ करती थी हम जब ओषधालय में हुआ करते थे नार्मल पेसेंट ही आते थे और कम लागत या सरकारी गिनी-चुनी दवाओं में ही स्वस्थ हुआ करते थे सिर्फ साधारण बीमारियों के पेसेंट ही जादा आते थे - दो सौ मरीजो में एक आधा ही आया करता था जिसे घातक बिमारी -टी बी , हाई बी पी ,अस्थमा आदि हुआ करते थे हार्ट ब्लोकेज के केस तो न के बराबर थे -


तब के जमाने में पास्ता-बर्गर-पिज्जा-नूडल्स जैसी चीजो को कोई जानता भी नहीं था माँ के हाथ के सुबह की घी चुपड़ी रोटी या पराठे में ही सुबह का नास्ता ही ब्रेक-फास्ट हुआ करता था -

पैदल चलना स्कूल जाना आम बात थी किसी व्यायाम या जिम जाने की आवश्यकता ही नहीं हुई और स्वास्थ भी अच्छा -आज सारे संसाधन उपलब्ध है फिर भी हम बीमार है आखिर क्यों .?

डिलेवरी भी काम-काजी महिलाओं की नार्मल ही हो जाती थी- टेस्ट के नाम पे टिटनेस का एक इंजेक्सन बस यही लगवा लिया और आखिरी के नौवे माह तक घर का पूरा काम -काज करने के लिए काम वाली बाई नहीं आती थी -

आज बिना माइनर आपरेशन के डिलेवरी की हास्पिटल में कोई चांस नहीं- ये आरोप नहीं सच है -एक बार महिला का प्रवेश  लेबर रूम में होने की देर है - आपकी जेब पे भार तो पड़ना ही है-आखिर ये नर्सिंग-होम का खर्चा कहाँ से आएगा -पूरी तरह डॉक्टर -जो भगवान् हुआ करते थे आज बिजनेस-मेन हो गए है -

आखिर आपको पता भी नहीं कि- माइनर आप्रेसन की आवश्यकता थी भी या नहीं - नार्मल डिलेवरी में बिल केसे जादा बनेगा-दवाये बाहर से केसे प्रस्क्राईब की जायेगी- जिनकी आवश्यकता भी नहीं है आखिर उसी मेडिकल शाप पे बाद में वापस जो जानी  है -

एक सच लिख रहा हूँ जो कडवा है - जो डॉक्टर आपको घातक और साइड इफेक्ट वाली दवाये लिख रहा है वो खुद अपनी लिखी दवा का उपयोग अपने लिए नहीं करता है क्युकि उसे उसके साइड इफेक्ट का पता है - अगर उसको नार्मल बिमारी हो भी तो हमने हास्पिटल में देखा है वो अपना काम देसी दवा से चलाते है -

ये सब इस लिए नहीं लिख रहा हूँ -कि सिर्फ निंदा करना ही मेरा उद्देश्य है -बल्कि इसलिए लिख रहा हूँ कि आप अपने आप को जितना हो सके इन बीमारियों से खुद को सुरक्षित करे -कम से कम डॉक्टर की आवश्यकता हो -पेसे की बचत भी हो -और आप उन दवाओं के साइड इफेक्ट से भी बचे -

 http://www.upcharaurprayog.com/2016/03/how-are-you-healthy_11.html

कुछ उपाय आपको अपने जीवन में अपनाने की आवश्यकता है -

1- बहार की खाने-पीने की वस्तुओ का जितना परहेज आप कर सके उतना अवस्य ही करे अगर मज़बूरी आती है किसी येसी जगह है जहाँ आपको खाना ही पड़ेगा तो ताजा फल लेके उसे अच्छी तरह धो ले आप और काम चला ले -

