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औषिधि चयन में लक्षणों का महत्व

होम्योपैथी(Homeopathy)लक्षणों पर आधारित एक चिकित्सा पद्धिति है इसमें लक्षणों का जितना ही मंथन किया जाएगा उतना ही अधिक उपचार सम्बन्धी नवनीत आपको प्राप्त होगा यहाँ लक्षणों को शब्दों में व्यक्त करना एक कठिन काम है इसमें एक ही प्रकार के अनुभव को अलग-अलग रोगी अलग-अलग तरह से व्यक्त करते है अत:शब्दों को अधिक महत्व न देते हुए उसके पीछे छिपी हुई भावना अथवा मंतव्य को समझने का प्रयत्न करना चाहिए-

औषिधि चयन में लक्षणों का महत्व


आइये हम इसे थोडा और आपको स्पष्ट करे-मुझे जब भी समय मिलता था तो मै डबरा(ग्वालियर के पास)के एक बुजुर्ग होम्योपैथ डा० एच.सी.सक्सेना के पास बैठा करता था-उनका एक तकिया कलाम था "बीस साल का तजुर्बा " लेकिन वृद्ध होने के कारण तथा कम्पन रोग के कारण उनका हाथ हिलता था तो उनका दवा लिखने काम मै आसानी से कर दिया करता था और इस तरह मुझे भी उनसे और कुछ सीखने को मिल जाता था -

एक बार मै उनकी क्लिनिक की सीढियां चढ़ रहा था तो वही एक बड़े सेठ जी के लड़के को दवा लेकर नीचे उतरते देखा-जब मै डाक्टर साहब के पास पहुंचा तो उन्होंने मुझसे कहा कि अरे ! आज आप कहाँ रह गए थे आज हमने एक महत्वपूर्ण केस लिया है यदि तुम होते तो तुम भी कुछ सीख लेते यह कहते हुए केस की हिस्ट्री उन्होंने मुझे पकड़ा दी-मरीज की हिस्ट्री तो बिलकुल हिस्ट्री के किताब जैसी थी-रोगी के कमरे का दरवाजा खुला था ,खिड़की बंद थी -रोगी का सिरहाना ऊँचा था ,पैताना नीचा था- रौशनी इधर से आ रही थी और हवा उधर जा रही थी -मरीज दाई करवट लेटा था ,पैर उसके मुड़े हुए थे आदि-आदि-

जब पूरी हिस्ट्री पढ़ कर प्रिस्किप्शन देखा तो पाया कि उसे 'पल्सटिला 30' प्रिस्क्राइव किया गया था जबकि मुझे अपनी निजी जानकारी से ये पता था कि उसको कैंसर है जिससे उसको पेट में भयंकर दर्द व् जलन रहती है पल्सटिला पढ़ कर तो मेरा दिमाक चकरा गया था सोचा कि ऐसी गंभीर बिमारी का इतना हल्का-फुल्का इलाज-

फिर मैने आखिर पूछ ही लिया कि दवा तो आपने अच्छी दी है पर किस सिम्पटम पर दी है यह मुझे समझ नहीं आ रहा है तब वे बोले-बस तुम्हारे अंदर यही कमी है कि रोगी की हिस्ट्री को ध्यान से नहीं पढ़ते हो और ये कह कर उन्होंने एक लाल पेन्सिल उठाई और एक सिम्पटम को अंडरलाइन कर दिया "मरीज हाल बताते बताते रो दिया "निश्चित रूप से यह पल्सटिला के लक्षण है किन्तु यह तो उसके साथ लागू होता है जो भावुकतावश रोता है पेट के कैंसर के रोगी से आप हाल पूछे या न पूछे उसे तो रोना ही है-मैने सोचा एलोपैथिक सब दवाइयाँ इन्होने बंद करवा दी है और होम्योपैथी की कोई गंभीर दवा कर्सिनासिन,आर्सेनीकम एल्वम आदि दी नहीं है इसलिए मरीज तो अगली सुबह देख नहीं पायेगा-मैने अपने मन में सोचा कि तुमको इनसे क्या सीखना है-मरीज को मारना या ठीक करना-बचाना तो इनको आता ही नहीं है-अत: जाने के लिए उठ खड़ा हुआ-वे बोले आज बहुत जल्दी जा रहे हो-हाँ कुछ जरुरी कागजात ग्वालियर भेजने है-मै तो आपको नमस्कार करने आया था लेकिन जब मै सीढियां उतर रहा था तो मन ही मन यही प्रार्थना कर रहा था कि प्रभु !अब इनसे दुबारा नमस्कार मत करवाना और हुआ भी यही-

