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1 अप्रैल 2016

बवासीर एक आम बीमारी

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बवासीर आजकल एक आम बीमारी के रूप में प्रचलित है इस रोग मे गुदे की खून की नसें (The blood veins of the anus) फ़ूलकर शोथयुक्त(turgescent) हो जाती हैं-जिससे दर्द-जलन और कभी-कभी Bleeding भी होता है बवासीर का प्रधान कारण कब्ज (Constipation) का होना है-
Piles A Common Disease

बवासीर होने के कारण-

अधिक मिर्च-मसालेदार भोजन का सेवन करना या फिर कब्ज की समस्या होना-

शारीरिक कार्य बिल्कुल न करना या फिर वंशानुगत रोग या यकृत रोग होना-

अत्यधिक मात्रा शराब का सेवन करना -पेचिश रोग कई बार होना-

निम्न-स्तरीय चिकनाई रहित खुराक लेना-

गर्भावस्था के समय में अधिक कष्ट होना तथा इस समय में कमर पर अधिक कपड़ें का दबाव रखना-

रात के समय में अधिक जागना -मूत्र त्याग करने के लिए अधिक जोर लगना-

बहुत ही उत्तेजक पदार्थों का अधिक सेवन करना -मलत्याग करते समय में अधिक जोर लगाकर मलत्याग करना और बार-बार जुलाव का सेवन करना  या फिर बार-बार दस्त लाने वाली दवाईयों का सेवन करना -

बवासीर दो प्रकार की होती है-

खूनी बवासीर -

जब गुदा के अंदर की बवासीर से खून निकलता है तो इसे खूनी बवासीर कहते हैं-

बादी बवासीर -

बाहर की ओर फूले हुए मस्से की बवासीर में दर्द तो होता है लेकिन उनसे खून नहीं निकलता है इसलिए इसे बादी-बवासीर कहते हैं-

क्या करे-

बवासीर के मस्से के लिये कई घरेलू ईलाज हैं लेकिन सबसे महत्वपूर्ण और आधार भूत बात यह है कि रोगी को 24 घंटे में 4 से 6 लिटर पानी पीने की आदत डालनी चाहिये -ज्यादा पानी पीने से शरीर से Foreign substance बाहर निकलते रहेंगे और रोगी को कब्ज नहीं रहेगी जो इस रोग का मूल कारण है-

हरी पत्तेदार सब्जियां,फ़ल और ज्यादा रेशे वाले पदार्थों का सेवन करना जरुरी है-

घरेलू उपचार (Home remedies ) -

1- कलमी शोरा (saltpeter) और रसोंत (Rsot) को आपस में  बराबर मात्रा लेकर मूली के रस में मिला कर पीस लें-यह पेस्ट बवासीर के मस्सो पर लगाने से तुरंत राहत मिलती है-

2- नागकेशर (Cobras saffron) मिश्री (sugar-candy) और ताजा मक्खन (Fresh butter) बराबर की मात्रा में मिलाकर खाने से बवासीर रोग नियंत्रण में आ जाता है-

3- बवासीर में छाछ पीना भी अमृत की तरह है छाछ (Buttermilk) में थोडा सा सैंधा नमक (Rock salt) मिलाकर पीना चाहिए तथा मूली का नियमित रूप से सेवन करे -मूली का प्रयोग बवासीर में लाभदायक है-

4- हरड (Myrrh) और गुड (Molasses) को आपस में मिलाकर खाए इससे भी काफी फायदा होता है-

5- मिश्री और कमल का हरा पत्ता (Lotus leaf green) आपस में पीस के खाने से बवासीर का खून बंद हो जाता है-

6- बाजार में मिलने वाले जिमीकंद (Jminkand) को आग में भून ले जब भुरभुरा हो जाए तब दही के साथ मिलाकर सेवन करे -