2- मौसमी फल और सब्जियां खाएं- क्योंकि इनमें पोषक तत्व सुरक्षित रहते हैं, जबकि कोल्ड स्टोरेज में रखी सब्जियों और फलों के 10 से 70 प्रतिशत पोषक तत्व नष्ट हो जाते हैं- 

3- खाद्य पदार्थों को देर तक न पकाएं-इससे उनके पोषक तत्व नष्ट हो जाते हैं और उनका रंग और टेक्सचर भी बदल जाता है-

4- हरी पत्तेदार सब्जियों को काटने से पहले धो लें- क्योंकि इनमें मौजूद विटामिन और मिनरल पानी में घुलनशील होते हैं- 

5- सलाद को खाने के तुरंत पहले ही काटें-सलाद को ज्यादा देर तक काटकर रखने से विटामिन बी और सी नष्ट हो जाते हैं-

6- सब्जियों को ढककर पकाएं-इससे पोषक तत्व सुरक्षित रहेंगे-

7- ताजे और मौसमी फल स्वादिष्ट होते हैं और फाइबर, विटामिन और एंटी ऑक्सीडेंट से भरपूर होते हैं-फलों का जूस पीने की बजाय उन्हें साबुत खाएं-

8- फ्रोजन और डिब्बाबंद में से अगर चुनाव करना हो तो- फ्रोजन खाने का चुनाव करें- डिब्बाबंद खाना खरीदने से पहले लेबल्स और सामग्री जांच लें- ऐसे खाद्य पदार्थों का चयन करें जिसमें प्रिजर्वेटिव्स और रंगों का उपयोग कम से कम हो- ऐसे भोजन का चयन करें, जिसमें सोडियम की मात्रा कम से कम हो- ट्रांस फैट वाले उत्पाद ना खरीदें, क्योंकि ये प्राकृतिक नहीं होते और दिल के लिए भी अच्छे नहीं होते- डिब्बाबंद खाद्य पदार्थों में स्वाद और रंग बरकरार रखने के लिए कई बार विषैले रसायन का इस्तेमाल किया जाता है- इससे एलर्जी और कैंसर का खतरा होता है- इनमें सोडियम की मात्रा भी अधिक होती है, जिससे रक्तचाप बढ़ सकता है- हृदय रोग, स्ट्रोक और गुर्दे की बीमारियों की आशंका भी बढ़ जाती है-

9- साबुन, शैंपू, हेयर कंडीशनर और फेशियल क्लींजर में सोडियम लॉरियाल सल्फेट नाम का एक रसायन पाया जाता है-इसका उपयोग झाग बनाने वाले एजेंट के रूप में किया जाता है- बच्चों के शैंपू में भी यह घातक रसायन पाया जाता है- कई क्रीम, शैंपू आदि में एल्युमीनियम भी होता है- इससे अल्जाइमर्स का खतरा बढ़ जाता है- बाजार में कई ऐसे शैंपू और कंडीशनर उपलब्ध हैं जो प्राकृतिक तत्वों  से बने होते हैं- शैंपू खरीदने से पहले सामग्री ध्यान से पढ़ें- ऐसे साबुन-शैंपू का उपयोग ना करें-जिसमें झाग बहुत बनते हों-

10- ऐसे टूथपेस्ट का उपयोग ना करें- जिसमें सोडियम लॉरेल सल्फेट और फ्लोरइड हो- आपको ऐसा टूथपेस्ट चुनने में एक बार मेहनत करनी पड़ेगी, लेकिन आप हमेशा के लिये हानिकारक रसायनों से बच जायेगे -

11- डिओडरेंट चुनते वक्त भी इस बात का ध्यान रखें-कि उसमें एल्यूमीनियम न हो- ऐसे डिओडरेंट के इस्तेमाल से ब्रेस्ट कैंसर का खतरा बढ़ जाता है-

12- आस-पास की जगह पे जाना हो -कम से कम व्हीकल का इस्तेमाल करे पैदल जाए- शारीरिक व्यायाम भी होगा और पेसे की भी बचत -

