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29 मई 2016

Homeopathy-Suffering Stomach Injury-पेट में चोट से पीड़ा

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Suffering Stomach Injury

Suffering Stomach Injury-पेट में चोट से पीड़ा-

होम्योपैथी में दवा चुनने का आधार लक्षण या सिम्पटम रखा गया है इस द्रष्टि से देखा जाय तो चिकित्सा का मूल (लक्षण) ही है कमी कभी बडे -बडे महत्वपूर्ण लक्षणों से रोग का अनुमान नहीं हो पाता तो कभी छोटे से नगण्य लक्षण रोगी को स्वस्थ करने में निर्णायक सिद्ध होते हैं एक सफल होम्योपैथिक चिकित्सक वही हे जो लक्षणों के तुलनात्मक महत्व को सही-सही तरीके से निर्धारित कर सके -इसका प्रमाण यहाँ दिये जा रहे केस से आपको मिल जायेगा-

यह केस उस समय का है जब सन 1964 में सीखने के उद्देश्य से मैं डॉक्टर माधोसिंह जी तोमर के मुरार वाले क्लीनिक पर पुडियाँ बाँधा करता था -मिलिट्री के एक जवान के पेट में दर्द रहता था -डाक्टर साहव ने कई अच्छी-अच्छी दवाइयाँ बदल-बदल कर उसे दीं फिर भी लगभग तीन महिने तक माधो सिंह जी का इलाज कराने के बाद भी उसे कोई लाभ नहीं हुआ एक दिन वह रोगी क्लीनिक पर बैठा-बैठा डॉक्टर साहब का इन्तजार कर रहा था -माधोसिंह जी प्राय: देर से आया करते थे - उसने कहा कि कहां तक डाँक्टर साहब का रास्ता देखें -दवा से कुछ फायदा भी तो नहीं होता है अब मैं तो जा रहा दूँ कल से तो मैं आऊँगा ही नहीं - मैंने कहा कि आये हैं तो दवा तो ले ही जाओं -वह वोला दे दो -मैंने पूछा फि कौन सी दवा दे दूँ - डाक्टर साहब देते हैं वही या कुछ और दे दूँ-वह बोला कि कोई भी दे दो कल से तो में आऊँगा ही नही-

मैंने उसका परचा निकाला और लक्षण देखे -मैंने उससे पूछा कि तुम्हे कोई चोट तो नहीं लगी थी- उसने कहा नही -मैंने फिर उससे पूछा कि पहिले कभी लगी हो -वह याद करते हुए बोला कि एक साल पहिले डीज़ल का भरा हुआ ड्रम खिसकाते में उसकी फटकार जरूर पेट में लग गई थी - इसी लक्षण के आधार पर मैंनें उसे 'आर्निका1000' की दो पुडिंयाँ और 'रूटा30' व 'बेलिस पैरेनिस 30' दिन में दो-दो बार लेने के लिये दे दीं- दूसरे दिन सुबह मल के साथ लगभग आधा लिटर जमा हुआ काला खून निकला और उसका दर्द गायब हो गया-

उस दिन शाम को यही पहिला मरीज था - उसने डॉक्टर साहब से कहा कि मेरे पेट का दर्द बन्द हो गया - डॉक्टर साहब ने कहा कि देखो- मैंने कहा था ना कि तुम ठीक हो जाओगे-वह बोला किं आप की दवा से नहीं मै आपके कम्पाउन्डर की दवा से ठीक हुआ हूँ-तब तक मैंने उसका परचा डॉक्टर साहब के सामने रख दिया था -चोट का इतिहास और उसकी दवा देख कर उन्होंने पूछा कि तुम्हारे पेट में चोट लगी थी -उसने कहा, हाँ ,लगी थी- डाक्टर साहब ने उसे डाँटते हुए कहा कि तुमने मुझे क्यों नहीं बताया - वो भी मिलेट्री का आदमी था सो अकडते हुए बोला तुमने मुझ से क्यों नहीं पूछा-डॉक्टर साहब ने उसके हाथ जोडते हुए कहा, श्रीमान तो अब आप पधारिये-अब आप ठीक हो गये हैं- अब आपको किसी दवा की जरूरत नहीं है-

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