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10 मई 2016

Homeopathy-Blood Cancer-रक्त कैंसर

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Blood Cancer

सन्1974 में एक अमेरिकन युगल मेरे पास रक्त-कैंसर चिकित्सा के लिये आया -अमेरिकन मेकेनिकल इंजीनियर था और उनकी पत्नी - जो सिन्डीफेट बैंक में सीनियर एक्जीक्यूटिव थी उनकी पत्नी पानी की एलर्जी से पीडित थी अमेरिका में उन्होंने काफी इलाज कराया पर कोई लाभ नही हुआ - 

उस समय कीमोथेरेपी नई-नई चालू हुई थी -वह भी उन्होंने जर्मनी में करवा ली थी लेकिन उसका भी कोई प्रभाव नहीं हुआ वल्कि उसका वजन लगभग 18 किलोग्राम कम हो गया अत: हर तरफ से निराश हो गये -ऐसे में उसकी सास ने सलाह दी कि तुम भारत चले जाओ -भारत में तुम्हें यदि कोई साधू महात्मा मिल जाये तो उसके आशीर्वाद(blessings) से तुम ठीक हो सकते हो -अथवा तुम्हें कोई अच्छा होम्योपैथिक डॉक्टर मिल जाय तो उसके इलाज़ से तुम अच्छे हो सकते हो इसी आशा को ले कर वे लोग दिल्ली आ गये- 


दिल्ली में उनका कोई भाई दिल्ली यूनीवर्सिटी के प्रोफेसर डॉ. एस. एन.प्रसाद के पास रिसर्च कार्य कर चुका था सो वे उन्ही के पास पहुचे तथा उनको अपनी समस्या बताई और किसी सिद्ध साधु महात्मा का पता पूँछा तब उन्होंने कहा कि में तो किसी साघू महात्मा का पता तो जानता नहीं हूँ- हिमालय की किस गुफा में वे तपस्या कर रहे होंगे कोई नहीं जानता है क्यों कि उनका कोई निश्चित स्थान तो होता नहीं है और दूसरे यदि मिल भी जांय तो यह कहा नहीं जा सकता है कि वे आशीर्वाद दे ही देगे - यहाँ दिल्ली में तो बडे बडे राजनेता है जो आपको आशीर्वाद तो नहीं आश्वासन अवश्य दे सकते है - उन्होंने कहा कि हम आश्वासन का क्या करेंगे- आप हमें किसी अच्छे होम्योपैथिक  डाँक्टर का पता दीजिये-

डॉक्टर प्रसाद के घुटने का दर्द डबरा में मेरी चिकित्सा से ठीक हो चुका था सो उन्होंने कहा कि इसके लिये आपको  300 किलोमीटर दूर ग्वालियर जाना पडेगा -उन्होंने कहा कि हम हजारों किलोमीटर दूर यहाँ तक आये है तो ग्वालियर  भी चले जायेगे-

वे एक दिन सुबह ही मेरे घर पहुच गये -उस समय मैं फील्ड में पदस्थ था तो सुबह घर से निकलता और शाम को डी.एच.बी. की कक्षाऐ अटेण्ड करता और रात को 10-11 बने घर पहुंचता था- मेरी पत्नी उन्हें चाय नास्ता व खाना आदि खिलाती रहीं और वे मेरे 2 सालके बेटे को खिलाते रहे और मेरी प्रतीक्षा करते रहे - रात को जब मैं घर पहुचा तो उन्होंने  मुझसे पहिला सवाल यह किया कि आप कितने घन्टे काम करते है - हमने अमेरिका में सुना हैं कि भारतीय लोग दिन में औसतन केवल आधा घंटा काम करते है - मैंने उन्है समझाया कि भारत में सिंचाई की व्यवस्था अधिक न होने के कारण अधिकांश जगह खेती की साल में केवल एक फसल होती है इसलिये काम के घन्टो का औसत कम है -मैंने कहा आज रात आप यहीं विश्राम करिये कल सुबह मैं आपको देखूँगा-

दूसरे दिन मैंने उनके केस का अध्यन किया - उनकी बीमारी अनुवांशिक नहीं थी उनके शरीर में रासायनिक विषों की मात्रा अधिक प्रतीत हुई - अत: पहिले दिन सुबह 'सल्फर200' की एक खुराक और रात को 'नक्सबोमिका 200' की एक खुराक दी गई फिर अगले दिन से 'कार्सीनोसिन 1000' सप्ताह में आधे-आधे घन्टे में दो वार तया 'फेरम सायनाइड30' और 'आसैनीकम एल्बम 30' दिन में दो बार लेने के लिये एक माह की दवा बना कर दे दी जिसे ले कर वे भारत भ्रमण पर निकल गये-

दो सप्ताह में ही उसे शरीर में स्फूर्ति महसूस होने लगी - मन का उत्साह बढा और कमजोरी कम होती गई - एक महीने बाद वे अमेरिका वापिस चले गए जहाँ लगभग दो माह में ही वे अपना काम काज सम्भालने लगे एक साल तक उनकी दवायें मैं यहाँ से भेजता रहा-

उनके पत्र बराबर आते रहते थे जिससे उनके स्वास्थ्य के बारे में जानकारी मिलती रहती थी और यहीं से मै उन्है मार्गदर्शन देता रहता था -वे अपने पत्रों में मेरे प्रति असीम आदर और आभार व्यक्त करते रहते थे - एक बार उनकी पत्नी ने मुझे लिखा कि आप ईसा मसीह के अवतार है - यह मुझे बहुत असहज लगा - मैंने उन्हें पत्र में लिखा कि ईसा मसीह तो ईश्वर के पुत्र थे और उनके जैसा तो इस पृथ्वी पर कोई हो ही नहीं सकता है कूपया आप मुझे इतना ऊँचा मत उठाइये -मैंने विनोद में उन्है यह भी लिख दिया कि मैं ईसा मसीह बनना भी नहीं चाहता क्यों कि लोगों ने ईसा को सूझे पर चढा दिया था और मैं अभी कुछ दिन और जीना चाहता हूँ अगले पत्र में उन्होंने मुझसे क्षमा मांगते हुए लिखा कि जैसी हमारी भावना थी हमने आपको लिख दिया -भगवान आपको लम्बी उमर दे-

पानी से एलर्जी-

जैसा कि मैंने उपर रक्त कैंसर केस में बताया था कि अमेरिकन महिला को पानी से एलजी थी- इतनी अधिक कि यदि पानी में हाथ  डाल दे तो हाथों में सूजन आ जाये- पानी की जगह उसे बीयर ही पीनी पडती थी -उसे नहाने का बडा भारी शौक था जो इस बीमारी के चलते पूरा नहीं हो सकता था -लक्षणों के आधार पर 'केल्केरिया कार्ब 1000' की दो खुराकें प्रति सप्ताह लेने की सलाह दी -दो सप्ताह में ही एलर्जी समाप्त हो गई और उसे बनारस में गंगा में जी भर कर स्नान करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ-

प्रस्तुतीकरण- Upcharऔर प्रयोग-

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