13- रिफाइंड एक धीमा जहर है -इसकी जानकारी आपको गूगल महाराज की शरण में  जाए तो असीम ज्ञान मिल जाएगा कि आप आखिर क्या खा रहे है- इससे दूर होने में ही भलाई है -शुद्ध मुमफली ,सरसों का तेल,नारियल तेल,अपनाए-

14- रिफाइंड तेल की जगह सरसों या जैतून के तेल में भोजन बनाएं- इनमें पोषक तत्व संतुलित मात्रा में होते हैं डीप फ्राय करने के बाद बचे हुए तेल को दोबारा उपयोग में न लाएं, क्योंकि उच्च ताप पर तेल को गर्म करने से वह टॉक्सिन का रूप ले लेता है जिसे एक्रेलेमाइट कहते हैं- 

15- अच्छी वसा आपके मस्तिष्क, हृदय और कोशिकाओं की सेहत के साथ ही आपके बाल, त्वचा और नाखूनों के लिये भी आवश्यक है इससे दिल की बीमारियों का खतरा कम होता है, मूड ठीक रहता है और डिमेंशिया का खतरा भी कम होता है खाने में वसा की मात्रा कम करने से हर दिन ली जाने वाली कैलोरी कम हो जाती है लेकिन यह सुनिश्चित करें कि आप अच्छी मात्रा में मोनोसैचुरैटेड फैट और फैटी एसिड लें- जिसमें ओमेगा-3 और ओमेगा-6 शामिल हों- जैतून का तेल, सूखे मेवे, मछलियां, विभिन्न प्रकार के बीज और फलियां अच्छी वसा के स्त्रोत हैं-

नोट- अपना ही नहीं आने वाली पीढ़ी को भी इस जहर से मुक्ति दिलाये-

Upchar और प्रयोग-

9 मार्च 2016

शरीर के तिल का महत्व

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शरीर पे तिल होने का भी अपना फल है ये तिल लाल और काले दो प्रकार के हो सकते है शरीर पे पाए जाने वाले मस्सो का फल भी तिल के सामान ही होता है आइये जाने कि किस अंग में तिल होने का क्या प्रभाव होता है -

तिल के लाभ ज्योतिष की नजर में-

महिला के लिए-

1- जिस महिला के गाल पर तिल होता है उसे अच्छा पति मिलता है-

2- महिला के बाईं तरफ मस्तक पर तिल हो तो वह किसी भाग्यवान की पत्नी बनती है-

3- आँख पर तिल हो तो पति की बहुत अधिक प्रिय होती है-

4- गाल पर बाँईं तरफ तिल हो तो ऐशो-आराम का सुख मिलता है-

5- कान पर तिल हो तो आभूषण पहनने का सुख मिलता है-

6- छाती पर तिल हो तो पुत्र की प्राप्ति होती है-

7- जाँघ पर तिल हो तो नौकर-चाकर का सुख मिलता है-

8- पाँव पर तिल हो तो विदेश यात्रा का योग रहता है-

9- मस्तक पर तिल हो तो हर जगह इज्जत मिलती है ये जिन क्षेत्रों में प्रयास करते हैं उनमें भाग्य इन्हें सहयोग करता है और जीवन में सफल होते हैं-

10- नाक पर तिल हो तो वह महिला रूपवान होती है पर घमंडी होती है-


पुरुष के लिए-


1- जिस पुरुष के सिर (मस्तक) पर तिल होता है वह हर जगह इज्जत पाता है जिस व्यक्ति माथे पर दाएं अथवा (स्त्री )बाईं ओर तिल का निशान होता है वह धन तो खूब कमाते हैं लेकिन भोग विलास की चीजों में धन को खर्च कर देते हैं-इसलिए कई बार इन्हें आर्थिक परेशानियों का भी सामना करना पड़ता है-

