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25 अप्रैल 2016

Homeopathy-Inappropriate for love-अनुचित प्यार के लिए

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Inappropriate-love
Inappropriate for love
Inappropriate for love-अनुचित प्यार के लिए-

अपने ही मुहल्ले की एक उच्चजाति  की संभ्रांत परिवार की एक अत्यन्त सुन्दर,पोस्ट ग्रेजुएट लडकी को एक निम्न  जाति के कम पढे लिखे, विवाहित, बाल-बच्चेदार सामान्य से युवक से प्यार हो गया-लड़की के चाचा ने जब उसकी माँ को इस सम्बन्ध में बताया तो उन्होंने कहा कि तुम मेरी लड़की को दोष लगाते हो -

ये बात किसी तरह मेरे कानों तक भी पहुँच गई और फिर मेरा होम्योपैथी दिमाग इस ओर आकर्षित हुआ -समझाने-बुझाने से तो ऐसे लोग मानते नहीं है बल्कि और उल्टे- भड़क जाते है क्युकि प्यार का नशा जब सिर चढ़ कर बोलता है तो फिर अपना भी कुछ कहे तो भी बात सिर के उपर से जाती है-


महामति डाक्टर कैट ने अपनी पुस्तक "लेक्चर्स आंन मेटीरिया मेडिका" के 'नेट्रम म्यूर' के अध्याय में इस प्रकार के सम्बन्धों के वारे में बहुत स्पष्ठरूप से लिखा है - उस जमाने मेँ लॉर्ड्स की पत्नियाँ यानी लेडीज कोचमैंनों के साथ प्यार करने लगतीं थी और यहाँ तक कि भाग भी जाती थीं - इसका उन्होंने बहुत सजीव
वर्णन किया है - उन्होंने लिखा है कि यदि समय रहते उन्है यह दवा खिला दी जाय तो उनको स्वंय ही आश्चर्य होने लगेगी कि वे ऐसी मूर्खता क्यों कर रही थीं मैंने भी इस लक्षण का इस केस में परीक्षण करने का निश्चय किया- 

और हुआ यह कि जिस दिन -रात को उनको भागना था, लडकी ने बहाना बना कर अपनी माँ से कहा कि मेरे पेट में दर्द हो रहा है,मेँ अस्पताल जाकर दवा ले आऊँ, जहाँ उसे उस लडके से मिलना था - संयोग से उसका भाई बोला कि मेरे मुहँ में छाले हो रहे हैं, चलो अपन चाचा से दवा ले लेते हैं अस्पताल में तो बहुत भीड होगी  इस तरह मजबूरी में दोनों ही भाई-बहिन मेरे पास आगये -सच मानिए मैं तो मौके की तलाश में ही था- मैंने उसके भाई को तो छाले की दवा दे दी तथा उस लडकी को 'नेट्रम म्यूर 1000' की एक खुराक उसके मुंह मेँ डाल दी ओर फिर कुछ इधर उधर की बातों में उसे लगाये रखा - मेरी पत्नी और बच्चों से बात करते जब आधा घन्टा हो गया तो दूसरी खुराक भी उसे खिलादी - फिर 'मेग्निशिया फाँस' की गोलियां देकर उसे जाने दिया-


उसी शाम वे लोग घर से निकल गये और रेल से वे अभी मुरैना ही पहुचे होंगे कि लडकी का दिमाग एकदम बदला और अचानक उसको लगा कि वह कोई बहुत बडी मूल करने जा रही है और उसने तुरन्त ही उस लडके से कहा कि अगले स्टेशन पर उतर कर घर वापिस चलना है - लडके ने कहा फि कैसी बात करती हो तुम - अपन को देहली चलना है -खूब घूमेंगे फिरेंगे और मौज मस्ती करेगें - घर चलकर क्या करना हे - लडकी ने कहा कहीं नहीं चलना है -कुछ नहीं करना - अगर तुम बापिस नहीं चलोगे तो मैं अभी शोर मचा दूँगी तो तुम पे इतने जूते पड़ेगे कि सब मौज मस्ती तुम भूल जाओगे - अब लड़के के पास लौटने के अलावा कोई चारा नहीँ था सो धौलपुर पर उतर कर अगली गाडी मे वापिस आ गये-


घर वाले इधर थाने पहुच गये - इसलिये रेलवे स्टेशन,बस स्टैण्ड आदि पर निगरानी लगा दी गई -रात्रि के साढे ग्यारह बजे तक ये पुलिस स्टेशन पहुच गये चूँकि थाने में अभी केस दर्ज नहीं हुआ था सो ज्यादा परेशानी नहीं हुई जल्दी से जल्दी उसकी शादी करके उसको विदा कर दिया गया - यह जरूरी तो नहीं है फिर भी मेरा बिचार हैं कि प्रत्येक माँ बाप को इस दवा की जानकारी अवश्य होनी चाहिये - 

अगर गालिब साहव को इस दवा की जानकारी होती तो ये शेर तो वे शायद कभी नहीं लिखते…
                         "इश्क पर जोर नहीं अय  .............ग़ालिब
                          ये वो आतिश है जो लगाए न लगे और बुझाए न बुझे "

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