19 अप्रैल 2016

Home-घर बनाए आशियाना नहीं

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Home-घर एक सुंदर सा नाम है जहाँ सभी लोग संयुक्त रूप से रहते है 'घर' कहलाता है और किसी भी कारण अगर इसी में विधटन हो जाए तो घर(Home) तो सिर्फ 'आशियाना' बन कर रह जाता है जिसमे रहते हुए वो सुन्दरता नहीं रह जाती है जो 'घर' में होती है -

Home-घर

'घर' की सुन्दरता 'आशियाने' की सुन्दरता से कई गुना जादा होती है -'घर' में प्रेम है और 'आशियाने' में वैभव हो सकता है लेकिन वहां 'प्रेम' नहीं होता है हम आशियाने को कितने ही सुख सुविधाओं से परिपूर्ण करके रक्खे लेकिन हम 'घर' की तरह संतुष्ट नहीं हो सकते है -

'घर' में माँ-बाप,भाई-बहन,दादा-दादी, अन्य सभी लोग एक दूसरे के साथ जुड़े हुए -एक दूसरे का सम्मान करते हुए दुःख सुख में एक दूसरे के साथ कंधे-से कन्धा मिलाके एक जुटता से रहते हैं वहां सारे जहाँ का अस्थाई 'वैभव' भी फीका हो जाता था -

'आशियाने' का 'वैभव' आपको शारीरिक सुख दे सकता है लेकिन मानसिक संतोष तो 'घर' में समाहित हुआ करता था -आज संयुक्त परिवार कम हो गए है Home-घर टूट चुके है 'आशियाने' का निर्मार्ण तेजी से होता जा रहा है -

'आशियाने' तो बन गए लेकिन घर(Home) से दूरियां बढ़ गई जब शारीरिक परेशानी आती गई मानसिक संताप का उदय हुआ -पैसा है लेकिन प्यार नहीं है आप वास्तविक ममता -प्यार-दुलार खरीद पाने में असमर्थ हो गए-

बस हाय-हेल्लो की जिन्दगी सिमट कर रह गई है आँगन के बटवारे हुए धीरे-धीरे आँगन भी खतम हो गए जहाँ चौपाल लगा करती थी अब तो नेट की दुनियां में लोग इतने समां गए है कि आपस के सम्बन्धो के लिए भी समय नहीं रहा - सभी एक दूसरे से दूर हो गए- नेट पे ही सारे अनजाने लोगो से हाय हेल्लो बर्थ डे विश,बधाई कार्ड ,शोक संवेदना तक दी जाने लगी है -कुछ लोग तो कही भी घूमने जाए फोटो खिचाये ,सेल्फी ले बस फेसबुक पे अपलोड कर दे और झूठी वाह-वाही और तसल्ली से मन भर लेते है-क्युकि अपनों को तो छोड़ते जा रहे है तो कौन आपको अपना बनाएगा-

आपने देखा होगा किसी ब्लॉग या वेवसाईट पर एक HOME का या होम का सिम्बल होता है जानते है आप उस होम में ही पूरा वेबसाईट समाया है होम पे क्लिक करते है पूरी वेवसाईट आपके सामने होती है इसमें सब कुछ समाया है -

जीवन में संतुष्ट रहना है तो 'घर' बनाए जबकि आशियाना तो 'पक्षी' भी बना लेते है -
'Satyan'

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