2- आँख पर तिल होता है तो वह नायक(लीडरशिप) पद पाता है-

3- मुख पर तिल होता है तो उसे बहुत दौलत मिलती है-

4- गाल पर तिल हो तो उसे स्त्री का सुख मिलता है-

5- ऊपर के होंठ पर तिल हो तो धन पाता है तथा चारों तरफ इज्जत मिलती है-जिस स्त्री अथवा पुरुष के होठों के ऊपर दाएं तिल का निशान होता है उनका अपने जीवनसाथी के साथ प्रेमपूर्ण रिश्ता रहता है इनके बीच बेहतर संबंध बना रहता है इसके विपरीत होंठ के बाएं ओर तिल का निशान होने पर जीवनसाथी के साथ मतभेद बना रहता है इनके बीच तालमेल की कमी रहती है-

6- नीचे के होंठ पर तिल हो तो वह व्यक्ति कंजूस होता है-

7- कान पर तिल हो तो वह खूब पैसे वाला होता है-

8- गर्दन पर तिल हो तो उस व्यक्ति की लंबी उम्र होती है तथा उसे आराम मिलता है-

9- छाती की दाहिनी तरफ तिल हो तो अच्छी स्त्री मिलती है व्यक्ति की छाती पर बायीं ओर तिल या मस्से का निशान होता वह उनकी शादी अधिक उम्र में होने की संभावना रहती है ऐसे व्यक्ति कामुक होते हैं इन्हें हृदय रोग की भी आशंका रहती है-

10- दाहिने कंधे पर तिल हो तो वह व्यक्ति कलाकार होता है क्षेत्र कोई-सा भी हो सकता-

11- हाथ के पंजे पर तिल हो तो वह व्यक्ति दिलदार व दयालु रहता है-

12- पाँव पर तिल हो तो उस व्यक्ति के विदेश यात्रा का योग बनता है-

उपरोक्त में दाहिने और बाए का विचार के साथ -कभी-कभी अन्य क्रूर ग्रह से भी मिलने वाला फल देर से मिलता है-
Upchar और प्रयोग-

8 मार्च 2016

कैसे आएगी आपको सुखपूर्वक नींद

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आधुनिक युग में काम की और घर की टेंसन से व्यक्ति इतना प्रभावित हो चुका है कि रात को नींद न आने की परेशानी से जूझ रहा है कई बार हमें काम ज़्यादा रहते है और सोने का भी समय नहीं मिल पाता है नींद भगाने के लिए चाय कॉफ़ी जैसे पेय पीते जाना सेहत के साथ खिलवाड़ है-



सारी रात सोने के बाद भी सुबह उठकर अगर आप थका हुआ और बोझिल महसूस करते हैं तो आपके रात भर नींद में होने का कोई अर्थ नहीं है अगर नींद आ भी जाये तो कच्ची नींद आती है, स्वप्न चलते रहते है। कभी सांस रुकने से खर्राटों से नींद में व्यवधान आते है- फिर ज़रा आप नींद में उतरने लगते हो और इतने में उठने का अलार्म बज जाता है और आपको दिनभर के कार्य करने के लिये उठना ही पड़ता है-


सात घण्टों की नींद के बाद भी अगर आप थकान महसूस करते हैं बोझिल महसूस करते हैं आपका मन चिड़चिड़ा रहता है, तो ये सारे लक्षण आपके तनाव में होने के और सही नींद ना होने के लक्षण हैं-कई बार हम नींद में स्वप्न देखते रहते हैं एक रात में हम कितनी बार करवटें बदलते हैं कभी मच्छर काट रहे, कभी प्यास लगी, कभी शौचालय जाना है, कभी-कभी थकान के मारे शरीर इतना अकड़ जाता है कि नींद आना मुश्किल हो जाता है-

