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31 मई 2016

Health-स्वास्थ्य के लिये टिप्स

By With 2 टिप्‍पणियां:
कभी- कभी जीवन में कुछ टोटके स्वास्थ(Health)लाभ के लिए भी लाभ-दायक होते है -इसका ये मतलब नहीं है कि हम आपको अंधविश्वास की तरफ ले जा रहे है यदि आप इन सब चीजो पे यकीन नहीं करते है तो मेरी सलाह है आप बिलकुल भी यकीन ना करे -क्युकि यदि विश्वास नहीं रहा और मन में किसी प्रकार की शंका होगी तो भी ये फलित नहीं होता है-


For Health Tricks


सदा स्वस्थ बने रहने के लिये रात्रि को आप पानी किसी लोटे या गिलास में सुबह उठ कर पीने के लिये रख दें उसे पी कर बर्तन को फिर उल्टा रख दें तथा दिन में भी पानी पीने के बाद बर्तन (गिलास आदि) को उल्टा रखने से यकृत सम्बन्धी परेशानियां नहीं होती तथा व्यक्ति सदैव स्वस्थ बना रहता है कुछ ही दिनों में आश्चर्य जनक स्वास्थ्य(Health)लाभ अनुभव करेंगे-

रात्रि के समय शयन कक्ष में कपूर जलाने से बीमारियां, दु:स्वपन नहीं आते, पितृ दोष का नाश होता है एवं घर में शांति बनी रहती है-

घर में नित्य घी का दीपक जलाना चाहिए-दीपक जलाते समय लौ पूर्व या दक्षिण दिशा की ओर होना चाहिए तथा दीपक के मध्य में (फूलदार) बाती लगाना शुभ फल देने वाला है-

धान कूटने वाला मूसल और झाडू रोगी के ऊपर से उतार कर उसके सिरहाने रखें-स्वास्थ(Health)में आश्चर्य जनक लाभ कुछ दिनों में देखे-

मंदिर में गुप्त दान करें-इस तरह गुप्त दान किया गया भी रोगी को रोग मुक्त करता है-बस दान की जाने वस्तु काली नहीं होनी चाहिए ये किसी भी सोमवार से प्रयोग करें-

बाजार से कपास के थोड़े से फूल खरीद लें तथा रविवार शाम 5 फूल, आधा कप पानी में साफ कर के भिगो दें और सोमवार को प्रात: उठ कर फूल को निकाल कर फेंक दें तथा बचे हुए पानी को पी जाएं-लेकिन फूल भिगोने का पात्र बदला नहीं जाना चाहिए- 

यदि कोई बीमार हो जाए तो उस रोगी को शहद में चन्दन मिला कर चटाएं-

रोगी पहनने वाली वस्तु को रोगी के सर पर से सात बार क्लाक वाइज उतारा कर के गुप्त दान कर दे-हफ्ते में एक बार अवस्य करे जब तक रोगी रोग मुक्त न हो-पहले हफ्ते से ही लाभ नजर आने लगेगा और स्वास्थ(Health) लाभ होने लगेगा-

Upcharऔर प्रयोग-

Heart-ह्रदय में चुभने जैसा दर्द

By With 1 टिप्पणी:
डबरा(ग्वालियर ) शुगर मिल के चीफ इंजीनियर श्री जौहरी साहब के ह्रदय में कील चुभने जैसा दर्द होता था-एलोपैथिक चिकित्सा से लाभ तो हो जाता था लेकिन जैसे ही दवा बन्द होती दर्द फिर शुरू हो जाता था मुझे एक बार अति-आवश्यक कार्यवश उनके बंगले पर जाना पडा -उस समय वह दर्द से बहुत पीडित थे मुझे देखते ही वे बोले-सक्सेना जी देखिये मैं बीमार हूँ मुझसे काम की कोई बात मत करना- 

HeartPain


मैँने कहा कि मुझें पता लगा था कि आप का स्वास्थ्य ठीक नहीं है इसीलिये मैं आपको देखने चला आया था- वे बोले मेरे ह्रदय में दर्द(Heart pain) हैं ऐसा लगता है जैसे कि कोई कील चुभी हुईं है कोई उस कील को निकाल दे तो मैं ठीक हो सकता हूँ मेरी दवा डबरा में मिली नहीं है इसलिए मैंने आदमी ग्वालियर भेजा है -उस आदमी ने बताया है कि वह दवा वहाँ भी उपलब्ध नहीँ है- 

मैने उस आदमी से कहा है कि चाहे आगरा जाओ, दिल्ली जाओ या जहन्नुम में जाओ, मेरी दवा लेकर आओ-तब मैंने हंसते हुए उनसे कहा कि जब तक वह जहन्नुम से दवा लेकर आता है तब तक आप कुछ और दवा ले लीजिये -वे बोले और कौन सी दवा ले लूँ-मैंने कहा आप तब तक होम्योपैथिक(Homeopathic) दवा ले लीजिये -वे बोले वह तो मैं ले ही नहीं सकता हूँ- तब मैंने कहा क्यों ? 

वे बोले मैं तम्बाखू का बनारस का बादशाही जर्दा खाता हूँ- उसे मैं छोड नहीं सकता चाहे मैं मर ही क्यो न जाऊँ -मैंने उनसे कहा कि आप जर्दा मुँह में कहाँ रखते हैं -मेरा मतलब यह हैं कि यदि आप जर्दा जुबान के ऊपर रखते हो तो दवा जुबान के नीचे रख लीजियेगा और यदि जर्दा जवान के नीचे रखते हों तो दवा जुबान के ऊपर रख लीजिये-उन्होंने कहा कि क्या ऐसा हो सकता है -मैंने कहा कि अब तो ऐसा ही होना है-

तब जौहरी जी ने कहा कि घन्टे-आधे घन्टे का परहेज(Avoid) तो मैं कर भी सक्ता हूँ- मैंने कहा जैसी आपकी इच्छा-तो फिर मै आपके लिए अभी आपकी दो पुडियाँ भेज रहा हूँ -आप उन्हें आधे-आधे घन्टे से ले लीजिये- जब मै चलने को हुआ तो वे बोले आप कैसे आये थे -मैंने कहा कि जरा इस कागज पर साइन कर दीजिये-मेरा एक सरकारी ट्रैक्टर नाले मैं गिर गया है उसे निकालने के लिये मुझे एक चैन-पुली की जरूरत है -और उन्होंने कागज़ पर साइन कर दिया- 

हमने अपने घर आकर 'स्पाईजेलिया 1000' की दो पुडियां उसी समय दोपहर को मैंने उनके बंगले पर भिजवा दी शाम को वे स्वयं जीप लेकर मेरे घर आ गये -वे बोले तुम्हारी पुडियों ने तो कमाल कर दिया-मेरा दर्द बन्द हो गया -दो पुडियाँ मुझे और दे दो-

मैंने कहा कि जब दर्द है ही नहीं तो फिर आप पुडियों का क्या करेगे-वे बोले जब दर्द होगा तब ले लेंगे -मैने कहा मैंने कहा फिलहाल छह महिने तक तो दर्द होना नहीं है उन्होंने मुझसे कहा कि तो फिर दवा का नाम ही बता दो मैंने कहा कि होम्योपैथी में ऐसा नही होता है इसमें जब जैसी स्थिति होती है वैसी दवा दी जाती हैं - अभी मुझे पी.डब्लू.डी.में 20 साल और नौकरी करनी है- जब ज़रूरत हो तो दूँढ लेना उसके बाद उनको दर्द हुआ ही नहीं- 

वे डबरा की छोटी सी मिल को छोड कर उत्तर प्रदेश के नैपाल बॉर्डर पर एक बहुत बडी शुगर फैक्टरी के चीफ इंजीनियर हो गयें -उनके हर पत्र में आग्रह होता था कि आप आइये आप को नेपाल घुमाने ले चलेगे - मैं उन्हें धन्यवाद दे देता था- सौभाग्य से मैने पशुपतिनाथ जी के दर्शन तो किये पर किसी मरीज के भरोसे नहीं-

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Dizziness And Head Injury-चक्कर व सिर में चोट

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30 मई 2016

Homeopathy-Dizziness And Head Injury-चक्कर व सिर में चोट

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Dizziness And Head Injury

Dizziness And Head Injury-चक्कर व सिर में चोट-

मेरे एक युवा ठेकेदार के सिर मैं चोट लगी हुईं थी मैंने देखा तो उससे पूछा कि क्या हो गया तब वह बोला, कुछ नहीं - मैंने कहा तो फिर ये पट्टी हटा दो- क्यों बाँध रखी है बेकार में - वह बोला क्या बात बताऊँ ये मामला बडा विचित्र है -रात को मुझे पेशाब(urine) लगती है- पेशाब करतें में मुझे चक्कर(dizziness) आता है और अनजाने मे ही में गिर पडता हूँ जिससे मुझें कही भी चोट लग जाती है -मेरी ससुराल दिल्ली में है -वहाँ भी आंल इण्डिया इन्स्टऱटूयूट आँफ मेडीकल  साइंसेज में मैंने सारी जांचें करवा ली मगर कहीं कोई खराबी नहीं मिली है-

मैंने उससे पूछा कि जो क्रम तुमने मुझे बताया है क्या हमेशा इसी कम से घटनाएँ घटती हैं -उसने कहा, हाँ हमेशा - मुझे खोजने में मेहनत तो करनी पडी पर डॉ.वार्ड की किताब' 'सिम्पटम्स एज इफ" में ये पूरा क्रम इसी तरह से मिल गया - और इसकी एक मात्र दवा उन्होंने 'फॉस्फोरस' बताई है जिसकी '1000' शक्ति की दो खुराकों ने उसके रोग को सदा के लिये अलविदा कह दिया-

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Suffering Stomach Injury-पेट में चोट से पीड़ा

