This website about Treatment and use for General Problems and Beauty Tips ,Sexual Related Problems and his solution for Male and Females. Home treatment,Ayurveda treatment ,Homeopathic Remedies. Ayurveda treatment tips in Hindi and also you can read about health Related problems and treatment for male and female

28 अप्रैल 2016

Homeopathy-Brain Damage-मस्तिष्क की क्षति

By With कोई टिप्पणी नहीं:
Brain Damage

Homeopathy-Brain Damage-मस्तिष्क की क्षति-

मेरे ही विभाग के एक सहायक यंत्री को मस्तिष्क की क्षति अर्थात् सेरिब्रल सक्लेरोसिस(Cerebral Sclerosis)की बीमारी हुई और एलोपैथिक दवाओं से कोई लाभ तो हुआ नहीं बल्कि ज्यों-ज्यों दवा की गई -मर्ज बढता ही गया -उनके एक भाई इंगलैण्ड में डॉक्टर थे -बहीं इलाज कराने का विचार किया गया और पासपोर्ट आदि की व्यवस्था की जाने लगी -आगे पढ़े-

इसी बीच आफिस में ही किसी ने सहायक यंत्री को सुझाव दिया कि आप होम्योपैथिक इलाज क्यों नही करवाते है-जब डॉक्टर की बात चली कि किस डॉक्टर को दिखाया जाय तो उन्हें बताया गया कि आपके ही विभाग में जो सक्सेना उपयंत्री हैं वे बहुत अच्छे होम्योपैथ हैं आप उन्ही को दिखाइये -

एक समृद्ध परिवार का व्यक्ति जो स्थाई सहायक यंत्री भी हो- कैसे एक उपयंत्री से जो कि उनके विभाग का ही हो- से चिकित्सा कराना उचित नहीं लगा किन्तु वे जिससे भी वे बात करते मेरा नाम ही सुझा देता -अन्तत: उन्होंने मेरे पास संदेश भेजा -मैं जिस समय उनको देखने के लिये पहुचा वहाँ उनके एक मित्र जो उनके क्लासफेलो व सहायक यंत्री भी थे- पहिले से ही बैठे हुए थे -जैसे ही मैंने कमरे में पैर रखा उनने मेरे पैर छुए क्यों कि वे मेरे बडे भाई साहब के साले थे -एक सहायक यंत्री को पैर छूते देख कर वे कुछ सकपकाये -

उनसे मेरी बीमारी पर चर्चा आरम्भ हुईं - उनकी वाणी में अभी भी बहुत अक्खडपन था -शारीरिक स्थिति तों यह थी कि वे अपने हाथों से अपने पाजामे का नाडा भी नही बाँध सकते थे -बीमारी घीरे-धीरे आई थी -किसी प्रकार की अनुवांशिक कमी,तेज बुखार या दुर्घटना का कोई इतिहास नहीं था -सारा हाल बता कर उनने मुझसे पूँछा कि क्या मैं ठीक हो जाऊँगा

मैंने उनसे कहा कि मैं आपसे केवल एक लक्षण पूछूँगा  ? यदि वह होगा तो मैं आपके प्रश्न का उत्तर दे सकूँगा मैंने उनसे कहा कि आपका एक पैर ठन्डा  व एक पैर गरम होना चाहिये -वे बोले ऐसा कैसे हो सकता है-मैंने कहा हो सकता है या नहीं इसे छोडिये है कि नहीं बस इसे देखिये -मैंने उनके मित्र से कहा राजेन्द्र पहिले तुम देख कर मुझे बताओ फिर मै अपने तरीके से इनकी जाँच करूंगा -उन्होने पैरों को छू कर देखा और मुझे बताया कि जीजाजी सच में इनका एक पैर तो बिलकुल बर्फ जैसा ठंडा है जबकि दूसरा पैर नॉर्मल गरम लगता है-

यह सुन कर वे लगे डॉक्टरों को बुरा-भला कहने -वे बोले डॉक्टरों ने मुझे घन्टो लिटाकर सुइयाँ चुभाई , हथोंडों से ठोका बजाया, खूब नोंचा घसोटा पर ये मूर्ख यह भी नहीं जान पाये कि मेरा एक पैर ठंडा और एक पैर गरम है तब मैंने उनसे कहा कि आप डाक्टरों को गालियां क्यों दे रहे हैं -

मैंने उनसे पूँछा आपकी उम्र कितनी है, उन्होने कहा 27 साल - मैंने पूँछा ये पैर आपके साथ कब से है -वे बोले जन्म से -मैंने पूँछा कि ये दूसरा पैर आपके साथ कब से है -वे बोले क्या बात करते हो-ये भी जन्म से ही है -मैंने उनसे कहा कि 27 सालों में आप यह नही जान पाये कि आपका एक पैर ठंडा और दूसरा पैर गरम है - तो अगर डॉक्टर घन्टे दो घन्टे के परीक्षण में यह नहीं जान पाये तो इसमे कौन सा बडा भारी अपराध हो गया

तब जाकर वे कुछ शान्त हुए -उन्होने मुझसे कहा कि आपने तो मेरे शरीर से हाथ भी नहीं लगाया फिर आप कैसे जान गये कि मेरा एक पैर गरम व दूसरा पैर ठंडा है -मैंने कहा कि सिम्पटम के आधार पर -अब तो मैं आपके बारे में बहुत कुछ जान गया हूँ जैसे कि आपके मस्तिष्क का बायाँ भाग प्रभावित हुआ है इस लिये आपका शरीर का दाहिना भाग बिशेष रूप से आकान्त है-

फिर उन्होंने मुझसे फिर पूँछा फि क्या में ठीक हो जाऊँगा मैने उनसे कहा-हाँ-ठीक हो जायेंगे तब उन्होंने बड़ी ही कटु वाणी में कहा कि ऐसा तो सभी कहते हैं -मैं भी उनकी कठोर वाणी से आहत था अत: आवेश में आकर मैंने उनसे कहा कि आप उठेंगे, आप चलेंगे, आप दोडेंगे, आपकी शादी होगी, आपके बच्चे होंगे -क्या ऐसा कोई कहता है? उन्होंने कहा नहीं -मैंने कहा कि ये मैं कह रहा हूँ-

चिकित्सा के रूप में पहिले उन्हें हमने 'लायकापोडियम 1000' की दो पुडिर्यों दीं साथ में 'जेल्सीमियम 30' और 'काली फांस 30' की दो-दो खुराके दी गई इसके बाद 'नियोडायनम आक्साइड 30' तथा 'ऐर्चियम मेटेलीकम30' लम्बे समय तक दी जाती रही - धीरे धीरे उनके शरीर में शक्ति का संचार होने लगा -पहिले मैं उन्हें देखने के लिये उनके घर जाता था, फिर वे किसी के साथ स्कूटर पर मेरे क्लीनिक पर आने लगे -और फिर वे स्वयं स्कूटर चला कर आने लगे अपने आफिस का काम काज तो पहिले ही करने लगे थे -

उनका विवाह हुआ और एक कन्या ने उनके घर जन्म भी लिया -1978 में मेरा स्थानान्तर सेंवढा हो गया -वे वहाँ भी मुझसे मिलने कईं बार आये -इसके बाद मेरा उनसे सम्पर्क टूट गया एक बार में उनसे मिलने उनके आँफिस पहुचा -सोचा कि जरा हाल चाल पता कर लूँ-

मुझे देखते ही उनने मुझसे ऐसे पूँछा कि जैसे कि वे मुझे जानते ही न हीं "कैसे आये हो" - सामान्य शिष्टाचार के नाते बैठने तक को भी नहीं कहा- चाय पानी तो दूर की बात है -मैँने उनसे कहा कुछ नहीं बस नमस्कार करने को चला आया था - नमस्कार.! चलता हूँ- 

जब में उनके कमरे से बाहर आ रहा था तो अचानक मन में बिचार आया कि इन्होंने मेरे साथ ऐसा व्यवहार क्यों किया -मन में किसी ने कहा शायद इनका कुछ बुरा समय आ गया है इसलिये ये मेरा अपमान कर रहे हैं -मैँ तो वापिस आ गया परन्तु दो तीन दिन बाद पता लगा कि उनका एक छोटा सा एक्सीडेंट हुआ जिसके बाद उनकी हालत बहुत बिगड गई और वे चलने फिरने से पुन: मजबूर हो गये-

सनृ 1990 में मेरा भी प्रमोशन हो गया और पोस्टिंग भी उसी सर्किल मेँ हो गई मैं अपने सहयोगियों और स्टाफ से मिलने सर्किल आँफिस गया -प्रवेश करते ही इनका कमरा था पर मै इनसे न मिलते हुए सीधा अन्दर चला गया -उन्होंने मुझे जाते देख लिया सो फोरन मुझे बुलाने के लिये चपरासी को भेज दिया -हमारे विभाग में तो शायद ही कोई ऐसा होगा जो मुझे न जानता और न मानता हो -

पहिले मैं सबसे प्रेम से मिला फिर उनके कमरे में पहुंचा -उन्होंने मेरा बडी गर्म जोशी से स्वागत किया फ़ौरन चाय का आर्डर दिया -मैंने कहा चाय तो मैंने अभी पी है कहिये कैसे याद किया वे बोले मुझे बहुत तकलीफ है -मुझे बार-बार पेशाब जाती है -स्वयं तो मैं चल फिर नहीं सकता दो तीन आदमियों की सहायता लेनी पाती है -मैंने पूँछा कि आप क्या दवा ले रहे हैं -उन्होंने कुछ दवाइयों के नाम बताये मैंने कहा ये बहुत अच्छी दवाइयाँ हैं लेते रहिये ज़रूर फायदा करेगी -यद्यपि उन्हें एक बार फिर किसी सीमा तक स्वस्थ किया जा सकता था किन्तु मेरे अन्दर का चिकित्सक राजी नहीं हुआ-

27 अप्रैल 2016

Homeopathy-Fear of mental paralysis-मानसिक लकवे का भय

By With कोई टिप्पणी नहीं:
Fear of mental paralysis-मानसिक लकवे का भय

सन 1972 में मैंने एक जावा मोटर साइक्लि खरीदी थी डबरा(ग्वालियर) के ही मेरे एक मित्र अग्रवाल मुझसे बोले तुमने गाडी खरीदी है मुझे घुमाने के लिये ले चलो इसलिये अगले दिन रविवार को सिनेमा देखने के लिये झाँसी जाने का कार्यक्रम बन गया झाँसी में ही उनके बडे भाई रहते थे जिनका मैंने दमे का इलाज किया था हम लोग उनके बड़े भाई के घर पंहुच गए -बड़े भाई की पत्नी ने कहा आप लोग  पिक्चर देख कर आ जाओ मैं चाट बना रही हूँ खाकर ही जाना- 