किसी भी प्रकार के रोग या तनाव में योग निद्रा एक चमत्कारिक औषधि की तरह काम करती है इसके अलावा योग निद्रा के निरंतर अभ्यास से आध्यात्मिक लाभ भी प्राप्त किया जा सकता है योग निद्रा का अर्थ है आध्यात्मिक नींद यह वह नींद कहलाती है  जिसमें जागते हुए सोना है- 

सोने व जागने के बीच की स्थिति है योग निद्रा- इसे स्वप्न और जागरण के बीच ही स्थिति भी कह सकते हैं यह अर्धचेतन जैसा है आपको पता है कि देवता भी इसी निद्रा में सोते हैं-

क्या है योग निंद्रा-

आप सबसे पहले बिस्तर पे आराम से लेते और खुद को किसी चद्दर या कम्बल से ढक ले यदि जादा रोशनी हो तो तो आँखों पर गह्र्रे रंग का कपडा रख ले और अपनी साँसों पर अपना ध्यान केन्द्रित करने का प्रयास करे हो सके तो आप नाक में थोड़ा घी या तेल लगा लें यदि आप योग निद्रा के पहले तेज़ी से कपाल भाति प्राणायाम कर ले तो और भी अच्छा अनुभव होगा-

आपके मन में जो भी विचार आ रहे है उनको आने दे बस उस पर आप कोई प्रतिक्रिया न करे और सांस अंदर खीचे तो पेट को उपर उठता महशुस करे और जब बाहर निकाले तो पेट को अंदर जाता महसूस करे -

अब आप अपने शरीर के एक एक अंग पर अपना ध्यान केन्द्रित करते जाए और उस अंग को शिथिल करते जाए यहाँ शिथिल का मतलब ये है कि आप उस अंग को बिलकुल भी न हिलाए सोचे ये सुन्न अवस्था में है सबसे पहले आप ये पैर के अंगूठे से ये कार्य प्रारंभ करे -

श्वास द्वारा अर्जित प्राणों की ऊर्जा उस तक पहुँच कर उसे रोग रहीत कर उर्जा दे रही है ऐसा अनुभव करें-ये क्रिया आप कुछ समय तक करे -

फिर धीरे धीरे आँखें खोल कर पैर के अंगूठे को हिलाएं और हाथों की उँगलियों को हिलाएं और फिर हाथों को ऊपर खिंच कर शरीर को सक्रीय कर लें-सीधे या दाहिने हाथ की और करवट ले कर उठे हाथों को रगड़ कर पुरे शरीर में हलकी मालिश करते जाएँ -इस विधि से 10 से तीस मिनट तक योगनिद्रा का अभ्यास करने पर सात से आठ घंटे की गहरी नींद के बराबर विश्राम प्राप्त होता है-

योगनिद्रा का लाभ उठाने के लिए कम से कम तीन सप्ताह का अभ्यास जरूरी है-

नींद सही ना होने से बहुत से लोगों को स्पॉण्डिलाइटिस या साइनस की समस्या रहती है। श्वास ठीक से नहीं ले पाते है ज़ुकाम बना रहता है और सिर दुखता रहता है वो लोग एक बार अवस्य इस प्रयोग को कुछ दिन करके आजमाए -

योग निंद्रा को बनाए मानसिक जप का आधार-

आप जब ये चाहते है कि यही योग निंद्रा आपके जीवन में आध्यात्मिक और मानसिक जप की सफली भूत बन जाए तो बस आपको सिर्फ थोडा सा कुछ दिन का अभ्यास करना है -

जब आप निंद्रा के आगोस जाने लगे तो आप को मन ही मन अपने इष्ट या गुरु मन्त्र की मानसिक आवृति करनी है और ये आवृति एक अभ्यास के बाद इस प्रकार हो जायेगी कि आप को लगेगा कि हम पूरी रात मन्त्र जप करते रहे है क्युकि सोती हुई अवस्था में आपका ये जप निरंतर चलता रहेगा सुबह आपको महसूस होगा कि आपने पूरी रात जप किया है इस अभ्यास का सार्थक परिणाम आपको अवस्य देखने में मिलेगा - आप देहिक और भौतिक कष्ट से मुक्ति पाते जाते है और आपके न बनने वाले काम भी सफल होने लगते है -समय अवस्य लगता है लेकिन जिसने भी एक माह कर लिया है वो जीवन पर्यन्त इसे करता रहेगा -

