Homeopathy-Retinaitis Pigmentosa-रेटीनाइटिस पिग्मेंन्टोसा

Retinaitis Pigmentosa

सेवढा के एक सज्जन दतिया से खाते समय गलत बस में बैठ गये - उनके छोटे भाई ने मुझसे कहा कि मैं बहुत परेशान हूँ मैंने पूंछा क्यों? वह बोला कि बड़े भाई साहब दिखता कम हैं  उनक्रो दृष्टि के क्षेत्र में बीच का भाग तो सही दिखता है पर इधर-उधर का नहीं दिखता - मैंने उसको बताया कि तुम्हारे भाई साहब को रेटीनाइटिस पिग्मेंन्टोसा नाम की बीमारी मालूम पडती है - इसका ऐलोपैथी में कोई इलाज नहीं है केवल होम्योपैथी से कुछ रोक थाम हो सकती है- 


किन्तु रोग के ठीक होने की कोई सम्भावना नहीं है  जितने दिन तक आँखे साथ दे जाय दे जायं - मेरी बात को उन्होंने गम्भीरता से नहीं लिया किन्तु संयोगवश उनके एक भाई जो एम.बी.बी.एस. डॉक्टर थे एक दिन सेवढा आये तो समस्या उनके सामने रखी गई तो उन्होंने भी इसे एक कठिन समस्या बताया और तुरन्त दिल्ली जाकर जाँच कराने को कहा-

उन्होंने दिल्ली जाकर विशेषज्ञों को दिखाया - कलर रेटीनोग्राफी आदि विभिन्न जांचे की गई किन्तु लगभग 20000 रुपये खर्च करने के बाद भी निष्कर्ष वही निकला - दवा के रूप में केवल एक गोली एस्पिरीन की रोज नाश्ते के बाद लेने के लिये कहा गया - अब उनको मेरी बात समझ में आई और मुझसे इलाज करने का आग्रह किया - 

मेने उन्हें 'जिंकम सल्फ1000' की दो खुराक सप्ताह में एक दिन व 'कांस्टीकम 30' व 'जेल्सीमियम 30' प्रति दिन दो बार लेने के लिये कहा - एक बार मैँने उससे पूँछा तुम्हारे भाई साहब का क्या हाल हैं दवा ले रहे हैं कि नहीं उसने कहा कि दवा तो बराबर ले रहे हैं - एक नम्बर की दवा में दो बार लाकर दे चुका हूँ - मैंने कहा कि एक नम्बर की दवा तो इतनी जल्दी खतम नहीं डोनी चाहिये थी - वे दवा किस तरह ले रहे हे - उसने बताया कि एक नम्बर की दवा वे दिन मैं चार बार लेते हैं - दो व तीन नम्बर की दवा सप्ताह में एक एक वार लेते हैं अब तो मेरा माथा ठनका -जबकि मैंने परचे में हिन्दी में स्पष्ट रूप से लिख दिया था कि कौन सी दवा कैसे लेनी है परन्तु उन्होंने 1000 शक्ति दिन में चार बार ली और 30 नम्बर की दवा सप्ताह में एक एक बार ली - 

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उनकी इस लापरवाही से मुझे बहुत दुख हुआ - मैंने तुरन्त उनका इलाज बन्द कर दिया - लेकिन आश्चर्य की बात यह है फि बहुत वषों के बाद भी उन्हें अब भी कुछ-कुछ दीखता है जो एक चमत्कार से कम नहीं है-

इसके पूर्व भी रेटीनाइटिस पिग्मेंन्टोसा के दो तीन केस आये थे किन्तु मरीजों की लापरवाही तथा लम्बे समय तक दवाइयों न लेने और दुर्भाग्य से वे अपनी द्रष्टि खो चुके है- 


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