लौट कर बहुत देर हो गई तो कुछ सोची समझा चाल के मुताबिक उन्होंने मुझें वही रोक लिया और फोन से डवरा सूचना दे दी दूसरे दिन सुबह उनकी बैठक में वही के दस-बरह लोग इकत्रित हो गये -मुझ से कहा गया कि कुछ लोग बैठक में आपका हन्तजार कर रहे हैं आप जरा उनसे मिल लें जब मै नीचे पंहुचा तो मुझें नीचे बैठे लोगों देखा तो उन सभी लोगों को बहुत निराशा हुई क्यों कि बरसात के कारण मेरा कुर्ता और पाजामा कीचड से गन्दा हो रहा था और मेरी दाढी भी बढी हुई थी यानी कि किसी भी एंगल से मैं डॉक्टर जैसा तो दिख ही नहीं रहा था -उन लोगों ने आपस में इशारों में तय कर लिया और एक बुजुर्ग सज्जन को यह भार सौपा फि डॉक्टर साहब की जाँच करो फि ये कुछ जानते भी हैं नहीं या फिर बेफालतू ही लोग इनकी यों ही तारीफ करते रहते हैँ-

तब तो एक बुजुर्ग सज्जन ने मुझ से कहा कि डाक्टर साहब मेरी एक समस्या हल करो -मैंने कहा कहिये क्या समस्या है -वे बोले -मेरे बाबा की मृत्यु लकवे से हुईं थी,मेरे पिताजी की मृत्यु भी लकवे से हुई और मैं 65 वर्ष का हो गया हूँ-मैं लकवे से मरना नहीं चाहता -आप मुझे कोई उपाय बताइये किन्तु दवा मैं कोई खाऊँगा नहीं ये मेरा फैसला है- मैंने अपने मन में सोचा कि इन्हों ने तो मुझे संकट में फंसा दिया -बाप-दादे लकवे से मर गये और खुद ये कब्र में पैर लटकाये बैठे हैं ओर ऊपर से धमकी भी यह है कि दवा ये खायेंगे नहीं - तो मेरे पास कौन सा जादू रखा हैं कि जो मै इनका लकवा छु-मन्तर कर दूँगा -एक क्षण मन में विचार किया तो बात दिमाग में आ गई -मैंने उनसे पूँछा कि क्या उनके बाबा के दिमाग में बहुत उलझन रहती थी ख़न्होंने कहा-हाँ रहती तो थी - मैँने पूँछा आपके पिताजी के दिमाग मे भी उलझन रहती थी? 

उन्होने कहा- बहुत -फिर मैंने उन्हें टेलीफोन एक्सचेन्ज का उदाहरण देकर समझाया कि यदि टेलीफीन के तार आपस उलझ जाये तो क्या घन्टी सही जगह बजेगी? बजे, न बजे और कहो तो किसी गलत जगह बजे -इसी तरह जब दिमाग की नाडिंयाँ उलझ जाती हैं तो शरीर फे अंग मनचाहे तरीके से काम नहीं करते है उन्होंने भी एक मंजे हुए कलाकार की तरह अपना हाथ सिर से झुलाया और नाली की तरफ झटक दिया -कहने लगे-उलझन-ये पडी है नाली में -बन्दा अब सौ साल जियेगा पर लकवा मुझे नहीं हो सकता है -

मेरा तात्पर्य वो अच्छी तरह समझ चुके थे और हम उनकी परीक्षा में पास हो चुके थे तभी एक सज्जन बोले डॉक्टर साहब नास्ता मेरे घर पे ही होगा तभी दूसरे बोले खाना मेरे घर पर -

शालीनता से मेरा जवाब था मेरा कुर्ता-पजामा गन्दा है आप लोगो के घर तो जाना हो नहीं सकेगा हाँ आप लोग अगर चाहते है तो सब कुछ यही मंगा ले हम सब बैठ कर मिल-कर खा सकते हैं-

और वे काफी दिन जिन्दा रहे बिना दवा खाए -लेकिन उनकी मृत्यु लकवे से नहीं हुई -

विशेष- 

दिमागी लकवा एक न्यूरोलॉजिकल यानि तंत्रिका संबंधी विकार है जो दिमाग (Brain) में चोट लगने या बच्चे के मस्तिष्क के विकास के दौरान हुई किसी गड़बड़ की वजह से होता है दिमागी लकवा शरीर की हरकत या जुंबिश, मांसपेशियों के नियंत्रण और समन्वय, चालढाल, रिफ़्लेक्स, अंग-विन्यास या हावभाव और संतुलन पर असर करता है बच्चों की क्रोनिक यानि पुरानी विकलांगता की ये सबसे आम वजहों में एक है मानसिक लकवा अत्यधिक सोच के कारण भी होता है -दिमागी लकवे से पीड़ित व्यक्ति को जीवन भर इसी स्थिति के साथ रहना पड़ता है-

मेरा सम्पर्क पता-

यहाँ क्लिक करे-

जुकाम-खांसी-अस्थमा-दमा-खर्राटा के लिए प्रयोग

By With कोई टिप्पणी नहीं:
मौसम बदलने के साथ-साथ आप सभी को बदलते सीजन में खांसी जुखाम नजले की शिकायत होना एक आम समस्या है अगर आपको कभी इस प्रकार की समस्या होती है तो Coughs-Colds के लिए आप घर पे ये देशी प्रयोग बना ले और इसका लाभ देखे-

जुकाम-खांसी-अस्थमा-दमा-खर्राटा के लिए प्रयोग

Coughs-Colds-क्या है प्रयोग-


जौ(Barley)एक किस्म का अनाज होता है जो कुछ कुछ गेहूं जैसा दिखता है आप बाजार से लगभग 250 ग्राम जौ ले आएँ- ध्यान रहे कि इसमे घुन न लगा हुआ हो और आप इसे साफ कर ले फिर मंद-मंद आग पर कड़ाही मे डाल कर भून ले और ये ध्यान रहे कि जले नहीं-इसके बाद इसे मोटा मोटा कूट-पीस ले अब जरूरत के समय एक बड़ा चम्मच जौ का चूर्ण लेकर उसमे एक छोटा चम्मच देशी घी मिला कर तेज गरम तवे पर या तेज गरम लोहे की कढाई मे डाल कर इसका धुआँ नाक से या मुँह से खींचें-यदि लकड़ी के जलते हुए कोयले पर डाल कर धुआँ खींचे तो और भी अधिक लाभदायक है-धुआँ लेने के 15 मिनट पहले और 2 घंटे बाद तक ठंडा पानी न पिए- प्यास लगे तो सिर्फ गरम दूध पिए-

1- यदि बार बार मुँह सूखता हो और प्यास लगती हो तो ये प्रयोग न करें-

2- नए जुकाम(Coughs-Colds)मे जब सिर भारी हो और नाक बंद तब यह प्रयोग करें और चमत्कार देखें सिर्फ पांच मिनट मे फायदा होगा-

3- खांसी, दमे(Asthma) मे इन्हेलर की तरह तत्काल फायदा दिखता है-

4- यही खर्राटे मे प्रतिदिन ये धुआँ लें- सुबह शाम किसी भी समय ले सकते हैं-

5- इसका कोई साइड इफेक्ट नहीं- बच्चों और गर्भवती महिलाओं के लिए भी सुरक्षित है-

6- अन्य दवाओं के साथ भी इसका प्रयोग किया जा सकता है तथा बदलते मौसम मे स्वस्थ लोग भी प्रयोग करें ताकि नजले जुकाम(Coughs-Colds) से बच सकें इसे आप दिन मे 4 बार तक प्रयोग कर सकते हैं-एक समय मे 4 बड़े चम्मच जौ घी मिला कर प्रयोग कर सकते हैं यदि बार बार मुँह सूखता हो और प्यास लगती हो तो ये प्रयोग न करें-

Upcharऔर प्रयोग-

26 अप्रैल 2016

Homeopathy-Stomach Cancer-आमाशय का कैंसर

By With कोई टिप्पणी नहीं:
Stomach Cancer


Stomach Cancer-आमाशय का कैंसर-

मेरे एक दूर के रिश्तेदार जो गुजरात फे एक कालेज में प्रोफेसर थे-रिटायर होने के बाद ग्वालियर आकर रहने लगे थे  पेट मे कुछ तकलीफ रहती थी सो चिकित्सा चलती रहती थी - तम्बाखू वे वहुत अधिक खाते सो सोचा गया कि कष्ट उसी की बजह से हैं - कष्ट अधिक बढने पर अस्पताल पे भरती कराया गया तो जाँच से पता चला कि आमाशय में केंसर है - आपरेशन के बाद घर आ गये परन्तु कुछ दिन बाद कष्ट फिर बढ गया इसलिये कैसर अस्पताल में भरती कराया गया - चिकित्सा के दौरान उन्है हिचफियां आने लगी - बहुत तरह की Anti Spasmetik(एन्टीस्पास्मेटिक) दवाइयाँ देने के बाद भी जब हिचकियाँ बन्द नहीं हुईं तो नीद के इंजेक्शन लगाये गये - उससे भी जव हिचकियाँ बन्द नहीं हुई तो बेहोशी की दवा दी गई पर हिचकियाँ फिर भी बन्द नहीं हुई - ऐसे में किसी की सलाह पर किसी होप्यापैथिक डाँक्टर की तलाश की गई अत: मुझे बुलाया गया - मैंने लगभग ग्यारह बजे उन्है जिन्सेंग का मदर टिन्चर(Jinseng Mother tinctur) देना शुरू किया -

लगभग 2 बजे हिचकियाँ आना बंद हो गया-मेरे इस इलाज से प्रभावित होकर उनके रिश्तेदारों ने मुझसे पेट का इलाज करने का अनुरोध किया-चूँकि केस तो बहुत नाजुक हालत में पहुँच चुका था इसलिए वास्तविकता को स्पष्ट करते हुए मैने कहा कि इस स्थिति में इनके लिए अधिक तो कुछ नहीं किया जा सकता है कि इनके कष्ट में कमी हो जावे अथवा जीवन कुछ आगे चल सके यही बहुत समझे-