डॉ-सतीश सक्सेना 

29 मई 2016

Homeopathy-Suffering Stomach Injury-पेट में चोट से पीड़ा

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Suffering Stomach Injury

Suffering Stomach Injury-पेट में चोट से पीड़ा-

होम्योपैथी में दवा चुनने का आधार लक्षण या सिम्पटम रखा गया है इस द्रष्टि से देखा जाय तो चिकित्सा का मूल (लक्षण) ही है कमी कभी बडे -बडे महत्वपूर्ण लक्षणों से रोग का अनुमान नहीं हो पाता तो कभी छोटे से नगण्य लक्षण रोगी को स्वस्थ करने में निर्णायक सिद्ध होते हैं एक सफल होम्योपैथिक चिकित्सक वही हे जो लक्षणों के तुलनात्मक महत्व को सही-सही तरीके से निर्धारित कर सके -इसका प्रमाण यहाँ दिये जा रहे केस से आपको मिल जायेगा-

यह केस उस समय का है जब सन 1964 में सीखने के उद्देश्य से मैं डॉक्टर माधोसिंह जी तोमर के मुरार वाले क्लीनिक पर पुडियाँ बाँधा करता था -मिलिट्री के एक जवान के पेट में दर्द रहता था -डाक्टर साहव ने कई अच्छी-अच्छी दवाइयाँ बदल-बदल कर उसे दीं फिर भी लगभग तीन महिने तक माधो सिंह जी का इलाज कराने के बाद भी उसे कोई लाभ नहीं हुआ एक दिन वह रोगी क्लीनिक पर बैठा-बैठा डॉक्टर साहब का इन्तजार कर रहा था -माधोसिंह जी प्राय: देर से आया करते थे - उसने कहा कि कहां तक डाँक्टर साहब का रास्ता देखें -दवा से कुछ फायदा भी तो नहीं होता है अब मैं तो जा रहा दूँ कल से तो मैं आऊँगा ही नहीं - मैंने कहा कि आये हैं तो दवा तो ले ही जाओं -वह वोला दे दो -मैंने पूछा फि कौन सी दवा दे दूँ - डाक्टर साहब देते हैं वही या कुछ और दे दूँ-वह बोला कि कोई भी दे दो कल से तो में आऊँगा ही नही-

मैंने उसका परचा निकाला और लक्षण देखे -मैंने उससे पूछा कि तुम्हे कोई चोट तो नहीं लगी थी- उसने कहा नही -मैंने फिर उससे पूछा कि पहिले कभी लगी हो -वह याद करते हुए बोला कि एक साल पहिले डीज़ल का भरा हुआ ड्रम खिसकाते में उसकी फटकार जरूर पेट में लग गई थी - इसी लक्षण के आधार पर मैंनें उसे 'आर्निका1000' की दो पुडिंयाँ और 'रूटा30' व 'बेलिस पैरेनिस 30' दिन में दो-दो बार लेने के लिये दे दीं- दूसरे दिन सुबह मल के साथ लगभग आधा लिटर जमा हुआ काला खून निकला और उसका दर्द गायब हो गया-

उस दिन शाम को यही पहिला मरीज था - उसने डॉक्टर साहब से कहा कि मेरे पेट का दर्द बन्द हो गया - डॉक्टर साहब ने कहा कि देखो- मैंने कहा था ना कि तुम ठीक हो जाओगे-वह बोला किं आप की दवा से नहीं मै आपके कम्पाउन्डर की दवा से ठीक हुआ हूँ-तब तक मैंने उसका परचा डॉक्टर साहब के सामने रख दिया था -चोट का इतिहास और उसकी दवा देख कर उन्होंने पूछा कि तुम्हारे पेट में चोट लगी थी -उसने कहा, हाँ ,लगी थी- डाक्टर साहब ने उसे डाँटते हुए कहा कि तुमने मुझे क्यों नहीं बताया - वो भी मिलेट्री का आदमी था सो अकडते हुए बोला तुमने मुझ से क्यों नहीं पूछा-डॉक्टर साहब ने उसके हाथ जोडते हुए कहा, श्रीमान तो अब आप पधारिये-अब आप ठीक हो गये हैं- अब आपको किसी दवा की जरूरत नहीं है-

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Liver inflammation-जिगर की सूजन

डॉ-सतीश सक्सेना 

28 मई 2016

Liver Swelling-जिगर की सूजन

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आज हम आपको एक होम्योपैथी के चमत्कार की एक सच्ची घटना से आपको अवगत करा रहा हूँ मेरे एक मित्र की पत्नी को तेज बुखार आया जो कि सामान्य दवाइयों से ठीक न हो पाने के कारण उन्हें ग्वालियर कें कमला राजा शासकीय महिला एवं बाल चिकित्सालय में भरती कराना पडा -बुखार की तेज दवाइयां अधिक मात्रा दिये जाने के कारण उन्हें बहुत भारी मात्रा में मासिक घर्म होने लगा जो कि रुकने का नाम ही नहीं ले रहा था -तरह-तरह की दवाइयों और इंजेक्शनों  के कारण उनके लीवर में सूजन आ गई थी-

Liver Swelling

करीब एक माह तक उन्हें वहाँ भरती रखने के बाद उन्हें यह कह कर डिस्वार्ज कर दिया कि इनको लीवर का कैंसर है इनको इलाज के लिए मुम्बई ले जाइये -उस समय सन् 1976 में उन्होंने कहा कि इलाज खर्च के लिये कम से कम पचास हजार रुपये ओर तीन महीने की छुट्टी का इन्तजाम कर लीजिये - वे अपनी पत्नी को लेकर घर आ गये और छुट्टी व खर्च का प्रबन्ध करने लगे-

चूँकि उस समय पचास हजार का इंतजाम कैसे किया जाए और इस बीच में इलाज क्या किया जाय.? 

किसी ने कहा कि किसी होम्योपैथिक डॉक्टर को क्यों नहीं दिखा देते तो अब उन्हें मेरा ध्यान आया -उन्होंने मुझसे पूछा कि तुम्हारी होम्योपैथी में इसका कोई इलाज हे क्या ? 

मैंने कहा है तो अवश्य -उन्होने मुझसे इलाज करने के लिये कहा -उस समय मुरार में मेरा क्लीनिक भी था जहाँ बैठ कर मैं सुबह-शाम जनता की सेवा किया करता था -

केस की पूरी हिस्ट्री तो मुझे मालूम ही थी क्यों कि प्राय: रोज ही मैं उनको लेकर अस्पताल जाया करता था - इलाज शुरू किया - पहिले दिन 'नक्सवोमिका200' की दो खुराकें रात को सोने के पहिले आधा-आधा घंटे से दी और अगले दिन 'लायक्रोपोडियम 1000' की दो खुराकें दी 'चेलीडोनियम' 'कार्डअस मेरीयेनस' 'केरिका पपैया' 'चियोनेन्थस' व 'कोल्वीकम' के मूल अर्को को समान मात्रा में मिला कर 10-10 बूंदें थोडे से पानी में मिला कर दिन मेँ चार बार लेने के लिये दे दीं - इसके अलावा 'नेट्रम सल्फ 6एक्स' की चार गोली थोडे से गुनगुने पानी के साथ लेने के लिये दे दीं - एक सप्ताह में भूख लगने लगी- शरीर का पीला पन कम ही गया व टट्टी-पेशाव का रंग भी सामान्य होने लगा-

यही इलाज चालू रखा गया - दो सप्ताह में वे घर का हल्का-फुत्का काम जैसे बच्चों को स्कूल के लिये तैयार करना,सब्जी आदि काटना आदि करने लगी -अगले एक माह में वे स्वस्थ हो गई-

कुछ समय बाद मेरा तबादला सेवढा हो गया -लगभग 10 साल बाद मुझे एक पत्र मिला -जिसमे कुछ अटपटी सी लिखाई में लिखा गया था-लिखा था दादाजी.. अगर जाप मेरी बेटी की शादी में नहीं आयेगे तो मैं दामाद का मुंह नहीं देखूँगी -मै बडे असमंजस में था कि यह किसका पत्र हो सकता है - फिर ध्यान आया कि अग्रवाल की बेटी की शादी का निमन्त्रण जाया है यह उसी की पत्नी का पत्र होगा - 

समय न होने पर भी आखिरी बस से मैं अग्रवाल के यहाँ ग्वालियर पहुंचा -मैंने उसकी पत्नी से कहा कि आपने ऐसा क्यों लिखा- ये तो बडे सौभाग्य की बात है कि अपनी बेटी को ब्याहने दामाद हमारे दरवाजे पर आ रहे है -मेरी डांट से वह बेचारी रोने लगी उसने कहा दादाजी इन लोगों ने तो मुझे मार ही लिया था आपने ही मुझे बचा लिया - मुझे जो समझ में आया सो मैंने लिख दिया उसकी भावनाओं को समझ कर एक वार फिर होम्योपैथी के चमत्कारों के सामने नत मस्तक हो गया - 

मैंने उससे कहा कि मुझे समय नहीं है इसलिये मैं अभी जनवासे में जाकर दामाद साहब से मिल आता हूँ- जब मेँ जनवासे में पहुंचा तो पता लगा कि बारात डबरा से आई है - लडके को देखा तो समझ गया कि यह तो वही बच्चा है जिसका मैंने दो साल की उम्र में इलाज किया था -

उस समय हुआ यह था कि डबरा के ही एक सेठजी का बच्चा डबल निमोनियाँ से गम्भीर रूप से पीडित था तथा अन्य डोंक्टरों ने जवाब दे दिया था- उस वक्त वे मेरे पास आये और बच्चे को मेरे पैरों के पास जमीन पर रख दिया - मैंने उनसे कहा अरे ! सेठजी ये क्या करते हो - उन्होंने कहा कि हमने तो बच्चे को घरती पर रख दिया है अब आप जाने - 

मैंनें उनसे कहा ठीक है अब ये बच्चा मेरा है - मैं तो अपना बच्चा पालने के लिये आपको दे रहा हूँ- यदि आप पाल सकते हो तो ले लो बरना मैं तो पालूँगा ही -उनके हाँ कहने पर वह बच्चा मैने उनकी गोद में रख दिया -उसे 'एन्टिम टार्ट 30' 'कार्वोवेज30 व 'ब्रायोनिया 30' पर्याय कम से दो-दो घन्टे के अन्तर से दिये गये - टट्टी'-पेशाव में उसका सारा कफ निकल गया -बाद में 'हिपर सल्फ 200' की दो पुडियों ने उसके फेंफडे साफ कर दिये और बच्चा ठीक हो गया था-

जनवासे मैं मुझें आया देख कर वर के पिता व अन्य सब लोग आग्रह करने लगे कि आपको बारात में शामिल होना है - मैंने कहा नहीं, बिलकुल नहीं - मैंने कहा कि मैं कन्या पक्ष से आया हूँ ,मेरे लिये कोई सेवा हो तो बताइये-वे लोग बडे शर्मिन्दा हुए- 

तब मैंने उनसे कहा कि आप मेरे ही बेटे की शादी का रहे हो और मुझे बताया तक नहीं - वे लोग बहुत माफी मांगने लगे - मैंने कहा कोई बात नहीं गलती तो हो ही जाती है - आज मुझे दुगनी खुशी है क्यों कि बेटा भी मेरा ही है और बेटी भी मेरी ही है -प्रसन्नता के उन क्षणों को क्या कभी मैं भुला सकता हूँ क्योंकि ये कोई फ़िल्मी सीन नहीं है - यह एक वास्तविक और सच्ची घटना है और होम्योपैथी का अनुपम चमत्कार है-


संपर्क पता-

KAAYAKALP

Homoeopathic Clinic & Research Centre

23,Mayur Market, Thatipur, Gwalior(M.P.)-474011

Director & Chief Physician:

Dr.Satish Saxena D.H.B.