7- गेंदे के हरे पत्ते 10 ग्राम,काली मिर्च के 5 दाने मिश्री 10 ग्राम सबको 50 मिली पानी में पीस कर मिला दें- ऐसा मिश्रण चार दिन तक लेते रहने से खूनी बवासीर खत्म हो जाती है -

8- कडवी तोरई (Bitter Luffa) की जड को पीसकर यह पेस्ट मस्से पर लगाने से लाभ होता है-

9- करंज- हरसिंगार- बबूल- जामुन- बकायन- ईमली (Krnj- Hrsingar- Bbul- Jamun- Bkayn-tamarind) इन छ: की बीजों की गिरी और काली मिर्च (black pepper) इन सभी चीजों को बराबर मात्रा में लेकर कूट पीसकर मटर के दाने के बराबर गोलियां बनालें तथा 2 गोली दिन में दो बार छाछ के साथ लेने से बवासीर में अचूक लाभ होता है-

10- चिरायता-सोंठ-दारूहल्दी-नागकेशर-लाल चन्दन-खिरेंटी (Salicylic-ginger-Daruhldi-cobras saffron-red sandal-Kirenti) इन सबको समान मात्रा मे लेकर चूर्ण बनालें-5ग्राम चूर्ण दही के साथ लेने से पाईल्स ठीक होंगा -

11- पके केले को बीच से चीरकर दो टुकडे कर लें और उसपर कत्था पीसकर छिडक दें इसके बाद उस केले को खुली जगह पर शाम को रख दें,सुबह शौच से निवृत्त होने के बाद उस केले को खालें- केवल 15 दिन तक यह उपचार करने से भयंकर से भयंकर बवासीर समाप्त हो जाती है-

12- हर-सिंगार के फ़ूल तीन ग्राम काली मिर्च एक ग्राम और पीपल एक ग्राम सभी को पीसकर उसका चूर्ण तीस ग्राम शकर की चासनी में मिला लें,रात को सोते समय पांच छ: दिन तक इसे खायें- इस उपचार से खूनी बवासीर में आशातीत लाभ होता है- कब्ज करने वाले भोजन पदार्थ वर्जित हैं-

13- प्याज के छोटे छोटे टुकडे करने के बाद सुखालें तथा सूखे टुकडे दस ग्राम घी में तलें-बाद में एक ग्राम तिल और बीस ग्राम मिश्री मिलाकर रोजाना खाने से बवासीर का नाश होता है या बवासीर की समस्या हो तो प्याज के 4-5 चम्मच रस में मिश्री और पानी मिलाकर नियमित रूप से लें, खून आना बंद हो जाएगा- प्याज के स्वास्थ लाभ के लिए देखे -


14- बिदारीकंद और पीपल समान भाग लेकर चूर्ण बनालें तथा 3 ग्राम चूर्ण बकरी के दूध के साथ पियें-

15- आक के पत्ते और तम्बाखू के पत्ते गीले कपडे मे लपेटकर गरम राख में रखकर सेक लें- फ़िर इन पत्तों को निचोडने से जो रस निकले उसे मस्सों पर लगाने से मस्से समाप्त होते हैं-

16- एक नीबू लेकर उसे काट लें और दोनो फ़ांकों पर पांच ग्राम कत्था पीस कर छिडक दें- खुली जगह पर रात भर रहने दें सुबह बासी मुंह दोनो फ़ांकों को चूस लें-कैसी भी खूनी बबासीर दो या तीन हफ़्तों में ठीक हो जायेगी-

होमियो-पेथी से इलाज -

होमियोपैथी की मदर-टिंचर हेमेमिलिस और बायो-काम्बिनेशन नम्बर सत्रह की पाँच-पाँच बूंद हेमेमिलिस आधा कप पानी में मिला कर दिन में तीन बार और बायो-काम्बिनेशन सत्रह की चार-चार गोलियाँ तीन बार लेने से खूनी और साधारण बवासीर ठीक हो जाती है-

इसे भी देखे- Fistula Treatment-फिस्टुला या भगंदर (Fistula) का इलाज

Upcharऔर प्रयोग-

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