घुटने का दर्द-Knee Pain

घुटने का दर्द-Knee Pain

घुटने का दर्द-Knee Pain

दिल्ली यूनिवर्सिटी के एन्टोंमोलाजी के विभागाध्यक्ष विश्व के जाने माने विज्ञानी डॉ0 प्रसाद जी का एक पुत्र डबरा में महाविध्यालय में प्रध्यापक था -डॉ0 साहब अपने पुत्र के पास डबरा(ग्वालियर) आये हुए थे उनके घुटने में दर्द रहता था उन्होंने अपने लड़के से पूछा कि क्या यहाँ कोई होम्योपैथिक डॉक्टर हैं? मै अपने घुटने के दर्द की दवा लाना भूल गया हूँ मुझे दर्द की दवा लेना है -

लड़के ने धीरे से कहा हाँ है तो-उन्होंने कहा बेटा इतने धीरे क्यों कह रहे हो क्या वह बहुत फीस लेता है - लड़के ने कहा पैसा तो एक भी नहीं लेता है - प्रसाद जी ने कहा तो फिर? लड़के ने कहा कि उनके यहाँ दवा लेने के लिए दो तीन घंटे लाइन में लगना पड़ता है-बिना नम्बर के कोई भी दवा नहीं ले सकता है-उन्होंने कहा मै डा0 एस.एन.प्रसाद,विश्व का माना हुआ एन्टोमोलाजिस्ट,किसकी हिम्मत है जो मुझे तीन घंटे लाइन में लगाएगा मुझे तुम उसके यहाँ ले चलो -

डा0 प्रसाद सभी मरीजो को पीछे छोड़ते हुए सीधे कमरे में प्रवेश करने लगे -सबसे आगे खड़े हुए व्यक्ति ने उनसे पूछा कि क्या आप डॉक्टर साहब के रिश्तेदार है-उन्होंने कहा नहीं मुझे दवा लेनी है-उस व्यक्ति ने कहा तो पीछे हो जाइए-डॉक्टर साहब ने देख लिया तो इस जिन्दगी में दवा नहीं मिल पाएगी और उन्हें पीछे हटा दिया-

आखिर संयोग से उनके लड़के का कोई विध्यार्थी वही लाइन में दूसरे-तीसरे नम्बर पर लगा था-उस लड़के ने पूछा सर क्या बात है -प्रसाद जी के लड़के ने कहा पिता जी को दवा लेनी थी -उसने अपनी जगह डा0 प्रसाद को दे दी  -फिर कुछ देर बाद उनका नम्बर आया -हाल पूछा और दो पुड़ियाँ दे दी -कहा आधे-आधे घन्टे से ले लेना -उस समय 200 पोटेन्सी की 2 अथवा 30 पोटेन्सी की चार पुड़ियाँ दिया करता था -उस समय शीशियो को चलन नहीं था -मै स्वयं अपनी दवाईयों की शीशीयां डिस्टल वाटर के खाली डब्बो में रक्खा करता था-

प्रसाद साहब घर चले गए और सोचने लगे दो पुड़ियों के लिए इतनी मारा-मारी और घंटों का इन्तजार किन्तु लड़के आग्रह से उन्होंने ये पुड़ियाँ खाली -दूसरे दिन चाय-नाश्ते के समय लड़के ने पूछा कि पिताजी दर्द कैसा है?डॉक्टर साहब दायें की जगह बाँयां घुटना टटोलने लगे लड़के ने पूछा कि आज इसमें भी दर्द होने लगा है -उन्होंने दोनों घुटने टटोले,उठे,बैठे पर दर्द तो कही था ही नहीं -वे बोले मेरा दर्द तो ठीक हो गया -मै अभी और इसी वक्त उस डॉक्टर से मिलूँगा -लड़का बोला इस समय सात बजने में पांच मिनट है सात बजे वे भीतर चले जायेगे -इसलिए अभी तो आप उनसे नहीं मिल पायेगे -उन्होंने कहा कि नहीं मै अभी उनसे मिलूँगा -लड़के ने कहा मै तो आपके साथ जाऊँगा नहीं क्युकि वे बहुत बेकार आदमी है-आपसे कुछ उल्टा-सीधा बोल देगे-मुझे अच्छा नहीं लगेगा -प्रसाद साहब बोले,ठीक है ,मैने घर देखा है मै अकेला ही चला जाऊँगा-

