Homeopathy-Peptic Ulcers-पेप्टिक अल्सर

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कृषि विभाग में कार्यरत श्री साहनी की पत्नी पेट के अल्सर से लम्बे समय से पीडित थीं  उनके पेट में तीव्र पीडा और जलन होती थी जो कुछ भी खाने पीने से भयंकर रूप ले लेती थी रोटी तो उन्हें बरसों से नसीब नहीं हुई थी ऐलोपैथिक चिकित्सा से उन्हें कोई लाभ तो हुआ नहीं बल्कि मर्ज बढता ही चला गया -
Peptic Ulcers

किसी के कहने से उन्होने डॉक्टर तिलक चंद्र शर्मा जी से होप्यापैथिक इलाज लेना शुरू किया लेकिन चार दिन के इलाज से उन्हें दर्द में कोई कमी नहीं आई और इधर ऐलोपैथिक की दर्द निवारक दवाइयाँ बन्द करने के कारण पीडा असहनीय हो गई उन्होंने कहा कि अब मुझसे उनकी तकलीफ देखी नहीं जा रही इसलिए मै फिर से ऐलोपैथिक दवायें चालू कर रहा हूँ-

संयोग से उनके एक मित्र उन्हें मेरे पास लेकर आये इलाज करने के लिये आग्रह किया -उनकें घर जाकर मैंने केस देखा दर्द,ज़लन और बेचैनी से मरीज की दशा दयनीय थी - मैंने उन्हें  सांत्वना दी कि आप घबराइये नही आप बहुत जल्दी ठीक हो जाएँगी - मैंने उनसे पूँछा कि आप क्या खाना चाहतीं हैं -उन्होने बडे दीन स्वर में कहा कि में रोटी खाना चाहती हूँ- मैंने उनसे कहा कि थोडा धैर्य रखिये मैं आपको आप जिस चीज की रोटी खाना चाहेगी वही आपको खिलाऊँगा- 


मृत्यु के डर ने मुझें उन्हें 'आर्सेनिकम एल्बम 30' देने के लिए प्रेरित किया - दवा देकर में आफिस चला गया,सोचा शाम को लौटते समय हाल पूँछता जाऊँगा- जब मैं आँफिस से वापिस आ रहा था तो मैंने देखा कि वे अपनी बाल्कनी में खडी होकर पडोसन से बात कर रही हैं - अब हाल पूँछने की भला क्या जरूरत थी बाद में 'एसिड नाइट्रिक 1000,एपिस मेल 30,चायना30,काली म्यूर30कार्बोवेज आदि दवाइयों से वे बरसो स्वस्थ रही - उन्है मक्के की रोटी बहुत पसन्द थी जिसे वे अब बिना किसी कष्ट के जब चाहे तब खा सकती थी -

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