Regd.N.o.7407 (M.P.)

Mob :  09977423220(फोन करने का समय - दिन में 12 P.M से शाम 6 P.M)(WHATSUP भी  यही नम्बर है)

Dr. Manish Saxena

Mob : -09826392827(फोन करने का समय-सुबह 10A.M से शाम4 P.M.)(WHATSUP भी  यही नम्बर है )

Clinic-Phone - 0751-2344259 (C)

प्रस्तुति- Upcharऔर प्रयोग-

27 मई 2016

Liver tumors-जिगर में टूयूमर

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पुलिस विभाग के श्री दुबेजी की 65 वर्षीय माताजी के लीवर में एक टूयूमर था जिसका आकार लगभग 40 मि.मी था तथा उनका पेनक्रियाज भी स्लज से पूरी तरह भरा हुआ था -स्वांस रोग के तीव्र आक्रमण के कारण उन्हें एक स्थानीय नर्सिंग होम में भरती कराया गया था- तत्काल तो जीवन रक्षा ही गई किन्तु हालत में सुधार न होने के कारण डाक्टरों ने कहा कि इनके जीवन की कोई आशा नहीं है क्योंकि औषधियां कोई प्रभाव नहीं दिखा रही हैं -अत: इनको दी जानेवाली जीवन रक्षक प्रणालियों और औषधियों को एक-एक करके कम करते जायेंगे-

Liver tumors

ऐसी असाध्य अवस्था में उन्हें सलाह दी गई कि जब अंत आ ही गया है तो क्यों न इनको घर ही ले जाकर इनकी सेवा की जाय उनके घर के पास ही रहने वाले उनके एक सहयोगी ने माताजी को मुझे दिखाने का आग्रह किया- घर जाकर मैंने उन्हें देखा तो हालत वास्तव मे क्रीटीकल थी - मैंने उनसे कहा कि जैसे आप इनकी सेवा कर रहे हैं वेसे ही मैं भी दवाइयों के द्धारा इनकी सेवा करूँगा और परिणाम हम सब ईश्वर पर छोड देते है-और वो मान भी गए -

आखिर मैंने माताजी का इलाज शुरू किया - उनका लीवर कार्य नहीं कर रहा था जिसके कारण उन्हें कुछ भी हजम नहीं हो रहा था -पानी भी उल्टी के द्वारा बाहर निकल जाता था - ऐलोपैथिक चिकित्सा द्वारा उनकी सांस की तकलीफ तो काफी ठीक थी परन्तु सबसे बडी समस्या लीवर को सुधारने की थी -

मैने उन्हें 'कालमेघ' 'हायड्रोक्रोटायल ऐशिसाटिका' 'वोर्विया डिफूयूजा' 'लूफाविन्डाल' तथा 'कैरिका पपैया' सभी का मूल अर्क-जो कि नेशनल होम्यो, कोलकाता द्धारा लिन्हरमिन के नाम से उपलब्ध है-10-10 बूंदें दिन में चार बार और 'इपीकाक 6एक्स' व 'आर्सेनिकम एल्बम 6एक्स' चार बार देना शुरू किया- शीघ्र ही उनकी उल्टियां होना बन्द हो गया -हल्का-फुल्का जूस व सूप भी हजम होने लगा इससे उनके शरीर की दुर्बलता में कुछ कमी आई तथा अब निराशा की जगह कुछ आशा का संचार होने लगा था-

लगभग दो सप्ताह की चिकित्सा के बाद उनके लीवर के टूयुमर की तरफ ध्यान देना शुरू किया 'केल्केरिया कार्ब 1000' की दो खुराकों के बाद 'लेपिंस एल्बम 30' और 'फायटोलैक्का 30' की दो -दो खुराके प्रति दिन दी गई- लिव्हरमिन की भी दो खुराकें सुबह-शाम दी जाती रहीं-

लगभग एक माह को उपरोक्त चिकित्सा के बाद 'इपीकाक' व 'आर्स' की जगह उन्हें 'डिजीटेलिस 3एक्स' और 'कार्डूअस मेरियेनिस 3एक्स' के मिश्रण की दो खुराकें और 'लेपिस30' व 'फायटालैक्का30' की दो खुराकें प्रति दिन दी गई और लगभग एक माह में उनका रक्तचाप भी सामान्य हो गया-

टूमूमर भी घटता जा रहा था -हर बार अल्ट्रासाउंड में उसमें कमी आती जा रही थी -लगभग एक वर्ष इसी प्रकार चिकित्सा चलती रही -बीच बीच मेँ मौसम या खान पान सम्बन्धी कोई समस्या हुई तो उसे सामान्य दवाइयाँ दे कर ठीक कर तिया गया -माताजी लगभग दो साल तक हमारे इलाज मेँ रही -उनका टूयूमर पूरी तरह समाप्त हो गया था-

एक बार दुबेजी ने मुझसे पूछा कि यह कैसे पता चलेगा कि माताजी अब बिलकुल ठीक होगई है तो मैंने हैंसी-हँसी में उनसे कहा कि जिस दिन बहू से झगडा करने लगे -समझ लेना माताजी ठीक हो गई -वे बोले आज ही वे बहू से लड कर छोटे भाई के यहाँ चली गई हैं -कुछ दिन बाद वापिस आ गई-कई साल बाद थोडी सी बीमारी में उन्होंने अपना शरीर छोडा-

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प्रस्तुति- Upcharऔर प्रयोग-

26 मई 2016

Homeopathy-Breast tumors-छाती में ट्यूमर

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Breast tumors-छाती में ट्यूमर

Breast tumors-छाती में ट्यूमर-

डबरा के मेरे एक मित्र भोपाल गये हुए थे वहाँ अचानक उनकी छाती में तेज दर्द तथा सांस लेने में कठिनाई होने लगी तो तत्काल उन्होंने वहीं एक डॉक्टर को दिखाया  तो छाती के एक्स-रे में एक धब्बा आया फिर सोचा-गया कि शायद एक्स-रे की फिल्म एक्पोजड होगी इसलिये दुवारा एक्स-रे कराया गया लेकिन धब्बा फिर भी आ गया फिर तो तुरन्त एम.आर.आई. कराया गया तो पता लगा कि यह एक haytetid tumor(हायटेटिड टूयूमर) है जिसका आकार पानी बाली गेंद के आकार का बताया गया जैसा कि हायटेडिड टूयूमर में होता है इसमें फूल्यूड के अतिरिक्त कैल्शियम के टुकडे भी थे -डाक्टरों ने तुरन्त उन्हें मुम्बई जाने की सलाह दी - उसका आंपरेशन यहाँ तो हो ही नही सकता था क्योंकि सामने से आपरेट करने के लिए ह्रदय को हटाना पडता और पीछे से ओँपरेट करने पर नर्व डैमेज होतीं जिसमे पेरालेसिस हो सकता था-


मरीज की आयु यद्यपि 70 वर्ष थी तथापि शरीर से वे पूर्ण स्वस्थ थे -उनके एक भतीजे की रक्त कैसर के लिये चिकित्सा मुम्बई मेँ हो चुकी थी जिसमेँ उसे बचाया तो नही जा सका था पर वहाँ के अस्पतालों में कितनी परेशानी और खर्चा होता है इससे वे भलीभांति परिचित थे-

चिकित्सा के लिये रोगी मेरे पास आया तब हमने केस देखकर मैंने भी यही कहा कि इन्हें फौरन मुम्बई ही जाना
चाहिये -उनका मुझसे सीधा- सीधा कहना था कि मैं तो बरबाद हो ही रहा हूँ तीन-चार लाख खर्च करके अब बच्चों को भी क्यों बरबाद कर जाऊँ -मुझे आप पर पूरा विश्वास है और मैं आप से ही इलाज कराने आया हूँ-

मैंने उनसे पूछा कि इस टूयूमर से आपको सबसे ज्यादा कष्ट क्या है तब उन्होंने कहा कि मुझे साँस लेने में कठिनाई होती है और थोडा सा भी परिश्रम करने पर मेरी छाती में दर्द होने लगता है - टूयूमऱ इतना बडा था कि उसने स्वांस नली को एक और धकेल दिया था और इसी कारण से सांस लेने में कठिनाई और दर्द होता था-

चिकित्सा आरम्भ करने के लिये मैंने उन्हें 'केल्केरिया कार्ब 1000' की दो खुराके आधे-आधे घन्टे से सप्ताह में केवल एक दिन और 'लेपिस ऐल्वम30' व 'सिलीसिया30' की दो- दो खुराकें प्रति दिन लेने के लिये बता कर 15 दिन बाद फिर बताने के लिये कह कर रवाना कर दिया -इतने समय में उनका स्वांस कष्ट और दर्द काफी कम हो चुका था इसलिये वे स्वयं तो आये नही किसी के हाथ से दवा मंगवा ली -हमने 15 दिन के लिये दवाइयाँ और दे दीं-