उनके आग्रह पर मैने उन्हें आंर्निंथोगेलम(Aanrninthogelm) मूलअर्क की एक बूंद दवा आधा कप पानी में डालकर दे दी  और दो- दो चम्मच दवा दो -दो घन्टे के अन्तर से देने को कह दिया और अगले दिन स्थिति बताने के लिये कह दिया-

दूसरे दिन सुबह मलद्वार के रास्ते से लगभग एक लिटर काला काला जमा हुआ रक्त निकला -मरीज को काफी राहत महसूस हो रही थी अत: उनने कहना चालू कर दिया कि मैं अब अच्छा हो गया हूँ मुझे यहाँ से घर ले चलो - लेकिन जो होने को होता है यह तो होता ही हैं - उनकी पत्नी ने दवा फेंक दी और कहने लगी कि ऐसे कहीं इलाज होता है - पुन: पुरानी चिकित्सा के प्रारम्भ के साथ उनका अन्त भी हो गया-


प्रस्तुतीकरण- Upcharऔर प्रयोग 

25 अप्रैल 2016

जाने अपनी पलक और आई ब्रो के बारे में

By With कोई टिप्पणी नहीं:
जी हाँ फेस रिडिंग एक बहुत दिलचस्प विषय है। हर व्यक्ति चाहता है कि वह किसी भी व्यक्ति को देखते ही उसका स्वभाव जान ले ताकि वह अपनी जिंदगी में कभी किसी से धोखा ना खाए-

Blink and about Aibro


लेकिन ज्योतिष के अनुसार यदि कोई व्यक्ति फेस रिडिंग करना सीख जाए तो वह आसानी से किसी भी व्यक्ति का स्वभाव जान सकता है फेस रिडिंग में चेहरे के आकार से लेकर पलकों की झपकन तक सब कुछ नोटिस किया जाता है इसलिए आई ब्रो भी किसी व्यक्ति के स्वभाव की कई सारी विशेषताओं की ओर इशारा करती है-

पच्चीस सेकंड में पलकें झपकाने वाले अपने आप एक अजीब सा आकर्षण लिए होते हैं इनमे सम्मोहित करने की एक विशेष क्षमता होती हैं-

बीस सेकंड में पलकें झपकाने वाले स्थिर बुद्धि वाले और प्रभावशाली होते हैं-

पन्द्रह सेकंड में पलकें झपकाने वाले तेजी से निर्णय लेने वाले और चतुर होते हैं-

दस सेकंड में पलकों को झपकाने वाले दूसरों पर आश्रित रहते हैं ये अपना काम दूसरों से करवाकर अधिक खुशी महसुस करते हैं-

पांच सेकंड में पलकें झपकाने वाले अपने जीवन से परेशान वैभव व समृद्धि हीन होते हैं-

आम तौर पर फेस रीडिंग से किसी के कैरेक्टर और नेचर के बारे में अनुमान लगाया जा सकता है इसमें आई ब्रो का भी महत्वपूर्ण स्थान है- आई ब्रो से किसी के बारे में जानने के लिए उसकी शुरुआत, अंत, लंबाई, गोलाई, मोटाई की बहुत ध्यान से स्टडी करना चाहिए-

कुछ युवाओं की आई ब्रो टेढ़ी-मेढ़ी, मोटे गुच्छेदार बालों वाली होती हैं- ये अक्सर रहन-सहन के प्रति लापरवाह एवं रौबदार व्यक्तित्व वाले होते हैं- ये अपनी फीलिंग्स तुरंत रिएक्ट कर देते हैं इस प्रकार की भौंहें प्रबल दिमागी ताकत वाले युवा की होती हैं-

दोनों आई ब्रो आपस में मिली हों तो ऐसे व्यक्ति पर संदेह रखना चाहिए ये अपने काम को निकलवाने के लिए वे कोई भी रास्ता अपना सकते हैं तथा कुछ बुराइयाँ भी इनमें छिपी रहती हैं, जो मौका पड़ने पर ही हमें मालूम पड़ती हैं-

दोनों आई ब्रो के बीच यदि ज्यादा जगह हो अथवा अलग-अलग हो तो ऐसे व्यक्ति सच्चरित्र, स्पष्टवादी, नेक दिल के होते हैं-उनका जीवन काँच की तरह ट्रांसपरेंट होता है-

मोटी आई ब्रो हों और वे भी एक सीध में तो व्यक्ति बुद्धिमान, अपने कार्य में कुशल एवं हिसाब-किताब में प्रवीण होता है-

मधुरता, सरलता, कलाप्रियता की प्रवृत्ति तलवार की तरह घूमी हुई आई ब्रो के मालिक की होती है यदि इस प्रकार की आई ब्रो आँखों से दूर हों तो इनमें मानसिक दुर्बलता एवं कमजोरी के गुण विद्यमान होते हैं- ये कई बार अपनी अल्पबुद्धि के कारण मजाक के शिकार भी बन जाते हैं-

यदि भौंहें पतली होकर टेढ़ी-मेढ़ी हों तो व्यक्ति कुटिल और लड़ाकू होता है-

अगर भौंहों के बाल छोटे हों तो समझना चाहिए कि उस व्यक्ति में दूसरों को देखकर बहुत कुछ सीखने की क्षमता मौजूद है-

Upcharऔर प्रयोग-

Homeopathy-Inappropriate for love-अनुचित प्यार के लिए

By With कोई टिप्पणी नहीं:
Inappropriate-love
Inappropriate for love
Inappropriate for love-अनुचित प्यार के लिए-

अपने ही मुहल्ले की एक उच्चजाति  की संभ्रांत परिवार की एक अत्यन्त सुन्दर,पोस्ट ग्रेजुएट लडकी को एक निम्न  जाति के कम पढे लिखे, विवाहित, बाल-बच्चेदार सामान्य से युवक से प्यार हो गया-लड़की के चाचा ने जब उसकी माँ को इस सम्बन्ध में बताया तो उन्होंने कहा कि तुम मेरी लड़की को दोष लगाते हो -

ये बात किसी तरह मेरे कानों तक भी पहुँच गई और फिर मेरा होम्योपैथी दिमाग इस ओर आकर्षित हुआ -समझाने-बुझाने से तो ऐसे लोग मानते नहीं है बल्कि और उल्टे- भड़क जाते है क्युकि प्यार का नशा जब सिर चढ़ कर बोलता है तो फिर अपना भी कुछ कहे तो भी बात सिर के उपर से जाती है-


महामति डाक्टर कैट ने अपनी पुस्तक "लेक्चर्स आंन मेटीरिया मेडिका" के 'नेट्रम म्यूर' के अध्याय में इस प्रकार के सम्बन्धों के वारे में बहुत स्पष्ठरूप से लिखा है - उस जमाने मेँ लॉर्ड्स की पत्नियाँ यानी लेडीज कोचमैंनों के साथ प्यार करने लगतीं थी और यहाँ तक कि भाग भी जाती थीं - इसका उन्होंने बहुत सजीव
वर्णन किया है - उन्होंने लिखा है कि यदि समय रहते उन्है यह दवा खिला दी जाय तो उनको स्वंय ही आश्चर्य होने लगेगी कि वे ऐसी मूर्खता क्यों कर रही थीं मैंने भी इस लक्षण का इस केस में परीक्षण करने का निश्चय किया- 

और हुआ यह कि जिस दिन -रात को उनको भागना था, लडकी ने बहाना बना कर अपनी माँ से कहा कि मेरे पेट में दर्द हो रहा है,मेँ अस्पताल जाकर दवा ले आऊँ, जहाँ उसे उस लडके से मिलना था - संयोग से उसका भाई बोला कि मेरे मुहँ में छाले हो रहे हैं, चलो अपन चाचा से दवा ले लेते हैं अस्पताल में तो बहुत भीड होगी  इस तरह मजबूरी में दोनों ही भाई-बहिन मेरे पास आगये -सच मानिए मैं तो मौके की तलाश में ही था- मैंने उसके भाई को तो छाले की दवा दे दी तथा उस लडकी को 'नेट्रम म्यूर 1000' की एक खुराक उसके मुंह मेँ डाल दी ओर फिर कुछ इधर उधर की बातों में उसे लगाये रखा - मेरी पत्नी और बच्चों से बात करते जब आधा घन्टा हो गया तो दूसरी खुराक भी उसे खिलादी - फिर 'मेग्निशिया फाँस' की गोलियां देकर उसे जाने दिया-


उसी शाम वे लोग घर से निकल गये और रेल से वे अभी मुरैना ही पहुचे होंगे कि लडकी का दिमाग एकदम बदला और अचानक उसको लगा कि वह कोई बहुत बडी मूल करने जा रही है और उसने तुरन्त ही उस लडके से कहा कि अगले स्टेशन पर उतर कर घर वापिस चलना है - लडके ने कहा फि कैसी बात करती हो तुम - अपन को देहली चलना है -खूब घूमेंगे फिरेंगे और मौज मस्ती करेगें - घर चलकर क्या करना हे - लडकी ने कहा कहीं नहीं चलना है -कुछ नहीं करना - अगर तुम बापिस नहीं चलोगे तो मैं अभी शोर मचा दूँगी तो तुम पे इतने जूते पड़ेगे कि सब मौज मस्ती तुम भूल जाओगे - अब लड़के के पास लौटने के अलावा कोई चारा नहीँ था सो धौलपुर पर उतर कर अगली गाडी मे वापिस आ गये-


घर वाले इधर थाने पहुच गये - इसलिये रेलवे स्टेशन,बस स्टैण्ड आदि पर निगरानी लगा दी गई -रात्रि के साढे ग्यारह बजे तक ये पुलिस स्टेशन पहुच गये चूँकि थाने में अभी केस दर्ज नहीं हुआ था सो ज्यादा परेशानी नहीं हुई जल्दी से जल्दी उसकी शादी करके उसको विदा कर दिया गया - यह जरूरी तो नहीं है फिर भी मेरा बिचार हैं कि प्रत्येक माँ बाप को इस दवा की जानकारी अवश्य होनी चाहिये - 

अगर गालिब साहव को इस दवा की जानकारी होती तो ये शेर तो वे शायद कभी नहीं लिखते…
                         "इश्क पर जोर नहीं अय  .............ग़ालिब
                          ये वो आतिश है जो लगाए न लगे और बुझाए न बुझे "

मेरा सम्पर्क पता है-



प्रस्तुतीकरण- Upcharऔर प्रयोग-

22 अप्रैल 2016

Homeopathy-Breast Contractility-स्तन का सिकुड़ना

By With कोई टिप्पणी नहीं:

