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28 मई 2016

Liver Swelling-जिगर की सूजन

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आज हम आपको एक होम्योपैथी के चमत्कार की एक सच्ची घटना से आपको अवगत करा रहा हूँ मेरे एक मित्र की पत्नी को तेज बुखार आया जो कि सामान्य दवाइयों से ठीक न हो पाने के कारण उन्हें ग्वालियर कें कमला राजा शासकीय महिला एवं बाल चिकित्सालय में भरती कराना पडा -बुखार की तेज दवाइयां अधिक मात्रा दिये जाने के कारण उन्हें बहुत भारी मात्रा में मासिक घर्म होने लगा जो कि रुकने का नाम ही नहीं ले रहा था -तरह-तरह की दवाइयों और इंजेक्शनों  के कारण उनके लीवर में सूजन आ गई थी-

Liver Swelling

करीब एक माह तक उन्हें वहाँ भरती रखने के बाद उन्हें यह कह कर डिस्वार्ज कर दिया कि इनको लीवर का कैंसर है इनको इलाज के लिए मुम्बई ले जाइये -उस समय सन् 1976 में उन्होंने कहा कि इलाज खर्च के लिये कम से कम पचास हजार रुपये ओर तीन महीने की छुट्टी का इन्तजाम कर लीजिये - वे अपनी पत्नी को लेकर घर आ गये और छुट्टी व खर्च का प्रबन्ध करने लगे-

चूँकि उस समय पचास हजार का इंतजाम कैसे किया जाए और इस बीच में इलाज क्या किया जाय.? 

किसी ने कहा कि किसी होम्योपैथिक डॉक्टर को क्यों नहीं दिखा देते तो अब उन्हें मेरा ध्यान आया -उन्होंने मुझसे पूछा कि तुम्हारी होम्योपैथी में इसका कोई इलाज हे क्या ? 

मैंने कहा है तो अवश्य -उन्होने मुझसे इलाज करने के लिये कहा -उस समय मुरार में मेरा क्लीनिक भी था जहाँ बैठ कर मैं सुबह-शाम जनता की सेवा किया करता था -

केस की पूरी हिस्ट्री तो मुझे मालूम ही थी क्यों कि प्राय: रोज ही मैं उनको लेकर अस्पताल जाया करता था - इलाज शुरू किया - पहिले दिन 'नक्सवोमिका200' की दो खुराकें रात को सोने के पहिले आधा-आधा घंटे से दी और अगले दिन 'लायक्रोपोडियम 1000' की दो खुराकें दी 'चेलीडोनियम' 'कार्डअस मेरीयेनस' 'केरिका पपैया' 'चियोनेन्थस' व 'कोल्वीकम' के मूल अर्को को समान मात्रा में मिला कर 10-10 बूंदें थोडे से पानी में मिला कर दिन मेँ चार बार लेने के लिये दे दीं - इसके अलावा 'नेट्रम सल्फ 6एक्स' की चार गोली थोडे से गुनगुने पानी के साथ लेने के लिये दे दीं - एक सप्ताह में भूख लगने लगी- शरीर का पीला पन कम ही गया व टट्टी-पेशाव का रंग भी सामान्य होने लगा-

यही इलाज चालू रखा गया - दो सप्ताह में वे घर का हल्का-फुत्का काम जैसे बच्चों को स्कूल के लिये तैयार करना,सब्जी आदि काटना आदि करने लगी -अगले एक माह में वे स्वस्थ हो गई-

कुछ समय बाद मेरा तबादला सेवढा हो गया -लगभग 10 साल बाद मुझे एक पत्र मिला -जिसमे कुछ अटपटी सी लिखाई में लिखा गया था-लिखा था दादाजी.. अगर जाप मेरी बेटी की शादी में नहीं आयेगे तो मैं दामाद का मुंह नहीं देखूँगी -मै बडे असमंजस में था कि यह किसका पत्र हो सकता है - फिर ध्यान आया कि अग्रवाल की बेटी की शादी का निमन्त्रण जाया है यह उसी की पत्नी का पत्र होगा - 