एक माह बाद वे स्वयं आये -यद्यपि टूयूतर अभी भी काफी बडा था परन्तु उसके आकार में बहुत कमी आई थी अल्ट्रासाउंड कर रहे डॉक्टर कुलश्रेष्ठ जी ने छूटते ही कहा कि डाँक्टर सक्सेना जी ये आप क्या कर रहें हैं इन्हें आप फ़ौरन मुम्बई भेजिये -मैंने उनसे कहा कि इनको यही बहुत लाभ है -आप टूयूमर की साइज तो बताइये-

वे हँसते हुए बोले मेरे पास इतनी बडी मशीन नहीं हैं जो मैं इसे नाप संकू और लगभग एक माह उनकी चिकित्सा और चली -अब वे कहते हैं कि ट्रयूमर है तो बना रहे- मुझे इससे कोई कष्ट तो है नहीं मै यहाँ यह भी लिखना चाहूँगा कि उनका स्टील फर्नीचर व थ्रेशर मशीनों के निर्माण का कारखाना है जिसमें उन्हें कभी-कभी भारी काम भी करना पड जाता है भले ही मिस्त्री और लेवर कितनी ही लगी हो - इसे वे अपनी सामान्य आदत में मानते हैं मैं जब भी डबरा जाता हूँ तो उनसे मिल कर आता हूँ -सामान्य रूप से वे पूर्णत: स्वस्थ हैं और पाँच साल से उन्होने मुझसे कोई इलाज नहीं लिया है और ना ही अब तक दुबारा कोई अल्ट्रासाउंड करवाया है-

इसे भी पढ़े- Homeopathy-Liver tumors-जिगर में टूयूमर

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KAAYAKALP

Homoeopathic Clinic & Research Centre

23,Mayur Market, Thatipur, Gwalior(M.P.)-474011

Director & Chief Physician:

Dr.Satish Saxena D.H.B.

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Mob :  09977423220(फोन करने का समय - दिन में 12 P.M से शाम 6 P.M)

Dr. Manish Saxena

Mob : -09826392827(फोन करने का समय-सुबह 10A.M से शाम4 P.M.)

Clinic-Phone - 0751-2344259 (C)

Residence Phone - 0751-2342827 (R)

25 मई 2016

Homeopathic-Abortion Causing Blood Poisoning-रक्त-विषाक्तता के कारण गर्भपात

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Abortion Causing Blood Poisoning-रक्त-विषाक्तता के कारण गर्भपात

रक्त में विषाक्तता के कारण गर्भपात-

मेरे एक परिचित की पत्नी को तीन बार गर्भपात हो चुका था- भोपाल में विशेषज्ञ चिकित्सकों के द्वारा चिकित्सा के उपरान्त भी महिला गर्भधारण करने में असमर्थ थी - रक्त की अति विशिष्ठ जाँचों से पता चला कि रक्त में रुवेला के अतिरिक्त अन्य अनेक विषाक्त तत्व मौजूद हैं  एलोपैथिक डॉक्टरों ने स्पष्ट रूप से कह दिया कि आप बच्चे के बारे में बिलकुल भी न सोचें क्युकि रुवेला विष के कारण गर्भ टिक ही नहीं सकेगा क्युकि रुबेला बिष को दूर करने के लिये हमारे पास कोई उपाय नहीँ हैँ-


केस जब मेरे पास आया तो मैंने उन्हें आशवासन दिया कि होम्योपैथी से रुबेला के बिष को दूर किया जा सकता है किन्तु समय जो भी लगे - आप लोग अभी- युवा हैं और कुछ समय तक प्रतीक्षा करने मे कोई हानि नहीं है-

चिकित्सा  के रूप में रुबेला के लिये 'मार्बीलीनम 1000' से सी.एम . पोटेन्सी तक दी गई इसके अतिरिक्त अन्य शारीरिक व्याधियों जैसे- हथेली में एक्जीमा, मासिक की गडबडी, मलेरिया बुखार, कमर में दर्द आदि कष्टों के लिये लक्षणोंफे अनुसार 'रेननकुलस बल्बस, टूयूवरक्यूलिनिम, सिक्यूटा विरोसा, कालोफायलम, सीपिया. चायना आर्स, लेकेसिस आदि भी गई - दो बर्ष की लगातार चिकित्सा से रक्त तथा हार्मोन सम्बन्धी त्रुटियाँ न केवल दूर हुई अपितु सीमा के भीतर ही उन्हें पाया गया-

इसके उपरान्त गर्भ स्थापन हुआ -सामान्य प्रसव हुआ और वह बच्ची अब बड़ी हो गई तो उसकी एक छोटी बहन और आ गई है-

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प्रस्तुतीकरण - Upcharऔर प्रयोग 

Effect Of the Prohibition On People-निषेध का प्रभाव लोगो पर

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Effect Of the Prohibition On People

Effect Of the Prohibition On People-निषेध का प्रभाव लोगो पर-

पिछले दिनों समाचार में आया था फंला राज्य में शराब का निषेध आज्ञा लागू कर दी गई मुझे हंसी आ गई क्युकि पता है जब किसी चीज पे निषेध लागू किया जाता है उतनी ही तेजी से उस वस्तु की ब्लैक मार्केटिंग शुरू हो जाती है और इसमें हमेशा फायदा सरकारी तंत्र का ही होता है जिन मुल्को में शराब बंदी है तो क्या वहां शराब नहीं मिलती है बस अंतर ये है चोरी-छुपे मिलती है और वहां के प्रशासन को कमीशन चला जाता है जो लोग ये बंद करो वो बंद करो के पीछे लट्ठ ले के पड़े है उनके पागलपन की भी हद नहीं है -हाँ अलबत्ता फर्क सिर्फ इतना होता है ब्लैक में खरीद कर पीने वालो की जेब से कुछ जादा रकम जाने लगती है आखिर आदत तो छूटेगी नहीं -

निषेध से चोरों के लिए रास्ता खुल जाता है चोरी बढ़ जाती है पीने-वाले और अधिक मात्रा में सेवन करते है उनका इगो जी हर्ट हुआ है शराब चोरी छुपे खेतों में उतारी जाने लगती है बिना सरकारी टैक्स अदा किये ये गिरोह अपने काम में मशगूल हो जाता है - अधिकारियों के घर हिस्सेदारी अपने आप आ जाती  है -

निषेध करना मेरी राय में चोरी का बढावा है आप जिस चीज को प्रतिबंधित करते है लोगो की उत्सुकता और बढती है और उनके अंहकार ठेस लगने की वजह से और जादा करने का प्रयास करते है -

एक उदहारण से समझाते है पुराने ज़माने की बात है जब नई नवेली दुल्हन शादी हो के आती थी -एक पर्दा प्रथा हमारे समाज में थी -तब मुहल्ले के लड़के नई दुल्हन को देखने का काफी  यत्न किया करते थे कि किसी तरह भी दुल्हन का मुख दिख जाए इसके लिए जो-जो जतन करते थे ये पुराने लोग बखूबी जानते है और आज तो रिसेप्शन में ही शो पीस बना कर बिठा देते है मतलब चार्म ख़त्म -आप समझ ही गए होंगे यदि नहीं समझे तो ऐसे समझे -जब किसी फिल्म के पोस्टर पे Adults लिखा होता है तो आप जानते ही है कम उम्र के बच्चे उसे अवश्य चोरी छुपे देखते है -क्युकि हर एक की तमन्ना थी आखिर ऐसा क्या है भले एक बार देखे-

दीवारों पर जहां लगा रहता है कि यहां पेशाब करना मना है वहां पहुंचते ही से पेशाब लग आती है आपने पढ़ा नहीं कि बस एक दम ध्यान आ जाता है अभी तक खयाल भी नहीं था-तो जिस दीवार पर लिखा हो वहां तुम देख लो- हजार निशान पेशाब के बने होंगे-सामान्य आदमी है- अगर दीवार बचानी हो तो भूल कर मत लिखना -अगर बिलकुल ही बचानी हो तो लिखना कि यहां करना सख्त अनिवार्य है-फिर आप देखना जिसको लगी भी है वह भी सम्हाल कर निकल जाएगा कि यह क्या मामला है-

आज गुटके को सरकार प्रतिबंध करती है रास्ता साफ़ करने वाले तम्बाखू अलग और पान मसाला अलग बेचने लगे - बस खाने वाले को उसमे मिलाना ही है अब इससे क्या होगा खाने वाला क्या मिलाने की जहमत नहीं करेगा ?

निषेध करने से क्या होगा -निषेध या प्रतिबंधित करना है तो इन निषेध वाली वस्तुओ के उत्पादन पे करो इनका लाइसेंस खत्म करो सख्त सजा और जुर्माना इतना करो कि उनकी सात पीढियों के भी हाथ से तोते उड़ जाए-

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I Also Have To Take A Selfie-मुझे भी एक सेल्फी लेना है



Upcharऔर प्रयोग-

बरगद प्रकृति का एक वरदान है आपके लिए

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Banyan's full blessing in life

प्रकृति का एक वरदान है 'बरगद' ये कभी नष्ट नहीं होता है बरगद का वृक्ष घना एवं फैला हुआ होता है इसकी शाखाओं से जड़ें निकलकर हवा में लटकती हैं तथा बढ़ते हुए जमीन के अंदर घुस जाती हैं एवं स्तंभ बन जाती हैंबरगद को अक्षय वट भी कहा जाता है-बरगद(Banyan) के वृक्ष की शाखाएं और जड़ें एक बड़े हिस्से में एक नए पेड़ के समान लगने लगती हैं-

आइये जाने इसके क्या प्रयोग है-

बाल के लिए प्रयोग-

बरगद की जड़- 25 ग्राम
जटामांसी का चूर्ण- 25 ग्राम
गिलोय का रस- 2 लीटर
तिल का तेल- 400 मिलीलीटर

उपरोक्त सभी चीजो को आपस में मिलाकर एक साथ धूप में रख दे जब इसमें पानी जैसा सूख जाए तब बचे हुए तेल को छान लें इस तेल की मालिश से गंजापन दूर होकर बाल आ जाते हैं और बाल झड़ना बंद हो जाते हैं-

अन्य कुछ अदभुत प्रयोग-

बरगद की जटा और काले तिल को बराबर मात्रा में लेकर खूब बारीक पीसकर सिर पर लगायें-इसके आधा घंटे बाद कंघी से बालों को साफ कर ऊपर से भांगरा और नारियल की गिरी दोनों को पीसकर लगाते रहने से बाल कुछ दिन में ही घने और लंबे हो जाते हैं-