Breast Contractility

Breast Contractility-स्तन का सिकुड़ना-

मेरे छोटे भाई ने अपने एक मित्र की पत्नी को देखने का आग्रह किया उसकी समस्या यह थी कि उस महिला की दाहिनी(Right) ओर की breast(छाती) सिकुड़कर लगभग गायब सी हो गई थी जबकि बाई ओर(left side) की छाती पूरी तरह सामान्य थी डॉक्टरों ने कैंसर का अनुमान लगाकर बम्बई ले जाने का सुझाव दे दिया - 

महिला की गोद में तीन माह का शिशु भी था - पुरानी हिस्ट्री लेने पर ज्ञात हुआ कि उसे फेफडों की टी.बी.(lungs TB) हो गई थी जिसे ऐलोपैधिक दवाइयों से ठीक हो जाना मान लिया गया था - उसकी माँ को भी Tuberculosis(क्षय रोग) हो चुका था - मैंने प्राथमिक तौर पर "ट्युवरक्युलिनम 1000" सप्ताह में एक बार व "फायटोलैक्का 30" व "ब्रायोनिया 6" प्रतिदिन दो -दो बार लेने के लिये लिख दिया - उन्है दस बारह दिन के लिये बाहर जाना था अत: इसके बाद बताने के लिए कह दिया - 


एक सप्ताह में ही मुझसे पूँछा गया कि प्रभावित छाती से बहुत दूध आ रहा है बच्चे को पिलायें या नहीं - हमने पिलाने के लिये कह दिया - 

चार  महिने में समस्या पूरी तरह ठीक हो गई - बच्चे को भी "ट्युवरक्युलिनम 1000" की दो खुराक  देकर इलाज बन्द कर दिया-और वो पूरी तरह सामान्य हो गई थी-

प्रस्तुतीकरण- Upcharऔर प्रयोग-

21 अप्रैल 2016

जामुन का उपयोग कैसे करे

By With कोई टिप्पणी नहीं:
berries
berries
भगवान ने हर मौसम के सब्जी और फल ऐसे ही नहीं बनाए हैं अब जाने बरसात में ही जामुन होता है और हमें इसकी जरूरत भी तभी होती है-प्राचीन भारतीय उप महाद्वीप को पहले जम्बू -द्वीप कहा जाता था क्योंकि यहां जामुन के पेड़ अधिक पाए जाते थे- जामुन का पेड़ पहले हर भारतीय के घर-आंगन में होता था- तो अब आंगन ही नहीं रहे है  आजकल berries(जामुन) और बेर के पेड़ को देखना दुर्लभ होता जा है-


जामुन सामान्यतया अप्रैल से जुलाई माह तक सर्वत्र उपलब्ध रहते हैं- इसका न केवल फल,  इसके वृक्ष की छाल, पत्ते और जामुन की गुठली अपने औषधीय गुणों के कारण विशेष महत्व रखते हैं यह शीतल, एंटीबायोटिक, रुचिकर, पाचक, पित्त-कफ तथा रक्त विकारनाशक भी है-इसमें आयरन (लौह तत्व), विटामिन ए और सी प्रचुर मात्रा में होने से यह हृदय रोग, लीवर, अल्सर, मधुमेह, वीर्य दोष, खाँसी, कफ (दमा), रक्त विकार, वमन, पीलिया, कब्ज, उदररोग, पित्त, वायु विकार, अतिसार, दाँत और मसूढ़ों के रोगों में विशेष लाभकारी है-

बी समूह के विटामिंस Nervous System(नर्वस सिस्टम) के लिए फायदेमंद माने जाते है वहीं विटामिन सी शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है जो हमें जामुन से प्राप्त हो जाता है  बहुत कम लोगों को यह मालूम होगा कि जामुन में विटामिन सी प्रचुर मात्रा में पाया जाता है-ग्लूकोज और फ्रक्टोज के रूप में मिलने वाली शुगर शरीर को हाईड्रेट करने के साथ ही कूल और Refresh(रिफ्रेश) करती है-

यह फल पेट के रोगों के लिए लाभप्रद माना गया है सेंधा नमक के साथ इसका सेवन भूख बढ़ाता है और digestion process(पाचन क्रिया) को तेज करता है बरसात के दिनों में हमारी Digestive system(पाचन संस्थान) कमजोर पड़ जाती है कारण हमारा मानना है कि बरसात यानि बस तली चीजें खाना कचौडी,पकोडे,समोसे इत्यादि जिसके कारण Diabetes(शूगर) वालों का शूगर और बढ़ जाता है तथा पाचन क्रिया सुस्त हो जाती है-यहां पर आयुर्वेद के अनुसार जामुन की गुठली का चूर्ण Diabetes(मधुमेह) में हितकर माना गया है जामुन ही नहीं जामुन के पत्ते खाने से भी मधुमेह रोगियों को लाभ मिलता है- यहां तक की इसकी गुठली का चूर्ण बनाकर खाने से भी Diabetes(मधुमेह) में लाभ होता है- यही नहीं यह शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी मजबूत बनाता है- और पाचन शक्ति मजबूत करता है- इसलिए अगर आप इस मौसम में मौसम की मार से बचना चाहते हैं तो रोज जामुन खाएं- जामुन के मौसम में जामुन अवश्य खायें-

इसमें Iron(लौह तत्व), विटामिन ए और सी प्रचुर मात्रा में होने से यह हृदय रोग, लीवर, अल्सर, मधुमेह,वीर्य दोष, खाँसी, कफ (दमा), रक्त विकार, वमन, पीलिया, कब्ज, उदररोग, पित्त, वायु विकार,अतिसार, दाँत और मसूढ़ों के रोगों में विशेष लाभकारी है-

जामुन खाने के तत्काल बाद दूध नहीं पीना चाहिए- पका जामुन खाने से पथरी रोग में आराम मिलता है- पेट भरकर नित्य जामुन खाये तो इससे यकृत के रोगों में लाभ होगा- मौसम जाने के बाद इसकी गुठली को सुखाकर पीसकर रखलें इसका पावडर इस्तेमाल करें वही फल वाला फायदा देगा. 

जामुन के औषधीय उपयोग पथरी में-

जामुन का पका हुआ फल calculus(पथरी) के रोगियों के लिए एक अच्छी रोग निवारक दवा है- यदि पथरी बन भी गई तो इसकी गुठली के चूर्ण का प्रयोग दही के साथ करने से लाभ मिलता है-

जामुन में Phytochemicals(फाइटोकेमिकल्स) भी प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं-जो शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाते हैं-

आपको कमजोरी महसूस होती है या आप Anemia(एनीमिया) से पीड़ित हैं तो जामुन का सेवन आपके लिए फायदेमंद रहेगा-

यदि आप अपने चेहरे पर रौनक लाना चाहती हैं तो जामुन के गूदे का पेस्ट बनाकर इसे गाय के दूध में मिलाकर लगाने से निखार आता है-

जामुन का लगातार सेवन करने से Liver (लीवर) की क्रिया में काफी सुधार होता है -

कब्ज और उदर रोग में जामुन का सिरका उपयोग करें-

मुँह में छाले होने पर जामुन का रस लगाएँ वमन होने पर जामुन का रस सेवन करें-

भूख न लगती हो तो कुछ दिनों तक भूखे पेट जामुन का सेवन करें-

Acne(मुँहासे) के लिए जामुन की गुठलियों को सुखाकर पीस लें- इस पावडर में थोड़ा-सा गाय का दूध मिलाकर मुँहासों पर रात को लगा लें, सुबह ठंडे पानी से मुँह धो लें- कुछ ही दिनों में मुँहासे मिट जाएँगे-

मधुमेह के रोगियों के लिए भी जामुन अत्यधिक गुणकारी फल है मधुमेह के रोगियों को नित्य जामुन खाना चाहियें जामुन की गुठलियों को सुखाकर पीस लें- इस पावडर को फाँकने से मधुमेह में लाभ होता है इसमें कैरोटीन, आयरन, फोलिक एसिड, पोटैशियम, मैग्नीशियम, फॉस्फोरस और सोडियम भी पाया जाता है- इस वजह से यह शुगर का लेवल मेंटेन रखता है-

दस्त लगने पर जामुन के रस में सेंधा नमक मिलाकर इसका शर्बत बना कर पीना चाहियें- इसमें दस्त बाँधने की विशेष शक्ति है खूनी दस्त बन्द हो जाते हैं-

बीस ग्राम जामुन की गुठली पानी में पीसकर आधा कप पानी में घोलकर सुबह-शाम दो बार पिलाने से खूनी दस्त बन्द हो जाते हैं-

मंदाग्नि(एसिडिटी) से बचने के लिए जामुन को काला नमक तथा भूने हुए जीरे के चूर्ण को लगाकर खाना चाहिए-

जामुन के वृक्ष की छाल को घिसकर कम से कम दिन में तीन बार पानी के साथ मिलाकर पीने से अपच दूर हो जाता है-

जामुन के वृक्ष की छाल को घिसकर एवं पानी के साथ मिश्रित कर प्रतिदिन सेवन करने से रक्त साफ होताहै-

जामुन के वृक्ष की छाल को पीसकर एवं बकरी के दूध के साथ मिलाकर देने से डायरिया(दस्त का भयंकर रूप) के रोगी को तुरंत आराम मिलता है-

पेचिश में जामुन की गुठली के चूर्ण को एक चम्मच की मात्रा में दिन में दो से तीन बार लेने से काफी लाभ होता है-

अच्छी आवाज बरकरार रखने के लिए जामुन की गुठली के काढ़े से कुल्ला करना चाहिए-

जामुन की गुठली का चूर्ण आधा-आधा चम्मच दो बार पानी के साथ लगातार कुछ दिनों तक देने से बच्चों द्वारा बिस्तर गीला करने की आदत छूट जाती है-

जामुन की पत्ती में मौजूद ‘माइरिलिन’ नाम के यौगिक को खून में शुगर का स्तर घटाने में कारगर पाया गया है- विशेषज्ञ ब्लड शुगर बढ़ने पर सुबह जामुन की 4 से 5 पत्तियां पीसकर पीने की सलाह देते हैं- शुगर काबू में आ जाए तो इसका सेवन बंद कर दें-

यथासंभव भोजन के बाद ही जामुन का उपयोग करें- जामुन खाने के एक घंटे बाद तक दूध न पिएँ-