प्रसाद साहब जब तक मेरे घर पंहुचे तब तक सात बज चुके थे-दरवाजा बन्द था परन्तु प्रतीकात्मक खिड़की खुली हुई थी-उन्होंने दरवाजा खट-खटाया-पूँछा कौन? वे बोले डॉक्टर प्रसाद-मैने कहा शाम को आइये-वे बोले मै आपका बुजुर्ग हूँ-मैने उन्हें अंदर बुला कर आदर से बिठाया-नौकर से चाय लाने के लिए कहा-प्रसाद साहब ने कहा मेरा दर्द ठीक हो गया-मैने उनसे कहा कि दर्द की बात करना हो तो आप शाम को आइये-नौकर को आवाज दे दी, बाबा जा रहे है,चाय कैंसिल-वे हाथ जोड़ने लगे ,कहने लगे बेटा मेरी बात सुन लो -मैने कहा अभी आप मेरे बुजुर्ग थे ,अब आप मेरे हाथ जोड़ रहे है,बताइये मै अब कहाँ जाऊं -उनकी आग्रहपूर्ण मुद्रा देख कर मुझे लगा कि इनसे बात कर ली जाए -

मैने उनसे कहा कि मै आपको पांच मिनट का समय दे रहा हूँ ,आपको जो कुछ भी कहना है जल्दी से कह डालिए -वे बोले मेरा घुटने का दर्द ठीक हो गया-मैने उनसे पूँछा आप कल आये थे-उन्होंने कहा आया था-मैने पूछा लाइन में लगे थे-वे बोले लगा था -मैने कहा आप से हाल पूछा था  -उन्होंने कहा,हाँ,पूँछा था मैने कहा मैने आपको दवा दी थी-उन्होंने कहा हाँ दी थी -मैने पूँछा आपने  दवा  खाई थी-उन्होंने कहा हाँ खाई थी -मैने कहा कि जब आपने दवा खाई और आपका दर्द ठीक हो गया तो आप बताइये कि इसमें आश्चर्य की क्या बात है - उन्होंने कहा कि मै तो बरसों से दवा खा रहा हूँ -मुझे बड़े-बड़े डॉक्टर ने लिटा कर घन्टो हथौड़ो से ठोंका,सुइयां चुभोई और दुनियाभर की जांचे करवाई,ढेरो दवाइयाँ खिलाई मगर लाभ नहीं हुआ - वे डॉक्टर के प्रति अपना रोष प्रगट करने लगे|मैने उनसे कहा कि आप डॉक्टर को दोष मत दीजिये-उन्होंने कहा क्यों?मैने कहा क्युकि आप अपना हाल सही-सही नहीं बता पाते तो डॉक्टर आपको सही दवा कैसे दे सकते है -वे बोले मै डॉक्टर प्रसाद ,कीड़ो मकोड़ों तक के रोम-रोम का हाल जाता हूँ,मै ही अपना हाल नहीं बता पाता -उन्होंने कहा आप अपनी बात सिद्ध कीजिये-मैने कहा अच्छा बताइये आज आपको कैसा लग रहा है -उन्होंने कहा आज मुझे बहुत अच्छा लग रहा है ,शरीर में चुस्ती-फुर्ती है,कोई दर्द नहीं है आदि-मैने उनसे कहा कि अभी एक सिम्पटम और रह गया है-मै आपको पांच मिनट और दे रहा हूँ सोचने के लिए -उन्होंने कुछ और सिम्पटम बताये लेकिन मैने फिर भी कहा कि अभी एक बात रह गई है -वे बोले अब तो कुछ नहीं बचा-मैने कहा अच्छा बताइये आज आपको मोशन कैसा हुआ थे -वे बोले मोशन,मोशन तो आज ऐसा साफ़ हुआ जैसा कि पिछले दस साल से नहीं हुआ होगा -मैने उनसे कहा कि इसे बताने में आपको कुछ शर्म आ रही थी क्या!!वे बोले लेकिन आपको कैसे पता-मैने कहा कि धिक्कार है उस डॉक्टर को जो रोगी को दवा तो दे देता है पर जिसे यह नहीं मालुम कि ये दवा शरीर में जाकर असर क्या करेगी!!सारी गड़बड़ी आपके पेट में ही थी जो अब ठीक हो चुकी है-

कई वर्षो तक मेरे उनसे सम्बन्ध बने रहे|दिल्ली में मेरी भतीजी के विवाह में वे सम्मलित हुए|अपने परिवार और विशिस्ट मित्रो को मुझसे मिलवाया|अनेक विदेशी मरीजो को भी मेरे पास चिकित्सा के लिए भेजा जिनमे से कुछ के बारे में आप आगे के लेख में पढेगे-

आप हमारी सभी पोस्ट होम्योपैथी के केस की एक साथ इस लिंक पे जाके देख सकते है -

लिंक- Disease-Homeopathy

  • मेरा पता-
  • KAAYAKALP
  • Homoeopathic Clinic & Research Centre
  • 23,Mayur Market, Thatipur, Gwalior(M.P.)-474011
  • Director & Chief Physician:

  • Dr.Satish Saxena D.H.B.
  • Regd.N.o.7407 (M.P.)
  • Ph :    0751-2344259 (C) 0751-2342827 (R)
  • Mo:    09977423220

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