बरगद के कड़े हरे शुष्क पत्तों के 10 ग्राम दरदरे चूर्ण को 1 लीटर पानी में पकायें, चौथाई बच जाने पर इसमें 1 ग्राम नमक मिलाकर सुबह-शाम पीने से हर समय आलस्य और नींद का आना कम हो जाता है-

बरगद के पत्तों की 20 ग्राम राख को 100 मिलीलीटर अलसी के तेल में मिलाकर मालिश करते रहने से सिर के बाल उग आते हैं या बरगद के साफ कोमल पत्तों के रस में, बराबर मात्रा में सरसों के तेल को मिलाकर आग पर पकाकर गर्म कर लें, इस तेल को बालों में लगाने से बालों के सभी रोग दूर हो जाते हैं-

दही के साथ बड़ को पीसकर बने लेप को जले हुए अंग पर लगाने से जलन दूर होती है- जले हुए स्थान पर बरगद की कोपल या कोमल पत्तों को गाय के दही में पीसकर लगाने से जलन कम हो जाती है-

नाक में बरगद के दूध की 2 बूंदें डालने से नकसीर (नाक से खून बहना) ठीक हो जाती है- 3 ग्राम बरगद की जटा के बारीक पाउडर को दूध की लस्सी के साथ पिलाने से नाक से खून बहना बंद हो जाता है-

बिवाई की फटी हुई दरारों पर बरगद का दूध भरकर मालिश करते रहने से कुछ ही दिनों में वह ठीक हो जाती है-

बरगद के लाल रंग के कोमल पत्तों को छाया में सुखाकर पीसकर रख लें फिर आधा किलो पानी में इस पाउडर को 1 या आधा चम्मच डालकर पकायें, पकने के बाद थोड़ा सा बचने पर इसमें 3 चम्मच शक्कर मिलाकर सुबह-शाम चाय की तरह पीने से जुकाम और नजला आदि रोग दूर होते हैं और सिर की कमजोरी ठीक हो जाती है-

10 ग्राम बरगद के कोमल हरे रंग के पत्तों को 150 मिलीलीटर पानी में खूब पीसकर छानकर उसमें थोड़ी मिश्री मिलाकर सुबह-शाम 15 दिन तक सेवन करने से दिल की घड़कन सामान्य हो जाती है-बरगद के दूध की 4-5 बूंदे बताशे में डालकर लगभग 40 दिन तक सेवन करने से दिल के रोग में लाभ मिलता है-

कमर दर्द में बरगद़ के दूध की मालिश दिन में 3 बार कुछ दिन करने से कमर दर्द में आराम आता है- बरगद का दूध अलसी के तेल में मिलाकर मालिश करने से कमर दर्द से छुटकरा मिलता है- कमर दर्द में बरगद के पेड़ का दूध लगाने से लाभ होता है-

बरगद के पेड़ के फल को सुखाकर बारीक पाउडर लेकर मिश्री के बारीक पाउडर मिला लें- रोजाना सुबह इस पाउडर को 6 ग्राम की मात्रा में दूध के साथ सेवन से वीर्य का पतलापन, शीघ्रपतन आदि रोग दूर होते हैं-

यदि आप नियमित सूर्योदय से पहले बरगद़ के पत्ते तोड़कर टपकने वाले दूध को एक बताशे में 3-4 बूंद टपकाकर खा लें-एक बार में ऐसा प्रयोग 2-3 बताशे खाकर पूरा करें- हर हफ्ते 2-2 बूंद की मात्रा बढ़ाते हुए 5-6 हफ्ते तक यह प्रयोग जारी रखें- इसके नियमित सेवन से शीघ्रपतन, वीर्य का पतलापन, स्वप्नदोष, प्रमेह, खूनी बवासीर, रक्त प्रदर आदि रोग ठीक हो जाते हैं और यह प्रयोग बलवीर्य वृद्धि के लिए भी बहुत लाभकारी है-

बताशे में बरगद के दूध की 5-10 बूंदे डालकर रोजाना सुबह-शाम खाने से नपुंसकता दूर होती है-

बरगद के पके फल को छाया में सुखाकर पीसकर चूर्ण बना लें- इस चूर्ण को बराबर मात्रा की मिश्री के साथ मिलाकर पीस लें- इसे एक चम्मच की मात्रा में सुबह खाली पेट और सोने से पहले एक कप दूध से नियमित रूप से सेवन करते रहने से कुछ हफ्तों में यौन शक्ति में बहुत लाभ मिलता है

3-3 ग्राम बरगद के पेड़ की कोंपले (मुलायम पत्तियां) और गूलर के पेड़ की छाल और 6 ग्राम मिश्री को पीसकर लुगदी सी बना लें फिर इसे तीन बार मुंह में रखकर चबा लें और ऊपर से 250 ग्राम दूध पी लें- 40 दिन तक खाने से वीर्य बढ़ता है और संभोग से खत्म हुई शक्ति लौट आती है-

बरगद के दूध की पहले दिन 1 बूंद 1 बतासे डालकर खायें, दूसरे दिन 2 बतासों पर 2 बूंदे, तीसरे दिन 3 बतासों पर 3 बूंद ऐसे 21 दिनों तक बढ़ाते हुए इसी तरह घटाना शुरू करें- इससे प्रमेह और स्वप्न दोष दूर होकर वीर्य बढ़ने लगता है-

बरगद के फल छाया में सुखाकर चूर्ण बना लें- गाय के दूध के साथ यह 1 चम्मच चूर्ण खाने से वीर्य गाढ़ा व बलवान बनता है-

25 ग्राम बरगद की कोपलें (मुलायम पत्तियां) लेकर 250 मिलीलीटर पानी में पकायें- जब एक चौथाई पानी बचे तो इसे छानकर आधा किलो दूध में डालकर पकायें- इसमें 6 ग्राम ईसबगोल की भूसी और 6 ग्राम चीनी मिलाकर सिर्फ 7 दिन तक पीने से वीर्य गाढ़ा हो जाता है-

बरगद के दूध की 5-7 बूंदे बताशे में भरकर खाने से वीर्य के शुक्राणु बढ़ते है-

बरगद की जटा के साथ अर्जुन की छाल, हरड़, लोध्र व हल्दी को समान मात्रा में लेकर पानी में पीसकर लेप लगाने से उपदंश के घाव भर जाते हैं-

बरगद का दूध उपदंश के फोड़े पर लगा देने से वह बैठ जाती है- बड़ के पत्तों की भस्म (राख) को पान में डालकर खाने से उपदंश रोग में लाभ होता है-

बरगद के पत्तों से बना काढ़ा 50 मिलीलीटर की मात्रा में 2-3 बार सेवन करने से पेशाब की जलन दूर हो जाती है- यह काढ़ा सिर के भारीपन, नजला, जुकाम आदि में भी फायदा करता है-

बरगद की जटाओं के बारीक रेशों को पीसकर बने लेप को रोजाना सोते समय स्तनों पर मालिश करके लगाते रहने से कुछ हफ्तों में स्तनों का ढीलापन दूर हो जाता है-

बरगद की जटा के बारीक अग्रभाग के पीले व लाल तन्तुओं को पीसकर लेप करने से स्तनों के ढीलेपन में फायदा होता है-

4 ग्राम बरगद की छाया में सुखाई हुई छाल के चूर्ण को दूध की लस्सी के साथ खाने से गर्भपात नहीं होता है-

बरगद की छाल के काढ़े में 3 से 5 ग्राम लोध्र की लुगदी और थोड़ा सा शहद मिलाकर दिन में 2 बार सेवन करने से गर्भपात में जल्द ही लाभ होता है

योनि से रक्त का स्राव यदि अधिक हो तो बरगद की छाल के काढ़ा में छोटे कपड़े को भिगोकर योनि में रखें- इन दोनों प्रयोग से श्वेत प्रदर में भी फायदा होता है-

बरगद की कोपलों के रस में फोया भिगोकर योनि में रोज 1 से 15 दिन तक रखने से योनि का ढीलापन दूर होकर योनि टाईट हो जाती है-

पुष्य नक्षत्र और शुक्ल पक्ष में लाये हुए बरगद की कोपलों का चूर्ण 6 ग्राम की मात्रा में मासिक-स्राव काल में प्रात: पानी के साथ 4-6 दिन खाने से स्त्री अवश्य गर्भधारण करती है या बरगद की कोंपलों को पीसकर बेर के जितनी 21 गोलियां बनाकर 3 गोली रोज घी के साथ खाने से भी गर्भधारण करने में आसानी होती है-

बड़ की जटा के अंकुर को घोटकर गर्भवती स्त्री को पिलाने से सभी प्रकार की उल्टी बंद हो जाती है-

20 ग्राम बरगद के कोमल पत्तों को 100 से 200 मिलीलीटर पानी में घोटकर रक्तप्रदर वाली स्त्री को सुबह-शाम पिलाने से लाभ होता है- स्त्री या पुरुष के पेशाब में खून आता हो तो वह भी बंद हो जाता है-

10 ग्राम बरगद की जटा के अंकुर को 100 मिलीलीटर गाय के दूध में पीसकर और छानकर दिन में 3 बार स्त्री को पिलाने से रक्तप्रदर में लाभ होता है-

बरगद के दूध की 5-7 बूंदे बताशे में भरकर खाने से रक्तप्रदर मिट जाता है-

बरगद के पत्ते, सौंठ, पुरानी ईंट के पाउडर, गिलोय तथा पुनर्नवा की जड़ का चूर्ण समान मात्रा में लेकर पानी के साथ पीसकर लेप करने से भगन्दर के रोग में फायदा होता है-

20 ग्राम बरगद की छाल को 400 मिलीलीटर पानी में पकायें, पकने पर आधा पानी रहने पर छानकर उसमें 10-10 ग्राम गाय का घी और चीनी मिलाकर गर्म ही खाने से कुछ ही दिनों में बादी बवासीर में लाभ होता है-

बरगद के 25 ग्राम कोमल पत्तों को 200 मिलीलीटर पानी में घोटकर खूनी बवासीर के रोगी को पिलाने से 2-3 दिन में ही खून का बहना बंद होता है बवासीर के मस्सों पर बरगद के पीले पत्तों की राख को बराबर मात्रा में सरसों के तेल में मिलाकर लेप करते रहने से कुछ ही समय में बवासीर ठीक हो जाती है-