जामुन पत्तों की भस्म को मंजन के रूप में उपयोग करने से दाँत और मसूड़े मजबूत होते हैं-

जामुन का सिरका बनाकर बराबर मात्रा में पानी मिलाकर सेवन करने से यह न केवल भूख बढ़ाता है, बल्कि कब्ज की शिकायत को भी दूर करता है-

बस एक बात का ध्यान रखें कि कभी भी खाली पेट जामुन का सेवन न करें- न ही कभी जामुन खाने के बाद दूध का सेवन करें- साथ ही अधिक मात्रा में भी जामुन खाने से बचें- अधिक खाने पर यह नुकसान भी करता है-

जामुन का सिरका उपयोग करें- जामुन का सिरका गुणकारी और स्वादिष्ट होता है, इसे घर पर ही आसानी से बनाया जा सकता है और कई दिनों तक उपयोग में लाया जा सकता है-

सिरका बनाने की विधि-

काले पके हुए जामुन साफ धोकर पोंछ लें फिर इन्हें मिट्टी के बर्तन में नमक मिलाकर मुँह साफ कपड़े से बाँधकर धूप में रख दें- एक सप्ताह धूप में रखने के पश्चात इसको साफ कपड़े से छानकर रस को काँच की बोतलों में भरकर रख लें- यह सिरका तैयार है-

मूली, प्याज, गाजर, शलजम, मिर्च आदि के टुकड़े भी इस सिरके में डालकर इसका उपयोग सलाद पर आसानी से किया जा सकता है- जामुन साफ धोकर उपयोग में लें-

Upcharऔर प्रयोग-

Mutrang-मूत्रांग का सिकुड़ना

By With कोई टिप्पणी नहीं:
यह केस एक पाँच साल के बालक का है जो दुबई में रहता था -और उस बच्चे की समस्या यह थी कि पेशाब करते समय उसका लिंग सिकुड कर भीतर चला जाता था और पेशाब का बहाव रुक जाता था-उनके माता-पिता ने दुबई में ही विशेषज्ञों से जाँच कराई और दुवई के विशेषज्ञ डॉक्टरों ने जाँच में कोई खराबी नहीं पाई और ना ही वे कोई संतोषजनक इलाज बता पाये-
Mutrang-मूत्रांग


उस बच्चे के नाना ने मुझ से सम्पर्क किया और औषधि देने का आग्रह किया - मैँने भी पहिले ऐसा कोई केस देखा था, न सुना था और ना ही कहीं पढने मे आया था - फिर मैंने उनसे 24 घन्टे का समय माँगा - अपनी किताबे और कम्यूटर पर साइटें खंगाल डाली -लेकिन कहीं कोई सूत्र हाथ नहीं जाया-

गम्भीरता से विचार करने पर यह समझ में जाया कि यह कारस्तानी रिफूलेक्सेज़ के पलट जाने की है अत: उसी की चिकित्सा की जाय - इग्नीशिया की डाई डोज और जेल्सीमियम और कांस्टीकम ने एक सप्ताह में ही कष्ट दूर कर दिया -

फ़ोन पर ही उन्होंने ये सलाह मांगी थी- बाकी दबा का क्या करना हैं हमने उन्हें बताया गया कि सारी दवा- जो कि एक महिने की थी- देने के बाद कुछ दिन इन्तजार करे- वह बालक अब युवा है पर समस्या कोई नहीं है-

मेरा सम्पर्क -

KAAYAKALP

Homoeopathic Clinic & Research Centre

23,Mayur Market, Thatipur, Gwalior(M.P.)-474011

Director & Chief Physician:

Dr.Satish Saxena D.H.B.

Regd.N.o.7407 (M.P.)

Mob :  09977423220(फोन करने का समय - दिन में 12 P.M से शाम 6 P.M)(WHATSUP भी  यही नम्बर है)

Dr. Manish Saxena

Mob : -09826392827(फोन करने का समय-सुबह 10A.M से शाम4 P.M.)(WHATSUP भी  यही नम्बर है )

Clinic-Phone - 0751-2344259 (C)

Residence Phone - 0751-2342827 (R)

20 अप्रैल 2016

Homeopathy-Eye-disease-optical-nerve-paralysis-नेत्र रोग-ऑप्टिक तंत्रिका पक्षाघात

By With कोई टिप्पणी नहीं:
optical-nerve-paralysis

Eye-disease-optical-nerve-paralysis-नेत्ररोग-ऑप्टिक-तंत्रिका पक्षाघात-

मेरे एक बुजुर्ग रिश्तेदार कॉंग्रेस के बडे नेता थे - यह उस समय की वात हैं जव ग्वालियर मैं पहिला सुपर बाजार शुरू हुआ था  वे एक अन्य बडे नेता के साथ सुपरबाजार फे लिये सामान खरीदने कार से मुम्बई जा रहे थे रास्ते मैं ब्यावरा मे उन्होने रात्रि विश्राम किया -सुबह वह जव जागे तो अचानक उनको दिखना बन्द हो गया - तुरन्त ग्वालियर वापिस आकर चिकित्सा की व्यवस्था की किन्तु कुछ लाभ नहीं हुआ-

लगभग छह माह बाद उनका डबरा आना हुआ वहॉ उनकी एक कोठी थी दूसरे दिन उन्होंने मुझें बुलाया - मैंने जाकर कहा भाई साहव नमस्कार ! वे बोले कौन है  मुझे बडा आश्चर्य हुआ कि 30 वर्ष से इनके मुहल्ले में रहता रहा हूँ और ये कह रहे हैं कौन हैं - मैंने कहा भाई साहव मैं हूँ सतीश - आपने पहिचाना नहीँ ? वे बोले, अरे भाई मै पहिचानूँ कैसे मुझे कुछ दिखता तो है नहीं - आओं बैठो मैंने बैठते हुए पूँछा भाई साहव ऐसा कैसे हो गया - अब वे नेता तो ये ही वडे विस्तार से अपने यात्रा वृत्तान्त बताने लगे - वह भी कहने लगे कि कौन- कौन से मन्त्री कौन से वडे नेता और अधिकारी उन्है देखने के लिये आये थे - मैंने उनसे कहा कि भाई साहब आप वहुत वडे नेता हैं यह तो में भली भाँति जानता ही हूँ आप तो मुझें यह बताइये कि आपने अपनी आँखें किस  डाक्टर को दिखाई और उसने क्या कहा-उन्होंने  कहा कि मैने डाक्टर फिरदौसी को दिखाया था जो गजराजा मेडिकल कालेज,ग्वालियर के नेत्र विभाग के डीन हैं - उन्होंने बताया हैं कि आंखों के आगे एक परदा आ गया है-

लक्षणों को देखने पर मुझे पता लगा कि सुबह जव वे सोकर उठते हैं उस समय उन्हें काफी कुछ दिखाई देता था पर जैसे जैसे रोशनी बढती धी वैसे वेसे उनको दिखना कम होता जाता था और घूप निकलने के वाद तो बिलकुल ही बन्द ही जाता था- मैंने उनसे कहा कि आप कृपया डाक्टर फिरदौसी  से यह पूँछ कर बताइये कि ऐसा कौन सा परदा है जो सुबह उठ जाता है और फिर कुछ देर वाद गिर जाता है  दुसरा ऐसा कौन सा परदा हैँ जिसमेँ कम रोशनी में ज्यादा दिखता है और ज्यादा रोशनी में बिलकुल नहीं दिखता - उन्होंने मुझसे क्या कि तुम मुझ से बहस करते हो, क्या तुम अपने आप की आंखों का डॉक्टर समझते ही -मैंने उनसे क्या कि जहॉ तक समझने का सबाल हे मैं अपने को विश्व का आँखों का सबसे वडा डॉक्टर समझता हूँ- पर आप यह सब छोडिये मुझे तो आप यह बताइये कि आपने मुझें बुलाया  क्यों हैँ - वे बोले मेरे बंगले की छत टपकती है मुझे एक कारीगार और एक मजदुर की ज़रूरत है मैँने कहा ठीक है, कल सुबह भेज दूँगा - दो-तीन दिन बाद वे ग्वालियर वापिस चले गये-

15-20 दिन बाद उकोंने अपने दामाद को भेज कर मुझें ग्वालियर बुलाया - वे बोले मुझें तुम्हारी वात वहुत अपील कर रही है - तुम डॉक्टर फिरदौसी के पास जाकर पूँछ कर आओ कि ऐसा क्यों होता हैं- मैंने उनसे स्पष्ट कहा कि मुझे मालूम हैं कि ऐसा क्यों होता है इसलिये मैं डाँ फिरदौसी के पास क्यों जाऊँ,अगर डॉ फिरदौसी को नही मालुम हो तो वे मेरे पास आका पूँछ सकते हैं - में उनको ज़रूर बता दूँगा - उन्होंने मुझसे कहा कि तुम वहुत जिद्दी हो, नालायक हो आदि -मैँने कहा  कि आप ठीक कहते हैं और में वापिस डबरा चला आया-

संयोगवश कुछ समय वाद मेरा स्थानान्तर भी ग्वालियर हो गया - रहता तो मै भी उसी  मोहल्ले में था , आना जाना भी था ही -एक दिन भाभी जी ने मुझसे कहा कि भईया जी आप  इनका  इलाज करो -मैंने कहा कि भाभी जी मैं इलाज तो करूँ  पर दवाइयों आप खायेगी कि मै  खाऊँगा? क्यों कि भाई साहब तो खाना पसन्द नहींकरेगें- उन्होंने कहा  कि आप दवा दे तो सही- हम उन्हें किसी भी तरह खिलायेगे-

अब आइये यहाँ पहले रोग की कुछ चर्चा कर ली जाए दरअसल में इस केस में उनकी द्रष्टि-नाडी यानी Optical nerve(आप्टिकल नर्व) को लकवा लग गया था -उसमे हल्की सी शक्ति शेष थी इसलिए रात्री को विश्राम करने से वह कुछ कार्य करने लगती थी किन्तु आँखों पर जोर पड़ने पर या तेज प्रकाश के कारण वह पुन: निर्जीव हो जाती थी और दिखना बंद हो जाता था -जहाँ तक चिकित्सा का प्रश्न है यदि अटैक के समय ही उन्हें सामान्य से सामान्य लकवे की कोई दवा दे दी जाती तो उनकी द्रष्टि बच जाती वह चाहे जिस पैथी की दवा होती-