समय न होने पर भी आखिरी बस से मैं अग्रवाल के यहाँ ग्वालियर पहुंचा -मैंने उसकी पत्नी से कहा कि आपने ऐसा क्यों लिखा- ये तो बडे सौभाग्य की बात है कि अपनी बेटी को ब्याहने दामाद हमारे दरवाजे पर आ रहे है -मेरी डांट से वह बेचारी रोने लगी उसने कहा दादाजी इन लोगों ने तो मुझे मार ही लिया था आपने ही मुझे बचा लिया - मुझे जो समझ में आया सो मैंने लिख दिया उसकी भावनाओं को समझ कर एक वार फिर होम्योपैथी के चमत्कारों के सामने नत मस्तक हो गया - 

मैंने उससे कहा कि मुझे समय नहीं है इसलिये मैं अभी जनवासे में जाकर दामाद साहब से मिल आता हूँ- जब मेँ जनवासे में पहुंचा तो पता लगा कि बारात डबरा से आई है - लडके को देखा तो समझ गया कि यह तो वही बच्चा है जिसका मैंने दो साल की उम्र में इलाज किया था -

उस समय हुआ यह था कि डबरा के ही एक सेठजी का बच्चा डबल निमोनियाँ से गम्भीर रूप से पीडित था तथा अन्य डोंक्टरों ने जवाब दे दिया था- उस वक्त वे मेरे पास आये और बच्चे को मेरे पैरों के पास जमीन पर रख दिया - मैंने उनसे कहा अरे ! सेठजी ये क्या करते हो - उन्होंने कहा कि हमने तो बच्चे को घरती पर रख दिया है अब आप जाने - 

मैंनें उनसे कहा ठीक है अब ये बच्चा मेरा है - मैं तो अपना बच्चा पालने के लिये आपको दे रहा हूँ- यदि आप पाल सकते हो तो ले लो बरना मैं तो पालूँगा ही -उनके हाँ कहने पर वह बच्चा मैने उनकी गोद में रख दिया -उसे 'एन्टिम टार्ट 30' 'कार्वोवेज30 व 'ब्रायोनिया 30' पर्याय कम से दो-दो घन्टे के अन्तर से दिये गये - टट्टी'-पेशाव में उसका सारा कफ निकल गया -बाद में 'हिपर सल्फ 200' की दो पुडियों ने उसके फेंफडे साफ कर दिये और बच्चा ठीक हो गया था-

जनवासे मैं मुझें आया देख कर वर के पिता व अन्य सब लोग आग्रह करने लगे कि आपको बारात में शामिल होना है - मैंने कहा नहीं, बिलकुल नहीं - मैंने कहा कि मैं कन्या पक्ष से आया हूँ ,मेरे लिये कोई सेवा हो तो बताइये-वे लोग बडे शर्मिन्दा हुए- 

तब मैंने उनसे कहा कि आप मेरे ही बेटे की शादी का रहे हो और मुझे बताया तक नहीं - वे लोग बहुत माफी मांगने लगे - मैंने कहा कोई बात नहीं गलती तो हो ही जाती है - आज मुझे दुगनी खुशी है क्यों कि बेटा भी मेरा ही है और बेटी भी मेरी ही है -प्रसन्नता के उन क्षणों को क्या कभी मैं भुला सकता हूँ क्योंकि ये कोई फ़िल्मी सीन नहीं है - यह एक वास्तविक और सच्ची घटना है और होम्योपैथी का अनुपम चमत्कार है-


संपर्क पता-

KAAYAKALP

Homoeopathic Clinic & Research Centre

23,Mayur Market, Thatipur, Gwalior(M.P.)-474011

Director & Chief Physician:

Dr.Satish Saxena D.H.B.

Regd.N.o.7407 (M.P.)

Mob :  09977423220(फोन करने का समय - दिन में 12 P.M से शाम 6 P.M)(WHATSUP भी  यही नम्बर है)

Dr. Manish Saxena

Mob : -09826392827(फोन करने का समय-सुबह 10A.M से शाम4 P.M.)(WHATSUP भी  यही नम्बर है )

Clinic-Phone - 0751-2344259 (C)

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