बरगद की सूखी लकड़ी को जलाकर इसके कोयलों को बारीक पीसकर सुबह-शाम 3 ग्राम की मात्रा में ताजे पानी के साथ रोगी को देते रहने से खूनी बवासीर में फायदा होता है- कोयलों के पाउडर को 21 बार धोये हुए मक्खन में मिलाकर मरहम बनाकर बवासीर के मस्सों पर लगाने से मस्से बिना किसी दर्द के दूर हो जाते हैं-

खून निकलता है- उसे खूनी दस्त कहते हैं- इसे रोकने के लिए 20 ग्राम बरगद की कोपलें लेकर पीस लें और रात को पानी में भिगोंकर सुबह छान लें फिर इसमें 100 ग्राम घी मिलाकर पकायें- पकने पर घी बचने पर 20-25 ग्राम तक घी में शहद व शक्कर मिलाकर खाने से खूनी दस्त में लाभ होता है-

बरगद के दूध को नाभि के छेद में भरने और उसके आसपास लगाने से अतिसार (दस्त) में लाभ होता है- 6 ग्राम बरगद की कोंपलों को 100 मिलीलीटर पानी में घोटकर और छानकर उसमें थोड़ी मिश्री मिलाकर रोगी को पिलाने से और ऊपर से मट्ठा पिलाने से दस्त बंद हो जाते हैं-

बरगद की छाया मे सुखाई गई 3 ग्राम छाल को लेकर पाउड़र बना लें और दिन मे 3 बार चावलों के पानी के साथ या ताजे पानी के साथ लेने से दस्तों में फायदा मिलता है- बरगद की 8-10 कोंपलों को दही के साथ खाने से दस्त बंद हो जाते हैं-

20 ग्राम बरगद की छाल और इसकी जटा को बारीक पीसकर बनाये गये चूर्ण को आधा किलो पानी में पकायें, पकने पर अष्टमांश से भी कम बचे रहने पर इसे उतारकर ठंडा होने पर छानकर खाने से मधुमेह के रोग में लाभ होता है-

लगभग 24 ग्राम बरगद के पेड़ की छाल लेकर जौकूट करें और उसे आधा लीटर पानी के साथ काढ़ा बना लें- जब चौथाई पानी शेष रह जाए तब उसे आग से उतारकर छाने और ठंडा होने पर पीयें- रोजाना 4-5 दिन तक सेवन से मधुमेह रोग कम हो जाता है- इसका प्रयोग सुबह-शाम करें-

कूठ व सेंधानमक को बरगद के दूध में मिलाकर लेप करें, तथा ऊपर से छाल का पतला टुकड़ा बांध दें, इसे 7 दिन तक 2 बार उपचार करने से बढ़ी हुआ गांठ दूर हो जाती है- गठिया, चोट व मोच पर बरगद का दूध लगाने से दर्द जल्दी कम होता है-

बरगद के पेड़ के दूध को फोड़े पर लगाने से फोड़ा पककर फूट जाता है-

लगभग 5 ग्राम की मात्रा में बड़ के दूध को सुबह-सुबह पीने से आंव का दस्त समाप्त हो जाता है-

लगभग 3 ग्राम से 6 ग्राम बरगद की जटा का सेवन करने से उल्टी आने का रोग दूर हो जाता है-

30 ग्राम वट की छाल को 1 लीटर पानी में उबालकर गरारे करने से मुंह के छाले खत्म हो जाते हैं-

घाव में कीड़े हो गये हो, बदबू आती हो तो बरगद की छाल के काढ़े से घाव को रोज धोने से इसके दूध की कुछ बूंदे दिन में 3-4 बार डालने से कीड़े खत्म होकर घाव भर जाते हैं-

बरगद के दूध में सांप की केंचुली की राख मिलाकर और उसमें रूई भिगोकर नासूर पर रखें- दस दिन तक इसी प्रकार करने से नासूर में लाभ मिलता है-

अगर घाव ऐसा हो जिसमें कि टांके लगाने की जरूरत पड़ जाती है- तो ऐसे में घाव के मुंह को पिचकाकर बरगद के पत्ते गर्म करके घाव पर रखकर ऊपर से कसकर पट्टी बांधे, इससे 3 दिन में घाव भर जायेगा, ध्यान रहे इस पट्टी को 3 दिन तक न खोलें-

फोड़े-फुन्सियों पर इसके पत्तों को गर्मकर बांधने से वे शीघ्र ही पककर फूट जाते हैं-

बरगद के आधा किलो पत्तों को पीसकर, 4 किलो पानी में रात के समय भिगोकर सुबह ही पका लें- एक किलो पानी बचने पर इसमें आधा किलो सरसों का तेल डालकर दोबारा पकायें, तेल बचने पर छानकर रख लें, इस तेल की मालिश करने से गीली और खुश्क दोनों प्रकार की खुजली दूर होती है-

बरगद की पेड़ की टहनी या इसकी शाखाओं से निकलने वाली जड़ की दातुन करने से दांत मजबूत होते हैं-

कीड़े लगे या सड़े हुए दांतों में बरगद का दूध लगाने से कीड़े तथा पीड़ा दूर हो जाती है-

10 ग्राम बरगद की छाल, कत्था और 2 ग्राम कालीमिर्च इन तीनों को खूब बारीक पाउडर बनाकर मंजन करने से दांतों का हिलना, मैल, बदबू आदि रोग दूर होकर दांत साफ हो जाते हैं-

दांत के दर्द पर बरगद का दूध लगाने से दर्द दूर हो जाता है- इसके दूध में एक रूई की फुरेरी भिगोकर दांत के छेद में रख देने से दांत की बदबू दूर होकर दांत ठीक हो जाते हैं तथा दांत के कीड़े भी दूर हो जाते हैं-

अगर किसी दांत को निकालना हो तो उस दांत पर बरगद का दूध लगाकर दांत को आसानी से निकाला जा सकता है-

बरगद के पेड़ की जटा से मंजन करने से दांतों के कीड़े खत्म हो जाते हैं बरगद की कोमल लकड़ी की दातुन से पायरिया खत्म हो जाता है-

बरगद का दूध दांतों में लगाने, मसूढ़ों पर मलने से उनका दर्द दूर हो जाता है बरगद की छाल के काढ़े से कुछ समय तक रोजाना गरारे करने से दांत मजबूत हो जाते हैं-

बरगद के पेड़ का दूध निकालकर दांतों लगाने से दांतों का दर्द खत्म हो जाता है-

बरगद की छाल को पीसकर दांतों के नीचे रखें- इससे दांतों का दर्द खत्म हो जाता है-

दमा के रोगी को बड़ के पत्ते जलाकर उसकी राख 240 मिलीग्राम पान में रखकर खाने से लाभ मिलता है-

बरगद के पत्तों पर घी चुपड़कर बांधने से सूजन दूर हो जाती है-

गठिया के दर्द में बरगद के दूध में अलसी का तेल मिलाकर मालिश करने से लाभ मिलता है-

Upcharऔर प्रयोग-

23 मई 2016

Homeopathy-Pet Mein Jalan-पेट में जलन

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Pet Mein Jalan

Pet Mein Jalan-पेट में जलन-

नगरिया जी  के बच्चे के चलने की खबर जंगल में आग की तरह फैलने लगी जिसकी पोस्ट हम आपको पहले कर चुके है - दतिया के वनमण्डल अधिकारी उस समय एक सरदारजी थे उन्होंने  ने जब यह सुना तो उन्होंने नगरियाजी से कहा कि सक्सेना जी से मेरी पत्नी का इलाज भी करवा दीजिये -नारियाजीने मुझ से अनुरोध किया कि आप हमारे डी-एफ-ओ-साहब की पत्नी को भी एक बार देख लीजिये वैसे तो शासकीय कार्य से मैं प्राय: दतिया जाता ही रहता था किन्तु वे मुझें विशेषरूप से आग्रह पूर्वक उनके बंगले पर ले गये -लक्षण देखने पर पता लगा कि उनकी पत्नी को पेट में बहुत जलन होती है - 

वैसे तो उनका इलाज बहुत हुआ पर लाभ कुछ नहीं हुआ था पी.जी.आई.चण्डीगढ मेँ जहाँ कि पेट के रोगों के लिये देश की सर्वोत्वम व्यवस्था है वहाँ भी न जाँचों मेँ कुछ मिला और न दवाओं ने कोई काम किया-

मुझे इतिहास जानने पर पता चला कि इसके पहिले वे अपने बेटे के पास सिंगापुर काफी दिन रही थीं वहां चेरी जैसा एक फल उन्हें बहुत पसन्द आया था जिसे उन्होंने अधिक मात्रा में खाया था- उसी के बाद उनको ये कष्ट प्रारम्भ हुआ था-असंगत चिकित्सा ने उसे और जादा बढा दिया था- जलन,थोडे थोडे पानी की बार बार प्यास, मृत्यु का भय तथा फलों के अधिक प्रयोग के द्वारा उत्पन्न कष्ट आदि लक्षण सब आर्सेनिकम एल्बम के लगे इसलिये 30 पोटेन्सी मेँ में चार बार लेने के लिये बता दिया - डी.एफ.ओ.साहब ने सम्मानपूर्वक मेरा स्वागत किया था तथा चलते समय फीस देने लगे -मैंने कहा कि फीस आदि तो मै किसी से भी नहीं लेता किन्तु मेरा नियम यह है कि मैं सरकारी समय अर्थात् सुबह आठ बजे से शाम पाँच बजे तक कोई मरीज नहीं देखता क्योकि यह मेरा शासकीय समय होता है जिसके लिये मुझे वेतन मिलता है-

सरदारनीजी को पहिले ही दिन से लाभ होना प्रारम्भ होगया था जो ठीक होने तक चलता ही रहा मै यहाँ सरदार जी की प्रशंसा अवश्य करूँगा  कि इसके बाद उन्होंने मुझे कभी भी अपने बंगले पर नहीं बुलाया- वे स्वयं ही आकर सेंवढा रेस्ट हाउस में रुक जाते व मेरे पास सूचना भिजवा देते कि जब भी मुझे समय हो मै रोगी को देख लूँ-