चिकित्सा के लिए अब बहुत देर हो चुकी थी फिर भी कहावत है कि आशा से आसमान टिका है,चिकित्सा आरम्भ की -सबसे पहले मैने उन्हें 'जिंकम सल्फ़ 1000' की दो खुराक प्रति सप्ताह तथा 'कोनियम30' 'जेल्सिमियम30' 'कास्टीकम30' तथा 'काली फाँस6एक्स' लक्षणों के अनुसार देना आरम्भ किया-


लगभग तीन माह बाद एक दिन सायंकाल वे अपनी बालकनी में खड़े थे उन्होंने अपनी पत्नी को बुलाकर पूँछा कि सड़क के उस तरफ गली के कोने पर ये बिजली का खम्भा क्यों दिख रहा है-ये तो पहले यहाँ था नहीं-उनकी पत्नी की आँखों में ख़ुशी के आंसू आ गए-उन्होंने कहा कि क्या आपको सड़क के उस पार का खम्भा दिख रहा है - उन्होंने कहा ,तभी तो मै पूछ रहा हूँ-उनकी पत्नी ने बताया कि गली में शर्मा जी ने बिजली का कनेक्शन लिया था इसलिए ये खम्भा पीछे से हटा कर गली के कोने पर गाड दिया गया है -अब उन्हें विश्वास हो गया कि कुछ दिनों में काम-काज लायक निगाह वापस आ जायेगी-

अब यहाँ थोडा भाग्य कहें,या दुर्भाग्य,की भी चर्चा कर ली जाए -मुझे एक बरात में जयपुर जाना था कुछ काम होने के कारण वहां से दिल्ली चला गया-इस बीच में हमारे एक बुजुर्ग पड़ोसी जिन्हें हरफन मौला कहें कि लाल बुझक्कड़ उनके यहाँ पहुँच गए -जब उन्हें उनकी आँखों  की  कमजोरी की बात पता चली तो उन्होंने कहा कि मै इसकी बहुत अच्छी दवा जानता हूँ -आप घी,कालीमिर्च,और मिश्री मिलाकर रोज सुबह खाओ एक महीने में आपकी आँखे चमाचम हो जायेगी -उन्होंने ये प्रयोग आरम्भ कर दिया-उन्हें उच्च रक्त चाप और खुनी बवासीर की बहुत पुरानी बीमारी थी-घी-कालीमिर्च-मिश्री के मिश्रण ने उच्च रक्तचाप को बढ़ा ही दिया,बवासीर से रक्त आना भी चालू  हो  गया उच्च-रक्तचाप के कारण रक्त का प्रवाह बड़ी तेजी से होने लगा-तुरंत एलोपैथिक चिकित्सा के द्वारा किसी तरह उनके प्राणों की रक्षा तो हो गई लेकिन उनकी द्रष्टि पूर्ण रूप से समाप्त हो गई -

उन सज्जन से मैने जब पूछा कि आप ने ऐसी दवा क्यों बताई तो उन्होंने बड़े भोलेपन से कहा कि"मैने क्या उनको जहर दे दिया -घी,कालीमिर्च,मिश्री से कोई मरता है क्या ?"

मेरा सम्पर्क पता है-




प्रस्तुतीकरण- Upcharऔर प्रयोग 

19 अप्रैल 2016

Leukoderma-श्वेत कुष्ठ(सफ़ेद दाग)नाशक लेप

By With कोई टिप्पणी नहीं:
Leukoderma(सफेद दाग)या श्वेत कुष्ठ एक त्‍वचा रोग है इस रोग के रोगी  के बदन पर अलग-अलग स्‍थानों पर अलग-अलग आकार के सफेद दाग(Leukoderma)आ जाते हैं पूरे वि‍श्‍व में एक से दो प्रति‍शत लोग इस रोग से प्रभावि‍त हैं लेकि‍न इसके विपरीत भारत में इस रोग के शि‍कार लोगों का प्रति‍शत चार से पांच है तथा राजस्‍थान और गुजरात के कुछ भागों में पांच से आठ प्रति‍शत लोग इस रोग से ग्रस्‍त हैं शरीर पर सफेद दाग(Leukoderma) आ जाने को लोग एक कलंक के रूप में देखने लगते हैं और कुछ लोग भ्रम-वश इसे कुष्‍ठ रोग मान बैठते हैं-

Leukoderma-श्वेत कुष्ठ(सफ़ेद दाग)नाशक लेप


इस रोग से पीड़ित लोग ज्यादातर Frustration(हताशा) में रहते है उनको लगता है कि समाज ने उनको बहि‍ष्‍कृत किया हुआ है इस रोग के एलोपैथी और अन्‍य चि‍कि‍त्‍सा-पद्धति‍यों में इलाज हैं-शल्‍यचि‍कि‍त्‍सा से भी इसका इलाज कि‍या जाता है लेकि‍न ये सभी इलाज इस रोग को पूरी तरह ठीक करने के लि‍ए संतोषजनक नहीं हैं इसके अलावा इन चि‍कि‍त्‍सा-पद्धति‍यों से इलाज बहुत महंगा है और उतना कारगर भी नहीं है-रोगि‍यों को इलाज के दौरान फफोले और जलन पैदा होती है-इस कारण बहुत से रोगी इलाज बीच में ही छोड़ देते हैं-

Leukoderma-श्वेत कुष्ठ(सफ़ेद दाग)नाशक लेप


हमारे देश की रक्षा अनुसंधान विकास संस्थान(DRDO)ने सफेद दाग के निदान के लिए आयुर्वेद में रिसर्च को बढ़ावा दिया है हि‍मालय की जड़ी-बूटि‍यों पर व्‍यापक वैज्ञानि‍क अनुसंधान करके एक समग्र सूत्र तैयार कि‍या है इसके परि‍णामस्‍वरूप एक सुरक्षि‍त और कारगर उत्‍पाद ल्‍यूकोस्‍कि‍न(lokoskin)वि‍कसि‍त कि‍या जा सका है इलाज की दृष्‍टि‍से ल्‍यूकोस्‍कि‍न(lokoskin)बहुत प्रभावी है और यह शरीर के प्रभावि‍त स्‍थान पर white patches on skin(त्‍वचा के सफ़ेद धब्बे)को सामान्‍य बना देता है इससे रोगी का मानसि‍क तनाव समाप्‍त हो जाता है और उसके अंदर आत्‍मवि‍श्‍वास बढ़ जाता है- ल्यूकोस्किन को तैयार करने में जिन जड़ी-बूटियों का इस्तेमाल किया जाता है वे हैं- विषनाग, बाकुची, कौंच, मंडूकपणीर्, अर्क और एलोविरा आदि -

lokoskin(ल्यूकोस्किन) ओरल लिक्विड और ऑइन्टमेंट, दोनों रूप में मौजूद है ओरल लिक्विड का फायदा यह है कि इससे नए सफेद दाग(New white stains) नहीं बनते है और शरीर की इम्यूनिटी(Immunity) बढ़ती है और स्ट्रेस(Stress) में कमी आती है- जबकि ऑइन्टमेंट से मौजूदा सफेद दाग ठीक होते हैं-ल्यूकोस्किन(lokoskin) के अच्छे नतीजे तीन महीने में दिखने लगते हैं-जबकि पूरी तरह ठीक होने में दो साल तक का वक्त लग सकता है -लिक्विड और ऑइन्टमेंट पर एक महीने का खर्च करीब 700 से 800 रुपए के बीच आता है-

आयुर्वेद मानता है कि सफेद त्वचा के धब्बे(Leukoderma)ठीक होना इस बात पर बहुत हद तक निर्भर करता है कि आप कुछ जरूरी हिदायतों और खान-पान को लेकर सतर्क रहें-

क्या करे और क्या न करे-

  1. हरी पत्तेदार सब्जियां, गाजर, लौकी, सोयाबीन, दालें ज्यादा खाएं-
  2. 30 ग्राम भीगे हुए काले चने और 3-4 बादाम हर रोज खाएं-
  3. रात को तांबे के बर्तन में पानी को आठ घंटे रखने के बाद सुबह पीएं-
  4. नित्यप्रति ताजा गिलोय या एलोविरा जूस पीना चाहिए इससे आपकी इम्यूनिटी बढ़ती है-
  5. नमक, मूली और मांस के साथ दूध न पीएं- मांसाहार और फास्ट फूड कम खाएं-
  6. तेज केमिकल वाले साबुन और डिटर्जेंट का इस्तेमाल न करें-
  7. खट्टी चीजें जैस नीबू, संतरा, आम, अंगूर, टमाटर, आंवला, अचार, दही, लस्सी, मिर्च, मैदा, उड़द दाल न खाएं-
  8. पर्फ्यूम, डियोड्रेंट, हेयर डाई, पेस्टिसाइड को शरीर को सीधे शरीर के संपर्क में आने से बचाएं-
Vitiligo(विटिलिगो) के लिए आयुर्वेदिक योग-

40 ग्राम मूली के पिसे हुए बीज को 60 ग्राम सिरके में एक कांच के बर्तन में डाले तथा इसमें एक ग्राम संखिया भी पीस कर डाल दे अब इसे रात भर खुले आसमान के नीचे खुला रक्खे ताकि ओस की बुँदे इसमें गिरते रहे और सुबह इस बर्तन को उठा ले अब इस दवा को सोते समय सफ़ेद दागो पर लगाए बस ध्यान रहे इसे आँखों के आस पास न लगाए न हो होठो पे लगाए क्युकि इसमें संखिया है जो कि एक विष है -

यदि होठो पर सफ़ेद दाग(Leukoderma)है तो निम्न प्रयोग करे-

गंधक,लाल चीता(चित्रक)की जड़,हरताल,त्रिफला बराबर की मात्रा में ले इन सब को जल में घोटकर गोली बना ले और छाया में सुखा ले- अब इस गोली को जल में घिस कर लेप को दाग पर रोज लगाए-

श्वेत कुष्ठ(Leukoderma)पर एक अन्य प्रयोग-

100 ग्राम हल्दी तथा 100 ग्राम बाकुची के बीज को पीस कर 1500 मिलीलीटर पानी में पकाए जब पानी लगभग 300 ग्राम बचे तब इसमें 150 ग्राम सरसों का तेल डालकर फिर पकाए जब सारा पानी जल जाए और तेल मात्र बचे तब उतार ले तथा ठंडा होने पर कांच की शीशी में भर कर रख ले सुबह -शाम इस तेल को सफ़ेद दागों पर लगाने से लाभ  होता है-

