Homeopathy-Stomach Cancer-आमाशय का कैंसर

Stomach Cancer


Stomach Cancer-आमाशय का कैंसर-

मेरे एक दूर के रिश्तेदार जो गुजरात फे एक कालेज में प्रोफेसर थे-रिटायर होने के बाद ग्वालियर आकर रहने लगे थे  पेट मे कुछ तकलीफ रहती थी सो चिकित्सा चलती रहती थी - तम्बाखू वे वहुत अधिक खाते सो सोचा गया कि कष्ट उसी की बजह से हैं - कष्ट अधिक बढने पर अस्पताल पे भरती कराया गया तो जाँच से पता चला कि आमाशय में केंसर है - आपरेशन के बाद घर आ गये परन्तु कुछ दिन बाद कष्ट फिर बढ गया इसलिये कैसर अस्पताल में भरती कराया गया - चिकित्सा के दौरान उन्है हिचफियां आने लगी - बहुत तरह की Anti Spasmetik(एन्टीस्पास्मेटिक) दवाइयाँ देने के बाद भी जब हिचकियाँ बन्द नहीं हुईं तो नीद के इंजेक्शन लगाये गये - उससे भी जव हिचकियाँ बन्द नहीं हुई तो बेहोशी की दवा दी गई पर हिचकियाँ फिर भी बन्द नहीं हुई - ऐसे में किसी की सलाह पर किसी होप्यापैथिक डाँक्टर की तलाश की गई अत: मुझे बुलाया गया - मैंने लगभग ग्यारह बजे उन्है जिन्सेंग का मदर टिन्चर(Jinseng Mother tinctur) देना शुरू किया -

लगभग 2 बजे हिचकियाँ आना बंद हो गया-मेरे इस इलाज से प्रभावित होकर उनके रिश्तेदारों ने मुझसे पेट का इलाज करने का अनुरोध किया-चूँकि केस तो बहुत नाजुक हालत में पहुँच चुका था इसलिए वास्तविकता को स्पष्ट करते हुए मैने कहा कि इस स्थिति में इनके लिए अधिक तो कुछ नहीं किया जा सकता है कि इनके कष्ट में कमी हो जावे अथवा जीवन कुछ आगे चल सके यही बहुत समझे-

उनके आग्रह पर मैने उन्हें आंर्निंथोगेलम(Aanrninthogelm) मूलअर्क की एक बूंद दवा आधा कप पानी में डालकर दे दी  और दो- दो चम्मच दवा दो -दो घन्टे के अन्तर से देने को कह दिया और अगले दिन स्थिति बताने के लिये कह दिया-

दूसरे दिन सुबह मलद्वार के रास्ते से लगभग एक लिटर काला काला जमा हुआ रक्त निकला -मरीज को काफी राहत महसूस हो रही थी अत: उनने कहना चालू कर दिया कि मैं अब अच्छा हो गया हूँ मुझे यहाँ से घर ले चलो - लेकिन जो होने को होता है यह तो होता ही हैं - उनकी पत्नी ने दवा फेंक दी और कहने लगी कि ऐसे कहीं इलाज होता है - पुन: पुरानी चिकित्सा के प्रारम्भ के साथ उनका अन्त भी हो गया-


प्रस्तुतीकरण- Upcharऔर प्रयोग 
loading...


EmoticonEmoticon