इलाज के रुप में मुझे उन्हें 'नक्स वोमिका 200', 'रोविनिया 30' ओर 'नेट्रम फांस 30' के अतिरिक्त कोई विशेष औषधियों का प्रयोग नहीं करना पडा-

अपने पुत्र के विवाह के अवसर पर सरदार दम्पत्ति स्वयं मेरे घर मुझें आमंत्रित करने आये सरदारनीजी ने मुझसे कहा कि आपको बारात में पंजाब अवश्य चलना पडेगा नहीं तो मै बहू का मुह नहीं देखूँगी क्योंकि मैंने तो जीवन की आशा ही छोड दी थी -आपकी मेहरबानी ने ही मुझे यह दिन दिखाया है उनकी कृतज्ञ भावना देख कर मुझें खुशी तो हुई पर बहू का मुंह न देखने बाली बात मुझे अखर गई -मैंने उनको समझाया कि कृपया ऐसो बात न कहे -वाहे गुरू की दया से ऐसा अवसर आया है तो उसे खुशी से मनायें -

उस समय मेरे पास सिन्ध नदी पर पुल बनाने का कार्य चल रहा था -स्लेब की कांकीर्टिग का दिन निश्चित हो चुका था - बडा काम था इसलिये मेरा रहना अनिवार्य था -मैंने अपनी मजबूरी बताई - मैने उनसे कहा कि आप बहू को लेकर आइये मैं उसका स्वागत आपके बंगले के गेट पर खडे होकर करूँगा- ये मेरा आपसे पक्का वादा है -बडी मुश्किल से मैं उनको राजी कर सका -उनके इस आदर ओर प्रेम की भावना का जब भी स्मरण करता हूँ तो पुलकित हो उठता हूँ- मैं इसे अपना नहीं अपनी पैथी- होम्योपैथी का सम्मान मानता हूँ -
डॉ-सतीश सक्सेना 


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क्या आप शादी कर रहे है तो एक बार ये भी सोचे- If you are married even once thought

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 If you are married even once thought

क्या आप शादी कर रहे है तो एक बार ये भी सोचे- If you are married even once thought-

सभी के जीवन में शादी(married ) का महत्व है हर लड़के या लड़की की इक्षा होती है कि उसका जीवन साथी योग्य और उसकी अपेक्षाओं पे खरा उतरने वाला हो तो फिर आप को अपनी गर्ल-फ्रेंड या होने वाली जीवन संगिनी के विषय में उसकी बेसिक आदतों(Basic habits) का जानना आपके लिए आवश्यक है वर्ना आपके सपनो को चकनाचूर होते देर नहीं लगेगी भले ये रिश्ता आपके पेरेंट्स ही की मर्जी से हुआ हो -

यदि आपकी होने वाली गर्ल-फ्रेंड(Girlfriends) या जीवन संगिनी यदि बात -बात में झूठ बोलती है या लम्बी-लम्बी फेकने वाली बात करती है अपने झूठे सम्मान को बरकरार रखने के लिए - तो आपको इस प्रकार के रिश्ते को जोड़ने से पहले अवस्य सोचना चाहिए अपना अतीत छुपाना लडकियों में एक ख़ास आदत होती है पैसे से सम्बंधित बातो पे झूठ बोलना भी आपके लिए आने वाले समय में कलह का कारण(cause of discord) भी बन सकती है हम ये नहीं कहते कि परिवर्तन नहीं होता है मगर शुरू-शुरू में ये सामंजस्य बिठाना आपके लिए मुश्किल से कम नहीं होता और ये धीरे-धीरे आपके मन में एक शक का बीज अंकुरित कर सकता है -

सबसे जो विशेष बात ये है कि आपको देखना है कि कही आपकी होने वाली जीवन-संगिनी आलसी तो नहीं है आपका पूरा परिवार और आपकी जिम्मेदारी से ताल-मेल बिठा सकती है या फिर बस आपको ही दो रोटी देने के बाद आलसियों की तरह लेटे रहने वाली है -क्युकि आलसी लोगो को आगे चल कर रोग होने की संभावना काफी जादा होती है और आपको उसकी देखभाल के लिए डॉक्टर को आय का एक हिस्सा देना होगा जो आगे चल कर तकलीफ का कारण बन सकता है -

आपकी जो होने वाली जीवन-संगिनी हर छोटे-छोटे कामो के प्रति भी दूसरो पे आश्रित है वो भी आपके लिए किसी मुसीबत से कम नहीं है इस प्रकार की शादी से पहले आप खुद को ही काम करने के लिए तैयार  कर ले -

स्वभाव का परिचय भी जाने कि- हमेशा दूसरो से बात करते वक्त उसका व्यवहार हमेशा नम्र है या कठोर -कठोर जुबान या स्वभाव की जीवन -संगिनी आपके माता-पिता या रिश्तेदारों से कैसा व्यवहार करेगी इसकी कल्पना आप स्वयं ही करे-

जो शादी(wedding) से पहले बात-बात में आपको अपनी आदतों को बदलने के लिए दबाव डालती रहे और खुद में कोई कमी नजर न आये इस प्रकार की पत्नी आपके जीवन में घडी-घडी आपकी कमियों से अवगत कराने की बजाय झगडे का कारण बना सकती है - सलाह देना और बदलना दोनों विपरीत बात है -हो सकता है कुछ आदते आपकी दूसरो के हित की हो और आपको अपना परिवार बाँध के रखने में सहायक हो लेकिन वो उस बंधन से मुक्त होने के लिए और अपनी आजादी के लिए भी आपके जीवन में दबाव डाल सकती है और आगे चल कर आपको शायद एहसास भी हो कि आपने गलती की है -उस परिस्थिति में कभी-कभी लौट के आने का भी लाभ नहीं होता है -बस आपको इस रिश्ते से कन्नी-काट लेना ही उचित है -

छोटी-छोटी बातो पे झगड़ने वाली या इमोशनल अत्याचार करने वाली पत्नी आपके जीवन को कभी भी सुखी नहीं बना सकती है अगर आप उसे बदलने का भी प्रयास करेगे तो उसका इगो हर्ट होगा जो उसके और आपके दोनों के लिए ही नुकसान दायक होगा -

अंतिम बात ये है-भले ही देर हो जाए उसका उतना पश्चाताप नहीं होगा जितना जल्दी में लिया गया फैसला आपको जीवन भर पछताने के सिवा कुछ नहीं देगा -शादी जीवन का अटूट बंधन है इसलिए भले 1001 बार सोचने को मजबूर हो लेकिन एक बार जरूर सोचे -शादी से पहले अगर आप किसी गर्ल-फ्रेंड से प्यार करते है तो हो सकता है आपको उसमे कोई भी बुराई नजर न आये तो इसकी जिम्मेदारी आप अपने निकटवर्ती मित्र या परिवार के सदस्य को सौंप दे -जो आपका विश्वास-पात्र हो या सही मार्ग-दर्शक हो -उसकी बातो को भी तवज्जो दे -

तो फिर कब करेगे शादी सोच समझ कर ..?

Upcharऔर प्रयोग-

Selfie-सेल्फी मुझे भी लेना है

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आजकल सेल्फी(Selfie) का दौर है जिसको देखो सेल्फी लेने में लगा हुआ है तरह-तरह की Selfie(सेल्फी) का प्रचलन बड़े-जोर से चल निकला है कल रात की बात है मै एक साईट पे सर्च करने निकल गया तो अजीब-अजीब सेल्फी(Selfie) देखने को मिली पहले कभी सेल्फी का चलन नहीं था आज अपने चेहरे की तस्वीरें खींच कर सोशल मीडिया पर अपलोड और साझा करने का चलन ‘सेल्फी’ नाम से जाना जाने लगा है इसका सबसे जादा प्रचलन 2013 से शुरू हुआ और बदस्तूर आज भी जारी है-

Selfie-सेल्फी मुझे भी लेना है


हमें याद है जब हम पढ़ते थे तो स्कूल के बिदाई समारोह में सभी स्टूडेंट के साथ एक ग्रुप फोटो बनाई जाती थी इसे आप ग्रुप सेल्फी(Group Selfi) का नाम दे सकते है फिर उसे कमरे में लगा कर हर सुबह अपने दोस्तों को देख कर तसल्ली कर लिया करते थे एक ताजा याद बनी रहती थी -

वास्तव में इसका खास श्रेय दो लोगो को दिया जा सकता है पहले हमारे चिरपरिचित अभिनेता सलमान भाई को और दूसरे हमारे प्रधान-मन्त्री जी को-अब तो आलम ये है कि हर व्यक्ति सेल्फी(Selfie) में मस्त है और फिर साथ में सोसल-मिडिया जो है सेल्फी लो और फेसबुक पे अपलोड कर दो -फेसबुक भी कमाल की चीज है एक मिनट में आप अपने क्रिया कलापों को हर जुड़े व्यक्ति को शेयर कर वाह-वाही ले सकते है भले उसका आपका दूर-दूर तक कोई नाता न हो -और हो भी क्यों नहीं -आखिर वास्तविक जीवन में तो हम अपनों से तो कट ही चुके है-

कल एक सेल्फी(Selfie) देख रहा था एक लेडीज ताजमहल के साथ सेल्फी ले रही थी अब बेचारा ताजमहल भी क्या करे जब ये शेयर होगी तो लोग ताजमहल की सुन्दरता पे कम कमेन्ट करेगे तारीफ के पुल तो सेल्फी लेने वाले को मिलेगे -कोई कहेगा वाह आप बहुत सुंदर हो, कोई कहेगा वेरी नाईस,काश हम भी आपके साथ होते -क्या पता ये कमेन्ट ताजमहल के लिए है या सेल्फी(Selfie) लेने वाले के लिए है -अब तो हमारे विदेशो में इसका प्रचलन इतनी तेजी से फैल गया है कि अमरीका के राष्टपति जहाँ जाते है Selfie-सेल्फी लिया बिना नहीं चूकते है हमारे प्रधान-मन्त्री जी भी हर एक के साथ सेल्फी खिचवाने में तनिक भी गुरेज नहीं करते है -