जिन लोगो ने गुरु नहीं किया है या जिनका इष्ट नहीं है वे लोग एक साधारण सा मन्त्र "ॐ नम: शिवाय" का मानसिक जप कर सकते है इसका प्रभाव बहुत शक्ति-शाली है -

आप ईश्वरीय शक्ति के पास खिचते चले जाते है और जप धारणा विश्वास ही आपके जीवन में सफलता का कारण बन जाती है -

उपचार और प्रयोग-

सोना किस दिशा में उचित है

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भारत मे बहुत बड़े-बड़े ऋषि हुये -चरक ऋषि ,पतंजलि ऋषि ,शुश्रुत ऋषि ऐसे एक ऋषि हुए है 3000 साल पहले बाकभट्ट ऋषि -उन्होने 135 साल के जीवन मे एक पुस्तक लिखी जिसका नाम था अष्टांग हृद्यम उसमे उन्होने ने मानव शरीर के लिए सैंकड़ों सूत्र लिखे थे शास्त्रों, वास्तु तथा विज्ञान के दृष्टिकोण भी इस बात को उजागर करते हैं-


बाग्भट्टजी एक जगह लिख रहे है कि जब भी आप आराम करे मतलब सुबह या शाम या रात को सोये तो हमेशा दिशाओ का ध्यान रख कर सोये-अब यहाँ पे वास्तु घुस गया वास्तुशास्त्र जी हाँ वास्तु भी विज्ञान ही है-

तो वो कहते है हमेशा आराम करते समय सोते समय आपका सिर सूर्य की दिशा मे रहे - सूर्य की दिशा मतलब पूर्व और पैर हमेशा पश्चिम की तरफ रहे और वो कहते कोई मजबूरी आ जाए कोई भी मजबूरी के कारण आप सिर पूर्व की और नहीं कर सकते तो दक्षिण (south)मे जरूर कर ले-तो या तो पूर्व ( east) या दक्षिण (south) | जब भी आराम करे तो सिर हमेशा पूर्व मे ही रहे-पैर हमेशा पश्चिम मे रहे और कोई मजबूरी हो तो दूसरी दिशा है दक्षिण -दक्षिण मे सिर रखे उत्तर दिशा मे पैर-


बागभट्ट जी कहते है उत्तर मे सिर करके कभी न सोये -फिर आगे के सूत्र मे लिखते है उत्तर की दिशा म्रत्यु की दिशा है सोने के लिए -उत्तर की दिशा दूसरे और कामो के लिए बहुत अच्छी है पढ़ना है लिखना है अभ्यास करना है  तो उत्तर दिशा मे करे -लेकिन सोने के लिए उत्तर दिशा बिलकुल निषिद्ध है-

सिर दक्षिण या पूर्व की ओर रखकर सोने से होता है शरीर व मन पर अनुकूल प्रभाव, हमारे सोने की दिशा भी शरीर व मन पर शारीरिक व मानसिक, अनुकूल व प्रतिकूल प्रभाव डालती है-

सोते समय दक्षिण या पूर्व की ओर सिर करके ही सोना चाहिए-अन्धविश्वास कह कर इस बात को नकारा नहीं जा सकता-

जब किसी की म्रत्यु होती है पंडित जी खड़े होकर संस्कार के लिए संस्कार के सूत्र बोलते है पहला ही सूत्र वो बोलते हैं -मृत का शरीर उत्तर मे करो मतलब सिर उत्तर मे करो -