सामान्य से सामान्य लक्षण के पीछे कोई न कोई गहरी बात छिपी रहती है-मान लीजिये आपने किसी रोगी से पूछा की आपको प्यास कैसी लगती है ? यो अपने यहाँ पानी की इतनी कमी तो नहीं है कि इसके बारे में कुछ जादा सोच विचार किया जाए-किन्तु रोगी कहता है कि मुझे प्यास बहुत लगती है-मै एक बार में एक गिलास पानी पी लेता हूँ जैसा कि ब्रायोनिया आदि में होता है तो इसका अर्थ क्या हुआ ? इसका अर्थ यही हुआ कि रोगी के पेट में खुश्की है यानि कि आंते उचित मात्रा में श्राव नहीं बना रही और यदि रोगी कहता है कि मुझे प्यास बहुत कम लगती है जैसा पल्साटिला आदि में होता है तो इसका मतलब है आंतो में पर्याप्त गीलापन है यदि रोगी कहता है कि मुझे थोड़े-थोड़े पानी की बार-बार प्यास लगती है जैसा कि आर्सेनिकम एल्वम आदि में होता है तो इसका मतलब है कि रोगी के पेट में न केवल खुश्की वरन ताप भी अधिक है इसी प्रकार आप भूंख से जिगर का कार्य ,पाखाने से आमाशय और आंतो का कार्य तथा नींद से नर्वस सिस्टम के कार्य के बारे में पर्याप्त जानकारी पा सकते है यदि आपने लक्षणों की भाषा पढ़ ली तो आपने रोग की थाह ले ली समझो-

लक्षण रोग के कारण का भी पता देते है होम्योपैथिक(Homeopathy)चिकित्सा पद्धिति दवा का निर्धारण लक्षणों की समग्रता के आधार पर करने का निर्देश देती है किन्तु तीव्र रोगों में सदा ही ऐसा कर पाना सम्भव नहीं हो पाता है -दिन प्रतिदिन में तो रोगी को जो सबसे कष्टदायक लक्षण होते है वास्तव में पहिले उन्ही को देखना पड़ता है जैसे तीव्र ज्वर,तीव्र पीड़ा,बारबार दस्त होना आदि -सबसे पाहिले इनकी ही चिकित्सा अनिवार्य होती है -

जब दवाईयों की प्रूविग की जाती है तो विभिन्न व्यक्तियों पर अलग-अलग प्रतिक्रिया होती है -इन सब को जनरेलाईज करके सिम्पटम निर्धारित किया जाता है-कुछ सिम्पटम अति विशिस्ट तथा मार्ग दर्शक होते है जिनके द्वारा सही दवा का चुनाव करने में सुविधा रहती है-इसलिए सिम्पटम की व्यापकता तथा गहराई देख कर ही उचित निर्णय लेना चाहिए -चिकित्सा सम्बन्धी प्रकरणों में इस सम्बन्ध में आपको अधिक जानकारी मिल सकेगी -आपसे मिलते है अब अपनी अगली पोस्ट में-

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मेरा सम्पर्क पता-


कृपया रोगी ही फोन करे ताकि उसके लक्षण(Symptoms)को जाना जा सके केवल सिर्फ जानकारी मात्र के लिए डिस्टर्व न करे-आप यहाँ फोन कर सकते है-

KAAYAKALP

Homoeopathic Clinic & Research Centre

23,Mayur Market, Thatipur, Gwalior(M.P.)-474011

Director & Chief Physician:

Dr.Satish Saxena D.H.B.

Regd.N.o.7407 (M.P.)

Mob :  09977423220(फोन करने का समय-दिन में 12 P.M से शाम 6 P.M)(WHATSUP भी  यही नम्बर है)

Dr. Manish Saxena

Mob :- 09826392827(फोन करने का समय-सुबह 10A.M से शाम4 P.M.)(WHATSUP भी  यही नम्बर है )

Clinic-Phone- 0751-2344259 (C)

Residence Phone- 0751-2342827 (R)

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