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4 मार्च 2016

शिरिष वृक्ष एक औषधि भी है

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शिरिष(Siris)के वृक्ष सभी जगह देखने में मिल जायेगे इसके पुष्प सुंदर भीनी-भीनी खुशबू युक्त होते है इस पेड़ के पत्ते इमली की तरह पर कुछ बड़े होते है बारिश के दिनों में इस पर सुन्दर सफ़ेद  लाल या पीले फूल लगते है फिर सर्दियों में इसकी फलियाँ बन जाती है यह बागीचे की सुन्दरता को बढाता है साथ ही यह औषधि भी है-यह त्रिदोषशामक है-

शिरिष वृक्ष एक औषधि भी है

शिरिष वृक्ष(Siris)क्या उपयोग है-


1- सिरस के पत्तों का रस काजल की तरह आंखों में लगाने से आंखों का दर्द समाप्त होता है शिरष(Siris)के पत्तों के रस में कपड़े को भिगोकर सुखा लें और फिर कपड़े को पत्तों के रस में भिगोकर सुखा लें-इस तरह इसे तीन बार भिगोएं और फिर इस कपड़े की बत्ती बनाकर चमेली के तेल में जलाकर काजल बना लें अब इस काजल को प्रतिदिन आंखों में लगाने से आंखों के सब रोग दूर होते हैं-

2- शिरष(Siris)के बीजों की मींगी तथा खिरनी के बीज का कुछ भाग लेकर पीसकर लें और इसे पानी मे उबाल कर शिरष के पत्तों के रस के साथ घोट लें इसके बाद इसकी गोलियां बनाकर छाया में सुखा लें अब इन गोलियों को स्त्री के दूध में घिसकर आंखों में लगाने से आंखों का फूला व माण्डा दूर होता है-

3- प्रतिदिन शिरष(Siris)के फूलों को पीसकर चेहरे पर लेप करने से चेहरे में निखार आता है इससे चेहरे के दाग, धब्बे, मुंहासे आदि खत्म होते हैं लेकिन इसका इस्तेमाल कम से कम एक महीने तक करें-

4- शिरष(Siris)की जड़ का काढ़ा बनाकर गरारे करने से तथा शिरष की जड़ का चूर्ण बनाकर मंजन करने से दांत मजबूत होते हैं-इससे मसूढ़ों के सभी रोग दूर होता है- शिरष की छाल का काढ़ा बनाकर बार-बार कुल्ला करने से पायरिया रोग ठीक होता है तथा इससे मसूढ़ों से खून आना बंद होता है-

5- 15 ग्राम शिरष के पत्ते और 2 ग्राम कालीमिर्च को पीसकर 40 दिन तक सेवन करने से कुष्ठ(कोढ़)रोग नष्ट होता है शिरष के बीजों का तेल निकालकर प्रतिदिन रोगग्रस्त स्थान पर लगाने से कुष्ठ ठीक होता है और इससे कुष्ठ के कीड़े व अन्य त्वचा रोग भी समाप्त होता है-

6- जलोदर रोग से पीड़ित रोगी को शिरष(Siris)की छाल का काढ़ा बनाकर पिलाना चाहिए-इससे पेट का पानी पेशाब के रास्ते से बाहर निकल जाता है-

7- शिरष के पत्तों का रस गर्म करके उसके अंदर थोड़ी सी हींग मिलाकर कान में डालने से कान का दर्द दूर होता है-

8- सिर दर्द में शिरष(Siris) के ताजे 5 फूल गीले रूमाल में लपेटकर या इसके बीजों का चूर्ण सूंघना चाहिए-इससे सिर का दर्द ठीक होता है-

9- शिरष के बीजों का चूर्ण 10 ग्राम, 5 ग्राम हरड़ का चूर्ण और 2 चुटकी सेंधा नमक-इन सभी को पीसकर चूर्ण बना लें और यह चूर्ण 1 चम्मच की मात्रा में प्रतिदिन रात को खाना खाने के बाद सेवन करें-इससे कब्ज दूर होती है-

10- शिरष के बीजों को थूहर के दूध में पीसकर लेप करने से किसी भी जहरीले कीड़े का विष समाप्त होता है-शिरष के फूलों को पीसकर जहरीले कीड़ों के डंक पर लेप करने से विष उतर जाता है-

11- 10 ग्राम शिरष की छाल को लगभग 500 मिलीलीटर पानी में अच्छी तरह पका लें और जब पानी केवल 100 मिलीलीटर बाकी रह जाए तो छानकर पीएं-इससे दस्त के साथ पेट के कीड़े निकल जाते हैं-

12- दस ग्राम शिरष के पत्तों को पानी में घोटकर मिश्री मिलाकर सुबह-शाम पीने से पेशाब की जलन समाप्त होती है-

13- एक से तीन ग्राम शिरष की छाल का चूर्ण घी के साथ मिलाकर प्रतिदिन सुबह-शाम खाने से शारीरिक शक्ति बढ़ती है और शरीर का खून साफ होता है-

14- Psoriasis या Eczema होने पर इसके पत्ते सुखाकर मिटटी की हंडिया में जलाकर राख कर लें-इसे छानकर सरसों के तेल में मिलाकर या देसी घी में मिलाकर प्रभावित त्वचा पर लगायें-

15- Piles में इसके बीज पीसकर लगायें कुछ ही समय में मस्से सूख जायेंगे-

16- पीरियड में बहुत दर्द हो तो पीरियड शुरू होने के चार दिन पहले इसकी 10 ग्राम छाल का 200 ग्राम पानी में काढ़ा बनाकर पीयें-इसे Period होने पर लेना बंद कर दें-

17- यदि आपको कमजोरी महसूस होती हो तो इसके एक भाग बीजों में दो भाग अश्वगंधा मिलाकर एक भाग मिश्री मिला लें  इस पावडर को सवेरे शाम लें-

18- आँख में लाली या अन्य कोई समस्या हो तो इसके पत्तों की लुगदी बनाकर उसकी टिकिया बंद आँखों पर कुछ समय के लिए रखें-

19- शीतपित्ती के दाने निकलने पर सिरस के फूलों का पानी के साथ पीसकर लेप करें और इसके फूलों को पीसकर 1 चम्मच की मात्रा में 1 चम्मच शहद के साथ सेवन करें-इससे दाने नष्ट होते हैं और शीतपित्त ठीक होता है-

20- सफेद सिरस की छाल को पानी के साथ पीसकर जख्म, खुजली व दाद पर लगाने से सभी प्रकार के त्वचा रोग ठीक होते हैं-सिरस के पत्तों की पोटली बनाकर फोड़े-फुन्सियों व सूजन के ऊपर बांधने से लाभ मिलाता है गर्मी के फोड़े-फुन्सी व पित्त की सूजन पर सिरस के फूलों का पीसकर लेप करें-इससे सूजन दूर होती है और फोड़े-फुन्सी ठीक होती है-सिरस के बीज का उपयोग करने से त्वचा के अर्बुद और गांठ समाप्त होती है-

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