भारत मे जो संस्कार होते है -जन्म का संस्कार है, गर्भधारण का एक संस्कार है ऐसे ही मृत्यु भी एक संस्कार (अंतिम संस्कार) है तो उन्होने एक पुस्तक लिखी है (संस्कार विधि) तो उसमे अंतिम संस्कार की विधि मे पहला ही सूत्र है -मृत का शरीर उत्तर मे करो फिर विधि शुरू करो -

वैज्ञनिक तथ्य(Scientific Fact)-

वैज्ञानिक  दृष्टिकोण से देखा जाए तो पृथ्वी के उत्तरी और दक्षिणी दोनों ध्रुवों में चुम्बकीय प्रवाह(Magnetic flux) विद्यमान है उत्तर दिशा(North) की ओर धनात्मक प्रवाह(Positive flow) है और दक्षिण दिशा(South) की ओर ऋणात्मक प्रवाह(Negative flow)-हमारा सिर का स्थान धनात्मक प्रवाह वाला और पैर का स्थान ऋणात्मक प्रवाह वाला है-

यह दिशा बताने वाले चुम्बक के समान है- धनात्मक या ऋणात्मक प्रवाह आपस में मिल नहीं सकते-इसको चुंबक के प्रयोग से भी देखा जा सकता है- दक्षिण से दक्षिण या उत्तर से उत्तर के सिरे को मिलाने पर ये एक दूसरे को धकेेलते हैं जबकि दक्षिण से उत्तर को मिलाने पर आपस में चिपकते हैं इस लिए दक्षिण की ओर सिर न रख कर पैरों को रखकर सोया जाए तो शारीरिक ऊर्जा का क्षय हो जाता है और वह जब सुबह उठा जाता है तो थकान महसूस होती है, जबकि दक्षिण में सिर रखकर सोने से अच्छे प्रभाव सामने आते हैं, क्योंकि सिर में धनात्मक ऊर्जा का प्रवाह है जबकि पैरों से ऋणात्मक ऊर्जा का निकास होता रहता है-

आपका जो शरीर है उसका जो सिर वाला भाग है वो है उत्तर और पैर वो है दक्षिण -अब मान लो आप उत्तर कि तरफ सिर करके सो गए-अब पृथ्वी का उत्तर और सिर का उत्तर दोनों साथ मे आयें तो  काम करता है  ये प्रतिकर्षण बल(Repulsion force)-

विज्ञान  ये कहता है-प्रतिकर्षण बल लगेगा -तो आप समझो उत्तर मे जैसे ही आप सिर रखोगे प्रतिकर्षण बल काम करेगा धक्का देने वाला बल तो आपके शरीर मे संकुचन(Contraction) आएगा शरीर मे अगर संकुचन आया तो रक्त का प्रवाह (Blood Pressure) पूरी तरह से कंट्रोल  के बाहर जाएगा-

क्यूँकी शरीर को प्रेशर आया तो खून  को भी प्रेशर  आएगा-तो अगर खून को प्रेशर  है तो नींद आएगी ही नहीं- मन मे हमेशा चंचलता रहेगी-दिल की गति हमेशा तेज रहेगी, तो उत्तर की दिशा पृथ्वी की है जो उत्तरी ध्रुव कहलाती है-और हमारे शरीर का उत्तर ये है सिर, अगर दोनों एक तरफ है तो प्रतिकर्षण बल काम करेगा नींद आएगी ही नहीं-

देखे- 

सुबह उठने के बाद भी लगता है कि अभी थोड़ा और सो लें-इसी तरह पूर्व दिशा में पैर रखकर सोते हैं तो जहां शास्त्रों के अनुसार अनुचित और अशुभ माने जाते हैं-वहीं पूर्व में सूर्य की ऊर्जा का प्रवाह होता है और पूर्व में देव-देवताओं का निवास स्थान भी माना गया है-

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Upchar और प्रयोग-