Homeopathy-होम्योपैथी-

एक बार सफेद दाग होने पर इसके फैलने की आशंका बनी रहती है होम्योपैथी इसलिए इसके सिस्टमैटिक इलाज पर जोर देती है यानी इलाज सही कारण के आधार पर हो और पूरा हो-जान लेना जरूरी है कि इलाज में अमूमन 2 से 3 साल तक का समय लगता है और होम्योपैथी से 100 में से 70 मामलों में सफेद दाग ठीक होते पाया गया है-

इलाज (Treatment)-

अगर सफेद दाग ऑटो-इम्यून डिसऑर्डर(Auto-Immune Disorders)की वजह से हुआ है तो शरीर के बीमारी से लड़ने की क्षमता को बढ़ाकर इलाज शुरू किया जाता है ऑटो-इम्यून डिसऑर्डर के कई कारणों में से एक स्ट्रेस और इमोशनल सेट बैक(Emotional set back) भी हो सकता है इसके लिए जो दवाइयां दी जाती हैं, वे निम्न हैं-

1- इग्नेशिया-30 (Ignatia-30)

2- नेट्रम म्यूर-30 (Natrum mur-30)

3- पल्सेटिल्ला-30 (Pulsatilla-30)

4- नक्स वॉमिका-30(Nux vomica-30) (खासतौर से स्ट्रेस की वजह से सफेद दाग पनपने पर)

केमिकल एक्सपोजर से सफेद दाग(Leukoderma)हुआ है तो ये दवाइयां दी जाती हैं- 

1- सल्फर-30 (Sulphur-30) 

2- आर्सेनिक एल्बम-30(Arsenic album-30)

3-अगर यह जिनेटिक कारणों से है तो सिफलिनम-200 (Syphllinum-200) कारगर है-

4- आर्सेनिक सल्फ फ्लेवम-6(Arsenic sulph Flevum-6)ऐसी दवा है, जिसे किसी भी कारण से सफेद दाग होने पर दिया जा सकता है-

Upcharऔर प्रयोग-

Homeopathy-Tooth and gum disease-दांत और मसूड़े का रोग

By With कोई टिप्पणी नहीं:
Tooth and gum disease
Tooth and gum disease
दाँत खींच कर निकाल डालने की इच्छा-

यह एक महिला का केस था उन्होंने मुझे अपने ऊपरी जबडे के बीच के दाँत को बताते हुए कहा कि डॉक्टर साहब मेरी ऐसी इच्छा होती हैं कि मैं यह दाँत खींच कर बाहर निकाल कर फेंक दूँ  -मैंने उनसे पूँछा कि क्या इसमें दर्द होता है - उन्होंने कहा नहीं - मैंने पूँछा कि पानी लगता है - उन्होंने कडा कि मुझे इस दाँत मेँ कोई कष्ट नहीं हैं-बस ऐसा लगता है कि मैं इसे निकाल कर फेंक दूँ केण्ट की रिपर्टरी में ये लक्षण मिल गया - हमने उन्हें बस 'बेलाडोना1000' की दो खुराके ही दी और हमेशा ले लिए उनकी इस इच्छा को समाप्त कर दिया -


मसूढे का फोडा-

सेंवढा मेँ एक सब्जी बेचने वाली कूँजडी की ऊपर के जबडे की एक डाढ टूट जाने से मसूढे में फोडा हो गया - बहुत अधिक सूजन,मबाद और असहनीय पीडा के कारण उसका बुरा डाल था - पीडानाशक व अन्य दवाइयाँ सब निष्कलं सिद्ध हो रही थी- डॉक्टरों ने कैंसर की शंका व्यक्त करते हुए जांच व इलाज के लिये उसे ग्वालियर जाने की सलाह दे दी- वहाँ उन्होने कह दिया जल्द से जल्द इन्हें  मुम्बई ले जाओ नही तो रोग बढ़ जायगा- निराश हो कर यह सेवढा वापिस आ गई- बस स्टैण्ड पर ही एक सिन्धी सज्जन की दुकान थी - उन्होंने उसे मेरे घर भेज दिया - समय के अभाव के कारण नियमित चिकित्सा कार्य तो मैं कर नहीं पाता था किन्तु भूला भटका कोई मरीज आ ही जाय तो देख भी लिया करता था - लक्षण जानने पर मैंने अनुमान लगाया कि शायद दाँत की कोई जड जबडे में अटकी रह गई है जिसके कारण यह सब उपद्रव हो रहा है अत: 'साइशाशेवा1000' की दो खुराकें दे दीं और दो घण्टे बाद छोडा फूट गया और लगभग 750 मिलीलीटर मवाद निकल गया - दर्द तो तुरन्त ही खत्म हो गया दो-तीन दिन में सब कुछ सामान्य होगया- मुझे तो नहीं किन्तु सेंवढा के लोग आज भी यही समझते हैं कि मैंने कैंसर को ठीक कर दिया है -

दाँतो का हिलना-

मेरा अनुभव हे कि बुढापे के कारण हिलने वाले दातों के लिये अगर 'केल्लेरिया फ्लोर 1000' पोटेन्सी की दो खुराकें आधे-आधे  घण्टे से दो वार दे दी जाये तो लगभग छह महिने के लिये दाँत जम जाते है  और दुसरी बार यही प्रयोग करने पर दांत तीन महिने के लिये गिरने से रुक  जाते हैं किंतु अन्तत: वे गिरते तो हैं ही सामान्य रुप से देखा गया है कि रुट कैनाल ट्रीटमेंट कराने के बाद दोंतों में तकलीफ अवश्य होती है - पीले दाँतों के लिये 'कल्केरिया रेनेलिस' एक वहुत अच्छी दवा है - एलोपैथिक दवाइयों मे किसीका पायोरिया ठीक होते तो मैंने आज तक देखा ही नहीं है-

मेरा पता है-



होम्योपैथी दवा के लिए रोगी ही फोन करे ताकि लक्षण को जाना जा सके बेमतलब जानकारी मात्र के लिए डिस्टर्व न करे-

KAAYAKALP

Homoeopathic Clinic & Research Centre

23,Mayur Market, Thatipur, Gwalior(M.P.)-474011

Director & Chief Physician:

Dr.Satish Saxena D.H.B.

Regd.N.o.7407 (M.P.)

Ph :    0751-2344259 (C)
          0751-2342827 (R)

Mob :  09977423220

प्रस्तुतीकरण-Upcharऔर प्रयोग-

12 अप्रैल 2016

बच्चो का गुस्सा दूर करे हनुमान जी का ये सिंदूर

By With कोई टिप्पणी नहीं:
सभी माता-पिता अपने बच्चों को अच्छी परवरिश देना चाहते हैं और अपने बच्चों की सभी इच्छाएं पूरी भी करना चाहते हैं लेकिन कई बार आपके प्यार दुलार में बच्चे जिद्दी भी हो जाते हैं फिर जैसे-जैसे बच्चा बड़े होते जाता है उसकी जिद भी बढ़ती जाती है जो कि कभी-कभी कई परेशानियों का कारण भी बन सकती है-

बच्चो का गुस्सा दूर करे हनुमान जी का ये सिंदूर

वैसे इससे बचने के लिए कई उपाय बताए जाते हैं लेकिन शास्त्रों के अनुसार भी एक सटीक उपाय बताया गया है क्या करे-

कई बार बच्चे छोटी-छोटी बातों को मनवाने के लिए जिद करते हैं और यही आदत धीरे-धीरे बड़ी होती जाती है ऐसे में अक्सर माता-पिता को काफी परेशानियों का सामना भी करना पड़ता है बच्चों को अच्छे से समझने और समझाने से उनकी जिद कम हो सकती है-

शास्त्रों के अनुसार बताया गया है कि अगर कोई बच्चा ज्यादा जिद्दी हो, चिडचिड़ा हो, क्रोध अधिक करता हो, माता-पिता या अन्य बड़े लोगों की बातें नहीं सुनता हो और जमीन पर लौट लगाता हो तो उसको हनुमानजी के बांए पैर का सिंदूर हर मंगलवार और शनिवार को लगाएं-सिंदूर को मस्तक या माथे पर लगाएं-

ऐसा माना जाता है कि हनुमानजी के बाएं पैर का सिंदूर माथे पर लगाने से सद्बुद्धि प्राप्त होती है चूँकि हनुमानजी को बल और बुद्धि का दाता माना जाता है इसी वजह से यह उपाय अपनाने वाले लोगों को काफी लाभ प्राप्त होते हैं-जो लोग अधिक जिद करते हैं या गुस्सा करते हैं उनके लिए यह उपाय काफी फायदेमंद है-इससे उनका गुस्सा तो कम होगा ही पुण्य लाभ भी प्राप्त होगा-


Upcharऔर प्रयोग-

पायरिया रोग क्या है करें उपचार

By With कोई टिप्पणी नहीं:
जो लोग खाना खाने के बाद दांतों की ठीक से सफाई नहीं कर पाते है और अन्न का कण मसूडो में रह जाता है तो आपको पायरिया(pyorrhea) जैसी घातक बीमारी होने की संभावना हो सकती है मुंह से गन्दी बदबू आना और दांतों में दर्द और मसूड़ों में सूजन(gum infection)तथा मसूड़ों से खून आना(bleeding gums)पायरिया के लक्षण(pyorrhea symptoms) हो सकते है केवल एक या दो बार दिन में टूथ-ब्रश से पेस्ट करना दांतों की रक्षा नहीं कर पाता है -

pyorrhea

ठन्डे पर गर्म का सेवन या गर्म खाना खाने के बाद आइसक्रीम का सेवन या फिर ठीक से खाना खाने के बाद कुल्ला न करना या आपको एसिडिटी(Hyperacidity) रहना ,रात को मुंह खोल कर सोना आदि कारणों से दांतों में पस पड़ जाता है ध्यान न दिया गया तो ये रोग का निवारण मुश्किल सा हो जाता है-

फिर आप कितना भी बदल-बदल कर मंजन कर ले सभी व्यर्थ ही सिद्ध होते है स्वयं और पास किसी को भी आपके मुंह से बदबू का एहसास होता ही है यदि इसे नहीं रोका गया तो आपके दांत भी गिर सकते है-

यदि आप भी मसूड़ों की बीमारी या Pyorrhea-पायरिया से ग्रसित हैं तो आप घर पे ही मंजन बना ले -