सबसे बड़ी बात है आजकल इसका फर्क हमारे फोटोग्राफर पर पड़ा है उनके दिन तो लद गए बेचारे दिन भर दुकानों पे बैठे कस्टमर के आने की बाट जोहते रहते है -वैसे भी क्यों न हो एक ज़माना था जब पासपोर्ट साइज की फोटो खिचवा लो तो बड़ी अकड के साथ फोटो-ग्राफर कहता था तीन-चार दिन बाद आना -अब तो जगह-जगह बोर्ड टंगे है बस दस मिनट में फोटो ले-तकनीक का कमाल है-

वैसे भी लोग तरह-तरह के रिसर्च करते ही रहते है अभी हाल में अमरीका में ओहियो स्टेट युनिवर्सिटी है वहां सेल्फी का रिसर्च किया गया कि कौन सबसे जादा सेल्फी(Selfie) पोस्ट कर रहा है तो देखने में आया है कि जो व्यक्ति सबसे जादा सेल्फी पोस्ट कर रहा है वो साइकोपाथ(आत्ममुग्ध)है  यानि मेरी बात समझ आ गई होगी कि वह मनोरोगी निकला यदि आप अपनी सेल्फी पोस्ट करते है तो माना जा सकता है कि आप भी आत्ममुग्ध है और आत्ममुग्धता एक बीमारी है-

अच्छी सेल्फी(Selfie) के लिए आवश्यकता है एक अच्छे स्मार्ट फोन की और आपके खुबसूरत चेहरे की -अगर आपका चेहरा खुबसूरत नहीं है तो परेशान न हो आज कल प्लास्टिक-सर्जरी का ज़माना है अपना आपरेशन करा कर आप भी इस प्रतियोगिता में भाग ले सकते है आपके थोबड़े का पूरा नवीनीकरण(modernization) किया जा सकता है फिर आप आराम से चाहे जिसके साथ सेल्फी(Selfie) ले -

पाकिस्तान में भी ये क्रेज बढ़ गया है अब तो वहां के पत्रकार भी आतंकवादियों के साथ सेल्फी लेने से भी नहीं हिचकते है और आतंकवादी तो जिसका सर कलम करने वाले होते है सेल्फी के साथ-साथ पूरा वीडियो ही अपलोड करते है -

अमिताभ बच्चन ने अपने ब्लाग में लिखा है कि सेल्फी विधा में अंतरंगता(Intimacy) दिखती है- कहते हैं कि फोटो खींचने की यह चमत्कारिक विधि(Wondrous method) है जिनके साथ सेल्फी ली जाती है उनके संग एक खास तरह की अंतरंगता को दिखाती है- जो सेल्फी लेता है वो काफी संतुष्ट हो जाता है- दिक्कत यह है जब हम सेल्फी को लेकर सीमा पार करने लग जाते हैं अभी हाल में ऐसे कुछ परिणाम सामने आये है-

कुछ दिन पहले मीडिया में खबर थी मुम्बई के तीन स्टूडेंट अपने जन्म-दिन पर झील के किनारे सेल्फी लेने की होड़ में जान गँवा दी वो अच्छी सेल्फी आये इसलिए आगे-और आगे गहरे पानी में चले गए और बाकी दोस्त ये सोचते रहे अभी बाहर आ जाएगा और एक नया केस आगरे का भी टी.वी पर था आगरा के पास रेलवे ट्रैक दौडती ट्रेन के साथ सेल्फी के चक्कर में अपनी जान से हाथ धो बैठे -मेरी सलाह है सेल्फी ले और खूब अपलोड करे बस अपने इस पागलपन में आप अपनी जान न गँवाए -

क्रेज ये आ गया है लोग मुर्दे(dead) के साथ भी सेल्फी(Selfie) लेने लगे है सच विश्वास न हो तो गूगल महराज की शरण में जाके सर्च करे आपको मुर्दे के साथ ली गई सेल्फी मिल जायेगी वैसे ये सेल्फी लेने वाले अपने धुन के बड़े पक्के होते है ट्रेन में चढ़े और दरवाजे पे लटक कर सेल्फी ली और अपलोड कर दी पागलपन की हद तब हो जाती है कल एक जटाजुट धारी अघोरी के साथ किसी को सेल्फी लेते देखा फिर भिखारी के साथ ली और बन्दे ने अपलोड कर दी सोचता हूँ हम भी सोचते है कि इसकी आदत डाल ही ले वर्ना हमारे नाती-पोते ये न कहने लगे कि हम बैकवर्ड क्लास के है-

कल रात जब सेल्फी की पोस्ट देखते देखते मुझे नींद आई तो सपने में देखा लोग पर्यटक स्थल पे कैसी -कैसी सेल्फी ले रहे है एक खुबसूरत लड़की अपने कुत्ते के साथ सेल्फी(Selfie) लेने में मस्त है कोई घोड़े के साथ कोई कार के साथ सेल्फी लेने में लगा है कई लोग अंगेजो के साथ सेल्फी ले रहे है आने वाले समय में लोग जब लोग बाथरूम में भी ली गई सेल्फी फेसबुक पे अपलोड करेगे -और फिर आपको ये कमेन्ट पढने को मिलेगे - "काश हम भी साथ होते ...."

एक व्यंग-है कृपया दिल से न ले -


Upcharऔर प्रयोग-

22 मई 2016

Influenza-इन्फ्लुएंजा मात्र दो दिन में

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वर्षा काल के मौसम में कुछ रोगों का जन्म महामारी का जन्म हर साल होता है बस कभी कभी डॉक्टर लोग उसका नाम अवस्य बदल देते है जैसे आजकल "स्वाइन फ्लू" का लोगो में एक भय बना हुआ है अनेक लोग हर वर्ष इस रोग से काल-कलवित हो जाते है आयुर्वेद में इसे Influenza-इन्फ्लुएंजा को वात श्लैष्मिक ज्वर भी कहा जाता है इस रोग का विभिन्न नुस्खो से चिकित्सा की जाती है-

Influenza-इन्फ्लुएंजा


हम अब जिस नुस्खे का वर्णन कर रहे है वह वातश्लैष्मिक ज्वर(Vata influenza)को मात्र दो दिन में ही ठीक कर सकता है और इसे बनाना भी कोई मुश्किल काम नहीं है आप  इसकी सभी सामग्री आयुर्वेदिक दवा बेचने वाले पंसारी से प्राप्त कर सकते है लोगो को बता कर भी आप लाभावान्तित हो सकते है-

सामग्री-


रस सिंदूर- 80 ग्राम
नीम छाल- 10 ग्राम
चिरायता- 10 ग्राम
श्वेत सरसों- 10 ग्राम
भारंगी- 10 ग्राम
मोथा- 10 ग्राम
बहेड़ा- 10 ग्राम
तेजपात- 10 ग्राम
बच- 10 ग्राम
लाल चन्दन- 10 ग्राम
सुहागे की खील- 10 ग्राम
पिप्पली- 10 ग्राम
कूठ- 10 ग्राम

सारी सामग्री को कूट-पीस-घोट ले आपस में और किसी कांच के शीशी में रख ले -

मात्रा-


125 मिलीग्राम से 250 मिलीग्राम तक शहद या फिर अदरक के स्वरस के साथ दिन में एक से दो बार रोग के अनुसार दे -

आभार-कविराज अत्रि देव गुप्त

Upcharऔर प्रयोग-

Homeopathy-Delays In Walking Legs-पैरों से चलने में विलम्ब

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Delays In Walking Legs

Delays In Walking Legs-पैरों से चलने में विलम्ब-

शासकीय कार्य से एक बार मुझे सेबढा(ग्वालियर) के फोरेस्ट रेंजर श्री नगरिया जी के घर जाना पडा मैंने वहां देखा कि उनका पाँच वर्ष का बालक जमीन पर घिसट कर चल रहा हैँ  तब मैंने पूछा तो उन्होंने बताया कि बहुत इलाज करवा लिया ये पैरों चलता ही नहीं है कभी मेज आदि पकड कर खडा अवश्य हो जाता है-

एक वर्ष की आयु में दाँत निकलते समय अत्याधिक दस्त होने के अतिरिक्त अन्य कोई लक्षण नहीं थे मुझे ये बच्चा बहुत कमजोर और चिडचिडा दिखता था तो मैंने उनसे कहा कि आप मेरे पास किसी को भेजना में उसे दो पुडियां दूँगा जिसे आप इसे आधे -आथे घन्टे से खिला देना तब उन्होंने ऐक आदमी मेरे साथ ही भेज दिया -मैंने उसे 'केल्केरिया कार्ब 1000' की दो पुडियां दे दीं -बच्चे एक पुड़ियाँ तो उसने गिरा दी केवल कुछ गोलियां ही उसके मुंह में जा पाईं थी दूसरी पुडिया उसने खाली थी-

उस समय दिन के करीब ग्यारह बजे थे छह घन्टे बाद लगभग पाँच बजे नगरियाजी दौड़े-दौड़े मेरे घर पहुचे करीब आधा किलोमीटर तेज गति से चलने के कारण उनकी सांस बुरी तरह से फूल रही थी -उनकी यह हालत देख कर मै थोडा चिन्तित हो गया और सोचा कही बच्चे को कुछ हो तो नहीं गया - मेरे पूछने पर उन्होंने जैसे तैसे बताया कि बच्चा चलने लगा -मेरे मन में फिर संशय हुआ कि चलने का मतलब दुनियाँ से जाने का तो नहीँ है -तब तक वे कुछ सामान्य हो गये और बोले जो बच्चा चलता नहीं था वो अब खूब दौड रहा है -ये जान कर मन को शन्ति मिली -होम्योपैथी के इस चमत्कार को जिसने सुना उसी ने नमस्कार किया-

नगरियाजी ने मुझ से पूँछा कि मैंने इसका बहुत इलाज कराया ये नहीं चला और आपकी डेढ पुडियां से यह छह घन्टे में दौड़ने लगा- ऐसा कैसे हुआ -मैंने उनसे कहा कि जेसे किसी मकान में बिजली की फिटिंग पूरी की गई हो,लाइन से कनेक्शन भी हो पर फूयूज उडा हुआ हो तो क्या बस्ती जलेगी -फूयूज जोडते ही उजाला हो जायेगा इसी तरह इसके वेन का कनेक्शन पैरों की चालक नाडियों से ठीक से नहीं जुडा था जो जुडते ही काम करने लगी है -