  •             *सामग्री*
  • काले सिरिस(शिरीष) के बीज -50 ग्राम 
  • रीठे के छिलको की अधजली राख -50 ग्राम 
  • फुलाया हुआ नीला थोथा(तुत्थ भस्म)-20 ग्राम 
  • त्रिफला चूर्ण-150 ग्राम 
  • बढ़िया अकरकरा-10 ग्राम
  • बायबिडंग-10 ग्राम
  • पतंग(एक दवा)-10 ग्राम 
  • सोंठ-10 ग्राम 
  • समुद्रफेन -10 ग्राम
  • माजूफल-10 ग्राम 
  • काली मिर्च-10 ग्राम 
  • रूमी मस्तंगी-10 ग्राम 
  • फुलाई हुई फिटकरी-100 ग्राम 
  • जली हुई सुपारी-100 ग्राम 
  • कपूर-10 ग्राम 
  • पीपरमेंट-10 ग्राम 
  • सेंधा नमक-100 ग्राम 
  • तुम्बरू (तोमर-तेजबल) बीज-20 ग्राम 
  • सोना गेरू-50 ग्राम (भुनी हुई )


इन सभी चीजो का बारीक चूर्ण बना कर एक एयरटाईट कंटेनर या किसी साफ़ कांच की बरनी में रक्खे तथा प्रतिदिन सुबह और रात को सोने से पहले दो ग्राम पावडर दाहिने हाथ की तर्जनी अंगुली से दांतों और मसूड़ों की अच्छी तरह मालिस करे फिर पन्द्रह मिनट बाद ताजे जल से कुल्ला कर ले इस बात पे यकीन करे आपको इससे अच्छा पायरिया उपचार(pyorrhea treatment) नहीं मिलेगा -

यदि मंजन के बाद खदिरादि तेल दांतों पर मले तो अतिशीघ्र आपका पायरिया नियन्त्रण में आ जाएगा -

और भी देखे-

Upcharऔर प्रयोग-

10 अप्रैल 2016

बवासीर खत्म सिर्फ सात दिन में

By With कोई टिप्पणी नहीं:
यह नुस्खा एक महात्मा से प्राप्त हुआ और मरीजो पर प्रयोग करने पर 100 में से 90 मरीज लाभावान्तित हुए यानि कि 90 प्रतिशत सफल है तो आइये जाने आप उस नुस्खे के बारे में -

Reetha

क्या करे-


अरीठे के फल में से बीज निकाल कर शेष भाग को लोहे की कढाई में डालकर आंच पर तब तक चढ़ाए रखे जब तक वह कोयला न बन जाए जब वह जल कर कोयले की तरह हो जाए तब आंच पर से उतार कर सामान मात्रा में पपडिया कत्था मिलाकर कपडछन चूर्ण कर ले बस अब ये बवासीर(Hemorrhoids)औषिधि तैयार है -

इस तैयार औषिधि में से एक रत्ती(125मिलीग्राम)लेकर मक्खन या मलाई के साथ सुबह-शाम लेते रहे -इस प्रकार सात दिन तक दवाई लेनी होती है -

इस औषिधि के मात्र सात दिन तक लेते रहने से ही कब्ज,बवासीर की खुजली,बवासीर से खून बहना आदि दूर होकर मरीज को राहत महसूस करने लगता है-

यदि मरीज इस रोग के लिए सदा के लिए छुटकारा पाना चाहे तो उन्हें हर छ: महीने के बाद फिर से 7 दिन का यह कोर्स बिलकुल इसी प्रकार दुहरा लेना चाहिए -

अरीठे के अन्य भाषा में क्या नाम है ये जान ले -

संस्कृत - अरिष्ट ,रक्तबीज,मागल्य
हिन्दी- रीठा,अरीठा ,
गुजराती- अरीठा 
मराठी- रीठा 
मारवाड़ी-अरीठो 
पंजाबी- रेठा
कर्नाटक-कुकुटेकायि

ध्यान रक्खे कि औषिधि लेते समय सात दिन नमक का सेवन बिलकुल नहीं करना है -

देशी इलाज में पथ्यापथ्य का विशेष ध्यान रक्खा जाता है कई रोगों में तो दवाई से जादा तो पथ्य आहार जादा कारगर होता है -

क्या खाए-

मुंग या चने की दाल.कुल्थी की दाल,पुराने चावलों का भात ,सांठी चावल,बथुआ,परवल,तोरई,करेला,कच्चा पपीता,गुड,दूध,घी,मक्खन,काला नमक,सरसों का तेल,पका बेल ,सोंठ आदि पथ्य है रोगी को दवा सेवन काल में इसका ही सेवन करना चाहिए-

क्या न खाए-

उरद ,धी,सेम,भारी तथा भुने पदार्थ ,घिया ,धूप या ताप, अपानुवायु को रोकना,साइकिल की सवारी,सहवास,कड़े आसन पर बैठना आदि ये सभी बवासीर के लिए हानि कारक है -

REED-MORE-

Upcharऔर प्रयोग-

8 अप्रैल 2016

छुई-मुई भी एक गजब की अौषिधि है

By With कोई टिप्पणी नहीं:
छुई-मुई को आदिवासी बहुगुणी पौधा मानते हैं, उनके अनुसार यह पौधा घावों को जल्द से जल्द ठीक करने के लिए बहुत ज्यादा सक्षम होता है। इसकी जड़ों का 2 ग्राम चूर्ण दिन में तीन बार गुनगुने पानी के साथ लिया जाए तो आंतरिक घाव जल्द आराम पड़ने लगते हैं-



आधुनिक विज्ञान की शोधों से ज्ञात होता है कि हड्डियों के टूटने और मांस-पेशियों के आंतरिक घावों के उपचार में छुई-मुई की जड़ें काफी महत्वपूर्ण भूमिका अदा करती हैं। घावों को जल्दी ठीक करने में इसकी जड़ें सक्रियता से कार्य करती हैं-

छुई-मुई  नाम का यह पौधा है आप जाने इसके फायदे -


आप इसे छुने जाइए, इसकी पत्तियां शर्मा कर सिकुड़ जाएंगी, अपने इस स्वभाव की वजह से इसे शर्मिली के नाम से भी जाना जाता है। शर्मिले स्वभाव के इस पौधे में जिस तरह के औषधीय गुण हैं, आप भी जानकर दांतों तले उंगली दबा लेंगे। छुई-मुई को जहां एक ओर देहातों में लाजवंती या शर्मीली के नाम से जाना जाता है, वहीं इसे वनस्पति जगत में माईमोसा पुदिका के नाम से जाना जाता है। संपूर्ण भारत में उगता हुआ दिखाई देने वाला यह पौधा आदिवासी अंचलों में हर्बल नुस्खों के तौर पर अनेक रोगों के निवारण के लिए उपयोग में लाया जाता है। चलिए आज जानते हैं इस पौधे से जुड़े तमाम आदिवासी हर्बल नुस्खों के बारे में-

छुई-मुई को आदिवासी बहुगुणी पौधा मानते हैं, उनके अनुसार यह पौधा घावों को जल्द से जल्द ठीक करने के लिए बहुत ज्यादा सक्षम होता है। इसकी जड़ों का 2 ग्राम चूर्ण दिन में तीन बार गुनगुने पानी के साथ लिया जाए तो आंतरिक घाव जल्द आराम पड़ने लगते हैं। आधुनिक विज्ञान की शोधों से ज्ञात होता है कि हड्डियों के टूटने और मांस-पेशियों के आंतरिक घावों के उपचार में छुई-मुई की जड़ें काफी महत्वपूर्ण भूमिका अदा करती हैं। घावों को जल्दी ठीक करने में इसकी जड़ें सक्रियता से कार्य करती हैं-

चोट या घाव लगने पर-


छुई-मुई की जड़ों और बीजों का चूर्ण दूध के साथ लेने से पुरूषों में वीर्य की कमी की शिकायत में काफी हद तक फायदा होता है। पातालकोट के आदिवासी रोगियों को जड़ों और बीजों के चूर्ण की 4 ग्राम मात्रा हर रात एक गिलास दूध के साथ लेने की सलाह देते हैं। ऐसा एक माह तक लगातार किया जाए तो सकारात्मक परिणाम देखे जा सकते हैं-

पातालकोट के आदिवासियों के अनुसार छुई-मुई की जड़ और पत्तों का पाउडर दूध में मिलाकर दो बार देने से बवासीर और भंगदर रोग ठीक होता है। डांग में आदिवासी पत्तियों के रस को बवासीर के घाव पर सीधे लेपित करने की बात करते हैं। इनके अनुसार यह रस घाव को सुखाने का कार्य करता है और अक्सर होने वाले खून के बहाव को रोकने में भी मदद करता है-

बवासीर की दिकक्त होने पर-


मध्यप्रदेश के कई इलाकों में आदिवासियों छुई-मुई के पत्तों का 1 चम्मच पाउडर मक्खन के साथ मिलाकर भगंदर और बवासीर होने पर घाव पर रोज सुबह-शाम या दिन में 3 बार लगाते हैं-

छुई-मुई के पत्तों को पानी में पीसकर नाभि के निचले हिस्से में लेप करने से पेशाब का अधिक आना बंद हो जाता है। आदिवासी मानते हैं कि पत्तियों के रस की 4 चम्मच मात्रा दिन में एक बार लेने से भी फायदा होता है-

शुगर लेवल को सही रखने के लिए-


यदि छुई-मुई की 100 ग्राम पत्तियों को 300 मिली पानी में डालकर काढा बनाया जाए तो यह काढा मधुमेह के रोगियों को काफ़ी फ़ायदा होता है-

इसके बीजों को एकत्र कर सुखा लिया जाए और चूर्ण तैयार किया जाए। पातालकोट के आदिवासी हर्बल जानकार इसके बीजों के चूर्ण (3 ग्राम) को दूध के साथ मिलाकर प्रतिदिन रात को सोने से पहले लिया जाए तो शारीरिक दुर्बलता दूर कर ताकत प्रदान करता है-

खूनी दस्त होने पर -


छुई-मुई और अश्वगंधा की जड़ों की समान मात्रा लेकर पीस लिया जाए और तैयार लेप को ढीले स्तनों पर हल्के हल्के मालिश किया जाए तो स्तनों का ढीलापन दूर होता है-

छुई-मुई की जड़ों का चूर्ण (3 ग्राम) दही के साथ खूनी दस्त से ग्रस्त रोगी को खिलाने से दस्त जल्दी बंद हो जाती है। वैसे डांगी आदिवासी मानते हैं कि जड़ों का पानी में तैयार काढा भी खूनी दस्त रोकने में कारगर होता है-

Upcharऔर प्रयोग-